Search for a command to run...
15 Nov 2025
“ज्वालामुखी तपस्या द्वारा मैं-पन की पूंछ को जलाकर बापदादा समान बनो तब समाप्ति समीप आयेगी''
15 November 2025 · हिंदी
प्राणप्यारे अव्यक्त बापदादा के अति स्नेही, सदा सर्व खजानों से सम्पन्न, सदा खुशनुम:खुशनसीब स्थिति का अनुभव करने वाले, सन्तुष्टता स्वरूप निमित्त टीचर्स बहिनें तथा देश विदेश के सर्व ब्राह्मण कुल भूषण भाई बहिनें, ईश्वरीय स्नेह सम्पन्न मधुर याद स्वीकार करना जी।
बाद समाचार - आप सभी विशेष ज्वालामुखी शक्तिशाली योग तपस्या द्वारा समाप्ति के समय को समीप लाने के पुरुषार्थ में तत्पर होंगे। बाबा कहते बच्चे, जब मैंपन की पूंछ को जलाकर बाप समान सम्पन्न और सम्पूर्ण बनेंगे तब अन्तिम समय समीप आयेगा। समय प्रमाण हर बच्चे को अपने तीव्र पुरुषार्थ से श्रेष्ठ प्रालब्ध का खाता, स्वयं और सर्व की सन्तुष्टता द्वारा दुआओं का खाता और मन्सा-वाचा-कर्मणा नि:स्वार्थ सेवा द्वारा पुण्य का खाता जमा करना है। यह सभी खाते जमा करने के लिए सिर्फ तीन बिन्दियों का तिलक लगाना है। खजाने जमा करने की चाबी है - निमित्त भाव, निर्मान भाव और नि:स्वार्थ भाव। एक “पास'' शब्द की भी बार-बार स्मृति रहे तो पास विद आनर बन जायेंगे। एक तो जो कुछ पास हो गया, उसे पास कर दो अर्थात् बीती को बीती कर दो। दूसरा - जो भी बातें आती हैं उनमें पास होकर सदा बाबा के पास रहो और तीसरा - हर पेपर में पास होकर पास विद आनर बन जाओ। तो ऐसी मीठी-मीठी शिक्षाओं भरी मुरली सुनते, स्वयं में समाते अब बाबा के समान बनना ही है, इसी लक्ष्य प्रमाण लक्षण धारण करने हैं।
जैसे साकार में ब्रह्मा बाबा बहुत गुप्त रूप में अशरीरी बनने का पुरुषार्थ करते रहे, जिससे वे कर्मेन्द्रिय जीत विकर्माजीत वा कर्मातीत बनें। साकार बाबा के वह अनुभव मुरलियों द्वारा हम सभी सुनते हैं कि बच्चे एक घण्टा भी अशरीरी बन जाओ तो तुम्हारे सब विकर्म विनाश हो जायेंगे, आत्मा पावन बन जायेगी, इसके लिए अपने स्व-स्वरूप और स्वधर्म में स्थित रहने का अभ्यास करो। तो जरूर समय निकाल सभी को अभी ऐसी एकान्त की तपस्या करके देह अभिमान को जड़ से खत्म कर देही अभिमानी बनना है। अब इसी पुरुषार्थ की विशेष आवश्यकता है।
बाकी आप सभी सेवाओं के साथ स्व स्थिति पर भी विशेष अटेन्शन रख ऐसी तपस्या करते होंगे। बापदादा के मधुबन बेहद घर में देश विदेश के हजारों बाबा के बच्चे यहाँ के शान्त पवित्र शक्तिशाली वातावरण के साथ अव्यक्ति मिलन की अनुभूतियों द्वारा स्वयं को भरपूर करके जाते हैं। अभी कर्नाटक के भाई बहिनों का टर्न है, सभी तरफ से काफी संख्या में भाई बहिनें पहुंचे हुए हैं। डबल विदेशी भाई बहिनें ज्ञान सरोवर और पाण्डव भवन में अनुभवों की क्लासेज़ के साथ अच्छी तपस्या कर रहे हैं। अच्छा - सभी को बहुत-बहुत याद.. ओम् शान्ति।
---
15-11-25 ओम शान्ति “अव्यक्त-बापदादा'' रिवाइज-वीडियो 30-11-06 मधुबन
