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12 Feb 2016
“साइंस के साधनों ने मिलन का रास्ता बहुत सहज बना दिया है लेकिन सबसे अच्छी याद दिल की है, दिल में बाबा बाबा याद हो, बाबा ही दिल में समाया हुआ हो”
12 February 2016 · हिंदी
ओम् शान्ति। सभी बापदादा के लाडले बच्चों को देख बापदादा भी बहुत हर्षित हो रहे हैं क्योंकि हर बच्चा बाप को कितना प्यारा है। हर एक का चेहरा देख बापदादा के मन में एक-एक बच्चे की सूरत में बाप की मूर्त देख बाप को भी कितना हर्ष होता है। जैसे बच्चों की हर शक्ल में बाप को देख बाप हर्षित होते हैं ऐसे ही हर एक भारत या विदेश दोनों तरफ के बच्चों को साकार में सामने देख बाप कितना खुश होता है। वाह हर एक बच्चा वाह! सबके नयन अति न्यारे और प्यारे दिखाई दे रहे हैं क्योंकि हर एक की दिल यही बोल रही है वाह बाबा वाह! जो साकार रूप में बाप और बच्चे का यह मिलन कितना प्यारा लग रहा है। कितने समय के बाद साकार में बापदादा बच्चों को देख और बच्चे भी बाप को देख कितना हर्षित होते हैं। हर एक की दिल में यही गीत बज रहा है वाह बाबा वाह! और बाप के दिल में भी यही गीत है वाह बच्चे वाह! हर एक बच्चे की इन आंखों से साकार वतन में यह मुलाकात कितनी प्यारी है। बच्चों के दिल में वाह बाबा वाह! और बाप के दिल में वाह बच्चे वाह! यह थोड़े समय का मिलन कितना प्यारा है। हर बच्चे के दिल में बाप समाया हुआ है। ऐसे प्रेम स्वरूप हर बच्चे के दिल में मेरा बाबा और बाप के दिल में मेरे बच्चे। इस घड़ी मैजारिटी हर बच्चे सम्मुख बाप को देख दिल में मुख में मेरा बाबा, यही गीत गा रहे हैं। हर एक के दिल में मेरा बाबा, भले नम्बरवार हैं लेकिन समाया क्या है? मेरा बाबा। और बाप के दिल में कौन? मेरे बच्चे। इतना सम्मुख मिलन मनाते देख सबकी दिल हर्षित हो रही है। बाप भी एक-एक बच्चे के दिल की याद का फोटो देख-देख हर्षित हो रहे हैं, वाह बच्चे वाह! यह मिलन, सम्मुख मिलन, चाहे किसी द्वारा है लेकिन यह मिलन का अनुभव साधारण नहीं है, बाप की दिल में इतने सब बच्चे समाये हुए हैं। बच्चों के दिल से वाह बाबा वाह और बाप के दिल से वाह बच्चे वाह! निकल रहा है। हर एक बच्चे की दिल में बाबा, बाबा की दिल में बच्चे। यह दिल का मिलन चित्र के रूप में देखो तो हर एक लव में लीन है। हर एक की दिल क्या कह रही है? मेरा बाबा, मीठा बाबा, प्यारा बाबा और बाबा भी एक-एक बच्चे का प्यार दिल में समाये हुए हैं। भक्ति में ऐसे नहीं सोचा था तो ऐसे प्रभु मिलन हम बच्चों के भाग्य में है लेकिन ड्रामा कहें या तकदीर कहें, हर एक बच्चे के भाग्य को देख बाप को कितनी खुशी होती है। वाह बच्चे वाह! ऐसा मिलन जैसे सम्मुख मिल रहे हैं। तो इसको कहेंगे ऐसे मिलन का मौका ड्रामा में मिला हुआ है, जो मन बहुत अच्छा आनंद में आ जाता है। भले रूप दूसरा है फिर भी मिलन तो है ना! क्या भासना आती है? बाप मिलने आया है, बच्चे मिलने आये हैं। ऐसा भाग्य साकार रूप में ऐसे मिलेगा, यह ड्रामा में नूंधा हुआ है, यह देख कितने हर्षित हो रहे हैं।
