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25 Feb 2025
“घर का गेट खोलने के लिए बेहद की वैराग्य वृत्ति द्वारा देह-अभिमान के मैं का त्याग कर�, बर्थ डे पर दृढ़ता द्वारा कहना और करना एक कर सफलतामूर्त बनो''
25 February 2025 · हिंदी
मधुबन अव्यक्त बापदादा ओम् शान्ति 19-02-2012
परमप्यारे शिवभोलानाथ बाप के अति प्रिय, दिलाराम बापदादा के दिल के राइट हैण्डस निमित्त टीचर्स बहिनें तथा सभी अलौकिक जन्मधारी ब्राह्मण कुल भूषण भाई बहिनें, ईश्वरीय स्नेह सम्पन्न मधुर याद के साथ महाशिवरात्रि के पावन पर्व की कोटि कोटि बधाईयां स्वीकार हों।
बाद समाचार - आप सभी त्रिमूर्ति शिव जयन्ती के यादगार पर्व को खूब धूमधाम से मना रहे हो। अनेकानेक कार्यक्रमों से भक्तों को शिव अवतरण का दिव्य सन्देश मिल रहा है। चारों ओर सेवाओं की धूम है। बापदादा अपने राइट हैण्ड सेवाधारी बच्चों को दिल से दुआयें देते हुए बोले, मेरे कोहनूर हीरे से भी ज्यादा मूल्यवान प्रभू नूर बच्चों को विशेष यादप्यार और मुबारक स्वीकार हो। बापदादा अपने पूर्वज और पूज्य बच्चों को इसी स्वमान की स्मृति दिलाते हुए सबको मास्टर दाता बनकर कुछ न कुछ देने की प्रेरणा देते हैं। बाबा कहे बच्चे, आपका चेहरा सदा मुस्कराता हुआ हो। कभी भी सीरियस चेहरा न हो। सदा खुशनुमा मुस्कराते चेहरे से सबको दिलखुश मिठाई खिलाते चलो।
बापदादा अपने भक्त बच्चों को भी विशेष याद कर, उनकी भी दिल से महिमा करते हैं, कैसे यादगार पर्व को कापी किया है। व्रत भी रखते हैं, जागरण भी करते हैं। आप बच्चों ने अपने सूक्ष्म मैं पन और मेरेपन का त्याग किया है तो वह फिर में में करने वाले बकरे की बलि चढ़ा देते हैं।
आज तो बापदादा ने हम सभी बच्चों का विशेष ध्यान बेहद की वैराग्य वृत्ति पर खिंचवाया है। बाबा कहते बच्चे, इस बर्थ डे पर दृढ़ता द्वारा कहने और करने को समान बनाकर सफलतामूर्त बनो। अभी हर एक के अन्दर यही शुभ संकल्प आना चाहिए कि जल्दी से जल्दी परमात्म प्रत्यक्षता के नगाड़े बजें और हम सब सम्पन्न बन बापदादा के साथ अपने घर चलें फिर अपनी नई राजधानी में नया पार्ट बजाने आयें। इसके लिए जैसे सेवाओं की धूम मचाई है, ऐसे अटेन्शन रख अपना एक एक संकल्प और संगम का अमूल्य समय सफल कर सम्पन्न और सम्पूर्ण बनना है। अभी कुछ भी व्यर्थ न जाये।
देखो, बापदादा के इस मंगल मिलन कार्यक्रम में राजस्थान और तामिलनाडु के भाई बहिनों को सेवा का टर्न मिला है। साथ-साथ अनेक देशों से डबल विदेशी बाबा के बच्चे भी पहुंचे हुए हैं। सभी ने 8-10 दिन बहुत अच्छी तपस्या की और भविष्य सेवाओं की योजना भी तैयार की है। सभी बाबा के बेहद घर में खूब रिफ्रेश हो रहे हैं। अच्छा - सभी को बहुत-बहुत याद... ओम् शान्ति।
