Search for a command to run...
18 Jan 2022
"ब्रह्मा बाप समान जीवन में रहते जीवनमुक्त स्थिति की मजा लो, स्नेह की सौगात मनजीत जगतजीत बनकर दो"
18 January 2022 · हिंदी
18-01-2022 मधुबन अव्यक्त बापदादा ओम् शान्ति 18-01-2022
प्राणेश्वर प्यारे अव्यक्त-बापदादा के अति स्नेही, सदा परमात्म प्यार में लवलीन रह मन-जीत, जगतजीत स्थिति का अनुभव करने वाली संसगमयुगी जीवनमुक्त आत्मायें, निमित्त टीचर्स बहिनें तथा देश विदेश के सर्व ब्राह्मण कुल भूषण भाई बहिनें, ईश्वरीय स्नेह सम्पन्न मधुर याद स्वीकार करना जी।
बाद समाचार - हम सबके अति प्रिय ब्रह्मा बाबा का 53 वां पुण्य स्मृति दिवस आप सभी ने बहुत-बहुत स्नेह और श्रद्धा के साथ मनाया होगा। 16-17-18 जनवरी 2022, ग्लोबल ज्वालामुखी योग तपस्या भट्ठी में भी सभी ने भाग लिया होगा। बाबा कहते बच्चे, आपकी योग ज्वाला ही प्रकृति व मानव आत्माओं के तमोगुण को परिवर्तन करेगी। इस जनवरी मास में चारों ओर बहुत अच्छी तपस्या की लहर है। बाबा के सभी बच्चे एकान्तवास करते, अन्तर्मुखी बन विशेष ब्रह्मा बाप के स्नेह में समाते, उन्हें फालो करते हुए सम्पन्न और सम्पूर्ण बनने का पुरुषार्थ करते हैं।
मधुबन में भी सब तरफ तपस्या की बहुत अच्छी लहर चल रही है। कोरोना के कारण बहुत कम संख्या में लोग सम्मुख पहुंच सके हैं। सभी अपने-अपने स्थानों से ही अपने स्नेह का सबूत दे रहे हैं। हर वर्ष की भांति पाण्डव भवन में चारों ही धाम बहुत सुन्दर वैरायटी फूल मालाओं से सजाये गये हैं। यह वैरायटी खुशबूदार फूल हैदराबाद के समीप एक गांव के बीके किसान भाई-बहनों ने अपने खेती में प्यार से उगाये तथा बहुत भावना से पूरा ट्रक भरकर लेकर आये। यहाँ सभी ने मिलकर बहुत सुन्दर डिजाइन में सभी स्थानों का श्रृंगार किया। शीतल हवाओं के बीच सभी प्यारे बाबा की यादों में खोये हुए अमृतवेले से ही चारों धामों की परिक्रमा करते अपने स्नेह सुमन अर्पित कर वरदानों से अपनी झोली भरते हैं। प्रात: मुरली क्लास में प्यारे बापदादा के साकार व अव्यक्त महावाक्य सुनने के पश्चात शशी बहन ने बापदादा को भोग स्वीकार कराया। उसके पश्चात मुख्य भाई बहिनें शान्तिस्तम्भ तथा बाबा के कमरे और कुटिया में चक्र लगाते, बाबा से स्नेह भरी दृष्टि व वरदान लेते रहे। सोशल डिस्टेंश के कारण दूसरे स्थान के अन्य भाई बहिनें 10 बजे के बाद चारों धामों की यात्रा करने पाण्डव भवन गये। शान्तिवन में भी आये हुए भाई बहिनें बाबा के कमरे में विशेष गुडमार्निंग करने जाते रहे। सभी स्थानों पर बहुत अच्छे शान्ति के प्रकम्पन्न फैले हुए हैं। ऐसे लगता है जैसे सूक्ष्मवतन ही साकार में उतर आया है। सभी बहुत लगन से पूरा समय योग तपस्या करते रहे। दोपहर को फिर से पाण्डव भवन, ज्ञान सरोवर और शान्तिवन में प्यारे बापदादा को भोग लगाया गया। शाम को विशेष योग और क्लास के पश्चात वीडियो द्वारा अव्यक्ति महावाक्य सुने और ब्रह्मा बाप समान जीवनमुक्त स्थिति बनाने, मनजीत जगतजीत बनने का संकल्प लिया। इस बार कोरोना के कारण महाराष्ट्र से बहुत ही कम संख्या में भाई बहिनें पहुंचे हैं। यह भी ड्रामा अपनी नई-नई सीन दिखाता रहता है। अच्छा - सभी को याद... ओम् शान्ति।
