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1 Nov 2020
"सच्चे दिल से बाप व परिवार के स्नेही बन मेहनत मुक्त बनने का वायदा करो और फायदा लो"
1 November 2020 · हिंदी
01-11-2020 Avyakt BapDada 01-11-2020
ओम् शान्ति 1-11-20 मधुबन
प्राणप्यारे अव्यक्त बापदादा के अति स्नेही, सदा अपनी चमकीली फरिश्ता ड्रेस द्वारा अव्यक्ति रूहरिहान का अनुभव करने वाले, सभी स्वमानधारी निमित्त टीचर्स बहिनें तथा सर्व ब्राह्मण कुल भूषण भाई बहिनें, ईश्वरीय स्नेह सम्पन्न मधुर याद स्वीकार करना जी।
बाद समाचार - प्यारे बापदादा की यह मंगल-मिलन मनाने की अलौकिक सीज़न भी बहुत सुखद अनुभूतियां करा रही है। सभी बाबा के बच्चे ऑनलाइन वीडियो द्वारा अच्छी भासना व पालना का अनुभव कर रहे हैं। अभी यह दूसरा टर्न इन्दौर ज़ोन (आरती बहन) का है। थोड़े ही भाई बहिनें शान्तिवन में अपने साधनों से पहुंचे हैं। सभी एकान्त शान्त वातावरण में योग की गहन अनुभूतियां कर रहे हैं।
बापदादा सभी बच्चों को ऊंचे से ऊंचा स्वमान याद दिलाते और कहते हैं, बच्चे सदा स्वमान में रहकर सबको सम्मान देते चलो। यह स्वमान ही देह-अभिमान को मिटाने वाला है। ऐसे मीठे अव्यक्ति महावाक्य सुनते सभी में तीव्र पुरुषार्थ की लहर आ जाती है। मीठे बाबा ने तो हम बच्चों को ड्रामा का ऐसा पक्का पाठ पढ़ाया है, जो स्थिति को अचल-अडोल एकरस बना देता है।
अभी तो त्योहारों की सीज़न है। इस बार चारों ओर कई सेवाकेन्द्रों पर देवियों की बहुत सुन्दर-सुन्दर झांकियां सजाई गई और ऑनलाइन सभी भक्तों को देवियों के दर्शन करवाये गये। यह साइंस भी सेवा का बहुत अच्छा साधन बना हुआ है। कैसी भी परिस्थितियों में बाबा अपनी बेहद की सेवायें तो करा ही रहे हैं। अभी फिर धनतेरस, दीपावली, नया वर्ष और भैया दूज के यादगार पर्व समीप आ रहे हैं। सभी को इनएडवांस इन उमंग-उत्साह भरे यादगार त्योहारों की बहुत-बहुत बधाई हो। इस वर्ष सभी दीपराज़ बाप के साथ मंगल-मिलन मनाते विशेष योग तपस्या करना जी। बाकी ड्रामा की हर सीन देखते, वाह बाबा वाह! वाह आपकी प्रभू लीला वाह! के गीत गाते, सदा हर्षित रह उड़ती कला में उड़ते चलो। हर सीन में बहुत कुछ कल्याण समाया हुआ है। अच्छा - सभी को याद... ओम् शान्ति।
1-11-20 “अव्यक्त-महावाक्य'' ओम् शान्ति वीडियो रिवाइज 15-11-05 मधुबन
आज बापदादा अपने चारों ओर के श्रेष्ठ स्वराज्य अधिकारी, स्वमानधारी बच्चों को देख रहे हैं। बाप ने बच्चों को अपने से भी ऊंचा स्वमान दिया है। हर एक बच्चे को पांव में गिरने से छुड़ाए सिर का ताज बना दिया। स्वयं को सदा ही प्यारे बच्चों का सेवाधारी कहलाया। इतनी बड़ी अथॉरिटी का स्वमान बच्चों को दिया। तो हर एक अपने को इतना स्वमानधारी समझते हैं? स्वमानधारी का विशेष लक्षण क्या होता है? जितना जो