अभी बाबा की हर बच्चे के प्रति यही एक दिल है कि हर एक बच्चा बाप की दिल में समाया हुआ रहे और समाते-समाते सदा इतनी खुशी का अनुभव करता रहे, जो ऐसा करते हुए दिल पूरी नहीं होती। दिल से हर समय यही निकलता है, ऐसा बाबा, कलियुग में ऐसी चीज़ मिले, कितना भाग्य है! बाप साइंस वालों को भी थैंक्स देते हैं जो ऐसे मिलन के रास्ते बनाये हैं जो सम्मुख न होते, सम्मुख का अनुभव कराते हैं। कई बच्चों का अनुभव देख और सुन बाप भी हर्षित होता है। बाप बच्चों को देखकर खुश होते और बाप बच्चे दोनों जब खुश होके मिलते, तो आप अनुभवी हैं। तो इन साइंस के निमित्त बनने वाले बच्चों को बापदादा देख दिल ही दिल में उन्हों के भी गीत गाते हैं कि वाह! यह बाप और बच्चों का मिलन सदा होता रहे तो कितना अच्छा है लेकिन ड्रामा में इतना ही है। फिर भी साइंस ने मिलन का रास्ता बहुत सहज बना दिया है जो सामने दिखाई भी देता है, सुनने में भी आता है। तो बापदादा भी जब बच्चों को देखते हैं तो कितने खुश हो जाते हैं। कलियुग में साधन तो बहुत अच्छे बनाये हैं फिर भी सामने भासना तो देते हैं ना। वैसे रूबरू की (सम्मुख की) भासना तो नहीं हो सकती लेकिन फिर भी बाबा की शक्ल, नयन, चैन, मिलन यह भी एक संगम का वन्डर है। तो सभी बच्चे बात करते, मिलते देखकर खुश हो जाते हैं ना इसलिए सभी कोशिश करते हैं मधुबन चलो, मधुबन चलो। और बाप भी हर बच्चे को देख कितना खुश होता होगा! सारे ड्रामा में यह मिलन भी विचित्र है। तो जब भी ऐसा दिन होता है तब हर बच्चा कोशिश करता है पहुंच जायें। लेकिन कलियुग है, कलियुग में सब सुख पूर्ण नहीं होते हैं। होता है लेकिन जो मनुष्य चाहता है वह सब पूरा नहीं हो सकता। तो बापदादा भी जब सुनते हैं ऐसे मिलन हो सकता है तो अन्दर कितनी खुशी होती है। बच्चों को तो होती है, बाप को भी होती है। हर एक के दिल में बाप की याद तो सदा रहती है कि मुश्किल है? जो समझते हैं कि बाप की याद भूलना मुश्किल है वह हाथ उठाना। भूलना मुश्किल है? फिर क्या करते हो आप? दिल में ही समा देते हो! और कई बच्चे तो देखा है इतना दिल में याद आता है जो चुपचाप अकेले बैठे हैं, लेकिन ऐसे ही बैठे हैं जैसे कोई सामने बात कर रहा है क्योंकि सभी को पता है कि यह मिलन का दिवस बहुत अमूल्य है। फिर भी साइंस वालों को थैंक्स तो देंगे ना। किसी भी साधन द्वारा बाप सामने आ जाये, शब्द सुनने में आ जाएं तो खुशी कितनी होती है! तो जब बापदादा सुनते हैं कि यह साधन मिला है, जो सुन भी सकते और मिल भी सकते हैं तो बाबा के मुख से क्या निकलता है? वाह साइंस वाले बच्चे वाह! जो ऐसे साधन बनाये हैं जिस समय भी दिल हो बाबा को देखें, सुनें तो सुन सकते हैं। जैसे हमारे सामने ही बाबा बैठा है, ऐसे साधन भी बनाये तो हैं ना। लेकिन पहली बात है हमारे दिल में ही इमर्ज हो सकता है, मिलन हो सकता है, यह भी ड्रामा में नूंध है। तो बाबा साइंस वालों को बहुत-बहुत याद करते हैं कि और भी कुछ नजदीक का बनाओ, जिसमें बच्चे भी खुश तो बाप भी खुश। यह बताते हैं तो बच्चे कितना योग लगाके साइंस वालों के पीछे पड़ के इन्वेन्शन निकालते हैं। तो बापदादा भी बच्चों के दिल की याद को देख बैठ नहीं सकते। कोई न कोई साधन निकलता ही रहता जिससे गरीब भी देख सकें, साहूकार भी देख सकें लेकिन सबसे सहज मिलन दिल का मिलन है।
