Search for a command to run...
18 Jan 2011
“ब्रह्मा बाप समान जीवन में रहते जीवनमुक्त स्थिति की मजा लो, स्नेह की सौगात मनजीत जगतजीत बनकर दो”
18 January 2011 · हिंदी
आज का दिन विशेष ब्रह्मा बाप के अव्यक्त होने का स्मृति का दिन है। सभी बच्चों के नयनों में ब्रह्मा बाप का स्नेह समाया हुआ है। आज चार बजे से भी पहले बच्चों का स्नेह वतन में पहुंच गया। ब्रह्मा बाप से मिलन मनाने और स्नेह की, अपने दिल के स्नेह की निशानियां, मालायें ब्रह्मा बाप के पास पहुंच गई। हर एक माला की खुशबू में बच्चों का स्नेह समाया हुआ था। हर एक बच्चे के नयन और मुस्कराहट, दिल की बातें बोल रही थी। ब्रह्मा बाप भी हर एक को स्नेह का रिटर्न दे रहे थे। बाप देख रहे हैं कि अभी भी हर बच्चा नयनों की भाषा में अपने दिल का स्नेह दे रहे हैं क्योंकि यह परमात्म स्नेह हर बच्चे को सहज बाप का बनाने वाला है। यह अलौकिक स्नेह “मेरा बाबा'' के अनुभव से अपना बनाने वाला है। यह स्नेह बाप के खजानों का मालिक बनाने वाला है क्योंकि बच्चों ने कहा मेरा बाबा, तो मेरा बाबा कहना और सर्व खजानों के मालिक बनना। यह स्नेह देह का भान सेकण्ड में भुलाकर देही अभिमानी बना देता है। सिवाए बाप के और कुछ भी आत्मा को आकर्षित नहीं करता। इस दिन का बहुत बड़ा महत्व है। सिर्फ स्मृति दिवस नहीं लेकिन समर्थी दिवस है क्योंकि इस दिन बाप ने बच्चों को विश्व सेवा के लिए स्वयं करावनहार बन बच्चों को करनहार बनाने का तिलक दिया। सन शोज़ फादर का करनहार निमित्त बनाया। सेवा में सफलता का साधन स्वयं करावनहार बना और बच्चों को करनहार बनाया क्योंकि सेवा में सफलता का साधन मैं करनहार हूँ, करावनहार करा रहा है, यह स्मृति वा यह स्थिति बहुत आवश्यक है क्योंकि 63 जन्म की स्मृति मैं पन, देह अभिमान में ले आती है। करावनहार करा रहा है, मैं निमित्त करनहार हूँ, इस स्मृति से ही अपने को निमित्त समझने से देह अभिमान समाप्त हो जाता है। तो बच्चों को इसीलिए करनहार बनाया, स्वयं करावनहार बनें। करनहार बनने से स्वत: ही निमित्त हैं, निर्माण बन जाते हैं। अभी भी बापदादा ने देखा कि बच्चे निमित्त बन सेवा करते हैं, तो निमित्त बन सेवा करने वाले जो सेवाधारी हैं उन्हों के मस्तक में सेवा का फल सितारा चमक रहा है। मैजारिटी बच्चों की सेवा को देख बापदादा खुश है इसलिए ऐसे बच्चों को विशेष ब्रह्मा बाप वाह बच्चे वाह! कहके मुबारक दे रहे हैं।
ब्रह्मा बाप विशेष खुश भी हो रहे हैं और आगे भी सेवा को निमित्त बन आगे बढ़ाने के लिए मुबारक दे रहे हैं। अभी भी ब्रह्मा बाप बच्चों को आप समान फरिश्ता स्थिति में रहने के लिए इशारे दे रहे हैं। बापदादा ने देखा है कि बच्चों का अटेन्शन है कि सदा जैसे ब्रह्मा बाप जीवन में रहते जीवनमुक्त थे, इतनी जिम्मेवारी होते भी इतने बड़े परिवार को सम्भालना, सभी को योगी जीवन वाला बनाना, इतनी सेवा की जिम्मेवारी सम्भालना, सेवा में सदा आगे बढ़ाना, सब कुछ जिम्मेवारी होते भी जीवनमुक्त के मजे में रहा, इसलिए भक्ति मार्ग में ब्रह्मा का आसन कमल आसन दिखाते हैं। जीवनमुक्त बन अभी जीवनमुक्त का मजा लिया और आप सभी बच्चों को भी ऐसा ही बनाया। अभी भी आप बच्चों को फरिश्ता बनने की भिन्न-भिन्न युक्तियां बताए आप समान बनाने चाहते हैं।
