"सेवा करते उपराम और बेहद वृत्ति द्वारा एवररेडी बन ब्रह्मा बाप समान सम्पन्न बनो"
30-11-2021 मधुबन अव्यक्त बापदादा ओम् शान्ति 30-11-2021
ईश्वरीय मधुर याद स्वीकार करना जी।
बाद समाचार - संगमयुगी सर्वश्रेष्ठ भाग्यवान आत्मायें, जिनकी विशेषताओं का गायन स्वयं भगवान करते हैं। उसी ऊंचे स्वमान की स्मृति से रह सदा उड़ती कला में उड़ते रहना है। देखो, हम सभी ने साधारण रूप में आये हुए बाप को पहचान “मेरा बाबा'' कहा है, यही सबसे बड़ी विशेषता है। सिर्फ पहचाना ही नहीं बल्कि उसको सर्व संबंधों से अपना बना लिया है। यह भी कितना श्रेष्ठ भाग्य है। ऐसी भाग्यवान आत्मायें, वर्तमान समय सृष्टि परिवर्तन की लीला के दृश्य देखते, समाचार सुनते अपनी अचल-अडोल एकरस स्थिति बनाने का तीव्र पुरुषार्थ कर रहे हो ना!
समय प्रमाण मीठा बाबा भी यही इशारा दे रहे हैं, कि बच्चे सेवायें करते हुए सदा उपराम और बेहद की वैराग्य वृत्ति द्वारा एवररेडी बन ब्रह्मा बाप समान सम्पन्न बनो। संगम का एक-एक क्षण बहुत मूल्यवान है, कहीं भी व्यर्थ देखने, सोचने, बोलने में अपने इस अमूल्य समय को गंवाना नहीं। मन-बुद्धि को सदा याद और सेवा में बिजी रखना। आप सुखदाता के बच्चे हो तो आपके पास दु:ख की लहर नहीं आनी चाहिए। आप सर्वशक्तिवान के बच्चे कभी शक्तिहीन हो नहीं सकते। बोलो, ऐसा ही अनुभव है ना! बापदादा अपने बच्चों को सदा विजयी भव, सम्पन्न भव का वरदान दे रहे हैं।
अभी हम सब अपनी खुद की स्थिति को निर्विघ्न रखते हुए अन्य आत्माओं को भी साथ सहयोग देते चलें, यही सबसे बड़ा पुण्य है। बाबा भी कहते बच्चे, अपनी शुभचिंतक वृत्ति द्वारा प्रकृति सहित सर्व आत्माओं को मन्सा सकाश देने की सेवा करो।
बाकी वर्तमान सीज़न के इस अव्यक्ति मिलन का कार्यक्रम अभी तक बहुत सुन्दर चल रहा है। इस ग्रुप में इन्दौर ज़ोन (कमला बहन) की ओर से कुछ भाई बहिनें पहुंचे हुए हैं। सभी ज्ञान-योग की पालना से, शक्तिशाली वायुमण्डल का अनुभव करते स्वयं को खूब भरपूर कर रहे हैं।
अच्छा - सभी को याद...
