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15 Nov 2011
“अभी बातों को न देख तीव्र पुरुषार्थ कर ब्रह्मा बाप समान सम्पन्न और सम्पूर्ण बनो, निर्विघ्न और एवररेडी रह 108 की माला तैयार करो”
15 November 2011 · हिंदी
आज सर्वशक्तिवान बाप अपने मास्टर सर्वशक्तिवान बच्चों को सर्व शक्तियों का खजाना देने आये हैं। सर्वशक्तियों का खजाना कितना सहज प्राप्त होता है। एक सेकण्ड में जाना मेरा बाबा, बाबा ने कहा मेरे बच्चे, इतने में ही खजानों के मालिक बन गये। तो हर एक बच्चे के पास सर्व खजाने सदा साथ हैं ना! नशा है जो बाप का खजाना वह मेरा खजाना। अभी चेक करो बाप ने तो हर बच्चे को सर्व खजाने दिये हैं, एक भी कम नहीं लेकिन वह सर्व खजाने हर एक के पास सदा साथ हैं वा कोई कोई खजाना है और कोई खजाना कम है? बापदादा ने तो दिये लेकिन हर एक के पास सर्व खजाने सदा ही हैं और सर्व खजाने समय पर कार्य में लाते रहते हो? मालिक होके आर्डर करो तो समय पर खजाना अनुभव में आता है? बापदादा ने चारों ओर के बच्चों के सेवा का उमंग देखा भी, सुना भी। चारों ओर अच्छे उमंग उत्साह से यह 75 वर्ष की जयन्ती मना रहे हैं, चैलेन्ज कर रहे हैं, अब परिवर्तन हुआ कि हुआ। चैलेन्ज बहुत अच्छी कर रहे हैं। बापदादा बच्चों के उमंग उत्साह को देख-देख खुश होते हैं और गीत क्या गाते? वाह बच्चे वाह! साथ-साथ बापदादा ने देखा चैलेन्ज तो बहुत अच्छी कर रहे हैं उमंग उत्साह से, लेकिन साथ में बच्चों की स्वयं में सर्व धारणाओं का सफलता का स्वरूप भी देखा। आप सब भी अपने सम्पन्न और सफलता का स्वरूप जानते हैं क्योंकि सारे निमित्त बने हुए बच्चे सदा सम्पन्न और सफलतामूर्त बन गये हैं कि बनना है? क्योंकि सुखमय संसार का आधार स्वरूप आप बच्चे हो। तो बापदादा ने सर्व बच्चों की रिजल्ट देखी। जो आप आधारमूर्त हो, सिर्फ थोड़े से बच्चे नहीं, सर्व बच्चों का चैलेन्ज है कि हम सुखमय संसार लाने के निमित्त हैं।
तो बापदादा सभी बच्चों से पूछते हैं कि सुखमय संसार लाने के निमित्त बने हुए बच्चे सम्पूर्ण सम्पन्न आधारमूर्त बन गये हैं? जो बापदादा की बच्चों में आशा है हर बच्चा सफलतामूर्त हो, क्योंकि आप लोगों ने बाप के साथी बन संकल्प किया है और बड़े खुशी से चैलेन्ज की है, परिवर्तन हुआ कि हुआ। तो अपने से पूछो विश्व परिवर्तन के निमित्त बच्चे स्व सम्पन्न और सम्पूर्ण कहाँ तक बने हैं? क्योंकि राज्य स्थापन होना है तो पहले राज्य के निमित्त बनी हुई आत्मायें निमित्त बनेंगी उसके बाद दूसरे निमित्त बन सकते हैं। तो बापदादा ने देखा कि अब सम्पूर्ण बनने में कुछ मार्जिन रही हुई है। सेवा तो की लेकिन सेवा की रिजल्ट में आपके साथी कितने बने? हिसाब निकालो कि जो सुनते हैं वह समीप कितने आते हैं? बापदादा बच्चों की हिम्मत पर खुश है लेकिन अभी सर्विस की रिजल्ट में और तीव्रता लानी है। हर समय आत्माओं को इतना समीप सम्बन्ध में लाओ, खुश बहुत होते हैं अभी ब्रह्माकुमारियों के कर्तव्य को जानने में बहुत नजदीक आये हैं लेकिन बापदादा ने पहले भी कहा वर्सा आत्माओं को बाप द्वारा मिलना है, तो बाप को जानें, समय को जानें, स्वमान को जानें तब वर्से के अधिकारी बनें। अभी बाप आया है, बाप वर्सा दे रहा है, यह बुद्धि में आये तब वर्सा लेके राज्य अधिकारी बनें।