आज अखुट अविनाशी खजानों के मालिक बापदादा अपने चारों ओर के सम्पन्न बच्चों के जमा का खाता देख रहे हैं। तीन प्रकार के खाते देख रहे हैं - एक है अपने पुरुषार्थ द्वारा श्रेष्ठ प्रालब्ध जमा का खाता। दूसरा है सदा सन्तुष्ट रहना और सन्तुष्ट करना, यह सन्तुष्टता द्वारा दुवाओं का खाता। तीसरा है मन्सा-वाचा-कर्मणा, सम्बन्ध-सम्पर्क द्वारा बेहद के नि:स्वार्थ सेवा द्वारा पुण्य का खाता। आप सभी भी अपने इन तीन खातों को चेक करते ही हो, यह तीनों खाते जमा कितने हैं, हैं वा नहीं हैं उसकी निशानी हैं - सदा सर्व प्रति, स्वयं प्रति सन्तुष्टता स्वरूप, सर्व प्रति शुभ भावना, शुभ कामना और सदा अपने को खुशनुम:, खुशनसीब स्थिति में अनुभव करना। तो चेक करो दोनों खाते की निशानियां स्वयं में अनुभव होती हैं? इन सर्व खजानों को जमा करने की चाबी है - निमित्त भाव, निर्माण भाव, नि:स्वार्थ भाव। चेक करते जाओ और चाबी का नम्बर पता है! चाबी का नम्बर है - तीन बिन्दी। थ्री डॉट। एक - आत्मा बिन्दी, दूसरा - बाप बिन्दी, तीसरा - ड्रामा का फुल स्टाप बिन्दी। आप सभी के पास चाबी तो है ना! खजाने को खोलकर देखते रहते हो ना! इन सभी खजानों के वृद्धि की विधि है - दृढ़ता। दृढ़ता होगी तो किसी भी कार्य में यह संकल्प नहीं चलेगा कि होगा या नहीं होगा। दृढ़ता की स्थिति है - हुआ ही पड़ा है, बना ही पड़ा है। बनेगा, जमा होगा, नहीं होगा, नहीं। करते तो हैं, होना तो चाहिए,... तो तो भी नहीं। दृढ़ता वाला निश्चयबुद्धि, निश्चिंत और निश्चित अनुभव करेगा।
बापदादा ने पहले भी सुनाया है - अगर ज्यादा से ज्यादा सर्व खजाने का खाता जमा करना है तो मनमनाभव के मंत्र को यंत्र बना दो। जिससे सदा बाप के साथ और पास रहने का स्वत: अनुभव होगा। पास होना ही है, तीन रूप के पास हैं - एक है पास रहना, दूसरा है जो बीता सो पास हुआ और तीसरा है पास विद ऑनर होना। अगर तीनों पास हैं, तो आप सबको राज्य अधिकारी बनने की फुल पास है। तो फुल पास ले ली है वा लेनी है? जिन्होंने फुल पास ले ली है वह हाथ उठाओ। लेनी नहीं है, ले ली है? पहली लाइन वाले नहीं उठाते, लेनी है आपको? सोचते हैं अभी सम्पूर्ण नहीं बने हैं, इसीलिए। लेकिन निश्चयबुद्धि विजयी हैं ही, या होना है? अभी तो समय की पुकार, भक्तों की पुकार, अपने मन की आवाज क्या आ रही है? अभी-अभी सम्पन्न और समान बनना ही है वा यह सोचते हैं बनेंगे, सोचेंगे, करेंगे...! अब समय के अनुसार हर समय एवररेडी का पाठ पक्का रहना ही है। जब मेरा बाबा कहा, प्यारा बाबा, मीठा बाबा मानते ही हैं। तो जो प्यारा होता है उसके समान बनना मुश्किल नहीं होता।
बापदादा ने देखा है कि समय प्रति समय समान बनने में जो विघ्न पड़ता है वह सबके पास प्रसिद्ध शब्द है, सब जानते हैं, अनुभवी हैं। वह है “मैं'', मैंपन। इसलिए बापदादा ने पहले भी कहा है जब भी मैं शब्द बोलते हो तो सिर्फ मैं नहीं बोलो, मैं आत्मा। जुड़वा शब्द बोलो। तो मैं कभी अभिमान ले आता, बॉडी कान्सेस वाला मैं, आत्मा वाला नहीं। कभी अभिमान भी लाता, कभी अपमान भी लाता है। कभी दिलशिकस्त भी बनाता। इसलिए इस बॉडी कान्सेस के मैंपन को स्वप्न में भी नहीं आने दो।
