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30 Nov 2008
“फुलस्टॉप लगाकर, सम्पूर्ण पवित्रता की धारणा कर, मनसा सकाश द्वारा सुख-शान्ति की अंचली देने की सेवा करो”
30 November 2008 · हिंदी
आज बापदादा चारों ओर के महान बच्चों को देख रहे हैं। क्या महानता की? जो दुनिया असम्भव कहती है उसको सहज सम्भव कर दिखाया, वह है पवित्रता का व्रत। आप सभी ने पवित्रता का व्रत धारण किया है ना! बापदादा से परिवर्तन के दृढ़ संकल्प का व्रत लिया है। व्रत करना अर्थात् वृत्ति का परिवर्तन करना। क्या वृत्ति परिवर्तन की? संकल्प किया हम सब भाई-भाई हैं, इस वृत्ति परिवर्तन के लिए भक्ति में भी कितनी बातों में व्रत लेते हैं लेकिन आप सबने बाप से दृढ़ संकल्प किया क्योंकि ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन है पवित्रता और पवित्रता द्वारा ही परमात्म प्यार और सर्व परमात्म प्राप्तियां हो रही हैं। महात्मा जिसको कठिन समझते हैं, असम्भव समझते हैं और आप पवित्रता को स्वधर्म समझते हो। बापदादा देख रहे हैं कई अच्छे अच्छे बच्चे हैं जिन्होंने संकल्प किया और दृढ़ संकल्प द्वारा प्रैक्टिकल में परिवर्तन दिखा रहे हैं। ऐसे चारों ओर के महान बच्चों को बापदादा बहुत-बहुत दिल से दुआयें दे रहे हैं।
आप सभी भी मन-वचन-कर्म, वृत्ति दृष्टि द्वारा पवित्रता का अनुभव कर रहे हो ना! पवित्रता की वृत्ति अर्थात् हर एक आत्मा प्रति शुभ भावना, शुभ कामना। दृष्टि द्वारा हर एक आत्मा को आत्मिक स्वरूप में देखना, स्वयं को भी सहज सदा आत्मिक स्थिति में अनुभव करना। ब्राह्मण जीवन का महत्व मन-वचन-कर्म की पवित्रता है। पवित्रता नहीं तो ब्राह्मण जीवन का जो गायन है - सदा पवित्रता के बल से स्वयं भी स्वयं को दुआ देते हैं, क्या दुआ देते? पवित्रता द्वारा सदा स्वयं को भी खुश अनुभव करते और दूसरों को भी खुशी देते। पवित्र आत्मा को तीन विशेष वरदान मिलते हैं - एक स्वयं स्वयं को वरदान देता, जो सहज बाप का प्यारा बन जाता। 2- वरदाता बाप का नियरेस्ट और डियरेस्ट बच्चा बन जाता इसलिए बाप की दुआयें स्वत: प्राप्त होती हैं और सदा प्राप्त होती हैं। 3- जो भी ब्राह्मण परिवार के विशेष निमित्त बने हुए हैं, उन्हों द्वारा भी दुआयें मिलती रहती। तीनों की दुआओं से सदा उड़ता रहता और उड़ाता रहता। तो आप सभी भी अपने से पूछो, अपने को चेक करो तो पवित्रता का बल और पवित्रता का फल सदा अनुभव करते हो? सदा रूहानी नशा, दिल में फलक रहती है? कभी-कभी कोई-कोई बच्चे जब अमृतवेले मिलन मनाते हैं, रूहरिहान करते हैं तो मालूम है क्या कहते हैं? पवित्रता द्वारा जो अतीन्द्रिय सुख का फल मिलता है वह सदा नहीं रहता। कभी रहता है, कभी नहीं रहता क्योंकि पवित्रता का फल ही अतीन्द्रिय सुख है। तो अपने से पूछो मैं कौन हूँ? सदा अतीन्द्रिय सुख की अनुभूति में रहते वा कभी-कभी? अपने को कहलाते क्या हो? सभी अपना नाम लिखते तो क्या लिखते हो? बी.के. फलाना.., बी.के. फलानी और अपने को मास्टर सर्वशक्तिवान कहते हो। सब मास्टर सर्वशक्तिवान हैं ना! जो समझते हैं हम मास्टर सर्वशक्तिवान हैं, सदा, कभी-कभी नहीं, वह हाथ उठाओ। सदा? देखना, सोचना, सदा हैं? डबल फारेनर्स नहीं हाथ उठा रहे हैं, थोड़े उठा रहे हैं। टीचर्स उठाओ, हैं सदा? ऐसे ही नहीं उठाओ, जो सदा हैं, वह सदा वाले उठाओ। बहुत थोड़े हैं। पाण्डव उठाओ, पीछे वाले, बहुत थोड़े हैं। सारी सभा नहीं हाथ उठाती। अच्छा मास्टर सर्वशक्तिवान हैं तो उस समय शक्तियां कहाँ चली जाती? मास्टर हैं, इसका अर्थ ही है, मास्टर तो बाप से भी ऊंचा