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31 Dec 2025
नये वर्ष की नवीनता - “दृढ़ता और परिवर्तन शक्ति से कारण व समस्या शब्द को विदाई दे निवारण व समाधान स्वरूप बनो"
31 December 2025 · हिंदी
प्राणप्यारे अव्यक्तमूर्त मात-पिता बापदादा के अति स्नेही, सदा उमंग-उत्साह में रहने वाले, सर्व प्राप्ति सम्पन्न, बापदादा की सभी शुभ आशाओं को पूर्ण करने वाली निमित्त टीचर्स बहिनें तथा देश विदेश के सर्व ब्राह्मण कुल भूषण भाई बहिनें,
ईश्वरीय स्नेह सम्पन्न मधुर याद के साथ, नये वर्ष की बहुत-बहुत हार्दिक शुभ बधाईयां।
बाद समाचार - हम सबके अति प्रिय मीठे बापदादा अपने चारों ओर के बच्चों को नये वर्ष के साथ नये युग की भी मुबारक देते हैं। बाबा कहते बच्चे, अब तो आपके नयनों में नये युग की सभी सीन-सीनरियां सामने घूम रही हैं ना! अपने नये युग में तन-मन-धन-जन सब श्रेष्ठ ते श्रेष्ठ होगा। सभी प्राप्तियों से आत्मा सम्पन्न होगी। अभी सिर्फ दृढ़ संकल्प से पुराने संस्कारों को विदाई दे देंगे तो अपना नया संसार आ जायेगा।
बापदादा अमृतवेले बच्चों के उमंग-उत्साह के संकल्पों को सुनते रहते हैं। बच्चे कितने अच्छे-अच्छे प्लैन्स बनाते हैं, बापदादा सुनकर खुश हो जाते हैं। लेकिन परिवर्तन शक्ति और दृढ़ता की कमी होने के कारण कुछ परिवर्तन होता है, कुछ रह जाता है। अभी बापदादा इन दोनों शक्तियों पर विशेष अण्डरलाइन करवा रहे हैं, क्योंकि बापदादा इस वर्ष “कारण'' शब्द को विदाई दिलाने चाहते हैं। निवारण हो, कारण खत्म। समस्या खत्म, समाधान स्वरूप। अब ब्राह्मणों की डिक्शनरी में कारण व समस्या शब्द परिवर्तन हो, समाधान और निवारण हो जाए।
देखो, वर्तमान समय चारों ओर दु:ख अशान्ति के नये नये कारण बनते जा रहे हैं। बापदादा बच्चों के दु:ख की पुकार सुनते हुए अब परिवर्तन चाहते हैं इसलिए बाबा कहते हे मास्टर सुखदाता बच्चे, दु:खियों पर रहम करो। भक्तों को भी मुक्ति का वर्सा दिलाओ। उनकी आश पूरी करो। दु:खियों को दु:ख से छुड़ाओ, मुक्तिधाम में शान्ति दिलाओ, यह गिफ्ट दो और ब्राह्मण परिवार में हर आत्मा को दिल के स्नेह और सहयोग की गिफ्ट दो। अभी दाता बनो, सिर्फ जमा नहीं करो। दाता बनो, देते जाओ।
तो इस नये वर्ष के लिए ऐसी शुभ आशायें बापदादा की हम सभी बच्चों प्रति हैं। बोलो, बाबा की यह आशायें पूरी करेंगे ना। नये वर्ष को खूब उमंग-उत्साह से मनाते, एक दो को दिल से बधाईयां देते, सबको दिलखुश मिठाई खिलाते, खुशी का दान देते चलो।
बाकी इस बार नया वर्ष मनाने विदेश से भी बहुत बड़ा ग्रुप आया हुआ है। एक ओर छोटे बच्चों की रिट्रीट चल रही है, दूसरी ओर इन्टरनेशनल यूथ की रिट्रीट है। साथ-साथ बाबा के अनेकानेक डबल विदेशी बच्चे ज्ञान सरोवर में खूब रिफ्रेश हो रहे हैं। शान्तिवन में सेवाओं का टर्न दिल्ली और आगरा ज़ोन का है, साथ में गुजरात के भी काफी भाई बहिनें आये हुए हैं। चारों ओर बहुत अच्छी रिमझिम है। यह भी संगमयुग के मिलन के दिन कितने प्यारे, कितने न्यारे हैं। अच्छा - सभी को बहुत-बहुत याद... ओम् शान्ति।
