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15 Oct 2023
“ब्रह्मा बाप समान व्यर्थ समय, व्यर्थ संकल्प के विजयी, कर्मातीत बन मुक्ति का गेट खोलने के निमित्त बनो''
15 October 2023 · हिंदी
मधुबन अव्यक्त बापदादा ओम् शान्ति 15-10-2023
प्राणप्यारे अव्यक्त बापदादा के अति लाडले, परमात्म प्यार में लवलीन रहने वाले, ब्रह्मा बाप समान व्यर्थ से मुक्त, संगमयुग के सुहावने समय और संकल्प को सफल करने वाली सभी भाग्यशाली आत्मायें, विशेष निमित्त टीचर्स बहिनें तथा देश विदेश के सर्व ब्राह्मण कुल भूषण बाबा के नूरे रत्न, ईश्वरीय स्नेह सम्पन्न मधुर याद स्वीकार करना जी।
बाद समाचार - सभी ब्रह्मा वत्स संगठित रूप में बैठ अपनी अव्यक्त स्थिति द्वारा अव्यक्त मिलन का सुख लेने तथा अनेक दिव्य वरदानों से अपनी झोली भरने का सदा ही इन्तजार करते हैं। अभी वही सुखद अनुभूति कराने वाली घड़ियां सामने आ पहुंची हैं। अव्यक्त मिलन का यह पहला टर्न इन्दौर ज़ोन (हेमा बहन) का है। इन्दौर, छत्तीसगढ़ तथा भारत के विभिन्न स्थानों से हजारों बाबा के बच्चे शान्तिवन में पहुंच गये हैं। साथ-साथ इस पहले टर्न में विदेश से भी अनेकानेक स्थानों से डबल विदेशी बाबा के बच्चे मधुबन में पहुंचे हुए हैं। परमात्म अवतरण की इस भूमि के पवित्र, शक्तिशाली प्रकम्पन्न आने वाली हर आत्मा में नया उमंग-नया उत्साह भर देते हैं।
प्यारे बापदादा और सभी वरिष्ठ दादियों की छत्रछाया का, उनके पवित्र शुभ भावनाओं के वायुमण्डल का मधुबन में आते ही हर एक को अनुभव होता है। अनेक भाई बहिनों की अनुभव युक्त क्लासेज़, पवित्र ब्राह्मणों का सुन्दर संगठन एक दो को और भी शक्तिशाली बना देता है। सभी योग के बहुत सुन्दर गहरे अनुभव करके भरपूर होकर जाते हैं।
अभी मार्च 2024 तक देश-विदेश के अनेकानेक बाबा के नये पुराने बच्चे मधुबन घर में आकर अपनी झोली वरदानों से भरते रहेंगे। अच्छा - सभी को याद..... ओम् शान्ति।
15-10-23 ओम् शान्ति “अव्यक्त-बापदादा'' रिवाइज 19-10-11 मधुबन
आज बापदादा अपने चारों ओर के मीठे-मीठे प्यारे-प्यारे बच्चों को देख रहे हैं। सभी बड़े प्यार से अपनी याद दे रहे हैं। इतना प्यार सिर्फ बाप को ही करते हैं। यह परमात्म प्यार सिर्फ अभी प्राप्त होता है। हर एक बच्चा प्यार में लवलीन है। बाप भी हर बच्चे को प्यार का रेसपान्ड दे रहे हैं। वाह बच्चे वाह! चाहे सम्मुख हैं, चाहे दूर हैं लेकिन हर एक बच्चा बाप के दिल में समाया हुआ है। सबके दिल में यह गीत बज रहा है इतना प्यार करेगा कौन! यह बाप और बच्चों का आत्मिक प्यार हर बच्चे को देह से न्यारा और बाप का प्यारा बनाने वाला है और यह प्यार अभी ही बच्चों को प्राप्त होता है। यह प्यार बच्चों को क्या से क्या बनाने वाला है। यह प्यार सिर्फ इस एक जन्म में प्राप्त होता है। बाप भी बच्चों का स्नेह देख बच्चों के स्नेह में समा जाता है।
