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1 Feb 2026
परमात्म प्राप्तियों से सम्पन्न आत्मा की निशानी - होलीएस्ट, हाइएस्ट और रिचेस्ट
1 February 2026 · हिंदी
प्राणप्यारे अव्यक्त बापदादा के अति लाडले, सदा होलीएस्ट, हाइएस्ट और सारे कल्प की रिचेस्ट सभी संगमयुगी पदमापदम भाग्यशाली आत्मायें, निमित्त टीचर्स बहिनें तथा देश विदेश के सभी ब्राह्मण कुल भूषण भाई बहिनें,
ईश्वरीय स्नेह सम्पन्न मधुर याद स्वीकार करना जी।
बाद समाचार - प्यारे बापदादा के स्मृति मास को सभी ने अव्यक्ति मास के रूप में मनाया। चारों तरफ योग तपस्या की बहुत अच्छी लहर रही। बापदादा के समान सभी ने स्वयं की स्थिति बंधनमुक्त जीवनमुक्त बनाने के लिए अपनी सूक्ष्म चेकिंग भी की। अभी फरवरी मास विशेष सेवाओं का मास है। चारों तरफ शिव बाबा के अवतरण का यादगार दिन त्रिमूर्ति महाशिवरात्रि का पावन त्योहार सभी खूब धूमधाम से मनायेंगे। अब तो हर एक के दिल में यही झण्डा लहराना है कि सर्व का पिता, गति सद्गति, मुक्ति जीवनमुक्ति दाता प्यारा बाबा 90 वर्षो से विश्व परिवर्तन का महान कार्य कर रहे हैं। अभी वह दिन दूर नहीं जब सभी आत्मायें दु:ख अशान्ति से मुक्त हो अपने मुक्तिधाम घर जायेंगी, फिर स्वर्णिम युग का प्रारम्भ होगा। संगमयुग की यह सुनहरी घड़ियां भी अतिन्द्रिय सुख की, परमानंद की अनुभूति करने की है।
बाबा की यही शुभ आशा है कि मेरे बच्चे अब स्वयं को सर्व अविनाशी खजानों से सम्पन्न बनाए, सदा बेफिक्र बादशाह की स्थिति का अनुभव करें। बाबा कहते बच्चे, सदा तीन बिन्दियों का स्मृति में रह स्वयं को सम्पन्न बनाते चलो। सम्पन्नता की निशानी सदा सन्तुष्टता है। संगमयुग पर सदा सन्तुष्ट रहना और सर्व को सन्तुष्ट करना, यही वरदान बापदादा अपने बच्चों को देते हैं।
बापदादा ने बार-बार हर बच्चे को समय की सूचना भी दी है। यह वर्तमान संगम का समय ही सारे कल्प में श्रेष्ठ कर्मो के बीज बोने का, प्रत्यक्ष फल प्राप्त करने का समय है। इसके लिए सिर्फ एक सेकण्ड में अशरीरी स्थिति में स्थित होने का अभ्यास करो। निरन्तर याद में रहने की विधि अपनाओ। सारे दिन में जो अनेक बार बोलते हो “मैं'' और “मेरा''। तो मैं शब्द बोलते समय “मैं एक श्रेष्ठ आत्मा हूँ'' और मेरा शब्द बोलते समय याद आये “मेरा बाबा'' यही स्मृति सहजयोगी बना देगी। बोलो, यही अटेन्शन रख निरन्तर याद की यात्रा में रहने का अभ्यास करते हो ना।
बाकी अभी गुजरात ज़ोन की सेवाओं का टर्न है, गुजरात तो मधुबन का पड़ोसी है, सभी समीपता का बहुत अच्छा लाभ लेते हैं। काफी संख्या में गुजरात तथा अन्य स्थानों से भाई बहिनें पहुंचे हुए हैं। सभी खूब रिफ्रेश हो रहे हैं।