30-11-21 ‘ ‘अव्यक्त-महावाक्य'' ओम् शान्ति “वीडियो'' - रिवाइज 03-02-05 मधुबन
आज ग्रेट ग्रेट ग्रैण्ड फादर अपने चारों ओर के कोटों में कोई और कोई में भी कोई बच्चों के भाग्य को देख हर्षित हो रहे हैं। इतना विशेष भाग्य और किसी को भी मिल नहीं सकता। हर एक बच्चे की विशेषता को देख हर्षित होते हैं। जिन बच्चों ने बापदादा से दिल से सम्बन्ध जोड़ा उन हर एक बच्चों में कोई न कोई विशेषता जरूर है। सबसे पहली विशेषता साधारण रूप में आये हुए बाप को पहचान “मेरा बाबा'' मान लिया। यह पहचान सबसे बड़ी विशेषता है। दिल से माना मेरा बाबा, बाप ने माना मेरा बच्चा। जो बड़े-बड़े फिलासाफर, साइंसदान, धर्मात्मा नहीं पहचान सके, वह साधारण बच्चों ने पहचान अपना अधिकार ले लिया। कोई भी आकर इस सभा के बच्चों को देखे तो समझ नहीं सकेंगे कि इन भोली भोली माताओं ने, इन साधारण बच्चों ने इतने बड़े बाप को पहचान लिया! तो यह विशेषता - पहचानना, बाप को पहचान अपना बनाना, यह आप कोटों में कोई बच्चों का भाग्य है। सभी बच्चों ने जो भी सम्मुख बैठे हैं वा दूर बैठे सम्मुख अनुभव कर रहे हैं, तो सभी बच्चों ने दिल से पहचान लिया है! पहचान लिया है कि पहचान रहे हैं? जिसने पहचान लिया है वह हाथ उठाओ। (सभी ने हाथ उठाया) पहचान लिया? अच्छा। तो बापदादा पहचानने के विशेषता की हर एक बच्चे को मुबारक दे रहे हैं। वाह भाग्यवान बच्चे वाह! पहचानने का तीसरा नेत्र प्राप्त कर लिया। बच्चों के दिल का गीत बापदादा सुनते रहते हैं, कौन सा गीत? पाना था वो पा लिया। बाप भी कहते ओ लाडले बच्चे, जो बाप से लेना था वो ले लिया। हर एक बच्चा अनेक रूहानी खजानों के बालक सो मालिक बन गये।
तो आज बापदादा खजानों के मालिक बच्चों के खजानों का पोतामेल देख रहे थे। बाप ने खजाना तो सबको एक जैसा, एक जितना दिया है। किसको पदम, किसको लाख नहीं दिया है। लेकिन खजानों को जानना और प्राप्त करना, जीवन में समाना इसमें नम्बरवार हैं। बापदादा आजकल बार-बार भिन्न-भिन्न प्रकार से बच्चों को अटेन्शन दिला रहे हैं - समय की समीपता को देख अपने आपको सूक्ष्म विशाल बुद्धि से चेक करो क्या मिला, क्या लिया और निरन्तर उन खजानों में पलते रहते हैं? चेकिंग बहुत आवश्यक है क्योंकि माया वर्तमान समय भिन्न-भिन्न रॉयल प्रकार के अलबेलापन और रॉयल आलस्य के रूप में ट्रायल करती रहती है। इसलिए अपनी चेकिंग सदा करते चलो। इतने अटेन्शन से, अलबेले रूप से चेकिंग नहीं - बुरा नहीं किया, दु:ख नहीं दिया, बुरी दृष्टि नहीं हुई, यह चेकिंग तो हुई लेकिन अच्छे ते अच्छा क्या किया? सदा आत्मिक दृष्टि नेचरल रही? या विस्मृति स्मृति का खेल किया? कितनों को शुभ भावना, शुभ कामना, दुआयें दी? ऐसे जमा का खाता कितना और कैसे रहा? क्योंकि अच्छी तरह से जानते हो कि जमा का खाता सिर्फ अभी कर सकते हैं। यह समय, फुल सीजन खाता जमा करने की है। फिर सारा समय जमा प्रमाण राज्य भाग्य और पूज्य देवी-देवता बनने का है। जमा कम तो राज्य भाग्य भी कम और पूज्य बनने में भी नम्बरवार होता है। जमा कम तो पूजा भी कम, विधिपूर्वक जमा नहीं तो पूजा भी विधिपूर्वक नहीं, कभी-कभी विधिपूर्वक है तो पूजा भी और पद भी कभी-कभी है, इसलिए बापदादा का हर एक बच्चे से अति प्यार है, तो बापदादा यही चाहते कि हर एक बच्चा सम्पन्न बने, समान बने। सेवा करो लेकिन सेवा में भी उपराम, बेहद।
