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30 Nov 2025
"अभी अपने चलन और चेहरे द्वारा ब्रह्मा बाप समान अव्यक्त रूप दिखाओ, साक्षात्कार मूर्त बनो"
30 November 2025 · हिंदी
प्राणेश्वर प्यारे अव्यक्त बापदादा के अति लाडले, भाग्यविधाता बाप द्वारा डायरेक्ट दिव्य जन्म प्राप्त करने वाली सर्व प्राप्ति सम्पन्न भाग्यवान आत्मायें, ड्रामा की हर सीन को साक्षी हो देखने वाले, सदा बेफिक्र बादशाह, निमित्त टीचर्स बहिनें तथा देश विदेश के सर्व ब्राह्मण कुल भूषण भाई बहिनें, ईश्वरीय स्नेह सम्पन्न मधुर याद स्वीकार करना जी।
बाद समाचार - आप सभी अपनी दिव्य जीवन द्वारा सर्व आत्माओं को अपने श्रेष्ठ भाग्य का दर्शन कराते, अपनी चलन और चेहरे से बाप के अव्यक्ति रूप को प्रत्यक्ष करने की सेवा कर ही रहे हो। चारों ओर बहुत अच्छी सेवायें चल रही हैं। बाबा कहते बच्चे, अभी समय आप सभी बच्चों का आह्वान कर रहा है। अब साक्षात्कार मूर्त बनो, अपनी खुशनुमा: सर्व प्राप्ति सम्पन्न जीवन से बापदादा का नाम रोशन करो। कोई भी सीन अगर परीक्षा बनकर आती है, तो उस पेपर में घबराने के बजाए साक्षीदृष्टा बन उसे पपेट शो व कार्टून शो के रूप में देखो और सदा हर्षित रहो। आप बच्चों के चेहरे पर कभी व्यर्थ चिंत आयेगा। अभी तो चारों ओर माया व प्रकृति अपना नया-नया रूप दिखा रही है, उसके भिन्न-भिन्न रूपों को देखते घबराने के बजाए परिपक्व व अनुभवी बनते आगे बढ़ते चलो।
देखो, कैसे मीठा बाबा अपने बच्चों को हर प्रकार से शक्ति सम्पन्न बनाते, अव्यक्ति पालना दे रहे हैं। सूक्ष्मवतन से भी बाबा की बेहद दृष्टि सभी बच्चों पर रहती है। अभी तो बाबा चाहते हैं मेरे बच्चे, अचानक के पहले एवररेडी रहे। सम्पन्न बनें, साथ चलें और ब्रह्मा बाप के साथ अपने नये राज्य सतयुग में आयें।
बोलो, आप सभी इसकी पूरी तैयारी कर रहे हो ना। देखा जाता अभी पुराने शरीरों के हिसाब-किताब भी बहुत फास्ट रूप में सबके सामने आ रहे हैं। तो बाबा की याद में रह, सर्व की दुआओं से ऐसे पेपर्स को पार कर पास विद आनर बनना ही है।
बाकी इस बार ईस्टर्न ज़ोन, बंगाल, बिहार, उड़ीसा, आसाम और नेपाल के भाई बहिनें बाबा के घर में काफी संख्या में पहुंचे हुए हैं। डबल विदेशी बाबा के बच्चे भी हर टर्न में पहुंच जाते हैं। चारों ओर बहुत अच्छी रिमझिम लगी हुई है।
अच्छा - सभी को बहुत-बहुत याद...ओम् शान्ति।
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30-11-25 ओम् शान्ति “अव्यक्त-बापदादा'' रिवाइज-वीडियो 30-11-2004 मधुबन