अच्छा - सभी को याद... ओम् शान्ति।
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01-2-26 प्रात:मुरली ओम् शान्ति “अव्यक्त-बापदादा'' रिवाइज वीडियो-02-02-07 मधुबन
आज विश्व परिवर्तक बापदादा अपने साथी बच्चों से मिलने आये हैं। हर एक बच्चे के मस्तक में तीन परमात्म विशेष प्राप्तियां देख रहे हैं। एक है - होलीएस्ट, 2- हाइएस्ट और 3- रिचेस्ट। इस ज्ञान का फाउण्डेशन ही है होली अर्थात् पवित्र बनना। तो हर एक बच्चा होलीएस्ट है, पवित्रता सिर्फ ब्रह्मचर्य नहीं लेकिन मन-वाणी-कर्म, सम्बन्ध-सम्पर्क में पवित्रता। आप देखो, आप परमात्म ब्राह्मण आत्मायें आदि-मध्य-अन्त तीनों ही काल में होलीएस्ट रहती हो। पहले-पहले आत्मा जब परमधाम में रहते हो तो वहाँ भी होलीएस्ट हो फिर जब आदि में आते हो तो आदिकाल में भी देवता रूप में होलीएस्ट आत्मा रहे। होलीएस्ट अर्थात् पवित्र आत्मा की विशेषता है - प्रवृत्ति में रहते सम्पूर्ण पवित्र रहना। और भी पवित्र बनते हैं लेकिन आपकी पवित्रता की विशेषता है - स्वप्न-मात्र भी अपवित्रता मन-बुद्धि में टच नहीं करे। सतयुग में आत्मा भी पवित्र बनती और शरीर भी आपका पवित्र बनता। आत्मा और शरीर दोनों की पवित्रता जो देव आत्मा रूप में रहती है, वह श्रेष्ठ पवित्रता है। जैसे होलीएस्ट बनते हो, इतना ही हाइएस्ट भी बनते हो। सबसे ऊंचे ते ऊंचे ब्राह्मण आत्मायें और ऊंचे ते ऊंचे बाप के बच्चे बने हो। आदि में परमधाम में भी हाइएस्ट अर्थात् बाप के साथ-साथ रहते हो। मध्य में भी पूज्य आत्मायें बनते हो। कितने सुन्दर मन्दिर बनते हैं और कितनी विधिपूर्वक पूजा होती है। जितनी विधिपूर्वक आप देवताओं के मन्दिर में पूजा होती है उतने औरों के मन्दिर बनते हैं लेकिन विधिपूर्वक पूजा आपके देवता रूप की होती है। तो होलीएस्ट भी हो और हाइएस्ट भी हो, साथ में रिचेस्ट भी हो। दुनिया में कहते हैं रिचेस्ट इन दी वर्ल्ड लेकिन आप श्रेष्ठ आत्मायें रिचेस्ट इन कल्प हैं। सारा कल्प रिचेस्ट हो। अपने खजाने स्मृति में आते हैं, कितने खजानों के मालिक हो! अविनाशी खजाने जो इस एक जन्म में प्राप्त करते हो वह अनेक जन्म चलते हैं। और कोई के भी खजाने अनेक जन्म नहीं चलते। लेकिन आपके खजाने आध्यात्मिक हैं। शक्तियों का खजाना, ज्ञान का खजाना, गुणों का खजाना, श्रेष्ठ संकल्प का खजाना और वर्तमान समय का खजाना, यह सर्व खजाने जन्म-जन्म चलते हैं। एक जन्म के प्राप्त हुए खजाने साथ चलते हैं क्योंकि सर्व खजानों के दाता परमात्मा बाप द्वारा प्राप्त होते हैं। तो यह नशा है कि हमारे खजाने अविनाशी हैं?