18-01-22 ओम् शान्ति “अव्यक्त-बापदादा'' रिवाइज 18-01-11 मधुबन
आज का दिन विशेष ब्रह्मा बाप के अव्यक्त होने का स्मृति का दिन है। सभी बच्चों के नयनों में ब्रह्मा बाप का स्नेह समाया हुआ है। आज चार बजे से भी पहले बच्चों का स्नेह वतन में पहुंच गया। ब्रह्मा बाप से मिलन मनाने और स्नेह की, अपने दिल के स्नेह की निशानियां, मालायें ब्रह्मा बाप के पास पहुंच गई। हर एक माला की खुशबू में बच्चों का स्नेह समाया हुआ था। हर एक बच्चे के नयन और मुस्कराहट, दिल की बातें बोल रही थी। ब्रह्मा बाप भी हर एक को स्नेह का रिटर्न दे रहे थे। बाप देख रहे हैं कि अभी भी हर बच्चा नयनों की भाषा में अपने दिल का स्नेह दे रहे हैं क्योंकि यह परमात्म स्नेह हर बच्चे को सहज बाप का बनाने वाला है। यह अलौकिक स्नेह “मेरा बाबा'' के अनुभव से अपना बनाने वाला है। यह स्नेह बाप के खजानों का मालिक बनाने वाला है क्योंकि बच्चों ने कहा मेरा बाबा, तो मेरा बाबा कहना और सर्व खजानों के मालिक बनना। यह स्नेह देह का भान सेकण्ड में भुलाकर देही अभिमानी बना देता है। सिवाए बाप के और कुछ भी आत्मा को आकर्षित नहीं करता। इस दिन का बहुत बड़ा महत्व है। सिर्फ स्मृति दिवस नहीं लेकिन समर्थी दिवस है क्योंकि इस दिन बाप ने बच्चों को विश्व सेवा के लिए स्वयं करावनहार बन बच्चों को करनहार बनाने का तिलक दिया। सन शोज़ फादर का करनहार निमित्त बनाया। सेवा में सफलता का साधन स्वयं करावनहार बना और बच्चों को करनहार बनाया क्योंकि सेवा में सफलता का साधन मैं करनहार हूँ, करावनहार करा रहा है, यह स्मृति वा यह स्थिति बहुत आवश्यक है क्योंकि 63 जन्म की स्मृति मैं पन, देह अभिमान में ले आती है। करावनहार करा रहा है, मैं निमित्त करनहार हूँ, इस स्मृति से ही अपने को निमित्त समझने से देह अभिमान समाप्त हो जाता है। तो बच्चों को इसीलिए करनहार बनाया, स्वयं करावनहार बनें। करनहार बनने से स्वत: ही निमित्त हैं, निर्माण बन जाते हैं। अभी भी बापदादा ने देखा कि बच्चे निमित्त बन सेवा करते हैं, तो निमित्त बन सेवा करने वाले जो सेवाधारी हैं उन्हों के मस्तक में सेवा का फल सितारा चमक रहा है। मैजारिटी बच्चों की सेवा को देख बापदादा खुश है इसलिए ऐसे बच्चों को विशेष ब्रह्मा बाप वाह बच्चे वाह! कहके मुबारक दे रहे हैं।
