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20 Mar 2023
"दिल से “मेरा बाबा कहो” और सर्व अविनाशी खजानों के मालिक बन बेफिक्र बादशाह बनो"
20 March 2023 · हिंदी
20-03-2023 मधुबन अव्यक्त बापदादा ओम् शान्ति 20-03-2023
प्राणप्यारे अव्यक्तमूर्त मात-पिता बापदादा के अति स्नेही, सदा दिल से “मेरा बाबा'' कह सर्व अविनाशी खजानों से सम्पन्न बनने वाले, बेफिक्र बादशाह निमित्त टीचर्स बहिनें तथा देश विदेश के सर्व ब्राह्मण कुल भूषण भाई बहिनें, ईश्वरीय स्नेह सम्पन्न मधुर याद स्वीकार करना जी।
बाद समाचार - सीज़न का यह लास्ट सेवा टर्न भोपाल और तामिलनाडु का है, सभी बहुत दिल से यज्ञ की सेवाओं में लगे हुए हैं। इस टर्न में तो देश विदेश के हजारों भाई बहिनें बापदादा के दिव्य वरदानों व शक्तियों का अनुभव करने पहुंचे हुए हैं। बापदादा बच्चों को संगमयुग की अनेकानेक विशेषतायें सुनाते, सदा उन्हीं स्मृतियों में रहने की प्रेरणा देते हैं। बाबा कहते बच्चे, आप संगमयुगी ब्राह्मणों का अनुभव है - जो पाना था वह पा लिया, अप्राप्त नहीं कोई वस्तु मुझ आत्मा के खजाने में। भविष्य की बात अलग है, लेकिन संगमयुग पर ही सर्व प्राप्ति स्वरूप का, सम्पन्नता का अनुभव होता है। भविष्य प्रालब्ध अभी के पुरुषार्थ व श्रेष्ठ कर्म से बनती है। जीवनमुक्त स्थिति का विशेष अनुभव अभी ही होता है। जब हम दिल से मेरा बाबा कहते हैं तो फिकर की अनेक टोकरियों का बोझ उतर जाता है, प्रकृति वा माया का खेल सदा साक्षी होकर देखने से बेफिक्र बादशाह रहते हैं।
विश्व रचता ने हम बच्चों को सारे रचना की स्पष्ट नॉलेज दी है इसलिए कोई भी दृश्य देखते कभी क्यों, क्या का क्वेश्चन नहीं उठ सकता। बोलो, सदा ऐसी निश्चिंत स्थिति का अनुभव होता है ना! देखो, ड्रामानुसार कोविड के बाद यह पूरी ही सीज़न बहुत-बहुत निर्विघ्न चली। देश विदेश के सभी बाबा के बच्चे अपने मधुबन घर में आकर खूब रिफ्रेश हुए। नया उमंग, नया उत्साह लेकर अपने स्थानों पर बेहद सेवाओं निमित्त गये हैं। हर ग्रुप में मिली हुई संख्या से भी अधिक भाई बहिनें मधुबन घर में पहुंचें और खूब भरपूर होकर गये।
अभी फिर स्व-उन्नति और सेवा के लिए वार्षिक मीटिंग 2 अप्रैल से 8 अप्रैल 2023 तक है। उसके पश्चात मधुबन के सभी स्थानों पर भिन्न-भिन्न प्रकार की सेवायें चलती रहेंगी। करन-करावनहार बाबा और हमारी पूर्वज दादियां सूक्ष्मवतन से ही अनेक प्रकार की बेहद सेवायें गुप्त रूप में करा रहे हैं, जिसका अनुभव तो आप सब भी करते होंगे। अच्छा - सभी को बहुत-बहुत याद... ओम् शान्ति।
20-03-23 ओम् शान्ति “अव्यक्त-बापदादा'' रिवाइज-वीडियो 20-02-2005 मधुबन
