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2 Feb 2013
“बाप के स्नेह में समाते हुए, शक्तियों द्वारा मन को कन्ट्रोल कर सदा मनजीत, जगतजीत बनो”
2 February 2013 · हिंदी
आज बापदादा हर एक बच्चे को देख हर्षित हो रहे हैं। हर एक बच्चा चाहे सम्मुख है, चाहे दूर है लेकिन बापदादा के स्नेह में लवलीन है। बापदादा भी हर बच्चे के स्नेह को देख हर्षित हो रहे हैं। हर एक बच्चे का चेहरा स्नेह में समाया हुआ है और बापदादा भी हर बच्चे को देख, लवलीन बच्चों को देख, स्नेह में समाये हुए बच्चों को देख खुश हो रहे हैं। हर एक बच्चे में तीन वरदान देख रहे हैं। एक बाप के स्वरूप में वर्से का वरदान, दूसरा शिक्षक के रूप में श्रेष्ठ शिक्षा का वरदान, तीसरा गुरू के रूप में वरदानों का वरदान। तीनों ही वरदान का स्वरूप देख हर्षित हो रहे हैं। चाहे यहाँ बैठे हैं, चाहे दूर बैठे हैं लेकिन हर बच्चा स्नेह में लवलीन है। बाप भी बच्चों के स्नेह में लवलीन हैं। यह स्नेह हर बच्चे को लव में लीन का अनुभव करा रहा है। यह स्नेह अशरीरी बनाने का साधन है।
बापदादा हर बच्चे को देख खुश है। क्या गीत गाते हैं? वाह बच्चे वाह! यह स्नेह अशरीरी बनाने वाला है। बाप बच्चों को देख क्या कहते हैं? वाह बच्चे वाह! सदा इस स्नेह में समाये रहो, यह परमात्म स्नेह हर एक को परमात्म प्यार में समाने वाला है। बापदादा हर बच्चे के नयनों में हर एक बच्चे का भाग्य देख रहे हैं। इस एक जन्म में 21 जन्मों का भाग्य बना रहे हैं। हर एक के मन में परमात्म प्यार अनुभव हो रहा है। यह परमात्म प्यार एक जन्म में इतना श्रेष्ठ बना रहा है जो आत्मा लवलीन बन, अशरीरी बन अपने घर परमधाम, साथ में अपने राज्य के अधिकारी बन जायेंगे।
आज बापदादा बच्चों को विशेष वरदान दे रहे हैं - सदा बाप के स्नेह में समाते हुए मनजीत जगतजीत बनो। सदा मन का मालिक बन मनजीत बनो। कई समझते हैं मन के मालिक बनना यह मुश्किल है लेकिन बापदादा कहते हैं मन को आप मेरा मन कहते हो ना! जैसे और कर्मेन्द्रियां मेरी हैं तो वह कन्ट्रोल में हर कार्य करती हैं वैसे मनजीत जगतजीत बनना मुश्किल नहीं है। आज हर बच्चे को बाप मनजीत, जगतजीत बनाने चाहते हैं। मन को शक्तियों द्वारा कन्ट्रोल कर मनजीत बनना ही है। बापदादा हर बच्चे को आज सदा मन का मालिक, मनजीत जगतजीत बनाने चाहते हैं। मन मेरा है, मेरे का मालिक हूँ, जैसे चाहूँ मालिक बन मन को चलाना इससे खुश रहेंगे। जैसे इन हाथ पांव को आर्डर में चलाते हो क्योंकि मेरा है, ऐसे मन को भी शक्ति स्वरूप हो चला सकते हो लेकिन मालिक बन चलाना तो मनजीत जगतजीत बन जायेंगे। इस संगम समय पर परमात्मा बाप द्वारा वरदान मिलते हैं। वरदाता बाप हर बच्चे की झोली वरदानों से भर देते हैं। एक जन्म में अनेक जन्मों का भविष्य बना सकते हो।
आज बापदादा देख रहे हैं कई आत्मायें अपने घर में पहुंच गई हैं। बापदादा सभी को अति स्नेह और शक्ति रूप से मुबारक दे रहे हैं। साथ में वरदान भी दे रहे हैं। वरदान क्या है? सदा शक्ति स्वरूप आत्मा बन इन कर्मेन्द्रियों को चलाने वाले मास्टर बन, मनजीत जगतजीत बन, सदा खुश रहना और खुशी बांटना क्योंकि आज विश्व की आत्मायें अपने-अपने कार्य करते हुए खुशी के बजाए अनेक सरकमस्टांश में अपने को मजबूर समझती हैं। मजबूर को मजबूत करो। खुशी बांटो। संसार की हालत तो देख ही रहे हैं लेकिन अपने को न्यारा और बाप का प्यारा बन उस प्यार में लवलीन रहो। अच्छा।