बापदादा ने देखा है मैजारिटी बच्चों की योग अर्थात् याद की सबजेक्ट में रूचि वा अटेन्शन कम होता है, सेवा में ज्यादा है। लेकिन बिना याद के सेवा में ज्यादा है तो उसमें हद आ जाती है। उपराम वृत्ति नहीं होती। नाम और मान का, पोजीशन का मिक्स हो जाता है। बेहद की वृत्ति कम हो जाती है इसलिए बापदादा चाहते हैं कि कोटों में कोई, कोई में कोई मेरे बच्चे अभी से एवररेडी हो जायें, क्यों? कई सोचते हैं समय आने पर हो जायेंगे। लेकिन समय आपकी क्रियेशन है, क्या क्रियेशन को अपना शिक्षक बनायेंगे? दूसरी बात जानते हो कि बहुतकाल का हिसाब है, बहुतकाल की सम्पन्नता बहुतकाल की प्राप्ति कराती है। तो अभी समय की समीपता प्रमाण बहुतकाल का जमा होना आवश्यक है फिर उल्हना नहीं देना कि हमने तो समझा बहुतकाल में समय पड़ा है। अभी से बहुतकाल का अटेन्शन रखो। समझा! अटेन्शन प्लीज़।
बापदादा यही चाहते कि एक बच्चे में भी किसी भी एक सबजेक्ट की कमी नहीं रह जाए। ब्रह्मा बाप से तो प्यार है ना! प्यार का रिटर्न तो देंगे ना! तो प्यार का रिटर्न है - अपनी कमी को चेक करो और रिटर्न दो, टर्न करो। अपने आपको टर्न करना, यह रिटर्न है। तो रिटर्न देने की हिम्मत है? हाथ तो उठा लेते हो, बहुत खुश कर लेते हो। हाथ देखकर तो बापदादा खुश हो जाते हैं, अभी दिल में पक्का-पक्का एक परसेन्ट भी कच्चा नहीं, पक्का व्रत लो - रिटर्न देना ही है। अपने आपको टर्न करना है।
तो बापदादा कहते हैं हे मुक्तिदाता के बच्चे मास्टर मुक्तिदाता, अभी अपने को मुक्त करो तो सर्व आत्माओं के लिए मुक्ति का द्वार खुल जाए। सुनाया था ना गेट की चाबी क्या है? बेहद का वैराग्य। कार्य सब करो लेकिन जैसे भाषणों में प्रवृत्ति वालों को कहते हो कि कमल पुष्प समान बनो। ऐसे सब कुछ करते कर्तापन से मुक्त न्यारे, न साधनों के वश, न पोजीशन के। कुछ न कुछ मिल जाए, यह पोजीशन नहीं, आपोजीशन है माया की। न्यारे और बाप के प्यारे, मुश्किल है क्या न्यारे और प्यारे बनना? जिसको मुश्किल लगता है वह हाथ उठाओ। (किसी ने हाथ नहीं उठाया) किसको भी मुश्किल नहीं लगता है! जब मुश्किल नहीं लगता है, बनना ही है। ब्रह्मा बाप समान बनना ही है, संकल्प में भी, बोल में भी सेवा में भी, सम्बन्ध-सम्पर्क में भी सबमें ब्रह्मा बाप समान। जरा भी समानता में अन्तर नहीं हो। प्यार के पीछे कुर्बान करना, क्या बड़ी बात है। दुनिया वाले तो अशुद्ध प्यार के पीछे जीवन भी देने के लिए तैयार हो जाते हैं। बापदादा तो सिर्फ कहते हैं, किचड़ा दे दो, बस। अच्छी चीज़ नहीं दो, किचड़ा दे दो। कमजोरी, कमी क्या है? किचड़ा है ना! किचड़ा कुर्बान करना क्या बड़ी बात है! परिस्थिति समाप्त हो जाए, स्व-स्थिति श्रेष्ठ हो जाए। बताते तो यही हैं ना, क्या करें परिस्थिति ऐसी थी। तो हिलाने वाली पर-स्थिति का नाम ही नहीं हो, ऐसी स्व-स्थिति शक्तिशाली हो। समाप्ति का पर्दा खुले तो सब क्या दिखाई देवें? फरिश्ते चमक रहे हैं। सभी बच्चे चमकते हुए दिखाई दें इसीलिए अभी पर्दा खुलना रूका हुआ है। दुनिया वाले चिल्ला रहे हैं, पर्दा