बापदादा ने देखा कि लक्ष्य हर बच्चे का अच्छा है, कोई से भी पूछते हैं आपका लक्ष्य क्या है तो क्या कहते हो? याद है क्या कहते हो? बाप समान बनना ही है। तो बाप समान क्या बनेंगे? इसी जीवन में जीवनमुक्त जीवन का सैम्पुल बनेंगे। बापदादा ने देखा है जो होमवर्क देते हैं, उसमें अटेन्शन तो देते हैं, अनुभव भी करते हैं, लेकिन सदा नहीं करते हैं। अभी भी जो काम दिया था, उसकी रिपोर्ट कई बच्चों ने पुरुषार्थ कर एक-एक मास अटेन्शन दिया है। कई ज़ोन की रिपोर्ट एक मास की रिजल्ट में अच्छी भी आई है। जिन्होंने रिपोर्ट भेजी है, जिस ज़ोन वालों ने भेजी है, उसको बापदादा वाह बच्चे वाह! कह करके मुबारक दे रहे हैं लेकिन बापदादा अभी क्या चाहता है? अभी बापदादा हर बच्चे से यही चाहता है कि अभी कभी-कभी ठीक रहते हैं, लेकिन बाप सदा चाहता है। योगी भी अच्छे बने हैं लेकिन सदा योगी बनाने चाहते हैं। आजकल बापदादा ने बच्चों को काम भी दिया था, सदा रहने के लिए हर घण्टे अपने ऊपर कोई न कोई युक्ति रखो, जो कभी-कभी को बदल सदा शब्द आ जाए। अभी बापदादा यही चाहते हैं जैसे कहावत है मन जीते जगतजीत, मन को जो संकल्प दो वही करे। क्यों? जैसे और कर्मेन्द्रियां जब चाहो जैसे चाहो वैसे करती हैं ना! ऐसे ही मन को भी जो आर्डर करो वही करे। अभ्यास करते हो लेकिन कभी-कभी नहीं भी करते हैं। बापदादा अभी यही चाहते हैं कि मन को शक्तियों की लगाम से जैसे चलाने चाहो वैसे चलाओ। जो गायन है, मन जीते जगतजीत, वह किसका गायन है? आप बच्चों का ही तो गायन है। हर कल्प किया है तभी गायन है क्योंकि जैसे और कर्मेन्द्रियों को मेरी कहते हो वैसे ही मन को भी मेरा कहते हो। मेरा कहना अर्थात् मालिक बनो। मन में जो संकल्प करने चाहो, जितना समय वह संकल्प करने चाहो वह बंधा हुआ है क्योंकि मेरा है। तो बापदादा इस स्नेह के दिन यही होमवर्क देने चाहते हैं कि जो संकल्प करने चाहो वही चले, अगर आप शुद्ध संकल्प करने चाहते हो तो वह शुद्ध संकल्प व्यर्थ संकल्प को खत्म कर दे। चाहते हो योग लगाना और संस्कार के कारण व्यर्थ संकल्प चलें, या योग की सिद्धि नहीं मिले, यह कन्ट्रोल होना चाहिए। अगर एक घण्टा योग लगाने चाहते हो तो मन डिस्टर्ब नहीं करे। आत्मा मालिक है, मन मालिक नहीं है, मन तो आत्मा का साथी है। तो साथी को प्यार से आर्डर करो, मनजीत बनो क्योंकि बापदादा के पास बहुत बच्चों का समाचार आता है - व्यर्थ संकल्प समय प्रति समय आते हैं। नहीं चाहते हैं तो भी आते