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28 Mar 2022
"स्व-परिवर्तन की गति को तीव्र कर संस्कार-स्वभाव के समाप्ति का मारोह मनाओ, हर संकल्प, बोल और कर्म में ब्रह्मा बाप को कापी करो'"
28 March 2022 · हिंदी
28-03-2022 मधुबन अव्यक्त बापदादा ओम् शान्ति 28-03-2022
प्राणप्यारे अव्यक्त मूर्त मात-पिता बापदादा के अति स्नेही, स्व-परिवर्तन की गति को तीव्र कर पुराने संस्कार स्वभाव के समाप्ति का समारोह मनाने वाले, हर संकल्प, बोल और कर्म में ब्रह्मा बाप को कापी करने वाली निमित्त टीचर्स बहिनें तथा देश विदेश के सर्व ब्राह्मण कुल भूषण भाई बहिनें, ईश्वरीय स्नेह सम्पन्न मधुर याद स्वीकार करना जी।
बाद समाचार - हम सबकी अति स्नेही, देश विदेश के सर्व बच्चों के दिलों पर राज्य करने वाली मीठी दादी जानकी जी का दूसरा पुण्य स्मृति दिवस 27 मार्च 2022 को सभी ने बड़े स्नेह और श्रद्धा के साथ मनाया। दादी जी के दिल में सदा सन्त महात्माओं के प्रति बहुत स्नेह की भावना रही है। दादी जी के दिल में ऐसी पवित्र आत्माओं की सेवा के प्रति कई प्लैन्स चलते, दादी जी उन्हें मधुबन में भी बहुत प्यार से आमंत्रित करती रही। इसी शुभ भावना से दादी जी के दूसरे पुण्य स्मृति दिवस पर सन्तों के लिए विशेष दो दिवसीय संत समागम का कार्यक्रम “गीता ज्ञानामृत द्वारा स्वर्णिम भारत का निर्माण'' विषय पर रखा गया। इस कार्यक्रम में भारत के विभिन्न स्थानों से करीब 60 संत महात्मायें, मण्डलेश्वर आदि ने भाग लिया।
25 मार्च को हम सबकी अति स्नेही दादी रतनमोहिनी जी का 98 बर्थ डे भी सन्तों की उपस्थिति में बहुत धूमधाम से मनाया गया, जिसमें वरिष्ठ भाई बहिनों के साथ कुछ सन्तों ने भी अपनी शुभ कामनायें दादी जी को दी। 98 बहनों ने विशेष सिर पर अमृत कलष रखकर सुन्दर शोभा यात्रा निकाली तथा कर्नाटक की निमित्त बहिनों ने दादी जी का सुन्दर श्रृंगार किया और अपनी शुभ भावनायें व्यक्त की।
27 तारीख को देश विदेश के आये हुए बी.के. परिवार ने, तत्पश्चात सन्तों ने दादी जी को विशेष “शक्ति स्तम्भ'' पर उपस्थित रह भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। सवेरे और शाम को क्लासेज़ में विशेष विदेश के भाई बहिनों ने दादी जी के अंग-संग के अनुभव सुनाये। दोपहर को दादी जी के निमित्त विशेष आदरणीय मोहिनी बहन जी ने बापदादा को भोग स्वीकार कराया। सन्देश आपके पास अलग से भेज रहे हैं।
यह सीज़न का लास्ट टर्न कर्नाटक ज़ोन का है। कर्नाटक तथा देश विदेश के अनेकानेक भाई बहिनें बाबा के घर में पहुंचे हुए हैं। सभी खूब रिफ्रेश हो रहे हैं। अच्छा - सभी को याद... ओम् शान्ति।
28-3-22 ओम् शान्ति ‘अव्यक्त-महावाक्य' रिवाइज 15-11-10 मधुबन'