आज भाग्य विधाता बापदादा अपने सर्व बच्चों के मस्तक बीच भाग्य की रेखायें देख रहे हैं। हर एक बच्चे के मस्तक में चमकते हुए दिव्य सितारे की रेखा दिखाई दे रही है। हर एक के नयनों में स्नेह और शक्ति की रेखा देख रहे हैं। मुख में श्रेष्ठ मधुर वाणी की रेखा देख रहे हैं। होठों पर मीठी मुस्कान की रेखा चमक रही है। दिल में दिलाराम के स्नेह में लवलीन की रेखा देख रहे हैं। हाथों में सदा सर्व खजानों के सम्पन्नता की रेखा देख रहे हैं। पांव में हर कदम में पदम की रेखा देख रहे हैं। ऐसा श्रेष्ठ भाग्य सारे कल्प में किसी का नहीं होता, जो आप बच्चों को इस संगमयुग में भाग्य प्राप्त हुआ है। ऐसा अपना भाग्य अनुभव करते हो? इतने श्रेष्ठ भाग्य का रूहानी नशा अनुभव करते हो? दिल में स्वत: गीत बजता है - वाह मेरा भाग्य! यह संगमयुग का भाग्य अविनाशी भाग्य हो जाता। क्यों? अविनाशी बाप द्वारा अविनाशी भाग्य प्राप्त हुआ है। लेकिन प्राप्त इस संगम पर ही होता है। इस संगमयुग पर ही अनुभूति करते हो, यह विशेष संगमयुग की प्राप्ति अति श्रेष्ठ है। तो ऐसे श्रेष्ठ भाग्य का अनुभव सदा इमर्ज रहता है या कभी मर्ज, कभी इमर्ज रहता है? और पुरुषार्थ क्या किया? इतने बड़े भाग्य की प्राप्ति के लिए पुरुषार्थ कितना सहज हुआ। सिर्फ दिल से जाना, माना और अपना बनाया “मेरा बाबा''। दिल से पहचाना, मैं बाबा का, बाबा मेरा। मेरा मानना और अधिकारी बन जाना। अधिकार भी कितना बड़ा है! सोचो, कोई पूछे क्या-क्या मिला है? तो क्या कहेंगे? जो पाना था वह पा लिया। अप्राप्त नहीं कोई वस्तु परमात्म खजाने में। ऐसे प्राप्ति स्वरूप का अनुभव कर लिया वा कर रहे हैं? भविष्य की बात अलग है, इस संगमयुग का ही प्राप्ति स्वरूप का अनुभव है। अगर संगमयुग पर अनुभव नहीं किया तो भविष्य में भी नहीं हो सकता। क्यों? भविष्य प्रालब्ध है लेकिन प्रालब्ध इस पुरुषार्थ के श्रेष्ठ कर्म से बनती है। ऐसे नहीं कि लास्ट में अनुभव स्वरूप बनेंगे। संगमयुग के बहुतकाल का यह अनुभव है। जीवनमुक्त का विशेष अनुभव अब का है। बेफिक्र बादशाह बनने का अनुभव अब है। तो सभी बेफिक्र बादशाह हो कि फिक्र है? जो बेफिक्र बादशाह बने हैं वह हाथ उठाओ। बन गये हैं कि बन रहे हैं? बन गये हैं ना! क्या फिक्र है? जब दाता के बच्चे बन गये तो फिक्र क्या रह गया? मेरा बाबा माना और फिक्र की अनेक टोकरियों का बोझ उतर गया। बोझ है क्या? है? प्रकृति का खेल भी देखते हो, माया का खेल भी देखते हो लेकिन बेफिक्र बादशाह होकर, साक्षी होकर खेल देखते हो। दुनिया वाले तो डरते हैं, पता नहीं क्या होगा! आपको डर है? डरते हो? निश्चय और निश्चित है जो होगा वह अच्छे ते अच्छा होगा। क्यों? त्रिकालदर्शी बन हर दृश्य को देखते हो। आज क्या है, कल क्या होने वाला है, इसको अच्छी तरह से जान गये हो, नॉलेजफुल हो ना! संगम के बाद क्या होना है, आप सबके आगे स्पष्ट है ना! नव युग आना ही है। दुनिया वाले कहेंगे, आयेगा? क्वेश्चन है आयेगा? और आप क्या कहते हैं? आया ही पड़ा है इसलिए क्या होगा, क्वेश्चन नहीं है। पता है - स्वर्ण युग आना ही है। रात के बाद अब संगम प्रभात है, अमृतवेला है, अमृतवेले के बाद दिन आना ही है। निश्चय जिसको भी होगा वह निश्चिंत, कोई चिंता नहीं होगी, बेफिकर। विश्व रचता द्वारा रचना की स्पष्ट नॉलेज मिल गई है।