आज बापदादा हर एक के मस्तक में तीन भाग्य देख रहे हैं। एक बाप के स्वरूप में प्राप्त वर्से का भाग्य, दूसरा शिक्षक के रूप में श्रेष्ठ शिक्षा का भाग्य और तीसरा सतगुरू के रूप में वरदानों का भाग्य। हर एक का मस्तक इन तीनों भाग्य से चमक रहा है। बापदादा भी अपने भाग्यशाली बच्चों को देख हर्षित हो रहे हैं। चाहे सम्मुख बैठे हैं, चाहे दूर बैठे हैं लेकिन दिल में नजदीक हैं। ऐसे बच्चों और बाप का प्यार सारे कल्प में इस समय ही प्राप्त होता है। यह प्यार का अनुभव औरों को भी करा रहे हो। अभी कोई-कोई लोग समझते हैं कि इन ब्राह्मण आत्माओं को कुछ मिला है। क्या मिला है, उसका स्पष्टीकरण होता जा रहा है। अभी बाप बच्चों से क्या चाहते हैं? बाप को सदा हर बच्चे में यही आशा है कि हर बच्चा बाप समान बन जाए। जैसे ब्रह्मा बाप विजयी बने, ऐसे हर बच्चा सदा विजयी बने। इसके लिए जैसे ब्रह्मा बाप ने क्या किया? फालो फादर। तो आप सभी भी हर कदम उठाते पहले चेक करो कि यह कदम ब्रह्मा बाप ने किया? ब्रह्मा बाप ने हर बच्चे प्रति, चाहे जानते थे कि यह बच्चा कमजोर है, पुरुषार्थ में भी, सेवा में भी लेकिन कमजोर के ऊपर और ही रहम और कल्याण की भावना रही। ऐसे ही बापदादा सभी बच्चों को भी यही कहते अपने परिवार के हरेक भाई या बहन प्रति शुभ भावना, शुभ कामना, रहम और कल्याण की दृष्टि से उनके भी सहयोगी बनो। बापदादा ने पहले भी सुनाया कि प्यार की सबजेक्ट में हर एक बच्चा यथा शक्ति पास है। प्यार के कारण ही आगे बढ़ रहे हैं। अभी बापदादा बच्चों के प्यार को देख खुश है। प्यार की सबजेक्ट के कारण हर एक बच्चा नम्बरवार चल रहा है। अभी बापदादा चाहते हैं कि प्यार में कुछ कुर्बानी भी की जाती है। बाप से प्यार है इसलिए कौन सी कुर्बानी करनी है? जो बापदादा चाहता है वह समझ तो गये हो, समझते हो ना बाप क्या चाहता है? समझते हो? कांध हिलाओ। समझते हो? तो करना है इसकी भी हिम्मत है ना! हिम्मत है तो हाथ उठाओ। हिम्मत है? अच्छा। तो हिम्मते बच्चे मददे बाप है ही।
अभी बापदादा चाहते हैं, रिजल्ट में देखा तो अभी तक सम्पूर्ण पवित्रता के हिसाब से व्यर्थ संकल्प भी अपवित्रता का बीज है। तो बापदादा ने देखा यह व्यर्थ संकल्प चलना, यह मैजारिटी बच्चों में अब भी संस्कार रहा हुआ है। एक व्यर्थ संकल्प और दूसरा व्यर्थ समय यह मैजारिटी बच्चों में अब भी दिखाई देता है। और व्यर्थ संकल्प का आधार है मन, जो मनमनाभव होने नहीं देता क्योंकि बापदादा ने काफी समय से इशारा दे दिया है कि जो कुछ होना है वह अचानक होना है। तो अचानक के हिसाब से बापदादा ने चेक किया मैजारिटी बच्चों में यह व्यर्थ संकल्प का संस्कार है। तो जब ब्रह्मा बाप व्यर्थ समय, व्यर्थ संकल्प के विजयी बन कर्मातीत हुए तो फालो फादर।
