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21 Mar 2025
“ पूर्वज और पूज्य के स्वमान में रह मन्सा द्वारा सर्व की पालना करो , पूरे वृक्ष को सकाश दो ''
21 March 2025 · हिंदी
मधुबन अव्यक्त बापदादा ओम् शान्ति 21-03-2025
प्राणप्यारे अव्यक्त मूर्त मात-पिता बापदादा के अति स्नेही, सदा अपने पूर्वज और पूज्यपन के स्वमान में रह पूरे वृक्ष को सर्व शक्तियों की सकाश देने वाले, सर्व के शुभ चिंतक निमित्त टीचर्स बहिनें तथा देश विदेश के सर्व ब्राह्मण कुल भूषण भाई बहिनें, ईश्वरीय स्नेह सम्पन्न मधुर याद स्वीकार करना जी।
बाद समाचार - प्यारे मीठे बापदादा की सीज़न का यह लास्ट टर्न है, ईस्टर्न तथा नेपाल ज़ोन के अनेकानेक बाबा के बच्चे अपने मधुबन घर में आकर सेवायें करते हुए अपनी झोली ज्ञान रत्नों से तथा अनेक वरदानों से भरपूर कर रहे हैं। डबल विदेशी बच्चों की भी लास्ट टर्न में बहुत अच्छी रिमझिम है।
प्यारे बापदादा अभी हम सबका ध्यान विशेष मन्सा सेवा पर खिंचवा रहे हैं। बाबा कहे बच्चे, अभी अपने पूर्वज और पूज्यपन के स्वमान में रह, शक्तिशाली मन्सा द्वारा पूरे वृक्ष को सकाश दो, सबकी पालना करो। जैसे बापदादा हम बच्चों की भिन्न-भिन्न शक्तियों से पालना कर रहे हैं, वैसे अभी हम सबका कार्य है सारे वृक्ष के टाल टालियों और पत्तों की पालना करना क्योंकि वर्तमान समय चारों ओर की सभी आत्मायें दु:खी हो अपने-अपने देवी देवताओं को पुकार रही हैं, आओ हमारी रक्षा करो, हमें शान्ति दो, शक्ति दो। ओ क्षमा के सागर पूर्वज हमें पालना दो। तो आप बच्चे उनकी पुकार सुनो, उपकार करो। समय निकाल विशेष अपनी शक्तिशाली मन्सा द्वारा सर्व शक्तियों का दान दो। साथ-साथ अभी रिटर्न जरनी का समय है तो विशेष अटेन्शन देकर स्वयं को कोई न कोई सेवा में बिजी रखो। सेवा करते स्वयं, साथी और वायुमण्डल सबमें सन्तुष्टता के वायब्रेशन हों। अभी परचिंतन, परदर्शन, परमत... यह पर के पंख काट दो, परोपकारी बनो, सबके प्रति शुभ भावना शुभ कामना रखो।
ऐसी अनेकानेक मधुर शिक्षायें इस लास्ट टर्न में प्यारे बापदादा ने होमवर्क के रूप में दी हैं, जरूर आने वाली अगली सीज़न तक बापदादा की इन सभी शिक्षाओं को ध्यान पर रखते हुए बापदादा की इस अलौकिक पालना का रिटर्न करेंगे।
अच्छा - सभी को बहुत-बहुत याद.... ओम् शान्ति।
21-3-25 ओम् शान्ति “अव्यक्त-बापदादा'' रिवाइज-वीडियो 31-3-10 मधुबन
आज बापदादा अपने चारों ओर के पूर्वज और पूज्य आत्माओं को देख रहे हैं। पूर्वज आत्मायें अपने को समझते हो ना। पूज्य आत्माओं का निवास कहाँ है? अपने झाड़ को सामने लाओ, उसमें देखो आपका स्थान कहाँ है? जानते हो कि आप पूर्वजों का स्थान जड़ में है। झाड़ के जड़ में भी है, तना में भी है। तो जड़ के द्वारा ही सारे वृक्ष को पालना मिलती है। तो आप इस सारे वृक्ष के टाल टालियां वा पत्तों की पालना करने वाले, सकाश देने वाले पूर्वज हो। पूर्वज के साथ पूज्य भी हो। तना द्वारा लास्ट पत्ते को भी सकाश मिलती है। तो अपने को सारे वृक्ष को सकाश देने वाले अनुभव करते हो? नशा रहता है कि हम पूर्वज सर्व आत्माओं रूपी टाल टालियां या पत्तों को सकाश दे रहे हैं! जैसे ब्रह्मा बाप को ग्रेट ग्रेट ग्रैण्ड फादर कहते हैं तो उनके आप साथी बच्चे भी मास्टर ग्रेट ग्रेट ग्रैण्ड फादर हो। सारे वृक्ष के आत्माओं की आप पूर्वज आत्माओं की तरफ आकर्षण है। आप पूर्वज आत्मायें उन्हों की पालना शक्तियों द्वारा करते हो। जैसे आप सभी पूर्वज आत्माओं की पालना बाप ने की तो बाप ने कैसे की? शक्तियों द्वारा। वैसे आप भी पूर्वज के