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3 Mar 2019
"संगम की बैंक में साइलेन्स की शक्ति और श्रेष्ठ कर्म जमा करो"
3 March 2019 · हिंदी
03-03-2019 Avyakt BapDada 03-03-2019
प्राणप्यारे अव्यक्त मूर्त मात-पिता बापदादा के अति लाडले, शिव भोलानाथ बाप की छत्रछाया में पलने वाले, अचानक के पहले, एवररेडी और अलर्ट रहने वाले, साइलेन्स की शक्ति द्वारा सर्व को शान्ति और शक्ति की सकाश देने वाले, अलौकिक दिव्य जन्म दिन की खुशियां मनाने वाले सर्व ब्राह्मण कुल भूषण भाई बहिनें, ईश्वरीय स्नेह सम्पन्न मधुर याद के साथ आज 83 वें त्रिमूर्ति शिवजयन्ती की सभी को बहुत-बहुत हार्दिक बधाईयां।
यह शिव जयन्ती का महान पर्व हम सबके अति प्रिय, प्राणों से प्यारे शिव भोलानाथ बाप के अवतरण का यादगार दिन, बाप की सो बच्चों की 83 वीं महाशिवरात्रि का पावन पर्व, सभी ब्रह्मा वत्स खूब धूमधाम से मनाते, सबको बहुत दिल से बधाईयां देते हैं। चारों तरफ सभी स्थानों पर शिवबाबा का ध्वज फैहराते, स्व परिवर्तन से विश्व परिवर्तन की प्रतिज्ञा करते, परमात्म प्रत्यक्षता के लिए सेवाओं के लिए भिन्न-भिन्न प्रोग्राम करते हैं।
इस बार अपने शान्तिवन के प्रांगण में कान्फ्रेन्स हाल के सामने खुले मैदान में बहुत सुन्दर “हेल्थ-वेल्थ-हैपीनेस'' मेले का भव्य आयोजन 1 मार्च से 5 मार्च 2019 तक किया गया है, जिसमें विशाल बर्फानी बाबा का मन्दिर अमरनाथ गुफा, सतयुगी दुनिया के अनेक सुन्दर दृश्य, पुष्पक विमान तथा सतयुगी देवताओं की दिनचर्या आदि चैतन्य देवी देवताओं की सुन्दर रिमझिम दर्शाई गई है। साइलेन्स की अनुभूति के लिए योग रूम तथा कई प्रकार की प्रदर्शनियां आदि लगाई गई हैं। सवेरे के समय बी.के. भाई बहिनें तथा शाम के समय आबू के आस पास से सैकड़ों ग्रामीण जन आकर इस मेले का पूरा आंनद ले रहे हैं। सबको परमात्म अवतरण का दिव्य सन्देश दिया जा रहा है।
इस बार सेवाओं का टर्न इन्दौर ज़ोन (आरती बहन) का है। सेवाधारियों के साथ-साथ काफी संख्या में अन्य स्थानों के लोग भी पहुंचे हुए हैं। एक सप्ताह से चल रहे झण्डारोहण के कार्यक्रम में “पाण्डव भवन, ज्ञान सरोवर, म्यूजियम, ग्लोबल हॉस्पिटल, ट्रामा सेन्टर, संगम भवन, शान्तिवन, मनमोहिनीवन'' आदि में दादियों की उपस्थिति में, विदेश की बड़ी बहिनें तथा अन्य स्थानों से आये हुए भाई बहिनें सम्मिलित हो, खूब खुशियों का अनुभव कर रहे हैं। आप सबने भी अपने-अपने सेवाकेन्द्रों, उपसेवाकेन्द्रों तथा पाठशालाओं आदि में शिवबाबा का ध्वज फैहराते सबसे प्रतिज्ञायें कराते, सबको परमात्म अवतरण का दिव्य सन्देश दिया होगा।
