संस्कृत
… उसका है विकारों की आग का धुआँ और ज्ञानी तू आत्माओं के फरिश्ते रूप से सदा दुआयें निकलती। ... (अव्यक्त मुरली - 31 December 1987)
धूम्र
Smoke
పొగ