Search for a command to run...
31 Jan 2022
"मेरे को तेरे में परिवर्तन कर बेफिक्र बादशाह बनो , बाप की मोहब्बत और सेवा में मन को इतना बिजी कर दो जो व्यर्थ आने की मार्जिन न रहे"
31 January 2022 · हिंदी
31-01-2022 मधुबन अव्यक्त बापदादा ओम् शान्ति 31-01-2022
प्राणप्यारे अव्यक्तमूर्त मात-पिता बापदादा के अति लाडले, सदा बाप की मोहब्बत में समाये हुए, मेरे को तेरे में परिवर्तन कर सदा रूहानी फखुर में रहने वाली निमित्त टीचर्स बहिनें तथा देश विदेश के सभी ब्राह्मण कुल भूषण भाई बहिनें, ईश्वरीय स्नेह सम्पन्न मधुर याद स्वीकार करना जी।
बाद समाचार - इस नये वर्ष के जनवरी मास में बाबा के सभी बच्चों ने लवलीन स्थिति का बहुत अच्छा अनुभव किया। चारों तरफ योग तपस्या की अच्छी लहर चली। अधिकतर भाई बहनों ने मन और मुख का मौन रख 108 घण्टे की तपस्या करने का लक्ष्य पूरा किया। सभी ने ब्रह्मा बाप के कदम पर कदम रखते हुए फालो फादर करने का भी अच्छा सबूत दिया। कईयों ने अपनी उन्नति के लिए चार्ट भी रखा। अनेक स्थानों से बहुत अच्छे स्व-उन्नति के समाचार प्राप्त हुए हैं। अभी तो सभी मिलकर सेवाओं की अच्छी धूम मचायेंगे। समय प्रमाण ड्रामा अनुसार जिस प्रकार की सेवाओं का चांस मिले, हर एक को तन-मन से सदा बिजी रहना है। यही व्यर्थ से बचने का अच्छा साधन है।
अभी तो प्यारे शिव भोलानाथ बाबा का दिव्य अवतरण दिवस “महा शिवरात्रि का'' पावन पर्व भी समीप आ रहा है। सब तरफ शिवबाबा का ध्वज फहराते, दिव्य सन्देश देने के भिन्न-भिन्न कार्यक्रम अपने-अपने स्थानों पर रखेंगे ही। भारत की आजादी के इस 75 वें वर्ष के अमृत महोत्सव कार्यक्रमों में भी सरकार के साथ मिलकर सेवायें करनी हैं। यह सब साधन परमात्म प्रत्यक्षता के निमित्त बनेंगे। बाबा कहते बच्चे, अभी तो विशेष अपनी शक्तिशाली मन्सा द्वारा सेवा करने के अभ्यासी बनना है। अब अपनी श्रेष्ठ वृत्तियों से वृत्तियों का, श्रेष्ठ संकल्प से संकल्पों का परिवर्तन करने की सेवा करो। विश्व कल्याण का यह महान कार्य सम्पन्न करना है तो हद की बातों में, हद के स्वभाव संस्कार को परिवर्तन करने में समय देने के बजाए मन्सा शक्तियों का प्रयोग करो। इसी योग के प्रयोग से छोटी-मोटी कमजोरियां अपने आप समाप्त हो जायेंगी।
स्वयं को सशक्त बनाने के लिए मधुबन के सभी स्थानों पर योग तपस्या भट्ठियों के कार्यक्रम चलते रहते हैं। बापदादा की यह सीज़न भी सीमित संख्या में बहुत अच्छी चल रही है। अभी दिल्ली और आगरा ज़ोन के भाई बहिनें पहुंचे हुए हैं। शीतल हवाओं के बीच सभी ज्ञान योग की अच्छी पालना लेते हुए खूब रिफ्रेश हो रहे हैं। अच्छा - सभी को याद... ओम् शान्ति।
31-01-22 ओम् शान्ति “अव्यक्त-बापदादा'' वीडियो-रिवाइज 03-4-12 मधुबन