आज जो आये हैं वह जरा उठना। आज जो विशेष निमंत्रण पर आये हैं उन्हों को उठा रहे हैं। (वी.आई.पीज का गुलदस्ता आया है) बापदादा बच्चों को देख खुश है कि अपने घर में पहुंच गये हैं। अपना घर लगता है? लगता है तो हाथ उठाओ। (सभी ने हाथ उठाया) बापदादा भी खुश हो रहे हैं बच्चों को देख और गीत गा रहे हैं वाह बच्चे वाह! क्योंकि आज विश्व को आवश्यकता है अपने खुशनुमा जीवन की। तो एक-एक अनेक आत्माओं को परिचय दे इस भारत को जैसे भारत ऊंचा था, वैसे बनाना है। बापदादा भी खुश है। आप सभी अपने परिवार को देख खुश हैं ना! देखो दो-दो हाथ उठा रहे हैं। बहुत अच्छा। आये हैं अपने घर में, अपने बाप अपने परिवार से मिलने। बापदादा यही वरदान देते हैं कि खुशी कभी नहीं गंवाना। खुश रहना और खुशी बांटना।
सेवा का टर्न कर्नाटक ज़ोन का है, 11 हजार आये हैं:- बापदादा इतने सब बच्चों को देख वाह बच्चे वाह! का गीत गा रहे हैं। बापदादा ने देखा हर एक ज़ोन अपने ज़ोन को आगे बढ़ाने के प्रयत्न में लगे हुए हैं और यह जो ज़ोन-ज़ोन आता है, यह सिस्टम भी हर एक को ज्यादा में ज्यादा संख्या में लाने का चांस देता है। बापदादा भी एक-एक बच्चे को देख खुश होते हैं। देखो, आधा क्लास एक ही ज़ोन से आये हुए हैं। बापदादा कर्नाटक ज़ोन को विशेष वरदान दे रहे हैं - सदा एक दो में मिलते कमाल करते रहेंगे। कोई भी प्रोग्राम बनाओ कमाल का बनाना। बापदादा को कर्नाटक ज़ोन क्यों प्यारा है? क्योंकि कर्नाटक में सर्विस अच्छे विस्तार से बढ़ रही है, बढ़ती रहेगी। कर्नाटक वालों को सदा बापदादा यही वरदान देता है कि सदा खुशी-खुशी से कर्नाटक में सभी भाई बहिनों को परमात्म सन्देश जरूर पहुंचाओ। कोई रह नहीं जाये। बापदादा खुश है कि सेवा कर भी रहे हो और करते भी रहेंगे। अच्छा है जो कर्नाटक से पहले बारी आये हैं वह खड़े रहो बाकी बैठ जाओ। अच्छा, आधा क्लास तो पहले बारी का है। अच्छा है अपने घर में आये लेकिन बापदादा से पूरा वर्सा लेके वारिस बनके ही जाना। बापदादा खुश है। अभी बापदादा ने जो कहा है मनजीत, जगतजीत, मन के मालिक बनो, तो यह टाइटल जरूर लेना। टीचर्स भी यह टाइटल लेंगी ना! मनजीत जगतजीत।
डबल विदेशी:- डबल विदेशी, बापदादा अभी डबल विदेशी नहीं कहते। बापदादा कहते डबल पुरुषार्थी और बापदादा ने देखा विदेश वाले पुरुषार्थ में अटेन्शन भी विशेष दे रहे हैं। बापदादा आप आये हुए विदेशियों को बहुत-बहुत वरदान देते हैं कि सदा बढ़ते रहेंगे और अनेकों को बापदादा का वरदान दिलायेंगे। बाबा ने देखा है कि सेवा का शौक भी अच्छा है, साथ-साथ स्व को आगे बढ़ाने का पुरुषार्थ भी अच्छा चल रहा है इसलिए बापदादा विशेष डबल प्यार देते हैं। जहाँ जो भी हैं वह अटेन्शन देके टेन्शन फ्री रहते हैं। बापदादा खुश हैं, बढ़ रहे हो और बढ़ते रहेंगे। एक बाप दूसरा न कोई, इस पुरुषार्थ में अटेन्शन है और अटेन्शन टेन्शन को समाप्त कर रहा है। तो बापदादा डबल विदेशियों को डबल प्यार दे रहे हैं।