होता है। तो चेक करो - अवश्य प्युरिटी के फाउण्डेशन में कुछ कमजोर हो। क्या कमजोरी है? मन में अर्थात् संकल्प में कमजोरी है, बोल में कमजोरी है या कर्म में कमजोरी है, या स्वप्न में भी कमजोरी है क्योंकि पवित्र आत्मा का मन-वचन-कर्म, सम्बन्ध-सम्पर्क, स्वप्न स्वत: शक्तिशाली होता है। जब व्रत ले लिया, वृत्ति को बदलने का, तो कभी कभी क्यों? समय को देख रहे हो, समय की पुकार, भक्तों की पुकार, आत्माओं की पुकार सुन रहे हो और अचानक का पाठ तो सबको पक्का है। तो फाउण्डेशन की कमजोरी अर्थात् पवित्रता की कमजोरी। अगर बोल में भी शुभ भावना, शुभ कामना नहीं, पवित्रता के विपरीत है तो भी सम्पूर्ण पवित्रता का जो सुख है अतीन्द्रिय सुख, उसका अनुभव नहीं हो सकता क्योंकि ब्राह्मण जीवन का लक्ष्य ही है असम्भव को सम्भव करना। उसमें जितना और उतना शब्द नहीं आता। जितना चाहिए उतना नहीं है। तो कल अमृतवेले विशेष हर एक अपने को चेक करना, दूसरे को नहीं सोचना, दूसरे को नहीं देखना, लेकिन अपने को चेक करना कि कितनी परसेन्टेज़ में पवित्रता का व्रत निभा रहे हैं? चार बातें चेक करना - एक वृत्ति, दूसरा - सम्बन्ध-सम्पर्क में शुभ भावना, शुभ कामना, यह तो है ही ऐसा, नहीं। लेकिन उस आत्मा प्रति भी शुभ भावना। जब आप सबने अपने को विश्व परिवर्तक माना है, हैं सभी? अपने को समझते हैं कि हम विश्व परिवर्तक हैं? हाथ उठाओ। इसमें तो बहुत अच्छे हाथ उठाये हैं, मुबारक हो। लेकिन बापदादा आप सभी से एक प्रश्न पूछते हैं? प्रश्न पूछें? जब आप विश्व परिवर्तक हो तो विश्व परिवर्तन में यह प्रकृति, 5 तत्व भी आ जाते हैं, उन्हों को परिवर्तन कर सकते और अपने को या साथियों को, परिवार को परिवर्तन नहीं कर सकते? विश्व परिवर्तक अर्थात् आत्माओं को, प्रकृति को, सबको परिवर्तन करना। तो अपना वायदा याद करो, सभी ने बाप से वायदा कई बार किया है लेकिन बापदादा यही देख रहे हैं कि समय बहुत फास्ट आ रहा है, सबकी पुकार बहुत बढ़ रही है, तो पुकार सुनने वाले और परिवर्तन करने वाले उपकारी आत्मायें कौन हैं? आप ही हो ना!
बापदादा ने पहले भी सुनाया है, पर उपकारी वा विश्व उपकारी बनने के लिए तीन शब्द को खत्म करना पड़ेगा - जानते तो हो। जानने में तो होशियार हो, बापदादा जानता है सभी होशियार हैं। एक पहला शब्द है परचिंतन, दूसरा है परदर्शन और तीसरा है परमत, इन तीनों ही पर शब्द को खत्म कर, पर उपकारी बनेंगे। यह तीन शब्द ही विघ्न रूप बनते हैं। याद हैं ना! नई बात नहीं है। तो कल चेक करना अमृतवेले, बापदादा भी चक्कर लगाता है, देखेंगे क्या कर रहे हो? क्योंकि अभी आवश्यकता है - समय प्रमाण, पुकार प्रमाण हर एक दु:खी आत्मा को मन्सा सकाश द्वारा सुख शान्ति की अंचली देने का। कारण क्या है? बापदादा कभी-कभी बच्चों को अचानक देखते हैं, क्या कर रहे हैं? क्योंकि बच्चों से प्यार तो है ना, और बच्चों के साथ जाना है, अकेला नहीं जाना है। साथ चलेंगे ना! साथ चलेंगे? यह आगे वाले नहीं उठा रहे हैं? नहीं चलेंगे? चलना है ना! बापदादा भी बच्चों के कारण इन्तजार कर रहे हैं, एडवांस पार्टी आपकी दादियां, आपके विशेष पाण्डव, आप सबका भी इन्तजार कर रहे हैं, उन्होंने भी दिल में पक्का वायदा किया है कि हम सब साथ में चलेंगे। थोड़े नहीं, सबके सब साथ चलेंगे। तो कल अमृतवेले अपने को चेक करना कि किस बात की कमी है? क्या मन्सा की, वाणी की वा कर्मणा में आने की। बापदादा ने एक बारी सभी सेन्टर्स का चक्कर लगाया। बतायें क्या देखा? कमी किस बात की है? तो यही दिखाई दिया कि एक सेकण्ड में परिवर्तन कर