ब्रह्मा बाप विशेष खुश भी हो रहे हैं और आगे भी सेवा को निमित्त बन आगे बढ़ाने के लिए मुबारक दे रहे हैं। अभी भी ब्रह्मा बाप बच्चों को आप समान फरिश्ता स्थिति में रहने के लिए इशारे दे रहे हैं। बापदादा ने देखा है कि बच्चों का अटेन्शन है कि सदा जैसे ब्रह्मा बाप जीवन में रहते जीवनमुक्त थे, इतनी जिम्मेवारी होते भी इतने बड़े परिवार को सम्भालना, सभी को योगी जीवन वाला बनाना, इतनी सेवा की जिम्मेवारी सम्भालना, सेवा में सदा आगे बढ़ाना, सब कुछ जिम्मेवारी होते भी जीवनमुक्त के मजे में रहा, इसलिए भक्ति मार्ग में ब्रह्मा का आसन कमल आसन दिखाते हैं। जीवनमुक्त बन अभी जीवनमुक्त का मजा लिया और आप सभी बच्चों को भी ऐसा ही बनाया। अभी भी आप बच्चों को फरिश्ता बनने की भिन्न-भिन्न युक्तियां बताए आप समान बनाने चाहते हैं।
बापदादा ने देखा कि लक्ष्य हर बच्चे का अच्छा है, कोई से भी पूछते हैं आपका लक्ष्य क्या है तो क्या कहते हो? याद है क्या कहते हो? बाप समान बनना ही है। तो बाप समान क्या बनेंगे? इसी जीवन में जीवनमुक्त जीवन का सैम्पुल बनेंगे। बापदादा ने देखा है जो होमवर्क देते हैं, उसमें अटेन्शन तो देते हैं, अनुभव भी करते हैं, लेकिन सदा नहीं करते हैं। अभी बापदादा हर बच्चे से यही चाहता है कि अभी कभी-कभी ठीक रहते हैं, लेकिन बाप सदा चाहता है। योगी भी अच्छे बने हैं लेकिन सदा योगी बनाने चाहते हैं। आजकल बापदादा ने बच्चों को काम भी दिया था, सदा रहने के लिए हर घण्टे अपने ऊपर कोई न कोई युक्ति रखो, जो कभी-कभी को बदल सदा शब्द आ जाए। अभी बापदादा यही चाहते हैं जैसे कहावत है मन जीते जगतजीत, मन को जो संकल्प दो वही करे। क्यों? जैसे और कर्मेन्द्रियां जब चाहो जैसे चाहो वैसे करती हैं ना! ऐसे ही मन को भी जो आर्डर करो वही करे। अभ्यास करते हो लेकिन कभी-कभी नहीं भी करते हैं। बापदादा अभी यही चाहते हैं कि मन को शक्तियों की लगाम से जैसे चलाने चाहो वैसे चलाओ। जो गायन है, मन जीते जगतजीत, वह किसका गायन है? आप बच्चों का ही तो गायन है। हर कल्प किया है तभी गायन है क्योंकि जैसे और कर्मेन्द्रियों को मेरी कहते हो वैसे ही मन को भी मेरा कहते हो। मेरा कहना अर्थात् मालिक बनो। मन में जो संकल्प करने चाहो, जितना समय वह संकल्प करने चाहो वह बंधा हुआ है क्योंकि मेरा है। तो बापदादा इस स्नेह के दिन यही होमवर्क देने चाहते हैं कि जो संकल्प करने चाहो वही चले, अगर आप शुद्ध संकल्प करने चाहते हो तो वह शुद्ध संकल्प व्यर्थ संकल्प को खत्म कर दे। चाहते हो योग लगाना और संस्कार के कारण व्यर्थ संकल्प चलें, या योग की सिद्धि नहीं मिले, यह कन्ट्रोल होना चाहिए। अगर एक घण्टा योग लगाने चाहते हो तो मन डिस्टर्ब नहीं करे। आत्मा मालिक है, मन मालिक नहीं है, मन तो आत्मा का साथी है। तो साथी को प्यार से आर्डर करो, मनजीत बनो क्योंकि बापदादा के पास बहुत बच्चों का समाचार आता है - व्यर्थ संकल्प समय प्रति समय