इस ग्रुप में करीब 100 देशों के 400 डबल विदेशी, जो वहाँ की सेवाओं के निमित्त हैं वे सभी पिछले एक सप्ताह से ज्ञान योग की रिट्रीट तथा सेवाओं की प्लैनिंग्स कर रहे हैं। हर परिस्थिति में हम सबकी अवस्था अचल अडोल एकरस रहे, यज्ञ को सम्पन्न बनाने के लिए देहभान वा देह अभिमान की सम्पूर्ण आहुति पड़ जाए, विस्तार को सार में समाकर अपनी और अन्य आत्माओं की सम्भाल कैसे करें, तन की कोई भी परीक्षा में प्रकृतिजीत कैसे रहें.. आदि पर गहन चिंतन के साथ-साथ यज्ञ में मेरा सहयोग और विश्व सेवा की सम्पन्नता आदि पर भी सभी ने गहरे विचार विमर्श किये हैं।
आज बापदादा के इस अवतरण दिवस पर हम सभी ने वीडियो द्वारा शिव जयन्ती के अवसर पर चले हुए अव्यक्त महावाक्य सुने। बापदादा ने सभी को साइलेन्स की शक्ति जमा करने तथा पवित्रता के व्रत को दृढ़ता से पालन करने के लिए विशेष इशारे दिये हैं। यह महावाक्य आप सब अपने-अपने क्लासेज में भी सुनाना जी। अच्छा - सभी को याद.... ओम् शान्ति।
03-03-19 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "अव्यक्त-बापदादा" रिवाइज 05-03-08 मधुबन
आज बापदादा चारों ओर के बच्चों के स्नेह को देख रहे हैं। आप सभी भी स्नेह के विमान में यहाँ पहुंच गये हो। यह स्नेह का विमान बहुत सहज स्नेही के पास पहुंचा देता है। बापदादा देख रहे हैं कि आज विशेष सभी लवलीन आत्मायें परमात्म प्यार के झूले में झूल रही हैं। बापदादा भी चारों ओर के बच्चों के स्नेह में समाये हुए हैं। यह परमात्म स्नेह बाप समान अशरीरी सहज बना देता है। व्यक्त भाव से परे अव्यक्त स्थिति में अव्यक्त स्वरूप में स्थित कर देता है। बापदादा भी हर बच्चे को समान स्थिति में देख हर्षित हो रहे हैं।
आज के दिन सभी बच्चे शिवरात्रि, शिवजयन्ती बाप और अपना जन्मदिन मनाने आये हैं। बापदादा भी अपने-अपने वतन से आप सभी बच्चों का जन्म दिन मनाने पहुंच गये हैं। सारे कल्प में यह जन्म दिन बाप का वा आपका न्यारा और अति प्यारा है। सारे कल्प में कोई का भी बर्थ डे परम आत्मा नहीं मनाते, आत्मा, आत्मा का मनाते हैं लेकिन यह अलौकिक जन्म परम आत्मा आप आत्माओं का मनाते हैं। साथ में इस जन्म की विशेषता और भी अलौकिक है, जो सारे कल्प में हो नहीं सकती। ऐसा कभी नहीं सुना होगा कि बाप और बच्चों का एक ही दिन बर्थ डे बना होता है। तो इस जन्मदिन का यह भी महत्व है कि बाप और बच्चों का एक ही दिन जन्मदिन, आप सभी बाप के साथ मना रहे हो। इस जन्मदिन को शिवजयन्ती भी कहते हैं और शिवरात्रि भी कहते हैं। तो जन्म के साथ कर्तव्य का भी यादगार है। अंधकार मिटने का और प्रकाश फैलने का यादगार है। तो ऐसा अलौकिक जन्म दिन आप बापदादा के साथ मनाने वाले भाग्यवान आत्मायें हो। बाप बच्चों को पदम-पदम गुणा इस दिव्य जन्म की बधाईयां भी दे रहे हैं, दुआयें भी दे रहे हैं और दिल का यादप्यार भी दे रहे हैं। मुबारक हो, पदमगुणा मुबारक हो, मुबारक हो।