आज बापदादा सभी के मस्तक पर तीन भाग्य की चमकती हुई निशानियां देख रहे हैं। एक है बाप द्वारा पालना का भाग्य, दूसरा है शिक्षक रूप में शिक्षा का भाग्य, तीसरा है सतगुरू द्वारा वरदानों का भाग्य। तीनों भाग्य चमकता हुआ देख रहे हैं। हर एक का मस्तक तीनों भाग्य से चमक रहा है। ऐसा भाग्य और कोई के मस्तक में चमकता हुआ दिखाई नहीं देता है। लेकिन आप सबका मस्तक भाग्य से चमक रहा है। आप सभी भी अपने भाग्य को देख रहे हो ना! बापदादा ने देखा भाग्य तो सबको मिला है लेकिन भाग्य की चमक सभी की एक जैसी नहीं है। कोई की चमक बहुत तेज है, कोई की चमक थोड़ी कम दिखाई देती है। वैसे बापदादा ने सभी को एक साथ एक जैसा ही भाग्य दिया है। पढ़ाई एक ही पढ़ाते हैं। पालना एक जैसी दी है और वरदान भी एक जैसे दिये हैं। आदि रत्न वा पीछे आने वाले सभी को एक ही मुरली द्वारा पालना मिलती है, पढ़ाई मिलती है। वरदान भी एक ही सभी को मिलते हैं। आदि रत्नों की मुरली अलग नहीं होती, एक ही होती है। लेकिन नम्बरवार चमकता हुआ भाग्य दिखाई दे रहा है। बाप के प्यार की पालना सभी को एक जैसी मिल रही है। हर एक के मुख से यही निकलता “मेरा बाबा'', चाहे आगे आने वाले, चाहे पीछे आने वाले लेकिन हर एक अपने अधिकार से कहते “मेरा बाबा''। किसी से भी पूछो बाप से प्यार मिला है? तो फलक से कहते मेरे को बाप का प्यार सबसे ज्यादा मिलता है। यह मेरा बाबा दिल से कहने वाले क्या फलक से कहते हैं? कि मेरा प्यार सबसे ज्यादा है। बाबा का प्यार पहले मेरे से है क्योंकि प्यार ही बाप की पालना है। इस मेरा बाबा मानने से आप बाबा के बन गये और बाप आपका बन गया।
आज आप सभी आये हो तो प्यार के प्लेन में आये हो ना। प्यार ने खींच के सभी को यहाँ लाया है। सभी प्यार से आराम से पहुंच गये। यह परमात्म प्यार सिर्फ अभी संगम पर प्राप्त होता है। देव आत्माओं का प्यार प्राप्त होता है लेकिन परमात्म प्यार इस एक जन्म में प्राप्त होता है। तो बापदादा भी ऐसे पात्र आत्माओं को देख क्या कहते हैं? वाह बच्चे वाह! आप ही कोटों में कोई पात्र बने हैं और हर कल्प आप ही पात्र बनेंगे। ऐसा नशा चलते फिरते रहता है ना! आपकी दिल भी यह गीत गाती है वाह मेरा भाग्य! यह गीत गाते रहते हो ना! बाप को भी खुशी होती है कि यह सभी बच्चे अधिकारी हैं। अपने को कोई भी परमात्म प्यार में कम नहीं समझते। प्यार में सब पास हैं। बापदादा पूछते हैं कि सबसे ज्यादा प्यार किसका है? तो कौन कहेंगे? सब जानते हैं कि हमारा प्यार कम नहीं है, बाप भी कहते हैं कि प्यार की सबजेक्ट में सभी पास हैं तब मेरा बाबा कहते हैं। कितना प्यार है, वह हर एक जानता है। तो बापदादा ने देखा कि प्यार में तो सब पास हैं लेकिन अभी समय के प्रमाण स्व परिवर्तन, उसकी भी आवश्यकता है। सिर्फ स्व परिवर्तन, विशेष सुनाया भी था कि इस समय स्व परिवर्तन में विशेष संस्कार परिवर्तन, स्वभाव परिवर्तन, उसकी आवश्यकता है। करते भी हो, अटेन्शन भी है लेकिन गति अभी फास्ट चाहिए। बापदादा को याद है पहले भी बाप से वायदा किया कि नये वर्ष में स्व परिवर्तन, संस्कार परिवर्तन करना ही है लेकिन बापदादा ने देखा कि संस्कार परिवर्तन में जितना फास्ट पुरुषार्थ चाहिए, उसकी गति और फास्ट चाहिए। आप सभी क्या समझते