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18 Jan 2021
"ब्रह्मा बाप समान नष्टोमोहा स्मृति स्वरूप बनने के लिए, मन का टाइमटेबल बनाकर कर्म करते कर्मयोगी अशरीरी बनने का अभ्यास करो'"
18 January 2021 · हिंदी
18-01-2021 Avyakt BapDada 18-01-2021
ओम् शान्ति 18-1-21 “स्मृति दिवस-दिनचर्या'' मधुबन
प्राणप्यारे अव्यक्त बापदादा के अति स्नेही, सदा परमात्म स्नेह में समाये हुए, स्मृति सो समर्थी स्वरूप सभी निमित्त टीचर्स बहिनें तथा देश विदेश के सभी ब्रह्मा वत्स, ब्रह्मा बाप के कदम पर कदम रख सम्पन्न और सम्पूर्ण बनने के तीव्र पुरुषार्थी, ब्राह्मण कुल भूषण भाई बहिनें, ईश्वरीय स्नेह सम्पन्न मधुर याद स्वीकार करना जी।
बाद समाचार - इस अव्यक्ति मास में चारों ओर बाबा के सभी बच्चे अपने प्यारे ब्रह्मा बाबा के समान कर्मयोगी सो कर्मातीत स्थिति बनाने के लिए मन और मुख का मौन रख बहुत अच्छी तपस्या कर रहे हैं। सभी का लक्ष्य है, समय की तीव्रता के साथ-साथ हमें सम्पन्न और सम्पूर्ण बनना ही है। प्यारे बापदादा भी समय प्रमाण हम सबको अनेक शिक्षाओं से सजाते, संवारते रहते हैं। 18 जनवरी का यह स्मृति दिन भी विशेष मधुबन घर की याद दिलाता है। आप सबने भी दूर बैठे अपने दिव्य बुद्धि के विमान द्वारा मधुबन के चारों धामों की यात्रा की होगी। इस बार बापदादा मिलन में भोपाल ज़ोन के भाई बहिनें थोड़ी संख्या में पहुंचे हैं। बाकी सब ऑन लाइन मिलन मना रहे हैं।
इस समय हम सबका प्यारा मधुबन घर हर एक को विशेष अव्यक्त वतन की अनुभूति करा रहा है। ठण्डी-ठण्डी हवाओं के बीच, सफेद पोशधारी फरिश्ते प्यारे बापदादा की यादों को दिल में समाये हुए चारों धामों की यात्रा कर रहे हैं। इस बार शान्तिवन के भाईयों ने ही सुन्दर खुशबूदार फूल मालाओं से चारों धामों को सजाया है। बहुत शान्त, एकान्त वातावरण है। हर वर्ष की भांति प्रात: मुरली क्लास में सभी ने बापदादा के मधुर शिक्षाओं भरे साकार व अव्यक्त महावाक्य सुनें, शशी बहन ने प्यारे बापदादा को भोग स्वीकार कराया। तत्पश्चात सभी स्नेह के सागर में समाये हुए शान्ति स्तम्भ पर पहुंचे और भावनाओं से भरपूर गीत सुनते मीठे बाबा से मीठी रूहरिहान करते रहे। उसके बाद सभी नम्बरवार चारों धामों की परिक्रमा करते फल और दूध का नाश्ता करके अपने-अपने स्थानों पर विशेष तपस्या करने पहुंच गये। शाम के समय शान्तिवन के डायमण्ड हॉल में सभी ने प्यारे बापदादा से ऑनलाइन मंगल मिलन मनाया। ऐसे अनुभव हो रहा था जैसे बापदादा डायरेक्ट वतन से बच्चों को स्नेह का रेसपान्ड देते हुए सबको शक्ति सम्पन्न बना रहे हैं। बापदादा के यह अव्यक्ति महावाक्य आप सबने भी लाइव सुने होंगे। कितनी गहरी सुन्दर प्रेरणायें, नष्टोमोहा बनने की विधियां बापदादा ने सुनाई हैं, इन्हें हम सबको अपने जीवन में उतारना है। अच्छा। सभी को याद... ओम् शान्ति।
18-1-21 ओम शान्ति “अव्यक्त-बापादादा'' रिवाइज-वीडियो 18-01-10 मधुबन'
