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30 Nov 2014
“दिलाराम को दिल में बिठाकर मिलन मनाते सदा खुश रहना, अमृतवेला दिन का आरम्भ है इसलिए अमृतवेले का अमृत अवश्य पीना”
30 November 2014 · हिंदी
आज यह बच्चों का मेला देख बापदादा खुश हो रहे हैं और यही मन कह रहा है वाह बच्चे वाह! यह बाप और बच्चों का मिलन कितना प्यारा है। हर एक बच्चा स्नेह और उमंग से मिलन मना रहे हैं। यह स्नेह सब दु:खों को भुलाए बाप के स्नेह और सम्बन्ध में लाने वाला है। वाह बाप और बच्चों का मिलन वाह! बाप बच्चों को देख खुश हो रहे हैं और बच्चे बाप को देख खुश हो रहे हैं। एक-एक बच्चा मुस्करा रहे हैं और बाप भी चाहे नजदीक, चाहे दूर वाले बच्चों को भी देख हर्षित हो रहे हैं। यह बाप और बच्चों का मिलन अलौकिक मिलन है। बाप एक-एक बच्चे को देख खुश हो रहे हैं और बच्चे भी साकार रूप में बाप को देख खुश हो रहे हैं। यह अलौकिक मिलन कितना न्यारा और प्यारा है। हर एक के मैजॉरिटी चेहरे मुस्करा रहे हैं और बापदादा एक-एक बच्चे को चारों ओर देख मन में गीत गा रहे हैं वाह मीठे बच्चे वाह! बच्चों के दिल का गीत भी सुनाई दे रहा है। यह बाप और बच्चों का मिलन न्यारा और प्यारा है। हर एक के दिल में मिलन की खुशी इस सूरत से दिखाई दे रही है। एक-एक बच्चे को देख बापदादा एक-एक बच्चे को वाह बच्चे वाह! कहते हुए मिलन मना रहे हैं। चाहे लास्ट में भी बैठे हैं लेकिन दूर बैठे भी बाप के नजदीक हैं।
आज सीजन का पहला दिन कितना सुहावना है। बच्चों के दिल में भी वाह बाबा वाह है और बाप के दिल में भी हर एक बच्चा चाहे आगे बैठे हैं चाहे पीछे, लेकिन पीछे वाले भी बाप के सामने हैं। आज के मिलन दिन को याद करते-करते अब सम्मुख मिलन मना रहे हैं। बाप भी हर एक बच्चे के भाग्य को देख क्या गीत गा रहे हैं? एक-एक बच्चा आगे वाले या लास्ट बच्चा बाप के दिल में सम्मुख है। बाप भी बच्चों का मिलन देख बच्चों के गीत गा रहे हैं। सारे विश्व से कितने बच्चों ने अपने दिल का सम्बन्ध एक बाप से जोड़ा है। वह दिल का सम्बन्ध शक्ल से दिखाई दे रहा है और बाप यही गीत गा रहे हैं वाह सिकीलधे बच्चे, लाडले बच्चे वाह! इतना समय भी दिल में मिलते रहते हैं, बाप को भी बच्चों के बिना दिल नहीं लगती और बच्चों को भी सदा दिल में बाप याद रहता ही है। आप सबके दिल में कौन याद है? बाबा कहेंगे ना! और बाबा के दिल में कौन? क्या एक-एक बच्चे को बाबा भूल सकता है! चाहे नम्बरवार हैं लेकिन बच्चे तो हैं ना!
