"इस नये वर्ष में सर्व खजाने सफल कर सफलतामूर्त बनने की विशेषता दिखाओ"
31-12-2022 मधुबन अव्यक्त बापदादा ओम् शान्ति 31-12-2022
प्राणप्यारे अव्यक्त मूर्त मात-पिता बापदादा के अति स्नेही, सदा परमात्म मिलन की मौज में रहने वाले, सदा श्रेष्ठ और सहज पुरुषार्थी, हर खजाने को बांटने और बढ़ाने वाले मास्टर दाता स्वरूप निमित्त टीचर्स बहिनें तथा सर्व ब्राह्मण कुल भूषण भाई बहिनें, ईश्वरीय स्नेह सम्पन्न मधुर याद के साथ नये वर्ष की, नये युग के आगमन की उमंग-उत्साह भरी बधाईयां स्वीकार हो।
बाद समाचार - आप सभी ने नये वर्ष में नवीनता सम्पन्न तीव्र पुरुषार्थ वा परमात्म प्रत्यक्षता के लिए सेवाओं के अनेक कार्यक्रम बनाये होंगे। मीठे अव्यक्त बापदादा का विशेष इशारा है कि बच्चे अब हर खजाने को सफल कर सफलता भव के वरदानी बनो। जैसे ब्रह्मा बाप ने जो सोचा वह सेकण्ड में किया। सिर्फ प्लैन नहीं बनाया, प्रैक्टिकल में करके दिखाया, ऐसे हम बच्चों को भी फालो फादर करना है। जनवरी मास में तो विशेष ब्रह्मा बाबा के एक एक चरित्र की स्मृति हर ब्राह्मण बच्चे के दिल में समाई रहती है। सभी का यही लक्ष्य रहता है कि हमें ब्रह्मा बाप के कदम पर कदम रखते हुए उनके समान बनना है। इसके लिए सभी पूरा ही मास अन्तर्मुखी बन मुख और मन का मौन रख अव्यक्त स्थिति द्वारा अव्यक्त वतन की सैर करते हैं। विशेष ब्रह्मा बाबा के पुण्य स्मृति दिवस पर हर एक सेवाकेन्द्र पर पूरा ही दिन योग भट्ठी रहती है। सभी प्यारे बापदादा के चुने हुए साकार व अव्यक्त महावाक्य सुनते, बाबा को प्यार से भोग भी स्वीकार कराते और संगठित रूप में योग तपस्या भी करते हैं। इस बार 18 जनवरी 2023, बुद्धवार का दिन है। बाबा के सभी बच्चे विशेष अपने कार्य व्यवहार से, नौकरी आदि से छुट्टी लेकर विशेष तपस्या करेंगे। यह वरदानी दिवस बापदादा से अनेकानेक वरदान प्राप्त करने का दिन है, इसलिए सभी अमृतवेले से ही विशेष उन्हीं यादों में समा जायेंगे। वैसे तो पूरे ही जनवरी मास के लिए मधुबन से विशेष रविवार की 5 अव्यक्त मुरलियों के आधार पर होमवर्क भेजा गया है। जरूर सभी उसी प्रमाण अटेन्शन रख विशेष पुरुषार्थ करेंगे।
18 जनवरी स्मृति सो समर्थी दिवस के निमित्त सर्व आत्माओं को अपने सत्य पिता परमात्मा की पहचान देने के साथ अलौकिक पिता, प्रजापिता ब्रह्मा बाबा के जीवन चरित्र पर भी प्रकाश डालेंगे। यह भी विशेष परमात्म कर्तव्य को प्रत्यक्ष करने का अच्छा अवसर है।
बाकी अभी पुराने वर्ष की विदाई और नये वर्ष के आगमन पर अव्यक्ति मिलन की अनुभूतियां करने तथा नया वर्ष मनाने के लिए पंजाब ज़ोन सेवा में आया है। साथ-साथ देश विदेश के अनेकानेक बच्चे भी मधुबन घर में पहुंचे हुए हैं। अच्छा - सभी को याद... ओम् शान्ति।
31-12-22 ओम् शान्ति “अव्यक्त-बापदादा'' रिवाइज-वीडियो 31-12-02 मधुबन