हो कि समय प्रमाण जितनी फास्ट गति चाहिए उस अनुसार हर एक का तीव्र पुरुषार्थ है या और होना चाहिए? क्योंकि समय अनुसार, समय में परिवर्तन फास्ट हो रहा है तो आपका भी तीव्र परिवर्तन तब होगा जो संकल्प किया और हुआ, अयथार्थ संकल्प ऐसा समाप्त होना चाहिए जैसे कोई कागज पर बिन्दी लगाओ। कितने में लगेगी? अयथार्थ अर्थात् फालतू संकल्प, इतना फास्ट परिवर्तन होना चाहिए। क्या ऐसी गति जो बापदादा चाहते हैं यह कर सकते हो? है हिम्मत? जो समझते हैं कि अब से इतनी रफ्तार से बिन्दी लगा सकते हैं, हिम्मते बच्चे मददे बाप, वह हाथ उठाओ। बापदादा बच्चों का दृढ़ संकल्प देख मुबारक देते हैं। बापदादा ने पहले भी सुनाया है कि दृढ़ संकल्प के संकल्प हैं - करना ही है। तो आज की सभा में सभी ने यह दृढ़ संकल्प किया है ना! आपने देखा, दादियों ने देखा, सभी ने, मैजारिटी ने हाथ उठाया। देखा! तो कल से स्वभाव संस्कार समाप्ति की सेरीमनी मनानी चाहिए। मनायें? जिन्होंने हाथ उठाया वह हाथ उठाओ, सेरीमनी मनायें? इसकी सेरीमनी तो बहुत धूमधाम से मनाना। जैसे लक्ष्य हिम्मत का रखा है वैसे लक्षण भी हिम्मत का रखेंगे तो कोई बड़ी बात नहीं है। जब लक्ष्य ही है बाप समान बनने का तो अभी लक्ष्य और लक्षण एक करना है। फालो ब्रह्मा बाप। जो भी संकल्प, बोल, कर्म करो पहले ब्रह्मा बाप से मिलाओ। कॉपी करो। दुनिया में कॉपी करना मना है, लेकिन बापदादा कहते हैं ब्रह्मा बाप को कॉपी करो। निराकार बाप के लिए तो कहेंगे उसको देह नहीं, तो देहभान क्या है! लेकिन ब्रह्मा बाप देहधारी रहे हैं।
तो आपको निमित्त बनना पड़ेगा। जैसे ब्रह्मा बाप के आगे कितने संस्कार वाले पहले-पहले आये, आदि में ब्रह्मा बाप ने कितने संस्कारों का खेल देखा। लेकिन बाप के सहयोग से आगे बढ़ते औरों को भी बढ़ाते रहे, जिसकी रिजल्ट आज कितनी संख्या हो गई है। हिलाने वाली बातें आते भी अचल रहे। उसका परिणाम कितने सेन्टर खुले, कितने प्रोग्राम हो रहे हैं।
आजकल कितने प्रोग्राम हो रहे हैं? हुए हैं ना! यह सारी रिजल्ट ब्रह्मा बाप की हिम्मत, पहले अकेला ब्रह्मा बाप था, आप पीछे आये हो लेकिन अकेला हिम्मत रख आगे बढ़ा। रिजल्ट में प्रैक्टिकल प्रमाण आप सब साथी हो। तो है ना हिम्मत! ब्रह्मा बाप ने अकेला हिम्मत रखी, आप तो बहुत साथी हैं। तो फालो फादर। सभी अपने को ब्रह्मा बाप के बच्चे, साथी बच्चे समझते हो ना, साथ हैं साथ चलेंगे और ब्रह्मा बाप के साथ राज्य में आयेंगे। तो अभी समय है, जैसे ब्रह्मा बाप ने हिम्मत रखी, रिजल्ट देख रहे हो तो इतने संगठन में हिम्मत का पांव रखो तो क्या नहीं हो सकता है! कल्प कल्प हुआ है, होना ही है।
