Search for a command to run...
19 Dec 2020
"अब स्मृति स्वरूप अनुभव की अथॉरिटी बनो , ज्वालामुखी योग द्वारा सबको लाइट माइट की किरणों का सहयोग दो"
19 December 2020 · हिंदी
19-12-2020 Avyakt BapDada 19-12-2020
ओम् शान्ति 19-12-20 मधुबन
प्राणप्यारे अव्यक्त बापदादा के अति स्नेही, सदा अपने स्वमान में स्थित रह अनुभव की अथॉरिटी बनने वाले स्वराज्य अधिकारी सो विश्व राज्य अधिकारी सभी निमित्त बनी हुई टीचर्स बहिनें तथा देश विदेश के सर्व ब्राह्मण कुल भूषण भाई बहिनें, ईश्वरीय स्नेह सम्पन्न मधुर याद स्वीकार करना जी।
बाद समाचार - मीठा प्यारा बाबा समय प्रमाण अपने बच्चों को सर्व शक्तियों से सम्पन्न बनाए सम्पन्न और सम्पूर्ण बनने की प्रेरणा दे रहे हैं। अभी तो नया वर्ष समीप आ रहा है, जरूर अभी से ही सभी बाबा के बच्चे ज्वालामुखी योग पर अटेन्शन देंगे। शक्तिशाली योग ही संस्कारों के साथ इस पुराने संसार का परिवर्तन करेगा। बाबा चाहते हैं, अब व्यर्थ का नाम-निशान भी समाप्त हो। हर स्थान लाइट हाउस बनें। हर एक बच्चा मास्टर सर्वशक्तिवान के स्वमान में रह, समय पर शक्तियों को यूज़ कर विजयी भव का वरदानी बनें।
तो जरूर आप सब नये वर्ष के लिए नये उमंग-उत्साह के तीव्र पुरुषार्थ का प्लैन बना रहे होंगे। यह टर्न विशेष पंजाब ज़ोन का है। सभी बहुत अच्छी ज्ञान योग की शक्तिशाली तपस्या कर रहे हैं। यहाँ का एकान्त, शान्त, पवित्र वातावरण सभी को विशेष सर्व शक्तियों से सम्पन्न बना देता है।
नये वर्ष के लिए मधुबन से जो विशेष ब्रह्मा बाप के 18 कदम का होमवर्क भेजा गया है, वह आप सबने ईमेल से अवश्य प्राप्त किया होगा। आने वाली 21वीं सदी के इस 21वें वर्ष में सभी स्थानों पर पूरा ही वर्ष विशेष तपस्या के कार्यक्रम चलते रहें। इसके लिए हर एक अन्तर्मुखी, अव्यक्त और अलौकिक स्थिति में रहने का विशेष अटेन्शन रख तीव्र पुरुषार्थ करना जी। अच्छा - सभी को याद... ओम् शान्ति।
19-12-20 ओम् शान्ति रिवाइज-वीडियो 02-02-12 मधुबन''
आज बापदादा अपने सामने या चारों तरफ के अपने छोटे से संसार को देख हर्षित हो रहे हैं क्योंकि यह संसार है छोटा लेकिन अति प्यारा है क्योंकि इस संसार की एक-एक आत्मा श्रेष्ठ आत्मा है। कोटों में कोई आत्मायें हैं। बाप के वर्से के अधिकारी आत्मायें हैं। बापदादा हर बच्चे को देख खुश होते हैं कि यह एक-एक बच्चा राजा बच्चा है। बापदादा ने हर एक बच्चे को स्वराज्य अधिकारी और विश्व राज्य अधिकारी बनाया है। इस समय सभी स्वराज्य अधिकारी हैं अर्थात् मन-बुद्धि, संस्कार, कर्मेन्द्रियों के राजा हैं। कर्मेन्द्रियों के वश नहीं हैं। मन के भी मालिक हैं। तो ऐसे ही आप हर एक बच्चा अपने को मन के मालिक, संस्कारों के भी मालिक समझते हो? ऐसे तो नहीं कभी आप मन के मालिक होते वा कभी मन आपका मालिक होता! क्योंकि कहते ही हो मेरा मन, मैं मन नहीं कहते हो। तो मेरे के आप मालिक हो। चेक करो कभी मन तो मालिक नहीं बन जाता? क्योंकि इस समय बापदादा ने हर एक को स्वराज्य अधिकारी की सीट पर बिठाया है। अब के स्वराज्यधारी हो और भविष्य का राज्य तो आपका है ही। डबल राज्य अधिकारी हो। बापदादा देखते हैं हर बच्चा स्वराज्य अधिकारी के साथ स्वमानधारी भी है। तो मैं स्वमानधारी आत्मा हूँ, इस स्मृति में बैठो तो देखो कितने स्वमानों की लिस्ट आपके सामने आती है। अनेक स्वमान की माला सामने आ जाती है ना!