आज चारों ओर के बच्चों में विशेष स्नेह समाया हुआ है। आज के दिन को कहते ही हैं स्मृति दिवस। बापदादा ने अमृतवेले से चारों ओर देखा, चाहे देश में, चाहे विदेश में सभी बच्चों के दिल में बाप के स्नेह की तस्वीर दिखाई दी। और बाप के दिल में भी हर एक बच्चे के स्नेह की तस्वीर समाई हुई थी। आज के दिन को विशेष स्नेह का, स्मृति का दिवस कहते हो। बापदादा ने अमृतवेले से भी पहले बच्चों के तरफ से अनेक स्नेह के मोतियों की मालायें देखी। हर एक बच्चे के दिल में ऑटोमेटिक यह गीत बज रहा है - “मेरा बाबा, ब्रह्मा बाबा, मीठा बाबा'' और बापदादा के दिल में यह गीत बज रहा है “मीठे बच्चे, प्यारे बच्चे।'' आज हर एक के अन्दर और शक्तियों के सिवाए स्नेह की शक्ति ज्यादा समाई हुई है। यह परमात्म स्नेह, ईश्वरीय स्नेह सिर्फ संगमयुग पर ही अनुभव होता है। यह परमात्म स्नेह अनुभवी ही जाने, जो हर एक बच्चे को सहजयोगी बना देता है। बापदादा ने देखा सर्व बच्चों में स्नेह का अनुभव बहुत-बहुत समाया हुआ है। आप सबके जन्म का आधार स्नेह है। ऐसा कोई भी बच्चा नहीं दिखाई देता, और शक्तियां कम भी हों लेकिन बाप का स्नेह या निमित्त बनी हुई विशेष आत्माओं के स्नेह का अनुभव मैजारिटी सभी के दिल में, चेहरे में दिखाई देता है। अभी आप सबको आज विशेष यहाँ तक किसने पहुंचाया? किस विमान में आये? ट्रेन में आये या विमान में आये? सबकी सूरत में स्नेह समाया हुआ है तो स्नेह के प्लेन से पहुंच गये ना। कुछ भी करना पड़ा लेकिन स्नेह के प्लेन में सभी पहुंच गये हो।
आज के दिन को स्मृति दिवस कहा जाता है लेकिन स्मृति दिवस के साथ-साथ समर्थी दिवस भी कहा जाता है। आज के दिन को ताजपोशी का दिन भी कहा जाता है क्योंकि आज के दिन बापदादा ने विशेष ब्रह्मा बाप ने निमित्त बने हुए महावीर बच्चों को विश्व सेवा का ताज पहनाया। ब्रह्मा बाप खुद अननोन हुए और बच्चों को विश्व सेवा के स्मृति का तिलक दिया। बच्चों को करनहार बनाया और स्वयं करावनहार बनें। अपने समान फरिश्ते रूप का वरदान देकर लाइट का ताज पहनाया और बापदादा ने जो ताज, तिलक का वरदान दिया, उसी प्रमाण बच्चों का कर्तव्य देख खुश है। बच्चों ने सेवा का वरदान कार्य में लाया, यह देख बापदादा खुश है। अभी तक जो पार्ट बजाया है और आगे भी बजाना है, उसकी पदमगुणा ब्रह्मा बाप विशेष मुबारक दे रहे हैं। वाह बच्चे वाह! विदेश में भी चक्कर लगाया तो क्या देखा? हर बच्चा स्नेह में समाया हुआ है, तो बाप द्वारा समर्थियाँ मिली हैं क्योंकि यह दिन विशेष स्नेह से समर्थियों का वरदान प्राप्त करने का दिन है। बापदादा ने देखा कोई-कोई बच्चे बहुत अच्छे याद की लगन में, सेवा में लगे हुए हैं। अमृतवेला बहुत अच्छी रीति से अनुभव करते हैं। अशरीरीपन का भी अनुभव करते हैं लेकिन जब कर्मयोगी बनने का समय आता है तो दोनों काम योगी का भी और कर्म का भी, दो काम इकट्ठा करने में फर्क पड़ जाता है। पुरुषार्थ करते हैं कि कर्म और योग का बैलेन्स हो लेकिन जैसे अमृतवेले शक्तिशाली अवस्था का अनुभव करते हैं, वैसे कर्म में फर्क पड़ जाता है, मेहनत करनी पड़ती है और बापदादा ने सभी बच्चों को कह दिया है कि विश्व का विनाश अचानक होना है, अगर सारा दिन अटेन्शन के बजाए, किसी भी धारणा की कमी होने के कारण कर्मयोगी की स्टेज में फर्क आता है। तो विश्व के विनाश की डेट तो बापदादा अनाउन्स नहीं करेंगे लेकिन अपना जीवन काल समाप्त कब होना है, यह मालूम