चारों ओर यह आवाज फैले जो गीत गाते हो हमारा बाबा आ गया। अब बापदादा यह रिजल्ट देखने चाहते हैं। परिवर्तन हुआ है, सर्विस का लाभ हुआ है, मेहनत का फल मिला है लेकिन अभी बाप तक नहीं पहुंचे हैं, इसका कोई प्लैन बनाओ। बाप की प्रत्यक्षता कैसे हो? राजधानी में राज्य करने वाले भी निर्विघ्न बने हैं? अब परिवर्तन का बटन ड्रामा दबाये, एवररेडी? एवररेडी हैं? बटन दबायें? क्या समझते हैं, बटन दबायें? एवररेडी हैं? क्योंकि सब तैयार चाहिए, राज्य अधिकारी भी, रॉयल फैमिली भी, रॉयल प्रजा भी और साधारण प्रजा तो कोई बड़ी बात नहीं। तो बापदादा आज बच्चों से रिजल्ट पूछते हैं। क्या समझते हो? बापदादा को बटन दबाने में तो देरी नहीं लगेगी। तो पहली लाइन क्या समझती है? शक्तियां क्या समझती हैं? पाण्डव क्या समझते हैं? जवाब दो। हाँ पाण्डव जवाब दो। दबायें बटन? एवररेडी हैं? (बाबा आप मालिक हैं, आपको संकल्प आता है कि दबायें तो दबा दीजिये) बापदादा बच्चों से पूछते हैं क्यों? क्योंकि बाप को तो राज्य में आना नहीं है। ब्रह्मा बाप को आना है। (यहाँ बापदादा से मिलते रहें, यह बहुत अच्छा लगता है) यह बात तो अच्छी है लेकिन बाप समान बनके बाप के साथ जीवन का अनुभव करें यह भी चाहिए ना। वह है? तैयार हैं? सिर्फ आप नहीं, राजधानी है। आप राज्य किस पर करेंगे? राजधानी तो चाहिए ना! (सभी साथी हैं) सब तैयार हैं? (बिल्कुल तैयार हैं) सम्पन्न बनने में तैयार हैं? अच्छा सभी सोच रहे हैं, कोई बात नहीं।
बापदादा जानते हैं कि अभी तक रेडी हैं एवररेडी बनना पड़े। जो बापदादा ने दो बातें कही थी कि सेकण्ड में फुलस्टॉप लगाने वाले बच्चे चाहिए। व्यर्थ संकल्पों का नाम निशान न रहे। जिसको भी सन्देश देते हो वह सन्देश सुन परिवर्तन करने के उमंग उत्साह में आ जाएं। अब बापदादा यह रिजल्ट चाहते हैं। इसके लिए बापदादा बच्चों को राय देते हैं, आज्ञा भी करते हैं, कि सेवा करते हो लेकिन जिनकी भी सेवा करते हो, एक ही समय पर तीन रूपों और तीन रीति से सेवा करो। तीन रूप नॉलेजफुल, पावरफुल और लवफुल, इन तीनों रूपों से सेवा करो और तीनों रीति से सेवा करो, वह तीन रीति है मन्सा-वाचा-कर्मणा एक ही समय, सिर्फ वाणी से सेवा नहीं लेकिन वाणी के साथ मन्सा सेवा भी साथ-साथ हो। पावरफुल माइन्ड हो। तो अभी आवश्यकता एक ही समय मन्सा पावरफुल हो, जिससे आत्माओं की भी मन्सा परिवर्तन हो जाए। वाणी द्वारा सारी नॉलेज स्पष्ट हो जाए और कर्मणा द्वारा, कर्म द्वारा सेवा से वह आत्मायें अनुभव करें कि सचमुच हम अपने परिवार में पहुंच गये हैं। परिवार की फीलिंग आने से नजदीक के साथी बन जायें। तो बापदादा अभी एक ही समय तीन रूप की सेवा इकट्ठी चाहते हैं। हो सकता है? हो सकता है? हाथ उठाओ, हो सकता है? अभी बापदादा ने रिजल्ट में देखा वाणी द्वारा नॉलेजफुल बनते हैं लेकिन परिवार के साथी बनें, इसमें अभी टाइम लगता है। तो बापदादा ने देखा कि समय की चैलेन्ज के साथ अभी सेवा में ऐसी सेवा करो जो एक ही समय तीनों सेवा द्वारा प्राप्ति का अनुभव करें।
तो सभी मिलने के लिए उमंग-उत्साह से पहुंच गये हैं, तो बापदादा बच्चों का उमंग देख खुश है। अभी अटेन्शन देना है, सम्पन्न और सम्पूर्ण बनने में क्योंकि कम से कम 108 की माला तैयार कर सको, कर सकते हो? 108 की माला तैयार है? तैयार है? क्योंकि राजधानी में राज्य अधिकारी तो वही बनेंगे ना। तो 108 रत्नों की लिस्ट अभी निकाल सकते हो? हाँ जी नहीं कहते हैं? 