बापदादा ने बच्चों के स्वमानों की माला हर बच्चे को डाली है। स्वमान सुनते ही आपके सामने भी अपने स्वमान स्मृति में आ गये! याद करो, अनादि स्वरूप में आपका स्वमान कितना बड़ा है! चले गये अनादि स्वरूप में? हर एक का स्वमान है - एक तो बाप के साथ-साथ चमकती हुई आत्मा है, बाप के साथ के कारण विशेष चमकती हुई दिखाई दे रही है। देख रहे हो? जैसे आकाश में भी यहाँ कोई-कोई सितारा विशेष चमकता है, ऐसे बाप के साथ-साथ होने कारण चमकती हुई आत्मा हो। याद आया अपना अनादि स्वरूप? सेकण्ड में अपने अनादि स्वरूप में स्थित हो सकते हो? अभी एक सेकण्ड में उस अनादि स्वरूप में एक सेकण्ड के लिए स्थित हो जाओ। कितना नशा चढ़ता है! आगे बढ़ो, इस सृष्टि चक्र के आदि में आ गये! यह ड्रिल करो सतयुग आदि में अपना स्वरूप देखो, कितना श्रेष्ठ सुख स्वरूप है। कितना सर्व प्राप्ति स्वरूप है। दु:ख का नामनिशान नहीं है। प्रकृति कितनी सुन्दर सतोगुणी है। अनुभव करो अपने देवता स्वरूप का। देख रहे हो अपना स्वरूप? कोई भी राजा हो, महात्मा हो, नेता हो ऐसा सर्व प्राप्ति स्वरूप कोई देखा! तो एक सेकण्ड के लिए अपने देवता स्वरूप में स्थित हो जाओ। अपने स्वमान में मजा आता है ना! हम सो देवता ... बापदादा यह ड्रिल करा रहा है। फिर नीचे आओ कौन सा युग आ गया? द्वापर में भी आपका स्वमान पूज्य का है। पूज्य स्वरूप है। अपने पूज्य स्वरूप को देख रहे हो? कितने सभी भावना से कायदे प्रमाण पूजा करते हैं। ऐसे कायदे प्रमाण पूजा और किसी की भी नहीं होती। चाहे धर्म पितायें आये, चाहे गुरू बने, नेतायें बने, अभिनेतायें बने लेकिन ऐसी कायदे प्रमाण पूजा किसकी नहीं होती। तो अपना स्वमान देखा, अनुभव किया? अब आओ संगम में, सब चक्र लगा रहे हो? पीछे वाले चक्र लगा रहे हो! हाथ उठाओ। देखो अपना स्वमान क्योंकि स्वराज्य अधिकारी हो ना! तो संगम पर स्वयं भगवान, आपकी जीवन में स्वयं मालिक आप बच्चों में पवित्रता की विशेषता भरता है। जो पवित्रता आपके सर्व अविनाशी सुखों की खान है। और बनाने वाला कौन? स्वयं भगवान। वह तो अभी भी प्रत्यक्ष प्रमाण आपको पवित्रता की जायदाद बाप से प्राप्त हो गई है। अब चेक करो - पवित्रता सर्व प्राप्तियों का आधार है, पवित्रता से आप सभी मास्टर सर्वशक्तिमान बन गये। तो चेक करो सर्वशक्तियां प्राप्त हैं? कोई-कोई बच्चे कहते हैं बाप ने तो सर्व शक्तियां दी लेकिन कोई-कोई समय जिस शक्ति की आवश्यकता होती है वह थोड़ा टाइम के बाद आती है। बात पूरी हो जाती है फिर आती है। इसका कारण क्या? वरदान में बाप ने दी फिर भी समय पर नहीं आती है, उसका