आज भाग्य विधाता बाप अपने चारों ओर के श्रेष्ठ भाग्यवान बच्चों को देख हर्षित हो रहे हैं। सारे कल्प में ऐसा श्रेष्ठ भाग्य किसी का भी हो नहीं सकता। कल्प-कल्प के आप बच्चे ही इस भाग्य का अधिकार प्राप्त करते हो। याद है - अपना कल्प-कल्प के अधिकार का भाग्य? यह भाग्य सर्व श्रेष्ठ भाग्य क्यों है? क्योंकि स्वयं भाग्य विधाता ने इस श्रेष्ठ भाग्य का दिव्य जन्म आप बच्चों को दिया है, जिसका जन्म ही भाग्य विधाता द्वारा है, उससे श्रेष्ठ भाग्य और हो ही नहीं सकता। अपने भाग्य का नशा स्मृति में रहता है? अपने भाग्य की लिस्ट निकालो तो कितनी बड़ी लिस्ट है? अप्राप्त कोई वस्तु दिल क्या गीत गाती? वाह भाग्य विधाता! और वाह मेरा भाग्य! इस श्रेष्ठ भाग्य की विशेषता यही है - एक भगवान द्वारा तीन सम्बन्ध की प्राप्ति है। एक द्वारा एक में तीन सम्बन्ध, जो जीवन में विशेष सम्बन्ध गाये हुए हैं - बाप, शिक्षक, सतगुरू, किसी को भी एक द्वारा तीन विशेष सम्बन्ध और प्राप्ति नहीं है। आप फलक से कहते हो हमारा बाप भी है, शिक्षक भी है तो सतगुरू भी है। बाप द्वारा सर्व खजानों की खान प्राप्त है। खज़ानों की लिस्ट भी स्मृति में आई! स्मृति में लाओ क्या-क्या खजाना बाप द्वारा मिल गया! मिल गया है या मिलना है? क्या कहेंगे? बालक सो मालिक हैं ही। शिक्षक द्वारा शि। वर्तमान स्वराज्य अधिकारी और भविष्य में अनेक जन्म राज्य पद अधिकारी। पढ़ाई एक जन्म की, वह भी छोटा सा जन्म और पद की प्राप्ति अनेक जन्म, और राज्य भी अखण्ड, अटल, निर्विघ्न राज्य। अभी भी स्वराज्य अधिकारी बेफिकर बादशाह हो, हैं? बेफिकर बादशाह बने हो? जो बेफिकर हैं वह हाथ उठाओ। बेफिकर, थोड़ा भी फिकर नहीं है? देखना, जब कोई पपेट शो सामने आता है फिर फिकर होता है? माया का पपेट शो सामने आता है या नहीं? फिर थोड़ा-थोड़ा फिकर होता है? नहीं होता? थोड़ा चिंता, चिंतन चलता है या नहीं चलता है? वैसे श्रेष्ठ भाग्य अभी से बेफिकर बादशाह बनाता है। यह थोड़ी बहुत जो बातें आ
वह और ही आगे के लिए अनुभवी, परिपक्व बनाने वाली हैं।
अभी तो सभी इन भिन्न-भिन्न बातों के अनुभवी हो गये हो ना! घबराते तो नहीं हैं ना? आराम से साक्षी की सीट पर बैठ यह पपेट शो देखो, कार्टून शो देखो। है कुछ भी नहीं, कार्टून है। अभी तो मजबूत हो गये हो ना! अभी मजबूत हैं? या कभी-कभी घबराते हो? यह कागज का शेर बनकर आते हैं। है कागज का लेकिन शेर बनके आते हैं। अभी समय प्रमाण अनुभवी मूर्त बन समय को, प्रकृति को, माया को चैलेन्ज करो - आओ, हम विजयी हैं। विजयी की चैलेन्ज करो।
बापदादा के पास दो ग्रुप बार-बार आते हैं, किसलिए आते हैं? दोनों ग्रुप बापदादा को कहते हैं - हम तैयार हैं। एक यह समय, प्रकृति और माया। माया समझ गई है अब हमारा राज्य जाने वाला है। और दूसरा ग्रुप है - एडवांस पार्टी। दोनों ग्रुप डेट पूछ रहे हैं। फॉरेन में तो एक साल पहले डेट फिक्स करते हो ना? और यहाँ 6 मास पहले? भारत में फास्ट जाते हैं, 15 दिन में भी कोई प्रोग्राम की डेट हो जाती है। तो