नाते से शक्तियों द्वारा उन्हों की पालना करने वाले हो। आजकल देखते हो कि सभी आत्मायें दु:खी हैं, पुकार रही हैं, अपने-अपने देवी देवताओं को, आओ हमारी रक्षा करो, हमें शान्ति दो, हमें शक्ति दो। ओ क्षमा के सागर पूर्वज हमें पालना दो। तो यह आवाज आप पूर्वज आत्माओं के कानों में सुनाई दे रहा है? अनुभव करते हो कि हम ही पूर्वज हैं? सारे वृक्ष में देखो जो अन्य धर्म वाली आत्मायें भी हैं तो वृक्ष में टाल टालियां होने के कारण वह भी आपको उसी नज़र से देखते हैं। उन्हों के भी पूर्वज आप ही हो। कोई भी धर्म वाली आत्माओं से आप जब मिलते हो तो यह समझते हो कि यह भी हमारे ही वृक्ष की टाल टालियां हैं! वह भी जब आपसे मिलते हैं तो समझते हैं कि यह अपने हैं! अपनेपन का अनुभव उन आत्माओं को भी हो रहा है और होना है। तो इतना नशा, इतना अन्दर से आप लोगों के पास रहम आता है? वह चिल्ला रहे हैं रहम करो.. तो अभी समय अनुसार आप सभी पूर्वज आत्माओं को मन्सा द्वारा शक्तियों की पालना करनी है। उन्हों को आवश्यकता है। तो जितना आप अपने पूर्वज के नशे में रहेंगे उतना ही आप द्वारा उन्हों की पालना होगी। वैसे भी देखो किसी की भी पालना लौकिक में भी बड़ों से होती है। वही उन्हों के शरीर के खाने पीने, पढ़ाई जो सोर्स आफ इनकम है, उनका प्रबन्ध करते हैं। तो जैसे बाप ने आप सभी बच्चों की भिन्न-भिन्न शक्तियों से पालना की है वैसे अभी आपका कार्य है सारे वृक्ष के टाल टालियों और पत्तों की पालना करना। ऐसा उमंग आप पूर्वज आत्माओं को आता है? नशा है? पूज्य भी हो। देखो, सारे ड्रामा में जितनी आप आत्माओं की कायदे प्रमाण पूजा होती है उतनी पूजा कोई भी महात्मा, धर्म पिता की नहीं होती। आपकी पूजा नियम प्रमाण आरती होना, भोग लगना, ऐसी किसकी भी नहीं होती। गायन देखो आपका कायदे प्रमाण कीर्तन होता है। किसी का भी ऐसे गायन नहीं होता। तो आप पूर्वज के साथ पूज्य भी हो। ड्रामा में आप जैसा पूजन और गायन किसी का भी नहीं है।
तो बापदादा ऐसी आप पूज्य और पूर्वज आत्माओं को देख कितना खुश होते हैं! बाप के दिल से बार-बार यह गीत बजता वाह मेरे सर्व वृक्ष के पूर्वज और पूज्य आत्मायें वाह! तो आजकल बापदादा आप सभी बच्चों को जो आपका स्वमान है, बाप समान सम्पन्न सम्पूर्ण बनने का, वही रूप देखने चाहते हैं। उसके लिए एक बात बच्चों को ध्यान में रखनी है, बापदादा ने देखा कि सभी बच्चे पुरुषार्थ बहुत अच्छा भी करते हैं लेकिन सदा शब्द हर एक को अपने पुरुषार्थ में एड करना है। अटेन्शन देना है। बापदादा बच्चों से पूछते हैं कि जैसे बापदादा आप सभी बच्चों को श्रेष्ठ स्वमानधारी आत्मा के रूप से देखते हैं, वैसे आप अपने को भी ऐसे स्वमानधारी समझते हो? तो बापदादा ने देखा जवाब में क्या कहते? रहते तो हैं, लक्ष्य तो यही है, हाथ भी उठाते हैं, फिर धीरे से कहते कभी-कभी हो जाता है। तो बापदादा अभी कभी-कभी शब्द को समाप्त करने चाहते हैं क्योंकि समय समाप्त होने के समीप आ रहा है। और लाने वाले कौन? बच्चे बाप से पूछते हैं बाबा आप टाइम बता दो, 20 वर्ष हैं, 16 वर्ष हैं, 10 वर्ष हैं, कितना है? और बाप फिर बच्चों से प्रश्न पूछते हैं कि समय को समीप लाने वाले कौन हैं? अकेला बाप लायेगा? बाप ने स्थापना की, अकेला किया? यज्ञ रचा, बिना ब्राह्मणों के यज्ञ रचा? बाप बच्चों के साथ है। बच्चे भी कहते हैं बाबा हम अभी भी आपके साथ हैं, चलेंगे भी आपके साथ। तो बाप बच्चों से पूछते हैं कि समय को समीप लाने वाले बच्चे आप ही डेट फिक्स करो। किसको डेट फिक्स करनी है? बाप को या बाप के साथ आप और बाप दोनों को?
