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15 Feb 2022
"कर्मयोगी जीवन में तीव्र पुरुषार्थ द्वारा हर सबजेक्ट में सदा सन्तुष्ट और खुश रहो, अपने खुशनुमा, दिव्यगुण सम्पन्न चेहरे द्वारा खुशी का अनुभव कराओ"
15 February 2022 · हिंदी
15-02-2022 मधुबन अव्यक्त बापदादा ओम् शान्ति 15-02-2022
परमप्रिय अव्यक्तमूर्त मात पिता बापदादा के अति स्नेही, कर्मयोगी जीवन में तीव्र पुरुषार्थ द्वारा हर सबजेक्ट में सदा सन्तुष्ट व खुश रहने वाले, खुशनुमा, खुशनसीब निमित्त टीचर्स बहिनें तथा देश विदेश के सभी दिव्य गुणधारी सर्व खजानों से सम्पन्न ब्राह्मण कुल भूषण भाई बहिनें, ईश्वरीय स्नेह सम्पन्न मधुर याद स्वीकार करना जी।
बाद समाचार - अभी तो आप सभी शिव भोलानाथ बाबा के अवतरण का पावन पर्व “महाशिवरात्रि महोत्सव'' को धूमधाम से मनाने की तैयारी कर रहे होंगे। हम ब्राह्मण बच्चों के लिए यही सबसे बड़ा त्योहार है। हम सब खुशनसीब बच्चे बड़े उमंग-उत्साह के साथ शिवबाबा की जयन्ती मनाते हैं। यह भी बाप और बच्चों की एक साथ अलौकिक जयन्ती है। बाबा बच्चों को देखकर वाह बच्चे वाह के गीत गाते और इस दिव्य जन्म की बधाई देते। बच्चे फिर अपने भाग्य को देख सदा जन्म दाता बाप के प्रति दिल ही दिल में शुक्रिया मानते और उनके ध्वज के नीचे स्व-परिवर्तन, संस्कार परिवर्तन के शुभ संकल्प लेते हैं।
मधुबन से आप सबके पास विशेष कुछ प्रतिज्ञायें तथा सेवा के लिए पर्चे आदि का मैटर ईमेल द्वारा भेजा गया है। इस बार सभी बाबा के बच्चों को विशेष साक्षात्कार मूर्त बन, अपनी एकरस खुशनुमा स्थिति द्वारा मन्सा शक्तियों का प्रयोग करना है। कम से कम एक सप्ताह तक सभी स्थानों पर विशेष मन्सा सेवा के लिए योग तपस्या के कार्यक्रम रखे जाएं तो उसके प्रकम्पन्न परमात्म प्रत्यक्षता के निमित्त बनेंगे।
बाकी बाबा के घर में अभी तो चारों ओर के बच्चे उमंग-उत्साह से आते, यहाँ के शक्तिशाली योग की गहरी अनुभूतियों के साथ ज्ञान रत्नों से अपनी झोली भर करके जाते हैं। अभी का यह टर्न विशेष इस्टर्न ज़ोन (उड़ीसा, आसाम, बंगाल, बिहार, नेपाल) का है। सभी खूब रिफ्रेश हो रहे हैं। अभी तो सरकार ने सब तरफ आने जाने की छुट्टी दे दी है। मधुबन बेहद घर में भी आप सबका अपने-अपने टर्न अनुसार स्वागत है। अच्छा - सभी को याद... ओम् शान्ति।
15-02-22 ओम् शान्ति “अव्यक्त-बापदादा'' रिवाइज वीडियो 20-02-13 मधुबन
