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18 Jan 2026
“सेवाओं के साथ-साथ एक दो के सहयोगी बन वायुमण्डल में तीव्र पुरुषार्थ की लहर फैलाओ, मनजीत बन आत्माओं की मन्सा सेवा करो''
18 January 2026 · हिंदी
आज विशेष स्नेह का दिन है। चारों ओर के बच्चे स्नेह स्वरूप से मिलन मना रहे हैं। आप सभी भी स्नेह स्वरूप में मगन हैं। आज अमृतवेले से चारों तरफ के बच्चे अमृतवेले से भी पहले स्नेह रूप से दिल के स्नेह के मोतियों की मालायें लेकर पहुंच गये थे। अनेक प्रकार के भिन्न-भिन्न मन के भावों को बाप के आगे वर्णन कर रहे थे। आप जानते हो कि बच्चों का स्नेह कितना प्यारा है। भिन्न-भिन्न भाषायें, भिन्न-भिन्न भाव से बापदादा के आगे अपने दिल की बात बोल भी रहे थे और नयनों से, मुख से अपने भाव भी स्पष्ट कर रहे थे। बापदादा चारों ओर के बच्चों के स्नेह के भाव देख सभी के स्नेह में समा गये और दिल से यही बोल निकले वाह बच्चे वाह! और बच्चों के मुख से वाह बाबा वाह! के गीत सुनाई दे रहे थे। बापदादा हर बच्चे को देख बच्चों के लव में लीन थे और बच्चे बाप के लव में लीन थे।
आज का दिन बाप बच्चों को बालक सो मालिक बनाने की दृष्टि से देख रहे थे। आज का दिन बच्चों के राजतिलक का दिन है। आज के दिन बापदादा स्वयं फरिश्ते रूप में रहकर बच्चों को विश्व सेवा अर्थ निमित्त बनाया। स्वयं बैकबोन बनें, बच्चों को विश्व की स्टेज पर प्रत्यक्ष किया और बापदादा अभी बच्चों की सेवा को देख, जो जिम्मेवारी दी उसकी रिजल्ट को देख बच्चों पर बहुत-बहुत खुश है और दिल से मुबारक दे रहे हैं। मुबारक हो, मुबारक हो।
अभी आगे क्या करना है? सेवा की मुबारक तो बापदादा ने दे दी, अब बापदादा यही चाहते हैं कि अभी हर एक बच्चे को यह उमंग-उत्साह, दृढ़ निश्चय, तीव्र पुरुषार्थ करना है कि अब बाप समान फरिश्ता बनना ही है क्योंकि अभी सभी को बाप के साथ रिटर्न जरनी करनी है। समान फरिश्ता बनना ही है क्योंकि सभी का वायदा है साथ चलेंगे, साथ राज्य करेंगे। तो ब्रह्मा बाप भी फरिश्ता बन गया, तो साथ कैसे चलेंगे? ब्रह्मा बाप ने जीवन में ही फरिश्तापन का स्वरूप दिखाया। कितनी जिम्मेवारी रही! सभी को योगी बनाना ही है लेकिन इतनी जिम्मेवारी होते भी आप सबने देखा न्यारा और प्यारा रहा। सदा बेफिक्र बादशाह रहा, फिकर नहीं बेफिक्र बादशाह। ऐसे ही आप बच्चों को भी अभी बाप समान बेफिक्र बादशाह फरिश्ता बनना ही है। यह दृढ़ संकल्प है, बनना ही है! कि यह सोचते हो बन ही जायेंगे!