है? कोई को मालूम है कि मेरा मृत्यु फलानी डेट पर होना है, है मालूम? वह हाथ उठाओ। अचानक कुछ भी हो सकता है, कोई प्रकृति का कारण बनता है तो कितने का मृत्यु साथ में हो जाता है। तो विश्व के डेट के संकल्प से अलबेला नहीं बनना। आपकी जगदम्बा का स्लोगन था - तो कभी भी कब नहीं कहो, अब। कल कुछ भी हो जाए लेकिन मुझे एवररेडी रहना ही है। तो इतनी तैयारी सबके अटेन्शन में है? अपना कर्मों का हिसाब चुक्तू किया है? चार ही सबजेक्ट ज्ञान, योग, सेवा और धारणा, चार ही तरफ, चारों में ऐसी तैयारी है? पूरा बेहद के वैराग्य का अनुभव चेक किया है? अपनी दिल में यह चेक किया है कि एवररेडी हैं? नष्टोमोहा स्मृति स्वरूप क्योंकि ब्रह्मा बाप ने भी स्वयं को पुरुषार्थ करके ऐसा बनाया जो अनुभवी बच्चों ने देखा, कोई भी तरफ यह वातावरण नहीं था, कोई हिसाब किताब का, अचानक अशरीरी बनने का अभ्यास अशरीरी बनाकर उड़ गये। कोई ने समझा कि ब्रह्मा बाप जाने वाले हैं? लेकिन नष्टोमोहा, बच्चों के हाथ में हाथ होते कहाँ आकर्षण रही? फरिश्ता बन गये। बच्चों को फरिश्ते बनाने का तिलक दे गये। इसका कारण बहुत समय अशरीरीपन का अभ्यास रहा। कई अनुभवी बच्चे जो साथ रहे हैं उन्होंने अनुभव किया, कर्म करते करते ऐसे अशरीरी बन जाते। तो यह जो कर्मयोग में अन्तर पड़ जाता है, इसका कारण कर्म करते यह स्मृति में इमर्ज नहीं होता, मैं आत्मा हूँ, यह तो सब जानते ही हैं लेकिन मैं आत्मा, कौन सी आत्मा हूँ? मैं करावनहार आत्मा हूँ और यह कर्मेन्द्रियां करनहार हैं, यह करावनहार का स्वमान कर्म करते स्मृति स्वरूप में रहे, चाहे कर्मेन्द्रियों से कर्म कराना है लेकिन मैं करावनहार हूँ, मालिक हूँ, इस सीट पर अगर सेट है तो कोई भी कर्मेन्द्रिय आर्डर में रहेगी। बिना सीट पर सेट होते कोई किसका नहीं मानता। तो करावनहार आत्मा हूँ, यह कर्मेन्द्रियां करनहार हैं, करावनहार नहीं हैं। जैसे ब्रह्मा बाप का अनुभव सुना कि ब्रह्मा बाप ने शुरू में यह अभ्यास किया जो रोज़ दिन की समाप्ति के समय इन कर्मेन्द्रियों की राज दरबार लगाते थे। पुराने बच्चों ने वह डायरी देखी होगी तो रोज़ दरबार लगाते थे और करावनहार मालिक बन हर कर्मेन्द्रियों का समाचार लेते थे, देते थे। इतना अटेन्शन शुरू में ही ब्रह्मा बाप ने भी दिया तो आपको भी करावनहार मालिक समझ कर्मेन्द्रियों से कर्म करवाना है क्योंकि आत्मा राजा है यह कर्मेन्द्रियां साथी हैं। तो यह चेक करना चाहिए कि आज के दिन विशेष मन-बुद्धि संस्कार, स्वभाव कहो संस्कार कहो इन्हों का क्या हाल रहा? और फौरन चेक करने से कर्मेन्द्रियों को अटेन्शन रहता है कि हमारा राजा हमारा हालचाल लेगा, तो आत्मा राजा करनहार कर्मेन्द्रियों से करावनहार बन चेक करो। नहीं तो देखा गया है कई बच्चे कहते हैं कि हम कर्मेन्द्रियों को आर्डर करते हैं लेकिन फिर हो जाता है। पुरुषार्थ करते हैं लेकिन कोई-कोई संस्कार या स्वभाव आर्डर में नहीं रहते। उसका कारण इस अपने स्वमान की सीट पर सेट नहीं रहते। बिना सीट पर बैठने के आर्डर कितना भी करो तो आर्डर मानने वाले मानते नहीं हैं। तो कर्म करते अपने करावनहार मालिकपन की सीट पर सेट रहो। कई बच्चे यह भी बापदादा से रूहरिहान