हैं। तो क्या यह मालिक कहेंगे! तो ब्रह्मा बाप से स्नेह है ना, तो बाप आज स्नेह में अपने दिल की चाहना सुना रहे हैं कि अभी मनजीत जगतजीत बनना ही है। तो ब्रह्मा बाप को यह स्नेह की सौगात देंगे ना! स्नेह में क्या दिया जाता है? गिफ्ट दी जाती है ना! तो आज ब्रह्मा बाप बच्चों से यह सौगात देने के लिए कह रहे हैं। तैयार हैं? तैयार हैं? हाथ उठाओ। तो अभी जब भी आर्डर करे तो आज के दिन से व्यर्थ संकल्प आने नहीं देना, कर सकते हो? आज दो घण्टा, चार घण्टा योग की स्टेज में कर्म भी करो, योग भी लगाओ, कर सकते हो? कर सकते हो, करेंगे? चलो अभी बीती सो बीती लेकिन अब आर्डर करें कि आज के दिन व्यर्थ संकल्प को फुलस्टॉप, तो करना पड़ेगा ना।
आज योग में यही लक्ष्य रखो उसी प्रमाण सारे दिन का पुरुषार्थ करना पड़ेगा ना! बाप से स्नेह में जो बाप कहे वह करना है। संकल्प व्यर्थ बन्द, इसकी युक्ति है ब्रह्मा बाप के स्नेह को दिल से याद करो। चाहे साकार में देखा, चाहे नहीं देखा लेकिन बुद्धिबल द्वारा तो सभी ने देखा है ना! देखा है या नहीं देखा है? जो कहते हैं मैंने बाबा का प्यार देखा, मैंने ब्रह्मा बाप की पालना देखी तो क्या उसी से चल रहा हूँ... वह हाथ उठाओ। अच्छा। हाथ उठाके तो खुश कर दिया। बापदादा को खुशी है, हिम्मत तो रखी है ना। लेकिन जब भी कोई ताकत कम हो जाए ना तो सदा बाप के सम्बन्ध, कितने सम्बन्ध हैं कभी बाप, कभी बच्चा भी बन जाता है। कभी बाप तो कभी सखा भी बन जाते हैं इसलिए या संबंध याद करो या प्राप्तियां याद करो, प्राप्तियां और संबंध। जैसे आज दिल से याद कर रहे हो ना! ऐसे याद करने से प्यार पैदा हो जायेगा। आज भी सबके दिल में ब्रह्मा बाप का प्यार आ रहा है ना! तो जब कुछ नीचे ऊपर हो तो सम्बन्ध और प्राप्तियां याद करना। बाप हर बच्चे के साथ सहयोगी है, सिर्फ आप याद करना। तो समझा आज क्या करना है? मनजीत जगतजीत जो गायन है, वह स्वरूप धारण करना है। आर्डर से चलाओ। अभी थोड़ा फ्री छोड़ दिया है ना तो वह अपना काम करता है। अभी अटेन्शन दो। मन मेरे आर्डर में चले न कि आप मन के आर्डर में चलो। चाहते हो ज्ञान की बातों का रमण करें और आ जाती हैं फालतू बातें। तो क्या हुआ? मन मालिक बना या आप मालिक बनें? तो सभी ने यह होमवर्क समझा! मन जीत बनना है। जो आर्डर करें, वह मानेगा जरूर मानेगा, अटेन्शन देना पड़ेगा बस। मातायें या टीचर्स, हो सकता है? हो सकता है? टीचर्स हाथ उठाओ। टीचर्स हाथ उठा रहे हैं। अगर समझते हैं हो सकता है तो हाथ हिलाओ। पहली लाइन तो हिलाओ। भाई हाथ हिलाओ। वाह! फिर तो ब्रहमा बाप को स्नेह की सौगात दी, इसकी मुबारक हो, मुबारक हो।