अभी बापदादा ने देखा कि अभी समय अनुसार जितना सेवा का उमंग-उत्साह प्रैक्टिकल में है इतना ही अभी तीव्र पुरुषार्थी बनना और बनाना, सम्पन्न बनना और बनाना, इस प्वाइंट के ऊपर भी अभी स्वयं भी उमंग-उत्साह में रहना और वायुमण्डल में भी उमंग-उत्साह दिलाना। एक दो के सहयोगी बन अब वायुमण्डल में तीव्र पुरुषार्थ की लहर फैलाओ। जैसे एक दो में सेवा का उमंग वायुमण्डल में फैलाया है ऐसे अभी बापदादा बच्चों में यही शुभ आशा रखते हैं कि यह लहर वायुमण्डल में फैले। बापदादा खुश है लेकिन अभी भी पुरुषार्थ है, तीव्र पुरुषार्थ करना है। अभी हर बच्चे में बापदादा की यही आश है कि हर बच्चा बाप के आशाओं का सितारा हो। ऐसे सितारा हो? जो समझते हैं हम बाप की आशाओं के सितारे बन यह उमंग-उत्साह वायुमण्डल में फैलायेंगे वह हाथ उठाओ। अच्छा। हाथ तो बहुत अच्छा उठाते हैं। बापदादा हाथों को देखके खुश हो जाते हैं। मैजारिटी ने हाथ उठाया है, पीछे वालों का दिखाई नहीं देता लेकिन आगे वालों का दिखाई दिया। अभी पीछे वाले भी उठा रहे हैं, मुबारक हो, मुबारक हो। अच्छा।
बापदादा ने देखा कि विशेष मन में कोई भी बात का उमंग-उत्साह आता है तो वह कार्य साकार रूप में अच्छा हो जाता है इसलिए बापदादा इस बारी स्नेह के दिन में यह होमवर्क दे रहा है कि हर एक बच्चा मन के कारण जो संकल्प और समय व्यर्थ जाता है, अगर कभी भी कोई व्यर्थ संकल्प आ जाता है तो सभी को अनुभव होगा कि उसमें टाइम कितना वेस्ट जाता है। इनर्जी कितनी वेस्ट जाती है। तो बापदादा यह होमवर्क देने चाहता है कि यह दो मास हर एक बच्चा मन के व्यर्थ संकल्प और व्यर्थ समय के बचत की अपने प्रति विधि बनावे। इन दो मास में हर एक अपना चार्ट रखे कि व्यर्थ समय, व्यर्थ संकल्प के ऊपर कितना कन्ट्रोल किया? क्योंकि अभी समय के प्रमाण आप सभी को मन्सा शक्ति द्वारा आत्माओं की मन्सा सेवा करने का समय होगा। इसके लिए सदा मन के ऊपर अटेन्शन रखना जरूरी है। कहा हुआ भी है मनजीत जगतजीत। तो मनमनाभव के वायुमण्डल में मन के व्यर्थ को समाप्त करना है। कर सकते हैं? करेंगे? वह हाथ उठाओ। बापदादा इनाम देगा। अपनी रिजल्ट आप देखना। मन खुश तो मन की खुशी बांटेंगे। यह पुरुषार्थ में नम्बर सभी आगे से आगे लेने का अटेन्शन रखो। संकल्प, समय दोनों से व्यर्थ समाप्त और समर्थ संकल्प, समर्थ समय आने वाले समय में वायुमण्डल में फैलेगा।
बापदादा एक बात पर बच्चों को देख खुश है। कौन सी बात पर? कि हर बच्चे ने सेवा तो की है लेकिन साथ में जो बापदादा का इशारा है कि डबल राजा बनो। जानते हो ना! एक स्वराज्य अधिकारी और दूसरा भविष्य राज्य अधिकारी। स्वराज्य अधिकारी और बाप को नशा है कि ऐसा और कोई बाप नहीं जिसका हर बच्चा स्वराज्य अधिकारी हो। आप सभी स्वराज्य अधिकारी हो ना! स्व पर आत्मा राज्य करने वाली है। कर्मेन्द्रियों के वश नहीं, राज्य अधिकारी। तो बाप यही चाहते हैं कि हर