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Time-समय - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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245 unique murli dates in this topic
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200 murlis in हिंदी
18/01/1969
“पिताश्री जी के अव्यक्त होने के बाद - अव्यक्त वतन से प्राप्त दिव्य सन्देश”
23/01/1969
“अस्थियां हैं स्थिति की स्मृति दिलाने वाली”
25/01/1969
“समर्पण की ऊंची स्टेज - श्वांसों-श्वांस स्मृति”
06/02/1969
“महिमा सुनना छोड़ो - महान् बनो”
15/02/1969
“सौभाग्यशाली वह है जिसका बाप, टीचर और सतगुरू से पूरा कनेक्शन है”
04/03/1969
“जो बीता उसे हो ली करना ही होली मनाना है”
13/03/1969
“प्रेम और शक्ति के गुणों की समानता”
08/05/1969
“मंसा, वाचा, कर्मणा को ठीक करने की युक्ति”
17/05/1969
“जादू मंत्र का दर्पण”
16/06/1969
“बड़े-से-बड़ा त्याग - अवगुणों का त्याग”
06/07/1969
“सच्ची जेवर बनने के लिए अपनी सब खामियों को निकाल स्वच्छ बनो”
16/07/1969
“किसी भी कार्य में सफल होने का साधन - साहस को नहीं छोड़ना और आपसी स्नेह कायम रखना”
23/07/1969
“सफलता का आधार - परखने की शक्ति”
27/08/1969
“मदद लेने का साधन है - हिम्मत”
15/09/1969
“याद के आधार पर यादगार”
28/09/1969
“पूरे कोर्स का सार - कथनी करनी एक करो”
16/10/1969
“परखने की शक्ति को तीव्र बनाओ”
25/10/1969
“माला का मणका बनने के लिए विजयी बनो”
09/11/1969
“भविष्य को जानने की युक्तियां”
20/12/1969
“प्लेन याद से प्लैन्स की सफलता”
18/01/1970
“सम्पूर्ण विल करने से विल-पावर की प्राप्ति”
22/01/1970
“अन्तिम कोर्स - मन के भावों को जानना”
23/01/1970
“सेवा में सफलता पाने की युक्तियां”
24/01/1970
“ब्राह्मणों का मुख्य धंधा - समर्पण करना और कराना”
25/01/1970
“यादगार कायम करने की विधि”
26/01/1970
“याद के यात्रा की सम्पूर्ण स्टेज”
02/02/1970
“आत्मिक पावर की परख”
05/03/1970
“जल चढ़ाना अर्थात् प्रतिज्ञा करना”
21/05/1970
“भिन्नता को मिटाने की युक्ति”
28/05/1970
“हाई-जम्प देने के लिए हल्का बनो”
07/06/1970
“दिव्य मूर्त बनने की विधि”
18/06/1970
“वृद्धि के लिए टाइम-टेबुल की विधि”
29/06/1970
“समर्पण का विशाल रूप”
11/07/1970
“संगमयुग की डिग्री और भविष्य की प्रालब्ध”
24/07/1970
“बिन्दु रूप की स्थिति सहज कैसे बने?”