फुलस्टॉप लगाना, इसकी कमी है। जब तक फुलस्टॉप लगाओ तब तक पता नहीं क्या क्या हो जाता है। बापदादा ने सुनाया है कि एक लास्ट टाइम की लास्ट एक घड़ी होगी जिसमें फुलस्टॉप लगाना पड़ेगा। लेकिन देखा क्या? लगाना फुलस्टॉप है लेकिन लग जाता है क्वामा, दूसरों की बातें याद करते, यह क्यों होता, यह क्या होता, इसमें आश्चर्य की मात्रा लग जाती। तो फुलस्टॉप नहीं लगता लेकिन क्वामा, आश्चर्य की निशानी और क्यूं, क्वेश्चन की क्यू लग जाती है। तो इसको चेक करना। अगर फुलस्टॉप लगाने की आदत नहीं होगी तो अन्त मते सो गति श्रेष्ठ नहीं होगी। ऊंची नहीं होगी। इसलिए बापदादा होमवर्क दे रहे हैं कि खास कल अमृतवेले चेक करना और चेंज करना पड़ेगा। तो अभी 18 जनवरी तक सेकण्ड में फुलस्टॉप लगाने का बार-बार अभ्यास करो। जनवरी मास में सभी को बाप समान बनने का उमंग आता है ना, तो 18 जनवरी में सभी को अपनी चिटकी लिख करके बाक्स में डालना है कि 18 तारीख तक क्या रिजल्ट रही? फुलस्टॉप लगा वा और मात्रायें लग गई? पसन्द है? पसन्द है? कांध हिलाओ क्योंकि बापदादा का बच्चों से बहुत प्यार है, अकेला नहीं जाने चाहता, तो क्या करेंगे? अभी फास्ट तीव्र पुरुषार्थ करो। अभी ढीला-ढाला पुरुषार्थ सफलता नहीं दिला सकेगा।
प्युरिटी को पर्सनैलिटी, रीयल्टी, रॉयल्टी कहा जाता है। तो अपनी रॉयल्टी को याद करो। अनादि रूप में भी आप आत्मायें बाप के साथ अपने देश में विशेष आत्मायें हो। जैसे आकाश में विशेष सितारे चमकते हैं ऐसे आप अनादि रूप में विशेष सितारा चमकते हो। तो अपने अनादि काल की रॉयल्टी याद करो। फिर सतयुग में जब आते हैं तो देवता रूप की रॉयल्टी याद करो। सभी के सिर पर रॉयल्टी की लाइट का ताज है। अनादि, आदि कितनी रॉयल्टी है। फिर द्वापर में आओ तो भी आपके चित्रों जैसी रॉयल्टी और किसकी नहीं है। नेताओं के, अभिनेताओं के, धर्म आत्माओं के चित्र बनते हैं लेकिन आपके चित्रों की पूजा और आपके चित्रों की विशेषता कितनी रॉयल है। चित्र को देखकर ही सब खुश हो जाते हैं। चित्रों द्वारा भी कितनी दुआयें लेते हैं। तो यह सब रॉयल्टी पवित्रता की है। पवित्रता ब्राह्मण जीवन का जन्म सिद्ध अधिकार है। पवित्रता की कमी समाप्त होना चाहिए। ऐसे नहीं हो जायेगा, उस समय वैराग्य आ जायेगा तो हो जायेगा, बातें बहुत अच्छी-अच्छी सुनाते हैं। बाबा आप फिक्र नहीं करो हो जायेगा। लेकिन बापदादा को इस जनवरी मास तक स्पेशल पवित्रता में हर एक को सम्पन्न करना है। पवित्रता सिर्फ ब्रह्मचर्य नहीं, व्यर्थ संकल्प भी अपवित्रता है। व्यर्थ बोल, व्यर्थ बोल रोब के, जिसको कहते हैं क्रोध का अंश रोब, वह भी समाप्त हो जाए। संस्कार ऐसे बनाओ जो दूर से ही आपको देख पवित्रता के वायब्रेशन लें क्योंकि आप जैसी पवित्रता, जो रिजल्ट में आत्मा भी पवित्र, शरीर भी पवित्र, डबल पवित्रता प्राप्त है।
जब भी कोई भी बच्चा पहले आता है तो बाप का वरदान कौन सा मिलता है? याद है? पवित्र भव, योगी भव। तो दोनों बातें - एक पवित्रता और दूसरा फुलस्टॉप, योगी। पसन्द है? बापदादा अमृतवेले चक्र लगायेंगे, सेन्टरों के भी चक्र लगायेंगे। बापदादा तो एक सेकण्ड में चारों ओर का चक्र लगा सकता। तो इस जनवरी, अव्यक्ति मास का कोई नया प्लैन बनाओ। मन्सा सेवा, मन्सा स्थिति और अव्यक्त कर्म और बोल इसको बढ़ाओ। तो 18 जनवरी को बापदादा सभी की रिजल्ट देखेंगे। प्यार है ना, 18 जनवरी को अमृतवेले से प्यार की ही बातें करते हो। सभी उल्हना देते हैं, बाबा अव्यक्त क्यों हुआ? तो बाप भी उल्हना देता है कि साकार में होते बाप समान कब तक बनेंगे?
