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2 Feb 2011
“अपने भाग्य और प्राप्तियों को स्मृति में रख सदा हर्षित व सन्तुष्ट रहो, दृष्टि वृत्ति और प्रवृत्ति द्वारा सन्तुष्टता का अनुभव कराओ”
2 February 2011 · हिंदी
आज बापदादा सभी बच्चों को देख खुश हो रहे हैं। हर एक बच्चा परमात्म प्यार द्वारा पहुंच गये हैं। तो आज बापदादा हर एक बच्चे के मस्तक में भाग्य की रेखायें देख रहे हैं। ऐसा भाग्य और इतना बड़ा भाग्य सारे कल्प में किसी को प्राप्त नहीं है क्योंकि आपको भाग्य देने वाला स्वयं भाग्य दाता है। हर एक के मस्तक में पहले तो चमकता हुआ सितारा का भाग्य चमक रहा है। मुख में मधुर वाणी की रेखा चमक रही है। होठों पर मधुर मुस्कान की रेखा चमक रही है। दिल में दिलाराम बाप के लवलीन की रेखा चमक रही है। हाथों में सर्व खजानों के श्रेष्ठता की रेखा चमक रही है। पांव में हर कदम में पदम की रेखा चमक रही है। अभी सोचो ऐसा भाग्य और किसका हुआ है! इसलिए आपके यादगार चित्रों का भी भाग्य वर्णन होता रहता है। और यह भाग्य स्वयं भाग्यविधाता ने हर एक बच्चे का बनाया है।
बापदादा हर बच्चे का भाग्य देख हर बच्चे को मुबारक दे रहे हैं - वाह बच्चे वाह! और यह भाग्य इस संगम पर ही मिलता है और चलता है। संगमयुग का सुख सब युगों से श्रेष्ठ है। सतयुग का भाग्य भी संगम के पुरुषार्थ की प्रालब्ध है इसलिए संगमयुग की प्राप्ति सतयुग की प्रालब्ध से भी ज्यादा है। अपने भाग्य में खो जाओ। कुछ भी होता रहे, अपना भाग्य स्मृति में लाओ तो क्या निकलता है? वाह मेरा भाग्य! क्योंकि स्वयं भाग्य दाता आपका बाप है। तो भाग्य दाता द्वारा हर एक को अपना भाग्य मिला है। जानते हो कि हम इतने भाग्यवान हैं कि कभी-कभी जानते हो, सदा नशा रहता है? दुनिया वाले तो देखकर पूछते हैं आपको क्या मिला है? और आप लोग उत्तर क्या देते हो? जो पाना था वह पा लिया। पा लिया है, हाथ उठाओ। पा लिया है, अच्छा। पा लिया है? फलक से कहते हो, कोई अप्राप्त वस्तु ही नहीं, है ना फखुर? और मिला कैसे? सिर्फ बाप को जाना, माना, अपना बनाया तो भाग्य मिल गया। इस भाग्य को जितना स्मृति में लाते रहेंगे उतना हर्षित होते रहेंगे। भाग्यवान आत्मा का चेहरा सदा हर्षित रहेगा। रहेगा नहीं रहता है। उनकी दृष्टि, उनकी वृत्ति और उनकी प्रवृत्ति सदा सन्तुष्ट आत्मा बन स्वयं भी सन्तुष्ट रहेगी और दूसरों को भी सन्तुष्ट बनायेगी। तो आप सबको सन्तुष्टता का नशा रहता है? क्योंकि सन्तुष्टता का आधार है सर्व प्राप्ति। अप्राप्ति असन्तुष्टता का आधार है। तो आप क्या अनुभव करते हो? अप्राप्त कोई वस्तु है कि सर्व प्राप्ति हैं? प्राप्ति का नशा है? है, सदा है या कभी-कभी है? वैसे तो यही कहते हो पा लिया जो पाना था। तो जहाँ सर्व प्राप्ति है वहाँ असन्तुष्टता का नाम नहीं है।
तो बापदादा आज देश विदेश, कितने देशों से सभी बच्चे आके इकट्ठे हुए हैं लेकिन सबसे दूर से आने वाला कौन? क्या अमेरिका वाले दूर से आये हैं? अमेरिका वाले दूर से आये हैं ना! और बाप कहाँ से आया है? अमेरिका तो इसी लोक में है लेकिन बापदादा कहाँ से आये हैं? परमधाम से, ब्रह्मा बाप भी सूक्ष्मवतन से आये हैं। तो कौन दूर से आया? सबसे दूर कौन? यह है बाप और बच्चों के प्यार का नज़ारा। आपने कहा मेरा बाबा और बाप ने कहा मेरा बच्चा। सिर्फ एक को जानने से कितना वर्सा मिल गया। दुनिया वाले सुख के लिए, शान्ति के लिए ढूँढ रहे हैं - कहाँ शान्ति मिलेगी, कहाँ सुख मिलेगा और आपकी जीवन ही सुख शान्ति सम्पन्न हो गई। बापदादा से पूछते हो ना कि बापदादा क्या चाहते हैं? तो बापदादा हर बच्चे से यही चाहते हैं कि हर एक बच्चा सदा स्वराज्य अधिकारी बनके रहे। कभी-कभी नहीं क्योंकि अभी के स्वराज्य अधिकार का वरदान