विश्व मंच पर आये शिवरूद्र यज्ञ रचाये
ब्रह्मांड का वो मालिक
देखो नूर है छलकाये
विधाता हैं वो दाता वरदान दे रहा
सर्व शक्तियोंसे कल्याण करते कल्याणकारी
विश्व मंच पर आये शिवरूद्र यज्ञ रचाये
ब्रह्मांड का वो मालिक
देखो नूर है छलकाये
अरावली के शिखर से उदित हुआ ज्ञान का सूरज
प्रेम के वो फूल खिलाये
दिखा रहा है वो अचरज
स्नेह सिंधू है वो बिंदु
रोशनी का हैं दरिया
सुख का संसार भरा
सब के लिये ले आया
गुंज रहा विश्व सारा
ये संदेश प्यारा प्यारा
आनंदमय ये संसार
विधाता हैं वो दाता वरदान दे रहा
सर्व शक्तियोंसे कल्याण करते कल्याणकारी
विश्व मंच पर आये शिवरूद्र यज्ञ रचाये
ब्रह्मांड का वो मालिक
देखो नूर है छलकाये
तपस्या के तपोवन मे
राजयोग सिखा रहे हैं
तप की अग्नि से सबका पापभस्म करवा रहे हैं
पी रहे अमृत महक उठा हैं जीवन
धन्य धन्य हो गये
कह रहा है ये मन
सब सुख का मंत्र दे रहे हैं शिव
यही है वो एक स्थान
विधाता हैं वो दाता वरदान दे रहा
सर्व शक्तियोंसे कल्याण करते कल्याणकारी
विश्व मंच पर आये शिवरूद्र यज्ञ रचाये
ब्रह्मांड का वो मालिक
देखो नूर है छलकाये
विधाता हैं वो दाता वरदान दे रहा
सर्व शक्तियोंसे कल्याण करते कल्याणकारी
विश्व मंच पर आये शिवरूद्र यज्ञ रचाये
ब्रह्मांड का वो मालिक
देखो नूर है छलकाये