तो आज थोड़ा सा विशेष अटेन्शन खिंचवा रहे हैं। प्यार भी कर रहे हैं, सिर्फ अटेन्शन नहीं खिंचवा रहे हैं, प्यार भी है क्योंकि बाप यही चाहते हैं कि मेरा एक बच्चा भी रह नहीं जाए। हर कर्म की श्रीमत चेक करना, अमृतवेले से लेके रात तक जो भी हर कर्म की श्रीमत मिली है वह चेक करना। मजबूत है ना! साथ चलना है ना! चलना है तो हाथ उठाओ। चलना है? अच्छा, टीचर्स? पीछे वाले, कुर्सी वाले, पाण्डव हाथ उठाओ। तो समान बनेंगे तब तो हाथ में हाथ देकर चलेंगे ना! करना ही है, बनना ही है, यह दृढ़ संकल्प करो। 15-20 दिन यह दृढ़ता रहती है फिर धीरे-धीरे थोड़ा अलबेलापन आ जाता है। तो अलबेलेपन को खत्म करो। ज्यादा में ज्यादा देखा है एक मास फुल उमंग रहता है, दृढ़ता रहती है फिर एक मास के बाद थोड़ा-थोड़ा अलबेलापन शुरू हो जाता है। तो अभी यह वर्ष समाप्त होगा, तो क्या समाप्त करेंगे? वर्ष समाप्त करेंगे कि वर्ष के साथ जो भी जिस संकल्प में भी धारणा में भी कमजोरी है, उसको समाप्त करेंगे? करेंगे ना! हाथ नहीं उठाते हैं? तो ऑटोमेटिक दिल में यह रिकार्ड बजना चाहिए, अब घर चलना है। सिर्फ चलना नहीं है लेकिन राज्य में भी आना है। अच्छा, जो पहली बारी आये हैं, बापदादा से मिलने, वह हाथ उठाओ, खड़े हो जाओ।
तो पहली बारी आने वालों को विशेष मुबारक दे रहे हैं। लेट आये हो, टूलेट में नहीं आये हो। लेकिन तीव्र पुरुषार्थ का वरदान सदा याद रखना, तीव्र पुरुषार्थ करना ही है। करेंगे, गे गे नहीं करना, करना ही है। लास्ट सो फास्ट और फर्स्ट आना है। अच्छा।
सेवा का टर्न पंजाब ज़ोन का है, (पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, जम्मू कश्मीर, उत्तरांचल)- अच्छा है, यह चांस जो मिलता है वह अच्छा लगता है? स्पेशल है और पंजाब का अर्थ ही है, जैसे स्थूल नदियां कहते हैं पावन करती हैं तो पंजाब के पतित-पावन बच्चे, पंजाब को पावन आत्मायें बनाने में तो फर्स्ट नम्बर होंगे ना। देखो, पंजाब की एक बात की विशेषता है - पहले-पहले आदि जो भाषण किया है, वह महात्मा के निमंत्रण पर किया है। याद है ना! बच्ची को (दादी जानकी को) याद है। और कहाँ भी महात्माओं की स्टेज पर भाषण का निमंत्रण मिले, पहला-पहला, यह नहीं हुआ है। तो जब पंजाब शेर कहा जाता है, तो शेर का काम तो किया। सभी साधू सन्त के बीच में ललकार की, तो पंजाब शेर तो हुआ ना। अभी भी बच्चे ने (अमीरचन्द भाई ने) लिस्ट दी है, जो बापदादा ने कहा था वी.आई.पी. हर एक के सम्बन्ध में कितने कितने हैं, वह हर वर्ग वाले लिस्ट देवें तो बापदादा को बच्चे की लिस्ट मिली, लिस्ट दी है, ताली बजाओ। अच्छा है। लिस्ट देखी अच्छी है, लेकिन अभी इन्हों की पीठ करो, वी.आई.पी. के वी.आई.पी. ही नहीं रहें, पहली स्टेज में तो लाया है लेकिन दूसरी स्टेज है - हर कार्य में समय प्रति समय स्नेही सहयोगी बनें। और फिर उसके आगे ब्राह्मण परिवार के साथी बनें, अपने को ब्राह्मण परिवार का समझें। कहाँ कहाँ के वी.आई.पी. आगे बढ़े हैं, बापदादा उन्हों को मुबारक भी दे रहे हैं लेकिन जितनी सेवा इस ज्ञान सरोवर शुरू होते हुई है, जितने वर्ग बने हैं, जितना समय और जितनी सेवा हुई है, उस प्रमाण वी.आई.