सभी आगे के लिए क्या लक्ष्य रखेंगे? सभी को यही लक्ष्य रखना है कि स्वयं भी शक्तिशाली बन औरों को भी बापदादा का परिचय दे वारिस बनाने की सेवा करेंगे। अभी हर एक सेन्टर अपने आने वाले भाई बहनों को वारिस क्वालिटी बनाओ। वारिस क्वालिटी अर्थात् जो सदा बाप के साथी बन खुद भी चले और अनेकों को भी बाप के साथी बनावे। बापदादा खुश है चारों ओर की सर्विस अच्छी बढ़ा रहे हैं। हर एक को उमंग है। जैसे बापदादा ने सुना दिल्ली में प्रोग्राम बनाया है, ऐसे ही इस शिवरात्रि पर हर एक ज़ोन प्रोग्राम बनाये, हर एक अपने शहर में शिवरात्रि पर शिवबाबा के कम से कम बच्चे जरूर बनाये। प्रोग्राम तो सब करते हैं लेकिन हर प्रोग्राम से वारिस कितने बनाये, समीप कितने आये, यह भी रिजल्ट निकालो। बाकी आज जो बापदादा ने बताया मनजीत, जगतजीत यह सभी को अवश्य बनना है। मन के व्यर्थ संकल्पों को समाप्त कर व्यर्थ को विदाई दे दो, नहीं तो व्यर्थ संकल्प भी समय निकाल देते हैं। तो आज का पाठ मनजीत जगतजीत बनना ही है। मेरा मन है, तो मेरे के ऊपर राज्य होता है। तो हर एक यह स्वरूप अपना बनाओ और दूसरों को भी सहयोग दो। आये हुए मेहमान, बापदादा खुश है कि अपना घर तो देख लिया। अभी क्या करेंगे? अब दूसरे बारी आप विजीटर नहीं, घर के बन घर वाले औरों को बनायेंगे। मंजूर है ना! पसन्द है, हाथ उठाओ। बापदादा देख रहा है। अच्छे हैं। अभी विजीटर नहीं, अब घर के मालिक, बालक सो मालिक। विजीटर अपने को विजीटर ही समझते हैं या घर के बालक सो मालिक समझते हैं! जो समझते हैं बालक सो मालिक हैं, वह हाथ उठाओ। बापदादा हजार गुणा आपको मुबारक दे रहे हैं। अच्छा लग रहा है। देखो, वैरायटी ग्रुप है। जो औरों की सेवा के निमित्त बने हुए हैं, दोनों उठो। (सभा में दो महात्मायें, सन्यासी बैठे हैं उन्हें बापदादा ने उठाया) बापदादा को बहुत प्यारे हो इसलिए औरों को भी बापदादा के प्यारे बनाने वाले हो। अच्छा है, आप भी अपने अनुभव से अनेकों को अनुभवी बनाने वाले हो।
कुम्भ मेले में भी बहुत अच्छी सेवायें चल रही हैं:- बापदादा ने भी सुना, बच्ची जो निमित्त है (मनोरमा बहन) उनको बापदादा कोटि-कोटि प्यार दे रहे हैं। सभी मेहनत अच्छी कर रहे हैं। बापदादा बच्ची को रोज़ अमृतवेले याद करता है क्योंकि याद करने से बच्ची में उमंग-उत्साह आ रहा है और उसी उमंग-उत्साह से कर रही है। यह बापदादा को समाचार मिलता रहता है। बच्ची को बहुत-बहुत यादप्यार।
अच्छा-सभी यहाँ से जाते क्या करेंगे? आप समान बनायेंगे ना! हर एक को यह संकल्प हो कि हमें जो जानते नहीं हैं उनको परिचय दे सन्देश तो दे दो, कोई आपको उलहना नहीं देवे। आपने तो हमें बताया नहीं। अपना उलहना जरूर उतारो। जो भी कनेक्शन में हैं उन्हों को सन्देश देना, आपका फर्ज है। अड़ोसी-पड़ोसी, सम्पर्क वाले यह उलहना नहीं दें, हमको तो इतना पता ही नहीं था। प्रोग्राम कर रहे हैं, अच्छा है। शिवरात्रि पर कम से कम यह तो पता पड़ जाए, आपके परिचय वालों को तो शिव परमात्मा का कार्य चल रहा है। उलहना नहीं दें कि हमको तो