बापदादा ने देखा कि मन है तो आपकी रचना, आप मन के रचता हो तो मन को चलाने वाले हो। मन की कन्ट्रोलिंग पावर, रूलिंग पावर के मालिक हो लेकिन फिर भी मन कहाँ धोखा दे देता है। है आपकी रचना, मेरा है ना! लेकिन कन्ट्रोलिंग पावर कम होने के कारण धोखा दे देता है। मन को घोड़ा भी कहा जाता है लेकिन आपके पास श्रीमत की लगाम है। है ना लगाम! अगर मन कभी भी वेस्ट संकल्प की तरफ ले जाता तो लगाम को टाइट करने से व्यर्थ संकल्प की थोड़ी भी अपवित्रता को खत्म कर सकते हो। मन के मालिक बन, जैसे ब्रह्मा बाप ने रोज़ मन की चेकिंग की, ऐसे रोज़ चेक करो और व्यर्थ संकल्प को समाप्त करो। तो आज बापदादा यही चाहता है कि इस व्यर्थ संकल्पों को समाप्त करो। बुरे संकल्प कम हैं, व्यर्थ ज्यादा हैं लेकिन इसमें टाइम बहुत जाता है। मन के मालिक बन मन को ऐसे बिजी करो जो और तरफ आकर्षित हो आपकी लगाम को ढीला नहीं करे। हो सकता है यह? आज बापदादा व्यर्थ संकल्प के समाप्ति का सबको संकल्प दे रहे हैं। हो सकता है? हाथ उठाओ जो समझते हैं व्यर्थ संकल्प भी समाप्त, सेरीमनी मनायेंगे। व्यर्थ समय भी बचाना है। समय और संकल्प दोनों को बचाना है क्योंकि बापदादा सबका चार्ट देखते हैं। तो चार्ट में यह कमी मैजारिटी में देखने आई। मन के मालिक ही विश्व के मालिक बनने हैं। जैसे ब्रह्मा बाप मनजीत बन विश्व का मालिक बन गया, अभी तो आपके लिए, बच्चों के लिए आवाह्न कर रहे हैं, आपकी एडवांस पार्टी भी आवाह्न कर रही है। सुनाया था चार बजे एडवांस पार्टी वाले भी वतन में आते हैं तो पूछते हैं कब मुक्ति का गेट खोलेंगे? किसको खोलना है? आप सभी मुक्ति का गेट खोलने वाले हो ना! आपका सम्पूर्ण बनना अर्थात् मुक्ति का गेट खुलना। तो बापदादा से एडवांस पार्टी रूहरिहान करती है, कब तक? तो बाप आपसे पूछते हैं कब तक? तो क्या जवाब देंगे? पहली लाइन वाले बोलो, कब तक? हर कार्य के लिए डेट फिक्स करते हो ना! तो इस कार्य की डेट कब तक? ब्रह्मा बाप तो फरिश्ते रूप में आवाह्न कर रहे हैं। बता सकते हो डेट? बोलो, डेट फिक्स कर सकते हैं? अभी डेट फिक्स है? पाण्डव हाथ उठाओ, डेट फिक्स है? नहीं है। क्यों? दीदी कहती है बाबा हम लोगों को लगन थी घर जाना है, घर जाना है, घर जाना है। दादी कहती है हमको लगन थी कर्मातीत होना है, कर्मातीत होना है..। तो आप सभी का तो दीदी दादी से प्यार है ना। है तो सभी से क्योंकि जो भी एडवांस पार्टी में गये हैं उन सभी से आपका प्यार तो है। अभी उनके प्रश्न का उत्तर दो। तो आपस में रूहरिहान कर अब कुछ जवाब तैयार करना।
तो अभी-अभी सभी अपने मन में यह प्रामिस करो कि कभी भी व्यर्थ संकल्प नहीं आने देंगे। यह हो सकता है? अभी से कहते हैं नाउ आर नेवर, तो कम से कम यह सब प्रामिस करते हैं कि अभी से न व्यर्थ संकल्प, न व्यर्थ समय गंवायेंगे? इसमें जो तैयार हैं वह हाथ उठाओ। मैजारिटी ने उठाया है। जो समझते हैं कि टाइम लगेगा, वह हाथ उठाओ। कोई नहीं। थोड़े-थोड़े हैं जो हाथ उठा रहे हैं। ब्रह्मा बाप का जन्म ही दृढ़ संकल्प से हुआ है। करना है। सोचेंगे नहीं, क्या करूं, क्या नहीं करूं, करना है। उस एक दृढ़ संकल्प ने इतने बच्चों का भविष्य बनाया। एक ब्रह्मा बाप ने कितनी हिम्मत रखी। आधा हिस्सा मिला और यज्ञ रचा। यज्ञ के ब्राह्मण रचे और अब देश विदेश की आत्मायें पहुंच गई हैं, एक ब्रह्मा बाप के दृढ़ संकल्प के कारण। तो दृढ़ संकल्प क्या नहीं कर सकता। यह तो आपके आगे एक्जैम्पुल है। संकल्प करते हो, बहुत अच्छे अच्छे संकल्प बाप के पास पहुंचते हैं लेकिन उसमें दृढ़ता कम होती है। कोई बात सामने आई ना तो दृढ़ता कम हो जाती है। दृढ़ता सफलता की चाबी है।