25-2-25 ओम् शान्ति “अव्यक्त-बापदादा'' रिवाइज-वीडियो 19-02-12 मधुबन
आज बापदादा चारों ओर के बच्चों को देख हर्षित हो रहे हैं। चारों ओर से यही दिल का आवाज आ रहा है वाह बाबा वाह! और बाप की दिल से यही आवाज है वाह बच्चे वाह! आज सभी उमंग-उत्साह से दिव्य जन्म की खुशी मना रहे हैं। आज खुशी मना भी रहे हैं और साथ में बाप भी बच्चों की खुशी मना रहे हैं। आज का ही यह विचित्र जयन्ती का दिन है जो बाप और बच्चों का इकट्ठा दिव्य जन्म का दिन है। तो आप सभी भी मुबारक दे भी रहे हो और ले भी रहे हो क्योंकि बाप ने जन्म लिया ही है यज्ञ रचने के लिए। तो यज्ञ में ब्राह्मण बच्चे ही चाहिए। तो यह एक ही जयन्ती है जो बाप और बच्चों की इकट्ठी जयन्ती है इसीलिए इस शिव जयन्ती को हीरे तुल्य जयन्ती कहा जाता है। तो बाप देख रहे हैं कि एक-एक बच्चा कितने स्नेह से मुबारक देने आये हैं और बाप भी मुबारक देने आये हैं। यह जयन्ती अति स्नेह की जयन्ती है। स्नेही बच्चे, स्नेही बाप और स्नेही जयन्ती है।
बापदादा के पास चारों ओर के देश विदेश सब बच्चों का स्नेह पहुंच रहा है। बाप एक-एक स्नेही बच्चे को पदमगुणा स्नेह भरी मुबारक दे रहे हैं। बापदादा को आज आपके भक्त भी विशेष याद आ रहे हैं क्योंकि आपके भक्तों ने जो आपने किया है वह कॉपी बहुत अच्छी की है क्योंकि द्वापर में परमधाम से पहले-पहले आये हैं तो पहला जन्म सदा सतोप्रधान होता है इसलिए उन्होंने कॉपी बहुत अच्छी की है। तो आज के दिन बच्चों के साथ आपके भक्त भी याद आ रहे हैं। वतन में तो आज अमृतवेले से बहुत बच्चों की रौनक थी। हर बच्चा समझता था कि मैं बापदादा को अपनी मुबारक दूं और बापदादा ने भी हर बच्चे की मुबारक अति स्नेह से स्वीकार की। तो वतन में आज यह मेला लगा हुआ था। एक तरफ आप बच्चे थे, दूसरी तरफ एडवांस में गये हुए आपके साथी साथ में आये हुए थे। बापदादा ने देखा कि आपकी दादियां और अनन्य भाईयों की लिस्ट बहुत बड़ी थी। एक-एक दादियाँ बापदादा को भी मुबारक दे रहे थे लेकिन साथ में आप सब भाग्यवान बच्चों को भी मुबारक दे रहे थे। तो वतन में आज मुबारकों का मेला था। सभी एडवांस पार्टी की विशेष दादियाँ और भाई आप विशेष निमित्त साथ रहने वाली आत्माओं को याद करते हुए बहुत दिल से मुबारक दे रहे थे। तो आप सबको बापदादा सबकी तरफ से भी मुबारकें दे रहे हैं। स्वीकार किया?