27/07/1970
“अव्यक्त बनने के लिए मुख्य शक्तियों की धारणा”
30/07/1970
“महारथी अर्थात् महानता”
22/10/1970
“फुल की निशानी - फ्लोलेस”
23/10/1970
“महारथी बनने का पुरुषार्थ”
29/10/1970
“दीपमाला का सच्चा रहस्य”
05/11/1970
“डिले इज़ डेन्जर”
30/11/1970
“वर्कर्स की वन्डरफुल सर्कस”
03/12/1970
“सामना करने के लिए कामनाओं का त्याग”
31/12/1970
“अमृतवेले से परिवर्तन शक्ति का प्रयोग”
21/01/1971
“अब नहीं तो कब नहीं”
26/01/1971
“ज़िम्मेवारी उठाने से फायदे”
20/05/1971
“विधाता, वरदाता-पन की स्टेज़”
02/02/1972
“प्रीत बुद्धि की निशानियाँ”
28/02/1972
“समय का इन्तार न कर एवररेडी रहने वाला ही सच्चा पुरुषार्थी”
15/03/1972
“त्याग और भाग्य”
27/04/1972
“लकी और लवली बनने का पुरुषार्थ”
03/05/1972
“‘लॉ मेकर' बनो, ‘लॉ ब्रेकर' नहीं”
20/05/1972
“सार-स्वरूप बनने से संकल्प और समय की बचत”
14/06/1972
“स्व-स्थिति में स्थित होने का पुरुषार्थ वा निशानियां”
21/06/1972
“विश्व-महाराजन बनने वालों की विश्व-कल्याणकारी स्टेज”
24/06/1972
“एवररेडी बन अन्तिम समय का आह्वान करो”
11/07/1972
“निर्णय शक्ति को बढ़ाने की कसौटी - ‘साकार बाप के चरित्र'”
14/07/1972
“अन्तिम सेवा के लिए रमतायोगी बनो”
18/07/1972
“कमजोरियों की समाप्ति समारोह करने वाले ही तीव्र पुरुषार्थी हैं”
19/07/1972
“संगठन का महत्व तथा संगठन द्वारा सर्टीफिकेट”
28/07/1972
“अपवित्रता और वियोग को संघार करने वाली शक्तियाँ ही असुर संघारनी हैं”
02/08/1972
“हर कर्म विधिपूर्वक करने से सिद्धि की प्राप्ति”
04/08/1972
“सर्विसएबुल, सेंसीबुल और इसेंसफुल की निशानियां”
19/09/1972
“मजबूरियों को समाप्त करने का साधन - मजबूती”
22/11/1972
“अन्तिम सर्विस का अन्तिम स्वरूप”
04/12/1972
“महावीर आत्माओं की रूहानी ड्रिल”
24/12/1972
“संगमयुगी श्रेष्ठ आत्माओं की जिम्मेवारी”
08/07/1973
“समय की पुकार”
21/07/1973
“रूहानी जज़ और जिस्मानी जज़”
23/01/1974
“अब शक्ति ‘सेना नाम' को सार्थक बनाओ”
09/01/1975
“सम्पूर्ण बनने में सबसे बड़ा विघ्न अलबेलापन”
02/02/1975
“स्व-चिन्तक, शुभ-चिन्तक और विश्व-परिवर्तक”
29/08/1975
“अब विधि की स्टेज पार कर सिद्धि-स्वरूप बनना है (जन्माष्टमी पर)”
02/09/1975
“दिल रूपी तख्त-नशीन ही सतयुगी विश्व के राज्य का अधिकारी”
13/09/1975
“विश्व-परिवर्तन ही ब्राह्मण जीवन का विशेष कर्तव्य है”
03/10/1975
“विशाल रूप से सेवा करने के लिए विशाल बुद्धि बनो”
23/10/1975
“इन्तज़ार को छोड़कर इन्तज़ाम करो!”
