ब्राह्मण और क्षत्राय - Brahmin / Kshatriya
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23/09/1973“विश्व की आत्माओं को लाइट व माइट देने वाला ही विश्व-अधिकारी”03/05/1984“परमात्मा की सबसे पहली श्रेष्ठ रचना - ब्राह्मण”27/11/1989“शुभ भावना और शुभ कामना की सूक्ष्म सेवा”23/12/1994“अपने तीन स्वरूप सदा स्मृति में रहें - 1- संगमयुगी ब्राह्मण, 2- ब्राह्मण सो फ़रिश्ता और 3- फ़रिश्ता सो देवता”09/01/1996“बालक सो मालिकपन के नशे में रहने के लिए मन का राजा बनो”