आते हैं। नहीं चाहते हैं तो भी आते हैं। तो क्या यह मालिक कहेंगे! तो ब्रह्मा बाप से स्नेह है ना, तो बाप आज स्नेह में अपने दिल की चाहना सुना रहे हैं कि अभी मनजीत जगतजीत बनना ही है। तो ब्रह्मा बाप को यह स्नेह की सौगात देंगे ना! स्नेह में क्या दिया जाता है? गिफ्ट दी जाती है ना! तो आज ब्रह्मा बाप बच्चों से यह सौगात देने के लिए कह रहे हैं। तैयार हैं? तैयार हैं? हाथ उठाओ। तो अभी जब भी आर्डर करे तो आज के दिन से व्यर्थ संकल्प आने नहीं देना, कर सकते हो? आज दो घण्टा, चार घण्टा योग की स्टेज में कर्म भी करो, योग भी लगाओ, कर सकते हो? कर सकते हो, करेंगे? चलो अभी बीती सो बीती लेकिन अब आर्डर करें कि आज के दिन व्यर्थ संकल्प को फुलस्टॉप, तो करना पड़ेगा ना।
आज योग में यही लक्ष्य रखो उसी प्रमाण सारे दिन का पुरुषार्थ करना पड़ेगा ना! बाप से स्नेह में जो बाप कहे वह करना है। संकल्प व्यर्थ बन्द, इसकी युक्ति है ब्रह्मा बाप के स्नेह को दिल से याद करो। चाहे साकार में देखा, चाहे नहीं देखा लेकिन बुद्धिबल द्वारा तो सभी ने देखा है ना! देखा है या नहीं देखा है? जो कहते हैं मैंने बाबा का प्यार देखा, मैंने ब्रह्मा बाप की पालना देखी तो क्या उसी से चल रहा हूँ.. वह हाथ उठाओ। अच्छा। हाथ उठाके तो खुश कर दिया। बापदादा को खुशी है, हिम्मत तो रखी है ना। लेकिन जब भी कोई ताकत कम हो जाए ना तो सदा बाप के सम्बन्ध, कितने सम्बन्ध हैं कभी बाप, कभी बच्चा भी बन जाता है। कभी बाप तो कभी सखा भी बन जाते हैं इसलिए या संबंध याद करो या प्राप्तियां याद करो, प्राप्तियां और संबंध। जैसे आज दिल से याद कर रहे हो ना! ऐसे याद करने से प्यार पैदा हो जायेगा। आज भी सबके दिल में ब्रह्मा बाप का प्यार आ रहा है ना! तो जब कुछ नीचे ऊपर हो तो सम्बन्ध और प्राप्तियां याद करना। बाप हर बच्चे के साथ सहयोगी है, सिर्फ आप याद करना। तो समझा आज क्या करना है? मनजीत जगतजीत जो गायन है, वह स्वरूप धारण करना है। आर्डर से चलाओ। अभी थोड़ा फ्री छोड़ दिया है ना तो वह अपना काम करता है। अभी अटेन्शन दो। मन मेरे आर्डर में चले न कि आप मन के आर्डर में चलो। चाहते हो ज्ञान की बातों का रमण करें और आ जाती हैं फालतू बातें। तो क्या हुआ? मन मालिक बना या आप मालिक बनें? तो सभी ने यह होमवर्क समझा! मन जीत बनना है। जो आर्डर करें, वह मानेगा जरूर मानेगा, अटेन्शन देना पड़ेगा बस। मातायें या टीचर्स, हो सकता है? हो सकता है? टीचर्स हाथ उठाओ। टीचर्स हाथ उठा रहे हैं। अगर समझते हैं हो सकता है तो हाथ हिलाओ। पहली लाइन तो हिलाओ। भाई हाथ हिलाओ। वाह! फिर तो ब्रह्मा बाप को स्नेह की सौगात दी, इसकी मुबारक हो, मुबारक हो।