पी. घरेलू बन जायें, फोन करो पहुंच जायें, हाँ जी, हाँ जी करें, साथी तो बनें। अभी हर वर्ग यह लक्ष्य रखे सहज सहयोगी बनें, ऐसे नहीं मान देवें, खास सीट देवें तभी आवें। थोड़ा होमली बनाओ। अपने सेन्टर पर, आबू में नहीं आ सकते हैं मानो, तो अपने ज़ोन में भी जो बड़े बड़े सेन्टर हैं उसमें उन्हों को बुलाओ। कम से कम तीन मास या 6 मास में उनसे मिलते रहो, होमली बनाते जाओ। तो समय पर जब यह हालतें बदलेंगी तो समय पर काम में तो आवें। तो सभी वर्ग वाले सुन रहे हैं। कहाँ कहाँ बने भी हैं लेकिन थोड़े बने हैं। तो पंजाब वाले शेर हो, हाँ दोनों (अचल बहन, प्रेम बहन) हाथ उठाओ। सब शेर हैं। तो पहला नम्बर आप करना, पंजाब के वी.आई.पी. होमली बन जायें। महात्मायें भी होमली बन जायें। निमंत्रण पर नहीं आवें खुद कहें हम आयेंगे। अच्छे हैं, वृद्धि तो की है पंजाब में। बापदादा का भी पंजाब से प्यार है, क्यों प्यार है? जम्मू कश्मीर उसको भी अपना बनाया है लेकिन थोड़ा और, जम्मू कश्मीर का नाम मशहूर है, चाहे पाकिस्तान में, चाहे अमेरिका में... सबकी नज़र जम्मू कश्मीर पर है। तो वहाँ कोई जलवा निकालो, ऐसे नहीं कि वहाँ की बहिनें करें, आप सहयोग देकर उसमें कुछ ऐसा वन्डरफुल बात करके दिखाओ। थोड़ा अटेन्शन दो नाम बाला हो जायेगा। जिस पर झगड़ा है वहाँ शान्ति का झण्डा फहराओ। ठीक है। संख्या तो बहुत है, एक निर्विघ्न बनो और दूसरा सेवा में शान्ति का झण्डा लहराओ। सबको दिखाई दे झण्डा कि हाँ अशान्ति के स्थान में शान्ति का झण्डा लहर रहा है। ठीक है। अच्छा।
डबल फारेनर्स:- अभी डबल विदेशी नहीं, अभी डबल तीव्र पुरुषार्थी। ठीक है ना। डबल है? डबल पुरुषार्थी हैं? अच्छा है, आप सबका नाम भी कि इतने देशों के आते हैं, इतने देशों में सेवाकेन्द्र हैं, यह सुनके भी सभी खुश हो जाते हैं। भले अपने अपने देशों में झण्डा नहीं लहराया है, एक लण्डन में झण्डा है, एक ही लण्डन में झण्डा है या और कोई देश में भी है? है हाथ उठाओ। खुली रीति से झण्डा लगा हुआ है? कोई एतराज नहीं? अच्छा। कितने देशों में है? 10-12 देशों में होगा? तो यह भी अच्छा है। लेकिन बापदादा को खुशी है कि कई आत्माओं के दिल में तो झण्डा लहराया है। तो आपको देखके खुश होते हैं कि यह वर्ल्ड के सेवाधारी हैं, सिर्फ भारत के सेवाधारी नहीं, विश्व के सेवाधारी हैं। जो टाइटल है ना विश्व सेवाधारी। तो सिर्फ भारत नहीं लेकिन विश्व के कोने कोने में है और अभी तो अच्छी सेवा बढ़ा रहे हैं ना। मुस्लिम देशों में भी सेवा अच्छी है। बापदादा ने समाचार सुना है, अच्छा है। कराची का भी प्लैन बनाया है, अच्छा है। जो होगा ड्रामा अच्छे ते अच्छा होगा। नये नये शहरों में जो बच्चे रहे हुए हैं, वहाँ अभी सेवा के उमंग-उत्साह में है और सबसे हिम्मत वाली आपकी एक बच्ची है, वह हिम्मत वाली है। बापदादा उनको रोज़ अमृतवेले वरदान देता है और बच्ची भी एक्यूरेट है। क्या नाम है? (वजीहा) ऐसा काम करके दिखाओ, हिम्मत वाली है, डरती नहीं है। और देखो अपने घर वालों को भी युक्ति से ठीक किया, होशियार है और नैरोबी वालों ने भी बहुत अच्छा पुरुषार्थ किया। उन्हों की विशेषता, नैरोबी के साइड की विशेषता यह है कि बहनें कम हो जाती हैं तो जो स्टूडेन्ट