"मेरे को तेरे में परिवर्तन कर बेफिक्र बादशाह बनो , सेकण्ड में व्यर्थ को बिन्दी लगाने के अभ्यासी बन हर संकल्प और समय को सफल करो "
16-12-2022 मधुबन अव्यक्त बापदादा ओम् शान्ति 16-12-2022
परमप्यारे अव्यक्त मूर्त मात-पिता बापदादा के अति लाडले, सदा बेफिक्र बादशाह की स्थिति में रहने वाले, डबल लाइट के ताजधारी, हद के मेरे को तेरे में परिवर्तन कर सदा रूहानी फखुर में रहने वाली निमित्त टीचर्स बहिनें तथा देश विदेश के सर्व ब्राह्मण कुल भूषण भाई बहिनें, ईश्वरीय स्नेह सम्पन्न मधुर याद स्वीकार करना जी।
बाद समाचार - बाबा कहते बच्चे, अब सदा नथिंग न्यु की स्मृति से अपने हर सेकण्ड श्वांस और समय को सफल करो क्योंकि संगम का यह समय सारे कल्प में विशेष अमूल्य समय है, इस समय जितनी प्राप्ति करने चाहो उतनी कर सकते हो। इसी एक जन्म में अनेक जन्मों की प्रालब्ध बन रही है इसलिए एक सेकण्ड भी गंवाना नहीं है। एक सेकेण्ड का कनेक्शन अनेक जन्मों के साथ है। जमा करने का एक वर्ष अनेक वर्षों की प्राप्ति का है इसलिए संगम का एक सेकण्ड भी महान है। तो इसकी वैल्यु को समझ सफल करना है।
बापदादा के ऐसे मधुर शिक्षाओं भरे महावाक्य सुनते सभी के अन्दर यही संकल्प आता है ना कि अभी हमें एकान्त में रह एकाग्रता का अच्छा अभ्यास करना है। अभी नया वर्ष समीप आ रहा है, बाबा के सभी बच्चे जनवरी मास में विशेष ब्रह्मा बाबा के स्नेह में समाते, अपनी अव्यक्त स्थिति बनाने का बहुत अच्छा पुरुषार्थ करते हैं। हर वर्ष की भांति विशेष पुरुषार्थ का होमवर्क शीघ्र ही मधुबन से आपके पास आ जायेगा। उसी अनुसार 1 जनवरी 2023 से 31 जनवरी 2023 तक सभी को अन्तर्मुखी बन, एकाग्रता के अभ्यास द्वारा सम्पन्नता और सम्पूर्णता को समीप लाना है। विशेष अव्यक्ति अनुभूतियां करनी है।
बाकी प्यारे अव्यक्त बापदादा की यह अलौकिक मिलन महफिल बहुत अच्छी उमंग-उत्साह भरी चल रही है। अभी गुजरात की सेवाओं का टर्न है, साथ में देश विदेश के और भी अनेकानेक भाई बहिनें प्रभु मिलन का सुख लेने, मधुबन के पवित्र वायब्रेशन का अनुभव करने के लिए पहुंचे हुए हैं। सभी बहुत अच्छी ज्ञान की गहराई के साथ योग तपस्या भी कर रहे हैं। अच्छा - सभी को याद... ओम् शान्ति।
16-12-22 ओम् शान्ति “अव्यक्त-बापदादा'' रिवाइज 15-12-10 मधुब
आज चारों ओर के अपने बेफिक्र बादशाह बच्चों को देख रहे हैं। ऐसी बेफिक्र बादशाहों की सभा अभी ही दिखाई देती है क्योंकि अभी ही बाप फिक्र लेके बेफिक्र बादशाह बनाते हैं इसलिए यह सभा इस समय ही आपकी दिखाई देती है। आप सभी सवेरे से उठते तो बेफिक्र स्थिति में स्थित होते हो, खाते पीते, कर्म करते कोई फिक्र नहीं। सोते हैं तो भी बेफिक्र, ऐसे बादशाह और बेफिक्र, उठो सोओ, बेफिक्र, ऐसे अनुभव करते हो? क्योंकि आप सबने बाप को फिक्र देके फखुर ले लिया इसलिए बेफिक्र बादशाह बन गये। अगर चलते हुए कोई फिक्र आ जाता है तो