आपने बताया ही नहीं क्योंकि समय पर कोई भरोसा नहीं, कुछ भी होना है, अचानक होना है। यह अचानक की बात सभी को ध्यान में रखनी है। अपना भविष्य और औरों का भविष्य जितना बनाना चाहो अभी चांस है। बापदादा एक-एक बच्चे को मुबारक दे रहे हैं। आगे बढ़ भी रहे हो लेकिन रफ्तार को और तेज करो। चारों ओर के बच्चे बापदादा ने देखा कितनी याद में बैठते हैं और बापदादा भी चक्र लगाके सभी बच्चों को प्यार भी देते हैं और प्यार के साथ-साथ मुबारक भी देते हैं। चारों ओर उमंग अच्छा है। अब दु:ख से छुड़ाओ। अब अपना राज्य आने दो। तो सभी बच्चों को चाहे विदेश, चाहे देश, चाहे गांव, हर एक बच्चे को बापदादा बहुत-बहुत-बहुत याद और प्यार दे रहे हैं।
दादी जानकी से:- (बाबा आप पिघला देते हो) अभी बहुत सेवा करेंगी। कर रही हो और भी करेंगी। सेवा के लिए निमित्त हो। चलेगा, शरीर चलेगा। अच्छा चलेगा।
मोहिनी बहन अभी लोटस हाउस में हैं:- अच्छा है हिसाब किताब चुक्तू किया अभी और डबल पुरुषार्थ कर आगे जायेंगी। हर एक को आगे बढ़ना ही है। बापदादा बहुत बहुत बहुत यादप्यार दे रहे हैं। (मोहिनी बहन के साथ उनके साथी सेवाधारियों ने भी याद दी है) सेवाधारियों ने प्यार से सेवा की है उसकी मुबारक तो है लेकिन आगे भी ऐसा निर्विघ्न बनाके ऐसे तैयार करें जैसे कुछ हुआ ही नहीं।
परदादी से:- ठीक है। आपकी सूरत बाप की याद दिलाती है। आप बोलो नहीं बोलो लेकिन आपकी सूरत सेवा करती है।
निर्वैर भाई से:- अभी सेवा करनी है, ऐसे छुट्टी नहीं है। यह सब निमित्त हैं, सेवा के लिए। अभी तो सेवा का बहुत चांस है। करो, खूब धूम मचाओ। (आप साथ हैं तो करेंगे ही) करना ही है।
कुंज दादी ने अहमदाबाद हॉस्पटिल से याद दी है:- उसको याद देना, बाबा की शुरू से लाडली रही है। अभी भी लाड और प्यार शरीर को चला रहा है। बापदादा की नज़र है, सेवा अच्छी की है।
(देश विदेश के बहुत से भाई बहिनों ने याद भेजी है) सभी जिन्होंने भी याद भेजी है उनको पदम पदम बार रेसपान्ड है। अच्छा।
बृजमोहन भाई से:- प्लैन अच्छा बनाया है। सहज है ना, सब खुश हो जाते हैं। अहिंसा की अच्छी टॉपिक उठाई है क्योंकि अहिंसा को आज भी आधे लोग तो मानते हैं। तो अहिंसा का सुनके और भी अटेन्शन देंगे।
रमेश भाई से:- (नारी सुरक्षा अभियान शिवरात्रि पर निकालेंगे) अच्छा है, संगठन रूप में आवाज बड़ा करो। इस बारी सब सेन्टर्स मिलकर उमंग-उत्साह से सेवा करो। जो टॉपिक वर्तमान समय की है उसको उठाओ। जैसे सोच रहे हो वह अच्छा है। चारों ओर ऐसे टॉपिक रखो जो सब समझें कि यह दुनिया के वायुमण्डल को ठीक करने चाहते हैं। और आजकल ब्रह्माकुमारियों के ऊपर सबका प्यार है, पहले जो वह कहते थे ना, अभी सेवा देख करके, वृद्धि देख करके सबका प्यार है, सब खुश हैं।
(रमेश भाई का 80 वां बर्थ डे मना रहे हैं) मुबारक हो।
डा.बनारसी भाई से:- अपने जैसा साथी नहीं बनाया है। अभी भी साथी नहीं बनाया है। इनको अपने जैसा साथी बनाना चाहिए क्योंकि कहाँ भी जाते हो तो पीछे कोई नहीं। तो पेशेन्ट को आराम नहीं मिलता। (प्रताप भाई है) प्रताप भाई तो अपने काम में है ना, इन जैसा फ्री नहीं है। ठीक है। अच्छा। ओम् शान्ति।