एक बच्चा स्वराज्य अधिकारी सदा रहे, कभी कभी नहीं। बन सकते हैं? यह दो मास जो दिया है, इसमें नोट करना स्वराज्य अधिकारी रहे? या कर्मेन्द्रियों के वश बन गये? अभी कर्मातीत बनना है, समय समीप आ रहा है। तो क्या करना है? चलते-फिरते स्वराज्य अधिकारी बनना ही है। यह संस्कार आप ब्राह्मण बच्चों के ही हैं। डबल राज्य, स्वराज्य और फिर भविष्य में विश्व राज्य। बापदादा चक्र लगाते बच्चों का रिजल्ट नोट करते हैं तो सदा स्वराज्य अधिकारी इसमें अभी अटेन्शन चाहिए। तो दो कार्य बापदादा ने दिया एक यह दो मास स्वराज्य अधिकारी कहाँ तक रहते? वह अपनी रिजल्ट देखनी है और साथ-साथ मन की कन्ट्रोलिंग पावर, रूलिंग पावर द्वारा व्यर्थ समाप्त करना है। इसमें जो नम्बर लेंगे उसको बापदादा इनाम देगा। पसन्द है? करना है ना! करेंगे? करेंगे ना! कांध हिलाओ। अच्छा।
बापदादा ने आज सभी का जो स्नेह है वह स्वीकार किया। अमृतवेले तो वतन में भी बहुत बच्चों की रिमझिम थी। एडवांस पार्टी भी वतन में आज अपने दिल का स्नेह देने लिए, लेने लिए आये थे।
बापदादा भी देखते हैं कि स्नेह सबका है लेकिन स्नेह के साथ शक्ति भी चाहिए, इसके लिए अमृतवेले को पावरफुल बनाओ, बैठते हैं बापदादा बैठने की मुबारक देते हैं लेकिन जो बैठने का वायुमण्डल शक्तिशाली चाहिए, कोई कैसे बैठता है, कोई कैसे बैठता है। अगर आप फोटो निकालो ना, तो आपको खुद लगेगा कि और कुछ होना चाहिए। जो बापदादा ने ज्वालामुखी योग कहा, उसके ऊपर अभी और गहरा अटेन्शन देना। पुरुषार्थ करते हैं सभी लेकिन पुरुषार्थ के आगे तीव्र शब्द जोड़ो। अभी बापदादा ने हर बच्चे को यह दो मास दिये हैं, इसमें जितना अटेन्शन देंगे तो अटेन्शन के साथ बापदादा भी एकस्ट्रा आपको सहयोग देगा। मन के मालिक, मन को ऐसे चलाओ जैसे पांव और बांह को चलाते हो। जो चाहते हो वह करते हैं ना। अभी आप चाहो यहाँ नहीं यहाँ रखूं तो रख सकते हो ना! ऐसे माइन्ड कन्ट्रोल, जो चाहे वही मन संकल्प करे। रोज़ रात को रिजल्ट देखो आज मन की रूलिंग पावर, कन्ट्रोलिंग पावर कहाँ तक रही? अभी व्यर्थ को समाप्त जल्दी-जल्दी करना चाहिए, अब समर्थ बन वायुमण्डल में समर्थपन की शक्ति फैलाओ। बापदादा तो बच्चों का दु:ख दर्द, पुकार सुन करके बच्चों द्वारा अभी जल्दी समाप्ति कराने चाहते हैं। सुनाया ना, पुरुषार्थ सब कर रहे हैं लेकिन अभी एड करो तीव्र। करना ही है, करेंगे, देखेंगे... यह गे-गे नहीं चलेगा।
स्नेह का नज़ारा भी आज देखा, हर एक के दिल में कितना प्यार है लेकिन जितना प्यार है ना, साथ में उतना शक्ति भी चाहिए। अभी शक्ति को भरो। कभी भी कोई भी बहनें अपने को सिर्फ शक्ति नहीं, शिवशक्ति समझो। शिवशक्ति, बाप साथ है। पाण्डवों से पाण्डवपति साथ है। तो अभी क्या करेंगे? जो बापदादा ने कहा है पुरुषार्थ के आगे तीव्र शब्द लगाओ। वायुमण्डल बनाओ। एक दो के सहयोगी बन हर एक अपने-अपने जिस स्थान पर रहते हो, उस