फिक्र क्या बना देता है? फखुर है तो आपके मस्तक में लाइट की चमक चमकती है। अगर फिक्र आ जाता है तो बोझ की टोकरी आ जाती है। बताओ, आपको लाइट की चमक अच्छी लगती है वा बोझ की टोकरी? बेफिकर बादशाह स्वयं को भी प्रिय लगते और जो ऐसी स्थिति में उड़ते हैं, तो उनकी चमकती हुई लाइट देख दूसरों को कितना प्यार आता है इसलिए बापदादा सदा बच्चों को बेफिक्र बादशाह की स्थिति में, इसी स्मृति स्वरूप में टिकाते रहते हैं, इसलिए आप लोगों का चित्र भी भक्त लोग डबल ताजधारी दिखाते हैं। एक लाइट का ताज और दूसरा विकारों को जीतने का बादशाहपन का ताज, डबल ताज दिखाते हैं इसलिए बापदादा सदा हर बच्चे को यही शिक्षा देते हैं, सदा मौज में रहना बहुत सहज है, क्यों सहज है? सिर्फ हद का मेरापन बाप को दे दो। मेरे से तेरा किया तो बेफिक्र बादशाह बन गये। एक ही शब्द का अन्तर है, तेरा मेरा। ते और मे, इस शब्द के अन्तर में बेफिक्र बादशाह बन जाते। सहज है ना! बने हो ना बेफिक्र बादशाह? कि अभी फिक्र रहता है? अगर कभी भी फखुर के बजाए फिक्र आता है तो अन्तर सिर्फ तेरे के बजाए मेरा मानने से फिक्र आता है। तो सभी की प्रैक्टिकल रिजल्ट क्या है? फिक्र दे दिया या बीच-बीच में फखुर छोड़के फिक्र में आ जाते हो? फिक्र आता है कि बेफिक्र ही रहते हो? जो सदा बेफिक्र बादशाह रहता है वह हाथ उठाओ। बेफिक्र बादशाह, पक्का कि कभी-कभी! बेफिक्र बादशाह, हाथ ऊंचा उठाओ। कभी-कभी वाले भी हैं। सेवा का फिक्र वह अलग बात है। लेकिन वह फिक्र औरों को भी बेफिक्र बनाने का साधन है। अपने संस्कार से अगर फिक्र आता है तो उसको उसी समय ही मेरे के बजाए तेरे में चेंज कर दो। बाप को फिक्र दे दो और फखुर ले लो क्योंकि बाप आया ही है बच्चों का फिक्र लेके फखुर देने। तो चेक करो मेरे में कभी-कभी बहुत समय का संस्कार इमर्ज तो नहीं होता है? क्योंकि बापदादा कुछ समय से बच्चों को यह बता रहे हैं कि वर्तमान समय के प्रमाण कभी भी कुछ भी हो सकता है और कभी भी हो सकता है इसलिए हर एक बच्चे को अपने को यह अटेन्शन देना है कि एक सेकण्ड में बिन्दी लगाने चाहो तो लगा सकते हो? मानो कोई भी व्यर्थ संकल्प आ जाता तो बिन्दी द्वारा एक सेकण्ड में व्यर्थ को समाप्त कर सकते हो? इतना अभ्यास है? कि उस समय, समय के सरकमस्टांश प्रमाण पुरुषार्थ करके व्यर्थ को मिटाने की आवश्यकता पड़ेगी! लगाओ बिन्दी और लग जाए क्वेश्चन मार्क, क्यों, क्या, कैसे... उस समय यह सोचते रहे तो आने वाले समय में जो लक्ष्य है बाप के साथ चलेंगे, बाप तो सेकण्ड में चला जायेगा, क्योंकि बिन्दू है और सेकण्ड भी बिन्दू है और फुलस्टाप भी बिन्दू ही है। तो आपका भी इतना अभ्यास है? इसके लिए अब से इस अभ्यास के अभ्यासी होंगे तो बाप समान श्रीमत का हाथ में हाथ देते हुए अपने घर पहुंच जायेंगे इसलिए बापदादा ने पहले भी सुनाया कि दो बातों का अटेन्शन अण्डरलाइन करो। दो बातें कौन सी?
