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18 Oct 2020
"मन्सा सेवा द्वारा आत्माओं को अंचली देने की सेवा करते , बहुतकाल से तीव्र पुरुषार्थ कर एवररेडी रहो तो माला का मणका बन जायेंगे "
18 October 2020 · हिंदी
18-10-2020 Avyakt BapDada 18-10-2020
ओम् शान्ति 18-10-20 मधुबन
प्राणप्यारे अव्यक्तमूर्त मात-पिता बापदादा के अति लाडले, सदा परमात्म स्नेह में समाये हुए निमित्त टीचर्स बहिनें तथा देश विदेश के सर्व ब्राह्मण कुल भूषण भाई बहिनें, ईश्वरीय स्नेह सम्पन्न मधुर याद स्वीकार करना जी।
बाद समाचार - ड्रामा में यह नये प्रकार का “अव्यक्त-मिलन'' भी हर बच्चे में नया उमंग-नया उत्साह भर रहा है। देखो, चारों ओर बाबा के बच्चे ऑनलाइन वीडियो द्वारा अव्यक्त मिलन मनाते कितना हर्षित हो रहे हैं। सभी सूक्ष्म रूप से अपने-अपने बुद्धि के विमान द्वारा मधुबन घर में पहुंचे हुए हैं। यह पहला टर्न यू.पी. से प्रारम्भ हुआ है। वहाँ की कुछ मुख्य टीचर्स व भाई शान्तिवन में 3 दिन की तपस्या भट्ठी कर रहे हैं। सभी अपनी और परिवार की सुरक्षा के लिए सोशल डिस्टेंस का भी ध्यान रखते और मास्क भी पहनकर रखते हैं। यह भी ड्रामा की नई सीन सभी साक्षीदृष्टा बन देखते, वाह बाबा वाह! वाह ड्रामा वाह! के गीत गाते खुश हो रहे हैं। सब तरफ साइंस के साधनों द्वारा बहुत अच्छी अनुभूतियां कर रहे हैं। आज मीठे बाबा ने भी विश्व सेवक बच्चों को वाचा सेवा के साथ मन्सा सेवा पर विशेष ध्यान खिंचवाया है। सभी भाई बहिनें इसका अभ्यास तो कर ही रहे हैं। बाबा कहते बच्चे अब मायाजीत, मनजीत, जगतजीत बनकर सदा एवररेडी रहो। जब बाप आपका टीचर है तो समय को टीचर नहीं बनाना, पहले से ही तीव्र पुरुषार्थ कर पास विद आनर बन जाना। ऐसे मीठे प्रेरणादायक महावाक्य सुनकर, सभी इसी होमवर्क प्रमाण विशेष पुरुषार्थ करना जी।अच्छा - सभी को बहुत-बहुत याद.... ओम् शान्ति।
18-10-20 ओम् शान्ति “अव्यक्त महावाक्य'' वीडियो - 17-02-11 मधुबन''
आज स्नेह के सागर अपने स्नेही बच्चों से मिलने आये हैं। बच्चों ने याद किया मेरे बाबा आ जाओ तो बाप कहते हैं मेरे स्नेही बच्चे, स्नेह में ऐसा आकर्षण है जो हर बच्चे ने बाप को अपना बनाया और बाप ने हर बच्चे को मेरे बच्चे कहते अपने में समाया। कमाल है, बच्चों ने कहा मेरे बाबा तो मेरे शब्द में इतना स्नेह भरा हुआ है जो बाप ने भी कहा मेरे बच्चे, स्नेह क्या से क्या बना देता है। हर बच्चे के मस्तक में आज स्नेह की लहरें लहरा रही हैं, यह देख बापदादा हर्षित हो रहे हैं। स्नेह ही दिल को अपना बनाने वाला साधन है। तो हर एक बच्चे के अन्दर आज स्नेह की लहरें लहराती हुई देख-देख बापदादा भी खुश हो रहे हैं।