करते कि बाबा आपने हमें सर्व शक्तिवान बनाया, शक्तिवान भी नहीं सर्वशक्तिवान का वरदान हर एक बच्चे को ब्राह्मण जन्म लेते हुए दिया है, याद है अपने जन्म का वरदान! हर एक बच्चे को बाप ने मास्टर सर्वशक्तिवान भव का वरदान दिया है। किसने वरदान दिया? आलमाइटी अथॉरिटी ने। लेकिन कम्पलेन करते हैं कि जिस समय जो शक्ति चाहिए वह आती नहीं है। आर्डर नहीं मानती है। वह क्यों? जब आलमाइटी अथॉरिटी का वरदान है, उससे बड़ा कोई नहीं। तो वरदान के स्थिति में स्थित रहकरके अगर आर्डर करो तो हो नहीं सकता कि आप आर्डर करो और शक्ति नहीं मानें। एक तो आत्मा मालिक है, सर्वशक्तिवान का वरदान मिला हुआ है, उस स्वरूप में स्थित होके मालिक हूँ, वरदान है, दोनों स्वरूप की स्मृति के स्थिति में रहके आर्डर करो। शक्ति आपका नहीं मानें असम्भव क्योंकि वरदान और बाप के प्रापर्टी का अधिकार है। संगमयुग पर आप सबको सर्वशक्तिवान का टाइटिल मिला है सिर्फ उस स्थिति में स्थित नहीं रहते, सदा नहीं रहते। कभी-कभी आ जाता है। यह कभी शब्द अपने ब्राह्मण डिक्शनरी से निकाल दो। अभी अभी हाज़िर। आप कहते हो ना कि बाबा आपको हम याद करते हैं तो आप हाज़िर हो जाते हैं। है अनुभव? हाथ उठाओ। अनुभव है? अभी देखो, हाथ तो उठा रहे हो। बाप हाज़िर हो जाता, हज़ूर हाज़िर हो जाता, तो यह शक्ति क्या है? यह शक्तियां भी आपको बाप के प्रापर्टी में मिली हैं। तो मालिक बनके आर्डर करो। मालिक बनके आर्डर नहीं करते हो, शक्ति खो जाती है ना तो उसी स्थिति में रहते हुए आर्डर करते हो, तो मालिक ही नहीं है आर्डर क्यों मानें!
तो बापदादा अभी क्या चाहते हैं? पता है ना! बाप अभी यही चाहते हैं कि मेरा एक-एक बच्चा कर्म करते हुए भी राजा बच्चा बन, स्वराज्य अधिकारी बन स्वराज्य की सीट को नहीं छोड़े। तो राजा सारा दिन राजा ही होता है ना! कि कभी राजा होता है, कभी नहीं। तख्त पर बैठना या नहीं बैठना वह अलग बात है लेकिन घर में भी रहते मैं राजा हूँ, यह तो नहीं भूलता। तो कर्मयोगी और अमृतवेले के यथार्थ योग शक्तिशाली स्थिति उसमें फर्क नहीं पड़ना चाहिए। डबल काम है लेकिन आप कौन हो? आप तो विश्व के परिवर्तक हो, विश्व कल्याणकारी हो। इसलिए बाप यही चाहते कि चलते-फिरते राजापन नहीं भूलो, सीट को नहीं छोड़ो। बिना सीट के कोई आर्डर नहीं मानता। आजकल देखो सीट के पीछे कितना कुछ करते हैं? अपना हक लेने के लिए कितना प्रयत्न करते। अपना हक कोई छोड़ने नहीं चाहता। तो आप अपना परमात्म हक मैं कौन! हर समय जो काम करते हो तो काम करते भी अपने मन का टाइमटेबल बनाके रखो। यह काम करते हुए मन का स्वमान क्या रहेगा? आज के दिन कौन सा लक्ष्य रखूंगा? हर काम के टाइम जो भी अपने स्वमान की लिस्ट है, भले भिन्न-भिन्न टाइमटेबल बनाओ जैसे स्थूल कर्म का टाइमटेबल फिक्स करते हो वैसे मन का टाइमटेबल फिक्स करो। मालूम तो है इस समय यह काम करना है, उसके साथ स्वमान कौन सा रखना है? मालिकपन का अधिकार किस स्वमान के रूप में रखना है, यह मन का टाइमटेबल बनाओ। टाइमटेबल बनाने आता है ना! माताओं को आता है? मातायें अपना आपेही प्रोग्राम बनाओ। अच्छा खाना बनाना है, उस समय कौन सा स्वमान अपनी बुद्धि में इमर्ज रखना है। बहुत