अभी यह संकल्प करो आज व्यर्थ समय, व्यर्थ संकल्प समाप्त करना ही है। जब व्यर्थ समाप्त हो जायेगा तो सदा श्रेष्ठ संकल्प का खजाना कमाल दिखायेगा।
बापदादा खुश है डबल विदेशी बच्चे चारों ओर डबल सेवा अच्छी कर रहे हैं। एक स्वयं का पुरुषार्थ और दूसरा आत्माओं की सेवा, दोनों बात में अच्छी हिम्मत रख आगे बढ़ रहे हैं। बापदादा इस डबल सेवा की मुबारक दे रहे हैं। मुबारक हो, मुबारक हो।
तो बापदादा डबल विदेशियों को देख खुश है, वृद्धि भी कर रहे हैं और डबल सेवा की तरफ अटेन्शन अच्छा है। सिर्फ बापदादा यह इशारा फिर भी दे रहा है कि आपस में संस्कार मिलन की रास करो। यह नहीं सोचो, सेन्टर तो अच्छा चल रहा है, सर्विस तो अच्छी हो रही है लेकिन जब एक परिवार है, प्रभु परिवार है, लौकिक परिवार नहीं प्रभु परिवार है। प्रभु परिवार का अर्थ ही है एक दो में शुभ भावना, कल्याण की भावना। एक दो में यही संकल्प रहे कि हम सभी को साथ-साथ एक दो को आगे बढ़ाते मुक्ति का गेट खोलके साथ जाना ही है, इसलिए हर सेन्टर में ऐसा वायुमण्डल हो जो समझ में आवे यह 8 नहीं, 10 नहीं लेकिन 10 ही एक हैं।
अच्छा - चारों ओर के चाहे सामने बैठे हैं, चाहे कहाँ भी बैठे हैं लेकिन सबका अटेन्शन मधुबन में है। बापदादा को देख रहे हैं, मैजारिटी तो देख ही रहे हैं। बापदादा भी सभी बच्चों को, चारों ओर के बच्चों को सदा हर्षित रहने वाले, सदा डबल पुरुषार्थी, डबल पुरुषार्थी अर्थात् स्व के पुरुषार्थ में भी और सेवा के पुरुषार्थ में, ऐसे डबल पुरुषार्थी और डबल निश्चय और नशे में रहने वाले, सदा बाप के साथ रहने वाले, सदा आपस में भी कल्याण और रहम की शुभ भावना में रहने वाले, एक-एक बच्चे को नाम सहित बापदादा दिल की याद प्यार दे रहे हैं।
सेवा का टर्न इन्दौर ज़ोन (हेमा बहन) का है:- अच्छा।
व्यर्थ संकल्प की समाप्ति की, भूल नहीं जाना। बापदादा के पास रिकार्ड तो पहुंच ही जाता है। बापदादा देखेंगे कितने तीव्र पुरुषार्थी बच्चे हैं और एक दो को भी उमंग उत्साह दे आगे बढ़ाने वाले हैं। अगर कोई गलत भी करता है तो उसके प्रति वह गलत करता है, और आप उसकी गलती का मन में संकल्प करते हो, यह करता है, यह करता है, यह करता है... यह भी खत्म करो। उनको सहयोग दो, श्रेष्ठ भावना दो, ऐसी सेवा करते सारे संगठन को श्रेष्ठ संकल्प वाले बनाना ही है। कोई सेन्टर पर कभी भी एक दो के प्रति कोई भी और भावना नहीं हो, शुभ भावना, शुभ कामना, ठीक है ना! बहुत अच्छा। अभी सभी बच्चों को बापदादा मुबारक के साथ दिल का यादप्यार भी साथ में दे रहे हैं। अच्छा।