बाप ने इस संगमयुग के लिए पूरा दिया है, थोड़ा नहीं, कभी-कभी वाला नहीं, सदा। तो सोचो सदा के लिए स्वराज्य अधिकारी बन रहते हो? क्योंकि बापदादा ने सुनाया कि इन सभी कर्मेन्द्रियों के, मन बुद्धि संस्कार के भी मालिक हो। सबके लिए मेरा शब्द बोलते हो, मैं नहीं बोलते हो, मेरा बोलते हो। तो मन बुद्धि संस्कार मेरा है तो मेरे के ऊपर सदा अधिकार रहता है। ऐसे मन बुद्धि संस्कार के ऊपर पूरा ही अधिकारी हो, इसको कहा जाता है स्वराज्यधारी। जो आर्डर करो उसी प्रमाण यह कार्य करने के लिए निमित्त हैं। लेकिन इसके लिए चलते फिरते कार्य करते मालिकपन का नशा होना चाहिए। निश्चय और नशा।
अब तो आत्माओं को मन्सा द्वारा भी सेवा देने का समय है। चिल्लाते रहते, हे पूर्वज हमें थोड़ा सा सुख शान्ति की किरणें दे दो। तो हे पूर्वज दु:खियों की पुकार सुनाई देती है ना! बापदादा ने इशारा दे दिया है कि कुछ भी आपदा अचानक आनी है, इसके लिए सेकण्ड में फुलस्टॉप। वह प्रैक्टिस भी कर रहे हो क्योंकि उस समय पुरुषार्थ का समय नहीं होगा, अभ्यास करें, लगाओ फुलस्टॉप और हो जाए आश्चर्य की मात्रा, इसलिए पुरुषार्थ का समय अभी मिला हुआ है। उस समय प्रैक्टिकल करने का समय है, तो अभी से इस अभ्यास को कर भी रहे हैं, बापदादा रिजल्ट देखते हैं, अटेन्शन में है, कर भी रहे हैं लेकिन और भी अटेन्शन को अण्डरलाइन करो। देखो पुरुषार्थ कितना सहज है, मैं भी बिन्दी, लगाना भी बिन्दी है सिर्फ अटेन्शन देना है।
बापदादा विशेष बच्चों को सौगात देते हैं बच्चे मैं आपके सदा साथ हूँ। बाबा कहा और बच्चों के लिए बाप सदा हाज़िर है। जो कहा गया है हजूर हाज़िर है, सर्वव्यापी नहीं है लेकिन बच्चों के आगे हजूर हाज़िर है। तो सदा विजयी बनना, जहाँ भगवान साथ है वहाँ विजयी बनना क्या मुश्किल है। विजय आपका जन्म सिद्ध अधिकार है। सिर्फ मेरा बाबा कहा तो विजयी है ही इसलिए सदा विजयी बनना, जो याद में रहता उसके लिए अति सहज है। मुश्किल नहीं। जहाँ भगवान है वहाँ विजय है ही। तो आज बापदादा सभी बच्चों को देख खुश हो रहे हैं कि कितने स्नेह से, कौन से साधन से आये हैं? ट्रेन में या प्लेन में, वह तो शरीर के द्वारा पहुंच गये हैं लेकिन दिल से तो प्यार आपको यहाँ लाया है। हिम्मत आपकी है तो मदद बाप की है ही। अभी बापदादा यही चाहते हैं कि हर बच्चा हर कर्म में अपने स्वराज्य की सीट पर स्थित रहे। अच्छा।
आज पहले बारी कौन आये हैं, वह हाथ उठाओ। खड़े हो जाओ। बहुत हैं। अच्छा, जैसे पहले बारी आये हो वैसे पहला नम्बर जाना है ना। जाना है? बाबा का वरदान है कि जो हिम्मत रखेगा उसको बाप की मदद भी मिलेगी और हिम्मत से जितना भी आगे बढ़ने चाहो वह चांस है क्योंकि टूलेट का बोर्ड नहीं लगा है। याद में रहो और जो प्राप्त हुआ है उससे औरों की सेवा करो। जितनी सेवा करेंगे उतनी दुआयें मिलेंगी और वह दुआयें आपको आगे बढ़ाती रहेंगी। सन्देश देते जाओ बाकी हर एक की तकदीर। लेकिन आप सन्देश दे दो। पुण्य अपना जमा करते रहो। तो पुण्य आपको आगे बढ़ाता रहेगा। अच्छा है।
अच्छा यह कराची से आये हैं क्या! (आत्माराम भाई) तो देखो आदि स्थान से आये हो। जहाँ स्थापना हुई उस आदि स्थान से आये हो। बापदादा का यही वरदान है कि सदा आदि रत्न बन जो अनुभव किया है, सदा खुश रहने का, सदा डबल लाइट रहने का, वह औरों को भी अनुभव कराते रहो। बाकी बापदादा ने देखा निश्चय अचल है। आगे बढ़ सकते हो। बढ़ भी रहे हो और बढ़ भी सकते हो, जितना चाहो उतना आगे बढ़ने का वरदान ले सकते हो। अच्छा। यह साथ में आये हैं। (परिवार को देखकर) खुश हो ना! खुशी यहाँ से लेके जाना। इतनी खुशी लेके जाना जो कभी खुशी कम नहीं हो। और आपको खुश देख करके और भी खुश हो जायेंगे। तो क्या बांटेंगे जाके! कहाँ भी जाते हैं तो