आज सुबह से उठे तो जब तक बाबा मिले तब तक आपके दर्पण में क्या-क्या आया था? घड़ी-घड़ी अभी जायें, बाबा आयेगा, बाबा मुरली चलायेगा। यही याद होगा ना। तो साइंस वालों को भी मुबारक है, जो कैसे भी इन्वेन्शन निकाली और यहाँ तक भी पहुंच गये, जो आप बाप के सामने और बाप आपके सामने हो जाता। फिर भी इतना तो हो गया ना। है तो छोटा सा मिलन, लेकिन फिर भी है तो मिलन ना। तो बाप भी याद करते, बच्चे भी याद करते लेकिन याद का रेसपान्ड मिलता है तो उसमें कितनी खुशी होती है। याद तो सभी करते हैं, कोई भी होगा ना, अन्जान भी होगा, छोटा बच्चा भी कहेगा आज फोटो दो तो देखें बाबा कैसे मुरली चलाता है। यह है दिल का लगाव। बस बाबा शब्द कहते, सुनते, देखते बाबा, बाबा, बाबा, बाबा बच्चे में, बच्चे बाबा में समा जाते हैं। और बच्चे भी कोशिश करके देखो कहाँ-कहाँ से कैसे-कैसे पहुंच जाते हैं। यह बाप और बच्चों का मिलन या आत्मा परमात्मा का मिलन कितना अमूल्य है। इस अमूल्य मिलन के समय को संगमयुग कहा जाता है। इस युग की महिमा करो तो कितना नयन गीले हो जाते हैं। तो बाबा इम्तहान लेंगे, अभी अचानक इम्तहान लेंगे कि सारे दिन में कितना टाइम याद रहता है? क्योंकि बहुत प्यारा है, यह तो सभी कहते हैं। यह कर दें, यह कर दें, वह तो ठीक है, दिल में प्यार तो सभी का है लेकिन कितना समय निकालके याद में बैठते हैं, कैसे बैठते हैं, वह तो हर एक की हिस्ट्री खुद जानें या बाप जाने। तो सभी बच्चे ठीक हैं? जिनकी तबियत वगैरा सब ठीक है वह हाथ उठाना। सभी का हाथ भी देखो तो कितना अच्छा लगता है। जब हॉल फुल हो जाता है तो कितनी सीन अच्छी लगती है। पहले सबसे अच्छी याद तो दिल की है। चलते फिरते कुछ भी करते दिल में बाबा बाबा ही याद हो, मिलन के बिना तो बाप की भी दिल नहीं मानती, बच्चों की भी दिल नहीं मानती, इसलिए ड्रामा में मिलन का साधन अच्छा रखा है। साइंस ने इस समय मिलन का रास्ता बहुत अच्छा बनाया है। छोटी सी कैसेट रख दो जब चाहे तब आवाज सुनो। तो बाबा कहते हैं साइंस ने भी कमाल की है। सुनने का भी देखने का भी। लेकिन बाप सदा कहता है यह तो अल्पकाल के साधन हैं लेकिन सदा आपके साथ हो, वह है दिल। दिल में बाबा को याद करो और इमर्ज रहे यह प्रैक्टिस जरूरी है। अच्छा। अभी आज कौन सा तरफ आया है।
सेवा का टर्न ईस्टर्न ज़ोन का है। आसाम, बंगाल, बिहार, उड़ीसा, नेपाल और तामिलनाडु ज़ोन के 18 हजार आये हैं, टोटल 23 हजार आये हैं:-
अच्छा है साइंस वाले भी अपना उल्हना उतार रहे हैं जो दे सकते हैं, देते हैं। लेकिन सबसे सहज याद करने का तरीका जो है वह याद बिना साधन के दिल में आ जाए, निकालना चाहे तो भी नहीं निकले, साधन इतने हैं जो कमाल साइंस का है और ऐसे टाइम पर साइंस का साधन हुआ है जो बच्चे कहाँ भी हों, विलायत में हों या यहाँ हों, सब साधनों से मिलन मना सकते हैं। तो संगम पर सिर्फ बाप का साथ नहीं मिलता लेकिन साधन जो हैं उनका भी बहुत साथ मिलता है। मिलन के लिए कितने साइंस के साधन हैं। यह संगम पर बाप और बच्चों के मिलन के साधन भी कम नहीं हैं इसीलिए साइंस को भी कहेंगे कि हमारे मिलन के निमित्त साइंस बनी है। भले पैसा चाहिए परन्तु दूर बैठे भी मिलन तो हो सकता है चाहे कुछ भी काम करके पैसा इकट्ठा करें, क्या भी करें।