108 राज्य अधिकारी, फिर 16 हजार 108 राज्य अधिकारी के साथी। फिर उसके बाद है नम्बरवार। तो बापदादा अभी समय प्रमाण, समय को समीप लाने वाले बच्चों से यही चाहते हैं कि 108 की माला एवररेडी हो, बाप समान हो। तो पहली लाइन 108 नाम निकाल सकती है? हाँ या ना करो ना! साकार में जब ब्रह्मा बाप थे तो कई बार ट्रायल की लेकिन फाइनल नहीं हो सकी, लेकिन अब तो 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं, तो इस 75 वर्ष की जुबली में कोई तो नवीनता करेंगे ना! तो नवीनता यही करो जो हर एक अपने को 108 की माला के मणके बनाये, जो गिनती में आये हाँ 108 की माला तो बन गई क्योंकि जब पहले राज्य अधिकारी बनें तब तो पीछे राज्य के सम्पर्क वाले बनें। उनको भी तो जगह चाहिए ना! तो बापदादा का कहने का यही सार है कि अभी हर एक को अपना तीव्र पुरुषार्थ कर और दृढ़ संकल्प करना है कि मुझे बाप समान बनना ही है क्योंकि बापदादा ने सुना दिया है कि अचानक परिवर्तन होना है। उसके पहले कम से कम जो सेवा के निमित्त बने हुए हैं, ज़ोन हेड्स साथ में सेन्टर इन्चार्ज, साथ में उनके नजदीक के साथी पाण्डव, वह सेन्टर हेड नहीं बनते लेकिन कोई न कोई विशेष कार्य के निमित्त बने हुए जिनको सब विशेष आत्मा की नज़र से देखते हैं, उन पाण्डवों को भी अभी तीव्र पुरुषार्थ कर स्व परिवर्तन की झलक बाहर स्टेज पर लानी पड़ेगी, इसके लिए एवररेडी हैं? जो समझते हैं कि यह कार्य तो करना ही है, अपने को बाप समान, ब्रह्मा बाप समान फालो फादर करना ही है, करना है तो हाथ उठाओ। हाथ तो इतने उठाते हैं खुश कर देते हैं। अच्छा करते हैं। लेकिन हाथ के साथ दृढ़ संकल्प भी करो। दृढ़ता की शक्ति बहुत सहयोग देती है।
तो बापदादा खुश है, हाथ उठाने में होशियार सभी हैं लेकिन अभी दृढ़ता को प्रैक्टिकल में लायेंगे। होशियार हैं ना बच्चे, दृढ़ता करते भी हैं लेकिन फिर दृढ़ता भिन्न-भिन्न रूप में बदल जाती है, यह हो गया, यह हो गया। यह नहीं होता तो वह नहीं होता। इस बहाने में बहुत होशियार हैं। तो अभी बापदादा क्या चाहते हैं? अभी हरेक को बाप समान बनना है, मन्सा वाचा कर्मणा, सम्बन्ध सम्पर्क में आपको जो भी देखे, जो भी मिले वह यही कहे वाह परिवर्तन वाह! बापदादा को भी अच्छा लगता है जो बच्चे निमित्त बने हुए हैं उनको देखकरके भी खुशी होती है और मिलन में भी बहुत खुशी होती है।
तो आज क्या संकल्प किया? बनना ही है। ब्रह्मा बाप समान बनना ही है। बनना है नहीं, बनना ही है। कोई भी बातें आयें, बात के बजाए बाप को आगे रखो। तो सभी दूर बैठे हुए बच्चे, नजदीक सामने बैठे हुए बच्चे दोनों को बापदादा देख-देख हर्षित हो रहे हैं। सभी बच्चे प्लैन बहुत अच्छा बनाते हैं, अमृतवेले सब बहुत मीठी मीठी बातें करते हैं। मैजारिटी इतनी मीठी बातें करते हैं जो बाप भी बातें सुन कुर्बान हो जाते हैं। लेकिन पता है फिर क्या होता? जब कर्म के क्षेत्र में आते हैं, सम्बन्ध में आते हैं, सेवा में आते हैं, तो जो बातें आती हैं उसमें थोड़ा थोड़ा बदल जाते हैं। अमृतवेले का जो उमंग उत्साह है वह कर्म करते, सम्बन्ध में आते थोड़ा थोड़ा बदल जाता है।