सभी का विशेष बहिनें और भाईयों का एक ही आवाज था कि अभी घर का गेट कब खोलेंगे! तो विशेष दीदी दादी कह रही थी कि हमारी सखियों को, भाईयों को हमारे तरफ से यही कहना कि घर चलने के लिए कौन सी तारीख फिक्स की है? सब इकट्ठे चलेंगे ना! अलग-अलग तो नहीं जायेंगे? दरवाजा खोलने के लिए सभी इकट्ठे हाज़िर हो जायेंगे। तो वह डेट मांग रहे थे। बापदादा मुस्कराये क्योंकि बाप भी चाहते हैं कि अभी गेट को खोलने के लिए सभी बच्चों की बेहद की वैराग्य वृत्ति चाहिए, यही चाबी है गेट खोलने की। बापदादा तो सदा कहते रहते हैं कि बेहद के वैरागी बन वेस्ट संकल्प और वेस्ट समय दोनों को जल्दी से जल्दी त्याग करना अर्थात् बेहद के वैरागी बनना क्योंकि बापदादा ने देखा है कि सबसे बड़ा विघ्न देह अभिमान है। इस देह-अभिमान को त्यागना चलते-फिरते देही-अभिमानी बनना, यही बेहद का वैराग्य है।
तो सभी कहते तो हैं मेरा बाबा, मीठा बाबा, प्यारा बाबा। जब दिल से कहते हैं मेरा तो यह देह अभिमान जो ‘मैं' के रूप में आता है, बाप सदा कहते हैं कि यह ‘मैं' का भान जो आ जाता है, मैं जो करता हूँ, मैं जो कहता हूँ, वही ठीक है। एक मैं है कामन, मैं आत्मा हूँ और यह मेरा शरीर है। दूसरा महीन मैं, जो सुनाया मैंने यह किया, मैं यह कर सकता हूँ, मैं ही ठीक हूँ..., यह महीन मैं इसको खत्म करना है। यह देह अभिमान इस रूप में आता है। तो आज के दिन यह महीन मैं, जो कभी बाप की विशेषता को भी मेरा मानकर ‘मैं' का भान रखते हैं, इसको समाप्त करना। देखो, यादगार जो बनाते हैं उसमें भी जब बलि चढ़ाते हैं तो खुद नहीं बलि चढ़ते हैं लेकिन किसको बलि चढ़ाते हैं? बकरे को। बकरे को क्यों ढूंढा? क्योंकि बकरा मे मे ही करता है। भक्तों ने कॉपी तो बहुत अच्छी की है। तो आज के दिन यह देह अभिमान का मैं क्या पुरुषार्थ करके समाप्त कर सकते हो? बाप के बर्थ डे पर आये हो तो कोई सौगात तो देंगे ना! तो बाप को और सौगात नहीं चाहिए, यह महीन मैंपन, यही बाप कहते हैं आज के जन्मदिन पर बाप को सौगात दे दो। दे सकते हो? देना है? है हिम्मत? हिम्मत है? हाथ उठाओ। हाथ उठाके तो खुश कर दिया। तो हाथ उठाया, तो सौगात दे दी ना! दी हुई सौगात कोई वापस लेता है क्या? कई बच्चे कहते हैं बाबा हम चाहते नहीं हैं लेकिन आ जाती है। कारण क्या? कारण अगर पूछे तो जवाब बहुत अच्छा देते हैं। कहते हैं जानते भी हैं, मानते भी हैं लेकिन क्या करें वापस आ जाता है। सोचो! दी हुई चीज़ अगर आपके पास आ जाए तो क्या दी हुई चीज़ अपने पास रखेंगे? तो अगर आपने दिल से दी, अगर वापस आ भी जाती, तो रखेंगे अपने पास? कारण क्या है? बाप से प्यार है ना तो प्यार के कारण जो बाप कहते हैं वह करने चाहते हैं, यह बाप के पास भी रिजल्ट आती है लेकिन क्या है, दृढ़ता कम है, दृढ़ता को यूज़ करो। संकल्प करते हो लेकिन एक है संकल्प करना, दूसरा है दृढ़ संकल्प करना। तो बार-बार किये हुए संकल्प में दृढ़ता लाना, यह अटेन्शन कम है। दृढ़ता सफलता की चाबी है। तो आज क्या करेंगे? संकल्प करेंगे या दृढ़ संकल्प करेंगे? अगर आपका दृढ़ संकल्प है तो उसकी निशानी है दृढ़ता सफलता की चाबी है। तो चाबी लगाने में कोई कमी रह जाती है इसीलिए सम्पूर्ण सफलता नहीं मिलती है।
तो आज बापदादा के साथ बच्चों का भी बर्थ डे है। बाप का भी बर्थ डे है। तो यह तो विशेष दिन है ना! सारे कल्प में बाप बच्चों का एक समय जन्म यह इसी बर्थ डे की विशेषता है। तो आज के दिन बाप यही चाहते हैं कि हर बच्चा आज अपने दिल में दृढ़ता को लाके यह दृढ़ संकल्प करे कि हमें व्यर्थ संकल्प और व्यर्थ समय नहीं गंवाना है क्योंकि अगर सारे दिन को अटेन्शन से चेक करो तो बीच-बीच में समय और संकल्प व्यर्थ जाता है। बापदादा तो सबका रजिस्टर देखते हैं ना! उसको बचाना अर्थात् समाप्ति का समय समीप लाना। तैयार हो?