स्थान को शक्तिशाली बनाओ, साथियों को शक्तिशाली बनाओ। तो क्या करेंगे अभी? नवीनता करेंगे ना! जब मेरा बाबा कहते हैं, तो ‘मेरे' जैसा बनना तो पड़ेगा ना। हर एक अपने दिल में दृढ़ संकल्प करो, संकल्प अच्छे-अच्छे करते हो, अमृतवेले बापदादा देखते हैं कि संकल्प अच्छे करते हो यह करेंगे, यह करेंगे, यह करेंगे लेकिन जब कर्मयोगी बनते हो, सम्बन्ध-सम्पर्क में आते हो तो उसमें फर्क हो जाता है। कर्मयोगी की स्थिति उसमें अटेन्शन ज्यादा चाहिए। अच्छा।
सभी खुश तो हैं ना! खुश हैं? अच्छा।
सेवा का टर्न महाराष्ट्र ज़ोन का है:- बापदादा को बच्चों को देखकर खुशी होती है वाह बच्चे वाह! यही दिल से निकलता है। जितना आप दिल से वाह! बाबा वाह! कहते हो उससे ज्यादा बापदादा वाह! बच्चे वाह! कहते हैं। अच्छा। सेवा के निमित्त आ गये हो, बापदादा भी खुश होते हैं कि एक-एक ज़ोन को बहुत अच्छा यह चांस मिलता है। ज्यादा से ज्यादा संख्या लाने का चांस मिलता है, तो यह प्रोग्राम बहुत अच्छा बनाया है। हर एक ज़ोन को चांस मिलता है लेकिन चांस लेके फिर उसका रिजल्ट भी निकालना, बापदादा के सामने लाने का। अच्छा।
डबल विदेशी:- बहुत अच्छा। डबल विदेशी यज्ञ का श्रृंगार हैं। जब भी आते हैं ना तो यज्ञ का श्रृंगार हो जाता है, सभी कितने खुश होते हैं क्योंकि आपकी एक विशेषता अच्छी है, जो भी करना है ना वह फौरन करते हो, लम्बा नहीं करते हो। बापदादा देखते हैं कि उमंग-उत्साह ज्यादा बढ़ता जा रहा है। कोई भी ऐसा टर्न नहीं होता जिसमें डबल विदेशी नहीं हो। तो बापदादा डबल विदेशियों को टाइटल देता है डबल पुरुषार्थी। अभी करके दिखाना। डबल पुरुषार्थी बनके रिजल्ट दिखाना। बापदादा को मालूम है सेवा बढ़ती रहती है, समाचार आता रहता है। सेवा भी अच्छी है, अभी सिर्फ जो आज कहा ना, पुरुषार्थ के आगे तीव्र शब्द सदा लगाओ। तो तीव्र पुरुषार्थी बच्चे सदा बापदादा को अपने दिल में रखते और बापदादा हर बच्चे को अपने दिल में रखते। सबके दिल में बापदादा है ना। हाथ उठाओ। दिल में कौन रहता है? बापदादा। और बापदादा के दिल में आप बच्चे हैं। तो डबल विदेशियों को बापदादा दिल से यादप्यार भी देते हैं और विशेष मुबारक देते हैं मधुबन का श्रृंगार बनके आने का। अच्छा लगता है ना आप लोगों को? अच्छा। सभी बच्चों को आपका आना देखकर खुशी होती है। सबके दिल से वाह! वाह! निकलता है।
चारों ओर के अति स्नेही, सहयोगी, सर्विसएबुल बच्चों को बापदादा स्नेह के दिन की, स्नेह भरी यादप्यार दे रहे हैं और साथ-साथ बापदादा हर स्नेही बच्चों को यह बात कह रहे हैं कि अब हर बच्चे को तीव्र पुरुषार्थ में नम्बरवन का लक्ष्य रख बनना ही है और ड्रामा बनायेगा ही। सभी बच्चों को चारों ओर के कहाँ भी बैठे हैं, बापदादा सभी को देख रहे हैं कैसे उमंग-उत्साह से बैठे हैं, सुन भी रहे हैं, देख भी रहे हैं। एक-एक बच्चे को स्नेह भरी यादप्यार और मुबारक हो, मुबारक हो।