कारण क्या? अपने मास्टर सर्वशक्तिमान के स्मृति की सीट पर नहीं होते हो, कोई भी किसका आर्डर मानते हैं तो सीट वाले का आर्डर मानते हैं। तो जब भी आप कोई भी शक्ति का आर्डर करते हो, पहले यह देखो स्मृति की सीट पर हैं? स्वमान के सीट पर हैं? स्मृति की सीट पर स्थित हो जाओ तो सर्व शक्तियां आपके पास समय पर बंधी हुई हैं आने के लिए क्योंकि सर्वशक्तिमान बाप ने आपको मास्टर सर्वशक्तिमान बनाया है। तो इतने पावरफुल स्वमानधारी बन चल रहे हो ना? अपने स्वमान देखे? संगम के बाद कहाँ जायेंगे? रिटर्न जरनी करेंगे ना! इसलिए बापदादा यही चाहते हैं कि हर एक सारे दिन में यह एक्सरसाइज़ करते रहें। समय निकालो बार-बार यह स्वमान की माला पहनने से, अनुभव करने से जो बापदादा ने स्वराज्य अधिकारी बनाया है, वह हो नहीं सकता कि स्वमान आपके आर्डर पर नहीं चले। सिर्फ सीट पर सेट रहो।
बापदादा ने देखा सभी अटेन्शन रखते हैं लेकिन नियमित रूप से अपनी दिनचर्या सेट करो। बीच-बीच में यह अपने स्वमान के स्मृति स्वरूप में स्थित रहो। जैसे ट्रैफिक कन्ट्रोल करते हो ऐसे यह स्वमान की स्मृति आदिकाल से रिटर्न जरनी तक की, बीच-बीच में टाइम फिक्स करो। यह चलते फिरते भी कर सकते हो क्योंकि मन को सीट पर बिठाना है। बापदादा ने देखा, पहले भी कहा है योग सब लगाते हो लेकिन अब आवश्यकता किसकी है? समय की हालतों को देख पहले भी सुनाया अब ज्वालामुखी योग की आवश्यकता है, जिससे डबल काम होगा। एक तो अपने पुराने संस्कार का संस्कार हो जायेगा, अभी संस्कारों को मारते हो लेकिन जलाते नहीं हो। मारने के बाद फिर भी कभी-कभी वह जाग जाते हैं। जैसे रावण को सिर्फ मारा नहीं, जलाया। ऐसे आप भी अपने पुराने संस्कारों को जो बीच-बीच में तीव्र पुरुषार्थ में कमी कर देते हैं, उसके लिए ज्वालामुखी योग की आवश्यकता है। एक स्वयं के लिए और दूसरा ज्वालामुखी योग द्वारा औरों को भी लाइट रूप होने के कारण, माइट रूप होने के कारण उन्हों को भी अपनी किरणों द्वारा सहयोग दे सकते हो। तो अभी सभी ने योग को ज्वालामुखी योग में परिवर्तन किया? समय अनुसार अभी आत्माओं को आपके सहयोग की आवश्यकता है। बाकी बापदादा तो अमृतवेले हर बच्चे को स्नेह देते हैं।