अभी बापदादा एक कार्य देते हैं, करने के लिए तैयार हो ना! कांध हिलाओ। हाथ उठाओ। बापदादा का संकल्प है कि एक मास के लिए अपने को दृढ़ संकल्प के आधार से बाप समान स्थिति में स्थित कर सकते हो? एक मास, कर सकते हैं कि ज्यादा है? जो समझते हैं एक मास दृढ़ता से, दृढ़ता को साथी बनाना बाप को सदा सामने रखना, ब्रह्मा बाप को नयनों में समाये रखना और ब्रह्मा बाप ने क्या किया, मन्सा वाचा कर्मणा वही करना है। चाहे कोई ने प्रैक्टिकल में देखा या नहीं देखा लेकिन नॉलेज तो है ना! कोई भी कर्म करने के पहले यह चेक करना कि ब्रह्मा बाप का यह संकल्प रहा, यह बोल रहा, यह कर्म रहा, यह संबंध रहा, यह सम्पर्क रहा? पहले सोचो पीछे करो। हो सकता है? इसमें हाथ उठाओ। हो सकता है तो लम्बा हाथ उठाओ। मातायें यहाँ एक्सरसाइज़ करती हो ना तो हाथ लम्बा उठाओ। आगे वाले भी उठायेंगे ना? सब मधुबन वाले इसमें नम्बरवन आना। आगे आगे मधुबन वाले बैठे हैं ना। मधुबन में सिर्फ शान्तिवन नहीं, जो भी हैं एक मास निर्विघ्न, हर सेन्टर भी निर्विघ्न, गुजरात की टीचर्स हाथ उठाओ। गुजरात की टीचर्स समझती हैं हो सकता है, इसमें लम्बा हाथ उठाओ। ऐसे ऐसे नहीं करो लम्बा उठाओ। हो सकता है? अच्छा। शान्तिवन निवासी हाथ उठाओ, थोड़े हैं। जो भी बैठे हैं, पीछे भी बैठे हैं। तो मधुबन के 4-5 स्थान जो भी हैं वह करेंगे? करेंगे हाथ उठाओ? मधुबन वाले दो हाथ उठाओ। गुजरात वाले जिज्ञासु भी, निमित्त टीचर्स भी, निमित्त भाई भी सभी हाथ उठाओ, करेंगे। बड़ा हाथ उठाओ। पीछे वालों का हाथ दिखाई नहीं देता है, अच्छा, गुजरात वाले खड़े हो जाओ। गुजरात तो बहुत आया है। आधा हॉल तो गुजरात है। (गुजरात 15 हजार है, बाकी 3 हजार हैं) गुजरात वालों को बापदादा और परिवार की तरफ से बहुत-बहुत मुबारक है, मुबारक है। जैसे अभी तालियां बजाई ना, वैसे ही एक मास के बाद रिजल्ट में गुजरात नम्बरवन आयेगा! अच्छा है। संख्या तो बहुत अच्छी है। बापदादा खुश होते हैं कि बच्चों को बाप से और मधुबन से दिल का प्यार है। बहुत अच्छा है, अभी गुजरात कमाल करके दिखाना। इस एक मास की रिजल्ट में नम्बरवन आके दिखाना। वैसे नम्बरवन सबको आना है। मधुबन वाले नम्बरवन आयेंगे ना, हाथ उठाओ। कुछ भी हो जाए, क्या भी परिस्थिति हो जाए, परिस्थिति आयेगी, माया सुन रही है ना, तो माया अपना रूप तो दिखायेगी लेकिन माया का काम है आना और आपका काम है विजय पाना। यह नहीं कहना, यह हो गया, वह हो गया, यह नहीं करना। आयेगा, होगा, यह तो बापदादा पहले ही सुना देता है क्योंकि माया सुन रही है, वह बहुत चतुर है लेकिन आप, माया कितनी भी चतुर हो आप तो सर्वशक्तिवान के साथी हो, माया क्या करेगी। बापदादा देख रहे हैं, टी.वी. में देख रहे हैं तो सभी नम्बरवन लाना। कोई टू नम्बर नहीं बनना, वन नम्बर। अच्छा।
सेवा का टर्न गुजरात का है:- तो गुजरात वाले जैसे समीप हैं ना, सबसे समीप कौन है? गुजरात ही समीप है। तो यही पुरुषार्थ का लक्ष्य रखना कि हमें राज्य के अधिकारी, परिवार के नजदीक आना ही है। पुरुषार्थ क्या है? बाप को फालो करो। और दृढ़ता को नहीं भूलना। जहाँ दृढ़ता है वहाँ सफलता है ही है। तो गुजरात तो बापदादा को भी प्यारा लगता है। एक विशेषता के कारण बापदादा को प्यारा लगता है, कभी भी किसी समय भी बुलाओ, आवश्यकता हो तो गुजरात हाज़िर हो जाता है। नजदीक का फायदा उठाते हैं। ऐसे ही सदा बाप को फालो करने वाले नजदीक रहना। जो बाप ने किया वह करते रहना। फालो फादर। अच्छा।