माला है स्वमान की। इतनी बड़ी माला है जो स्वमान गिनती करते जाओ और माला में समा जाओ। तो अभी बहुतकाल का अभ्यास चाहिए। कोई-कोई बच्चे कहते हैं, अभी तक तो विनाश का कुछ दिखाई नहीं देता है। अभी तो डेट फिक्स नहीं है, कर लेंगे, हो जायेगा, यह अलबेलापन है। सन्देश देने में भी विश्व कल्याणकारी हैं, तो कई बच्चे समझते हैं अभी समय पड़ा है, आगे चलके सन्देश दे देंगे, लेकिन नहीं। जिनको पीछे सन्देश देंगे वह भी आपको उल्हना देंगे, क्या उल्हना देंगे? आपने पहले क्यों नहीं बताया तो हम भी कुछ कर लेते थे, अभी आपने लास्ट में बताया। तो हम तो सिर्फ पहचान कर अहो प्रभू तेरी लीला अपार है, यही कह सकेंगे। पद तो पा नहीं सकेंगे। क्यों? बहुत समय का भी सहयोग चाहिए। आप सभी वारिस बैठे हो ना! जो अपने को समझते हैं हम वारिस हैं, वह हाथ उठाओ, वारिस हैं? अच्छा, वारिस हैं तो आपको फुल वर्सा पाना है या थोड़ा? सभी कहेंगे फुल वर्सा पाना है। तो फुल वर्सा है 21 जन्म पूरे, आदि से अन्त तक रॉयल प्रजा नहीं, रॉयल फैमिली में आना। राज्य फैमिली में आना। तख्त पर तो एक ही बैठेंगे ना, युगल बैठेंगे। लेकिन वहाँ की सभा जब भी लगती है तो रॉयल फैमिली के विशेष निमित्त आत्मायें वह ताजधारी बनके बैठते हैं। बिना ताज नहीं बैठते हैं। और हर कार्य में सलाह, राय देने वाले, ऐसे नहीं कि सिर्फ वह राज्य करेगा, साथ में राय से ही करते हैं इसलिए अगर सम्पूर्ण वर्सा लेना है तो पहले जन्म से लेके अन्त तक 21 जन्म पूरे, आधे भी नहीं, बीच में तो जाना नहीं है, अकाले मृत्यु तो होना नहीं है। तो पूरा वर्सा लेना है कि थोड़े में खुश होना है? आपकी मातेश्वरी जगत अम्बा सदा यह लक्ष्य रखती थी बापदादा ने जो श्रीमत दी चाहे मन्सा, चाहे वाचा, चाहे कर्मणा, जो भी श्रीमत दी वह हमें करना ही है। ऐसे पूरा वर्सा लेने वाले यही लक्ष्य बुद्धि में रखो कि अचानक, एवररेडी और बहुत समय, तीनों ही शब्द साथ में याद रखो इसलिए बापदादा का सभी आशाओं के दीपक बच्चों प्रति यही वरदान है कि सदा यह तीनों ही शब्द याद रखकर सभी आशाओं के दीपक बनने का प्रत्यक्ष सबूत दिखाओ।
बापदादा ने देखा बच्चों ने भिन्न-भिन्न प्रकार के कोर्स बनाये हैं। अच्छा है, बापदादा मुबारक देते हैं लेकिन अब समय प्रमाण कोर्स के बजाए फोर्स का कोर्स कराओ। ऐसा फोर्स का कोर्स कराओ जो वह आत्मायें बाप के सिर्फ स्नेही-सहयोगी नहीं बनें लेकिन हर श्रीमत को पालन करने वाली, सर्व फोर्स भरने वाली आत्मा बनें, समीप का रत्न बनें। यह हो सकता है? अभी फोर्स का कोर्स कराओ क्योंकि बापदादा देख रहे हैं कि अभी प्रकृति हलचल में आ गई है इसलिए कोई न कोई कारण से प्रकृति की हलचल अपना प्रभाव दिखा रही है और दिखाती रहेगी। जो ख्याल ख्वाब में बातें नहीं हैं वह प्रैक्टिकल देखते चलेंगे। तो प्रकृति को भी सतोप्रधान बनाना है। अभी तो अपने-अपने प्रभाव डाल रही है, इसलिए समय प्रति समय नई-नई बातें होती रहती हैं। लेकिन आप सब तो वारिस हो ना! सिर्फ स्नेही सहयोगी नहीं वारिस, फुल अधिकारी। है? वारिस हैं ना! वारिस है! डबल फारेनर्स भी वारिस हैं ना! वारिस है? फुल वर्सा लेने वाले। अधूरा नहीं। पाण्डव फुल वर्सा लेने वाले हो?