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31-12-25 ओम् शान्ति अव्यक्त बापदादा - रिवाइज वीडियो 31-12-06 मधुबन
आज नवयुग रचता बापदादा अपने चारों ओर के बच्चों को नया वर्ष और नवयुग दोनों की मुबारक देने आये हैं। चारों ओर के बच्चे भी मुबारक देने पहुंच गये हैं। क्या सिर्फ नये वर्ष की मुबारक देने आये हो वा नवयुग की भी मुबारक देने आये हो? जैसे नये वर्ष की खुशी होती है और खुशियां देते हैं। तो आप ब्राह्मण आत्माओं को नवयुग भी इतना याद है? नवयुग नयनों के सामने आ गया है? जैसे नये वर्ष के लिए दिल में आ रहा है कि आया कि आया, ऐसे ही अपने नवयुग के लिए इतना अनुभव करते हो कि आया कि आया? उस नवयुग की स्मृति इतनी समीप आती है? वह शरीर रूपी अपनी ड्रेस चमकती हुई सामने नज़र आ रही है? बापदादा डबल मुबारक देते हैं। बच्चों के मन में, नयनों में नवयुग की सीन सीनरियां इमर्ज हैं, कितना अपने नवयुग में तन-मन-धन-जन श्रेष्ठ है, सर्व प्राप्तियों के भण्डार हैं। खुशी है कि आज पुरानी दुनिया में हैं और अभी-अभी अपने राज्य में होंगे! याद है अपना राज्य? जैसे आज डबल कार्य के लिए आये हो, पुराने को विदाई देने और नये वर्ष को बधाई देने आये हो। तो सिर्फ पुराने वर्ष को विदाई देने आये हो वा पुरानी दुनिया के पुराने संस्कार, पुराने स्वभाव, पुरानी चाल उसको भी विदाई देने आये हो? पुराने वर्ष को विदाई देना तो सहज है, लेकिन पुराने संस्कार को विदाई देना भी इतना सहज लगता है? क्या समझते हो? माया को भी विदाई देने आये हो वा वर्ष को विदाई देने आये हैं? विदाई देना है ना! या माया से थोड़ा प्यार है? थोड़ा-थोड़ा रखने चाहते हो?
बापदादा आज चारों ओर के बच्चों से पुराने संस्कार स्वभाव से विदाई दिलाने चाहते हैं। दे सकते हो? हिम्मत है कि सोचते हो कि विदाई देने चाहते हैं लेकिन फिर माया आ जाती है! क्या आज के दिन दृढ़ संकल्प की शक्ति से पुराने संस्कार को विदाई दे नये युग के संस्कार को, जीवन को बधाई देने की हिम्मत है? है हिम्मत? जो समझते हैं हो सकता है, हो सकता है, वा होना ही है, है हिम्मत वाले? जो समझते हैं हिम्मत है वह हाथ उठाओ। हिम्मत है? अच्छा जिन्होंने नहीं उठाया है वह सोच रहे हैं? डबल फॉरेनर्स ने उठाया हाथ, जिसमें हिम्मत है वह हाथ उठाओ, सभी नहीं। अच्छा, डबल फॉरेनर्स तो होशियार हैं। डबल नशा है इसीलिए। देखना, बापदादा हर मास रिजल्ट देखेगा। बापदादा को खुशी है कि हिम्मत वाले बच्चे हैं। चतुराई से जवाब देने वाले बच्चे हैं। क्यों? क्योंकि जानते हैं कि एक कदम हमारी हिम्मत का और हजारों कदम बाप की मदद का तो मिलना ही है। अधिकारी हो। हजार कदम मदद के अधिकारी हो। सिर्फ हिम्मत को माया हिलाने की कोशिश करती है। बापदादा देखते हैं कि हिम्मत अच्छी रखते हैं, बापदादा दिल से मुबारक भी देते हैं लेकिन हिम्मत रखते फिर साथ में अपने अन्दर ही व्यर्थ संकल्प उत्पन्न कर लेते, कर तो रहे हैं, होना तो चाहिए, करेंगे तो जरूर, पता नहीं.... पता नहीं का संकल्प आना यह हिम्मत को कमजोर कर देता है। तो तो आ जाता है ना, करते तो हैं, करना तो है.. आगे उड़ना तो है..। यह हिम्मत को हिला देते हैं। तो नहीं सोचो, करना ही है। क्यों नहीं होगा! जब बाप साथ है, तो बाप के साथ में तो-तो नहीं आ सकता।