आज नव युग रचता, नव जीवन दाता बापदादा नव वर्ष मनाने आये हैं। आप सभी भी नव वर्ष मनाने आये हो वा नव युग मनाने के लिए आये हो? नव वर्ष तो सभी मनाते हैं लेकिन आप सभी नव जीवन, नव युग और नव वर्ष तीनों ही मना रहे हो। बापदादा भी त्रिमूर्ति मुबारक दे रहे हैं। नव वर्ष की एक दो को मुबारक देते हैं और साथ में कोई न कोई गिफ्ट भी देते हैं। गिफ्ट देते हो ना! लेकिन बापदादा ने आप सबको कौन सी गिफ्ट दी है? गोल्डन दुनिया की गिफ्ट दी है। सभी को गोल्डन दुनिया की गिफ्ट मिल गई है ना! जिस गोल्डन दुनिया में, नव युग में सर्व प्राप्तियां हैं। याद है अपना राज्य? कोई अप्राप्ति का नाम-निशान नहीं है। ऐसी गिफ्ट सिवाए बापदादा के और कोई दे नहीं सकता। सारे विश्व में अगर कोई बड़े ते बड़ी सौगात देंगे भी तो क्या देंगे? बड़े ते बड़ा ताज वा तख्त दे देंगे। जब स्थापना हुई थी, (आगे-आगे बैठे हैं स्थापना वाले) तब आदि में ही ब्रह्मा बाप बच्चों से पूछते थे कि अगर आपको आजकल की कोई भी रानी ताज और तख्त देवे तो आप जायेंगे? याद है ना! तो बच्चे कहते थे इस ताज और तख्त को क्या करेंगे, जब बाप मिल गया तो यह क्या है! तो इस गोल्डन वर्ल्ड की गिफ्ट के आगे कोई भी गिफ्ट बड़ी नहीं हो सकती। कई बच्चे पूछते हैं वहाँ क्या-क्या प्राप्ति होगी? तो बापदादा कहते हैं प्राप्तियों की लिस्ट तो लम्बी है लेकिन सार रूप में क्या कहेंगे! अप्राप्त कोई नहीं वस्तु, जो जीवन में चाहिए वह सब प्राप्तियां होंगी। तो ऐसी गोल्डन गिफ्ट की अधिकारी आत्मायें हो। अधिकारी हैं ना! डबल विदेशी अधिकारी हैं? (हाथ हिलाते हैं) सभी राजा बनेंगे? तो इतने तख्त तैयार करने पड़ेंगे। बापदादा कहते हैं वह तख्त तो तख्त है, सर्व प्राप्ति हैं लेकिन इस संगमयुग का स्वराज्य उससे कम नहीं है। अभी भी राजा हो ना! प्रजा हो या रॉयल फैमिली हो? क्या हो? एक ही बाप है जो फलक से कहते हैं कि मेरा एक-एक बच्चा राजा बच्चा है। राजा हो ना! राजयोगी हो कि प्रजा योगी हो? इस समय सब दिलतख्तनशीन, स्वराज्य अधिकारी राजा बच्चा हो। इतना रूहानी नशा रहता है ना? क्योंकि इस समय के स्वराज्य से ही भविष्य राज्य प्राप्त होता है। यह संगमयुग बहुत-बहुत-बहुत अमूल्य श्रेष्ठ है। संगमयुग को बापदादा और सभी बच्चे जानते हैं, खुशी-खुशी में संगमयुग को नाम क्या देते हैं? मौज़ों का युग। क्यों? यहाँ संगम जैसी मौज़ सारे कल्प में नहीं है। कारण? परमात्म मिलन की मौज़ सारे कल्प में अब मिलती है। संगमयुग का एक एक दिन क्या है? मौज़ ही मौज़ है। मौज़ है ना? मौज़ है, मूंझते तो नहीं हो ना! हर दिन उत्सव है क्योंकि उत्साह है। उमंग है, उत्साह है कि अपने सर्व भाई बहिनों को परमात्मा पिता का बनायें। सेवा का उमंग-उत्साह रहता है ना! यह करें, यह करें, यह करें... प्लैन बनाते हो ना! क्योंकि जो श्रेष्ठ प्राप्ति होती है तो दूसरे को सुनाने के बिना रह नहीं सकते हैं। इसी संगमयुग की प्राप्ति गोल्डन वर्ल्ड में भी होगी। अभी के पुरुषार्थ की प्रालब्ध भविष्य गोल्डन वर्ल्ड है। तो संगमयुग अच्छा लगता है या सतयुग अच्छा लगता है? क्या अच्छा लगता है? संगम अच्छा है ना? सिर्फ बीच-बीच में माया आती है। थोड़ा-थोड़ा कभी-कभी मूंझ जाते हैं। कई बच्चे सहज योग को मुश्किल योग बना देते हैं, है नहीं लेकिन बना देते हैं। वास्तव में है बहुत सहज, मुश्किल लगता है? जिसको मुश्किल लगता है वह हाथ उठाओ। सदा नहीं, कभी कभी मुश्किल है? या सहज है? जो मुश्किल योगी हैं वह हाथ उठाओ। मातायें मुश्किल योगी हो या सहज योगी? कोई मुश्किल योगी है? (कोई हाथ नहीं उठा रहा है) सारी सभा में हाथ कैसे उठायेंगे!