तो अभी बाप क्या चाहता है, वह सुनाया। सिर्फ आप सभी एक बात करो, वह एक बात है साधारण पुरुषार्थ को तीव्र पुरुषार्थ में परिवर्तन करो। बापदादा ने देखा कि कहाँ कहाँ अलबेलापन आता है, हो ही जाना है, विजय तो हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है, ऐसे ज्ञान के हिसाब से निश्चित है लेकिन अलबेलेपन में भी यही शब्द आते हैं हमारी विजय तो है ही, हुई पड़ी है। कोई काम रुका नहीं है, होना ही है। एक है पुरुषार्थ के यह शब्द, दूसरे अलबेलेपन के भी यही शब्द हैं। कोई काम रुकना नहीं है, होना ही है.. तो यह अलबेलापन है, यह भी संस्कार चेक करना। अलबेलेपन की निशानी है कि उनके जीवन में छोटी-छोटी बातों में थकावट दिखाई देगी। शक्ल में वह खुशी की झलक नहीं दिखाई देगी, सेवा से पुण्य बन रहा है, तो चेहरे पर खुशी होनी चाहिए। किसी न किसी प्रकार की थकावट का कारण कोई न कोई बात का अलबेलापन है। जब करना ही है तो खुशी से करो। चेहरा आपकी सेवा करे, चलन आपकी सेवा करे। तो आज मैजारिटी का संस्कार समाप्ति का हाथ देख बापदादा बार-बार मुबारक दे रहा है। अच्छा।
चारों ओर के ब्राह्मण बच्चों को बापदादा का स्नेह भरा यादप्यार स्वीकार हो, बापदादा जानते हैं दूर बैठे भी कई बच्चे देख भी रहे हैं, मिलन भी मना रहे हैं, उन चारों ओर के बच्चों को बापदादा यही कहते जैसे अभी सभी मैजारटी ने हाथ उठाया, संस्कार समाप्त, अभी आप सभी भी मिलकर एक ही संकल्प रूपी हाथ उठा ही रहे हो कि हम सब मिलकर समाप्ति के समय को समीप लाने के लिए यह संकल्प कर रहे हैं और चारों ओर सम्पूर्ण समय होने पर ब्रह्मा बाप शिव बाप दोनों को प्रत्यक्ष करेंगे कि हमारा बाप आ गया। सबके मुख पर बाप की प्रत्यक्षता हो जाए, अभी इस वर्ष में यही दृढ़ संकल्प रखो कि बाप को प्रत्यक्ष करना ही है। आधा काम तो किया है, बच्चों को बाप ने विश्व के आगे प्रत्यक्ष किया है, अभी बच्चों का कार्य है भगवान आ गया, यह आवाज विश्व के एक एक बच्चे तक पहुंचे। तो सभी को बापदादा देख हर एक को दिल का स्नेह, दिल का प्यार, दिल के उमंग उत्साह सहित यादप्यार दे रहे हैं। अच्छा।
सेवा का टर्न कर्नाटक ज़ोन का है:- सेवा का चांस लेना अर्थात् बाप के समीप आने का चांस मिलना। देखो, सेवा के कारण कितने लोगों को आने का चांस मिलता है। सबकी दुआयें आप निमित्त टीचर्स को मिलती हैं क्योंकि सेवा की हिम्मत रखी और चांस इतनों को मिला।
कर्नाटक की वृद्धि अच्छी है, अभी जैसे वृद्धि हुई है वैसे तीव्र पुरुषार्थ की विधि उसकी भी चारों ओर लहर फैलाओ। नम्बर ले लो। संस्कार समाप्ति का नम्बर ले लो। ले सकते हो? जो समझते हैं हम पहला नम्बर ले सकते हैं, वह हाथ उठाओ। अच्छा है। ऐसा आपस में संगठन करके प्रोग्राम बनाओ, सब एक हैं। भिन्न-भिन्न स्थान हैं लेकिन हैं एक। यह कमाल करके दिखाओ। अच्छा, बहुत-बहुत विशेष यादप्यार।
डबल विदेशी:- बापदादा को अच्छा लगता है, हर ग्रुप में विदेशी भी आते ही हैं। अभी सभी परमात्म कलचर के हो गये हैं। फारेन कलचर नहीं, परमात्म कलचर वाले। सहज हो गये हैं। अच्छा लगता है बेहद का बाप, बेहद का संगठन हो जाता है। तो बाप को भी खुशी है कि जगह जगह से सभी अपने बेहद के घर में पहुंच जाते हैं। अच्छी रिजल्ट है और आगे भी अच्छी रिजल्ट होनी ही है। निश्चित है, इसलिए आने की मुबारक हो, मुबारक हो। अच्छा।