स्वमानधारी होगा उतना ही सर्व को सम्मान देने वाला होगा। जितना स्वमानधारी उतना ही निर्मान, सर्व का स्नेही होगा। स्वमानधारी की निशानी है - बाप का प्यारा साथ में सर्व का प्यारा। हद का प्यारा नहीं, बेहद का प्यारा। जैसे बाप सर्व के प्यारे हैं, चाहे एक मास का बच्चा है, चाहे आदि रत्न भी है लेकिन हर एक मानता है मैं बाबा का, बाबा मेरा। यह निशानी है सर्व के प्यारेपन की, श्रेष्ठ स्वमान की, क्योंकि ऐसे बच्चे फालो फादर करने वाले हैं। देखो, बाप ने हर वर्ग के बच्चों को, छोटे बच्चों से लेके, बुजुर्ग समान बच्चों को स्वमान दिया। यूथ को विनाशकारी से विश्व कल्याणकारी का स्वमान दिया। महान बनाया। प्रवृत्ति वालों को महात्मायें, बड़े-बड़े जगतगुरू उनसे भी ऊंचा, प्रवृत्ति में रहते, पर-वृत्ति वाले महात्माओं का भी सिर झुकाने वाला बनाया। कन्याओं को शिव शक्ति स्वरूप का स्वमान याद दिलाया, बनाया। बुजुर्ग बच्चों को ब्रह्मा बाप की हमजिन्स अनुभवी का स्वमान दिया। ऐसे ही स्वमानधारी बच्चे हर आत्मा को ऐसे स्वमान से देखेंगे। सिर्फ देखेंगे नहीं लेकिन सम्बन्ध-सम्पर्क में आयेंगे, क्योंकि स्वमान देह-अभिमान को मिटाने वाला है। जहाँ स्वमान होगा वहाँ देह का अभिमान नहीं होगा। बहुत सहज साधन है, देह-अभिमान को मिटाने का - सदा स्वमान में रहना। सदा हर एक को स्वमान से देखना। चाहे प्यादा है, 16 हजार की माला में लास्ट नम्बर भी है लेकिन लास्ट नम्बर में भी ड्रामानुसार बाप द्वारा कोई न कोई विशेषता है। स्वमानधारी विशेषता को देख स्वमान देते हैं। उनकी दृष्टि में, वृत्ति में, कृत्ति में, हर एक की विशेषता समाई हुई होती है। जो भी बाप का बना वह विशेष आत्मा है, चाहे नम्बरवार है लेकिन दुनिया के कोटों में कोई है। ऐसे अपने को सभी विशेष आत्मा समझते हो? स्वमान में स्थित रहना है। देह-अभिमान में नहीं, स्वमान।
बाप को हर एक बच्चे से प्यार क्यों है? क्योंकि बाप जानते हैं मेरे को पहचान, मेरे बने हैं ना। चाहे आज इस मेले में भी पहली बार आये हैं, फिर भी बाबा कहा, तो बाप के प्यार के पात्र हैं। बापदादा को चारों ओर के सर्व बच्चे सर्व से प्यारे हैं। ऐसे ही फालो फादर। कोई भी अप्रिय नहीं, सर्व प्रिय हैं। देखो, जो भी बच्चे मेरा बाबा कहते हैं, तो मेरापन किसने लाया? स्नेह ने। जो भी यहाँ बैठे हैं, वह समझते हो कि स्नेह ने बाप का बना लिया। बाप का स्नेह चुम्बक है, स्नेह के चुम्बक से बाप के बन गये। दिल का स्नेह, कहने मात्र स्नेह नहीं। दिल का स्नेह इस ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन है। मिलने क्यों आते हो? स्नेह ले आया है ना! जो भी सभी बैठे हैं, आये हैं, क्यों आये हो? स्नेह ने खींचा ना। स्नेह भी कितना है? 