संस्कृत
... पुरूषार्थ करना भी एक मनोरंजन है। वैसे कोई हिसाब करो और मनोरंजन रीति से हिसाब करो तो फर्क पड़ जाता है ना – तो समीप आत्मा को पुरूषार्थ मनोरंजन अनुभव होता। ... (अव्यक्त मुरली - 7 December 1978)
मनोविनोद; दिल बहलाव
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వినోదము; వేడుక