"सेवा भोलेनाथ के जग की
आओ करे चित नाचे
आओ करे चित नाचे
सेवा भोलेनाथ के यज्ञ की
आओ करे चित नाचे
आओ करे चित नाचे
मलते हाथ वो रह जायेंगे
जो आए वक्त गवाके
सेवा भोलेनाथ के यज्ञ की
आओ करे चित नाचे
आओ करे चित नाचे
जन्म जन्म की नेक कमाई
करनेका समय सुनहरा आया
करनेका समय सुनहरा आया
एक कर्म का लाख हजारों
दाता भरने भंडार आया
दाता भरने भंडार आया
कल चक्र ये कहता है
झोली भरलो पुण्य कमाके
मलते हाथ वो रह जायेंगे
जो आए वक्त गवाके
सेवा भोलेनाथ के यज्ञ की
आओ करे चित नाचे
आओ करे चित नाचे
ईश्वर जब संगमयूग पर ये
रुद्र ज्ञान को रचाए
रुद्र ज्ञान को रचाए
कोटो में कोई किस्मतवाला
सेवा में आहुति पाए
सेवा में आहुति पाए
सफल ये सेवा करे उसकी
जो करे देह अभिमान भुलाके
जो करे देह अभिमान भुलाके
मलते हाथ वो रह जायेंगे
जो आए वक्त गवाके
सेवा भोलेनाथ के यज्ञ की
आओ करे चित नाचे
आओ करे चित नाचे
सेवा नही ये मेवा देती
शक्ति खुशी प्रभु की दुवाये
शक्ति खुशी प्रभु की दुवाये
दिल से इसको जो करता वो
भवसागर के पार हो जाए
भवसागर के पार हो जाए
सदा काल उसको रखते
कब नैनो में बिठाते
मलते हाथ वो रह जायेंगे
जो आए वक्त गवाके
सेवा भीलेनाथ के जग की
आओ करे चित नाचे
सेवा भीलेनाथ के यज्ञ की
आओ करे चित नाचे
आओ करे चित नाचे
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