गहन चिंतन में चलें। अनुभव करें कि जो भगवान हैं, जो सर्वशक्तिमान हैं, जो जगत के नियंता हैं, जो भाग्यविधाता हैं—वे मेरे हैं। हूँ। मुझसे चारों ओर रंग-बिरंगी दिव्य किरणें फैल रही हैं।
यह मेरा महान सौभाग्य है कि मुझे भगवान को अपना कहने और अपना बनाने का अधिकार प्राप्त हुआ है।
इस सत्य को अपने अंतर्मन में गहराई से धारण करें। अनुभव करें कि इस संसार में मेरा कोई हो या न हो, स्वयं भगवान तो मेरे हैं। उन पर मेरा स्नेह और अधिकार है। जब भी मैं उन्हें प्रेम से पुकारता हूँ, वे मेरे समीप उपस्थित हो जाते हैं। वे मेरे सदा के साथी और सहायक हैं।
अब अनुभव करें कि मेरे सिर के ऊपर सर्वशक्तिमान की दिव्य छत्र-छाया है। उस पावन छत्र-छाया में मैं पूर्णतः सुरक्षित, संरक्षित और निश्चिंत हूँ। इस दिव्य सुरक्षा और साथ के अनुभव में कुछ क्षण स्थित रहें।
ओम् शान्ति।