तो आज इस वर्ष के मिलन का लास्ट है। तो बापदादा ने देखा कि बच्चे भी चाहते हैं कि हम भी अभी अपने राज्य में चलें। “अब घर जाना है''। यह भी गीत मन में गाते रहते हैं - अब घर जाना है, अब रिटर्न जरनी करनी है। इसके लिए बापदादा ने पहले ही कहा कि सारा समय अपने को कोई न कोई सेवा में बिजी रखो। तो अभी अटेन्शन प्लीज़। कभी कभी नहीं। क्या होता है? सेवा तो करते हैं लेकिन सेवा में साथ-साथ अपने में और साथियों में सन्तुष्टता क्योंकि सेवा का फल है सन्तुष्टता वा खुशी। तो चेक करो सेवा तो की लेकिन पहले भी सुनाया कि सेवा की खुशी तब होती है जब स्वयं साथी और वायुमण्डल जब सभी सन्तुष्टता के वायब्रेशन में हो। सेवा की सफलता है - सन्तुष्टता का फल प्राप्त होना। खुशी प्राप्त हो। साथ-साथ एक बात बापदादा इशारा देते हैं कि चलते फिरते, संगठन में भी रहते हो, कोई न कोई का साथ सेवा में होता ही है, तो एक दो को आत्मा के रूप में देखो। आत्मा के रूप में देखते भी हैं, अभ्यास भी करते हैं, लेकिन जब आत्मा देखते हो तो आत्मा के ओरीज्नल संस्कार से देखते हो? या जो मिक्स संस्कार हैं, वह भी दिखाई देते हैं? आत्मा देखो, इसमें पास हो, लेकिन किस संस्कार से देखते हो? क्या आत्मा के ओरीज्नल संस्कार से कनेक्शन में आते हो? या वर्तमान संस्कार भी सामने आते हैं? तो बाप कहते हैं कि आज से किसी को भी एक तो आत्मा रूप में देखो लेकिन आत्मा के जो ओरीज्नल संस्कार हैं उस रूप में देखो। तो कभी भी आपस में जो कभी कभी बातें हो जाती हैं, वह नहीं होंगी। अभी आत्मा रूप में देखते हो लेकिन साथ में वर्तमान संस्कार भी सामने आ जाता है। तो आपस में जो सम्पूर्ण स्थिति होनी चाहिए, उसमें दूरी पड़ जाती है। तो ओरीज्नल संस्कार वाली आत्मा देखो। तो यह जो अभी संगठन में रुकावट आती है वह रुकावट खत्म हो जायेगी।
तो पूर्वज हो, पूज्य हो, तो यह बातें भी अपने में या साथियों में लानी है। क्या भी हो, नम्बरवार तो हैं ना! लेकिन ब्राह्मण परिवार का विशेष कार्य है दुआ देना, दुआ लेना। तो अभी बापदादा आज का या जब तक फिर आना हो तब तक का होमवर्क देते हैं कि कभी भी किसी को आत्मा रूप में देखो तो वर्तमान संस्कार के रूप में नहीं देखो। आत्मा कहा तो उस आत्मा के जो निज़ी संस्कार हैं, उस निजी संस्कार के रूप में, सम्बन्ध में भी आओ और दृष्टि में भी उसी दृष्टि से देखो तो यह जो विघ्न पड़ते हैं जिसके कारण पुरुषार्थ में तीव्रता नहीं आती है, तो अभी वृत्ति बदलेंगे, दृष्टि बदलेंगे तो बातें समाप्त हो जायेंगी। किसी की क्या भी बातें देखते हो, बापदादा ने पहले भी कहा है तो सदा आप ब्राह्मण परिवार का एक एक का फर्ज है - शुभ भावना, शुभ कामना देना और शुभ भावना, शुभ कामना लेना। उस संस्कार से देखो और चलो। तो दूसरी सीजन में बापदादा हर एक बच्चे में यह परिवर्तन देखने चाहते हैं। हो सकता है? हो सकता है तो हाथ उठाओ। हाथ उठाने में तो ठीक हो।