एक संकल्प का खजाना और दूसरा समय का खज़ाना, खजाने तो बहुत मिले हैं, ज्ञान का खजाना, शक्तियों का खजाना, योग द्वारा जो भी मुख्य सम्पन्न बनने की युक्तियां हैं, सब प्राप्त कराई हैं क्योंकि यह संगम का समय सारे कल्प में अमूल्य विशेष समय है, इस समय ही जितनी प्राप्ति करने चाहो उतनी कर सकते हो क्योंकि यह एक जन्म महान जन्म है। एक जन्म में अनेक जन्मों की प्रालब्ध बनाने का है। संगमयुग का समय एक सेकण्ड भी गंवाना नहीं है। एक सेकेण्ड का कनेक्शन अनेक जन्मों के साथ है। जमा करने का एक वर्ष अनेक वर्षों की प्राप्ति का है इसलिए इस समय की वैल्यु सेकण्ड या मिनट नहीं, एक घण्टा भी महान है, एक सेकण्ड भी महान है। और संकल्प इस संगम के जन्म का विशेष आधार है। देखो, जो योग लगाते हो तो मनमनाभव कहते हो और यह आधार है फाउण्डेशन का। मन का काम ही है संकल्प करना, संकल्प द्वारा ही याद के यात्रा की अनुभूति करते हो। एक दो में भी खास भिन्न-भिन्न संकल्प देके अभ्यास कराते हो ना! तो सब चेक करो - समय की रफ्तार सारे दिन में चलते फिरते कर्म करते, सम्बन्ध में आते अमूल्य रूप से रही? क्योंकि समय अमूल्य है। संकल्प सर्वशक्तिवान बनाता है।
तो बापदादा बार-बार कहते हैं हे बापदादा के लाडले, दिल में बसने वाले बच्चे अब व्यर्थ खाते को समाप्त करो। सफल करो। सफल करना ही सफलता है। एक सेकण्ड गया, यह नहीं सोचो। हर सेकण्ड, हर संकल्प सफल हुआ, इतना अटेन्शन अपने ऊपर रखना ही है। इतना फुलस्टॉप लगाने की चेकिंग करो। अलबेले नहीं बनना। बापदादा ने कहा था लेकिन हमने समझा नहीं, समय को सोचा नहीं, इतना समय फास्ट जा रहा है, जायेगा। अभी अलबेलापन बापदादा हर एक से लेने चाहते हैं। यह नहीं सुनने चाहते कि मैंने समझा नहीं, सोचा नहीं। अभी वर्ष भी नया आने वाला है, तो इस नये वर्ष में शुरू होने के पहले ब्राह्मण संसार से अलबेलापन साथ में आलस्य, आलस्य भी भिन्न-भिन्न प्रकार का है, इसका अभी जो समय पड़ा है वर्ष में, इसमें अभ्यास शुरू करो और जब नया वर्ष शुरू होगा तो बापदादा को हिम्मत रख संकल्प करना और इसको विदाई देना। वर्ष के साथ इसको भी विदाई दे देना। दे सकते हो! दे सकते हो? जो दे सकता है वह हाथ उठाओ। (सभी ने हाथ उठाया) वाह! बच्चे वाह! हाथ उठाने में तो बापदादा को खुश बहुत करते हो। बापदादा ने देखा है कि बहुत बच्चों को हाथ उठाने का रिटर्न करना याद रहता है। और कोई याद रखने में भी अलबेले हो जाते हैं। बापदादा से रूहरिहान बहुत अच्छी करते हैं। हो जायेगा, बाबा आप देखना अभी होगा, अभी होगा...। बापदादा भी ऐसे अलबेले बच्चों का सुनके मुस्करा देता है और क्या करे! अच्छा है, सोचते हैं करना है, करना है, करना है.. यह बहुत सोचते हैं, लेकिन कर रहे हैं या नहीं कर रहे हैं उसमें चेकिंग में फिर क्या कहेंगे! अलबेले हो जाते हैं।
