... यह विशेषतायें जो खुशी दिलाती है, वह नहीं सोचते हो। सिर्फ बिन्दी हूँ, ज्योति हूँ, शान्तस्वरूप हूँ – तो निल में चले जाते हो। इसलिए माथा भारी हो जाता है ... (अव्यक्त मुरली - 3 March 1988)
शून्य; कुछ नहीं
Zero; Nothingness; Nothing
శూన్యము; సున్న