अच्छा है, बापदादा मुबारक देते हैं, एक दो को अटेन्शन दिलाते रहना। क्या करना? रोज़ रात को सोने के पहले बापदादा को गुडनाइट करने के पहले अपने सारे दिन का पोतामेल देना। अच्छा किया या बुरा किया? जो भी किया वह बाप को पोतामेल देके, अपने बुद्धि को खाली करके गुडनाइट करना और बाप की याद में ही सो जाना। फिर आपकी नींद बहुत अच्छी होगी। पहले अपने को खाली करना, बुद्धि में कोई बात नहीं रखना, बाप के रूप में सारा पोतामेल सच्ची दिल का दे दिया तो आपको धर्मराजपुरी में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। सच्ची दिल पर साहेब राज़ी हो जायेगा। तो होम वर्क मिला! एक तो अपने पूर्वज और पूज्य स्वरूप की सेवा चलते फिरते कर सकते हो। बाप ने देखा यह जनक बच्ची ने तबियत खराब होते, कराची की सेवा में विशेष मन्सा सकाश दी, चाहे निमित्त कोई भी है लेकिन इसने प्रैक्टिकल में किया। वहाँ की आत्माओं को सकाश मिली। और आगे-आगे उमंग में बढ़ रहे हैं। तो ऐसे बापदादा ने प्रैक्टिकल एक्जैम्पुल देखा। तो आप सभी भी कर सकते हो। दु:खी को, चिल्लाने वाले को खुशी की लहर पहुंचा सकते हो। आपके भक्त आपको ही पुकार रहे हैं - हमारी देवी हमारा देवता कब आके रहम करेंगे। आपको सुनाई नहीं देता लेकिन बाप को बहुत सुनाई देता है। हर एक ईष्ट को पुकार रहे हैं। आप नहीं जानते हो कि हमारे भक्त कौन से हैं लेकिन भक्त तो जानते हैं ना। वह तो पुकारते हैं और आप हर ब्राह्मण आत्मा के भक्त हैं। चाहे ढीले हों चाहे होशियार हों, भक्त आपके भी हैं। क्योंकि जड़ में बैठे हो ना, तो आपका सकाश का पार्ट है। तो अभी मन्सा सेवा को बढ़ाओ। और जितना बिजी रहेंगे ना उतना निर्विघ्न रहेंगे। कर सकते हो ना! मन्सा सेवा करना जानते हो ना! जानते हो तो हाथ उठाओ। अच्छा, हाथ नीचे करो। जानते हो, अच्छा जो करते रहते हैं - बीच-बीच में, वह हाथ उठाओ। करते रहते हैं, अच्छा। अच्छा नियम पूर्वक करते हैं या कभी कभी? अगर कभी कभी करते हैं तो उसको रेग्युलर करो और अगर थोड़ी करते हैं तो उसको और बढ़ाओ। क्योंकि सारे कल्प का आधार अभी की सेवा का फल है। चाहे पुजारी बनेंगे, चाहे राज्य अधिकारी बनेंगे दोनों का आधार अभी की सेवा, अभी की अवस्था, अभी का बोल, अभी का सम्बन्ध-सम्पर्क है। इसलिए बापदादा यही चाहते हैं कि अगले बारी जब आयें, पहले बारी। आप सोच रहे होंगे बाप ने तो कह दिया - कब तक चलेगा? इसका मतलब यह है कि आप एवररेडी रहो। इसीलिए पहले बारी सबका रिजल्ट लेंगे। जितनी परसेन्ट अभी है, उससे बढ़नी चाहिए। वैसे तो बापदादा पहले से ही कहते हैं - करना है तो अभी करो। कभी नहीं। बापदादा को कभी के गीत बहुत सुनाते हैं। बहुत अच्छे अच्छे करके सुनाते हैं लेकिन बापदादा को कभी के गीत अच्छे नहीं लगते। अभी अभी के गीत अच्छे लगते। तुरत दान महापुण्य। तो समझा अगले वर्ष के लिए क्या करना है? अच्छा।
