अव्यक्त मुरली
... मैं अच्छा ज्ञानी हूँ, मैं ज्ञानी तू आत्मा, योगी तू आत्मा हूँ। यह सुनहरी जंजीर कहाँ-कहाँ सदा बन्धनमुक्त बनने नहीं देती।
13 April 1982
संस्कृत
Here and there
అక్కడక్కడ; ఎక్కడెక్కడో
किस किस जगह