भक्त लोग भी इस उत्सव को बड़ी भावना और प्यार से मनाते हैं। आपने जो इस दिव्य जन्म में श्रेष्ठ अलौकिक कर्म किया है, अभी भी कर रहे हो। वह यादगार रूप में चाहे अल्पकाल के लिए अल्प समय के लिए मनाते हैं लेकिन भक्तों की भी कमाल है। यादगार मनाने वालों, यादगार बनाने वालों की भी देखो कितनी कमाल है। जो कापी करने में होशियार तो निकले हैं क्योंकि आपके ही भक्त हैं ना। तो आपकी श्रेष्ठता का फल उन यादगार बनाने वालों को वरदान रूप में मिला है। आप एक जन्म के लिए एक बार व्रत लेते हो, सम्पूर्ण पवित्रता का। कापी तो की है एक दिन के लिए पवित्रता का व्रत भी रखते हैं। आपका पूरा जन्म पवित्र अन्न का व्रत है और वह एक दिन रखते हैं। तो बापदादा आज अमृतवेले देख रहे थे कि आप सबके भक्त भी कम नहीं हैं। उन्हों की भी विशेषता अच्छी रही है। तो आप सभी ने पूरे जन्म के लिए पक्का व्रत चाहे खान-पान का, चाहे मन के संकल्प की पवित्रता का, वचन का, कर्म का, सम्बन्ध-सम्पर्क में आते हुए कर्म का पूरे जन्म के लिए पक्का व्रत लिया है? लिया है या थोड़ा-थोड़ा लिया है? पवित्रता ब्राह्मण जीवन का आधार है। पूज्य बनने का आधार है। श्रेष्ठ प्राप्ति का आधार है। तो जो भी भाग्यवान आत्मायें यहाँ पहुंच गये हैं वह चेक करो कि यह जन्म का उत्सव, पवित्र बनने का चारों प्रकार से, सिर्फ ब्रह्मचर्य की पवित्रता नहीं, लेकिन मन-वचन-कर्म, सम्बन्ध-सम्पर्क में भी पवित्रता। यह पक्का व्रत लिया है? लिया है? जिन्होंने लिया है पक्का, थोड़ा-थोड़ा कच्चा नहीं, वह हाथ उठाओ। पक्का, पक्का? पक्का? कितना पक्का? कोई हिलावे तो, हिलेंगे? हिलेंगे? नहीं हिलेंगे? कभी-कभी तो माया आ जाती है ना, कि नहीं, माया को विदाई दे दी है? या कभी कभी छुट्टी दे देते हो, आ जाती है! चेक करो - तो पक्का व्रत लिया है? सदा का व्रत लिया है? वा कभी कभी का? कभी थोड़ा, कभी बहुत, कभी पक्का, कभी कच्चा - ऐसे तो नहीं हो ना! क्योंकि बापदादा से प्यार में सभी 100 परसेन्ट से भी ज्यादा मानते हैं। अगर बापदादा पूछते हैं कि बाप से प्यार कितना है? तो सब बहुत उमंग-उत्साह से हाथ उठाते हैं। प्यार में परसेन्टेज कम ही की होती है, मैजारिटी की है। तो जैसे प्यार में पास हो, बापदादा भी मानते हैं कि मैजारिटी प्यार में पास हैं, लेकिन पवित्रता के व्रत में चारों रूप में मन्सा-वाचा-कर्मणा, सम्बन्ध-सम्पर्क चारों ही रूप में सम्पूर्ण पवित्रता का व्रत निभाने में परसेन्टेज आ जाती है। अभी बापदादा क्या चाहते हैं? बापदादा यही चाहते कि जो प्रतिज्ञा की है, समान बनने की, तो हर एक बच्चे की सूरत में बाप की मूर्त दिखाई दे। हर एक बोल में बाप समान बोल हो, बापदादा के बोल वरदान रूप बन जाते हैं। तो आप सब यह चेक करो, हमारी सूरत में बाप की मूर्त दिखाई देती है? बाप की मूर्त क्या है? सम्पन्न, सब