चार विंग्स आई हैं:- (समाज सेवा, महिला, प्रशासक और यूथ) जो भी वर्ग हैं उनकी रिजल्ट बापदादा के पास आती हैं और बापदादा ने देखा है कि जबसे वर्गीकरण के रूप की सेवा आरम्भ हुई है तो चारों ओर सेवा वृद्धि को प्राप्त हुई है क्योंकि बापदादा ने देखा है कि हर वर्ग यह सदा सोचता है कि हमारे वर्ग में कोई नवीनता होनी चाहिए, जो समाचार सबको मिलता रहे इसलिए जिम्मेवारी होने के कारण और हर एक को अलग-अलग वर्ग होने के कारण सर्विस का चांस अच्छा मिला है। तो बापदादा हर एक का नाम नहीं लेता लेकिन चारों ही वर्ग को कह रहे हैं, कि सेवा हो रही है, अच्छी कर रहे हो और जिम्मेवारी भी अपनी समझते हो लेकिन बापदादा ने पहले भी कहा है कि हर वर्ग में जो विशेष आत्मायें निकली हैं क्योंकि हर वर्ग की निकली हैं, यह बापदादा जानते हैं लेकिन उन्हों का एक बारी संगठन करो। हर ज़ोन में जो कोई विशेष आत्मायें निकली हो, उनमें से चुनके एक बारी सभी वर्गों के विशेष 10-15-20 हर एक वर्ग के ऐसे चुनो और उन्हों का यहाँ आबू में प्रोग्राम करो। तो नज़र में आवे सर्विस की रिजल्ट क्या है और वह भी संगठन देख करके उमंग उत्साह में आयें। इस वर्ग से यह आ रहे हैं, यह आ रहे हैं, एक दो को देख करके भी उमंग में आवे, तो यह अभी प्रोग्राम बनाना। सबके 15-20 हो, उनके लिए ऐसे कार्यक्रम रखो और उन्हों को इकट्ठा करो। यह ठीक लगता है? क्योंकि बापदादा उन्हों को अभी अनुभव के आधार से स्पीकर बनाने चाहता है। आप जो भाषण करो, उसके साथ ऐसी अनुभवी आत्मायें अनुभव सुनायें तो प्रभाव पड़ता है। तो अभी यह सेवा करना और हर एक वर्ग से जो अच्छी-अच्छी निमित्त आत्मायें निकली हैं, उन्हें क्या फायदा हुआ है, उनके अनुभवों का किताब छपाया है? जिसने छपाया है वह हाथ उठाओ। अपने अपने वर्ग के अच्छे-अच्छे अनुभवी, उनके अनुभवों का किताब छपाया है तो वह हाथ उठाओ। कोई ने नहीं छपाया है? (यूथ और एज्यूकेशन का छपा है) सभी का छपना चाहिए क्योंकि कोई भी आते हैं तो लाइब्रेरी में ऐसे ऐसे किताब होने चाहिए जो कोई भी फ्री होके पढ़े और हर वर्ग का पढ़ने से प्रभाव पड़ता है, कई समझते हैं कि कर्म करते हुए, ड्यूटी सम्भालते हुए कुछ हो नहीं सकता है, तो उन्हों को उमंग उत्साह आवे तो जब यह बने हैं तो हम भी बन सकते हैं। तो ऐसा किताब निकालो और अपने अपने जो भी सेन्टर्स हैं वहाँ सब जगह में जहाँ लाइब्रेरी हो वहाँ रखो। तो यह काम करना, बाकी समाज सेवा की जो मीटिंग की थी उसका समाचार बापदादा ने सुना है, सन्देशी ने पढ़ा है, बापदादा ने सुना है। और युवा वर्ग का भी समाचार सुना, जो निकाला वह बापदादा ने सुना और अच्छा है, कोई न कोई प्रोग्राम एक दो के पीछे करते चलो। हर एक वर्ग को करना चाहिए। युवा करता है, एज्यूकेशन भी करते हैं, और बाकी करते होंगे लेकिन यह कुछ ज्यादा करते हैं। समाज सेवा वालों का समाचार बच्ची ने पढ़कर सुनाया, प्लैन जो सोचा है वह बहुत अच्छा। तो बापदादा को वर्गों की सेवा अच्छी लगती है इसलिए करते चलो। कोई भी वर्ग ऐसा नहीं रह जाए जो आपको उल्हना देवे, हम तक तो सन्देश ही नहीं पहुंचा। आप लोग सोचो कोई वर्ग ऐसा रह गया हो तो उस वर्ग की सेवा भी करनी चाहिए क्योंकि आजकल अपने कामों में, समस्याओं में ज्यादा बिजी होते जाते हैं। तो जगाना तो पड़ेगा ना। बाप आया और बच्चों को पता भी नहीं पड़े, तो यह तो उल्हना मिलेगा ना इसलिए सन्देश देना आपका काम है, उल्हना नहीं मिले, अपने मोहल्ले में भी, ऐसे नहीं सुनते नहीं हैं, सन्देश जरूर सबको पहुंचना चाहिए। कोई उल्हना नहीं दे। आप लोगों को पता है पहले-पहले जब बच्चे सेवा में गये, तो ब्रह्माकुमारियों की सफेद साड़ियां देख करके वह दरवाजा बन्द कर देते थे, दूर से ही दरवाजा बन्द कर देते थे, सफेद साड़ी गृहस्थियों को अच्छी नहीं लगती, इसलिए बच्चों ने सेवा कैसे शुरू की? उनके पोस्ट बाक्स में डाल आते थे। क्योंकि पोस्ट तो निकालेंगे, तो पोस्ट से सन्देश मिल जाता था। पहले पहले जब सर्विस आरम्भ हई थी तो बहुत मेहनत से शुरू हुई, अभी तो बहुत अच्छा, सहज है। अभी तो समझते हैं कि ब्रह्माकुमारियों जैसा प्रोग्राम अच्छी तरह से कोई नहीं कर सकते हैं। अभी काफी फर्क हो गया है। आप लोगों ने ही किया है ना। वर्गों ने, मोहल्लों में जगह जगह पर किया है, तो बापदादा सभी वर्गों को पदम पदम गुणा मुबारक दे रहे हैं। और तेज करो। सभी वर्ग वालों को बहुत-बहुत मुबारक हो।