अभी-अभी 5 मिनट के लिए एक ड्रिल बापदादा सबको करा रहे हैं। अपने मन्सा शक्ति से सृष्टि में जो भी आपके भक्त वा अनेक दु:खी अशान्त आत्मायें आपको याद कर रही हैं, हे हमारे पूर्वज हमें थोड़े समय के लिए भी शान्ति दे दो, जरा सा सुख की अंचली दे दो, बचाओ ऐसी आत्माओं को यहाँ बैठे हुए इमर्ज करो, आवाज सुनने आ रहा है! बचाओ, बचाओ..., तो ऐसी आत्माओं को अपने मन्सा शक्ति द्वारा सुख शान्ति की किरणें पहुंचाओ। यह मन्सा सेवा सारे दिन में बार-बार करते रहो क्योंकि बाप के साथ आप बच्चे भी विश्व सेवक हो। सारा दिन वाणी द्वारा जैसे सेवा के निमित्त बनते हो ऐसे ही बीच-बीच में मन्सा सेवा का भी अभ्यास करते चलो। इसमें आपका अपना भी फायदा है क्योंकि अगर आपका मन सदा सेवा में बिजी रहेगा तो आपके पास जो बीच-बीच में माया फालतू संकल्प वा व्यर्थ संकल्प करती है, उससे बच जायेंगे। मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। अभी बापदादा पूछते हैं कैसे हो? तो क्या जवाब देते हो? पुरुषार्थ है लेकिन कभी कभी...! सदा का पुरुषार्थ नहीं चल रहा है। तो बापदादा अभी सभी बच्चों का यह रिकार्ड देखने चाहते हैं, यह कभी-कभी का शब्द समाप्त हो जाए। क्या यह हो सकता है, कभी-कभी समाप्त हो जाये? समय पर तैयार हो जायेंगे? हो रहे हैं, होना ही है.., इसके बजाए अभी एवररेडी बन सकते हैं? क्यों? एवररेडी रहने का अभ्यास मायाजीत, मनजीत जगतजीत यह संस्कार भी बहुत समय से बनायेंगे तब अन्त समय भी यह बहुतकाल का अभ्यास विजयी बनाकर आपको विशेष माला का मणका बनायेगा। पास विद ऑनर बनेंगे। पास नहीं, पास विद ऑनर। तो बोलो, यह हिम्मत है ना! पास विद ऑनर तो होना है ना? जो द्वापर से लेके अब तक पूज्य बनते हैं अर्थात् माला के मणके बनते हैं तो अपने को माला के मणके बनाने का शुद्ध संकल्प है ना!
बापदादा भी रोज़ अमृतवेले अपने माला के मणकों को देखते और विशेष मिलन मनाते हैं। तो आप सभी अपने को माला के मणकों में समझते हो। है तो दूसरी माला भी 16 हजार की, लेकिन फिर भी सेकण्ड माला हो गई। विशेष माला जो गायन और पूज्यनीय योग्य बनती है, वह पहली माला है। तो आज बापदादा उन मणकों को देख रहे थे क्योंकि ब्रह्मा बाप के साथ विशेष राज्य अधिकारी साथी वही बनते हैं। तो आज ब्रह्मा बाप अपने अब के तीव्र पुरुषार्थी और भविष्य के राज्य अधिकारी, तख्त पर तो दो ही बैठते हैं लेकिन राज्य के साथी उन्हों की पहली माला है। तो अपने को चेक किया है। बापदादा के साथ तो चलेंगे क्योंकि अभी आप सबकी रिटर्न जरनी है। जब जाना ही है, बाप के साथ जाना है, अकेला नहीं जाना है। तो साथ जाने वाले नजदीक के मणके कौन होंगे? जो बहुतकाल के तीव्र पुरुषार्थी होंगे। पुरुषार्थी नहीं, कब-कब वाले नहीं। बहुतकाल के बाप समान ही राज्य अधिकारी बनेंगे। तो क्या समझते हो? तीव्र पुरुषार्थ है? जो समझते हैं मैं तीव्र पुरुषार्थी की लाइन में हूँ, वह हाथ उठायेंगे। तीव्र पुरुषार्थी, बड़ा हाथ उठाओ, छोटा हाथ उठाते हैं। अच्छा, बहुत उठा रहे हैं। फिर लम्बा हाथ उठाओ, ऐसे (छोटा) नहीं। अच्छा।