आज बापदादा चारों ओर के अपने बेफिक्र बादशाहों को देख रहे हैं। हर एक बच्चा सवेरे से उठ बेफिक्र स्थिति में स्थित हो हर कर्म करता है। हर एक बच्चे को अनुभव है कि यह बेफिक्र बादशाह की जीवन बादशाही भी और बेफिक्र भी, कितनी प्यारी लगती है क्योंकि आप सभी ने बाप को फिक्र देकरके फखुर ले लिया है। फखुर भी अविनाशी फखुर ले लिया है। हर एक अनुभव करते हैं कि यह बेफिक्र जीवन कितनी प्यारी है। दिनरात कोई भी बात का फिक्र नहीं लेकिन फखुर है। जानते हो कि यह बेफिक्र रहने की जीवन बाप ने इस एक जन्म के लिए नहीं लेकिन अनेक जन्मों के लिए बेफिक्र बादशाह बना दिया। अभी अनुभव करते हो बेफिक्र जीवन अगर है तो सदा मस्तक में दिव्य ज्योति चमकती रहती है। और अगर फिकर है तो माथे पर अनेक प्रकार के दु:खों का टोकरा भरा हुआ होता है। यह बेफिक्र जीवन की विधि बहुत सहज है - जो भी हद का मेरा-मेरा है उसको तेरा कर दिया। मेरा और तेरा में एक मात्रा का ही फर्क है। मे और ते। लेकिन मेरे को तेरा करने से जीवन कितनी खुशनुमा बन जाती है। बन गई है ना! कांध हिलाओ, बन गई! बेफिक्र जीवन बन गई! क्योंकि फिकर वाली जीवन का आधार है व्यर्थ संकल्प। तो अभी बापदादा हर बच्चे से यही चाहता है कि हर बच्चे के अन्दर व्यर्थ संकल्प का निशान भी नहीं रहे क्योंकि जब मेरे को तेरे में बदल दिया तो आप क्या हो गये? आप हो गये बेफिक्र बादशाह और यह बेफिक्र बादशाह की जीवन कितनी प्यारी है। हर कर्म करते बेफिक्र बादशाह। कोई फिक्र नहीं क्यों, क्या, कैसे, कब तक... यह सब समाप्त हो गये। बापदादा आज यही चाहते हैं कि हर एक बच्चा व्यर्थ को मेरे के बदले तेरा कर दे। बाप आपेही भस्म कर देंगे। आप सिर्फ एक मात्रा का अन्तर करो, मंजूर है! हो सकता है? अगर हो सकता है तो हाथ उठाओ। बहुत अच्छा क्योंकि यह 5-6 मास आप सभी को विश्व के आगे दु:खी आत्माओं को पावरफुल वृत्ति द्वारा सुख शान्ति की किरणें देनी हैं। इसी में ही अपना मन बिजी रखना है। व्यर्थ संकल्प भी किसमें आते हैं? मन में आते हैं ना! तो बापदादा यही चाहते हैं कि हर एक बेफिक्र बादशाह बच्चा अपने मन को अर्थात् वृत्ति को इतना बिजी रखे जो व्यर्थ को आने की मार्जिन ही नहीं रहे। मेहनत नहीं करनी पड़े लेकिन बाप के मोहब्बत में इतना बिजी रहो, वृत्ति की सेवा में इतना मन को बिजी रखो जो युद्ध भी नहीं करनी पड़े। कई बच्चे कहते हैं चाहते नहीं हैं लेकिन आ जाते हैं। इसको क्या कहेंगे? कि मन को बाप के प्यार और सेवा में बिजी नहीं रखा। सभी से पूछते हैं कि आपका प्यार बाप से कितना है? तो क्या कहते? बेहद है। तो जिससे प्यार होता है उसका कहना मानना कोई मुश्किल नहीं होता। तो आप सभी का बाप से अटूट प्यार है ना! कि कभी-कभी है? सदा है या कभी-कभी है? जो कहते हैं सदा प्यार है वह हाथ उठाओ। सदा प्यार है, देखो सोचो, सदा प्यार है तो बाप का कहना और बच्चे का करना। यह तो जानते हो ना!