बांटते हैं ना। तो आप क्या बांटेंगे? खुशी बांटना, अविनाशी खुशी। जिसको खुशी प्राप्त होगी वह भी सदा खुश हो जायेंगे। बापदादा तो खुश है ही लेकिन आप भी खुशी लेके जा रहे हो, खुशी ले जा रहे हो इतनी खुशी जमा की? की है ना। तो खूब बांटना। अपना अनुभव सुनायेंगे ना, तो सुनाना हम कहाँ से आये हैं। खुशी के स्थान से आये हैं, आपके लिए भी खुशी लाये हैं। अच्छा है। आजकल नये बहुत आते हैं। आधा क्लास तो पहले बारी वालों का होता है। आप सभी पहले बारी आये हो, अच्छा। बहुत अच्छा। बापदादा सारे परिवार के साथ आपको अपने घर में पहले बारी आने की मुबारक दे रहे हैं। बस यह याद रखना मेरा बाबा, मेरा बाबा भूलना नहीं क्योंकि बाबा से वर्सा मिलता है। जो अप्राप्त वस्तु है वह प्राप्त होती है। अच्छा। सब खुश हो रहे हैं, हमारे भाई अपने घर में आ गये। (ताली बजाओ) अच्छा।
सेवा का टर्न - ईस्टर्न ज़ोन,(आसाम, उड़ीसा, बंगाल, बिहार) नेपाल, तामिलनाडु, बांगला देश, (टोटल 17 हजार आये हैं):- सभी जो सेन्टर पर रहने वाले हैं वह खड़े रहो बाकी बैठ जाओ। बहुत अच्छा। यह ज़ोन सबसे बड़ा ज़ोन है। और एडीशन वाले ज़ोन वह भी कम नहीं हैं इसलिए अभी जो भी टीचर्स आई हैं या सेन्टर पर रहने वाले आये हैं, उन्हों को विशेष बापदादा मुबारक दे रहे हैं। सेवाधारी अपनी सेवा का चैतन्य चित्र साथ में लाये हैं। बापदादा खुश है क्योंकि देखा गया है कि हर एक ने अपने-अपने स्थान में वृद्धि करने का लक्ष्य अच्छा रखा है। मेहनत तो की है, लेकिन मेहनत का फल भी मिल रहा है, इसकी मुबारक है। अभी क्या करना है? अभी जो बापदादा ने पहले भी कहा है कि वारिस क्वालिटी और ऐसे माइक जिनका प्रभाव दुनिया पर पड़ता है, ऐसे माइक और वारिस जितना बड़ा ज़ोन है इतने ही बड़े दोनों ही प्रकार के निकालो। किसी भी वर्ग वाले हों लेकिन आपका बड़ा ज़ोन है तो बड़े ज़ोन से मिलकर ऐसी संख्या मधुबन घर में आनी चाहिए। अभी ऐसे तैयार करो जो वह आपके ज़ोन का नम्बर सामने आवे। करते तो होंगे, यह बाप जानता है कि जो भी निमित्त हैं वह सेवा के बिना रह नहीं सकते लेकिन यहाँ तक पहुंचें यह रिजल्ट बापदादा देखने चाहते हैं। बाकी आप तो हो ही अच्छे ते अच्छे क्योंकि बाप के गद्दी के मालिक बन गये। बाबा टीचर्स को गुरूभाई कहते हैं। तो हे गुरूभाई अभी हर एक स्थान से आने चाहिए। ठीक है ना! अच्छा है, पुरुषार्थ कर रहे हो और सफलता मिलनी ही है। कोई बड़ी बात नहीं है। कोई बड़ा प्रोग्राम करो जिससे कनेक्शन बढ़े। आजकल बापदादा जो भी ज़ोन सेवा कर रहे हैं उनकी रिजल्ट सुनते हैं तो सहज ही वृद्धि भी हो रही है और माइक भी तैयार हो रहे हैं इसलिए इस ज़ोन में भी सफलता हुई पड़ी है। अच्छा।
डबल विदेशी:- बापदादा को यह बहुत अच्छा लगता है जो मधुबन में आके आपस में भी मिलते, बाप से भी मिलते और सर्विस की लेन देन भी करते, बाबा ने पहले भी कहा है कि यह साधन बापदादा को अच्छा लगता है। कितने देशों से आये हैं? (76 देशों से आये हैं) तो यहाँ मधुबन में आके आप कितने देशों से मिलते हैं? इण्डिया के देश (स्टेट) जितने भी आये हैं उतनों का नाम लो तो बहुत हो जायेंगे। तो आपसे इण्डिया वाले खुश हो जाते और आप इण्डिया वालों को देखके खुश हो जाते। दोनों का मिलन अच्छा हो जाता है। आपस में मिलना अर्थात् उमंग भरना। और तो कहाँ इतना बड़ा परिवार इकट्ठा देख नहीं सकते, मधुबन में ही इतना बड़ा परिवार देखते हो। तो दिल में क्या आता है? वाह बाबा और वाह मेरा ईश्वरीय परिवार! और बापदादा को कितनी खुशी होती है, अपने बच्चों को देखकर। वैसे तो अमृतवेले बापदादा सभी तरफ चक्र लगाते हैं, उनके लिए चक्र लगाना क्या बड़ी बात है। और बापदादा ने यह भी कह दिया है कि चार बजे के मिलन की विशेषता यह भी है कि 4 बजे बापदादा सभी