बात में सम्पन्न। ऐसे हर एक बच्चे के नयन, हर एक बच्चे का मुखड़ा बाप समान है? सदा मुस्कराता हुआ चेहरा है? कि कभी सोच वाला, कभी व्यर्थ संकल्पों की छाया वाला, कभी उदास, कभी बहुत मेहनत वाला, ऐसा चेहरा तो नहीं है? सदा गुलाब, कभी गुलाब जैसा खिला हुआ चेहरा, कभी और नहीं बन जाये क्योंकि बापदादा ने यह भी जन्मते ही बता दिया है कि माया आपके इस श्रेष्ठ जीवन का सामना करेगी। लेकिन माया का काम है आना, आप सदा पवित्रता के व्रत लेने वाली आत्माओं का काम है दूर से ही माया को भगाना।
बापदादा ने देखा है कई बच्चे माया को दूर से भगाते नहीं, माया आ जाती, आ जाने दे देते हैं अर्थात् माया के प्रभाव में आ जाते हैं। अगर दूर से नहीं भगाते तो माया की भी आदत पड़ जाती है क्योंकि वह जान जाती है कि यहाँ हमको बैठने देंगे, बैठने देने की निशानी है माया आती है, सोचते हैं कि माया है, लेकिन फिर भी क्या सोचते? अभी सम्पूर्ण थोड़ेही बने हैं, कोई नहीं सम्पूर्ण बना है। अभी तो बन रहे हैं, बन जायेंगे, गें गें करने लग जाते हैं तो माया को बैठने की आदत पड़ जाती है। तो आज जन्मदिन तो मना रहे हैं, बाप भी दुआयें, मुबारक तो दे रहे हैं लेकिन बाप हर एक बच्चे को, लास्ट नम्बर वाले बच्चे को भी किस रूप में देखने चाहते हैं? लास्ट नम्बर भी बाप का प्यारा तो है ना! तो बाप लास्ट नम्बर वाले बच्चे को भी सदा गुलाब देखने चाहते हैं, खिला हुआ। मुरझाया हुआ नहीं। मुरझाने का कारण है थोड़ा सा अलबेलापन। हो जायेगा, देख लेंगे, कर ही लेंगे, पहुंच ही जायेंगे.... तो यह गें गें की भाषा नीचे गिरा देती है। तो चेक करो - कितना समय बीत गया, अभी समय की समीपता का और अचानक होने का इशारा तो बापदादा ने दे ही दिया है, दे रहा है नहीं, दे ही दिया है। ऐसे समय के लिए एवररेडी, अलर्ट आवश्यक है। अलर्ट रहने के लिए चेक करो - हमारा मन और बुद्धि सदा क्लीन और क्लियर है? क्लीन भी चाहिए, क्लियर भी चाहिए। इसके लिए समय पर विजय प्राप्त करने के लिए मन में, बुद्धि में कैचिंग पावर और टचिंग पावर दोनों बहुत आवश्यक हैं। ऐसे सरकमस्टांश आने हैं जो कहाँ दूर भी बैठे हो लेकिन क्लीन और क्लियर मन और बुद्धि होगा तो बाप का इशारा, डायरेक्शन, श्रीमत जो मिलनी है, वह कैच कर सकेंगे। टच होगा यह करना है, यह नहीं करना है, इसीलिए बापदादा ने पहले भी सुनाया है तो वर्तमान समय साइलेन्स की शक्ति अपने पास जितनी हो सके जमा करो। जब चाहो, जैसे चाहो वैसे मन और बुद्धि को कन्ट्रोल कर सको। व्यर्थ संकल्प स्वप्न में भी टच नहीं करे, ऐसा माइन्ड कन्ट्रोल चाहिए इसीलिए कहावत है मन जीते जगतजीत। जैसे स्थूल कर्मेन्द्रिय हाथ हैं, जहाँ चाहो जब तक चाहो तब तक आर्डर से चला सकते हो। ऐसे मन और बुद्धि की कन्ट्रोलिंग पावर आत्मा में हर समय इमर्ज हो। ऐसे नहीं योग के समय अनुभव होता है लेकिन कर्म के समय, व्यवहार के समय, सम्बन्ध के समय अनुभव कम हो। अचानक पेपर आने हैं क्योंकि फाइनल रिजल्ट के पहले भी बीच-बीच में पेपर लिये जाते हैं।