100 परसेन्ट है वा कम है? जो समझते हैं स्नेह में हम 100 परसेन्ट हैं, वह हाथ उठाओ। स्नेह में 100 परसेन्ट। थोड़ा भी कम नहीं? अच्छा। तो इतना ही स्नेह आपस में ब्राह्मणों में है? इसमें हाथ उठवायें? इसमें परसेन्टेज है। जैसे बाप का सभी से स्नेह है, ऐसे ही बच्चों का भी सर्व से स्नेह, सर्व के स्नेही। दूसरे की कमजोरी को देखो नहीं। अगर कोई संस्कार के वशीभूत है, तो फालो किसको करना है? वशीभूत वाले को? आप वशीकरण मन्त्र देने वाले हो, वशीभूत से छुड़ाने वाला मत्र, छुड़ाने वाले हो ना! या देखने वाले हो? कि दिखाई दे देता है? अगर कोई खराब चीज़ दिखाई भी देती है, तो क्या करते हैं? देखते रहते हैं या किनारा कर लेते हैं? क्योंकि बापदादा ने देखा कि जो दिल के स्नेही हैं, बाप के दिल के स्नेही, सर्व के स्नेही अवश्य होंगे। दिल का स्नेह बहुत सहज विधि है सम्पन्न और सम्पूर्ण बनने की। चाहे कोई कितना भी ज्ञानी हो, लेकिन अगर दिल का स्नेह नहीं है तो ब्राह्मण जीवन में रमणीक जीवन नहीं होगी। रूखी जीवन होगी क्योंकि ज्ञान में, स्नेह बिना अगर ज्ञान है तो ज्ञान में प्रश्न उठते हैं क्यों, क्या! लेकिन स्नेह ज्ञान सहित है तो स्नेही सदा स्नेह में लवलीन रहते हैं। स्नेही को याद करने की मेहनत करनी नहीं पड़ती। सिर्फ ज्ञानी है, स्नेह नहीं है तो मेहनत करनी पड़ती है। वह मेहनत का फल खाता, वह मुहब्बत का फल खाता। ज्ञान है बीज लेकिन पानी है स्नेह। अगर बीज को स्नेह का पानी नहीं मिलता तो फल नहीं निकलता है।
तो आज बापदादा सर्व बच्चों के दिल का स्नेह चेक कर रहे थे। चाहे बाप से, चाहे सर्व से। तो आप सभी अपने को क्या समझते हैं? स्नेही हैं? हैं स्नेही? जो समझते हैं दिल के स्नेही हैं, वह हाथ उठाओ। (मैजारिटी सभी ने हाथ उठाया) अच्छा-सर्व के स्नेही। बाप के तो दिल के स्नेही हैं, सर्व के स्नेही हो? सर्व के? हर एक समझता है - यह मेरा भाई बहन है? हर एक समझता है यह मेरा है? समझता है? कि कोई-कोई समझता है? जैसे बाप के स्नेह में सभी हाथ उठाते हैं, हाँ बाप के स्नेही हैं, ऐसे आप हर एक के लिए हाथ उठायेंगे, कि हाँ यह सर्व के स्नेही हैं? यह सर्टीफिकेट मिलेगा? क्योंकि बापदादा ने पहले भी कहा था कि सिर्फ बाप से सर्टीफिकेट नहीं लेना है, ब्राह्मण परिवार से भी लेना है क्योंकि इस समय बाप धर्म और राज्य दोनों साथ-साथ स्थापन कर रहे हैं। राज्य में सिर्फ बाप नहीं होंगे, परिवार भी होगा। बाप के भी प्यारे, परिवार के भी प्यारे।
ज्ञानी बने हो लेकिन साथ में स्नेही बनना भी जरूरी है। स्वमान में रहना और सम्मान देना, यह दोनों जरूरी हैं। बाप ने ब्राह्मण जन्म लेते ही हर एक बच्चे को सम्मान दिया, तब तो ऊंचे बनें। इस एक जन्म में सम्मान देना है और सारा कल्प उसकी प्रालब्ध सम्मान प्राप्त होता है। आधाकल्प राज्य अधिकारी का सम्मान मिलता है, आधाकल्प भक्ति में भक्तों द्वारा सम्मान मिलता है। लेकिन इसका, सारे कल्प का आधार है इस एक जन्म में सम्मान देना, सम्मान लेना।