डबल विदेशी 60 देशों से 700 भाई बहिनें आये हैं:- फिर भी यहाँ के वहाँ के मिलाके अच्छा है जो पहुंच गये हैं। बापदादा को तो खुशी होती है कि बच्चे कैसे भी पैसा इकट्ठा करते, एक तो उन्हों की कमाल बहुत अच्छी होती है, बाबा सुनते हैं कैसे पैसा इकट्ठा करते हैं। दूसरा दिल में लगन कितनी है और लगन के साथ साधन भी कैसे इकट्ठे करते हैं, कमाल तो उनकी है क्योंकि पहले तो टिकेट चाहिए। लेकिन बाप ने देखा तो बच्चों की दिल बाप से, बाप की दिल बच्चों से। वह दिन याद करते रहते हैं, कब मिलन होगा, कब होगा! बच्चों का बाप से और बाप का भी बच्चों से बहुत दिल का प्यार है। बस उन दिनों की तारीख याद करते रहते, कब शुरू होगा। तो सब ठीक हैं? सबकी तबियत ठीक है! बाप को भी बच्चों को देख बहुत खुशी होती है, जितने बच्चे ज्यादा उतनी बाप को खुशी है। सभी को बहुत-बहुत दिल से यादप्यार तो है ही क्योंकि दिल में समाया हुआ कौन है? खास जिस समय यहाँ मुरली चलती है, उस समय भी देखो अपने घरों में भी मुरली के टाइम जब सीजन शुरू होती है तो कैसे भी करके अटेन्शन देके टाइम निकालते हैं। बापदादा भी देखकर हर्षित होते हैं बच्चों की दिल मुरली से कितनी है! खजाना है ना। तो कैसे भी सरकमस्टांश होते भी मुरली सुनने पहुंच जाते हैं। यहाँ भी जो दिल से पहुंचे हैं उन सबका सम्मुख मिलन तो हो गया लेकिन सम्मुख मिलन तो हुआ, अभी इसी मिलन को बढ़ाते जाना। जहाँ तक हो सके वहाँ तक बढ़ाना। यह पुरुषार्थ करते आगे बढ़ते चलो। हॉल तो यह भी भर गया है। बाप बच्चों को देख करके खुश होते हैं। जो भी आये हैं उन एक-एक बच्चे को बाप दिल से यादप्यार का रिटर्न यादप्यार दे रहे हैं।
दादी जानकी से:- मेहनत अच्छी की है। प्रकृति से भी अच्छी मेहनत की है। सभी आपको देखकर कितने खुश होते हैं। यह तो अच्छा है जो चलते फिरते भी तबियत ठीक है। परन्तु फिर भी आयु के हिसाब से ठीक है। (दादी अभी बेहरीन होकर आई है, बेहरीन के इब्राहम भाई की याद बापदादा को दी) अच्छा है एक दो के सहयोगी बनना बहुत अच्छा है। मतलब टोटली जो अभी सेवा चल रही है, अभी ठीक अटेन्शन है। विदेश का असर देश में आता, देश का असर विदेश में हैं। एक दो के मददगार भी हैं।
मोहिनी बहन:- तबियत थोड़ी ढीली है। रेस्ट कर रही है। (आपकी गोद में हूँ) तो वहाँ तो रेस्ट ही है ना। यह सदा ठीक होते ठीक है। अच्छा है।
ईशू दादी से:- (तबियत ठीक नहीं है) घबराना नहीं, घबराने से और ही हो जाता है। जिसके लिए सोचते हैं वह ज्यादा हो जाता है, इसलिए यही सोचो जैसे दवाई हो गई है। बाबा को याद किया, बीमारी की गोली एक बारी ले ली बस। भले जो दवाई है ना, उसको जिस समय लो उस समय समझो यह दवाई हमारे काम में आई। भले धीरे-धीरे आयेगी लेकिन आपको फर्क महसूस होगा, बस। और सभी को पता है कि इनकी तबियत खराब है तो सभी का ध्यान आप में जायेगा।
