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16 Feb 2024
"अब चारों ओर दु:ख अशान्ति बढ़ रही है इसलिए अपने विश्व कल्याणी स्वरूप को प्रत्यक्ष करो, मन्सा सेवा बढ़ाओ”
16 February 2024 · हिंदी
16-02-2024 मधुबन अव्यक्त बापदादा ओम् शान्ति 16-02-2024
आज बापदादा हर बच्चे के भाग्य की रेखायें देख रहे हैं। मस्तक में चमकते हुए सितारे की रेखा, नयनों में स्नेह और शक्ति की रेखा, होठों में मुस्कान की रेखा, पांव में हर कदम में पदम की रेखा देख रहे हैं। आप सभी भी अपने भाग्य की रेखायें देख हर्षित होते हो ना! दिल में यही गाते वाह मेरा भाग्य! हर एक का मस्तक उस दिव्य सितारे से चमकता हुआ देख बापदादा भी खुश हो रहे हैं और यही दिल में गीत गाते वाह बच्चे वाह! बच्चों के दिल से क्या गीत सुन रहे हैं? वाह बाबा वाह! तो बच्चे भी वाह! बाप भी वाह! तो यह सारी सभा क्या हो गई? वाह! वाह! वाह! तो अपने भाग्य को देख सदा ऐसे ही हर्षित रहो जैसे अभी सब हर्षित हो रहे हैं। यह भाग्य अब संगमयुग में ही मिलता है। संगमयुग के हर घड़ी की बहुत बड़ी वैल्यु है। संगमयुग की एक घड़ी अविनाशी हो जाती है क्योंकि हर घड़ी का 21 जन्मों के साथ सम्बन्ध है। अब की एक घड़ी का सम्बन्ध 21 जन्मों के साथ है। तो चेक करो एक घड़ी अगर व्यर्थ गई तो एक जन्म की बात नहीं, 21 जन्म के सम्बन्ध की बात है इसलिए बापदादा बच्चों को समय प्रति समय अटेन्शन खिंचवा रहे हैं कि संगमयुग की एक घड़ी को भी, एक संकल्प को भी व्यर्थ नहीं गवाओ क्योंकि एक जन्म व्यर्थ नहीं गंवाया लेकिन 21 जन्म में व्यर्थ गंवाया। संगमयुग का महत्व हर समय याद रखो।
बापदादा ने व्यर्थ समय और व्यर्थ संकल्प का होमवर्क सभी को दिया था। तो सभी ने होमवर्क किया? जो समझते हैं हमारा अटेन्शन रहा और बहुत करके सफलता भी प्राप्त हुई, लक्ष्य का लक्षण तक परिणाम है, वह हाथ उठाना। अच्छा। पाण्डव उठा रहे हैं? बड़ा हाथ उठाओ। अभी सभी ने काम नहीं किया है। संगमयुग के महत्व को अगर सदा बुद्धि में याद रखो कि अविनाशी बाप द्वारा यह कार्य मिला है। हर घड़ी अविनाशी बनने की है क्योंकि अविनाशी बाप ने यह वरदान दिया है। तो सहज ही हो जायेगा।
बाप ने सुनाया कि हर एक ब्राह्मण बच्चे के कदम में पदम की रेखा है। सोचो कदम में पदम की रेखा तो कितने पदमों के लिए संगमयुग पर गोल्डन चांस है। हर एक को यह अपना भाग्य स्मृति में रखना है। कई बच्चे सोचते हैं कि बापदादा क्या चाहते हैं? बापदादा यही चाहते हैं कि एक-एक बच्चा डबल राजा बन जाये। अभी स्वराज्य अधिकारी और भविष्य में विश्व राज्य अधिकारी। कोई भी बच्चा डबल राजा बनने में कम नहीं हो। तो हर एक बच्चा डबल राज्य अधिकारी हो ना! कांध हिलाओ। तो हर बच्चा डबल राज्य अधिकारी है! कांध हिलाओ। तो बाप को कितनी खुशी होती है।
बापदादा हर बच्चे का रिकार्ड रोज़ देखते हैं, तो क्या देखते हैं? हर एक अपने दिल में तो जान गये होंगे। राज्य अधिकारी बने तो हैं लेकिन अभी जो स्वराज्य अधिकारी हो, स्वराज्य अधिकारी अर्थात् मन-बुद्धि संस्कार को अपने कन्ट्रोल में चलाने वाला। जब चाहे जैसे चाहे वैसे अधिकार में रहे। जैसे यह स्थूल कर्मेन्द्रियां हाथ हैं, पांव हैं अपने कन्ट्रोल में रहते हैं ऐसे मन बुद्धि संस्कार जब चाहे जैसे चाहे रूलिंग पावर और कन्ट्रोलिंग पावर हो। अभी देखने में नम्बरवार बहुत हैं। हैं यह भी मेरे। मन मैं नहीं है, मेरा है। संस्कार मेरे हैं, बुद्धि मेरी है लेकिन कन्ट्रोलिंग पावर रूलिंग पावर नम्बरवार है। बापदादा समय की सूचना भी समय प्रति समय देते रहे हैं, उस समय के अनुसार आप लोगों का एक-एक का स्वमान है विश्व कल्याणकारी। अब समय प्रमाण हर एक बच्चे को विश्व कल्याणी स्वरूप को प्रत्यक्ष करने का समय है। चारों ओर दु:ख अशान्ति बढ़ रही है। आपके भाई, आपकी बहिनें, परिवार दु:खी हो रहे हैं तो आपको अपने परिवार पर रहम नहीं आता!