तो बापदादा आज आप बच्चों से बर्थ डे की यही सौगात चाहते हैं। देंगे सौगात? देंगे? हाथ उठाओ। दृढ़ निश्चय का हाथ। देखेंगे, करेंगे नहीं। करना ही है। कुछ भी हो जाए त्याग तो त्याग। यह त्याग नहीं लेकिन भाग्य है। तो आज का दिन अगर सही हाथ उठाया तो महत्व का दिन है ना! अभी से आपके चेहरे पर व्यर्थ की समाप्ति और सदा स्मृति स्वरूप की झलक चेहरे और चलन में आनी चाहिए।
अब यह संकल्प करो, दृढ़ता से व्यर्थ समय और संकल्प को समाप्त करना है। मेरा बाबा, मेरा बाबा दिल में समाते, कहना अलग चीज़ है लेकिन दिल में समाना, दिल की बात कभी भूलती नहीं है। मुख की बात भूल सकती है लेकिन दिल की बात अच्छी या व्यर्थ दोनों नहीं भूलती हैं। तो आज बापदादा को सौगात तो दी ना! दो दो हाथ उठाओ। अरे वाह! यह फोटो निकालो। बापदादा सिर्फ हाथ को नहीं देखते, बापदादा आपके दिल को देख रहे हैं।
तो आज के दिन की सौगात अपने को भी दी और बाप को भी दी। अगर आपका व्यर्थ समय और संकल्प बच गया तो आपका दिन कैसे बीतेगा? सदा खुशनसीब और खुशनुमा बन जायेंगे। तो अभी अमृतवेले बापदादा से मिलन मनाने के बाद यह संकल्प रोज़ स्मृति में लाना और सारे दिन में बीच-बीच में चेक करना। बापदादा टाइम फिक्स नहीं करते लेकिन आप अपना टाइम फिक्स करो। बीच-बीच में चेक करना तो जो बापदादा के आगे बर्थ डे पर वायदा किया, वह वायदा निभा रहे हैं? यह अपने आपसे चेक करना। चाहते तो सभी हैं। बापदादा आज शक्लें देख रहे हैं कि चाहते हैं हाँ करेंगे, करेंगे, करेंगे लेकिन यह वेस्ट आ जाता है ना, तो बाप से किया हुआ वायदा भी भुला देता है। तो वेस्ट खत्म। अभी भी एक मिनट पावरफुल आत्मा बन संकल्प करो वेस्ट को खत्म करना ही है। (बापदादा ने ड्रिल कराई) अच्छा।
बापदादा एक भी बच्चे को अपने समान बनाने के बिना रहने नहीं चाहता। प्यार है ना! देखो प्यार की निशानी आज का दिन है। बाप और बच्चे का सारे कल्प में ऐसा दिन नहीं होता जो बाप और बच्चे का जन्म ही एक दिन हो। बाप का एक-एक बच्चे से दिल का प्यार है कि मेरा बच्चा, परमात्मा का बच्चा, जो संकल्प करे वह संकल्प सफल हो। एक-एक संकल्प में शक्ति हो, कहना और करना एक हो। कहा अर्थात् हुआ। शुद्ध संकल्प हो। तो व्यर्थ स्वत: ही खत्म हो जायेगा क्योंकि एडवांस पार्टी डेट चाहती है। तो आपकी जो बड़ी-बड़ी दादियां हैं, बड़े-बड़े भाई हैं, उन्हों से प्यार तो है ना। कितना याद करते हैं, दादी को, दीदी को, चन्द्रमणि को। सभी के नाम लेते जाओ। सभी को याद करते हैं। तो वह जो चाहती हैं वह करके बताओ ना। तो आज का संकल्प क्या रहा? कहना और करना एक हो। ठीक है! तो आज चारों ओर के बच्चों को बापदादा बर्थ डे की सौगात यही दे रहे हैं “कहना और करना'' एक करो। दृढ़ता की सौगात आज के दिन की बापदादा हर बच्चे को दे रहे हैं। शुभ कार्य दृढ़ता से सफल करो।
