5 स्वरुप - Five swaroop
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27/02/1983“संगमयुग पर श्रृंगारा हुआ मधुर अलौकिक मेला”18/01/1991“विश्व कल्याणकारी बनने के लिए सर्व स्मृतियों से सम्पन्न बन सर्व को सहयोग दो”18/02/1993“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”30/03/2000“मन को दुरुस्त रखने के लिए बीच-बीच में 5 सेकेण्ड भी निकाल कर मन की एक्सरसाइज करो”25/10/2002“ब्राह्मण जीवन का आधार - प्युरिटी की रॉयल्टी''17/10/2003“पूरा वर्ष - सन्तुष्टमणि बन सदा सन्तुष्ट रहना और सबको सन्तुष्ट करना''