(मधुबन में प्लेटिनम जुबली में 325 सन्त महामण्डलेश्वर आये, उनका सम्मेलन बहुत अच्छा हुआ, नेपाल, कानपुर, लखनऊ में भी बहुत अच्छे प्रोग्राम हुए) नेपाल में भी बापदादा ने देखा कि इतनभ् भावना वाले हैं जो बहिनों को देखकरके छोड़ते ही नहीं हैं। अभी इतना प्रभाव है। अभी बापदादा ने देखा बच्चों ने, चाहे नेपाल है, चाहे विदेश है चाहे देश है, सभी जगह के निमित्त सेवाधारियों ने सेवा का फैलाव अच्छा किया है, कोई भी जगह पर सेवा कम नहीं है, सेवा विस्तार में आ गई है। काफी सेवा का विस्तार हुआ है उसके लिए बापदादा देश विदेश सभी को बहुत बहुत बधाई दे रहे हैं। लेकिन विशेष बाप जैसे तीव्र पुरुषार्थी बच्चों की संख्या देखने चाहते हैं, उसके ऊपर थोड़ा सा टीचर्स या निमित्त बनी हुई साथी बहनें, थोड़ा अटेन्शन देंगी तो वह वृद्धि होनी चाहिए। हर एक सेन्टर पर ऐसे निकले हैं, लेकिन जितने निकलने चाहिए उतने अभी नहीं हैं। एक सेवा में विशेष पुरुषार्थी निकलने चाहिए और दूसरा सेन्टर्स अभी निर्विघ्न होने चाहिए। पहले बापदादा अपना संकल्प सुनावे, पहले मधुबन चाहे नीचे, चाहे ऊपर निर्विघ्न बनना चाहिए। जनक, मधुबन वालों का क्लास कराना। जनक को बापदादा कह रहे हैं, मधुबन के चार ही स्थान वाले इकट्ठे करो और एक मास का जो बापदादा ने हाथ उठवाया है वह और पक्का कराओ। जो भी दिल में हैं, वह निकालें। निकालते कम हैं, दिल में रखते हैं। मधुबन ऐसे होना चाहिए जैसे दर्पण में सब फरिश्ते दिखाई दें। आप तैयार करना फिर बापदादा मधुबन वालों की रिजल्ट देखने आयेंगे क्योंकि मधुबन का वायब्रेशन ऐसे पावरफुल होना चाहिए जो जो भी वी.आई.पी आते हैं या साधारण आते हैं, ऐसे लगे जैसे कहाँ पहुंच गये हैं! ऐसा तो कहाँ देखा नहीं। एकदम वातावरण में अलौकिकता, न्यारापन हो। ऐसे ही सब सेन्टर, ज़ोन वाले अभी तक एक ने भी यह रिजल्ट नहीं दी है कि हमारा ज़ोन निर्विघ्न है। बापदादा ने कहा था लेकिन अभी तक एक भी ज़ोन ने समाचार नहीं दिया है क्योंकि बापदादा देख रहे हैं कि समय की गति फास्ट हो रही है। तो बच्चों के पुरुषार्थ की गति भी फास्ट होना चाहिए। अच्छा।
(मधुबन के सन्त सम्मेलन का समाचार बापदादा को सुनाया गया)
अभी जिस-जिस सेन्टर से आये, उसकी पीठ हो रही है? कनेक्शन रखा है। हर एक सेन्टर में वह कनेक्शन में आयें? क्योंकि सेन्टर वाले भी उनको कनेक्शन में लावें। अच्छा किया।
कैड ग्रुप:- अच्छा है, इन सभी ने इलाज करके अपने को ठीक किया है। जिन्होंने इलाज द्वारा दिल को ठीक किया है वह हाथ उठाओ। कितने हैं, गिनती करो। (150) अच्छा है। प्रैक्टिकल है ना। तो प्रैक्टिकल देखकर अच्छा लगता है। तो औरों को भी सन्देश देके आप समान बनाते रहो क्योंकि आजकल तो हार्ट की तकलीफ बहुत है। तो अपने अड़ोसी पड़ोसियों को अपना अनुभव सुनाओ। अच्छा मुबारक हो। दवाइयों से छूट गये, मुक्ति मिल गई और जीवनमुक्ति भी मिल गई। डबल प्राप्ति हो गई इसकी मुबारक हो, मुबारक हो। अच्छा। अच्छी सर्विस की है, प्रैक्टिकल एक्जैम्पुल है तो सर्विस की रिजल्ट है।