बापदादा देख रहे हैं सभी बच्चे स्नेह के, सहयोग के और सम्पर्क के प्यार में बंधे हुए अपने घर में पहुंच गये हैं। बापदादा सभी स्नेही बच्चों को, सहयोगी बच्चों को, सम्पर्क वाले बच्चों को अपने अधिकार लेने के लिए अपने घर में पहुंचने की मुबारक दे रहे हैं। मुबारक हो, मुबारक हो। बापदादा का प्यार बच्चों से ज्यादा है वा बच्चों का बापदादा से ज्यादा है? किसका है? आपका या बाप का? बाप कहते बच्चों का ज्यादा है। देखो, बच्चों का प्यार है तब तो कहाँ-कहाँ से पहुंच गये हैं ना! लेकिन सबसे दूर से दूर कौन आया है? अमेरिका वाले दूर से आये हैं? आप भी दूर से आये हैं लेकिन बापदादा तो परमधाम से आया है। उसकी भेंट में अमेरिका क्या है! अमेरिका दूर है या परमधाम दूर है? सबसे दूरदेशी बापदादा है। बच्चे याद करते और बाप हाज़िर हो जाते हैं।
अभी बाप बच्चों से क्या चाहते हैं? पूछते हैं ना - बाप क्या चाहते हैं? तो बापदादा यही मीठे-मीठे बच्चों से चाहते हैं कि एक-एक बच्चा स्वराज्य अधिकारी राजा हो। सभी राजा हो? स्वराज्य है? स्व पर राज्य तो है ना! जो समझते हैं स्वराज्य अधिकारी राजा बना हूँ, वह हाथ उठाओ। बहुत अच्छा। बापदादा को बच्चों को देखकर प्यार आता कि 63 जन्म बहुत मेहनत की है, दु:ख-अशान्ति से दूर होने की। तो बाप यही चाहते हैं कि हर बच्चा अभी स्वराज्य अधिकारी बने। मन-बुद्धि-संस्कार का मालिक बने, राजा बने। जब चाहे, जहाँ चाहे, जैसे चाहे वैसे मन-बुद्धि-संस्कार को परिवर्तन कर सके। टेन्शन फ्री लाइफ का अनुभव सदा इमर्ज हो। बापदादा देखते हैं कभी मर्ज भी हो जाता है। सोचते हैं यह नहीं करना है, यह राइट है, यह रांग है, लेकिन सोचते हैं, स्वरूप में नहीं लाते हैं। सोचना माना मर्ज रहना, स्वरूप में लाना अर्थात् इमर्ज होना। समय के लिए तो नहीं इन्तजार कर रहे हो ना! कभी-कभी करते हैं। रूहरिहान करते हैं ना तो कई बच्चे कहते हैं, समय आने पर ठीक हो जायेंगे। समय तो आपकी रचना है। आप तो मास्टर रचता हो ना! तो मास्टर रचता, रचना के आधार पर नहीं चलते। समय को समाप्ति के नज़दीक आप मास्टर रचता को लाना है।
एक सेकण्ड में मन के मालिक बन मन को आर्डर कर सकते हो? कर सकते हो? मन को एकाग्र कर सकते हो? फुलस्टॉप लगा सकते हो कि लगायेंगे फुलस्टॉप और लग जायेगा क्वेश्चन मार्क? क्यों, क्या, कैसे यह क्या, वह क्या, आश्चर्य की मात्रा भी नहीं। फुलस्टॉप, सेकण्ड में प्वाइंट बन जाओ। और कोई मेहनत नहीं है, एक शब्द सिर्फ अभ्यास में लाओ “प्वाइंट''। प्वाइंट स्वरूप बनना है, वेस्ट को प्वाइंट लगानी है और महावाक्य जो सुनते हो उस प्वाइंट पर मनन करना है, और कोई भी तकलीफ नहीं है। प्वाइंट याद रखो, प्वाइंट लगाओ, प्वाइंट बन जाओ। यह अभ्यास सारे दिन में बीच-बीच में करो, कितने भी बिजी हो लेकिन यह ट्रायल करो एक सेकण्ड में प्वाइंट बन सकते हो? एक सेकण्ड में प्वाइंट लगा सकते हो? जब यह अभ्यास बार-बार का होगा तब ही आने वाले अन्तिम समय में फुल प्वाइंट्स ले सकेंगे। पास विद ऑनर बन जायेंगे। यही परमात्म पढ़ाई है, यही परमात्म पालना है।