निकले हैं वह सेन्टर सम्भालते हैं, यह भी विशेषता है। तो सबकी विशेषता इकट्ठी करके हर एक अपने अपने स्थान को विशेष बनाओ। बाकी अच्छा है डबल पुरुषार्थी अच्छा पुरुषार्थ करके बढ़ रहे हैं लेकिन बाबा चार्ट देखेगा। जो कहा है ना समाचार देना, बापदादा वह चार्ट सम्पूर्ण पवित्रता का देखेंगे। लक्ष्य सबका बहुत अच्छा है लेकिन बीच में अलबेलेपन की माया बहुत आती है। अभी उसकी विदाई करना। अलबेलेपन की विदाई और फुलस्टॉप का आह्वान। ठीक है ना, करेंगे ना। अलबेलापन नहीं दिखाना। बापदादा ने अलबेलेपन के बहुत खेल देख लिये हैं। अभी सेकण्ड में फुलस्टॉप का खेल दिखाना। हिसाब में भी देखो तो सबसे सहज फुलस्टॉप है। पेन्सिल रखो फुलस्टॉप आ गया। अच्छा। डबल विदेशी सदा टर्न लेते रहते हैं, यह बहुत अच्छा है, लेते रहना। अच्छा।
कैड ग्रुप (हार्ट पेशेन्ट):- अच्छा नया कोई प्लैन बनाया है? (डा. गुप्ता से) अच्छा, कार्य तो चल रहा है। अभी कोशिश कर रहे हो, गवर्मेन्ट द्वारा आफिशियल सबको यह मालूम पड़े कि बिना खर्चे के हार्ट ठीक हो सकती है। पहले सब देखते हैं एक क्वेश्चन पूछते हैं, बापदादा से भी एक क्वेश्चन पूछा है, बतायें। कहते हैं कि ब्राह्मण बच्चों की हार्ट क्यों ठीक नहीं करते, वह क्यों वहाँ जाते? उन्हों की भी ट्रायल करो ना, यह है कि उन्हों की भी गलती है क्योंकि नियमों पर नहीं चलते, जो परहेज बताई जाती है, दूसरे परहेज पूरी करते हैं और ब्राह्मण जो हैं वह अपना घर समझके परहेज कम करते हैं लेकिन ब्राह्मणों में भी ऐसा कोई विशेष एक्जैम्पुल बनाओ जो ब्राह्मण भी समझें कि हम भी कर सकते हैं। बाकी काम अच्छा है, आवाज पहुंचा है लेकिन आवाज थोड़ा बड़ा करो तो चारों ओर फैले। शुभ भावना, शुभ कामना भी कार्य कर रही है। हर एक वर्ग को, आगे से आगे जाना है। अच्छा है। और आगे बढ़ो और बढ़ाते चलो। अच्छा।
चारों ओर के महान पवित्र आत्माओं को बापदादा का विशेष दिल की दुआयें, दिल का प्यार और दिल में समाने की मुबारक हो। बापदादा जानते हैं कि जब भी पधरामनी होती है तो ईमेल या पत्र भिन्न-भिन्न साधनों से चारों ओर के बच्चे यादप्यार भेजते हैं और बापदादा को सुनाने के पहले कोई देवे, उसके पहले ही सबके यादप्यार पहुंच जाते हैं क्योंकि ऐसे जो सिकीलधे याद करने वाले बच्चे हैं उनका कनेक्शन बहुत फास्ट पहुंचता है, आप लोग तीन चार दिन के बाद सम्मुख मिलते हो लेकिन उन्हों का यादप्यार जो सच्चे पात्र आत्मायें हैं उनका उसी घड़ी बापदादा के पास यादप्यार पहुंच जाता है। तो जिन्होंने भी दिल में भी याद किया, साधन नहीं मिला, उन्हों का भी यादप्यार पहुंचा है, और बापदादा हर एक बच्चे को पदम पदम पदम गुणा यादप्यार का रेसपान्ड दे रहे हैं।
बाकी चारों ओर अभी दो शब्द की लात-तात लगाओ - एक फुलस्टॉप और दूसरा सम्पूर्ण पवित्रता सारे ब्राह्मण परिवार में फैलानी है। जो कमजोर हैं उनको भी सहयोग देके बनाओ। यह बड़ा पुण्य है। छोड़ नहीं दो, यह तो है ही ऐसा, यह तो बदलना ही नहीं है, यह श्राप नहीं दे दो, पुण्य का काम करो। बदलके दिखायेंगे, बदलना ही है। उनकी उम्मीदें बढ़ाओ, गिरे हुए को गिराओ नहीं, सहारा दो, शक्ति दो। तो चारों ओर खुशनसीब खुशमिजाज, खुशी बांटने वाले बच्चों को बहुत-बहुत यादप्यार और नमस्ते।