325 डबल विदेशी भाई बहिनें आये हैं:- (वजीहा बहन से) यह बच्ची भी आ गई है, कमाल है पैदा होते ही बहुत स्नेही सहयोगी सर्विसएबुल बनी। तकलीफ हुई है पास्ट जन्म के कारण लेकिन बापदादा बच्ची को सेवा और सहयोग और निर्माण का सर्टिफिकेट देते हैं।
बापदादा को विदेशियों की एक बात बहुत अच्छी लगती है। यह डबल भाग्य एक बारी में बना देते हैं। अपनी मीटिंग्स भी कर देते हैं, बापदादा से भी मिल लेते हैं और आगे देश की सेवा में भी साथी बन जाते हैं। यह तरीका जो बनाया है ना, यह बापदादा को बहुत अच्छा लगता है क्योंकि कहाँ भी इतने इकट्ठे हो नहीं सकते जितने मधुबन में इकट्ठे होते हैं। टर्न बाई टर्न भी आते हैं लेकिन जो भी लेन देन करनी है वह मधुबन के वायुमण्डल में करते हैं, हर साल करते हैं। यह विधि बापदादा को पसन्द है और परिवार से मिल लेते हैं। बहुत अच्छा है, विदेश में अभी बापदादा ने देखा है कि जो बापदादा ने कहा कि आसपास कोई छोटे स्थान भी नहीं रहने चाहिए, तो बापदादा ने रिजल्ट में देखा कि अभी छोटे छोटे स्थानों में भी आसपास वृद्धि हो रही है इसलिए बापदादा सेवा की मुबारक दे रहे हैं और निर्विघ्न बनने की जो आपस में रूहरिहान करते हैं वह भी अच्छी है, अभी सिर्फ जयन्ती बच्ची को काम है कि हर मास हर सेन्टर की रिजल्ट पूछती रहे, जो मधुबन से रिफ्रेशमेंट ली वह कायम है या कोई पेपर है? भले किसको साथी बना दे। करते रहते हैं। एक एक सेन्टर का करना, ऐसे नहीं जहाँ कुछ होता हो, वह नहीं, लेकिन जहाँ नहीं होता है उन्हों से भी क्योंकि दूर रहते हैं ना। बापदादा ने देखा अटेन्शन है लेकिन और भी थोड़ा बढ़ा देना। अच्छा, सभी फारेनर्स उड़ता पंछी सदृश्य उड़ते रहते हैं? फरिश्ता, फरिश्ता बनके इस दुनिया में रहते हुए भी फरिश्ता लोक में उड़ते रहते हैं! पुरुषार्थ में नम्बरवन हैं लेकिन अटेन्शन खींचने से परिवर्तन हो जाता है। वृद्धि भी अच्छी हो रही है, पुरुषार्थ में भी अटेन्शन देते हैं फिर थोड़ा थोड़ा हो भी जाता है तो बाप ने देखा है कि जनक बच्ची का अटेन्शन फारेन के तरफ अच्छा रहता है, मधुबन में रहते भी फारेन की सेवा में कमी नहीं करती है। इसके लिए मुबारक हो। आप हर एक अपने ज़ोन में भी करना, जैसे यह (दादी जानकी) यहाँ रहते विदेश में कर सकती है, वैसे हर एक ज़ोन इन्चार्ज अपने ज़ोन की इतनी सम्भाल करते रहें, हर एक सेन्टर का रिकार्ड पूछते रहने से पता पड़ेगा कि कैसे हैं, कम से कम हर मास में एक दो बारी जो जोन हैं उसको अपने सेवाकेन्द्रों का पता करना चाहिए, चाहे अपने साथी बना दो। एक दो नहीं कर सकेंगे लेकिन अपने साथी बना दो, वह साथी आपको रिपोर्ट देवे। अभी समय नाजुक आ रहा है ना इसलिए अटेन्शन थोड़ा ज्यादा चाहिए। अच्छा। फारेन वालों को बापदादा दिल से मुबारक और पुरुषार्थ में चढ़ती कला की मुबारक दे रहे हैं। अच्छा।
अभी बापदादा दूर वालों को भी सामने देख रहे हैं और बापदादा एक तो सर्व बच्चों को यह 75 वर्ष के जुबली की, पुरुषार्थ कर इस जुबली तक पहुंचे हैं इसकी बहुत बहुत मुबारक दे रहे हैं। हर एक का इसमें सहयोग है, चाहे पीछे आये हैं, चाहे आगे आये हैं लेकिन सबके सहयोग से यहाँ तक पहुंचे हैं और बापदादा जगह जगह के प्रोग्राम की सफलता देख, सेवा के सफलता की भी मुबारक दे रहे हैं। बापदादा अभी सभी बच्चों को एक ही श्रेष्ठ संकल्प सुनाने चाहते हैं कि अभी स्वयं भी निर्विघ्न रहो