समाप्ति, सम्पन्नता, बाप के समान बनने की डेट कौन सी है? वह बापदादा से पूछते हैं। यह डेट अभी आप ब्राह्मणों को फिक्स करनी है। हो सकती है? डेट फिक्स हो सकती है? पाण्डव बोलोती है? कि अचानक होनी है? ड्रामा में फिक्स है लेकिन उसको प्रैक्टिकल में लाना है या नहीं? वह क्या? बताओ। होनी है? अचानक होगा? डेट फिक्स नहीं होगी? होगी? पहली लाइन वाले बताओ होगी? जो कहते हैं ड्रामा को प्रैक्टिकल में लाने के लिए मन में डेट का संकल्प करना पड़ेगा, वह हाथ उठाओ। करना पड़ेगा? यह नहीं उठा रहे हैं? अचानक होगी? डेट फिक्स कर सकते हैं? पीछे वालों ने समझ लिया? अचानक होना है यह राइट है लेकिन अपने को तैयार करने के लिए लक्ष्य जरूर रखना पड़ेगा। बिना लक्ष्य के सम्पन्न बनने में अलबेलापन आ जाता है। आप देखो जब डेट फिक्स करते हो तभी सफलता मिलती है। कोई भी प्रहो? पहली लाइन वाले बताओ। प्रेम (देहरादून) सुनाओ। करना पड़ेगा, करना पड़ेगा? जयन्ती बोलो, करना पड़ेगा। वह कब होगी? अन्त में होगी जब समय आ जायेगा! समय सम्पन्न बनायेगा या आप समय को समीप लायेंगे?
बापदादा ने देखा है कि स्मृति में ज्ञान भी रहता है, नशा भी रहता है, निश्चय भी रहता है, लेकिन अभी एडीशन चाहिए - चलन और चेहरे से दिखाई दे। बुद्धि में याद सब रहता है, स्मृति में भी आता है लेकिन अब स्वरूप में आवे। जब साधारण रूप में भी अगर कोई बड़े आक्यूपेशन वाला है या कोई साहूकार का बच्चा एज्यूकेटेड है तो उसकी चलन से दिखाई पड़ता है कि यह कुछ है। उनका कुछ न कुछ न्यारापन दिखाई देता है। तो इतना बड़ा भाग्य, वर्सा भी है, पढ़ाई और पद भी है। स्वराज्य तो अभी भी है ना! प्राप्तियां भी सब हैं, लेकिन चलन और चेहरे से भाग्य का सितारा मस्तक में चमकता हुआ दिखाई दे, वमारे इष्ट देव हैं, इष्ट देवियां हैं। यह हमारे हैं। जैसे ब्रह्मा बाप में देखा - साधारण तन में होते भी आदि के समय भी ब्रह्मा बाप में क्या दिखाई देता था, कृष्ण दिखाई देता था ना! आदि वालों को अनुभव है ना! तो जैसे आदि में ब्रह्मा बाप द्वारा कृष्ण दिखाई देता था ऐसे लास्ट में क्या दिखाई देता था? अव्यक्त रूप दिखाई देता था ना! चलन में, चेहरे में दिखाई दिया ना! अभी बापदादा विशेष निमित्त बच्चों को यह होम वर्क दे रहा है कि अभी ब्रह्मा बाप समान अव्यक्त रूप दिखाई दे। चलन और चेहरे से कम से कम 108 माला के दाने तो दिखाई देवें। बापदादा नाम नहीं चाहते हैं, नाम नहीं बताते हैं - 108 कछा कितना समय चाहिए? ऐसे नहीं समझना कि जो पीछे आये हैं, टाइम की बात नहीं है, कोई समझे हमको तो थोड़ा वर्ष ही हुआ है। कोई भी लास्ट सो फास्ट और फास्ट सो फर्स्ट जा सकता है, यह भी बापदादा की चैलेन्ज है, कर सकते हो। कोई भी कर सकते हो। लास्ट वाला भी हो सकता है। सिर्फ लक्ष्य पक्का रखो - करना ही है, होना ही है।