आज बापदादा अपने खजानों से सम्पन्न बच्चों को देख हर्षित हो रहे हैं। आदि से लेके कितने खजाने मिले हैं! पहला खजाना ज्ञान का मिला, जिससे सभी बच्चे स्वयं भरपूर हो औरों को भी खजाने से भरपूर कर रहे हैं। ज्ञान का खजाना, हर एक के बंधन जो फंसाने वाले हैं, उससे मुक्त कर बंधनमुक्त दु:ख अशान्ति मुक्त बनाने वाला है। दूसरा खजाना है योग का, जिससे बहुत शक्तियां प्राप्त हुई हैं और तीसरा है धारणा का खजाना, जिससे बहुत-बहुत गुणों की प्राप्ति हुई है। लेकिन सबसे बड़े ते बड़ा खजाना है इस संगम समय का खजाना। इसका महत्व बहुत बड़ा है क्योंकि संगम के समय पर ही बाप शिवबाबा, बाप रूप में भी मिलता, शिक्षक रूप में भी मिलता और सतगुरू रूप में भी मिलता। इस संगमयुग में एक जन्म में 21 जन्म का वर्सा मिलता है, जिस वर्से से जन्म-जन्म में कोई दु:ख अशान्ति नहीं होती है। साथ में संबंध में जो परिवार मिलता वह परिवार भी न्यारा और प्यारा होता है। एक दो के द्वारा ईश्वरीय स्नेह, जो ऐसा ईश्वरीय स्नेह सारे कल्प में नहीं मिल सकता। तो सर्व खजानों से भरपूर हुए हो ना! हुए हैं? हाथ उठाओ।
तो बापदादा आज खजानों के मालिक सम्पन्न बच्चों को देख रहे हैं। दिल से क्या निकलता? वाह बच्चे वाह! हर बच्चा बाप का प्यारा बन गया है। बच्चे तो बहुत हैं, अलग-अलग जगह पर बैठकर भी मिल रहे हैं, देख रहे हैं। लेकिन बापदादा आज चारों ओर दूर-दूर तक अपने खजानों से सम्पन्न बच्चों को देख खुश हो रहे हैं और बच्चे भी खजानों को देख खुश रहते हैं। सदा प्राप्तियों के नशे में खुश रहते हैं। बाप भी बच्चों को देख, बच्चों के सौभाग्य को देख खुश हो रहे हैं।
देखो, आज भी बाप ने सुना कि सभी खुशी खुशी में भागकर पहुंच गये हैं। सबके दिल में यही गीत बजता वाह बाबा वाह! कोई-कोई को तकलीफ भी है लेकिन जहाँ प्यार है तो वह फर्श पर सोते हुए भी खुशियों के अर्श में हैं। तो बापदादा इस ग्रुप को विशेष बधाई देते हैं। सबके चेहरे खुशी में नज़र आ रहे हैं। बापदादा ने देखा सब अच्छे उमंग-उल्हास से क्लासेज़ भी अच्छे कर रहे हैं। बापदादा सब सुनते हैं। यहाँ जो भी ज़ोन आये हैं उनके मुख्य ज़ोन हेड उठो। ज़ोन हेड। आपके लाये हुए भाई बहिन खुश हैं? खुश हैं तो हाथ उठाओ। अच्छा है। बापदादा भी खुश है और आप सबको मुबारक विशेष दे रहे हैं। आगे के लिए तो बापदादा अटेन्शन दिलायेगा लेकिन बापदादा आप सभी आये हुए बच्चों की सहनशक्ति देख आप एक-एक बच्चे को पदमगुणा प्यार दे रहे हैं। अभी जो भी बच्चे आये हैं, उन सभी बच्चों ने अपना सहनशक्ति का, खुश रहने का बहुत अच्छा रिकार्ड दिखाया है। कोई बीमार हुआ! हुआ? एक दो तो होते ही हैं वैसे भी लेकिन बापदादा स्पेशल उन बच्चों को सहनशक्ति का इनाम दिल का अति प्यार दे रहे हैं। अब आगे क्या करना है? बापदादा का खास सभी से अति प्यार है। अभी आगे क्या करना है?