अच्छा है, बापदादा से स्नेह बहुत सहयोग देता है। मेरा बाबा कहा दिल से, तो मेरा बाबा कहा तो मैं कौन? बाप का सिकीलधा बच्चा। सभी कितने बारी कहते हो मेरा बाबा, मेरा बाबा, कितने बार कहते हो? बाप सुनता है ना, सब नोट करता है। डबल फॉरेनर्स भी सुन रहे हैं ना। बापदादा ने देखा कि फुल सीजन में डबल फॉरेनर्स ने हाजिरी भरी है। मधुबन में हर टाइम हाजिर रहे हैं। अभी भी 350 हैं। अपने टर्न में भी आते हैं लेकिन हर टर्न में भी थोड़े-थोड़े कहाँ न कहाँ से आते हैं। तो अभी यह रिजल्ट बापदादा भी देखते रहेंगे और आप सब भी साक्षी होकर अपने आपकी रिजल्ट देखते रहना। यही याद रखना कि बापदादा को मालिक बनने का वायदा किया है। बापदादा अभी बच्चों को कम से कम एक एक ज़ोन को तो यह कार्य दे सकते हैं कि यह ज़ोन इस सप्ताह या 15 दिन रिजल्ट दे कि व्यर्थ संकल्प नहीं लेकिन जो विषय मन को दिया वह किया या नहीं किया? यह मंजूर है टीचर्स? मंजूर है? ज़ोन को कार्य देवें? हाथ उठाओ टीचर्स।
महाराष्ट्र है ना। तो महाराष्ट्र को तो महान काम देंगे ना। बापदादा को हर एक ज़ोन के लिए प्यार है और सदा यह निश्चय रखते हैं कि यह बच्चे, बाप ने कहा और बच्चों ने किया। ऐसा है? महाराष्ट्र, जो बाप ने कहा वह किया, ऐसा है? महाराष्ट्र वाले हाथ उठाओ। बहुत हैं। पौना क्लास है। तो हर एक ज़ोन बाप के आज्ञाकारी हैं, कांध हिला रहे हैं सभी। बाप को भी निश्चय है कि यह मेरे बच्चे हैं ही निश्चयबुद्धि।
बापदादा यही चाहते हैं कि जो रोज़ के महावाक्य सुनते हो वह होमवर्क है। अगर रोज़ की मुरली जो बाप ने कहा और बच्चों ने किया तो उसको कहा जाता है बाप के सिकीलधे बच्चे, आज्ञाकारी बच्चे। क्या करना है, वह रोज़ की मुरली पढ़ लो क्योंकि बापदादा ने देखा है मैजारिटी बच्चे मुरली से प्यार रखते हैं। अगर कोई नहीं भी रखता हो, तो बापदादा को कोई बच्चा कहे बाबा आपसे मेरा बहुत प्यार है, लेकिन बाप का प्यार किससे है? मुरली से। मुरली के लिए कितना दूर से आते हैं। कोई टीचर ऐसा होगा जो इतना दूर से पढ़ाई पढ़ाने आये। तो जब बाप का प्यार मुरली से है तो जो मेरा बाबा कहता है उसका पहला प्यार बाप के साथ बाप की मुरली से होना चाहिए। देखो, ब्रह्मा बाप ने एक दिन भी मुरली मिस नहीं की। चाहे बाम्बे भी जाते रहे, कारणे अकारणे, तो मुरली लिखते थे और मातेश्वरी वह मुरली सुनाती थी। लास्ट डे तबियत थोड़ी ढीली थी, सवेरे का क्लास नहीं कराया लेकिन शाम को क्लास कराने के बाद अव्यक्त हुए। तो ब्रह्मा बाप का प्यार किससे हुआ? मुरली से। जो कोई समझते हैं कि मेरा बाबा से प्यार है तो बाप का जिससे प्यार रहा, बच्चे का रहना चाहिए ना! तो मुरली रोज़ क्लास में पढ़ना वा सुनना। अगर मजबूरी है, बहाना नहीं है, सही कारण है तो किसी से सुनो। जो समझते हैं कि मुरली का इतना महत्व रखूंगा वह हाथ उठाओ। अच्छा, यहाँ तो सब दिखाई दे रहा है, बाप आप पीछे वालों को भी देख रहा है। अच्छा, बहुत अच्छा। बाप बीच-बीच में पेपर लेगा कि आज किसने मुरली नहीं सुनी, वह टीचर लिखके भेजे। पसन्द तो है ना। अच्छा।