तो इस नये वर्ष में नवीनता क्या करेंगे? हिम्मत के पांव को मजबूत बनाओ। ऐसी हिम्मत का पांव मजबूत बनाओ जो माया खुद हिल जाये लेकिन पांव नहीं हिलें। तो नये वर्ष में नवीनता करेंगे, या जैसे कभी हिलते कभी मजबूत रहते, ऐसे तो नहीं करेंगे ना! आप सभी का कर्तव्य वा आक्यूपेशन क्या है? अपने को क्या कहलाते हो? याद करो। विश्व कल्याणी, विश्व परिवर्तक, यह आपका आक्यूपेशन है ना! तो बापदादा को कभी-कभी मीठी-मीठी हंसी आती है। विश्व परिवर्तक टाइटिल तो है ना! विश्व परिवर्तक हो? या लण्डन परिवर्तक, इण्डिया परिवर्तक? विश्व परिवर्तक हो ना, सभी? चाहे गांव में रहते हैं चाहे लण्डन या अमेरिका में रहते हैं लेकिन विश्व कल्याणकारी हो ना? हो तो कांध हिलाओ। पक्का ना! आपकी चैलेन्ज क्या है? प्रकृति को भी चैलेन्ज की है कि प्रकृति को भी परिवर्तन करना ही है। तो अपना आक्यूपेशन याद करो। तो अपने आक्यूपेशन का प्रैक्टिकल स्वरूप प्रत्यक्ष करेंगे ना! स्व परिवर्तन जो स्वयं भी चाहते हो और बापदादा भी चाहते हैं, जानते तो हो ना! बापदादा पूछते हैं कि आप सभी बच्चों का लक्ष्य क्या है? तो मैजॉरिटी एक ही जवाब देते हैं कि बाप समान बनना है। ठीक है ना! बाप समान बनना ही है ना। तो इस वर्ष में ऐसा बनकर दिखाना या कहेंगे क्या करें? माया आ गई ना, चाहते नहीं थे आ गई! बापदादा ने पहले भी कहा है - माया अपना लास्ट टाइम तक आना बन्द नहीं करेगी। लेकिन माया का काम है आना और आपका काम क्या है? विजयी बनना। तो यह नहीं सोचो, चाहते थोड़ेही हैं लेकिन माया आ जाती है। हो जाता है...। अब बापदादा इस वर्ष के साथ, इन शब्दों को विदाई दिलाने चाहते हैं। 12 बजे इस वर्ष को विदाई देंगे ना! तो जो घण्टे बजाओ ना, आज जब घण्टे बजाओ तो किसका घण्टा बजायेंगे? दिन का, वर्ष का या माया की विदाई का घण्टा बजाना। दो बातें हैं - एक तो परिवर्तन शक्ति, उसकी कमजोरी है। प्लैन बहुत अच्छे बनाते हो, ऐसे करेंगे, ऐसे करेंगे, ऐसे करेंगे...। बापदादा भी खुश हो जाते हैं, बहुत अच्छे प्लैन बनाये हैं लेकिन परिवर्तन शक्ति की कमी होने के कारण कुछ परिवर्तन होता है, कुछ रह जाता है। और दूसरी कमी है - दृढ़ता की। अभी बापदादा इन दो शक्तियों के ऊपर अण्डरलाइन करा रहा है। एक दृढ़ता की कमी आ जाती है। कमी का कारण, अलबेलापन, दूसरे को देखने का। हो जायेगा, कर तो रहे हैं, करेंगे, जरूर करेंगे...।