तो बापदादा की आशा का दीपक हूँ, यही याद रखो। स्मृति दिवस पर हर एक बच्चा चाहे आये हैं, चाहे अभी नहीं आये हैं, चाहे दूर बैठे दिल में समाये हुए हैं, हर एक को बापदादा की यह आज्ञा, बनना और मानना है कि मुझे कभी शब्द नहीं कहना है। अभी-अभी, कल भी किसने देखा, आज। जो करना है वह करना ही है, सोचना नहीं।
सोचेंगे, करेंगे, हो जायेगा, यह बाप को भी दिलासा देते हैं। बाबा आप ख्याल नहीं करो हम समय पर ठीक हो जायेंगे। लेकिन बापदादा यही चाहते कि अभी-अभी कोई भी पेपर आ जाए तो हर एक बच्चा फुल पास हो जाए। हो सकता है? हो सकता है? फुल पास होना है? अच्छा।
सेवा का टर्न भोपाल ज़ोन का है:- बापदादा को हर एक ज़ोन की सेवा का उमंग-उत्साह देख खुशी होती है और चांस भी सभी अच्छी तरह से लेते रहते हैं क्योंकि जानते हो कि सेवा का मेवा मिलता है। लेकिन बापदादा अभी फास्ट आगे बढ़ने की चाहना रखते हैं, इसके लिए निर्विघ्न ज़ोन, हर ज़ोन में जितने भी सेवाकेन्द्र हैं, उपसेवाकेन्द्र हैं लेकिन हर एरिया में निर्विघ्न सेवाकेन्द्र हो। हर एक में तीव्र पुरुषार्थ की लहर हो। अच्छा।
डबल विदेशियों से:- अभी बापदादा ने जो इशारा दिया, पुरुषार्थ को तीव्र करो। पुरुषार्थ नहीं, पुरुषार्थ का समय गया, अभी तीव्र पुरुषार्थ का समय है। और कभी-कभी पर नहीं ठहरो अभी। अभी करना है, अभी बनना है। तो होना ही है। अच्छा।
चारों ओर के तीव्र पुरुषार्थी सदा उमंग-उत्साह से कदम आगे बढ़ाने वाले, जो सच्ची दिल से करते हैं उनके मस्तक पर विजय का तिलक बापदादा देख रहे हैं, सभी को निश्चय है, नशा है तो हम विजयी हैं, विजयी थे और विजयी रहेंगे, इसलिए हर एक के मस्तक में बापदादा विजय का तिलक देख रहे हैं। चारों ओर के स्नेही भी हैं, आज अमृतवेले से बहुत-बहुत स्नेह की मालायें बापदादा के पास आई और बापदादा आप सभी बच्चों को रिटर्न में सदा विजयी बनने की माला डाल रहे हैं। तो चारों ओर के बच्चे देख भी रहे हैं क्योंकि साइंस ने यह सब साधन आपके लिए भी बनाये हैं, जो कहाँ भी बैठे देख सकते हो, सुन सकते हो, तो बापदादा देख रहे हैं, जगह-जगह पर कैसे देख भी रहे हैं और सुन भी रहे हैं, तो चारों ओर के बच्चों को बापदादा स्मृति दिवस की यादप्यार दे रहे हैं। बापदादा के दिल में हर बच्चा समाया हुआ है और हर बच्चे की दिल में बाप समाया है, बाप की दिल में बच्चा समाया है, तो मुबारक हो, मुबारक हो और मुबारक के साथ नमस्ते भी।