बच्चों को सहज ही वरदान देते हैं। वरदान दाता का विशेष पार्ट अमृतवेले होता है। जो भी वरदान चाहिए वह बापदादा दे देते हैं। ट्रायल करके देखना। लेकिन आप सभी भी वरदान लेने के लिए अलर्ट रहना। अगर अलर्ट नहीं रहे तो बापदादा चक्र लगाके चला जायेगा और आप सोचते रहेंगे इसलिए अमृतवेले का महत्व देते तो हैं लेकिन और अटेन्शन देना। बापदादा ने देखा है कि समय अनुसार सेवा भी बढ़ रही है और सेवा के कारण बाप से वरदान लेना उससे दूर रह नहीं सकते। बाकी डबल फारेनर्स मैजारिटी पुरुषार्थ करते भी हैं फिर भी अटेन्शन को अन्डरलाइन करना। बाकी मधुबन में कैसे भी पहुंच जाते हो बापदादा उसकी विशेष सभी बच्चों को मुबारक दे रहे हैं। बापदादा ने सुना कि जो बापदादा ने संस्कार के ऊपर इशारा दिया है, उसके ऊपर समझते हैं कि हमें करना ही है और करने के लिए रोज़ अमृतवेले जैसे स्वमान रखते हैं उसके साथ-साथ भिन्न-भिन्न प्रकार से कोई एक संस्कार के ऊपर अटेन्शन दो, आज के दिन इस संस्कार के ऊपर विशेष अटेन्शन देना है और फिर रात्रि को जब बापदादा को अपना सारे दिन का चार्ट देते हो उस समय उस संस्कार की रिजल्ट भी विशेष सुनाओ तो विशेष अटेन्शन हो जायेगा। किसी न किसी संस्कार के ऊपर अटेन्शन रखना है। तो जैसे याद के ऊपर अटेन्शन देते हो उसके साथ-साथ उसी समय यह भी रिजल्ट बापदादा को दो। अगर मानो आप चाहते हो लेकिन उस दिन आपके सामने कोई संस्कार मिटाने का कार्य नहीं हुआ, तो अपने आपको बाप की मुबारक देना और रोज़ ऐसे बाप की मुबारक विशेष इस संस्कार प्रति लेते जाना तो संस्कार कार्य में आने में कमी पड़ती जायेगी। तो जैसे योग के बारे में चेक करते हो वैसे संस्कार के लिए भी चेक करो। संस्कार रोज़ नहीं आता है, कभी-कभी आता है, जो पुरुषार्थी हैं उनका बाईचांस पेपर आता है, बाकी रोज़ नहीं आता है। लेकिन चेकिंग रोज़ होगी तो यह भी अटेन्शन टेन्शन को खत्म करता जायेगा क्योंकि बापदादा ने देखा है फॉरेन वालों में से कोई-कोई बच्चे कोई कार्य शुरू करते हैं तो अटेन्शन देते हैं। तो अटेन्शन देने वाले ही मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं। बाबा का भी वरदान है। समझा। अभी इसके पीछे लग जायेंगे ना, रोज़ रिजल्ट की चेकिंग करेंगे ना तो संस्कार स्वयं ही ढीला हो जायेगा। और जो बापदादा चाहता है कि संस्कार की सब्जेक्ट में नम्बरवन जाओ, जो संस्कार चाहते हो वही कार्य में लगे। हो जायेगा। अटेन्शन में आया है ना तो हो जायेगा। लेकिन ऐसे नहीं हो जायेगा, अटेन्शन देना पड़ेगा। संगठन में ही यह संस्कार निकलते हैं, क्यों? आपके चित्रों में जो पूजा करते हैं वह आपके संस्कार कितने अच्छे गाते हैं। तो बने हैं तभी तो वर्णन करते हैं। अपना देवताई चित्र इमर्ज करो क्या गाते हैं? ऐसे देवता तो बनना ही है ना। अच्छा। बाकी सब डबल विदेशी पुरुषार्थ में सफलता का अनुभव करते रहते हैं ना! करते हैं? हाथ उठाओ जो सफलता अनुभव करते हैं। वाह! हाथ तो अच्छे उठा रहे हैं। तो लक्ष्य रखेंगे अभी इसके पीछे अटेन्शन देना ही है। इसमें भी नम्बर लेना ही है। तो आपको देख औरों को भी उमंग आयेगा क्योंकि आप निमित्त हो ना। और निमित्त वालों को बापदादा की विशेष मदद भी मिलती है। बाकी बाबा खुश है कि सेन्टर्स वृद्धि को प्राप्त होते रहते हैं। पुरुषार्थ की तरफ अटेन्शन है लेकिन अभी परिवर्तन के निमित्त बनने वाले बनो तो आपको देख औरों को भी परिवर्तन शक्ति का उमंग आयेगा। बाकी बापदादा खुश है कि पुरुषार्थ में नम्बरवार तो होते ही हैं, वह तो अन्डरस्टुड है लेकिन पुरुषार्थ की तरफ अटेन्शन है, और बढ़ाना है। बाकी बापदादा की रोज़ यादप्यार तो मिलती रहती है। देखो, घर बैठे भी बापदादा की यादप्यार एक दिन भी मिस नहीं होती, अगर रोज़ विधिपूर्वक मुरली