सेवा का टर्न - ईस्टर्न-नेपाल का है:- आने वालों को बापदादा यही वरदान देते हैं कि थोड़े समय में फास्ट पुरुषार्थ तीव्र पुरुषार्थ कर आगे बढ़ सकते हो। अगर हर समय अटेन्शन रखेंगे, परिवर्तन करने का और सारे दिन में अपनी पढ़ाई और प्राप्ति इकट्ठी करते रहेंगे तो आप भी आगे बढ़ सकते हो। चांस है। अभी टूलेट नहीं है, लेट है इसीलिए आप जितना हो सके उतना अपने चार ही सबजेक्ट में, पढ़ाई में अटेन्शन देते रहना। बाप भी देखते रहते हैं - कौन-कौन लास्ट वाला भी फास्ट जाता है। ऐसे नहीं है कि नहीं जाते हैं, जाते हैं। तो बाप की तो एक एक बच्चे में यही आशा है कि हर एक बच्चा आगे से आगे जाये और अपना स्वराज्य और बापदादा के दिल का तख्त ले। अच्छा।
डबल विदेशी :- डबल विदेशियों को बापदादा एक बात की बहुत-बहुत मुबारक देते हैं। कौन सी बात की? डबल विदेशियों में एक विशेषता देखी, जो पहले अपना कल्चर बदलना मुश्किल लगता था, इन्डियन कल्चर मुश्किल लगता था लेकिन अभी यह प्राब्लम मैजारिटी समाप्त है। आखिर भी आप लोगों के ऊपर चाहे नये आये हैं या पुराने, है तो ब्राह्मण परिवार के। तो ब्राह्मण परिवार दुनिया के लिए विश्व परिवर्तक हैं। तो परिवर्तक परिवर्तन नहीं करेंगे तो विश्व का परिवर्तन कैसे होगा! जिम्मेवारी समझो। अलबेलापन छोड़ो। हो जायेगा, हो जायेगा नहीं। करना ही है क्योंकि बापदादा जानते हैं कि समय आप ब्राह्मणों के रोकने से रुका हुआ है। समय को समीप लाने वाले आप हो। तो तीव्र पुरुषार्थ करो। दृढ़ संकल्प करो तो हो जायेंगे। रोज़ यह गीत याद करो अब घर चलना है। ठीक है। अच्छा।
बापदादा सभी चारों ओर के बच्चों को देख खुश भी होते हैं क्योंकि बापदादा बच्चों के सिवाए अकेला कुछ नहीं करने चाहता इसलिए हर रोज़ बच्चों का आह्वान करते रहते हैं। तीव्र पुरुषार्थी बच्चे, मीठे बच्चे, प्यारे बच्चे अब चलो। अच्छा।
चारों ओर के बच्चों को बापदादा देखकर चाहे सम्मुख बैठे हैं, चाहे कहाँ भी बैठे हैं लेकिन सभी को बाप याद है। और बाप को भी कौन याद है? चारों ओर के बच्चे याद हैं क्योंकि बाप हर बच्चों के लिए यही आशा रखते हैं कि हर बच्चा बाप समान बनना ही है। बाप की हर एक बच्चे में जो आशायें हैं, वह जानता है कि नम्बरवार हैं लेकिन फिर भी अपने नम्बर अनुसार भी सम्पन्न तो बनना है ना। हर एक के पुरुषार्थ को भी देखते हैं क्या-क्या कर रहे हैं, बाप को बहुत प्यार आता है, जब मेहनत करते हैं ना तो बहुत प्यार आता है कि मेहनत से छूट जाएं। प्यार में खो जायें। जितना प्यार में खो जायेंगे उतनी मेहनत कम और बापदादा जब हाथ उठवाता कि बाप से प्यार है तो सभी बड़ा-बड़ा हाथ उठाते हैं। बाप भी मानते हैं कि बाप से प्यार है, प्यार में मैजारिटी पास हैं लेकिन बातों में आ जाते तो बाप को भूल जाते।
तो चारों ओर के बच्चों को बापदादा का पदम पदम गुणा प्यार और दिल का दुलार स्वीकार हो। सभी को, मालिक बच्चों को बाप लाख-लाख बधाईयां दे रहे हैं। उड़ते चलो, उड़ाते चलो। अच्छा।