अब अपनी बुद्धि को ऊपर ले चलें और सर्वशक्तिमान, ज्ञान-सूर्य को निहारें। अनुभव करें कि उनकी दिव्य किरणें चारों ओर, दूर-दूर तक फैल रही हैं। उनका आभामंडल छोटा नहीं, बल्कि अत्यंत विशाल है।
अब अधिकार और प्रेम से शिव बाबा से कहें—"हे प्राणेश्वर! अपना धाम छोड़कर हमारी छत्र-छाया बन जाओ।"
अब देखें कि ऊपर सर्वशक्तिमान ज्ञान-सूर्य अपनी तेजस्वी किरणें चारों ओर फैलाते हुए धीरे-धीरे नीचे आ रहे हैं। वे आ गए हैं और मेरे सिर के ऊपर उनकी दिव्य छत्र-छाया है।
अब अनुभव करें कि सर्वशक्तिमान की छत्र-छाया हम सभी के सिर के ऊपर है। मैं उनकी दिव्य छत्र-छाया में पूर्णतः सुरक्षित हूँ। जिसके साथ स्वयं भगवान हैं, उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
अब सर्वशक्तिमान की दिव्य छत्र-छाया और उनकी शक्तियों की किरणों को अनुभव करें। कुछ क्षण इस सुरक्षा और शक्ति की अनुभूति में स्थित रहें। अब बाबा को प्रेमपूर्वक विदाई दें और अनुभव करें कि वे पुनः अपने परमधाम की ओर लौट रहे हैं।
ओम् शान्ति।