बापदादा ने देखा है स्नेह की सब्जेक्ट में मैजॉरिटी पास हैं। आप सभी को किसने यहाँ लाया? सभी चाहे प्लेन में आये हो, चाहे ट्रेन में, चाहे बस में आये हो, लेकिन वास्तव में बापदादा के स्नेह के विमान में यहाँ पहुंचे हो। तो जैसे स्नेह की सबजेक्ट में पास हैं, अब यह कमाल करो - समान बनने की सबजेक्ट में भी पास विद आनर बनके दिखाओ। पसन्द है? समान बनना पसन्द है? पसन्द है लेकिन बनने में थोड़ा मुश्किल है! समान बन जाओ तो समाप्ति सामने आयेगी। लेकिन कभी-कभी जो दिल में प्रतिज्ञा करते हो, बनना ही है। तो प्रतिज्ञा कमजोर हो जाती और परीक्षा मजबूत हो जाती है। चाहते सभी हैं लेकिन चाहना एक होती है प्रैक्टिकल दूसरा हो जाता है क्योंकि प्रतिज्ञा करते हो लेकिन दृढ़ता की कमी पड़ जाती है। समानता दूर हो जाती है, समस्या प्रबल हो जाती है। तो अब क्या करेंगे?
बापदादा को एक बात पर बहुत हंसी आ रही है। कौन सी बात? हैं महावीर लेकिन जैसे शास्त्रों में हनुमान को महावीर भी कहा है लेकिन पूंछ भी दिखाया है। यह पूंछ दिखाया है मैंपन का। जब तक महावीर इस पूंछ को नहीं जलायेंगे तो लंका अर्थात् पुरानी दुनिया भी समाप्त नहीं होगी। तो अभी इस मैं, मैं की पूंछ को जलाओ तब समाप्ति समीप आयेगी। जलाने के लिए ज्वालामुखी तपस्या, साधारण याद नहीं। ज्वालामुखी याद की आवश्यकता है। इसीलिए ज्वाला देवी की भी यादगार है। शक्तिशाली याद। तो सुना क्या करना है? अब यह मन में धुन लगी हुई हो - समान बनना ही है, समाप्ति को समीप लाना ही है। आप कहेंगे संगमयुग तो बहुत अच्छा है ना तो समाप्ति क्यों हो? लेकिन आप बाप समान दयालु, कृपालु, रहमदिल आत्मायें हो, तो आज की दु:खी आत्मायें और भक्त आत्माओं के ऊपर हे रहमदिल आत्मायें रहम करो। मर्सीफुल बनो। दु:ख बढ़ता जा रहा है, दु:खियों पर रहम कर उन्हों को मुक्तिधाम में तो भेजो। सिर्फ वाणी की सेवा नहीं लेकिन अभी आवश्यकता है मन्सा और वाणी की सेवा साथ-साथ हो। एक ही समय पर दोनों सेवा साथ हो। सिर्फ चांस मिले सेवा का, यह नहीं सोचो, चलते फिरते अपने चेहरे और चलन द्वारा बाप का परिचय देते हुए चलो। आपका चेहरा बाप का परिचय दे। आपकी चलन बाप को प्रत्यक्ष करती चले। तो ऐसे सदा सेवाधारी भव! अच्छा।
बापदादा के सामने स्थूल में तो आप सभी बैठे हो लेकिन सूक्ष्म स्वरूप से चारों ओर के बच्चे दिल में हैं। देख भी रहे हैं, सुन भी रहे हैं। देश विदेश के अनेक बच्चों ने ईमेल द्वारा, पत्रों द्वारा, सन्देशों द्वारा यादप्यार भेजी है। सभी की नाम सहित बापदादा को याद मिली है और बापदादा दिल ही दिल में सभी बच्चों को सामने देख गीत गा रहे हैं - वाह बच्चे वाह! हर एक को इस समय इमर्ज रूप में याद रहती है। सब सन्देशी को अलग-अलग कहते हैं फलाने ने याद भेजी है, फलाने ने याद भेजी है। बाप कहते हैं, बाप के पास तो जब संकल्प करते हो, साधन द्वारा पीछे मिलती है लेकिन स्नेह का संकल्प साधन से पहले पहुंच जाता है। ठीक है ना! कईयों को याद मिली है ना! अच्छा।