आज ब्रह्मा बाप हर बच्चे से मिलकर, बहुत-बहुत स्नेह से हर बच्चे को नयनों द्वारा स्नेह दे रहे हैं। अच्छा।
चारों ओर से बच्चों द्वारा सन्देश आये हैं। चारों ओर के आये हुए प्यार के मीठे-मीठे भाव या भिन्न-भिन्न शब्दों की याद, चारों ओर से भिन्न-भिन्न पत्र आये हैं, सभी को बापदादा रेसपान्ड कर रहे हैं हर बच्चा स्नेह में बाप के दिल में समाया हुआ है और यह अविनाशी स्नेह सदा बाप का और बच्चों का अनादि अविनाशी है और सारा संगमयुग यह बाप बच्चों का मिलन निश्चित ही है। अच्छा।
सेवा का टर्न महाराष्ट्र, बाम्बे आन्ध्र प्रदेश का है, 14 हजार आये हैं:- बापदादा का स्नेही दिन पर विशेष स्नेह सभी बच्चों पर है और सदा यह स्नेह अमर रहेगा। बाकी आने वाले तो सब उठे ही हैं। टर्न बाई टर्न आने का जो चांस मिलता है वह पसन्द है ना! पसन्द है? कोई का भी उल्हना नहीं रह सकता। हर ज़ोन को टर्न मिलता है। तो यह सिस्टम पसन्द है? पसन्द है? अच्छा है। देखा गया हर एक ज़ोन खुली दिल से अपने तरफ के साथी ले आते हैं। यज्ञ सेवा का चांस भी है और मिलने का चांस भी है। यह यज्ञ सेवा चाहे थोड़े से दिन मिलते हैं लेकिन यज्ञ सेवा करके जाने के बाद आपके जीवन में यज्ञ की आकर्षण अनुभव हो जाती है इसलिए परिवार क्या है, यहाँ इतना परिवार इकट्ठा होता है, ज़ोन में भी इतना परिवार इकट्ठा नहीं होगा, लेकिन मधुबन में आना, बापदादा से मिलना, साथ में परिवार से भी मिलना होता है। एक बार यज्ञ सेवा की तो सदा यज्ञ नयनों में आता रहेगा। देखी हुई चीज़ और सुनी हुई चीज़ में फर्क हो जाता है ना। मधुबन हर एक बच्चे का घर है। यह तो सेवा अर्थ भिन्न-भिन्न स्थान में भेजा गया है, क्योंकि विश्व-सेवक बनना है ना। उल्हना नहीं रह जाए हमको पता नहीं पड़ा, हमारा बाप आया, वर्सा देके गया और हमें पता नहीं पड़ा, यह उल्हना रह नहीं जाए इसीलिए बापदादा हर समय यही कहते, अड़ोसी-पड़ोसी, गांव-गांव, एरिया-एरिया में यह सन्देश जरूर दो कि आपका बाप आ गया, मानें न मानें उन्हों का अपना भाग्य है लेकिन उल्हना नहीं रह जाए। सन्देश देना आपका काम है मानना, भाग्य बनाना वह उन्हों के हाथ में है। लेकिन आपके तरफ से कोई उल्हना नहीं रहना चाहिए। तो बहुत अच्छा है महाराष्ट्र में सेवा का विस्तार बहुत अच्छा है। इसके लिए बापदादा टीचर्स या सेवा करने वालों को विशेष मुबारक दे रहा है। जैसा नाम है वैसे ही काम है, विस्तार किया है। बाकी नये-नये प्लैन जैसे अभी दिल्ली वाले प्लैन बना रहे हैं, बाप ने ही कहा और प्रैक्टिकल में ला रहे हैं ऐसे महाराष्ट्र भी कोई न कोई नया प्लैन वही नहीं, लेकिन कोई नये रूप से सेवा का प्लैन बनाए और चारों ओर आवाज फैलाओ। महाराष्ट्र में तो फैला रहे हैं लेकिन चारों ओर फैलाने के लिए कोई न कोई प्लैन बनाओ। जिससे भिन्न-भिन्न देश में आपके द्वारा सेवा का आवाज जाये। अच्छा लगता है। बिजी रहना अर्थात् मायाजीत बनना। तो बापदादा खुश है महाराष्ट्र पर। टीचर्स भी खुश हैं ना! अच्छा।