18/01/1976
“समर्थी दिवस के रूप में स्मृति दिवस”
12/01/1977
“संगमयुग पर ‘बालक सो मालिक’ बनने वालों के तीनों कालों का साक्षात्कार”
18/01/1977
“18 जनवरी का विशेष महत्व”
23/04/1977
“बाप द्वारा प्राप्त सर्व खज़ानों को बढ़ाने का आधार है - महादानी बनना”
03/05/1977
“कर्मों की अति गुह्य गति”
05/05/1977
“वरदानी, महादानी और दानी आत्माओं के लक्षण”
09/05/1977
“सम्पूर्ण पवित्रता ही विशेष पार्ट बजाने वालों का श्रृंगार है”
11/05/1977
“सम्पन्न स्वरूप की निशानी - शुभ चिन्तन और शुभ चिन्तक”
19/05/1977
“आत्म ज्ञान और परमात्म ज्ञान में अन्तर”
28/05/1977
“बापदादा के सदा दिल तख्तनशीन, समान बच्चों के लक्षण”
31/05/1977
“विश्व कल्याण करने का सहज साधन है श्रेष्ठ संकल्पों की एकाग्रता”
10/06/1977
“मन्त्र और यन्त्र के निरन्तर प्रयोग से अन्तर समाप्त”
12/06/1977
“कमल पुष्प समान स्थिति ही ब्राह्मण जीवन का श्रेष्ठ आसन है”
14/06/1977
“देश और विदेश का सैर-समाचार”
16/06/1977
“एक ही पढ़ाई द्वारा नम्बरवार पूज्य पद पाने का गुह्य रहस्य”
18/06/1977
“योग की पॉवरफुल स्टेज कैसे बने?”
20/06/1977
“सदा सहजयोगी बनने का साधन है - महादानी बनना”
25/06/1977
“पवित्रता की सम्पूर्ण स्टेज”
30/06/1977
“बापदादा की हर ब्राह्मण आत्मा प्रति श्रेष्ठ कामनाएं”
02/01/1978
“ज्ञान चन्द्रमा और ज्ञान सितारों की रिमझिम”
18/01/1978
“बापदादा की सेवा का रिटर्न”
24/01/1978
“निरन्तर सेवाधारी”
16/02/1978
“माया और प्रकृति द्वारा सत्कार प्राप्त आत्मा ही सर्वश्रेष्ठ आत्मा है”
03/12/1978
“पाप और पुण्य की गुह्य गति”
10/12/1978
“विस्तार को न देख सार अर्थात् बिन्दु को देखो”
21/12/1978
“हर कल्प की अति समीप आत्माओं का रुप, रेखा और वेला”
01/01/1979
“नए वर्ष के लिए बाप द्वारा कराया गया दृढ़ संकल्प”
02/01/1979
“सम्पूर्णता की समीपता ही विश्व-परिवर्तन की घड़ी की समीपता है”
14/01/1979
“ब्राह्मण जीवन का विशेष आधार - पवित्रता”
18/01/1979
“18 जनवरी ‘स्मृति दिवस' को सदाकाल का समर्थी दिवस मनाने के लिए शिक्षाएं”
30/01/1979
“सर्व बन्धनों से मुक्ति की युक्ति”
12/11/1979
“अमृतवेले के वरदानी समय में पुकार सुनो और उपकार करो”
14/11/1979
“ब्राह्मण जीवन की निशानी है - सदा खुशी की झलक”
21/11/1979
“विश्व परिवर्तन के लिए सर्व की एक ही वृत्ति का होना आवश्यक”
03/12/1979
“विश्व-कल्याणकारी ही विश्व का मालिक बन सकता है”
04/01/1980
“वर्तमान राज्य-अधिकारी ही भविष्य राज्य-अधिकारी”
14/01/1980
“रूहानी सेनानियों से रूहानी कमाण्डर की मुलाकात”
23/01/1980
“पवित्रता का महत्व”
04/02/1980
“भाग्य विधाता बाप और भाग्यशाली बच्चे”
09/03/1981
“मेहनत समाप्त कर निरन्तर योगी बनो”
13/03/1981
“डबल रूप से सेवा द्वारा ही आध्यात्मिक जागृति”
19/03/1981
“विश्व के राज्य-अधिकारी कैसे बने?”
21/03/1981
“सच्ची होली कैसे मनायें?”