आज दिल में याद करने वालों को सम्मुख देख बापदादा को कितनी खुशी है। एक-एक बच्चे को देख वाह बच्चे वाह! यही दिल कहती है। बच्चे भी कहेंगे हमारे दिल में कौन? बाप भी कहते हमारे दिल में कौन? सभी जानते ही हैं, कहने की जरूरत नहीं। बाप को भी बच्चे भूल नहीं सकते और बच्चों को भी बाप भूल नहीं सकता, दिल में सदा बाप की याद हाज़िर है। सूक्ष्म में तो मिलन होता रहता है लेकिन साकार में एक-एक बच्चे को देख चाहे दूर हैं, चाहे नजदीक हैं लेकिन बापदादा के दिल में हर बच्चा नम्बरवार याद है। तो आज एक-एक बच्चे को साकार रूप में देख, समीप देख, सम्मुख देख वाह बच्चे वाह का गीत गा रहे हैं। सभी के दिल में कौन रहता, कौन है? कहेंगे मेरा बाबा। और बाप भी क्या कहेंगे? कितने भी कहाँ भी बच्चे हैं लेकिन हर एक दिल में है इसलिए बाप को कहते ही हो दिलाराम। बाप को एक-एक बच्चे को साकार रूप में देखते हुए कितनी खुशी है, वह तो बच्चे भी जानते, बाप भी जानते। सभी दिल से खुश हैं? हाथ उठाओ। दिल में खुश हैं। क्यों? बाप जानते हैं अगर कोई भी बात आती है तो बच्चे बाप को याद करते हैं और याद करने से वह बात मर्ज हो जाती है। बच्चे बाप को नहीं भूलते, बाप बच्चों को नहीं भूलते, भले कितने भी बच्चे हैं, यह तो छोटा सा हॉल है, उसमें उस अनुसार साकार रूप में बैठे हैं लेकिन आकारी रूप में इमर्ज करो तो कितने बच्चे इमर्ज होते हैं और हर एक किसी न किसी समय याद तो करते हैं। बापदादा के पास आकारी रूप में इमर्ज होते हैं। बच्चे भी अनुभव करते, बाप भी अनुभव करते हैं क्योंकि बच्चे बाप से मिलन के बिना अकेले हो जाते हैं और बाप भी बच्चों से मिलने के बिना अकेले हो जाते हैं। सूक्ष्म में इमर्ज सभी को कर सकते हैं लेकिन साकार और सूक्ष्म रूप के मिलन में फर्क है। आप भी अनुभव करते हो ना! तो आज सीजन का पहला दिन है, बाईचांस कोई न कोई प्रोग्राम होता रहता है इस कारण आज भी जितने बच्चे आये हैं उतनों से साकार मिलन मना रहे हैं। तो सभी बच्चे सदा खुश रहते हैं या कभी-कभी? कोई भी बात हो जाए लेकिन सदा खुश रहते हो ना! क्योंकि कलियुग है बातें तो होंगी, लेकिन यह बाप और बच्चों का सम्बन्ध ऐसा है जो बच्चा कहे बाबा, बाबा कहे बच्चे, मिलन होता ही रहता है, होता है ना! हाथ उठाओ, होता है? यहाँ भी दिखाई दे रहा है, (बापदादा टी.वी. स्क्रीन पर सभी का हाथ देख रहे हैं) देखो, बाप के पार्ट के साथ यह साधन भी निकले हुए हैं। दूर बैठे भी लास्ट वाला नजदीक दिखाई दे रहा है।
संगम के समय जब बाप आते हैं तो साइंस भी आपका अच्छा मददगार बनती है। वहाँ बैठे भी मुरली सुनने चाहो तो सुन सकते हो ना। साधन चाहिए। जैसे आप बाप को याद करने के बिना नहीं रह सकते वैसे बाप भी बच्चों को याद करने बिना नहीं रह सकते हैं। बाप भी इमर्ज करके मिलते हैं, रह नहीं सकते हैं। तो आज के दिन साकार रूप में मिलन का दिन है। बाप बच्चों को देख रहे हैं और बच्चे बाप को देख रहे हैं। सभी सदा खुश रहते हैं? कोई कभी-कभी खुश रहते हैं और कोई सदा खुश रहते हैं, तो सदा खुश रहने वाले बाप की आंखों के सामने घूमते रहते हैं क्योंकि बाप भी बच्चों के बिना रह नहीं सकते हैं और बच्चों को कभी भी कोई बात हो जाती है तो वह भी भूलता नहीं है, बाप के पास पहुंचता है। यह नाता ही ऐसा है जो भूल नहीं सकता। बाप कहते हैं मेरे लाडले बच्चे और बच्चे कहते मेरा बाबा, एक दिन भी भूल सकता है! भूल सकते हैं? भूल नहीं सकते क्योंकि बाप और बच्चों का ऐसा दिल का नाता है जो दिल में रहता ही है। बाप भी रह नहीं सकता, बच्चे भी रह नही सकते। जैसे आज स्थूल में सम्मुख मिलन हो रहा है ऐसे बाप बच्चों को इमर्ज करते मिलते रहते हैं, बच्चे भी तो मिलते रहते हैं ना।