अच्छा है, बापदादा से स्नेह बहुत सहयोग देता है। मेरा बाबा कहा दिल से, तो मेरा बाबा कहा तो मैं कौन? बाप का सिकीलधा बच्चा। सभी कितने बारी कहते हो मेरा बाबा, मेरा बाबा, कितने बार कहते हो? बाप सुनता है ना, सब नोट करता है। डबल फॉरेनर्स भी सुन रहे हैं ना। तो अभी यह रिजल्ट बापदादा भी देखते रहेंगे और आप सब भी साक्षी होकर अपने आपकी रिजल्ट देखते रहना। यही याद रखना कि बापदादा को मालिक बनने का वायदा किया है।
महाराष्ट्र है ना। तो महाराष्ट्र को तो महान काम देंगे ना। बापदादा को हर एक ज़ोन के लिए प्यार है और सदा यह निश्चय रखते हैं कि यह बच्चे, बाप ने कहा और बच्चों ने किया। ऐसा है? महाराष्ट्र, जो बाप ने कहा वह किया, ऐसा है? महाराष्ट्र वाले हाथ उठाओ। बहुत हैं। पौना क्लास है। तो हर एक ज़ोन बाप के आज्ञाकारी हैं, कांध हिला रहे हैं सभी। बाप को भी निश्चय है कि यह मेरे बच्चे हैं ही निश्चयबुद्धि।
बापदादा यही चाहते हैं कि जो रोज़ के महावाक्य सुनते हो वह होम वर्क है। अगर रोज़ की मुरली जो बाप ने कहा और बच्चों ने किया तो उसको कहा जाता है बाप के सिकीलधे बच्चे, आज्ञाकारी बच्चे। क्या करना है, वह रोज़ की मुरली पढ़ लो क्योंकि बापदादा ने देखा है मैजारिटी बच्चे मुरली से प्यार रखते हैं। अगर कोई नहीं भी रखता हो, तो बापदादा को कोई बच्चा कहे बाबा आपसे मेरा बहुत प्यार है, लेकिन बाप का प्यार किससे है? मुरली से। मुरली के लिए कितना दूर से आते हैं। कोई टीचर ऐसा होगा जो इतना दूर से पढ़ाई पढ़ाने आये। तो जब बाप का प्यार मुरली से है तो जो मेरा बाबा कहता है उसका पहला प्यार बाप के साथ बाप की मुरली से होना चाहिए। देखो, ब्रह्मा बाप ने एक दिन भी मुरली मिस नहीं की। चाहे बाम्बे भी जाते रहे, कारणे अकारणे, तो मुरली लिखते थे और मातेश्वरी वह मुरली सुनाती थी। लास्ट डे तबियत थोड़ी ढीली थी, सवेरे का क्लास नहीं कराया लेकिन शाम को क्लास कराने के बाद अव्यक्त हुए। तो ब्रह्मा बाप का प्यार किससे हुआ? मुरली से। जो कोई समझते हैं कि मेरा बाबा से प्यार है तो बाप का जिससे प्यार रहा, बच्चे का रहना चाहिए ना! तो मुरली रोज़ क्लास में पढ़ना वा सुनना। अगर मजबूरी है, बहाना नहीं है, सही कारण है तो किसी से सुनो। जो समझते हैं कि मुरली का इतना महत्व रखूंगा वह हाथ उठाओ। अच्छा, यहाँ तो सब दिखाई दे रहा है, बाप आप पीछे वालों को भी देख रहा है। अच्छा, बहुत अच्छा।
अभी जो बच्चे सम्मुख हैं या दूर बैठे भी देख रहे हैं, बापदादा ने सुना कि अभी तो चारों ओर यह कोशिश की है कि हर एक देश में सेन्टर पर भी जाके देखते हैं, सुनते हैं, चाहे रात का कितना भी बजता है तो भी देखते हैं, यह भी साइंस के साधन आपके लिए ही निकले हैं और आपको ही लाभ हो रहा है। अगर साइंस द्वारा विनाश होगा तो भी आपके राज्य के लिए कर रहे हैं। तो चारों ओर के स्नेही बच्चों को विशेष ब्रह्मा बाप का यादप्यार, दिल का दुलार, दिल का प्यार स्वीकार हो।