अच्छा-डबल फारेनर्स भी आये हुए हैं। होशियार हैं डबल फारेनर्स। कोई भी टर्न छोड़ते नहीं हैं। अच्छा है। चांस लेने वाले को चांसलर कहते हैं। तो चांस लेने में होशियार हैं। डबल फारेनर्स को विशेष बापदादा एक बात की विशेष मुबारक देते हैं। कौन सी? जो कहाँ-कहाँ बिखर गये, देश भी बदल गया, धर्म भी कईयों का बदल गया, कल्चर भी बदल गया लेकिन बदलते हुए पहचानने की आंख बहुत तेज निकली, जो भिन्न होते भी पहचानने में होशियार निकले। पहचान लिया, बाप को अपना बना दिया। परिवार को अपना बना लिया। ब्राह्मण कल्चर को अपना बना लिया। तो होशियार निकले ना! और बापदादा सदा यह विशेषता देखते हैं कि बाप से भी प्यार है लेकिन सेवा से भी बहुत प्यार है। सेवा से प्यार होने के कारण बहुत बिजी होते हो ना! डबल सेवा करते हो। डबल भी नहीं, तीन सेवा करते हो, एक लौकिक जॉब, एक ज्ञान की सेवा और साथ में बापदादा ने मैजॉरिटी को देखा है कि सेन्टर में भी कर्मणा सेवा में सहयोगी बनते हैं। तो बापदादा जब देखते हैं तीनों तरफ की सेवा में बच्चे बिजी रहते हैं, तो खुश होते हैं और दिल ही दिल में मुबारक देते रहते हैं। अभी-अभी भी बापदादा देख रहे हैं चारों ओर विदेश में कोई रात में, कोई दिन में मिलन मना रहे हैं।
स्नेह माना लवलीन। याद करना नहीं पड़ता, याद भुलाना मुश्किल होता। अगर मेहनत करनी पड़ती है तो दिल के स्नेह को चेक करो - कहाँ लीकेज तो नहीं है? चाहे लगाव कोई व्यक्ति से, चाहे व्यक्ति की विशेषता से, चाहे कोई साधन से, सैलवेशन से, एकस्ट्रा सैलवेशन, कायदे प्रमाण सैलवेशन ठीक है, लेकिन एकस्ट्रा सैलवेशन से भी प्यार होता है, लगाव होता है। वह सैलवेशन याद आती रहेगी। उसकी निशानी है - कहाँ भी लीकेज होगी तो सदा जीवन में किसी भी कारण से सन्तुष्टता की अनुभूति नहीं होगी। कोई न कोई कारण असन्तुष्टता का अनुभव करायेंगे। और सन्तुष्टता जहाँ होगी उसकी निशानी सदा प्रसन्नता होगी। सदा रूहानी गुलाब के मुआफिक मुस्कराता रहेगा, खिला हुआ रहेगा। मूड आफ नहीं होगी, सदा डबल लाइट। तो समझा मेहनत से अभी बच जाओ। बापदादा को बच्चों की मेहनत नहीं अच्छी लगती। आधाकल्प मेहनत की है, अभी मौज करो। मुहब्बत में लवलीन हो, अनुभव के मोती ज्ञान सागर के तले में अनुभव करो। सिर्फ डुबकी लगाकर सागर से निकल नहीं आओ, लवलीन रहो।
सभी ने वायदा तो किया है ना! कि साथ रहेंगे, साथ चलेंगे? वायदा किया है? साथ चलेंगे या पीछे-पीछे आयेंगे? जो साथ चलने के लिए तैयार हैं वह हाथ उठाओ। तैयार हैं, सोचकर उठाओ, तैयार हैं अर्थात् बाप समान हैं। कौन साथ चलेगा? समान साथ चलेगा ना! तो चलेंगे? एवररेडी? पहली लाइन एवररेडी? कल चलने के लिए आर्डर करें, चलेंगे? अच्छा प्रवृत्ति वाले चलेंगे? बच्चे नहीं याद आयेंगे? मातायें चलेंगी? मातायें तैयार हैं? कोई भी चीज़ याद नहीं आयेगी? टीचर्स को सेन्टर याद आयेगा, जिज्ञासु याद आयेंगे? नहीं याद आयेंगे? अच्छा। सभी निर्मोही हो गये हो? फिर तो बहुत अच्छी बात है। फिर तो मेहनत नहीं करनी पड़ेगी ना।