तो आज चारों ओर के बच्चों को, बापदादा ने सुना तो जो अपने देश में, अपने स्थानों में देखते रहते हैं, वहाँ भी अच्छा दिखाई देता है, सुनाई भी देता है। तो बापदादा सम्मुख आने वाले बच्चों को और अपने स्थानों पर सुनने वाले, देखने वाले बच्चों को यही कहते अभी पुरुषार्थ को, संकल्प को और संगम के समय को अण्डरलाइन लगाओ। सभी बच्चे प्यार में तो मैजारिटी पास हैं। प्यार के आधार पर अपनी अच्छी प्रोग्रेस कर रहे हैं। प्यार के कारण, बाप के प्यार का रेसपान्ड मिलने के कारण आगे बढ़ भी रहे हैं लेकिन बाप समझते हैं, जैसे प्यार में अनुभवी बन आगे बढ़ रहे हो ऐसे ही याद की सबजेक्ट में अनेक जन्मों के विकर्म विनाश करने में और अटेन्शन दो। क्यों? विकर्म विनाश होंगे तो साथ-साथ चलेंगे, नहीं तो पीछे-पीछे आयेंगे और बाप समझता है कि प्यार का रेसपान्ड यह है जो प्यार वाली आत्मा कहे वह करना ही है। बाप चाहता है जब बच्चों का प्यार बाप से है तो साथ रहें। राजधानी में भी ब्रह्मा बाबा के साथ राजधानी में आयें। राजधानी में आना अर्थात् रॉयल फैमली में आये। तख्त पर नहीं बैठें लेकिन रॉयल फैमिली के साथी तो बनें। बापदादा ने पहले भी कहा है इसकी परख कैसे करो! जबसे आप आये हो, जितनी आयु आपकी है ज्ञान की, उतने समय में अगर आप बापदादा के दिलतख्तनशीन रहे हैं तो जो ज्यादा समय दिलतख्त पर रहे हैं, मिट्टी में पांव नहीं रखा है वह उस अनुसार रॉयल फैमिली में नजदीक सम्बन्ध में रहेंगे। रॉयल फैमिली वाले रहेंगे। तो प्यार है, तो प्यार वाले साथ निभाने में पीछे नहीं रहते। जो दिलतख्तनशीन हैं वह द्वापर कलियुग के भी संबंध में रहेंगे। नजदीक रहेंगे। इसलिए प्यार निभाने वाले सदा दिलतख्तनशीन रहो और जन्म-जन्म का हक लो, इसलिए बापदादा हर बच्चे को प्यार करते हैं। बाबा ने सर्टीफिकेट दिया कि प्यार की सबजेक्ट में मैजारिटी पास हैं। अब सब सबजेक्ट में पास होना ही है। पास होना है, पास रहना है। अच्छा।
सेवा का टर्न गुजरात ज़ोन का है:- गुजरात उठो। हाथ हिलाओ। गुजरात सर्विस में तो आगे बढ़ रहे हैं। अभी किसमें नम्बर लेना है? संख्या में तो नम्बर ले लिया, अभी निर्विघ्न, जो बापदादा कहते हैं अभी किसी ज़ोन का रिजल्ट में नाम नहीं आया है। वहाँ तो राजा, प्रजा सब एक होंगे, निर्विघ्न होंगे लेकिन संस्कार वहाँ तो नहीं भरेंगे, यहाँ ही भरना है। तो बापदादा सभी को छोटा ज़ोन है या बड़ा ज़ोन है, यह रिजल्ट देखने चाहते हैं। बोलो, निमित्त बनी हुई दादियां या दादे यह पहला इनाम कौन लेगा? गुजरात लेगा? कब तक? 6 मास चाहिए? 6 मास... जल्दी करेंगे, मुबारक हो।
मधुबन वाले उठो, मधुबन वाले अच्छा, हाथ हिलाओ। मधुबन वाले तो लकी हैं। पहला नम्बर मधुबन को लेना चाहिए। लेंगे! अभी ऐसे हाथ करो और मधुबन वालों को तो बहुत गोल्डन चांस है।