तो अभी इस सीजन में बापदादा बच्चों को यही दृढ़ संकल्प कराने चाहते हैं, तैयार हो ना! कांध हिलाओ। तैयार हो दृढ़ संकल्प करने के लिए? पीछे वाले तैयार हैं? मातायें भी तैयार हैं? पाण्डव भी तैयार हैं? अच्छा हाथ उठाओ। इसमें दो-दो हाथ उठाओ। हाथ उठाते हो तो बापदादा को खुश तो कर देते हो। अभी जैसे यह हाथ उठाया ऐसे मन का हाथ उठाओ। कभी भी व्यर्थ संकल्प को आने नहीं देंगे। उनका काम है आना, आपका काम क्या है? समाप्त कर देना। तो इस सीजन में बापदादा ने पहले भी कहा है कि दो बातों का ध्यान रखना है एक तो संकल्प, दूसरा समय। जानते हो आप, इस संगम का समय एक-एक मिनट का कनेक्शन 21 जन्म के साथ है। और इस समय बापदादा का बच्चों से, बच्चों का बाप से प्यार है। तो संगम समय का एक सेकण्ड, सेकण्ड नहीं है क्योंकि 21 जन्मों का कनेक्शन है। अगर अब नहीं समय को बचाया तो बाप से जो प्यार है और हर एक चाहता है कि बाप के साथ अब भी रहें, साथ भी चलें। अपने घर लौटना है ना अभी। तो घर में भी साथ में चलें और फिर राज्य में भी बापदादा के साथ विशेष ब्रह्मा बाबा के साथ राजधानी में नजदीक साथ में आयें इसलिए ब्रह्मा बाप तो फरिश्ता रूप में है और आपको साथ में चलना है तो क्या करना पड़े? फरिश्ता बनना पड़े ना! फरिश्ता बनेंगे! बनना ही है ना!
बाप ब्रह्मा के हाथ में हाथ देके साथ चलना है, तो हाथ क्या है? फरिश्ते को स्थूल हाथ तो हैं नहीं। ब्रह्मा बाप का हाथ क्या है? श्रीमत। तो बापदादा की यही श्रीमत है कि अब बेफिक्र बादशाह बन सदा जैसे आपकी जगदम्बा ने पुरुषार्थ किया, बाप का कहना और जगत अम्बा का करना, ऐसे जगत अम्बा को फॉलो करो। समय और संकल्प को सफल करना ही है। व्यर्थ नहीं जाये। सुनाया ना - एक-एक संकल्प का 21 जन्म से कनेक्शन है। तो बापदादा यही चाहते हैं कि सदा मन को बिजी रखो। चाहे मुरली के मनन में, चाहे सेवा में, हर समय बिजी रहो। अपना चार्ट बनाओ, हर समय बीच-बीच में जो बापदादा ने ड्रिल सुनाई है भिन्न-भिन्न, जानते हो ना अशरीरी बनने की ड्रिल। अपने तीन स्वरूपों के स्मृति की ड्रिल, जानते हो ना! जैसे बाप के तीन रूप हैं, ऐसे आपके भी तीन रूप हैं। ब्राह्मण, फरिश्ता और देवता, इन तीनों रूपों में ड्रिल द्वारा अपने मन को बिजी रखो इसलिए महामंत्र क्या है? मनमनाभव।