बापदादा तो रोज़ बच्चों का चार्ट देखते हैं। मैजारिटी तीव्र पुरुषार्थी भी हैं लेकिन कभी-कभी का शब्द भी साथ में लगा देते हैं। लेकिन बाप क्यों कह रहे हैं? अटेन्शन प्लीज़, सूक्ष्म संकल्प में भी हलचल नहीं हो। अचल, अडोल, शुद्ध संकल्पधारी बहुत समय से बनना ही है। कई बच्चे बहुत मीठी-मीठी रूहरिहान करते हैं, कहते हैं बाबा हम तैयार हो ही जायेंगे क्योंकि समय जितना नजदीक आयेगा, हालतें हलचल में आयेंगी तो वैराग्य तो आटोमेटिकली आ जायेगा। लेकिन आपका टीचर कौन हुआ? समय या बाप? समय तो आपकी रचना है। तो बाप अभी इशारा दे रहा है कि बहुत समय का तीव्र पुरुषार्थ अन्त में पास विद ऑनर बनायेगा। पास तो सभी होंगे लेकिन पास विद ऑनर बनने वाला बहुत समय का लगातार तीव्र पुरुषार्थ करने वाला आवश्यक है इसलिए आज की तारीख नोट कर दो, अब भी कभी-कभी, समथिंग, हो जायेंगे, कर ही लेंगे... यह शब्द आगे भी चलते न रहें। बाप का प्यार तो सदा ही है। लास्ट दाने पर भी बाप का प्यार है। क्यों? दिल से मेरा बाबा तो कहा, आज की बड़ी-बड़ी आत्मायें मेरा बाबा नहीं कहती, लेकिन वह मेरा बाबा तो मानता है इसलिए बाप का प्यार तो उससे भी है। बच्चों से प्यार तो बाप का सदा ही है, लास्ट तक भी है, लास्ट वाले तक भी है। स्नेह ने ही आपको बाप का बनाया है। बापदादा ने यह भी कहा है कि स्नेह मैजारिटी बच्चों का है और रहेगा लेकिन सिर्फ स्नेह नहीं, शक्ति भी चाहिए। तीव्र पुरुषार्थ भी चाहिए। अच्छा।
बापदादा का तो बच्चों में फेथ है ना। तो अभी से ही पदम पदमगुणा ऐसे बच्चों को मुबारक दे रहे हैं। वाह बच्चे वाह! हिम्मत वाले हैं। आपकी हिम्मत और बाप की मदद तो होगी ही। अभी एक बात करना। जो अपने मन को बिजी रखने के लिए, जैसे पहले बाप ने कहा सेकण्ड में स्टाप, बिन्दू हूँ, बिन्दू लगाना है और सबको बिन्दू रूप में देखना है। जब देखेंगे ही बिन्दू तो और कोई भी संकल्प नहीं चलेगा। मन्सा सेवा का अटेन्शन रखना, इतनी दु:खी आत्मायें जो चिल्ला रही हैं, उन्हों को किरणें देने की सेवा में एकस्ट्रा मन को लगाना। मन्सा सेवा बहुत श्रेष्ठ सेवा है। दु:खियों का भी फायदा और आपका अपना भी फायदा। डबल फायदा है। जैसे वाचा से सेवा करते हो और सेवा बढ़ती भी जाती है, दिल से करते हो, संख्या भी बढ़ती जाती है, सेन्टर भी बढ़ते जाते हैं, वाचा की सेवा मैजारिटी की ठीक है। सभी की नहीं, मैजारिटी की। ऐसे अभी मन से विशेष आत्माओं को अंचली देने की सेवा भी करते रहो। मन को फ्री नहीं छोड़ो। कोई न कोई सेवा में मन से शक्तियां देने की, मुख से वाणी की सेवा, कर्म में गुणों से सेवा, सम्बन्ध-सम्पर्क में खुशी देने की सेवा, इस भिन्न-भिन्न सेवाओं में मन को बिजी रखो क्योंकि सारे विश्व में रिचेस्ट आत्मायें कौन सी हैं? आप ही हो ना! कितने खजाने मिले हैं? तो हर खजाने से सेवा करो। खजाने को जितना सेवा में लगायेंगे उतने खजाने बढ़ते जायेंगे इसलिए अभी जैसे स्व की सेवा का अटेन्शन देते हो, ऐसे दु:खी आत्माओं की, अपने भक्तों की मन्सा द्वारा किरणें देने की सेवा भी अटेन्शन देकर सारे दिन में करो, बहुत चिल्लाते हैं, आपको सुनने नहीं आता। मैजारिटी हर घर में कोई न कोई दु:ख का कारण है। ऐसे दु:खियों को सुख देने वाला कौन? बोलो, कौन है? आप ही तो हो। तो इस मन्सा सेवा को सारे दिन में चेक करो - कितना समय की? जैसे स्व के प्रति देते हो, वैसे मन्सा सेवा के प्रति कितना समय दिया? रहमदिल हो ना। तो दु:खियों पर रहम करो। आपका गीत भी है ना, ओ माँ बाप दु:खियों पर रहम करो। बापदादा को बहुत आवाज सुनने पड़ते हैं। आप लोगों को कम सुनाई देते हैं लेकिन अभी सुनो। कहाँ जायेंगे वह, आपके ही तो भाई बहिन हैं। तो अपना भी फायदा करो, मन को बिजी रखो और दु:खियों का दु:ख हरण करो। चिल्लाते हैं, दिल चिल्लाती है। बापदादा तो सुनते हैं, तो बच्चों को याद करते हैं ओ मेरे लाडले बच्चे, सिकीलधे बच्चे अब रहमदिल रूप धारण करो। अपने ब्राह्मणों में भी एक दो के सहयोगी बनो। चाहे कैसा भी संस्कार है, लेकिन आपका काम क्या है? संस्कार से टक्कर खाना या उनको भी संस्कार के टक्कर से छुड़ाना। आपका भी टाइटल है ना, दु:ख हर्ता सुख कर्ता। बाप के साथी हो ना। बाप के साथी क्या संकल्प किया है? इस विश्व को दु:ख अशान्ति से बदल सुख शान्ति स्थापन करनी ही है। करनी है ना! हाथ उठाओ। करनी है? कि सिर्फ देखना है, हो रहा है लेकिन अभी बदलना है। चाहे ब्राह्मण आत्मा हो, देखते नहीं रहो, यह कर रहे हैं लेकिन उन्हों को भी वाणी और मन्सा संकल्प द्वारा परिवर्तन करो, करना नहीं चाहिए! बापदादा सुनता रहता है, बापदादा तक बात दे दी, जब बात दे दी तो खुद बाप के डायरेक्शन पर चलो, जिम्मेवार बापदादा और उनके साथी मुरब्बी बच्चे, निमित्त बने हुए बच्चे हैं। तो सदा अपने मन को व्यर्थ संकल्पों के बजाए अब दु:खी आत्माओं को, चाहे ब्राह्मण हैं या कोई भी हैं, डिस्टर्ब आत्मा को सहयोग दो। सहयोगी बनो। अच्छा।
सेवा का टर्न , यू.पी. बनारस , पश्चिम नेपाल का है:- अच्छा है। यू.पी. में चारों ओर के भगत बहुत आते हैं। तो यू.पी. वालों को जो भी हो सके भक्तों को सन्देश जरूर दो। सन्देश देना आपका काम है, बाकी भाग्य बनाना, कितना भाग्य बनाते हैं, वह उनके हाथ में है लेकिन आपको उल्हना नहीं दें कि हमको आपने हमारा बाप आया और हमारा बाप वर्सा देने आया है, यह सन्देश नहीं दिया! हम भी कुछ तो वर्सा ले लेते। वैसे करते भी हो, बाप के पास समाचार आते हैं, लेकिन फिर भी जहाँ तक हो सकता है वहाँ तक सन्देश देने का पाठ आप लोगों के लिए सहज है। और यू.पी. से ब्रह्मा बाप का, जगत अम्बा का बहुत प्यार रहा है। जितना ब्रह्मा बाबा यू.