इस आध्यात्मिक खजानों को प्राप्त करने के लिए सहजयोगी बने हो। याद की शक्ति से खजाने जमा करते हो। इस समय भी इन सर्व खजानों से सम्पन्न बेफिक्र बादशाह हो, कोई फिक्र है? है फिक्र? क्योंकि यह खजाने जो हैं इसको न चोर लूट सकता, न राजा खा सकता, न पानी डुबो सकता, इसलिए बेफिक्र बादशाह हो। तो यह खजाने सदा स्मृति में रहते हैं ना! और याद भी सहज क्यों है? क्योंकि सबसे ज्यादा याद का आधार होता है एक सम्बन्ध और दूसरा प्राप्ति। जितना प्यारा सम्बन्ध होता है उतनी याद स्वत: आती है क्योंकि सम्बन्ध में स्नेह होता है और जहाँ स्नेह होता है तो स्नेही को याद करना मुश्किल नहीं होता, लेकिन भूलना मुश्किल होता है। तो बाप ने सर्व सम्बन्ध का आधार बना दिया है। सभी अपने को सहजयोगी अनुभव करते हो? वा मुश्किल योगी हैं? सहज है? कि कभी सहज है, कभी मुश्किल है? जब बाप को सम्बन्ध और स्नेह से याद करते हो तो याद मुश्किल नहीं होती और प्राप्तियों को याद करो। सर्व प्राप्तियों के दाता ने सर्व प्राप्तियां करा दी। तो अपने को सर्व खजानों से सम्पन्न अनुभव करते हो? खजानों को जमा करने की सहज विधि भी बापदादा ने सुनाई - जो भी अविनाशी खजाने हैं उन सभी खजानों को प्राप्त करने की विधि है - बिन्दी। जैसे विनाशी खजानों में भी बिन्दी लगाते जाओ तो बढ़ता जाता है ना। तो अविनाशी खजानों को जमा करने की विधि है बिन्दी लगाना। तीन बिन्दियां हैं - एक मैं आत्मा बिन्दी, बाप भी बिन्दी और ड्रामा में जो भी बीत जाता वह फुलस्टाप अर्थात् बिन्दी। तो बिन्दी लगाने आती है? सबसे ज्यादा सहज मात्रा कौन सी है? बिन्दी लगाना ना! तो आत्मा बिन्दी हूँ, बाप भी बिन्दी है, इस स्मृति से स्वत: ही खजाने जमा हो जाते हैं। तो बिन्दी को सेकण्ड में याद करने से कितनी खुशी होती है! यह सर्व खजाने आपके ब्राह्मण जीवन का अधिकार हैं क्योंकि बच्चे बनना अर्थात् अधिकारी बनना। और विशेष तीन सम्बन्ध का अधिकार प्राप्त होता है - परमात्मा को बाप भी बनाया है, शिक्षक भी बनाया है और सतगुरू भी बनाया है। इन तीनों सम्बन्ध से पालना, पढ़ाई से सोर्स आफ इनकम और सतगुरू द्वारा वरदान मिलता है। कितना सहज वरदान मिलता है? क्योंकि बच्चे का जन्म सिद्ध अधिकार है बाप के वरदान प्राप्त करने का।
बापदादा हर बच्चे का जमा का खाता चेक करते हैं। आप सभी भी अपने हर समय का जमा का खाता चेक करो। जमा हुआ वा नहीं हुआ, उसकी विधि है जो भी कर्म किया, उस कर्म में स्वयं भी सन्तुष्ट और जिसके साथ कर्म किया वह भी सन्तुष्ट। अगर दोनों में सन्तुष्टता है तो समझो कर्म का खाता जमा हुआ। अगर स्वयं में वा जिससे सम्बन्ध है, उसमें सन्तुष्टता नहीं आई तो जमा नहीं होता।