सभी आज से प्रोग्रेस क्या करेंगे? क्योंकि हर समय आगे बढ़ना है। तो आगे क्या बढ़ेंगे? आगे बढ़ना अर्थात् दिल में बापदादा को समाना। दिल की बात कभी भी भूल नहीं सकती और दिल में सदा याद रह सकती है। रहती है ना! दिल में रह सकती है, सम्मुख की बात अलग है लेकिन दिल में जब भी चाहो तब बाप से मिल सकते हो और बाप भी मिलन मनाते रहते हैं, बाप को भी बच्चों के बिना चैन नहीं आता। तो सदा बाप और बच्चों का इस संगमयुग में मिलन मनाने का पार्ट बना हुआ है, जो जितना याद करे उतना इमर्ज कर सकते हैं। तो बापदादा भी खुश होते हैं, जब सम्मुख मिलन का प्रोग्राम बनाते हैं तो बापदादा भी खुश होते हैं। बच्चे तो खुश होते ही हैं लेकिन बापदादा भी खुश होते हैं। तो सभी सदा खुश रहे, खुश रहे कि बीच-बीच में खुशी के बजाए और कुछ स्थिति रही? जो माया के किसी भी रूप से सेफ रहते हैं वह सदा खुश रहते हैं क्योंकि भिन्न-भिन्न रूप से माया आती है। सिर्फ खुशी के रूप से नहीं, विचारों के रूप से भी माया अपना बनाती है, तो अभी इस मिलन के बाद मन में बाप को बिठाते रहना। दिलाराम को दिल ही पसन्द है। दिल में याद किया तो सब तरह से याद आ ही जाती है। कम से कम हर एक अमृतवेला तो मनाते हो ना! जो अमृतवेला रोज़ जरूर मनाते हैं वह हाथ उठाओ। मैजॉरिटी हैं। हर जगह अमृतवेले का साधन तो अपनाते हैं, कोशिश अच्छी कर रहे हो, अमृतवेले को महत्व देते हो लेकिन आगे भी जो अमृतवेले में कभी-कभी हो, वह आगे बढ़ना क्योंकि अमृतवेला दिन का आरम्भ है, तो उसमें जरूर याद में रहना है, उस समय की याद का प्रभाव सारे दिन पर पड़ता है। तो सभी खुश हैं या बीच में माया भी चांस लेती है? खुशी नहीं गंवाना। माया आवे भी तो फौरन बाप को सुनाके चेंज हो जाना। अगर बाप को नहीं पहुंच सको तो अपने निमित्त बड़ों को जरूर सुनाओ। एक दिन से बढ़ाना नहीं, नहीं तो आदत पड़ जायेगी। यह अमृतवेले का अमृत पीना आवश्यक है, तो अवश्य इस समय को सफल करते रहना। अच्छा।
सभी खुश हैं और खुश रहेंगे, पक्का! कोई भी छोटी मोटी बात आवे लेकिन खुशी नहीं जाये। जब भी अचानक कोई देखे तो सदा खुशनुमा दिखाई दे।
सेवा का टर्न पंजाब और राजस्थान ज़ोन का है:- (पंजाब से 10 हजार और राजस्थान से 5000 आये हैं) हाथ उठाओ। बहुत अच्छा। (दोनों ग्रुप को अलग-अलग उठाया, दोनों ज़ोन ने मिलकर अच्छी सेवा की है)।
अच्छा है। सेवाधारी बहुत हैं। अभी उठके खड़े हुए हैं तो आधा-आधा तो होगा, अच्छा है। दोनों ज़ोन को मुबारक हो, मुबारक हो। अच्छा है। क्यों? यज्ञ सेवा का चांस मिलता है। वैसे तो खास समय निकाल के नहीं आयेंगे। और सेवा भल हो लेकिन यह चांस है यज्ञ सेवा करने का। तो इसमें बहुत चांस ले सकते हो और सब सब्जेक्ट में चांस लेना चाहिए। आलराउण्ड होना चाहिए। अच्छा है।
डबल विदेशी 300 आये हैं:- विदेशी तो बहुत हैं, विदेशियों का टर्न है क्या! (हर टर्न में विदेशी आते हैं) अच्छा है। सिस्टम ठीक बनाई है। हर एक को चांस मिलता है। अच्छा।
बापदादा देखते हैं कि हर एक बच्चा सेवा का समय फिक्स होने पर अच्छा साथ दे रहे हैं। तो सभी बच्चों को समय पर साथ देने की बापदादा हजार बार यादप्यार दे रहे हैं।
(दादियां बापदादा से मिलन मना रही हैं)
मोहिनी बहन ने न्यूयार्क से यादप्यार भेजी है:- मोहिनी को खास यादप्यार भेजना।
मोहिनी बहन:- तबियत अच्छी है, (ठीक है) मुक्ति हो गई? अच्छा।