डबल विदेशी भाई बहिनें:- डबल विदेशी जब सुनते हैं तो दिल में सबके बहुत प्यार होता है। ब्राह्मण परिवार में भी प्यार की लहर घूम जाती है। कितना भी दूर हो लेकिन दूर को दिल के स्नेह से नजदीक बनाना, यह डबल विदेशियों की विशेषता है। सेवा भी फैला रहे हैं। यह भी समाचार बापदादा सुनते रहते हैं। अभी-अभी कोई भी संख्या रह नहीं जाए, उल्हना नहीं दे हमको तो सन्देश मिला नहीं। तो बापदादा ने देखा कि अभी फॉरेन वाले इन्डिया वालों से मिलके चारों ओर सन्देश देने में अच्छे प्रैक्टिकल ला रहे हैं। कोई भी धर्म रहना नहीं चाहिए। सन्देश देना चाहिए और फॉरेन की सेवा शुरू से वायुमण्डल में फैलने का साधन यह है, जो शुरू में ही सब एक स्टेज पर एक समय में इकट्ठे बैठते थे, क्रिश्चियन भी, मुस्लिम भी हैं जो भी सभी भिन्न-भिन्न हैं, वह सब एक समय स्टेज पर इकट्ठे बैठते थे तो यह सर्व का पिता है, इसका प्रत्यक्ष स्वरूप दिखाई देता है, तो कोई भी ऐसे रहना नहीं चाहिए। ऐसे ही भारत में भी विदेश में भी। कोई भी चाहे शाखायें हैं लेकिन सन्देश जरूर पहुंचना चाहिए क्योंकि अभी समय भी सबका दिमाग थोड़ा बदल रहा है। दु:ख अशान्ति की लहर विदेश में भी फैल रही है। भारत में तो है ही। इसलिए अभी सुनने की इच्छा बढ़ रही है। अभी देखो निमंत्रण देते हैं तो आपका हॉल तो भर जाता है लेकिन और भी रह जाते हैं। तो लोगों की चाहना भी बढ़ रही है इसलिए खूब सेवा फैलाओ। चांस भी मिल रहे हैं। तो विदेश वालों को सेवा का उमंग-उत्साह है, यह दिन प्रतिदिन देखने में आता है। लेकिन बाप चाहे गांव से कोई आये हैं, चाहे विदेश से, चाहे कहाँ से भी आये हो सभी को बापदादा यही कहता है कि सेवा खूब करो। कभी भी समय बदल सकता है। जो सेवा करना चाहोगे लेकिन कर नहीं पाओगे, ऐसा समय भी आने वाला है इसलिए जो करना है वह अब करो। कब नहीं, अब। बापदादा हमेशा कहते हैं कि कल पर नहीं छोड़ो। आज पर भी नहीं, अब क्योंकि समय पांचों तत्व बाप के पास आते हैं, हमको बताओ कब तक दु:ख चलेगा! खुद दु:खी हो रहे हैं तो क्या करेंगे? मनुष्यात्माओं को भी दु:खी करेंगे ना। इसलिए जो भी आये हैं उसको संकल्प करना है कि जैसे ब्राह्मण जीवन आवश्यक है वैसे अभी के समय अनुसार हर एक को सेवा भी जरूरी है। करो या कराओ। तो डबल फॉरेनर्स को देख सारा परिवार भी खुश और स्वयं भी खुश और बापदादा भी खुश। बाकी जो बापदादा ने होमवर्क दिया, मनजीत जगतजीत बनना ही है। आपका ही गायन है, उसको रिपीट करना है। अच्छा।