तो जो भी आये हैं, चाहे पहली बारी आने वाले हैं, जो पहली बारी मिलन मनाने के लिए आये हैं वह हाथ उठाओ। बहुत आये हैं। वेलकम। जैसे अभी पहले बारी आये हो ना, तो पहला नम्बर भी लेना। अगर हिम्मत रखेंगे तो आप सहज योगी बन औरों को भी सहज योग का मैसेन्जर बन मैसेज दे सकते हो। मैसेज देना अर्थात् गॉडली मैसेन्जर बनना। आत्माओं को दु:ख, अशान्ति से छुड़ाना। फिर भी आपके ही भाई-बहिनें है ना! तो अपने भाई वा बहनों को गॉडली मैसेज देना अर्थात् मुक्त करना। इसकी दुआयें बहुत मिलती हैं। किसी भी आत्मा को दु:ख, अशान्ति से छुड़ाने की दुआयें बहुत मिलती हैं और दुआयें मिलने से अतीन्द्रिय सुख, आन्तरिक खुशी की फीलिंग बहुत आती है। क्यों? क्योंकि खुशी बांटी ना तो खुशी बांटने से खुशी बढ़ती है। सभी खुश हो? खुश हैं तो हाथ हिलाओ। सभी खुश हैं, अभी जाकरके क्या करेंगे? खुशी बांटेंगे ना! सबको खूब खुशी बांटना। जितनी बांटेंगे उतनी बढ़ेगी, ठीक है। अच्छा।
सेवा का टर्न तामिलनाडु और भोपाल ज़ोन का है:- सेवा का चांस लेने में कितने पदम, कदम में जमा किये? जमा किया? क्योंकि यहाँ तो सेवा और यज्ञ पिता की याद रहती है। यज्ञ सेवा करते हो तो यज्ञ पिता की याद तो स्वत: आती है। अच्छा है। इसमें टीचर्स हाथ उठाओ।
बापदादा सदा टीचर्स को कहते हैं, टीचर्स अर्थात् जिसके फीचर्स से फ्युचर दिखाई दे। ऐसी टीचर्स हो ना! आपको देखकर स्वर्ग के सुख की फीलिंग आये। शान्ति की अनुभूति हो। चलते-फिरते फरिश्ते दिखाई दें। ऐसी टीचर्स हो ना! अच्छा है, चाहे प्रवृत्ति में रहने वाले हैं, चाहे सेवा के निमित्त बने हुए हैं लेकिन सभी बापदादा समान बनने वाले निश्चयबुद्धि विजयी हैं। तो सेवा करना बहुत अच्छा लगा ना। सन्तुष्ट रहे? रहे तो हाथ हिलाओ। बहुत अच्छा, मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो।
डबल विदेशी:- डबल विदेशी कौन हो? सफलता के सितारे हो। है ना! सफलता के सितारे हैं। अच्छा कर रहे हैं। एक-एक के दिल का आवाज बापदादा तक पहुंचता रहता है। यह करें, यह करें, यह भी करें, वह भी करें, उमंग-उत्साह अच्छा है और सफलता तो होनी ही है। आपके चरणों में, गले में सफलता है ही है। और आप सबको देख करके सभी खुश भी होते हैं। आपका आह्वान करते हैं, डबल विदेशी जरूर होने चाहिए। लाडले हो गये हो ना! तो बहुत अच्छा कर रहे हो, करते रहेंगे। उड़ रहे हो, उड़ाते रहेंगे। अच्छा।
चारों ओर के चाहे साकार रूप में सामने हैं, चाहे दूर बैठे भी दिल के नज़दीक हैं, ऐसे सदा श्रेष्ठ भाग्यवान आत्माओं को, सदा निमित्त बन निर्माण का कार्य सफल करने वाले विशेष आत्माओं को, सदा बाप के समान बनने के उमंग-उत्साह में आगे बढ़ने वाले हिम्मतवान बच्चों को, सदा हर कदम में पदमों की कमाई जमा करने वाले बहुत-बहुत वर्ल्ड में पदमगुणा धनवान, भरपूर आत्माओं को बापदादा का यादप्यार और नमस्ते।