अभी बापदादा यही इशारा दे रहे हैं स्व पुरुषार्थ के साथ विश्व सेवा, जैसे वाचा की सेवा वर्तमान समय अच्छी धूमधाम से कर रहे हो।बापदादा देख करके खुश है लेकिन अभी मन्सा सेवा की भी आवश्यकता है क्योंकि सभी तरफ विश्व कल्याणकारी बनना है, उसमें मन्सा वाचा और कर्मणा अर्थात् चलन और चेहरे से तीनों ही सेवा की अभी आवश्यकता है। रोज़ चेक करो तीनों सेवाओं में कितनी परसेन्ट सेवा की? वाचा में तो बापदादा ने भी सर्टीफिकेट दिया लेकिन अभी मन्सा सूक्ष्म वायब्रेशन्स द्वारा आत्माओं के दु:ख अशान्ति का सहारा बनना पड़े। क्या आपको तरस नहीं आता? बापदादा को तो बच्चों पर चाहे कैसे भी हैं लेकिन फिर भी बच्चे तो हैं ना, तरस आता है। तो अभी हर बच्चे को सिर्फ सेन्टर कल्याणी नहीं, ज़ोन कल्याणी नहीं विश्व कल्याणी बनना है। तो बापदादा अभी यही अटेन्शन दिला रहे हैं अपने भक्तों का कल्याणकारी बनो क्योंकि यह संगमयुग का बहुत बड़ा महत्व है। अभी संगमयुग में जो चाहे जितना चाहे उतना बाप से सहयोग मिल सकता है। तो सुना क्या करना है अभी? मन्सा सेवा को बढ़ाओ। अपने कार्य के प्रमाण जैसे ट्रैफिक कन्ट्रोल का टाइम फिक्स किया हुआ है, ऐसे ही हर एक को मन्सा सेवा का भी टाइम फिक्स करना चाहिए। जब ज्यादा दु:ख होगा उस समय सभी का अटेन्शन उस हलचल में होगा लेकिन अभी मन्सा सेवा का समय है इसलिए हर बच्चे को अपने विश्व कल्याणी का स्वरूप इमर्ज करना है। विश्व कल्याण में स्व कल्याण स्वत: और सहज हो जायेगा क्योंकि अगर मन फ्री है तो व्यर्थ आता है लेकिन मन बिजी होगा तो व्यर्थ सहज ही समाप्त हो जायेगा। तो बापदादा जब चक्र लगाके चारों ओर देश विदेश के अज्ञानी बच्चों को देखते हैं तो तरस आता है इसलिए आप सब भी अब दु:ख हर्ता सुख कर्ता बनो।
अभी समय की गति को देख रहे हो और बापदादा तो बहुत समय से अचानक की वारनिंग दे रहे हैं इसलिए अभी बापदादा हर बच्चे को एक स्वमान देते हैं - हर बच्चा दृढ़ संकल्पधारी विशेष आत्मा बनो। संकल्प किया और हुआ, इसको कहा जाता है दृढ़ संकल्प। कहते हैं दृढ़ संकल्प किया लेकिन दृढ़ता माना ही सफलता। अगर सफलता नहीं है तो दृढ़ता नहीं कहेंगे। तो अभी दृढ़ता भव! यह अपना विशेष स्वमान रोज़ अमृतवेले स्मृति में लाना और उस विधि पूर्वक आगे बढ़ना।
अभी दो टर्न हैं, इन दो टर्न में क्या करेंगे? क्या करेंगे? बोलो। पहली लाइन बोलो, क्या करेंगे? करना ही है। करेंगे नहीं, करना ही है। बहुतकाल का बाप समान बनना, बहुत समय की प्राप्ति है।
संगमयुग का समय बहुत प्यारा है, एक सेकण्ड नहीं है, एक सेकण्ड एक वर्ष की प्राप्ति समान है इसलिए बापदादा कहते ही रहते हैं, एक सेकण्ड भी व्यर्थ नहीं जाये। एक संकल्प भी व्यर्थ नहीं जाये। समर्थ बनो और समर्थ बनाओ। ठीक है ना! ठीक है टीचर्स। टीचर्स कांध हिला रही हैं।
बापदादा का टीचर्स के ऊपर बहुत प्यार है। है तो सभी बच्चों के ऊपर फिर भी टीचर्स जिम्मेवार हैं ना! बापदादा की दिल को पूर्ण करने वाली कौन? कौन? कहो हम टीचर्स। हाथ उठाओ। हाँ देखो कितनी टीचर्स हैं? अरे वाह! अच्छा।