बापदादा देखते हैं लक्ष्य बहुत अच्छा रखते हैं, हिम्मत भी रखते हैं लेकिन सारा दिन उसी अटेन्शन में रहें, जैसे अमृतवेले रहता है, वह कम हो जाता है। कारण क्या होता है? यह जो कर्म में लगते हो, कर्मयोगी बन कर्म करना, इसमें अन्तर पड़ जाता है। आप सिर्फ योग लगाने वाले नहीं हो, योगी जीवन वाले हो। तो जीवन सदा रहती है, कभी-कभी नहीं। तो बापदादा अभी क्या चाहते हैं? प्यार में तो बहुत करके पास हैं, प्यार की सबजेक्ट में बाप ने देखा मैजारिटी बाप के साथ मेरा बाबा, मेरा बाबा कह प्यार का अनुभव करते हैं। प्यार में तो मैजारिटी पास हैं, अब किसमें पास होना है? बाप समान बनने में। सभी क्या चाहते हैं? बाप समान बनना है कि बाप बाप रहेगा आप बच्चे हैं, तो बाप समान तो बनना पड़ेगा। प्यार माना क्या? प्यार वाला जो कहे वह करना ही है। तो सभी बाप के प्यारे हो, बाप का प्यार आपसे है? इसमें हाथ उठाओ। प्यार है अच्छा, प्यार है? तो अभी बापदादा यही चाहते हैं कि जैसे प्यार है, ऐसे यह लक्ष्य रखो कि हमें बाप समान बनना ही है, इसमें हाथ उठाओ। तो निश्चय रखते हैं, हाथ तो बहुत अच्छा उठाते हैं। बापदादा देख रहे हैं।
बापदादा चाहता है एक-एक बच्चा ऐसा खुशनुमा, खुशनसीब दिखाई दे, चेहरे से चलन से क्योंकि समय प्रमाण अभी आपका चेहरा बहुत सेवा करेगा। आवश्यकता पड़ेगी। इसके लिए बापदादा चाहता है कि अभी से लक्ष्य रखो जैसे अभी सबको उमंग है सेवा करने का। ऐसे उमंग हो चेहरे से सेवा करने का क्योंकि दिनप्रतिदिन समय नाज़ुक आना ही है। तो ऐसे समय पर आपका चेहरा आत्माओं को चियरफुल बना दे।
बापदादा ने आज अमृतवेले चक्र लगाया, तो क्या देखा? बैठते सभी अपने रूचि से भी हैं लेकिन सबसे बड़ी अथॉरिटी है अनुभव की। तो देखा बैठते हैं लेकिन अनुभव की अथॉरिटी बनकर बैठे, स्मृति में बैठते हैं लेकिन स्मृति स्वरूप अनुभव हो। अनुभव की अथॉरिटी का आनंद वह थोड़ा समय होता है। सोचते हैं मैं बापदादा के तख्तनशीन हूँ लेकिन स्वरूप के स्मृति स्वरूप अनुभवी मूर्त, अनुभव में खो जायें, उसे अभी और भी आगे बढ़ाना होगा क्योंकि अनुभव की अथॉरिटी सबसे बड़े ते बड़ी है। स्मृति स्वरूप रहना इसको कहा जाता है अनुभव। तो अनुभव में खो जाना जो स्वरूप की स्मृति रखते हैं, उस स्वरूप की अनुभूति में रहना इसकी और आवश्यकता है क्योंकि अनुभव कभी भी भूलता नहीं है।
बापदादा ने देखा मुरली से प्यार मैजारिटी का है लेकिन जैसे जगत अम्बा ने प्रत्यक्ष जीवन में दिखाया कि जो बाप ने कहा वह करना ही है, लक्ष्य रखा और पुरुषार्थ के तरफ अटेन्शन भी दिया। आपकी दीदी दादियां जो एडवांस पार्टी में भी गई हैं उन्होंने भी अटेन्शन दिया, अभी आप लोगों का इन्तजार कर रहे हैं। पूछती हैं वह कि समाप्ति का गेट कब खोलेंगे? एक दो तो नहीं खोलेगा ना! तो अभी पुरुषार्थ करके गेट खुलने के समय को समीप लाओ। सम्पन्न बनना अर्थात् समीप लाना।