बापदादा सभी बच्चों को समय की सूचना भी देते रहते हैं। यह वर्तमान संगम का समय सारे कल्प में श्रेष्ठ ते श्रेष्ठ समय है क्योंकि यह संगम ही श्रेष्ठ कर्मो के बीज बोने का समय है। प्रत्यक्ष फल प्राप्त करने का समय है। इस संगम समय में एक एक सेकण्ड श्रेष्ठ ते श्रेष्ठ है। सभी एक सेकण्ड में अशरीरी स्थिति में स्थित हो सकते हो? बापदादा ने सहज विधि सुनाई है कि निरन्तर याद के लिए एक विधि बनाओ - सारे दिन में दो शब्द सभी बोलते हो और अनेक बार बोलते हो वह दो शब्द हैं “मैं'' और “मेरा''। तो जब मैं शब्द बोलते हो तो बाप ने परिचय दे दिया है कि मैं आत्मा हूँ। तो जब भी मैं शब्द बोलते हो तो यह याद करो कि मैं आत्मा हूँ। अकेला मैं नहीं सोचो, मैं आत्मा हूँ, यह साथ में सोचो क्योंकि आप तो जानते हो ना कि मैं श्रेष्ठ आत्मा हूँ, परमात्म पालना के अन्दर रहने वाली आत्मा हूँ और जब मेरा शब्द बोलते हो तो मेरा कौन? मेरा बाबा अर्थात् बाप परमात्मा। तो जब भी मैं और मेरा शब्द कहते हो उस समय यह एडीशन करो, मैं आत्मा और मेरा बाबा। जितना बाप में मेरापन लायेंगे, उतना याद सहज होती जायेगी क्योंकि मेरा कभी भूलता नहीं है। सारे दिन में देखो मेरा ही याद आता है। तो इस विधि से सहज निरन्तर योगी बन सकते हो। बापदादा ने हर बच्चे को स्वमान की सीट पर बिठाया है। स्वमान की लिस्ट अगर स्मृति में लाओ तो कितनी लम्बी है! क्योंकि स्वमान में स्थित हैं तो देह-अभिमान नहीं आ सकता। या देह-अभिमान होगा या स्वमान होगा। स्वमान का अर्थ ही है - स्व अर्थात् आत्मा का श्रेष्ठ स्मृति का स्थान। तो सभी अपने स्वमान में स्थित हैं? जितना स्वमान में स्थित होंगे उतना दूसरे को सम्मान देना स्वत: ही हो जाता है। तो स्वमान में स्थित रहना कितना सहज है!
तो सभी खुशनुमा रहते हैं? क्योंकि खुशनुमा रहने वाला दूसरे को भी खुशनुमा बना देता है। बापदादा सदा कहते हैं कि सारे दिन में खुशी कभी नहीं गंवाओ। क्यों? खुशी ऐसी चीज़ है जो एक ही खुशी में हेल्थ भी है, वेल्थ भी है और हैपी भी है। खुशी नहीं तो जीवन नीरस रहती है। खुशी को ही कहा जाता है - “खुशी जैसा कोई खजाना नहीं।'' कितने भी खजाने हो लेकिन खुशी नहीं तो खजाने से भी प्राप्ति नहीं कर सकते हैं। खुशी के लिए कहा जाता है - “खुशी जैसी कोई खुराक नहीं।'' तो वेल्थ भी है खुशी और खुशी हेल्थ भी है और नाम ही खुशी है तो हैपी तो है ही। तो खुशी में तीनों ही चीज़े हैं। और बाप ने अविनाशी खुशी का खजाना दिया है, बाप का खजाना गंवाना नहीं। तो सदा खुश रहते हो?
बापदादा ने होमवर्क दिया तो खुश रहना है और खुशी बांटनी है क्योंकि खुशी ऐसी चीज़ है जो जितनी बांटेंगे उतनी बढ़ेगी। अनुभव करके देखा है! किया है ना अनुभव? अगर खुशी बांटते हैं तो बांटने से पहले अपने पास बढ़ती है। खुश करने वाले से पहले स्वयं खुश होते हैं। तो सभी ने होमवर्क किया है? किया है? जिसने किया है वह हाथ उठाओ। जिसने किया है - खुश रहना है, कारण नहीं निवारण करना है, समाधान स्वरूप बनना है। हाथ उठाओ। अभी यह तो नहीं कहेंगे ना - यह हो गया! बापदादा के पास कई बच्चों ने अपनी रिजल्ट भी लिखी है कि हम कितने परसेन्ट ओ.के. रहे हैं। और लक्ष्य रखेंगे तो लक्ष्य से लक्षण स्वत: ही आते हैं। अच्छा।