सेवा का टर्न राजस्थान-तामिलनाडु का है:- बापदादा हर ज़ोन की विशेषता देख रहे हैं और यह जो सिस्टम बनाई है, वह बहुत अच्छी बनाई है। किसने बनाई? मुन्नी ने। (दादी जी ने बनाई) दादी तो थी ही दादी। आप सबको पसन्द है ना। वैसे तो आपको लिस्ट अनुसार आना होता है लेकिन अभी फ्रीडम है, सेवाधारियों को चांस मिलता है इसलिए बापदादा दादी को मुबारक दे, या आप सबको मुबारक दे। दादी ने बनाया आप लोग प्रैक्टिकल में आ रहे हैं इसके लिए आपको भी मुबारक। अच्छा।
डबल विदेशी:- सभी देखो, आपको देख करके सब कितने खुश हो रहे हैं। बाप ने कहाँ-कहाँ से 65 देशों से ढूंढकर निकाला है। आप सबको भी खुशी और नशा है ना तो हमको बाप ने ढूंढ लिया। और बापदादा ने देखा इस बारी सभी ने मिलके जो निमित्त बने हैं, उन सबने बहुत बहुत बहुत अच्छी निमित्त बनने की सेवा की है। बापदादा एक-एक का नाम नहीं लेते लेकिन जो भी निमित्त बनें उन्होंने सेवा में सफलता पाई है, सबके दिलों में ऐसा उमंग दिलाया है जो अपने स्थान में जाके अपने स्थान को भी ऐसे ही रिफ्रेश करेंगे। तो जो सेवा के निमित्त बनें उनको बापदादा बहुत-बहुत मुबारक दे रहे हैं। सिस्टम भी अच्छी बनाई है और जनक बच्ची ने तो सभी के दिल में उमंग और उत्साह एकस्ट्रा भर लिया। हर एक का चेहरा दिखाई दे रहा है कि जो शक्ति इकट्ठी की वह चेहरे पर आ रही है। सबके चेहरे खुशनुमा दिखाई दे रहे हैं।
बापदादा ने देखा है कि अभी सेवा का उमंग भी सभी में जाग रहा है, हम भी करें, हम भी करें। यह उमंग आया है। जब उमंग आ गया ना तो जहाँ उमंग है, उत्साह है, वहाँ सफलता है ही है इसलिए जो आप सम्मुख हो उन्हों को और जो दूर बैठे देख रहे हैं, सुन रहे हैं, उन सभी चारों ओर के बच्चों को बापदादा बहुत-बहुत दिल का प्यार और साथ में दिल में सदा रहने की मुबारक दे रहे हैं।
अभी दिल लग गई है, यहाँ आबू में रहने की दिल लग गई है! अच्छा है। विदेशियों को देखके तो परिवार भी खुश होता है। और 65 देशों से देखो किसमें आये हो? प्यार के विमान में आये हो ना!
आज मधुबन वालों को विशेष बापदादा एक बात की मुबारक दे रहे हैं। कौन सी बात? सभी ने अभी तक सेवा बहुत अच्छी प्यार से की है। कितना भी बड़ा परिवार आया लेकिन सेवा में निमित्त तो मधुबन वाले बनते हैं। चाहे हर ज़ोन सहयोगी बनते हैं लेकिन फिर भी जो परमानेंट रहते हैं उनके सहयोग के बिना तो नहीं कर सकते इसलिए एक-एक मधुबन वासी सिर्फ नीचे वाले नहीं, ऊपर वाले भी, हॉस्पिटल भी, जिन्होंने भी सहयोग दिया है, और अथक बनके सहयोग दे रहे हैं, इसीलिए एक-एक बच्चा अपने नाम से बापदादा का यादप्यार स्वीकार करना। अच्छा। जो मधुबन वाले हैं वह उठो, जो भी बैठे हैं यहाँ। तो खास मुबारक हो। अच्छा।
चारों ओर के होलीएस्ट बच्चों को जो हर कदम में मेरा बाबा, मेरा बाबा कहते हुए उड़ रहे हैं और सदा अपने तीव्र पुरुषार्थ द्वारा आगे बढ़ रहे हैं और बढ़ाते रहते हैं ऐसे बापदादा के दिल के नूरे रत्नों को बापदादा बहुत बहुत बहुत बहुत दिल का प्यार दे रहे हैं।