दादियों से: (दादियों को सम्भालने वाली सेवा साथी बहनें बापदादा के सम्मुख हैं):
आप सब भी राजयुक्त हो ना! आप जो निमित्त हो तो आप भी ऐसा अपना रूप बनाओ, स्थिति बनाओ, जो सब समझें कि दादी के तरफ से इन्हों से भी कुछ मिला। सिर्फ प्रोग्राम मिला नहीं, लेकिन इन्हों से भी कुछ मिला, आप दृष्टि से तो दे सकते, चेहरे से भी दे सकते हैं। चेहरे और चलन से सेवा में नम्बरवन। हो सकता है? सभी को बापदादा विशेष प्यार करता है। (यह तीनों हाथ नहीं उठाती हैं) बाबा जब कहता है तो हाथ उठाना चाहिए, इससे याद रहता है। आज आप चार ही लाडले हो, इनकी भी (मोहिनी बहन मुन्नी बहन की) ब्राह्मणियां कहाँ हैं, उनको भी बुलाओ। देखो आप सबको ड्युटी बहुत अच्छी मिली हुई है, सभी से परिचित हो जाती हो। कोई भी सभी से परिचित नहीं होता है लेकिन आप लोगों की ड्युटी ऐसी है जो सारे ब्राह्मण परिवार से परिचित हो जाती हो। कोई भी नाम लेगा, नीलू, हंसा, प्रवीणा, लीला, रूकमणि... तो कहेंगे हाँ जानते हैं नाम। तो आप लोग एक सैम्पुल हो, तो सैम्पुल देखकर सौदा होता है। तो जो भी निमित्त हो, सभी समझो हम एक्जैम्पुल है। दादियों की एक्जैम्पुल। कहेंगी यह भी ऐसी है, जैसे मोहजीत की कहानी सुनी है ना - कहते हैं गेट वाला भी मोहजीत, तो अन्दर क्या होगा। तो आप निमित्त हो ना, यह भी एक वरदान है। यह ड्युटी मिलना, यह भी एक वरदान है, कितने नजदीक हो। तो नजदीक का फायदा तो उठाना चाहिए। तो अच्छा है। बापदादा को खुशी है आप लोगों को देखके। आप सब ठीक हो सिर्फ थोड़ा और दादियों का गुण धारण करते जाओ। अच्छा।
परदादी से:- आपकी शक्ल ही सेवा करती है। आपको देख करके ब्रह्मा बाप बहुत याद आता सबको क्योंकि फालो किया है और बच्चों में यह भासना नहीं आयेगी लेकिन आपने फालो किया है। फिर भी मधुबन निवासी तो हो गई। मधुबन निवासी। बहुत अच्छा, (दादी को सम्भालने वाली बहिनों से) यह सम्भाल भी अच्छी कर रही हैं। इन्हों को भी सर्टीफिकेट है, अच्छा प्यार से कर रही हैं।
शान्तामणि दादी से:- (आंख का आपरेशन कराया है) यह तो ठीक हो जायेगी। लेकिन हिम्मत है। आप सबकी हिम्मत को देखकर औरों में भी हिम्मत आती है क्योंकि बीज फाउण्डेशन बहुत अच्छा है, फीलिंग में नहीं आते। बीमारी की फीलिंग नहीं है। अपनी मस्ती में रहते। पढ़ाई पर अटेन्शन है। सेवा पर अटेन्शन है। उसकी दुआयें मिल रही हैं। डॉक्टर्स भी बहुत खुश होते हैं, क्योंकि चिल्लाते नहीं है ना, हाय हाय नहीं करते।
निर्वैर भाई ने हैदराबाद एकडेमी में चल रहे निर्माण कार्य के बारे में बापदादा को सुनाया:
जो कार्य रहा हुआ है, उसमें यह जो भी आन्ध्र प्रदेश के हैं, उसकी टीचर्स को भी इकट्ठा करो क्योंकि धन जायेगा ना तो मन भी जायेगा, सभी सहयोग देवें, कुछ कम हुआ तो यज्ञ तो है ही लेकिन अगर उनका धन नहीं पड़ता है तो मन भी नहीं जाता। इसलिए उन्हों का संगठन इकट्ठा करो और हर एक को उमंग दिलाओ। बाकी रहा हुआ कार्य समाप्त करना है उसमें जो अंगुली दे, वह अवश्य दे। तो सबको इकट्ठा करो, आन्ध्र प्रदेश थोड़ा आगे आये। अच्छा है, अभी तो टर्न आयेगा ना आन्ध्र प्रदेश का। उसमें भी आप विशेष आन्ध्र प्रदेश का संगठन करो और हर मास में या 6 मास में कोई न कोई जाये या कोई मीटिंग बुलाओ, तो जब सब ज़ोन मिल रहे हैं तो यह भी मिलें ना, तो वह अच्छा हो जाये। ठीक है ना।