पी. में आये हैं, इतना बाम्बे में भी आये हैं लेकिन यू.पी. में भी आये हैं। तो जिस जगह ब्रह्मा बाप के पांव पड़े वह स्थान कितना भाग्यवान है। लखनऊ और कानपुर दोनों ही इस भाग्य के अधिकारी बने हैं। बाम्बे भी बना है लेकिन अभी यू.पी. का टर्न है। डायरेक्ट माँ और बाप के शिक्षा की बूंदे यू.पी. में पड़ी हैं। अभी यू.पी. को आगे क्या करना है? वाणी द्वारा मेलों में सेवा तो करते हो लेकिन अभी के समय अनुसार जो बापदादा कहता आया है पहले भी कि वारिस और नामीग्रामी माइक, नामीग्रामी का अर्थ यह है कि उनके कहने का प्रभाव सुनने वालों पर पड़ने वाला हो, ऐसे माइक तैयार करो। हाथ उठाओ टीचर्स। अच्छा।
टीचर्स भी बहुत हैं। तो इतने ही तैयार करो। हर एक सेन्टर चाहे छोटा चाहे बड़ा, सेन्टर की लिस्ट में है उनको जरूर अपना सबूत देना है क्योंकि समय पर कोई भरोसा नहीं है। कब भी क्या भी हो सकता है इसलिए बापदादा सभी जो भी ज़ोन आते हैं, नहीं भी आये हैं, सभी ज़ोन को यही कहते हैं कि अभी आगे बढ़ो। क्लासेज तो चलते रहते हैं, संख्या भी बढ़ती रहती है लेकिन अभी निमित्त बनने वाले बनाओ और बनाने के लिए बापदादा ने देखा है, हर ज़ोन में ऐसी आत्मायें हैं जो निमित्त बन सकती हैं। कर भी रहे हो लेकिन थोड़ी और स्पीड बढ़ाओ। अच्छा।
मिलन तो सबका हुआ। बहुत तैयारी करके आते हैं। हर वर्ग बहुत तैयारी करके आते हैं, बापदादा जानते हैं लेकिन टाइम को भी देखना पड़ता है। तो सभी को अभी तीव्र पुरुषार्थी बनने की एडवांस में बहुत बहुत पदम गुणा मुबारक पहले से दे रहे हैं। इस बारी जो आये हैं उसमें मुरली रेग्युलर जो सुनते हैं, कोई हैं जो मुरली नहीं सुनते, वह हाथ उठाओ। कोई नहीं। अच्छा। वह उठो जो नहीं पढ़ते या सुनते हैं। थोड़े हैं। कोई बात नहीं लेकिन अभी बाकी जो भी समय मिला है उसमें बाप के महावाक्य जरूर सुनना या पढ़ना। परमधाम से बापदादा आता है, सूक्ष्मवतन से ब्रह्मा बाबा आता है, और आके महावाक्य उच्चारण करते हैं इसलिए मुरली कभी भी एक दिन भी मिस नहीं करना। मिस करेंगे तो अपना बापदादा का दिलतख्त छूट जायेगा। इसलिए जो भी मुरली मिस करते हैं वह समझें हम तीन तख्त के मालिक नहीं, दो तख्त के मालिक भी यथाशक्ति बनेंगे इसलिए मुरली, मुरली, मुरली क्योंकि मुरली में रोज़ के डायरेक्शन होते हैं, चार ही सबजेक्ट के डायरेक्शन होते हैं, तो रोज़ के डायरेक्शन लेने हैं ना। तो जो भी मिस करता हो, कारणे-अकारणे वह अपना प्रोग्राम बनावे कि कैसे मुरली सुनें। कोई न कोई सैलवेशन बनायें। आजकल साइंस के साधन आपके लिए निकले हैं। ब्रह्मा बाप में प्रवेशता के 100 साल पहले यह साइंस निकली है, आपके काम में भी आनी है इसलिए उसको यूज़ करो, फायदा उठाओ।
अच्छा सामने बैठे हुए या कहाँ भी सुनने वाले बच्चों को बापदादा की दिल व जान सिक व प्रेम से यादप्यार और नमस्ते।