अव्यक्त मुरली
... यहाँ रिवाज है, जो आते हैं ना और उसको जाना तो पड़ता है, तो जब जाते हैं ना तो उसको दादी गो सून, कम सून की टोली खिलाती है। आपको भी मिलेगी। ...
15 December 2004
When someone from Madhuban was returning to his place, Baba gives this toli to them (Mishri, Almond and Ilachi) and lovingly used to say like this
మధుుబన్ నుండి ఎవరైనా తమ స్థానానికి తిరిగి వెళ్తున్నప్పుడు బాబా వారికి ఈ టోలీ పెట్టి (మిశ్రీ, బాదాం మరియు ఇలాచీ) ప్రేమగా ఇలా అనేవారు
जब मधुबन से कोई अपने स्थान पर लौट रहा था, तो बाबा उन्हें विदाई में यह टोली (मिश्री, बादाम और इलाची) देते थे और प्यार से ऐसे कहते थे