अच्छा है, बाबा ने यह करके दिखाने का सबको कहा हुआ है लेकिन मधुबन, मधुबन तो मधुबन है। गुजरात ने कहा है करके दिखायेंगे। अच्छा है। सब वायब्रेशन देना, हो जायेगा, कोई बड़ी बात नहीं है। विघ्न का नाम निशान नहीं। इनाम तो मधुबन को लेना चाहिए। बीती को बीती कर उड़ो। उड़ने वाले पीछे को छोड़ देते हैं तभी उड़ते हैं। तो बहुत अच्छा।
डबल विदेशी:- डबल विदेशी अर्थात् डबल पुरुषार्थी, डबल तीव्र पुरुषार्थी। बापदादा ने देखा उमंग उत्साह बहुत है। कैसे भी हो लेकिन मैजारिटी मधुबन में हर साल में पहुंच जाते हैं। परिवार और बापदादा से सम्मुख मिलन का उमंग बहुत है। प्यार है, मधुबन के वायुमण्डल से और बापदादा का भी यह उमंग उत्साह और इन्हों के भिन्न-भिन्न जमा करने का तरीका देखकर बहुत दिल में प्यार आता है - वाह विदेशी वाह! अच्छा!
चारों ओर के बच्चों को बापदादा अभी मुबारक दे रहे हैं। हर दिन हर घण्टे आगे बढ़ने की मुबारक हो। समय आपका इन्तजार कर रहा है, आप समय का इन्तजार नहीं करना। आप समय को जितना समीप लाने चाहो समाप्ति को, उतना समाप्ति को समीप ला सकते हो। समय आने पर तैयार होना यह आप ब्राह्मणों का संकल्प नहीं हो, आप समय को समीप लाओ। समय बाप को कहता, अभी ब्राह्मण आत्मायें मुझ समय को समीप लायें। प्रकृति भी बाप को कहती अभी समाप्ति को समीप लाओ। तो बापदादा क्या जवाब दे? क्या जवाब दे? समय आया कि आया, यह कहें! आपकी तरफ से यह जवाब दें? क्या जवाब दें? बोलो। क्या जवाब दें? अभी समाप्ति को समीप लाना अर्थात् स्वयं को सम्पन्न सम्पूर्ण बनाना क्योंकि बापदादा अकेले नहीं जायेगा, बच्चों सहित जायेगा। तो डेट फिक्स करना। कब तक? काम तो दिया है, अब आपस में राय करना। बापदादा जवाब क्या दे, प्रकृति को? प्रकृति बहुत परेशान है। दु:खी आत्मायें बहुत मन में चिल्ला रही हैं। मन्सा सेवा अभी ज्यादा बढ़ाओ। करते हैं मन्सा सेवा लेकिन लगातार बढ़ती रहे, वह और बढ़ाओ क्योंकि प्रकृति और दु:खी आत्मायें बाप के पास आती हैं, चिल्लाती हैं। तो आप उन्हों को कुछ शान्ति या सुख की अनुभूति कराओ। वह एक सेकण्ड की शान्ति भी चाहते हैं, थोड़ी शान्ति दे दो। जैसे भूखा होता है, तो समझता है कि कुछ भी मिल जाए, थोड़ा भी मिल जाए, तो अभी मन्सा सेवा को भी बढ़ाओ। वाचा की तो चल रही है, बापदादा खुश है। अच्छा, बापदादा ने जो होमवर्क दिया वह याद रखना और रखवाना। अच्छा।
बापदादा के दिलतख्तनशीन बच्चों को, विश्व कल्याण के कर्तव्य में सदा आगे बढ़ने वालों को बापदादा दृष्टि देते हुए दिल का प्यार और मुबारक, मुबारक हो... दे रहे हैं। हर एक बच्चा दूर बैठे भी सम्मुख अनुभव कर रहे हैं और बापदादा सभी बच्चों को दिल में समाते हुए सभी बच्चों से नमस्ते नमस्ते कर रहे हैं।