आज बापदादा सभी को चाहे सम्मुख बैठे हैं, चाहे दूर बैठे भी बाप के दिल में बैठे हैं, सभी को आज का दिन मेहनत मुक्त बनाने चाहते हैं। बनेंगे? ताली तो बजा दी, बनेंगे? कल से कोई दादियों के पास नहीं आयेगा। मेहनत नहीं करायेंगे? मौज से मिलेंगे। ज़ोन हेड के पास नहीं जायेंगे, कम्पलेन नहीं करेंगे, कम्पलीट। ठीक है? अभी हाथ उठाओ। देखो सोच के हाथ उठाना, ऐसे नहीं उठा लेना। कोई कम्पलेन नहीं, कोई मेरा-मेरा नहीं, कोई मेरा नहीं। मैं भी नहीं, मेरा भी नहीं, खत्म। देखो वायदा तो किया है, अच्छा है मुबारक हो लेकिन क्या है, वायदे का फायदा नहीं उठाते हो। वायदा बहुत जल्दी कर लेते हो लेकिन फायदा उठाने के लिए रोज़ एक तो रियलाइजेशन दूसरा रिवाइज करो, वायदे को रोज़ रिवाइज करो क्या वायदा किया? अमृतवेले मिलने के बाद वायदा और फायदा दोनों के बैलेन्स का चार्ट बनाओ। वायदा क्या किया? और फायदा क्या उठा रहे हैं? रियलाइज़ करो, रिवाइज करो, बैलेन्स हो जायेगा तो ठीक हो जायेगा। बापदादा सभी बच्चों को देख गीत गाते हैं - वाह! बच्चे वाह! अच्छा - अभी क्या करना है?
सेवा का टर्न इन्दौर ज़ोन का है:- अच्छा है हर ज़ोन को चांस मिलता है, विशेष चांस मिलने से वायुमण्डल का फायदा, यज्ञ सेवा के पुण्य का खाता और सेवा से सर्व ब्राह्मणों से सम्बन्ध-सम्पर्क का ईश्वरीय प्यार का नाता बढ़ता है। तो बहुत अच्छा कर रहे हैं और कल से तो जाना भी शुरू हो जायेगा। तो बहुत अच्छा किया, सेवा का बल सदा के लिए भरके जाना। अच्छा है। सेवा का चांस तो लिया अब जो वायदा करके जा रहे हो, उसका फायदा विशेष सेवा के रिटर्न में देते रहना। वायदे का फायदा उठाना। सिर्फ वायदा नहीं, फायदा। अच्छा।
सभी ने मेहनत मुक्त का वायदा तो किया है ना! (सभी ने हाथ उठाया) अच्छा - इनका फोटो निकालो। अभी एक मिनट के लिए अपने दिल से इस वायदे को दृढ़ता का अण्डरलाइन लगाओ। अपने मन में पक्का करो। (ड्रिल) अच्छा।
सर्व चारों ओर के स्वमानधारी बच्चों को, सदा बाप के दिल के स्नेही, सर्व के स्नेही श्रेष्ठ आत्माओं को, सदा मेहनत मुक्त, जीवनमुक्त अनुभव करने वाले तीव्र पुरुषार्थी बच्चों को, सदा वायदा और वायदे का फायदा लेने वाले, बैलेन्स रखने वाले ब्लिसफुल बच्चों को, सदा मौज में रहने वाले, मौज में औरों को भी रहाने वाले, ऐसे संगमयुगी श्रेष्ठ भाग्य के अधिकारी बच्चों को बापदादा का यादप्यार और दिलाराम के दिल की दुआयें स्वीकार हों। यादप्यार और नमस्ते।