रमेश भाई से:- तबियत ठीक है। (बाम्बे का समाचार सुनाया) सेन्टर्स तो सब सेफ हैं। फिर भी बॉम्बे बाप का है। बाप का परिवार है लेकिन जो बाप ने कहा फुलस्टॉप और तपस्या, इसको जरूर बढ़ाना है। यह तो कुछ भी नहीं है, घर से बाहर नहीं निकल सकेंगे, खिड़की नहीं खोल सकेंगे तो क्या करेंगे? इससे भी बहुत कुछ होना है।
बृजमोहन भाई से:- (ओ.आर.सी. के सिन्धी सम्मेलन का समाचार सुनाया) कनेक्शन तो हुआ, अभी उनकी पीठ करना। अभी और कनेक्शन में लाना। यह जो फिल्म वाला है वह आपके काम आ सकता है। यह (सिन्धी) रह नहीं जावें, फिर भी बाप का अवतरण हुआ है तो रह नहीं जावे। आपका अपना काम है सन्देश देना, यह नहीं कहें कि हमको नहीं सुनाया। (आशा बहन से) थोड़ा मेहनत करनी पड़ती है। बाप से मुहब्बत है इसलिए मेहनत नहीं लगती। (अभी ओ.आर.सी. सेवा में दौड़ रहा है) चारों ओर दौड़ना चाहिए। जो भी ज़ोन थोड़े कमजोर हैं आपस में नहीं मिलते, वहाँ कोई न कोई हर मास जाना चाहिए, संगठन करना चाहिए। (दादी जानकी ने कहा, इसमें गुल्जार दादी का भी सहयोग चाहिए) एक दो का सहयोग तो चाहिए।
8 बड़ी बहनों ने 5 दिन मौन भट्ठी की है, वे बापदादा के सामने आई:- अच्छा यह फरिश्ते आये हैं। फरिश्ते हो ना। यह फरिश्तों की महफिल है। अच्छा, स्व में उमंग-उत्साह रख के किया ना, तो उसकी बहुत-बहुत मुबारक है। थोड़े हैं, आयेंगे नहीं आयेंगे, नहीं सोचा। करना ही है। तो 8 रत्न हो गये। तो 8 रत्नों को देखके सभी को उमंग आयेगा। यह जनवरी मास का जो प्रोग्राम बनायेंगे ना, उसमें कोई न कोई ऐसी बात रखो जो सबको उमंग आवे। और उसकी पीठ करें। आप तो खुद जिम्मेवार थे ना तो आपने अपनी जिम्मेवारी सम्भाली। लेकिन दूसरों को पुल करना पड़ेगा और वायुमण्डल ऐसे हो जाये जैसे मधुबन में, प्रैक्टिकल फर्क पड़ जाये। हर एक को सेन्टर में ऐसा वायुमण्डल बनाना है, जो गायन है ना घर घर में मन्दिर। तो घर घर में चैतन्य फरिश्तों का मन्दिर हो। बाकी बापदादा खुश है, आप लोगों ने हिम्मत करके किया यह अच्छा किया। तो बापदादा कहेंगे हिम्मते ग्रुप। एक्जैम्पुल बनें। अच्छा लगा ना, बहुत अच्छा लगा, सहज भी लगा। मेहनत नहीं करनी पड़ी। उठना भी अच्छा नहीं लगता होगा। तो ऐसे घूम जाओ, (सभा की ओर) सभी ताली बजाओ, देखो, इन्होंने किस बात की हिम्मत रखी? और बापदादा और परिवार भी सहयोगी बना, इन्होंने 5 दिन फुलस्टॉप लगाने की भट्ठी की। और 5 ही दिन लगातार कोई भी मिस नहीं हुआ। आदि शुरू भी की और अन्त तक आपके सामने हैं। तो यह पुरुषार्थ अच्छा किया, ऐसे आप लोग भी ग्रुप ग्रुप बनाके अन्दर ही अन्दर पुरुषार्थ करना। चलो दो जने हो, सेन्टर पर कोई एक सखी को साथी बना दो और अपने बड़े को सुना दो तो क्या है, भट्ठी करेंगे ना, विशेष नियम बनायेंगे तो उसकी मदद मिलेगी। तो बापदादा को अच्छा लगा। अभी सहज पुरुषार्थ हो गया ना। अभी वहाँ जाके भूल नहीं जाना। बातों में नहीं आ जाना। फुलस्टॉप में नम्बरवन लेना। दूसरों को करायेंगे भी और अपना अनुभव भी सुनायेंगे। अच्छा। ओम् शान्ति।