सभी बच्चे फलक से कहते हैं मेरा बाबा। मेरा बाबा है कि दादियों का बाबा है? मेरा बाबा है ना! हर एक कहेगा पहले मेरा। ऐसे है? यह सिन्धी लोग सभी बैठे हैं ना! मेरा बाबा है या दादी जानकी का है? दादी प्रकाशमणि का है? किसका है? मेरा है? सारा दिन क्या याद रहता है? मेरा ना! बाप कहते हैं बहुत सहज युक्ति है जितने बार मेरा-मेरा कहते हैं, सारे दिन में कितने बार मेरा शब्द कहते हो? अगर गिनती करो तो बहुत बार मेरा शब्द बोलते हो। जब मेरा शब्द बोलते हो तो बस मेरा कौन? मेरा बाबा। मुश्किल है? कभी-कभी भूल तो जाते हो! बापदादा कोई नया शब्द नहीं देता है, जो सदैव कार्य में लाते हो मैं और मेरा, तो मैं कौन और मेरा कौन! कई बच्चे मुश्किल पुरुषार्थ क्यों करते? सिर्फ सोचते हैं बिन्दु सामने आ जाए, बिन्दु बिन्दु बिन्दु.... और बिन्दु खिसक जाती है। बिन्दु तो है लेकिन कौन सी बिन्दु? मैं कौन हूँ, यह अपने स्वमान स्मृति में लाओ तो रमणीक पुरुषार्थ हो जायेगा सिर्फ ज्योति बिन्दु कहते हो ना तो मुश्किल हो जाता है। सहज पुरुषार्थ, मौज का पुरुषार्थ करो।
इस नये वर्ष में पुरुषार्थ भी श्रेष्ठ हो लेकिन श्रेष्ठ के साथ पहले सहज हो। सहज भी हो और श्रेष्ठ भी हो यह हो सकता है? दोनों साथ हो सकता है? डबल फारेनर्स बोलो, हो सकता है? तो बापदादा देखेंगे। बापदादा तो चेक करते रहते हैं ना! तो मुश्किल योगी कौन-कौन बनता है! सहज योगी का यह मतलब नहीं है कि अलबेलेपन का पुरुषार्थ हो। श्रेष्ठ भी हो और सहज भी हो। तो पाण्डव सहज योगी हैं? सहजयोगी जो हैं वह हाथ उठाओ। देखना टी.वी. में आ रहा है। मुबारक हो। तो यह वर्ष कोई के आगे कोई मुश्किलात नहीं आयेगी क्योंकि सहज योगी हो। अलबेले नहीं बनना।
समय प्रमाण इस नये वर्ष में सभी को विशेष यह लक्ष्य रखना है कि जो भी खजाने प्राप्त हैं - समय है, संकल्प हैं, गुण हैं, ज्ञान है, शक्तियां हैं... सबसे बड़ा खजाना संकल्प है - श्रेष्ठ संकल्प, शुद्ध संकल्प। इन सभी खजानों को हर रोज़ सफल करना है। खूब बांटो। दाता के बच्चे मास्टर दाता बनो। खूब बांटों। क्यों? सफल करना अर्थात् सफलता को प्राप्त करना। तो यही इस वर्ष की विशेषता सदा कायम रखना। सफल करना है और सफलता है ही है। सभी कहते भी हो ना कि सफलता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है। है अधिकार? तो सफल करो और सफलता प्राप्त करो। कोई भी कार्य करो, कोई न कोई खजाना सफल करते जाओ और सफलता का अनुभव करते चलो। सोचो - सफलता का अधिकार आप ब्राह्मण आत्माओं के सिवाए और किसका अधिकार हो सकता है! क्यों? क्योंकि बाप ने आपको सफलता भव का वरदान दिया है। बापदादा सदा कहते हैं कि एक-एक ब्राह्मण आत्मा सफलता का सितारा है, सफलता स्वरूप है। सफलता के सितारे हो ना या मेहनत के सितारे हो? बापदादा सभी बच्चों को सफलता का सितारा, इसी स्वरूप में देखते हैं। याद है ब्रह्मा बाप ने आदि में कितने समय में सब सफल किया? अन्त तक अपना समय सफल किया, चाहे कर्मातीत भी बन गये फिर भी कितने पत्र लिखे! समय सफल किया ना! लास्ट दिन