खोलो, पर्दा खोलो। तो अपना प्लैन आप ही बनाओ। बना हुआ प्लैन देते हैं ना तो फिर कई बातें होती हैं। अपना प्लैन अपनी हिम्मत से बनाओ। दृढ़ता की चाबी लगाओ तो सफलता मिलनी ही है। दृढ़ संकल्प करते हो और बापदादा खुश होते हैं वाह बच्चे वाह! दृढ़ संकल्प किया लेकिन दृढ़ता में फिर थोड़ा-थोड़ा अलबेलापन मिक्स हो जाता है, इसीलिए सफलता भी कभी आधी, कभी पौनी परसेन्टेज में हो जाती है। जैसे प्यार 100 परसेन्ट है वैसे पुरुषार्थ में सम्पन्नता, यह भी 100 परसेन्ट हो। ज्यादा भले हो, कम नहीं हो। पसन्द है? पसन्द है ना? बनना ही है। हम नहीं बनेंगे तो कौन बनेगा! यह निश्चय रखो, हम ही थे, हम ही हैं और फिर भी हम ही होंगे। यह निश्चय विजयी बना देगा। पर-दर्शन नहीं करना, अपने को ही देखना। कई बच्चे रूहरिहान करते हैं ना, कहते हैं बस इसको थोड़ा सा ठीक कर दो, फिर मैं ठीक हो जाऊंगा। इसे थोड़ा बदली कर दो तो मैं भी बदली हो जाऊंगा लेकिन न वह बदलेगा न आप बदलेंगे। स्वयं को बदलेंगे तो वह भी बदल जायेगा। कोई भी आधार नहीं रखो, यह हो तो यह हो। मुझे करना ही है। अच्छा।
सभी कोई दूर से कोई नजदीक से आये हैं। बापदादा कहते हैं भले पधारे अपने घर में। संगठन अच्छा लगता है। टी.वी. में देखते हो ना, सभा फुल होने से कितना अच्छा लगता है। अच्छा। तो एवररेडी? एवररेडी का पाठ पढ़ेंगे ना! अच्छा।
सेवा का टर्न इन्दौर ज़ोन का है:- इन्दौर वाले उठो, हाथ हिलाओ। बहुत आये हैं। बहुत अच्छा। चांस लेना यह भी बहुत श्रेष्ठ तकदीर बनाना है। तकदीरवान हो जो चांस मिला भी है और लिया भी है। तो सभी ने उमंग-उत्साह से सेवा की है, उसकी मुबारक है। अच्छा है इन्दौर तो सदा अन्तर्मुख रहता होगा, इन डोर है ना, डोर के अन्दर रहने वाले तो अन्तर्मुखी हो गये ना। तो अन्तर्मुखी सदा सुखी होता है। तो इन्दौर निवासियों को नेचरल वरदान हो गया - अन्तर्मुखी सदा सुखी। अच्छा है, उमंग-उत्साह से स्व-उन्नति कर रहे हैं, करते रहना और आगे उड़ते रहना। अच्छा।
डबल विदेशी:- अच्छा है डबल विदेशियों से मधुबन सज जाता है। चाहे ज्ञान सरोवर में रहो, चाहे नीचे रहो लेकिन आप मधुबन के डबल श्रृंगार हो। सब आपको देखकर खुश होते हैं। विदेश को नम्बरवन लेना है। विन करके वन लेना है। ठीक है ना! विन करने वाले वन नम्बर लेने वाले। ठीक है? ऐसे है? टू नम्बर नहीं ना! वन। विन और वन। अच्छे हैं, सभी को प्यारे लगते हैं। आपको सब देखने चाहते हैं। बापदादा ने तो देख लिया, अभी ऐसे घूम जाओ जो सब आपको देखें। देखो, दर्शनीय मूर्त बन गये। अच्छा है। अच्छा - आज की बात याद रही? सम्पन्न बनना ही है, कुछ भी हो जाए, सम्पन्न बनना ही है। यह धुन लग जाए, सम्पन्न बनना है, समान बनना है। अच्छा ।
चारों ओर के कोटों में कोई, कोई में भी कोई भाग्यवान, भगवान के बच्चे श्रेष्ठ आत्मायें, सदा तीव्र पुरुषार्थ द्वारा जो सोचा वह किया, श्रेष्ठ सोचना, श्रेष्ठ करना, लक्ष्य और लक्षण को समान बनाना, ऐसे विशेष आत्माओं को सदा बहुतकाल के पुरुषार्थ द्वारा राज्य भाग्य और पूज्य बनने वाले श्रेष्ठ आत्माओं को, सदा बाप के स्नेह का रिटर्न अपने को टर्न करने वाले नम्बरवन, विन करने वाले भाग्यवान बच्चों को बापदादा का यादप्यार और नमस्ते।