पढ़ते हैं तो। एक दिन भी यादप्यार मिस नहीं करते। मिलती है ना! मिलती है? रोज़ यादप्यार मिलती है। सभी को मिलती है ना? यह है बापदादा के प्यार की निशानी। मुरली मिस तो यादप्यार भी मिस। सिर्फ मुरली नहीं मिस की लेकिन बापदादा का यादप्यार, वरदान सब मिस किया। मुरली तो पढ़ भी लेंगे लेकिन जो समय फिक्स है बापदादा की यादप्यार लेने का, वह तो मिस हुआ ना। तो उमंग है इस पर बापदादा खुश भी है। अच्छा, मुरली मिस करने वाले हैं? डबल फॉरेनर्स में हैं, कोई है जो मुरली मिस करता हो? कारण से? नहीं है। नहीं मिस करते। एक ने हाथ उठाया है। अभी मिस नहीं करना, मुरली मिस नहीं करना। चाहे फोन द्वारा सुनो। पढ़ नहीं सकते हैं तो कैसे भी सुनो जरुर। हाज़िरी जरूर लगाओ। अच्छा। बाकी जो भी सभा में आये हैं, नये भी हैं पुराने भी हैं तो यह पक्का पक्का पक्का नोट करो मुरली नहीं मिस करनी है क्योंकि बाप रोज़ परमधाम से आते हैं, कितना दूर से आते हैं, बच्चों के लिए आता है ना! जैसे बाप मुरली मिस नहीं करते, ऐसे बच्चों को भी मुरली मिस नहीं करना है। अच्छा।
अभी जो मधुबन में आता है ना, तो जैसे फार्म भरते हैं, उसमें यह भी लिखो कि मुरली रोज़ सुनी या कितने दिन मिस किया? मंजूर है? जिसको मंजूर है वह हाथ उठाओ। मधुबन वाले भी हाथ उठाओ। किसी भी कारण से मुरली मिस नहीं करनी है। जैसे खाना नहीं मिस करते हो तो यह भी भोजन है ना। वह शरीर का भोजन, यह आत्मा का भोजन। अच्छा लगा। जो नये भी आये हैं, आने को तो मिला है ना। उन्हों को भी यह नियम पालन करना है। जैसे और नियम हैं वैसे यह भी नियम है। ब्राह्मण माना मुरली सुनने वाला, सेवा करने वाला। अच्छा। जो भी ज़ोन आये हैं, वह एक-एक अलग उठाओ।
तामिलनाडु:- यह सेवा के लिए आये हैं। बहुत अच्छा। सेवा माना मेवा खाना।
नेपाल:- बहुत अच्छा। सेवा के लिए इतने आना यह बापदादा को बहुत अच्छा लगा। सेवा में आना अर्थात् यज्ञ से प्यार है। जो भी आये हैं, सबको बापदादा यही मुबारक देते हैं कि सभी यज्ञ स्नेही, यज्ञ सहयोगी आत्मायें हैं।
बंगाल:- अच्छा है, बापदादा ने देखा कि जो भी सभी आये हैं, वह अच्छी संख्या में, अच्छे उमंग उत्साह में आये हैं। सदा यज्ञ स्नेही और यज्ञ सेवक बनके ही रहना। चाहे तन से चाहे मन से चाहे धन से, यज्ञ किसने रचा? बाप ने रचा। किसके लिए रचा? बच्चों के लिए रचा। अगर आप ब्राह्मण नहीं होते तो यज्ञ नहीं रचा जाता। तो सभी ने सेवा अच्छी की है ना। निमित्त बने हुए द्वारा सर्टीफिकेट भी मिल रहा है सभी को। बहुत अच्छी सेवा की है और आगे भी करते रहेंगे, अमर हैं।
बिहार:- नाम ही बिहार है, देखो नाम कितना अच्छा है। बिहार माना जहाँ सदा बहार है। अच्छा।
उड़ीसा:- हर एक ने संख्या अच्छी लाई है। बापदादा जो भी ज़ोन आये हैं सभी की संख्या देख करके खुश है कि सेवा से प्यार है। सदा आगे बढ़ते रहना, बढ़ रहे हो, बढ़ते रहना।
आसाम:- बापदादा ने देखा कि एक दो से सब आगे हैं। जो भी आये हैं एक दो से आगे उमंग उत्साह वाले हैं। सेवा का पुण्य, तो पुण्य कमाने वाली आत्मायें हो क्योंकि सेवा से दुआयें मिलती हैं। तो सेवा नहीं की लेकिन पुण्य जमा करके जा रहे हो। अच्छा।
बांगलादेश:- थोड़े हैं। जितनों ने भी सेवा की, उतनों ने यह यज्ञ स्नेह का, यज्ञ सेवा का अपने ऊपर स्टैम्प लगा दिया। टाइटल ही यह है यज्ञ स्नेही। अच्छा। बहुत अच्छा किया।
झारखण्ड:- भले थोड़े हैं लेकिन सेवा से तो प्यार है ना। तो जितने भी हैं उन्होंने अपना भविष्य बनाया। बनाते रहना। जितनी यज्ञ सेवा करेंगे उतना जमा करेंगे। ज्यादा सेवा, ज्यादा जमा। अच्छा।