डबल फारेनर्स , डबल फॉरेनर्स क्या करेंगे? डबल चांस लेंगे ना। बापदादा नाम नहीं एनाउन्स करेगा लेकिन उनका चेहरा बतायेगा - यह हैं। हिम्मत है? पहली लाइन को बापदादा देख रहा है। है, हिम्मत है? अगर हिम्मत है तो हाथ उठाओ। हिम्मत है तो? पीछे वाले भी उठा सकते हैं। जो ओटे सो अर्जुन। अच्छा - बापदादा रिजल्ट देखने के लिए, क्या-क्या पुरुषार्थ कर रहे हैं, कौन-कौन कर रहा है वह रिजल्ट देखने के लिए 6 मास दे रहे हैं। 6 मास रिजल्ट देखेंगे फिर फाइनल करेंगे। ठीक है? क्योंकि देखा जाता है कि अभी समय की रफ्तार तेज जा रही है, रचना को तेज नहीं जाना चाहिए, रचता को तेज होना च ना! और कौन होगा! बापदादा खुश होते हैं। लेकिन अब लोग (आत्मायें) जो हैं ना, वह कुछ देखने चाहते हैं। बापदादा को याद है जब आदि में आप बच्चे सेवा में निकले थे तो बच्चों से भी साक्षात्कार होते थे, अभी सेवा और स्वरूप दोनों तरफ अटेन्शन चाहिए। तो क्या सुना! अब साक्षात्कार मूर्त बनो। साक्षात ब्रह्मा बाप बनो। अच्छा।
सेवा का टर्न ईस्टर्न ज़ोन का है:- यह भी विधि अच्छी बनाई है, हर ज़ोन को चांस मिल जाता है। एक तो यज्ञ सेवा द्वारा एक-एक कदम में पदमगुणा कमाई जमा हो जाती है क्योंकि मैजॉरिटी कोई भी कर्म करते यज्ञ सेवा याद रहती और यज्ञ सेवा याद आने से यज्ञ रचता बाप तो याद आता ही है। तो सेवा में भी ज्यादा से ज्यादा पुण्य का खाता जमा कर लेते हैं और जो सच्चे पुरुषार्थी बच्चे हैं वह अपने याद के चार्ट को सहज और निरन्तर बना सकते हैं क्योंकि यहाँ एक तो महारथियों का संग है, संग का रंग सहज लग सकता है। अटेन्शन है तो यह जो 8-10 दिन मिलते हैं इसमें बहुत अच्छी प्रोग्का खाता जमा करने का, और बड़े ते बड़े परिवार के नशे में, खुशी में रहने का। चांस मिला है, हर ज़ोन को मिलता है लेकिन लक्ष्य रखो कि तीनों ही फायदे हुए! कितना पुण्य का खाता जमा किया? सहज याद की प्रोग्रेस कितनी की? और संगठन या परिवार के स्नेह, समीपता का कितना अनुभव किया? यह तीन ही बातों का रिजल्ट हर एक को अपना निकालना चाहिए। ड्रामा में चांस तो मिलता है लेकिन चांस लेने वाले चांसलर बनो। अच्छा है, संगठन अच्छा है।
अच्छा - बापदादा चारों ओर के साकार सम्मुख बैठे हुए बच्चों को और अपने-अपने स्थान पर, देश में बाप से मिलन मनाने वाले चारों ओर के बच्चों को बहुत-बहुत सेवा की, स्नेह की और पुरुषार्थ की मुबारक तो दे रहे हैं लेकिन पुरुषार्थ में तीव्र पुरुषार्थी बन अब आत्माओं को दु:ख अशान्ति से छुड़ाने का और तीव्र पुरुषार्थ करो। दु:ख, अशान्ति, भ्रष्टाचार अति में जा रहा है, अभी अति का अन्त कर सभी को मुक्तिधाम का वर्सा बाप से दिलाओ। ऐसे सदा दृढ़ संकल्प वाले बच्चों को यादप्यार और नमस्ते। ओम् शान्ति।