बापदादा यही चाहते हैं कि इस वर्ष एक शब्द को सदा के लिए विदाई दो। वह कौन सा? बतायें, बोलें? देनी पड़ेगी। इस वर्ष बापदादा कारण शब्द को विदाई दिलाने चाहते हैं। निवारण हो, कारण खत्म। समस्या खत्म, समाधान स्वरूप। चाहे स्वयं का कारण हो, चाहे साथी का कारण हो, चाहे संगठन का कारण हो, चाहे कोई सरकमस्टांश का कारण हो, ब्राह्मणों की डिक्शनरी में कारण शब्द, समस्या शब्द परिवर्तन हो, समाधान और निवारण हो जाए क्योंकि बहुतों ने आज अमृतवेले भी बापदादा से रूहरिहान में यही बातें की, कि नये वर्ष में कुछ नवीनता करें। तो बापदादा चाहते हैं कि यह नया वर्ष ऐसा मनाओ जो यह दो शब्द समाप्त हो जाएं। पर-उपकारी बनो। स्वयं कारण बनते हैं या दूसरा कोई कारण बनता है, लेकिन पर-उपकारी आत्मा बन, रहमदिल आत्मा बन, शुभ भावना, शुभ कामना के दिल वाले बन सहयोग दो, स्नेह लो। दृढ़ता की शक्ति, परिवर्तन की शक्ति को सदा साथी बनाओ।
देखो, नये वर्ष में एक दो का मुख मीठा भी करते हैं, बधाई देंगे, तो मुख मीठा भी कराते हैं ना! तो सारा वर्ष कड़ुवापन नहीं दिखाना। वह मुख मीठा करते, आप सिर्फ मुख मीठा नहीं कराते लेकिन आपका मुखड़ा भी मीठा हो। सदा अपना मुखड़ा रूहानियत के स्नेह का हो, मुस्कराने का हो। कड़ुवापन नहीं।
तो बापदादा इस नये वर्ष में इस कड़ुवाइस को निकालने चाहते हैं। कईयों ने अपना वायदा भी लिखा है कि चाहते नहीं हैं लेकिन आ जाता है। तो बापदादा ने कारण सुनाया कि दृढ़ता की कमी है। बाप के आगे संकल्प द्वारा वचन भी लेते हैं, लेकिन दृढ़ता ऐसी शक्ति है जो दुनिया वाले भी कहते हैं शरीर चला जाए लेकिन वचन नहीं जाए। मरना पड़े, झुकना पड़े, बदलना पड़े, सहन करना पड़े, लेकिन वचन में दृढ़ रहने वाला हर कदम में सफलतामूर्त है क्योंकि दृढ़ता सफलता की चाबी है। यह चाबी सभी के पास है, लेकिन समय पर गुम हो जाती है। तो क्या विचार है?
नये वर्ष में नवीनता करनी ही है - स्व के, सहयोगियों के और विश्व के परिवर्तन की। पीछे वाले सुन रहे हैं? तो करना है ना, यह नहीं सोचना पहले तो बड़े करेंगे ना, हम तो छोटे हैं ना। छोटे समान बाप। हर एक बच्चा बाप के अधिकारी है, चाहे पहले बारी भी आये हो लेकिन मेरा बाबा कहा तो अधिकारी हो। श्रीमत पर चलने के भी अधिकारी और सर्व प्राप्तियों के भी अधिकारी।
बापदादा ने देखा कि बच्चों के परिवर्तन बिना विश्व का परिवर्तन भी ढीला हो रहा है। और आत्मायें नये-नये प्रकार के दु:ख के पात्र बन रही हैं। दु:ख अशान्ति के नये नये कारण बन रहे हैं। तो बाप अभी बच्चों के दु:ख की पुकार सुनते हुए परिवर्तन चाहते हैं। तो हे मास्टर सुखदाता बच्चे, दु:खियों पर रहम करो। भक्त भी भक्ति कर करके थक गये हैं। भक्तों को भी मुक्ति का वर्सा दिलाओ। रहम आता है कि नहीं? अपनी ही सेवा में, अपनी ही दिनचर्या में बिजी हैं? निमित्त हो, ऐसे नहीं बड़े निमित्त हैं, एक एक बच्चा जिसने मेरा बाबा कहा है, माना है वह सब निमित्त हैं। तो नये वर्ष में एक दो को गिफ्ट भी देते हैं ना। तो आप भक्तों की आश पूरी करो, उसको गिफ्ट दिलाओ। दु:खियों को दु:ख से छुड़ाओ, मुक्तिधाम में शान्ति दिलाओ - यह गिफ्ट दो। ब्राह्मण परिवार में हर आत्मा को दिल के स्नेह और सहयोग की गिफ्ट दो। अभी दाता बनो, सिर्फ जमा नहीं करो। दाता बनो, देते जाओ। ठीक है। परिवर्तन शक्ति, दृढ़ता की शक्ति अच्छी तरह से यूज़ करना। अच्छा।