अभी बापदादा हर बच्चे को तीव्र पुरुषार्थी देखने चाहते हैं। तीव्र पुरुषार्थी अर्थात् सब सबजेक्ट में अपने पुरुषार्थ से सन्तुष्ट हों और बापदादा भी हर बच्चे से यही चाहते हैं कि अभी समय अनुसार हर बच्चे के चेहरे पर शक्तियां और खुशी नज़र आनी चाहिए क्योंकि दिन-प्रतिदिन दुनिया में दु:ख तो बढ़ना ही है। लेकिन ऐसे दु:ख के समय आपका खुशनुमा, दिव्यगुण वाला चेहरा देख उन्हों को थोड़े समय के लिए भी खुशी का अनुभव हो। हर एक बच्चे के चेहरे में वह ईश्वरीय स्नेह, ईश्वरीय प्यार, हिम्मत बढ़ाने का प्यार, खुश रहने का अनुभव हो। कई बच्चे कहते हैं वैसे तो हम खुश रहते हैं लेकिन कर्मयोगी जीवन में थोड़ा सा कर्म में फर्क पड़ जाता है। कर्म में फर्क नहीं आना चाहिए। कर्म करते भी सदा अटेन्शन रहे मैं कर्मयोगी आत्मा हूँ। शरीर को चलाने वाली, शरीर का भी मालिक हूँ। तो हर समय चाहे कर्म करो, चाहे नहीं करो लेकिन कर्म करने समय भी यह सोचो कि मैं कर्म कराने वाली आत्मा हूँ और आत्मा, कौन सी आत्मा हूँ? बाप की लाडली बच्ची हूँ या बच्चा हूँ। परमात्मा की प्यारी हूँ। तो मालिक होके इस शरीर को चलाने वाली। सदा बाप की याद दिल में समाई हुई हो। तो हर एक चेक करो कर्मयोगी बनके कर्म कर रही हूँ? कर्म योगी हूँ तो योग बाप से है। तो बाप सदा फालो फादर कहते हैं। बाप हमारे साथ है। तो यह ग्रुप क्या करेगा? अभी अपने-अपने स्थान पर जाके अपने चेहरे से ऐसे खुशमिजाज़ चेहरे का अनुभव कराना क्योंकि आज दुनिया में खुशी अभी कम होती जाती है और आपका चेहरा उनको खुशी का अनुभव कराये। आगे चलके दु:ख अशान्ति तो बढ़नी ही है। कोई को सुनने वा कोर्स करने का इतना समय नहीं मिलेगा लेकिन आपका चेहरा उन्हों को खुशी का अनुभव कराये। हो सकता है ना! हो सकता है? हाथ उठाओ। अगर इतने एक-एक का चेहरा जगह-जगह से आया हुआ खुशी बांटने का लक्ष्य रखे, सदा खुश, कभी-कभी नहीं क्योंकि खुशी की विशेषता है, और कोई भी चीज़ जितनी किसको देंगे तो आपके पास उतनी कम हो जायेगी। आपके पास दो चीजें हैं एक देंगे तो एक कम होगी। लेकिन सारे जहान में अगर आप खुशी देते हो तो कम होती है या बढ़ती है? ऐसी खुशी आपके पास है। तो सभी आत्माओं को अब खुशी बांटों। डबल फायदा है आपकी भी बढ़ेगी, उनकी भी बढ़ेगी।
तो आज का विशेष यह काम याद रखना, खुशी बांटनी है। अगर मानों आपके पास से कोई न कोई बात के कारण खुशी चली जाती है तो बाप से खुशी लेके आप भी खुश रहो और दूसरों को भी खुशी दो। तो सभी क्या करेंगे अभी? पहले भी सुनाया, तीव्र पुरुषार्थी बनो, चल रहे हैं नहीं, उड़ रहे हैं और दूसरा बापदादा ने अटेन्शन खिंचवाया है कभी-कभी अक्षर खत्म करो। खुशी है, कहते हैं है लेकिन कभी-कभी खत्म हो जाती है। तो कभी-कभी शब्द सदा के लिए यहाँ छोड़के जाना। छोड़ सकते हो? छोड़ेंगे? हाथ उठाओ, छोड़ेंगे? बापदादा सभी बच्चों को अभी से ही सदा खुश रहने की मुबारक दे रहे हैं। फिर कभी-कभी शब्द नहीं कहना। सदा रहना। तो सभी खुश हैं ना! खुश हैं? सदा खुश रहेंगे, यह हिम्मत है? जो समझते हैं कि दु:ख अशान्ति जो भी थोड़ी कभी-कभी आती है वह इस बारी हम यहाँ छोड़के जायेंगे, साथ नहीं ले जायेंगे, इतनी हिम्मत समझते हो तो दो-दो हाथ उठाओ। बापदादा बहुत खुश है। हिम्मते बच्चे मददे बाप तो है ही। तो बड़ा ज़ोन आया है ना। बापदादा भी देखके खुश है। थोड़ी तकलीफ हुई है लेकिन आ तो गये। बापदादा को भी बच्चों से मिलके खुशी होती है और बापदादा हमेशा वाह बच्चे वाह! का गीत गाते हैं। अच्छा। अभी एक-एक ज़ोन उठाओ।
(सेवा का टर्न बंगाल, बिहार, आसाम, उड़ीसा, नेपाल का है)
नेपाल:- बापदादा इस ज़ोन की भी रिजल्ट को देख खुश है। सेवा का उमंग अच्छा है इसलिए बापदादा सदा के लिए सहयोग देने की, आगे बढ़ने की, वरदानी बनने की मुबारक दे रहे हैं। बढ़ते रहो, बढ़ाते रहो बापदादा सदा साथ हैं। सभी खुश हैं? अच्छा है, वृद्धि है और वृद्धि होती रहेगी।
बंगाल, बिहार, उड़ीसा, आसाम:- यह भी ज़ोन अच्छा सेवा में और स्टूडेन्ट की वृद्धि करने में आगे जा रहा है और बापदादा ने देखा कि हिम्मत का वरदान इन्हों को विशेष है। हिम्मत होने के कारण बाप की मदद भी है और आगे भी रहेगी। बापदादा खुश है और साथ-साथ सदा अमृतवेले चक्र लगाते रहेंगे। बापदादा ने देखा स्थान सेवाकेन्द्रों का अच्छा वृद्धि करने का तरीका है। बापदादा विशेष हिम्मत पर सदा साथी बनने का वरदान दे रहे हैं।
डबल विदेशी:- अभी तो बहुत अच्छा संगठन विदेश वालों का दिखाई दे रहा है। बापदादा ने देखा विदेशियों ने बापदादा का एक टाइटल अच्छा स्पष्ट किया है, यह देख खुशी है क्योंकि जब तक भारत की सेवा थी तो विश्व सेवाधारी का टाइटल नहीं रख सकते थे लेकिन विदेश की सेवा के कारण बाप का नाम विश्व सेवक का सिद्ध हो गया।
अभी भी इतने सब आये हैं, तो बापदादा एक एक बच्चे को देख खुश होते हैं और सभी ब्राह्मण भी बाप के साथ यह गीत गाते हैं वाह डबल पुरुषार्थी वाह! बादादा सन्तुष्ट है और आप भी सन्तुष्टमणियां आगे बढ़ रहे हैं। बढ़ते रहेंगे। ओम् शान्ति। अच्छा।
चारों ओर के बच्चे चाहे इन्डिया के हैं, चाहे विदेश के हैं, चारों ओर के बच्चे बापदादा देख रहे हैं कितने उमंग उत्साह से टाइम का बदली होते भी प्यार से मिलते रहते हैं। टाइम का अन्तर होते भी उमंग से आते हैं इसलिए बापदादा खुश है। प्रोग्रेस भी है और प्रोग्रेस होता रहेगा, यह वरदान बापदादा दे रहे हैं। अच्छी सेवा कर रहे हैं, जनक बच्ची निमित्त है। अटेन्शन अच्छा दे रही है। साथी भी जो निमित्त हैं वह भी बापदादा ने देखा कम नहीं हैं। तो जो भी निमित्त हैं उन सबको विशेष यादप्यार बापदादा दे रहे हैं और मिलता भी रहेगा |