तीनो भाईयों से:- सभी खुश हैं। सब खा पी तो रहे हैं ना। यह तो खाते रहना चाहिए, खाओ पिओ, जरूरी नहीं है कि टोली नहीं खाओ, समझो मेरी तबियत खराब है। भोग तो सभी को आटोमेटिक मिलता है। भोग तो सबके पास बीमारी में भी पहुंच जाता है। लेकिन ऐसा बेफिक्र नहीं बनना। अच्छा है सम्भाल करो लेकिन ज्यादा नहीं, बीच का जैसे होना चाहिए वैसे। क्योंकि यहाँ तो ढेर हैं ना। एक दो को देखकरके भी एक दो का तीर लगता है। (अभी और संख्या बढ़ेगी) साधन अपनायेंगे, आयेंगे तो सही, बढ़ोतरी होनी ही है। कहाँ आयेंगे? यहाँ ही तो आयेंगे। (रहने का साधन तो बढ़ाना पड़ेगा) अभी चल रहा है ना। (बहुत बच्चे बाहर बैठे हैं) उसमें कोई नुकसान तो नहीं है ना।
(रमेश भाई ने कहा बाबा आपको और भी आने के टर्न बढ़ाने होंगे) वह तो देख लेंगे। पहले यहाँ के साधन तो ठीक हो जायें। बच्चे बढ़ेंगे तो साधन भी जरूर बढ़ेंगे ना। भाषण सुनें वह अवस्था तो चाहिए। अगर ठीक प्रबन्ध नहीं होगा तो मुरली क्या सुनेंगे! (बरसात से सेफ्टी के लिए हॉल के ऊपर दूसरी छत डाली गई है) अच्छा है, साधन तो चाहिए, नहीं तो मुरली के समय बरसात के पानी को ही गिनते रहेंगे इसीलिए सबमें लिमिट चाहिए। साधन चाहिए लेकिन साधन के वशीभूत होके नहीं। यहाँ साधन के बिना तो चल ही नहीं सकते, क्योंकि बरसात ऐसी होती है। अगर ज्ञान की रीति से देखें तो टूमच में नहीं जाना है। साधन यूज़ जरूर करना चाहिए लेकिन उसकी हद होनी चाहिए।
विदेश की बड़ी बहिनों से:- आप लोग अपने शरीर के हिसाब से तो सम्भाल करते ही हो। ऐसे भी नहीं कि शरीर का क्या करें, भोगना तो भोगनी ही पड़ेगी ना। नहीं। अपनी सम्भाल पहले से करो, जब पहले से पता है बीमारी आने की निशानी यह है, उसकी दवाई यह है, वह भी जानते हो, तो पहले सब प्रबन्ध करो। अभी डाक्टर तो छोटे-मोटे सब हो गये हैं, तो शरीर की भी सम्भाल करो। (बाबा से नई वेबसाइट का उद्घाटन कराया) सबको बताना। बाकी सब ठीक चल रहा है। अच्छा है। (न्यूयार्क की मोहिनी बहन ने सभी की याद दी)
याद तो जरूर दो। वह भी खुश होंगे ना। अच्छा है। (दादी जानकी के लिए) इनकी भी सम्भाल अच्छी करना।
(बाबा आपको अगली सीजन में फिर आना है)
(नीलू बहन ने कहा बाबा रथ को पहले ठीक रखना फिर आने का प्रोग्राम देना)
जो ड्रामा में होगा वह होगा, इसीलिए आप सभी अपना विचार भले दे दो लेकिन यह नहीं कहो यह होना चाहिए। नहीं तो इसमें भी फिर जिसमें बाबा आवे वह खुश होते हैं, अगर किसी टर्न में नहीं आता है तो उनके संकल्प चलते हैं, इसलिए यह नहीं चाहती है कि ऐसा हो। सिर्फ एक बात नहीं है, कई बातें हैं। बाबा देखकर उसी अनुसार आपेही करेगा क्योंकि एक की दिल रखो तो वह समझते हैं मैं भी तो हूँ ना। फिर तो सभी खास हैं। हर एक के टर्न में 23-24 हजार होते हैं। (टी.वी. द्वारा लाखों लोग देखते हैं, ज़ोन वाइज जो यहाँ आते हैं, यह प्रोग्राम बहुत अच्छा है) भले वह आयें, उसकी तो छुट्टी है ही। (बाबा मीटिंग के लिए कोई प्रेरणा आप दें, जो रही हुई सेवा कर सकें) आप लोग भी निकालो। (इस वर्ष की थीम क्या रखें) आप आपस में मीटिंग करो, उसमें पहले निकालो फिर बाबा पास करेंगे। अच्छा - ओम् शान्ति।