और अपने साथियों को, सम्बन्ध में आने वालों को भी निर्विघ्न बनाओ। समय को समीप लाओ। दु:ख और अशान्ति बापदादा बच्चों का देख नहीं सकता। अभी अपना राज्य जल्दी से जल्दी धरनी पर लाओ। बापदादा को हर बच्चा प्यारा है, लास्ट नम्बर बच्चा जो है वह भी प्यारा है क्योंकि कमजोर है ना। तो कमजोर पर और ही रहम ज्यादा आता है। आप सभी भी कैसी भी स्थिति वाला, स्वभाव वाला हो लेकिन हमारा है, जैसे बाप हमारा है, वैसे परिवार हमारा है, तो उसके स्वभाव संस्कार न देख उनको और ही सहयोग दो, सद्भावना दो, शुभ भावना दो। अच्छा सामने वाले बच्चों को या दूर बैठे देखने वाले बच्चों को बापदादा एक एक बच्चे को अपने सामने देख दृष्टि भी दे रहे हैं और मुबारक भी दे रहे हैं। अच्छा।
आप सभी को तो बहुत मुबारक मिल गई। सभी की मुबारक आपको भी मिली ना। अच्छा।
नीलू बहन ने बापदादा को नेपाल का समाचार सुनाया:- एक एक को मुबारक देना। सेवा अच्छी कर रहे हैं। लगन से कर रहे हैं, उसका फल तो निकलेगा ना।
मोहिनी बहन से:- अपने को चलाना आ गया? (सीढ़ी नहीं चढ़ सकती हूँ) पैदल ज्यादा करो। अगर पैदल कर सकती हो तो पैदल करने से टांगों में ताकत आयेगी। थोड़ी थोड़ी सीढ़ी चढ़के देखो। पैदल करके फिर तीन चार सीढ़ी चढ़ो तो फर्क आ जायेगा।
रूकमणि दादी से:- आदि रत्नों में हो, तीव्र पुरुषार्थ है, बहुत अच्छा। दिल्ली तो सबके दिल में हैं क्योंकि सबको राज्य तो वहाँ ही आके करना है। तो दिल्ली को ऐसा करो जो निर्विघ्न, कोई विघ्न नहीं, ऐसा बनाओ। सब मिल करके आपस में ऐसा प्रोग्राम बनाओ जो कोई भी बात हो, उसी समय खत्म। अच्छा।
दादी जानकी से:- (बाबा आप बहुत अच्छी अच्छी बातें सुनाते हैं) सुनायें नहीं तो सम्पन्न कैसे बनें। अभी तो बापदादा चाहते हैं जल्दी जल्दी सम्पन्न बनें।
(दादी जानकी अभी मधुबन में बैठकर सेवा करेंगी) यह रह भी नहीं सकती है। कुछ समय एक जगह भले रहे, चक्र भी लगाये, रहे भी। कुछ टाइम रहने दो।
परदादी से:- देखो, इसकी कमाल है भले आयु बढ़ती जाती है, बीमारी भी है लेकिन शक्ल नहीं बदलती है। शक्ल में सयानापन है। अच्छी है।
डा.निर्मला बहन से:- दोनों तरफ अच्छा सम्भालती है। जैसे यह सम्भालती है वैसे आप (दादी जानकी) भी सम्भालती हो।
तीनों भाईयों से: अभी जैसे दादियों के ऊपर अटेन्शन है, ऐसे आप तीनों पाण्डवों के ऊपर भी अटेन्शन है। तो कोई न कोई मिलने का प्रोग्राम कहाँ भी हो, फोन पर भी मीटिंग कर सकते हो। जैसे विदेश वाले करते हैं ना। तो आप भी समझो हम जिम्मेवार हैं। कोई भी बात हो, मीटिंग फोन में भी करके फैसला दो। टाइम नहीं लगे। जल्दी जल्दी करेंगे ना तो निर्विघ्न होता जायेगा। ठीक है। (रमेश भाई से) तबियत ठीक है? अच्छा है, जिम्मेवारी का ताज बापदादा और परिवार ने दिया है। कर भी रहे हो लेकिन थोड़ा जल्दी-जल्दी आपस में मिलकर विचारों की लेन देन करो। जब यहाँ आते हो तब बैठते हो ना। वहाँ भी फोन से कर सकते हो। फारेन वाले करते हैं ना। मतलब कोई भी समस्या हो उसको जल्दी सुलझाओ। लम्बा नहीं करो। यह आवे तो करें, नहीं, करके पूरा करो।
(दादी जानकी जी अभी मधुबन में रहें तो सब यहाँ आयेंगे, विदेश में भले जाये) यहाँ भी कहाँ कहाँ आवश्यकता होती है, यहाँ भी आवश्यकता तो है।
आशा बहन से:- दिल्ली ठीक है ना! क्योंकि दिल्ली में सभी को राज्य में आना है तो दिल्ली को तो पावरफुल बनाना है। (ओ.आर.सी में प्रेजीडेंट आई थी, उनका एलबम बापदादा को दिखा रहे हैं)
अच्छा - ओम् शान्ति।