सेवा का टर्न कर्नाटक ज़ोन का है:- अच्छा चांस लिया है, बापदादा सदा कहते हैं, हिम्मत रखने वालों को बापदादा पदमगुणा मदद देता है। तो हिम्मत रखी है ना! अच्छा किया है। कभी भी कोई माया का संकल्प भी आवे तो मन के विमान से शान्तिवन में पहुंच जाना। मन का विमान तो है ना! सभी के पास मन का विमान है। बापदादा ने हर ब्राह्मण को जन्म की सौगात श्रेष्ठ मन का विमान दे दिया है। इस विमान में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती। स्टार्ट करना है तो मेरा बाबा, बस। चलाना आता है ना विमान! तो जब भी कुछ हो मधुबन में पहुंच जाओ। भक्ति मार्ग में चार धाम करने वाले अपने को बहुत भाग्यवान समझते हैं और मधुबन में भी चार धाम हैं, तो चार धाम किये? पाण्डव भवन में देखो, चार धाम हैं। जो भी आते हो पाण्डव भवन तो जाते हो ना, एक शान्ति स्तम्भ महाधाम। दूसरा बापदादा का कमरा, यह स्नेह का धाम। और तीसरा झोपड़ी, यह स्नेहमिलन का धाम और चौथा - हिस्ट्री हाल, तो आप सभी ने चार धाम किये? तो महान भाग्यवान तो हो ही गये। अभी किसी भी धाम को याद कर लेना, कब उदास हो जाओ तो झोपड़ी में रूहरिहान करने आ जाना। शक्तिशाली बनने की आवश्यकता हो तो शान्ति स्तम्भ में पहुंच जाना और वेस्ट थॉट्स बहुत तेज हो, बहुत फास्ट हों तो हिस्ट्री हाल में पहुंच जाना। समान बनने का दृढ़ संकल्प उत्पन्न हो तो बापदादा के कमरे में आ जाना। अच्छा है, सभी ने गोल्डन चांस लिया है लेकिन वहाँ रहते भी सदा गोल्डन चांस लेते रहना। अच्छा। हिम्मतवान अच्छे हैं।
डबल विदेशी भाई बहिनें:- अच्छा है हर टर्न में डबल विदेशियों का आना इस संगठन को चार चांद लगा देता है। बापदादा ने देखो कहाँ कोने-कोने से अपने बच्चों को ढूंढ लिया ना! बहुत अच्छा है, कहलाने में डबल विदेशी हैं, वैसे तो ओरीज्नल भारत के हैं। और राज्य भी कहाँ करना है? भारत में करना है ना! लेकिन सेवा अर्थ पांच ही खण्डों में पहुंच गये हो। और पांच ही खण्डों में भिन्न-भिन्न स्थान में सेवा भी अच्छी उमंग-उत्साह से कर रहे हैं। विघ्न विनाशक हो ना! कोई भी विघ्न आवे घबराने वाले तो नहीं हो ना, यह क्यों हो रहा है, यह क्या हो रहा है, नहीं। जो होता है उसमें हमारी और हिम्मत बढ़ाने का साधन है। घबराने का नहीं, उमंग-उत्साह बढ़ाने का साधन है। ऐसे पक्के हो ना! पक्के हो? या थोड़ा-थोड़ा कच्चे? नहीं, कच्चा शब्द अच्छा नहीं लगता। पक्के हैं, पक्के रहेंगे, पक्के होके साथ चलेंगे। अच्छा।
अच्छा - अभी क्या दृढ़ संकल्प कर रहे हो? अभी इसी संकल्प में बैठो कि सफलता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है। विजय हमारे गले की माला है। इस निश्चय और रूहानी नशे में अनुभवी स्वरूप होके बैठो।
अच्छा। चारों ओर के फिकर से फारिग बेफिक्र बादशाहों को, सदा बेगमपुर के बादशाह स्वरूप में स्थित रहने वाले बच्चों को, सर्व खजानों से सम्पन्न रिचेस्ट इन दी वर्ल्ड सर्व बच्चों को, सदा उमंग-उत्साह के पंखों से उड़ती कला वाले बच्चों को, सदा समाप्ति को समीप लाने वाले बापदादा समान बच्चों को बापदादा का यादप्यार, दिल की दुवायें, वरदाता के वरदान और नमस्ते।