सेवा का टर्न - राजस्थान और तामिलनाडु का है:- जो अपना टर्न बजाने आये हैं, तो इस टर्न का फायदा काफी उठाया है। हर ज़ोन उठाता है, अनेक आत्माओं को चांस दिलाया है इसकी मुबारक हो, मुबारक हो। बापदादा हर एक बच्चे को, जो भी उठे हो हर बच्चे को बर्थ डे की मुबारक दे रहे हैं और साथ में भविष्य में तीव्र पुरुषार्थी भव का वरदान दे रहे हैं। अच्छा।
डबल विदेशी:- बहुत अच्छा मधुबन का श्रंगार मधुबन में पहुंच गया है। बापदादा ने देखा डबल विदेशियों में निज़ी संस्कार होता है कि जो सोचा वह करना ही है। तो अभी तीव्र पुरुषार्थी का ऐसे सैम्पुल बनो, जो बापदादा आपका दृष्टान्त देकरके औरों को भी उमंग-उल्हास में लाये। उम्मींदवार हो। जो संकल्प करो वह कर सकते हो इसलिए बापदादा आज के दिन की पदम पदम पदम मुबारक दे रहे हैं। बापदादा सुनते हैं क्या-क्या करते हो? खुश होते हैं बापदादा और मधुबन के वायुमण्डल में पहुंच जाते हो इसकी भी मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो। ओम् शान्ति। आपकी दादी ओम् शान्ति बहुत कराती है ना। अच्छा।
बापदादा हर बच्चे को देख चाहे पीछे बैठे हैं, चाहे कोने में बैठे हैं, लेकिन एक-एक बच्चे को कहते हैं कि सदा तीव्र पुरुषार्थी बन औरों को भी तीव्र पुरुषार्थी अपने संग से भी बना सकते हैं। किसी भी आत्मा को कोई सहयोग चाहिए वह दिल से सहयोग दे तीव्र पुरुषार्थी बनाते चलो। हर बच्चा तीव्र पुरुषार्थी हो। नम्बरवार नहीं, तीव्र पुरुषार्थी। कम से कम अपने सम्पर्क में रहने वाले, आने वाले हर स्थान तीव्र पुरुषार्थी स्थान हो। यही संकल्प हर एक रखे और फिर बापदादा इसकी रिजल्ट देखेंगे। जहाँ सेन्टर वाले सब तीव्र पुरुषार्थी स्वरूप में हैं उनको बापदादा कोई-कोई नहीं, सभी साथी हो, उनको एक गिफ्ट देंगे। हो सकता है ना! कि मुश्किल है? नहीं। कम से कम अपने स्थान को तो बना सकते हैं। अपने सेवाकेन्द्र को तो बना सकते हैं। ऐसा एक्जैम्पुल अभी बापदादा देखने चाहते हैं। जैसे मोहजीत की कहानी है ना, जिसे भी मिले मोहजीत। तो सुनने में अच्छी लगती है ना। ऐसे जिसे भी देखें तीव्र पुरुषार्थी ग्रुप। लक्ष्य रखो, लक्ष्य से लक्षण आ ही जायेंगे। हर एक सेन्टर सन्तुष्टमणियों का सेन्टर हो। अच्छा।
बापदादा दिल से चाहते हैं कि एक बच्चा भी पीछे नहीं रह जाए, साथ में चले। पीछे-पीछे आने वाले अच्छे नहीं लगते हैं। साथ हो, हाथ हो, चलना है ना घर में। रिटर्न जरनी है। उसके लिए जैसे ब्रह्मा बाप फरिश्ता है, ऐसे फालो फादर। साकार में होते फरिश्ता, जिसको भी देखो फरिश्ता ही फरिश्ता, तब गेट खुल जायेगा। अच्छा। सभी बच्चों को सदा खुशनसीब, खुशनुमा स्वरूप की यादप्यार।