सेवा का टर्न गुजरात का है:- अच्छा है, बापदादा को भी खुशी होती है कि बच्चे अपने पुण्य का खाता भिन्न-भिन्न विधि से आगे बढ़ा रहे हैं। बापदादा ने सुनाया ना - तीन खाते जमा करने हैं - एक अपने पुरुषार्थ से जमा हुआ खाता और दूसरा है - दूसरी आत्माओं को सन्तुष्ट करने में पुण्य का खाता। सन्तुष्टता पुण्य का खाता जमा करती है और तीसरा है मन्सा-वाचा-स्नेह सम्बन्ध द्वारा सेवा का खाता। तो तीनों खाते चेक करना। तीनों में कमी नहीं होनी चाहिए। तो नम्बरवन लेंगे? जमा के खाते में नम्बरवन लेना। क्या करेंगे? कमाल करेंगे ना! करो कमाल, लो नम्बर। ठीक है बैठ जाओ। तो सभी सदा मन को बिजी रखो क्योंकि मन ही धोखा देता, मन में ही टेन्शन आता, मन ही यहाँ वहाँ भागता है। तो मन को बिजी रखना अर्थात् सम्पन्न स्थिति में जल्दी से जल्दी स्थित रहना। बापदादा कहते हैं जब स्थूल कर्मेन्द्रियों को मेरा कहते हो, मेरा हाथ कहते हो, तो हाथ को कन्ट्रोल कर सकते हो ना! जहाँ चाहे जैसे चाहे वैसे करते हो ना! तो मन मेरा है, या आप मन के हो? मन के मालिक भी तो आप हो ना! मैं मन तो नहीं है ना? मन राजा तो नहीं है, आत्मा राजा है। तो कन्ट्रोलिंग पावर, रूलिंग पावर धारण करेंगे तो मन आपका अच्छे ते अच्छा नम्बरवन सहयोगी साथी बन जायेगा। करके देखो। सिर्फ मालिक बनो, राजा बनो।
डबल विदेशी:- विदेशियों को अपना ओरीज्नल विदेश तो नहीं भूलता होगा। ओरीज्नल आप किस देश के हो, वह तो याद रहता है ना। इसलिए सभी आपको कहते हैं डबल विदेशी। सिर्फ विदेशी नहीं हो, डबल विदेशी। तो आपको अपना स्वीट होम कभी भूलता नहीं होगा। जैसे डबल विदेशी हैं वैसे डबल सेवा मन्सा भी, वाचा भी साथ-साथ करते चलो। मन्सा शक्ति द्वारा आत्माओं की आत्मिक वृत्ति बनाओ। वायुमण्डल बनाओ।
अच्छा है - हर सीजन में, हर टर्न में आ जाते हैं। यह सभी को खुशी होती है। तो उड़ते चलो और उड़ाते चलो। अच्छा है, रिजल्ट में देखा है कि अभी अपने को परिवर्तन करने में भी फास्ट जा रहे हैं। तो स्व के परिवर्तन की गति विश्व परिवर्तन की गति बढ़ाता है। अच्छा।
बापदादा की रूहानी ड्रिल याद है ना! अभी बापदादा हर बच्चे से चाहे नये हैं, चाहे पुराने हैं, चाहे छोटे हैं चाहे बड़े हैं, छोटे और ही समान बाप जल्दी बन सकते हैं। तो अभी सेकण्ड में जहाँ मन को लगाने चाहो वहाँ मन एकाग्र हो जाए। यह एकाग्रता की ड्रिल सदा ही करते चलो। अभी एक सेकण्ड में मन के मालिक बन मैं और मेरा बाबा संसार है, दूसरा न कोई, इस एकाग्र स्मृति में स्थित हो जाओ। अच्छा।
चारों ओर के सर्व तीव्र पुरुषार्थी बच्चों को सदा उमंग-उत्साह के पंखों से उड़ती कला के अनुभवी मूर्त बच्चों को, सदा अपने स्वमान की सीट पर सेट रहने वाले बच्चों को, सदा रहमदिल बन विश्व की आत्माओं को मन्सा शक्ति द्वारा कुछ न कुछ अंचली सुख-शान्ति की देने वाले दयालु, कृपालु बच्चों को, सदा बाप के स्नेह में समाये हुए दिलतख्तनशीन बच्चों को, बापदादा का यादप्यार और नमस्ते।