बाकी बापदादा का हर बच्चे से बहुत-बहुत प्यार है इसलिए बापदादा यही चाहते हैं कि हर बच्चा विजयी भव के वरदानी बनें। सुनाया था ना कि कई बच्चे सोचते हैं हम विजयी तो बनें लेकिन माला तो 108 की है, तो विजयी बनके माला में तो आ नहीं सकेंगे लेकिन बापदादा का इतना प्यार है कि आप विजयी बनो तो बापदादा माला में भी लड़ें (लड़ियां) लगा देगा। आप सिर्फ विजयी बनो। तो क्या संकल्प है? विजयी बनना ही है ना! कि सिर्फ 108 विजयी बनेंगे? नहीं। बाप का हर बच्चा विजयी है। बापदादा हर बच्चे के मस्तक में क्या देख रहे हैं? विजय का तिलक क्योंकि साधारण रूप में बाप को पहचान लिया है ना! चाहे लास्ट बच्चा है, पुरुषार्थ में ढीला है लेकिन उसमें यह विशेषता है कि साधारण रूप में आये हुए बाप को पहचान मेरा बाबा तो कहता इसलिए हर एक बच्चे को हिम्मत रख विजय प्राप्त करनी ही है। सिर्फ क्या करना है? कोई मेहनत की बात नहीं है, प्यार की बात है। बापदादा से प्यार है, परिवार से प्यार है तो प्यार वाले से अलग नहीं रहा जाता है। तो ब्रह्मा बाबा से कितना प्यार है? जो समझते हैं कि ब्रह्मा बाप से, शिव बाप से हमारा अटूट प्यार है वह हाथ उठाओ। अटूट, अटूट? बहुत अच्छा। तो दूसरी सीजन में बापदादा क्या देखने चाहता है? जानते तो हो। आपको 5-6 मास मिलना है व्यर्थ से समर्थ संकल्प करने में।
तो बोलो, मधुबन वाले उठो, चाहे नीचे चाहे ऊपर। बहुत हैं। तो मधुबन वाले बापदादा को प्यारे हैं। ऐसे नहीं दूसरे प्यारे नहीं हैं। वह भी प्यारे हैं लेकिन मधुबन वालों से एक बात का विशेष प्यार है, वह क्या? मन्सा में याद तो सब करते हैं। योगी तू आत्मायें तो सभी हैं, ज्ञानी आत्मायें भी सभी हैं लेकिन मधुबन वालों को अपना भविष्य सहज बनाने की एक लिफ्ट है। वह लिफ्ट क्या है? जो भी मधुबन में आते हैं, उनकी सेवा के निमित्त हैं। जैसे खाना बनाने वाले जो भी कोई ड्युटी करने वाले हैं। बापदादा तो कहते हैं कोई झाड़ू लगाने वाला भी है ना, वह भी भाग्यवान है, क्यों? जो भी आते हैं वह यह वायुमण्डल देख आपके दिल के प्यार की शक्ति देख खुश हो जाते हैं। चाहे खाना बनाने वाला, चाहे कोई भी ड्युटी वाला है लेकिन मधुबन वालों को चांस है। मधुबन का प्यार और शक्तिशाली वायुमण्डल बनाने का, इसलिए बापदादा मधुबन वालों को बहुत-बहुत मुबारक दे रहे हैं और आगे के लिए भी अपने मन में आत्माओं को सन्तुष्ट करने में और शक्तिशाली अनुभव कराने में निमित्त बनते रहेंगे इसलिए सब ताली बजाओ मधुबन वालों के लिए। अच्छा।
बाकी सभी चारों ओर के जो दूर बैठे हैं या सम्मुख बैठे हैं सभी को बापदादा क्या देख रहे हैं? बापदादा देख रहे हैं, हर एक के मस्तक में चमकती हुई ज्योति चमक रही है। सभी के मन में संकल्प यही है कि हमारे को कैसा बनना है? जैसे बाप वैसे हम। यह उमंग उत्साह भी सभी के मन में है।