कलकत्ता के भाई बहिनों ने फूलों का श्रृंगार किया है:- अच्छा है मेहनत बहुत करनी पड़ती है लेकिन यह मेहनत आपकी दिल का स्नेह फूलों में दिखाई देता है। चाहे हाथ से मेहनत करो, चाहे उत्साह दिलाने की मेहनत करो लेकिन मेहनत का बल और मेहनत का फल मिलता जरूर है। तो बहुत-बहुत स्नेह बापदादा खास कलकत्ते वालों को दे रहे हैं क्योंकि ब्रह्मा बाप में प्रवेशता भी कलकत्ता में ही हुई है। इसलिए कलकत्ता वाले ही निमित्त बने हैं स्नेह का रेसपान्ड देने के लिए। अच्छे प्यार से करते हैं इसकी मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो। आप सबको भी पसन्द आता है ना! परिवर्तन तो चाहिए ना। तो यह अपना स्नेह प्रत्यक्ष रूप में करते हैं। अच्छा।
अभी जो बच्चे सम्मुख है या दूर बैठे भी देख रहे हैं, बापदादा ने सुना कि अभी तो चारों ओर यह कोशिश की है कि हर एक देश में सेन्टर पर भी जाके देखते हैं, सुनते हैं, चाहे रात का कितना भी बजता है तो भी देखते हैं, यह भी साइंस के साधन आपके लिए ही निकले हैं और आपको ही लाभ हो रहा है। अगर साइंस द्वारा विनाश होगा तो भी आपके राज्य के लिए कर रहे हैं। तो चारों ओर के स्नेही बच्चों को विशेष ब्रह्मा बाप का यादप्यार, दिल का दुलार, दिल का प्यार स्वीकार हो।
दादियों से:- भाग्य सेवा के बिना रहने नहीं देता। जिसका जितना भाग्य है, वह भाग्य उसको ले ही जाता है। भाग्य है ना। अच्छा है, अभी समय जो भी भाग्यवान हैं उन्हों को ला रहा है। बाप ने कह दिया है ना तो समय अचानक होना है तो समय कोई न कोई आत्माओं को जगाता ही रहेगा। बहुत अच्छा।
परदादी से:- (बेटी बाप से मिल रही है) अभी तो बाप समान बनने वाली है। अभी सेवा शुरू करेंगी। इसको सेवा कराओ, बिजी रखो। इतने सब आते हैं उनमें से कोई न कोई को अनुभव सुनाती रहे, सेवा करती रहे। बहुत अच्छा।
डॉ. निर्मला दीदी से:- (तबियत नीचे ऊपर रहती है) समझ गई हो क्यों होती है, क्यों का कारण समझ लो तो उस कारण को आने नहीं दो। जानती तो हो, ज्ञानी तू आत्मा हो। जान जाओ और उससे किनारा करो, आने नहीं दो।
तीनों भाईयों से:- पाण्डवों से मिलते रहते हैं यह बहुत अच्छा है और आप तीनों को सेवा का ध्यान रखना है। सेवा के नये-नये प्लैन और क्या साधन हो, जिससे जल्दी से जल्दी सबको सन्देश मिल जाए, कोई भी तरफ रह नहीं जाये, यह प्लैन बनाओ। भले सेन्टर वा ज़ोन भी बनाते हैं लेकिन आप लोगों की भी बुद्धि चलनी चाहिए क्या नवीनता सेवा में करें और साथ-साथ सारे यज्ञ जो चल रहे हैं उनका बीच-बीच में चक्कर लगाओ। सब स्थानों में सर्विस का उमंग-उत्साह दिलाओ। कई ज़ोन तो सेवा में करते रहते हैं, कई स्थान ऐसे हैं जो कभी भी बड़े प्रोग्राम नहीं करते हैं, उन्हों को उमंग दिलाके निमित्त बनाओ क्योंकि आपस में जब मिलते हो तो यहाँ ही प्लैन पहले बना लो। फिर कहाँ-कहाँ है, हर एक अपने नजदीक जो भी हैं उसमे चक्कर लगाके करो। मतलब समझो सेवा की जिम्मेवारी आप लोगों को कराना है। कराने के साथ करना भी पड़ता है। तो ठीक है। प्लैन आपका सुना था, ठीक है।