29/03/1981
“ज्ञान का सार ‘मैं और मेरा बाबा’”
11/04/1981
“सत्यता की शक्ति से विश्व परिवर्तन”
15/04/1981
“नम्बरवन तकदीरवान की विशेषताएं”
04/10/1981
“संकल्प शक्ति का महत्व”
24/10/1981
“सच्चे आशिक की निशानी”
27/10/1981
“दीपावली के शुभ अवसर पर अव्यक्त बापदादा के उच्चारे हुए महावाक्य”
29/12/1981
“दूरदेशी बच्चों से दूर देशी बापदादा का मिलन”
16/01/1982
“‘मेरा बाबा आ गया’ - यह आवाज बुलन्द करने के लिए चारों ओर फरिश्ते रूप में छा जाओ”
18/01/1982
“18 जनवरी जिम्मेवारी के ताजपोशी का दिवस”
14/03/1982
“बापदादा द्वारा देश-विदेश का समाचार”
22/03/1982
“राज्य-सत्ता और धर्म-सत्ता के अधिकारी बच्चों से बापदादा की मुलाकात”
11/04/1982
“व्यर्थ का त्याग कर समर्थ बनो”
30/04/1982
“विस्तार को बिन्दी में समाओ”
31/12/1982
“बापदादा की सर्व अलौकिक फ्रैण्ड्स को बधाई”
05/04/1983
“सर्व वरदान आपका जन्म-सिद्ध अधिकार”
10/11/1983
“सहज शब्द की लहर को समाप्त कर साक्षात्कार मूर्त बनो”
18/02/1984
“ब्राह्मण जीवन - अमूल्य जीवन”
28/02/1984
“बिन्दु और बूंद का रहस्य”
07/03/1984
“कर्मातीत, वानप्रस्थी आत्मायें ही तीव्रगति की सेवा के निमित्त”
03/05/1984
“परमात्मा की सबसे पहली श्रेष्ठ रचना - ब्राह्मण”
19/11/1984
“बेहद की वैराग्य वृत्ति से सिद्धियों की प्राप्ति”
26/11/1984
“सच्चे सहयोगी ही सच्चे योगी”
03/12/1984
“सर्व समर्थ शिक्षक के श्रेष्ठ शिक्षाधारी बनो”
10/12/1984
“पुराने खाते की समाप्ति की निशानी”
12/12/1984
“विशेष आत्माओं का फर्ज”
26/12/1984
“सत्यता की शक्ति”
07/01/1985
“नये वर्ष का विशेष संकल्प - ‘मास्टर विधाता बनो’”
18/02/1985
“संगमयुग - तन, मन, धन और समय सफल करने का युग”
21/02/1985
“शीतलता की शक्ति”
06/03/1985
“होली का रूहानी रहस्य”
15/03/1985
“मेहनत से छूटने का सहज साधन - निराकारी स्वरूप की स्थिति”
06/01/1986
“संगमयुग - जमा करने का युग”
08/01/1986
“धरती के ‘होली’ सितारे”
18/01/1986
“मन्सा शक्ति तथा निर्भयता की शक्ति”
18/02/1986
“निरन्तर सेवाधारी तथा निरन्तर योगी बनो”
20/02/1986
“उड़ती कला से सर्व का भला”
01/03/1986
“होली हंस बुद्धि, वृत्ति दृष्टि और मुख”
07/04/1986
“तपस्वी-मूर्त, त्याग मूर्त, विधाता ही विश्व-राज्य अधिकारी”
09/04/1986
“सच्चे सेवाधारी की निशानी”
31/12/1986
“पास्ट, प्रेजन्ट और फ्यूचर को श्रेष्ठ बनाने की विधि”
18/01/1987
“कर्मातीत स्थिति की निशानियां”
21/01/1987
“स्व-राज्य अधिकारी ही विश्व-राज्य अधिकारी”
02/11/1987
“स्व-परिवर्तन का आधार - ‘सच्चे दिल की महसूसता’”
10/11/1987
“शुभचिन्तक-मणि बन विश्व को चिन्ताओं से मुक्त करो”
14/11/1987
“पूज्य देव आत्मा बनने का साधन - पवित्रता की शक्ति”
18/11/1987
