ले चलें बुद्धि के ऊपर और देखें ज्ञान सूर्य को, चमकती महाज्योति। संसार को बदलने वाले सर्वशक्तिमान, जिनके संकल्प से ही संसार पल भर में बदल सकता है, वो महाज्योति जो हमारा है।
देखें उन्हें, आह्वान करें प्यार से, अपनेपन से, अधिकार से।
हे प्राणेश्वर, मेरे मन के मीत, अपना धाम छोड़कर हमारे पास आ जाओ।
हे प्यार के सागर, आ जाओ हमारे पास और देखें सर्वशक्तिवान ज्ञान सूर्य अपनी रश्मियाँ चारों ओर फैलाते हुए नीचे आ रहे हैं।
आ गए ब्रह्मा बाबा के तन में।
अब दोनों नीचे उतर रहे हैं, अपनी दिव्यता चारों ओर फैलाते हुए आकाश मार्ग से नीचे आ रहे हैं। आगे मेरे सामने, बिल्कुल अपने सामने देखें। अकेले हो जाएँ इस विशाल सभा में। दृष्टि दे रहे हैं। प्यार के सागर ने अपना प्यार भरा हाथ सिर पर रख दिया है और मिटा दी युगों की थकान और दृष्टि देकर गए वापस अपने धाम।
ओम शांति।
