जब तक सूरज, चंदा, नभ में; सागर में जब तक पानी है,
प्यारी दीदी मनमोहिनी की प्यारी अमर कहानी है।
जब तक सूरज, चंदा, नभ में; सागर में जब तक पानी है,
प्यारी दीदी मनमोहिनी की प्यारी अमर कहानी है।
गाती ज़मीं, गाता गगन, गाती हर ज़िंदगानी है।
प्यारी दीदी मनमोहिनी की प्यारी दिव्य कहानी है।
प्यारी दीदी मनमोहिनी की प्यारी दिव्य कहानी है।
मुखिया घर की धनी बेटी पर कभी अहं न आया था।
बाबा की हर श्रीमत को दीदी ने सहज अपनाया था।
महायज्ञ को आगे बढ़ाने का श्रेय आपने पाया था।
दीदी और दादी ने मिलकर मधुबन को महकाया था।
बाबा भी आपको कहते थे, "दीदी गोपी मस्तानी है।"
प्यारी दीदी मनमोहिनी की प्यारी दिव्य कहानी है।
जब तक सूरज, चंदा, नभ में; सागर में जब तक पानी है,
प्यारी दीदी मनमोहिनी की प्यारी अमर कहानी है।
दीदी-दादी पर बाबा ने सेवा का भार डाला था।
दो देह मगर एक जान बन, दोनों ने इसे संभाला था।
दीदी-दादी की जोड़ी को कहते थे दो हंसों का जोड़ा।
क्या सूझबूझ, एकता और मिलन था हजारों वर्षों का।
दीदी-दादी की जोड़ी तो सबको आज भी याद जुबानी है।
प्यारी दीदी मनमोहिनी की प्यारी दिल की कहानी है।
वह युक्ति योग्य प्रशासन था, हर दिल पर आपका शासन था।
सबको सिखलाती अनुशासन, बाबा का हृदय ही आसन था।
योग, पढ़ाई, सेवा—हर क्षेत्र में आप सदा आगे रहीं।
घर-परिवार के संचालन में भी आप सबसे आगे रहीं।
"अब घर जाना" दीदी का मंत्र, प्रभु की वाणी समान है।
प्यारी दीदी मनमोहिनी की प्यारी दिव्य कहानी है।
जब तक सूरज, चंदा, नभ में; सागर में जब तक पानी है,
प्यारी दीदी मनमोहिनी की प्यारी अमर कहानी है।
प्यारी दीदी मनमोहिनी की प्यारी दिव्य कहानी है।
प्यारी दीदी मनमोहिनी की प्यारी दिव्य कहानी है।