अच्छा। सभी चारों ओर के बच्चों को बापदादा दिल का स्नेह दे रहे हैं। साथ-साथ जो बापदादा ने कार्य दिया है, उसकी भी स्मृति दिला रहे हैं, क्यों? बहुत करके यह व्यर्थ संकल्प पुरुषार्थ को तीव्र के बजाए साधारण कर देते हैं इसलिए चारों ओर के बच्चों को बापदादा यादप्यार के साथ यह भी स्मृति दिला रहे हैं कि अब संगम का समय कितना श्रेष्ठ सुहावना है, इस संगम के समय ही सर्व खजाने बाप द्वारा प्राप्त होते हैं, संगम का एक-एक सेकण्ड महान है इसलिए संगम के समय का मूल्य सदा अपने बुद्धि में रखो। संगम का एक सेकण्ड प्राप्ति कितना कराता है। आपसे कोई पूछे आपको क्या मिला है! तो क्या जवाब देंगे? अप्राप्त नहीं कोई वस्तु हम ब्राह्मणों के दिल में। पाना था वो पा लिया। अब उसको कार्य में लगाते हुए तीव्र पुरुषार्थी बन समय को समीप लाओ। अच्छा। बापदादा देखते हैं सभी को उमंग भी आता है और यह उमंग सदा आगे बढ़ाते रहो। अच्छा।
सेवा का टर्न पंजाब ज़ोन का है:- यह चांस जो मिलता है इसमें भी शक्ति भर जाती है। बापदादा को खुशी होती है, एक ही ज़ोन आलराउण्ड सेवा के निमित्त बनता है। चांस भी मिलता है और भाग्य भी बनता है। अभी तक जो भी ज़ोन सेवा करते हैं, बापदादा ने देखा बहुत करके सन्तुष्ट करके ही जाते हैं। रिपोर्ट ठीक है ना! अच्छा है। बापदादा खुश है। अच्छा।
डबल विदेशी सभी मुख्य भाई बहिनें आये हैं:- डबल विदेशियों को टाइटल दिया है मधुबन का श्रृंगार हैं। मधुबन में रौनक कर देते हैं और फर्क भी अच्छा लाया है। बापदादा पुरुषार्थ और परिवर्तन दोनों ही देख करके खुश है। पहले व्हाई व्हाई करते थे, अभी वाह! वाह! करते हैं। चेंज अच्छी लाई है। अभी कोई बात में मुश्किल नहीं लगता। कोई भी बात, नियम, बापदादा का जो मुरली में डायरेक्शन जाता है वह करने में एवररेडी हैं और सहयोग भी अच्छा है। स्नेही हैं लेकिन सहयोगी भी अच्छे हैं।
अभी जो बापदादा चाहते हैं ज्वालामुखी योग हो, इसमें विदेशी नम्बरवन लो क्योंकि विदेशियों के संस्कार हैं जो लक्ष्य रखते हैं ना वह पूरा करते हैं। दो बातों में नम्बर लो - एक व्यर्थ समाप्ति और दूसरा सर्विस में निर्विघ्न। प्यार तो सारे परिवार का भी है। सिर्फ बापदादा का नहीं है लेकिन सारे परिवार का भी डबल विदेशियों से प्यार है। अभी दोनों बातों में विदेश नम्बरवन जाके दिखाये।
अच्छा है - एक-एक रत्न को बापदादा विशेष दिल का प्यार और साथ में प्यार के साथ में मन के उमंग-उत्साह की लहर भी दे रहे हैं। अच्छा। सभी ने अपने लिए यादप्यार लिया कि सिर्फ वर्ग वाले या डबल विदेशियों ने लिया। सबको बापदादा देखता है, नज़र दौड़ाता है तो नज़र से यादप्यार देते हैं। अच्छा।