जैसे निमित्त बने हो, और तो कोई स्टेज पर नहीं आते हैं, आप ही आते हो ना। तो निमित्त हो तो निमित्त में धारणा भी सिखाओ और प्यार भी दो। प्यार कोई ऐसा प्यार नहीं, जो आवश्यकता किसकी हो उसको दिलाना या देना यह भी प्यार है। ऐसे निमित्त बनो। ठीक है ना। (रमेश भाई से) तबियत ठीक हो जायेगी। ज्यादा सोचो नहीं। जो हो रहा है उसका एक सेकण्ड में प्लैन सोचो बस। यह हो, यह हो, नहीं। एक सेकण्ड में प्लैन बनाओ। अभी कहा ना तो टाइम जो है वह हर चीज़ में कम दो, थोड़े में फाइनल करो क्योंकि आजकल टाइम की वैल्यू है, एक-एक ब्राह्मण की वैल्यू है।
अफ्रीका में रिट्रीट सेन्टर बना है, नक्शा बापदादा को दिखाया:- सभी जो भी निमित्त बच्चे बने हैं, उनका उमंग यहाँ तक पहुंच रहा है। बापदादा खुश है, जितने सेन्टर बढ़ेंगे उतने बिछुड़े हुए बच्चे अपना भाग्य बनायेंगे। तो आप उद्घाटन नहीं कर रहे हो लेकिन अनेकों के भाग्य खुलने के निमित्त बने हो।
हंसा बहन से:- समाचार जो लिखा वह मिला, अभी जो आज काम कहा है ना, कितना सोचो, क्या सोचो, यह काम करना इसमें नम्बरवन जाना।
हैदराबाद, शान्ति सरोवर के कोर कमेटी मेम्बर्स प्रति अव्यक्त बापदादा के महावाक्य-
आप सभी सेवा के प्रति निमित्त बने हो। यह सेवा विश्व सेवा है। सिर्फ हैदराबाद की नहीं है लेकिन विश्व की सेवा है। तो विश्व की सेवा करने से आत्मा में खुशी होती है क्योंकि पुण्य का काम कर रहे हो ना। तो जहाँ पुण्य होता है वहाँ दुआयें मिलती हैं। वह दुआयें अपनी जीवन के लिए बहुत ऊंचा उड़ाती हैं। तो बापदादा को समाचार मिला कि यह सब सेवा के निमित्त हैं। तो बहुत अच्छा, करते चलो और दुआयें लेते चलो क्योंकि दुआयें मिलना इस कार्य के लिए बहुत बड़ी प्राप्ति सूक्ष्म में होती है इसलिए जो भी जहाँ सेवा करते हैं वह सेवा नहीं समझो लेकिन अपना पुण्य जमा कर रहे हैं और पुण्य जमा होने से आटोमेटिकली आपको सेवाभाव का फल मिलता है, बल मिलता है। तो खुशी-खुशी से आह्वान करते चलो और उन आत्माओं के प्रति भी शुभ भावना करते चलो, जो भी आवे वो मालामाल होके जाये। ऐसी शुभ भावना, शुभ कामना से सेवा में आगे बढ़ते जाओ। बढ़ते जाओ, बढ़ाते जाओ तो सफलता आपका जन्म सिद्ध अधिकार मिलेगा। लेकिन शुभ भावना और शुभ कामना सेवा की रखेंगे तो सेवा से बल मिलता है। आपको भी खुशी होगी और जिस कार्य के प्रति करते हो उस कार्य में आने वाली आत्माओं को भी खुशी की प्राप्ति होगी। तो बहुत अच्छा, जो भी सेवा करते हो बापदादा के यज्ञ की सेवा करते हो। यज्ञ की सेवा करने में बहुत पुण्य है। बहुत अच्छे हैं। आगे बढ़ते चलो और औरों को भी बढ़ाते चलो। अच्छा, अच्छा है, सभी जहाँ भी हैं अच्छे हैं, तो आगे बढ़ते चलो, बढ़ाते चलो।
विदाई के समय गीत गाया - अभी छोड़कर नहीं जाओ, दिल अभी भरा नहीं...
दिल तो भरने वाला है ही नहीं। सदा साथ हैं, साथ रहेंगे, साथ चलेंगे। (84 जन्म ही बाबा के साथ रहेंगे) रहना। अच्छा ही है। ब्रह्मा बाप की तरफ से सभी को बहुत-बहुत प्यार। (बाबा आपको जाने का मन करता है) ड्रामा में है। अच्छा। ओम् शान्ति।