बापदादा टीचर्स को विशेष उठाने चाहते हैं। सब टीचर्स उठो। देखो। कितनी टीचर्स हैं। चौथा हाल तो टीचर्स हैं। तो टीचर्स को देख बापदादा भी खुश होते हैं क्योंकि बाप समान सीट का भाग्य मिला है। बाप की मुरली सुनाने की सीट मिली है। बाप हमेशा टीचर्स को साथी कहते हैं। अभी टीचर्स के लिए बापदादा एक बात चाहते हैं। सुनायें क्या? बापदादा चाहते हैं कि हर एक टीचर चेहरे से ब्रह्मा बाप समान ऐसे खुशनुमा नज़र आये। अन्दर पुरुषार्थ होगा भी लेकिन वह आपकी सूरत से नज़र आवे, बाप प्रत्यक्ष हो। कोई को भी देखें तो आपमें बाप की चमक दिखाई दे। ऐसे चेहरे से सेवा करने वाली बाप को प्रत्यक्ष कर ही लेगी। अब समय आ गया है, बाप को अपने चेहरे से प्रत्यक्ष करने का। तो टीचर्स को सदा मेरा बाबा तो स्वत: ही याद है। अभी बाप को चेहरे से प्रत्यक्ष करना है। कर सकते हैं ना! कर सकते हैं तो करो। देखो, अभी तक की रिजल्ट में क्या सभी कहते हैं! ब्रह्माकुमारियां बहुत अच्छा काम कर रही हैं, बाप प्रत्यक्ष नहीं है। वह अभी भी गुप्त है। तो अभी समय समीप आ रहा है तो आप द्वारा चाहे निमित्त टीचर्स हैं या कोई भी बच्चा है, अभी बाप को प्रत्यक्ष करो। ब्रह्माकुमारियां अच्छा कार्य कर रही हैं, यह तो हो गया। यहाँ तक पहुंच गये हो। लेकिन अभी यह प्रत्यक्ष करो कि स्वयं परमात्मा ब्रह्मा तन में प्रत्यक्ष हो ब्रह्माकुमारियों को ऐसे योग्य बना रहे हैं। अभी यह प्वाइंट रही हुई है। गीत तो गाते हैं मेरा बाबा आ गया, लेकिन अभी अन्य आत्माओं के अन्दर यह प्रत्यक्ष हो कि भगवान स्वयं प्रत्यक्ष हो यह कार्य बहिनों द्वारा या भाईयों द्वारा करा रहे हैं। यह प्रत्यक्षता करनी है ना! कब करेंगे? अब। क्या कहेंगे? अब ना! (अभी शुरू करेंगे, अगली सीजन तक हो जायेगा) आप सभी साथ में हो, अगली सीजन तक हो जायेगा? हाथ उठाओ जो समझते हैं! थोड़े हाथ उठा रहे हैं। जो हाथ नहीं उठा रहे हैं वह देखेंगे और आप करेंगे! टीचर्स ने तो संकल्प किया है ना! क्योंकि देख रहे हो बापदादा तो कहते ही हैं कि सब अचानक होना है। कोई बच्चे समझते हैं अचानक, अचानक भी बहुत समय हो गया है। अभी होना चाहिए। लेकिन अचानक तब हो जब बच्चे भी बाप समान बन जायें। आपकी सूरत मूरत एक-एक बोल बाप को प्रत्यक्ष करे। हो जाना तो है ही। होना ही है अभी सिर्फ निमित्त बनना है। अच्छा।
सेवा का टर्न दिल्ली और आगरा ज़ोन का है: - दिल्ली वालों को तो अपनी दिल बड़ी करनी पड़ेगी। क्यों? जो भी ब्राह्मण हैं वह देवता बनके कहाँ आयेंगे? दिल्ली में ही आयेंगे ना! तो दिल्ली वालों को बहुत बड़ी दिल बनानी पड़ेगी। देखो, अगर ब्रह्मा बाप भी कृष्ण बनके आयेंगे, तो भी कहाँ आयेंगे! दिल्ली में ही आयेंगे ना। तो दिल्ली वालों को अभी भी दिल्ली के ब्राह्मणों की संख्या दिल खोलके बढ़ानी पड़ेगी। सब ज़ोन से ज्यादा संख्या दिल्ली में होनी चाहिए।