अभी आप तो सम्मुख बैठे हो लेकिन आपसे ज्यादा संख्या बापदादा के आगे भिन्न-भिन्न स्थानों की बापदादा देख रहे हैं। आप सम्मुख हो, वह दूर बैठे भी दिल में समाये हुए हैं। आप तो हो ही तब तो चलके पहुंचे हो ना। लेकिन बापदादा ने देखा कि दूर बैठे भी प्यार से सुनते हैं। और देखते भी सब अच्छा हैं। बापदादा ने शुरू में कहा था यह साइंस आपके काम में आयेगी। तो देखो दूर बैठे भी नजदीक अनुभव करने वाला यह साइंस का साधन है। विनाश में भी मदद करेगी, वह भी जरूरी है और आपको यहाँ भी ब्राह्मण लाइफ में गोल्डन चांस दिया है। तो साइंस वाले भी आपके मददगार हैं। उन्हों को बुरा नहीं समझना, यह क्या करते हैं! नहीं। जिसका जो काम है वह तो करना पड़ेगा। बाकी साइंस भी आपके मददगार है भी और आगे भी बनती रहेगी। अच्छा।
यह जो मीटिंग्स वगैरा करने वाले सभी आगे बैठे हैं, विदेश की टीचर्स हैं, निमित्त हैं। बापदादा सुनते सब हैं, चक्र जरूर लगाते हैं और चक्र लगाते सार समझ जाते हैं। जिस समय आपकी आवश्यक बात फाइनल की होती है उस समय बापदादा चक्र लगाते सुन लेता है और मुबारक भी देते हैं लेकिन आप बिजी बहुत होते हो। बाकी बापदादा को अच्छा लगता है क्योंकि छोटे बड़े सेन्टर विस्तार से फैले हुए हैं और भाषायें भी भिन्न-भिन्न हैं, इण्डिया में भी भाषायें तो हैं लेकिन फॉरेन में भी भिन्न-भिन्न भाषायें होते हुए भी सबको मिलाके एक कर रहे हैं और हो रहे हैं, सबको अच्छा भी लगता है इसलिए बापदादा खुश है। आओ मीटिंग करो और सबको एक नियम में, एक रसम में, एक जैसा करो। बापदादा को एक बात की खुशी है तो पहले कल्चर, कल्चर है, इण्डियन कल्चर है, यह आवाज आता था लेकिन अभी यह आवाज नहीं है। सभी ब्राह्मण कल्चर के हो गये हैं इसलिए मुबारक हो। मेहनत की है। इण्डिया वाले भी बहुत कॉन्फ्रेन्स करते हैं और मीटिंग्स भी करते हैं।
बापदादा सभी बच्चों से खुश है लेकिन रोज़ रात्रि को अपने को बापदादा का यादप्यार देना और मुबारक देना, बापदादा की मुबारक रोज़ अपने को देना, बापदादा देता है और आप अपने आपको देना। बापदादा छोड़ते नहीं हैं, चाहे इण्डिया है चाहे विदेश है, जैसे अमृतवेले चक्र लगाते हैं ऐसे रात को गुडनाइट भी सबसे करते हैं इसलिए अपने आपको मुबारक देके सोना। अच्छा।
अभी सभी तरफ के बच्चों को बापदादा यादप्यार के साथ मुबारक भी दे रहे हैं। सदा उमंग उत्साह में आगे बढ़ भी रहे हो और बढ़ते रहना। कभी अपना उमंग-उत्साह किसी भी कारण से, किसी भी बात से कम नहीं करना। बात, बात हो जाती है लेकिन पुरुषार्थ और बाप का प्यार वह अपना है इसीलिए कभी भी अपने बुद्धि को बाप के बिना और कोई बातों में बिजी नहीं करना। बाप और बाप की मुरली और बाप द्वारा सर्विस जो मिली है वह सर्विस करते रहना। अच्छा। अभी क्या कहें, साथ तो रहना है ना। तो छुट्टी लेते हैं, यह भी नहीं कह सकते। साथ रहेंगे, साथ चलेंगे और साथ आयेंगे। अच्छा। अभी समाप्ति।
मोहिनी बहन से:- (तबियत बीच-बीच में ढीली हो जाती है) यह जो अचानक होता है उसमें कोई न कोई थकावट होती है चाहे बुद्धि की थकावट चाहे शरीर की थकावट, आराम से रहो। ज्यादा भाग दौड़, रूचि हो तो करो, नहीं तो नहीं। कभी अकेले भी हो जाते हैं, तो चक्र लगाने चाहते हैं लेकिन पहले अपनी तबियत को ठीक करो। ज्यादा अटेन्शन रखो। अभी जल्दी-जल्दी होने लगे हैं, रेस्ट करो। दिमाग की रेस्ट रखो। वह रेस्ट कोई बड़ी बात नहीं है, दिमाग की रेस्ट हो।
दादी रतनमोहिनी जी ने दुबई वालों की याद दी:- सभी को याद देना।
परदादी से:- देखा अपना ज़ोन, कितना बड़ा है। (बाबा बैठा है) लेकिन निमित्त तो आप हैं। स्थापना तो की हैं ना। कहेंगे तो परदादी का ज़ोन है। सभी मानते हैं।