“साइलेन्स पॉवर जमा करने का साधन - अन्तर्मुखी और एकान्तवासी स्थिति”
27/11/1987
“बेहद के वैरागी ही सच्चे राजऋषि”
14/12/1987
“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन की तीन विशेषताएं”
31/12/1987
“नया वर्ष - बाप समान बनने का वर्ष”
18/01/1988
“‘स्नेह’ और ‘शक्ति’ की समानता”
07/03/1988
“भाग्यवान बच्चों के श्रेष्ठ भाग्य की लिस्ट”
15/03/1988
“नई दुनिया की तस्वीर का आधार वर्तमान श्रेष्ठ ब्राह्मण जीवन”
11/11/1989
“दिव्यता - संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रृंगार है”
15/11/1989
“सच्चे दिल पर साहेब राज़ी”
19/11/1989
“तन, मन, धन और जन का भाग्य”
21/12/1989
“त्रिदेव रचयिता द्वारा वरदानों की प्राप्ति”
13/12/1990
“तपस्या का फाउण्डेशन बेहद का वैराग्य”
13/02/1991
“विश्व परिवर्तन में तीव्रता लाने का साधन एकाग्रता की शक्ति एवं एकरस स्थिति”
25/02/1991
“सोच और कर्म में समानता लाना ही परमात्म प्यार निभाना है”
18/12/1991
“हर कर्म में ऑनेस्टी (इमानदारी) का प्रयोग करना ही तपस्या है”
18/01/1992
“बाप से स्नेह की निशानी - बाप समान बनना”
08/04/1992
“ब्रह्मा बाप से प्यार की निशानी है - अव्यक्त फरिश्ता बनना”
15/04/1992
“ब्राह्मणों की दो निशानियाँ - निश्चय और विजय”
31/12/1992
“सफलता प्राप्त करने का साधन - सब कुछ सफल करो”
18/02/1993
“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”
07/03/1993
“होली मनाना अर्थात् हाइएस्ट और होलीएस्ट बनना”
18/11/1993
“संगमयुग के राजदुलारे सो भविष्य के राज्य अधिकारी”
09/12/1993
“एकाग्रता की शक्ति से दृढ़ता द्वारा सहज सफलता की प्राप्ति”
14/12/1994
“समय, संकल्प, बोल द्वारा कमाई जमा करने का आधार - तीन बिन्दी लगाना”
26/01/1995
“ब्रह्मा बाप के और दो कदम - फ़रमानबरदार-व़फादार”
16/03/1995
“सर्व प्राप्ति सम्पन्न आत्मा की निशानी - सन्तुष्टता और प्रसन्नता”
13/12/1995
“व्यर्थ बोल, डिस्टर्ब करने वाले बोल से स्वयं को मुक्त कर बोल की एकॉनॉमी करो”
22/03/1996
“ब्राह्मण जीवन की पर्सनैलिटी - सब प्रश्नों से पार सदा प्रसन्नचित्त रहना”
23/02/1997
“साथी को साथ रख साक्षी और खुशनुमा के तख्तनशीन बनो”
13/11/1997
“संगमयुग के प्राप्तियों की प्रालब्ध का अनुभव करो, मास्टर दाता, महा सहयोगी बनो”
31/12/1997
“इस नये वर्ष को मुक्ति वर्ष मनाओ, सफल करो सफलता लो”
18/01/1998
“सकाश देने की सेवा करने के लिए लगावमुक्त बन बेहद के वैरागी बनो”
31/01/1998
“पास विद ऑनर बनने के लिए हर खजाने का एकाउण्ट चेक करके जमा करो”
30/03/1998
“सर्व प्राप्तियों की स्मृति इमर्ज कर अचल स्थिति का अनुभव करो और जीवन मुक्त बनो”
21/11/1998
“सेवा के साथ देह में रहते विदेही अवस्था का अनुभव बढ़ाओ”
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