बाकी दिल्ली फाउण्डेशन है। वह भी दिन आयेगा जो यह सारी मिनिस्ट्री सोचेगी कि यह जो कह रहे हैं वह मानना ही पड़ेगा। यह कमाल करके दिखाओ। नम्बरवन दिल्ली करे या कोई भी करे, उसको बापदादा इनाम देंगे। अभी जो रही हुई बात है उसको पूरा करो। उमंग है ना! उमंग है? दिल्ली वालों को तो है ना! अच्छा।
डबल विदेशी:- बापदादा चाहते हैं कि जैसे आपको टाइटिल मिला है डबल विदेशी, ऐसे आपका टाइटिल हो डबल पुरुषार्थी, तीव्र पुरुषार्थी। तीव्र पुरुषार्थी डबल विदेशी आये हैं। हो सकता है? जैसे डबल विदेशी हो वैसे तीव्र पुरुषार्थी। कोई भी साधारण पुरुषार्थी नहीं। बापदादा खुश होते हैं, हिम्मत रख करके पहुंच जाते हैं। कोई भी टर्न इस सीजन में नहीं देखा है जिसमें विदेशी नहीं आये हों। तो जैसे यह हिम्मत रख करके कर रहे हो। ऐसे ही अभी यह एक्जैम्पुल दिखाओ कि डबल विदेशी अर्थात् तीव्र पुरुषार्थी। हो सकता है? हाथ उठाओ। तो अगले ग्रुप में जो भी आयेंगे वह तीव्र पुरुषार्थी ग्रुप।
मधुबन वालों को पसन्द है? पसन्द है ना! यह सब मधुबन वाले बैठे हैं, पसन्द है? मधुबन वाले फिर उठो। अच्छा - बहुत अच्छा, बापदादा को तीव्र पुरुषार्थी बहुत पसन्द हैं। कब तक साधारण पुरुषार्थ करेंगे? चलना है ना अभी! तो घर जाना है ना! तो तीव्र पुरुषार्थी बनके जाना है ना! बापदादा ने सुनाया भी हर एक बच्चा विजयी हो। यह अच्छा लगता है। यह हुआ, यह हुआ... यह समाचार सुनना अच्छा नहीं लगता है। अगर 6 मास तीव्र पुरुषार्थ करेंगे तब तो आदत पड़ जायेगी। पड़ जायेगी ना आदत! तो रिजल्ट लेंगे तीव्र पुरुषार्थी 6 मास में कितने बने! और बापदादा इनाम भी देंगे। जिस ज़ोन में ज्यादा से ज्यादा तीव्र पुरुषार्थी होंगे उनको इनाम भी देंगे, मंजूर है! मंजूर है मधुबन वाले! अच्छा।
सभी चारों ओर के बच्चों को बापदादा का दिल का यादप्यार और साथ-साथ बाप हर एक बच्चे को अपने स्वमान के नशे में निश्चय में देख हर्षित होते हैं, कभी भी स्वमान को नहीं छोड़ना। स्वमानधारी अर्थात् सदा सर्व प्राप्तिवान, स्वमान की लिस्ट बड़ी लम्बी है, रोज़ एक-एक स्वमान स्मृति में रख स्वरूप में लाते तीव्र पुरुषार्थी बन आगे बढ़ते चलो। बापदादा को दिल में बिठाके और अपने को बापदादा के दिल में बिठाके निर्भय होके मास्टर सर्वशक्तिमान बन चलते रहो, उड़ते रहो और उड़ाते रहो। ओम् शान्ति।