भी मुख से महावाक्य उच्चारण किये। लास्ट दिन तक सब सफल किया इसीलिए सफलता को प्राप्त हो गये। तो फालो फादर। वास्तव में संगमयुग का एक-एक संकल्प, एक-एक सेकण्ड सफल करना ही सफलता मूर्त बनना है। सभी निश्चय से कहते हैं ना कि ब्रह्मा बाप से तो हमारा बहुत प्यार है। तो प्यार की निशानी है जो बाप को प्रिय था वह बच्चों को प्रिय हो। समय, संकल्प और सर्व खजाने सफल हो। व्यर्थ नहीं हो। प्यार की निशानी फालो फादर। ब्रह्मा बाप ने विशेषता क्या दिखाई? जो सोचा वह सेकण्ड में किया। सिर्फ सोचा नहीं, सिर्फ प्लैन नहीं बनाया, प्रैक्टिकल में करके दिखाया। तो ऐसे है? फालो करने वाले हैं ना? अच्छा है।
इस वर्ष का लक्ष्य तो बताया - सफल करो, सफलता है ही। यह सभी ने पक्का किया? सफल करना है। व्यर्थ नहीं। संगमयुग समर्थ युग है, सफलता का युग है, व्यर्थ का नहीं है। व्यर्थ के 63 जन्म समाप्त हुए। अब यह छोटा सा युग सफल करने का युग है। अगर समय सफल करेंगे तो भविष्य में भी आधाकल्प का पूरा समय राज्य अधिकारी बनेंगे। अगर कभी-कभी सफल करेंगे तो राज्य अधिकारी भी कभी-कभी बनेंगे। समय सफल की प्रालब्ध यह है। श्वांस सफल कर रहे हो तो 21 जन्म ही स्वस्थ रहेंगे। चलते-चलते हार्टफेल नहीं होगी। किसकी हार्ट रूक जाती, किसकी नलियां बन्द हो जाती, वह नहीं होगी।
ज्ञान के खजाने को भी सफल करो तो ज्ञान का अर्थ है समझ, वहाँ इतने समझदार बन जायेंगे जो कोई मत्रियों की जरूरत नहीं है। आजकल तो देखो शपथ लेते ही पहले मंत्रीमण्डल बनाते हैं। वहाँ साथी होंगे लेकिन मंत्री नहीं होगे। रॉयल फैमिली हर एक दरबार में बैठने वाले ताजधारी होंगे। रॉयल फैमिली कम नहीं होगी, चाहे तख्त पर नहीं भी बैठे लेकिन मर्तबा एक ही जैसा होगा इसलिए यह नहीं सोचो कि तख्तनशीन बहुत थोड़े बनेंगे लेकिन आप लोग भी राज दरबार में राज्य अधिकारी के रूप में होंगे। आपके सिर पर भी ताज होगा और आपका पूरा अधिकार होगा। तो क्या बनेंगे? नम्बरवन या नम्बरवार, क्या बनेंगे? नम्बरवार बनेंगे या नम्बरवन बनेंगे? तो क्या करना पड़ेगा, पता है? हिम्मत दिखाई, यह बहुत अच्छा है। लेकिन वन नम्बर बनने के लिए पहले विन करना पड़ेगा।
आपके पास खजाने बहुत हैं, गुणों का खजाना कितना बड़ा है, शक्तियों का खजाना कितना बड़ा है। तो गुण दान, शक्तियों का दान करने वाले मास्टर दाता बनो। जो भी आये चाहे सम्बन्ध में आये, चाहे सम्पर्क में आये लेकिन उनको कोई न कोई गुण या शक्ति की गिफ्ट दे देना। कोई खाली हाथ नहीं जाये। और कुछ नहीं तो बाप के सन्देश के मीठे बोल, वह मीठे बोल भी गिफ्ट देना। दुनिया वाले तो कोई भी उत्सव होता है ना तो एक दो को मुख मीठा कराते हैं। लेकिन बापदादा कहते हैं मुख मीठा तो कराना ही है लेकिन अपना मीठा मुखड़ा भी दिखाना है। सिर्फ मुख मीठा नहीं, मुखड़ा भी मीठा। इतनी मधुरता जमा है ना! जो बांटो तो भी भरपूर रहो और इस खजाने को तो जितना बांटेंगे उतना बढ़ेगा, कम नहीं होगा। तो इस वर्ष नोट करना, जो भी आत्मा आई उसको कुछ दिया? अगर सुनने वाला नहीं है तो मीठी शक्तिशाली दृष्टि देना। लेकिन देना जरूर। खाली नहीं जाये। यह तो सहज है ना! या मुश्किल है? यूथ ग्रुप सहज है? हाथ तो बहुत अच्छा हिला रहे हैं। यूथ ग्रुप भी अच्छा आया है।