तो इस बर्थ डे पर विशेषता क्या करेंगे? साइलेन्स की शक्ति जितना जमा कर सको, एक सेकण्ड में स्वीट साइलेन्स की अनुभूति में खो जाओ क्योंकि साइन्स और साइलेन्स, साइंस भी अति में जा रही है। तो साइंस पर साइलेन्स के शक्ति की विजय परिवर्तन करेगी। साइलेन्स की शक्ति से दूर बैठे किस आत्मा को सहयोग भी दे सकते हो, सकाश दे सकते हो। भटका हुआ मन शान्त कर सकते हो। ब्रह्मा बाबा को देखा जब भी कोई अनन्य बच्चा थोड़ा हलचल में वा शारीरिक हिसाब-किताब में रहा तो सवेरे-सवेरे उठकर बच्चे को साइलेन्स के शक्ति की सकाश दिया और वह अनुभव करते थे। तो अन्त में इस साइलेन्स की सेवा का सहयोग देना पड़ेगा। सरकमस्टांश अनुसार यह बहुत ध्यान में रखो, साइलेन्स की शक्ति या अपने श्रेष्ठ कर्मो की शक्ति जमा करने की बैंक सिर्फ अभी खुलती है और कोई जन्म में जमा करने की बैंक नहीं है। अभी अगर जमा नहीं किया फिर बैंक ही नहीं होगी तो किसमें जमा करेंगे! इसलिए जमा की शक्ति को जितना इकट्ठा करने चाहो उतना कर सकते हो। वैसे लोग भी कहते हैं जो करना है वह अब कर लो। जो सोचना है अब सोच लो। अभी जो भी सोचेंगे वह सोच, सोच रहेगा और कुछ समय के बाद जब समय की सीमा नजदीक आयेगी तो सोच पश्चाताप के रूप में बदल जायेगा। यह करते थे, यह करना था.... तो सोच नहीं रहेगा, पश्चाताप में बदल जायेगा, इसीलिए बापदादा पहले से ही इशारा दे रहा है। साइलेन्स की शक्ति, एक सेकण्ड में कुछ भी हो, साइलेन्स में खो जाओ। यह नहीं पुरुषार्थ कर रहे हैं! जमा का पुरुषार्थ अभी कर सकते हो। करना ही है।
डबल विदेशी क्या समझते हैं? करेंगे? करेंगे? डबल विदेशी करेंगे? बहुत अच्छा। अगर डबल विदेशी एक्जैम्पुल बन जायें तो बापदादा बहुत-बहुत दुआओं की वर्षा करेगा। क्या सोचा डबल विदेशियों ने? एक्जैम्पुल बनेंगे? बनेंगे तो दो हाथ उठाओ। कमाल है, बापदादा डबल विदेशियों को अभी से हिम्मत और उमंग-उत्साह की दुआयें दे रहे हैं। भारत वाले भी कम नहीं हैं, वह भी अन्दर-अन्दर सोच रहे हैं। वह सोचते हैं करके ही दिखायेंगे। ठीक है ना भारत वाले! देखो, भारत ने क्या नहीं किया? भारत वाले बाप को भी ऊपर से नीचे ले आये। कमाल तो की ना भारत वालों ने। उसके आगे यह क्या बड़ी बात है। अच्छा।
अभी बापदादा कौन सी ड्रिल कराने चाहते हैं? एक सेकण्ड में शान्ति की शक्ति स्वरूप बन जाओ। एकाग्र बुद्धि, एकाग्र मन। सारे दिन में एक सेकण्ड बीच-बीच में निकाल अभ्यास करो। साइलेन्स का संकल्प किया और स्वरूप हुआ। इसके लिए समय की आवश्यकता नहीं। एक सेकण्ड का अभ्यास करो, साइलेन्स। अच्छा।