आंटी अंकल ने याद दी है:- बापदादा तीनों चारों जो सेवा में रहते हैं और खास अंकल को दिल की बहुत बहुत बहुत मुबारक दे रहे हैं। (आंटी की भी तबियत ठीक नहीं रहती है) देखो, आप भी अपनी सम्भाल करो, सेवा करो लेकिन अपनी भी सम्भाल करो क्योंकि आप एक यज्ञ की स्पेशल निमित्त आत्मा हो। कोई भी अभी तक पोजीशन में रहते हुए ज्ञान में नहीं आया है लेकिन आप पहला युगल हो जो फारेन से, जो सेवा में ऊंच मर्तबा होते हुए भी परिवार को भी ले आये। सिर्फ दोनों नहीं आये लेकिन पूरे परिवार सहित आये इसीलिए आप दोनों स्पेशल हो। तो बापदादा कितना कहे, हजार बारी, लाख बारी बहुत-बहुत प्रेम से याद भी करते और अभी भी बहुत बहुत बहुत बहुत यादप्यार दे रहे हैं।
प्रीतम बहन की तबियत खराब है, कुलदीप बहन ने याद दी है:- अभी चलने दें, यही इशारा ठीक है। बापदादा भी मददगार है।
दादी जानकी से:- टाइम पर ठीक हो गई ना। यह है बाप की मदद। (हंसा बहन से) सेवा अच्छी करती हो, इसको भी बापदादा मुबारक देते हैं। दूसरी कहाँ है? (प्रवीणा बहन) दोनों को बापदादा मुबारक देते हैं कि टाइम पर मेहनत करके ठीक कर दिया, सभी को लाभ मिला। कोई वचिंत नहीं रहा, क्लास मिला। तो यह सम्भालने वालों को मुबारक।
नीलू बहन से:- इतने वर्ष रथ को चलाना, समय पर सेवा का चांस दिलाना, यह भी मुबारक है। बापदादा ने देखा रथ की भी कमाल है। जो 42 वर्ष रथ से सेवा ली, दिलाने वाला तो बापदादा ही है लेकिन निमित्त रथ की जो सेवा के टाइम हाज़िर रहा है, एक टाइम भी मिस नहीं किया है। सरल स्वभाव होने के कारण रथ को चलाना आता है। (दादी जानकी से) यह भी सेवा की बहुत बहुत उमंग उत्साह वाली है इसीलिए सेवा के टाइम ठीक कर लेती है। (बाबा ठीक कर देता है यह भी बाबा की....) चतुराई है।
जब ब्रह्मा बाबा इतनी बड़ी आयु होते हुए चलाया, अभी भी चला रहा है। कब तक चलाता वह तो ड्रामा में देखते जाते हैं। सब बापदादा की कमाल देखते जाओ और दुनिया की धमाल सुनते जाओ। आपको तो कोई फुरना नहीं, बेफिकर बादशाह हो। जो होगा अच्छा होगा आप ब्राह्मणों के लिए। आपको तो यही है संगम अमृतवेला हो रहा है। अमृतवेले के बाद क्या आता है? दिन आता है ना! तो दिन तो आना ही है। क्या होगा! यह संकल्प भी नहीं है। दिन आना ही है। अपना राज्य होना ही है। निश्चित है। तो निश्चित बात कभी बदल नहीं सकती।
कुंज दादी से:- सभी हिसाब चुक्तू कर रहे हैं। ठीक है ना। हो रहा है ठीक? अच्छा। ठीक हो जायेगा। आराम से बैठो। आराम करो। दिमाग को भी आराम और शरीर को भी आराम। दोनों आराम आजकल चाहिए क्योंकि दिमाग की हलचल शरीर पर असर करती है। ठीक हो जायेंगी। हो ही जायेंगी।
डा. अशोक मेहता ने याद दी है, उनकी हार्ट सर्जरी होनी है:- अच्छा है, हिम्मत वाला है। हिम्मत मदद देती भी है, दिलाती भी है। तो हिम्मत हारने वाला नहीं है। बाकी थोड़ा बहुत जो होगा वह ठीक हो जायेगा लेकिन थोड़ा रेस्ट जरूर करे। ऐसे जो भी होता है उसमें थोड़ा समय रेस्ट का जरूर चाहिए। हॉस्पिटल में जाना ही है, नहीं। थोड़ी रेस्ट करने से आगे के लिए मदद मिलती है। नहीं तो थकावट फिर कुछ न कुछ अपना जलवा दिखाती है। थोड़े दिन रेस्ट जरूर करे।
रमेश भाई ने कहा आज ऊषा का जन्म दिन है:- उसको कभी-कभी वतन में बुलाते हैं, खुश है, कोई तकलीफ नहीं है।
पीछे बैठे हुए बच्चों को बापदादा अपने दिल में देख रहे हैं। हॉल में भले पीछे हो लेकिन प्यार में नजदीक और दिल में भी नजदीक हो।
कुछ वी.आई. पीज बापदादा से मिल रहे हैं:- कहाँ भी कोई भी कार्य कर रहे हो लेकिन अपनी जीवन में खुशी कभी नहीं गंवाना। सदा खुशमिजाज़ क्योंकि खुशी है, कहते हैं खुशी जैसी कोई खुराक नहीं। जीवन जीते तो बहुत हैं लेकिन मजे से जीना, जीवन का मजा लेना, वह खुशी है तो। खुशी नहीं तो कभी कैसा, कभी कैसा। (आपका आशीर्वाद चाहिए) उसके लिए जब भी आंख खुले ना, चाहे बिस्तर पर ही हो लेकिन आंख खुले तो परमात्मा से गुडमॉर्निग करना। यह तो कर सकते हो ना। बस सवेरे सवेरे अगर परमात्मा को याद करेंगे, तो सारा दिन आपका अच्छा हो जायेगा। और इसमें मेहनत भी नहीं है। उठना तो है ही। सिर्फ गुडमॉर्निग शिवबाबा। आप निमित्त हो ना। तो आप लोगों को देख करके दूसरों में भी खुशी आयेगी क्योंकि जीवन में कुछ तो प्राप्ति चाहिए। तो सबसे बड़ी खुशी है। खुशी कभी नहीं गंवाना। पैसा चला जाए लेकिन खुशी नहीं जाये। पैसा आ जायेगा, खुशी से पैसा डबल हो जायेगा।