विदेश का यूथ ग्रुप उठो - तो आप सबको निमंत्रण आयेगा भारत को जगाने के लिए। तो एवररेडी रहना। अगर टिकेट नहीं होगी तो मिल जायेगी। बापदादा को पता है कि डबल फारेनर्स की विशेषता है, एक साल होकर जाते हैं, दूसरे साल की तैयारी सारे वर्ष में करते जाते हैं। अच्छा है। अटेन्शन अच्छा रखा है। स्व-पुरुषार्थ का अटेन्शन ज्यादा इस बारी अन्डरलाइन किया है। बापदादा खुश है। अच्छा है ग्रुप-ग्रुप बनने से अटेन्शन जाता है। शक्ति ग्रुप - बापदादा शक्ति ग्रुप से पूछते हैं कि प्रत्यक्षता का झण्डा कब लहरायेंगे? बोलो, शक्तियां तो झण्डा लहराने वाली हैं ना! तो प्रत्यक्षता का झण्डा शक्तियां लहरायेंगी ना! अच्छा है। अभी आपस में रूहरिहान कर डेट को फिक्स करना। जैसे और डेट फिक्स करते हो वैसे यह भी डेट फिक्स करना कि प्रत्यक्षता का झण्डा कब लहरेगा? लहरायेंगे ना! महावीर ग्रुप - महावीर ग्रुप क्या करेगा? साल के साथ-साथ सदा के लिए माया को भी विदाई देना। हो सकता है? माया को विदाई देंगे? कि माया आवे कोई हर्जा नहीं? महावीर का अर्थ ही है जैसे ब्रह्मा बाप ने जो कहा वह किया, जो सोचा वह तुरत दान महापुण्य समान किया। ऐसे ही महावीर ग्रुप का यह लक्ष्य है ना! करेंगे? अच्छा है। हिम्मत तो अच्छी है।
अच्छा - एक सेकण्ड में मन की ड्रिल याद है? हर एक सारे दिन में कितने बार यह ड्रिल करते हो? यह नोट करो। यह मन की ड्रिल जितना बार करेंगे उतना ही सहज योगी, सरल योगी बनेंगे। एक तरफ मन्सा सेवा दूसरे तरफ मन्सा एक्सरसाइज़। अभी-अभी निराकारी, अभी-अभी फरिश्ता। ब्रह्मा बाप आप फरिश्तों का आह्वान कर रहे हैं। फरिश्ता बनके ब्रह्मा बाप के साथ अपने घर निराकार रूप में चलना। फिर देवता बन जाना। अच्छा।
चारों तरफ से बहुत-बहुत यादप्यार चाहे कार्ड के रूप में, चाहे पत्रों के रूप में बापदादा के पास पहुंच गये हैं। बापदादा जानते हैं कि हर बच्चा यही समझते हैं मेरी याद बाबा को देना, लेकिन मिल गई है। यादप्यार देने वाले बहुत लाडले बच्चे बापदादा के सामने हैं इसलिए बापदादा कहते हैं कि हर एक बच्चा अपने-अपने नाम से मुबारक और दिल की दुआयें स्वीकार करे।
आप सभी को भी नव जीवन, नव युग और नये वर्ष की बहुत-बहुत पदम-पदम-पदम-पदमगुणा मुबारक और दिल की दुआयें हैं, यादप्यार और नमस्ते।
पंजाब के सेवाधारियों से:- पंजाब वालों ने भी अपना बेहद सेवा का पार्ट अच्छा बजाया है, बापदादा खुश होते हैं कि हर एक ज़ोन बड़े उमंग-उत्साह से सेवा का गोल्डन चांस प्रैक्टिकल में ला रहे हैं। अच्छा है। एक एक को देख बापदादा खुश होते हैं, वाह मेरे सर्विसएबुल बच्चे वाह! पाण्डव भी वाह वाह हैं। शक्तियां भी वाह वाह हैं। अभी वाह बाबा वाह का नगाड़ा बजाओ। सब लोग कहें - वाह हमारा बाबा वाह! ठीक है ना! हिम्मत है? हिम्मत भी है और बापदादा की पदमगुणा मदद भी है। ठीक है। अच्छा। ओम् शान्ति।