सेवा का टर्न , दिल्ली , आगरा का है:- अच्छा है, देखो, बापदादा और आपकी मम्मा ने डायरेक्ट दिल्ली और बाम्बे की पालना की है। और जगह गये हैं तो थोड़ा-थोड़ा लेकिन दिल्ली और बाम्बे में डायरेक्ट बापदादा, माँ ने पालना दी है। तो दिल्ली वालों को नशा है ना? तो इसमें भी नम्बरवन, क्या नहीं हो सकता है! दृढ़ निश्चय, निश्चित विजयी बना देता है। दृढ़ता को यूज़ कम करते हो, देखेंगे, करेंगे, हो जायेगा, यह गे गे आ जाती है। अच्छा है, दिल्ली वालों को एक्जैम्पुल बनना चाहिए, जो एक्जैम्पुल बनता है उसको फाइनल एक्जाम में एक्स्ट्रा मार्क्स मिल जाती हैं। अच्छा है।
दिल्ली वालों में हिम्मत है लेकिन संगठित रूप में हिम्मत प्रत्यक्ष करके दिखाओ। सबकी नज़र दिल्ली के ऊपर जाती है। अच्छा है। सेवा का शौक रखा है, इसकी मुबारक है। अपने पुण्य का खाता जमा कर लिया है। अच्छा।
डबल विदेशी:- फारेनर्स वृद्धि भी कर रहे हैं और भिन्न-भिन्न देश जो रहे हुए हैं, उसमें उमंग-उत्साह से बढ़ रहे हैं। कोई-कोई बच्चे गुप्त रीति से तीव्र पुरुषार्थ कर रहे हैं और बापदादा के पास लिस्ट भी है, भारत में भी है, विदेश में भी है लेकिन बापदादा अभी बहुतकाल देखने चाहता है, कर रहे हैं लेकिन बहुतकाल चाहिए। अभी बहुतकाल पर अटेन्शन रखो क्योंकि बहुतकाल के विजयी बहुतकाल का फुल आधा कल्प के राज्यभाग्य के अधिकारी बनेंगे। ऐसी लिस्ट में आ जाओ, बहुतकाल के तीव्र पुरुषार्थी। कभी-कभी वाले नहीं, लगातार। ठीक है ना। बापदादा देखते हैं कि उम्मींदवार सितारे हैं। प्रैक्टिकल स्टेज पर आ जायेंगे। ठीक है ना। ऐसे हैं ना! उम्मींदवार सितारे हैं ना। बाप की आशाओं के सितारे बच्चे हैं। अच्छा। मुबारक हो, मुबारक हो।
अच्छा। अभी हर एक अपने को मन के मालिक अनुभव कर एक सेकण्ड में मन को एकाग्र कर सकते हो? आर्डर कर सकते हो? एक सेकण्ड में अपने स्वीट होम में पहुंच जाओ। एक सेकण्ड में अपने राज्य स्वर्ग में पहुंच जाओ। मन आपका आर्डर मानता है वा हलचल करता है? मालिक अगर योग्य है, शक्तिवान है, तो मन नहीं माने, हो नहीं सकता। तो अभी अभ्यास करो एक सेकण्ड में सभी अपने स्वीट होम में पहुंच जाओ।
यह अभ्यास सारे दिन में बीच-बीच में करने का अटेन्शन रखो। मन की एकाग्रता स्वयं को भी और वायुमण्डल को भी पावरफुल बनाती है। अच्छा।
चारों ओर के अति सर्व के स्नेही, सर्व के सहयोगी श्रेष्ठ आत्माओं को, चारों ओर के विजयी बच्चों को, चारों ओर के परिवर्तन शक्तिवान बच्चों को, चारों ओर के सदा स्वयं को प्रत्यक्ष कर बाप को प्रत्यक्ष करने वाले बच्चों को, सदा समाधान स्वरूप विश्व परिवर्तक बच्चों को बापदादा का यादप्यार और दिल की दुआयें स्वीकार हों। साथ में सभी बच्चों को जो बाप के भी सिरताज हैं, ऐसे सिरताज बच्चों को बापदादा की नमस्ते।