आते रहो। जहाँ भी रहते हो ना फोन से सम्पर्क करते रहो। जब कोई ऐसी प्राब्लम आये तो जो सुनो, वरदान सुनो, उस पर सोचो।
सदा सवेरे-सवेरे शिवबाबा से गुडमॉर्निग करो। कहते हैं ना सवेरे जिसकी शक्ल देखेंगे सारा दिन वैसा होगा। तो सदा खुश रहना। कोई भी बात आवे उसको खुशी से हटाना।
डबल विदेशी आर. सी. ओ. मीटिंग के भाई बहिनों से:- (आज 25 साल पूरे हुए) मुबारक हो। 25 साल मीटिंग करते रहे हो। तो जो मीटिंग करते हो उस मीटिंग का प्रैक्टिकल करने में सफलता मिलती रहती है ना! सफलता है ना क्योंकि कुछ भी करते हैं उसकी रिजल्ट अच्छे ते अच्छी होनी चाहिए। तो आप जो करते हो, टाइम देते हो, संगम का टाइम बहुत कीमती है। तो उसकी रिजल्ट चेक करो कि रिजल्ट कितनी निकली। रिजल्ट से खुशी होती है। आपने कहा और हुआ क्योंकि ज्ञान माना करना और होना साथ-साथ। तो इतने टाइम में जो भी किया है, किया तो अच्छा ही है, यह तो बाप भी समझते हैं कि जो निमित्त बने हुए हैं, उनसे कार्य जो भी होता है वह अच्छा ही होता है। तभी तो आप लोगों को निमित्त बनाया है, नहीं तो निमित्त नहीं बनाते और भावना भी है जो हर साल समझते हैं करें। तो जो भी करो उसकी रिजल्ट देखो। प्राब्लम तो होती है लेकिन प्राब्लम हल हो जाए। प्राब्लम, प्राब्लम नहीं रहे, हल होना यह सफलता है। तो यह तो हुआ कि अच्छा हुआ है तब इतना वर्ष चला है, नहीं तो खत्म हो जाती ना। चलती आई है, बाकी कोई बात कैसी भी होती है उसकी परवाह नहीं लेकिन चलता रहा है तो जरूर कोई न कोई सफलता मिली है। तो चलाते रहो लेकिन जितना टाइम आप सब महारथियों ने दिया है, आपका टाइम भी तो वैल्यूबुल है ना। उतना रिजल्ट में लाते रहो। एक बारी में नहीं भी होता है, थोड़ा टाइम भी लगता है, उसमें कोई हर्जा नहीं लेकिन यह चेक जरूर करो कि समय के अनुसार कितने महारथी हैं सभी, सभी का टाइम कितना वैल्यूएबल है, उस अनुसार रिजल्ट है? और रिजल्ट को बार-बार उन्हों के आगे दोहराओ। यह रह गया है, यह हमको पूरा करना है तभी दूसरे वर्ष मीटिंग करो और उसके लिए प्लैन बनाके करना ही है। यह अटेन्शन जरूरी है। बाकी बापदादा को अच्छा लगता है, आपस में आप मिलते हो यह भी अच्छा है। क्योंकि बहुत समय दूर रहते हो ना, तो मधुबन में आके मिलते हो यह अच्छा है। नुकसान नहीं है फायदा ही है। बापदादा खुश है, करते चलो।
विदेश सेवा को 40 वर्ष हुआ है:- वृद्धि भी अच्छी हुई है। जो मेहनत की है, उससे फल निकला है इसलिए आगे बढ़ते चलो। बापदादा खुश है। (दिल्ली में बड़ा प्रोग्राम होने वाला है) जहाँ तक हो सके उसमें विदेश और इण्डिया मिलाके करो तो अच्छा है। (वन गाड वन फैमिली प्रोग्राम रखा है) शुरू-शुरू में लण्डन में इस बात का प्रभाव पड़ा था तो इनकी स्टेज में काला-गोरा भिन्न-भिन्न धर्म वाले सब इकट्ठे बैठते हैं। इन्हों में वह भेदभाव नहीं है, सब मिलके एक को मानते हैं। यह प्रभाव बहुत अच्छा होता है। अभी जैसे सेवा भी सभी तरफ हो रही है ना, तो अभी यह इप्रेशन अच्छा है कि यह सबको मानते हैं। जो कहते हैं गाड इज वन, वह यह वन करते हैं। प्रोग्राम दिल्ली में है ना, तो उसमें स्टेज पर सब होने चाहिए। जैसे (बेहरीन में) सब ड्रेस वाले आये ना, उसी ड्रेस में आवें। जहाँ जो भी ड्रेस है, लेकिन स्टेज पर इकट्ठा दिखाई दे। (गायत्री बहन से) आप भी तो मेहनत करती हो ना। निमित्त तो बनती हो। बाप तो है ही साथी। अच्छा - ओम् शान्ति।