सेवा का टर्न - इन्दौर ज़ोन का है:- अच्छा है, शक्ति सेना ज्यादा है। पाण्डव भी कम नहीं हैं। तो देखो नाम ही है इन्डोर, सदा अन्तर्मुखता की तपस्या में रहने वाले। अच्छा है, देखो इन्दौर की स्थापना में विशेषता है। जानते हो ना - ब्रह्मा बाप के अव्यक्त होने से पहले ब्रह्मा बाप की प्रेरणा से यह इन्दौर का फाउण्डेशन पड़ा है। कितना लक्की हैं और ब्रह्मा बाप की आशाओं को पूर्ण कर रहे हैं ना! जिस उमंग से, जिस विशेषता से बापदादा ने प्रेरणा दी उसी प्रेरणा प्रमाण सभी बापदादा को रेसपाण्ड कर रहे हैं ना! अच्छा है - सेवा का उमंग-उत्साह अच्छा रहा है और रहता रहेगा। अभी इन्दौर कमाल करे, क्या कमाल करेंगे टीचर्स? पहला नम्बर लेंगे! परिवर्तन। जो बापदादा ने कहा है उसमें पहला नम्बर इन्दौर ले। लेंगे! लेंगे? यही सोचो हम नहीं करेंगे तो कौन करेगा, हम भी करेंगे। ऐसे उमंग उत्साह सदा रखो। तो कर सकते हो, संग"न में बहुत ताकत होती है। अच्छा। नम्बरवन विजयी भव का वरदान सदा याद रखना।
डबल विदेशी:- बापदादा ने देखा है कि डबल विदेशी अपना नियम बहुत अच्छा निभाते हैं। आना है तो आते ही हैं और सभी ने मधुबन के सीजन की रौनक बढ़ाने का संकल्प कर लिया है तो हर टर्न में देखा गया है डबल विदेशियों का श्रृंगार मधुबन में होता ही है। ताली बजाओ। अच्छा है। दिनप्रतिदिन विदेश के सेवास्थानों में भी एक दो को उमंग-उत्साह दिलाने लिए मिलन मनाते रहते हैं। बापदादा ने देखा उमंग-उल्हास दिलाने में इस समय एक दो के स्थान में भी जाकर शुभ भावना रखने का अच्छा कर रहे हैं। सिस्टम भी अच्छी बनाते रहते हैं। बापदादा खुश होते हैं कि कैसे भी पहुंच जाते हैं। दूरदेशी नहीं लगते हैं, जैसे यहाँ के ही लगते हैं। वैसे तो सबसे दूरदेश वाला कौन है? डबल फारेनर्स कि बापदादा? तो दूरदेशी को अपने हमजिन्स दूरदेशी प्यारे लगते हैं।
अच्छा। चारों ओर के जन्म उत्सव मनाने वाले भाग्यवान आत्माओं को सदा उत्साह में रहने वाले संगमयुग के उत्सव को मनाने वाले, ऐसे सर्व उमंग उत्साह के पंखों से उड़ने वाले बच्चों को, सदा मन और बुद्धि को एकाग्रता के अनुभवी बनाने वाले महावीर बच्चों को, सदा समान बनने के उमंग को साकार रूप में लाने वाले फॉलो फादर करने वाले बच्चों को, सदा एक दो के स्नेही सहयोगी हिम्मत दिलाने वाले बाप से मदद का वरदान दिलाने वाले वरदानी बच्चों को, महादानी बच्चों को बापदादा का यादप्यार और पदम पदम पदम पदमगुणा मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो।
शिवबाबा का झण्डा लहराने के पश्चात दादी जानकी जी ने सभी को शिव जयन्ती की बधाईयां वा शुभ कामनायें दी:-
आज शिव जयन्ती की वन्डरफुल मुरली सुनी। कभी ऐसे नहीं हुआ होगा जो बाप और बच्चों का जन्म दिन एक ही हो। सभी को शिव जयनती की मुबारक।