बैठें और अनुभव करें कि मैं धरती रूपी Globe के ऊपर कमल आसन पर विराजमान एक श्रेष्ठ योगी हूँ। मैं मनुष्य और प्रकृति का उत्तरदायी संरक्षक हूँ।
अब संकल्प करें कि मुझे प्रकृति को पवित्र Vibration देकर इसे सतोप्रधान बनाना है। ऊपर पवित्रता के सागर से पवित्रता की दिव्य किरणें मुझ पर बरस रही हैं। ऐसा अनुभव करें मानो पवित्रता की मधुर वर्षा निरंतर मुझ पर हो रही है।
अब ये पवित्र किरणें मेरे अंग-अंग से चारों ओर फैल रही हैं। ये प्रकृति के पाँचों तत्वों में समाती जा रही हैं और उन्हें पवित्र व शक्तिशाली बना रही हैं।
अब अनुभव करें कि सर्वशक्तिवान से शक्तियों की दिव्य किरणें मुझ पर पड़ रही हैं और मेरे माध्यम से सम्पूर्ण विश्व तथा प्रकृति में फैल रही हैं।
ओम् शान्ति।
