Time-समय
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18/01/1969“पिताश्री जी के अव्यक्त होने के बाद - अव्यक्त वतन से प्राप्त दिव्य सन्देश”23/01/1969“अस्थियां हैं स्थिति की स्मृति दिलाने वाली”25/01/1969“समर्पण की ऊंची स्टेज - श्वांसों-श्वांस स्मृति”06/02/1969“महिमा सुनना छोड़ो - महान् बनो”15/02/1969“सौभाग्यशाली वह है जिसका बाप, टीचर और सतगुरू से पूरा कनेक्शन है”04/03/1969“जो बीता उसे हो ली करना ही होली मनाना है”13/03/1969“प्रेम और शक्ति के गुणों की समानता”08/05/1969“मंसा, वाचा, कर्मणा को ठीक करने की युक्ति”17/05/1969“जादू मंत्र का दर्पण”16/06/1969“बड़े-से-बड़ा त्याग - अवगुणों का त्याग”06/07/1969“सच्ची जेवर बनने के लिए अपनी सब खामियों को निकाल स्वच्छ बनो”16/07/1969“किसी भी कार्य में सफल होने का साधन - साहस को नहीं छोड़ना और आपसी स्नेह कायम रखना”23/07/1969“सफलता का आधार - परखने की शक्ति”27/08/1969“मदद लेने का साधन है - हिम्मत”15/09/1969“याद के आधार पर यादगार”28/09/1969“पूरे कोर्स का सार - कथनी करनी एक करो”16/10/1969“परखने की शक्ति को तीव्र बनाओ”25/10/1969“माला का मणका बनने के लिए विजयी बनो”09/11/1969“भविष्य को जानने की युक्तियां”20/12/1969“प्लेन याद से प्लैन्स की सफलता”18/01/1970“सम्पूर्ण विल करने से विल-पावर की प्राप्ति”22/01/1970“अन्तिम कोर्स - मन के भावों को जानना”23/01/1970“सेवा में सफलता पाने की युक्तियां”24/01/1970“ब्राह्मणों का मुख्य धंधा - समर्पण करना और कराना”25/01/1970“यादगार कायम करने की विधि”26/01/1970“याद के यात्रा की सम्पूर्ण स्टेज”02/02/1970“आत्मिक पावर की परख”05/03/1970“जल चढ़ाना अर्थात् प्रतिज्ञा करना”21/05/1970“भिन्नता को मिटाने की युक्ति”28/05/1970“हाई-जम्प देने के लिए हल्का बनो”07/06/1970“दिव्य मूर्त बनने की विधि”18/06/1970“वृद्धि के लिए टाइम-टेबुल की विधि”29/06/1970“समर्पण का विशाल रूप”11/07/1970“संगमयुग की डिग्री और भविष्य की प्रालब्ध”24/07/1970“बिन्दु रूप की स्थिति सहज कैसे बने?”27/07/1970“अव्यक्त बनने के लिए मुख्य शक्तियों की धारणा”30/07/1970“महारथी अर्थात् महानता”22/10/1970“फुल की निशानी - फ्लोलेस”23/10/1970“महारथी बनने का पुरुषार्थ”29/10/1970“दीपमाला का सच्चा रहस्य”05/11/1970“डिले इज़ डेन्जर”30/11/1970“वर्कर्स की वन्डरफुल सर्कस”03/12/1970“सामना करने के लिए कामनाओं का त्याग”31/12/1970“अमृतवेले से परिवर्तन शक्ति का प्रयोग”21/01/1971“अब नहीं तो कब नहीं”26/01/1971“ज़िम्मेवारी उठाने से फायदे”20/05/1971“विधाता, वरदाता-पन की स्टेज़”02/02/1972“प्रीत बुद्धि की निशानियाँ”28/02/1972“समय का इन्तार न कर एवररेडी रहने वाला ही सच्चा पुरुषार्थी”15/03/1972“त्याग और भाग्य”27/04/1972“लकी और लवली बनने का पुरुषार्थ”03/05/1972“‘लॉ मेकर' बनो, ‘लॉ ब्रेकर' नहीं”20/05/1972“सार-स्वरूप बनने से संकल्प और समय की बचत”14/06/1972“स्व-स्थिति में स्थित होने का पुरुषार्थ वा निशानियां”21/06/1972“विश्व-महाराजन बनने वालों की विश्व-कल्याणकारी स्टेज”24/06/1972“एवररेडी बन अन्तिम समय का आह्वान करो”11/07/1972“निर्णय शक्ति को बढ़ाने की कसौटी - ‘साकार बाप के चरित्र'”14/07/1972“अन्तिम सेवा के लिए रमतायोगी बनो”18/07/1972“कमजोरियों की समाप्ति समारोह करने वाले ही तीव्र पुरुषार्थी हैं”19/07/1972“संगठन का महत्व तथा संगठन द्वारा सर्टीफिकेट”28/07/1972“अपवित्रता और वियोग को संघार करने वाली शक्तियाँ ही असुर संघारनी हैं”02/08/1972“हर कर्म विधिपूर्वक करने से सिद्धि की प्राप्ति”04/08/1972“सर्विसएबुल, सेंसीबुल और इसेंसफुल की निशानियां”19/09/1972“मजबूरियों को समाप्त करने का साधन - मजबूती”22/11/1972“अन्तिम सर्विस का अन्तिम स्वरूप”04/12/1972“महावीर आत्माओं की रूहानी ड्रिल”24/12/1972“संगमयुगी श्रेष्ठ आत्माओं की जिम्मेवारी”08/07/1973“समय की पुकार”21/07/1973“रूहानी जज़ और जिस्मानी जज़”23/01/1974“अब शक्ति ‘सेना नाम' को सार्थक बनाओ”09/01/1975“सम्पूर्ण बनने में सबसे बड़ा विघ्न अलबेलापन”02/02/1975“स्व-चिन्तक, शुभ-चिन्तक और विश्व-परिवर्तक”29/08/1975“अब विधि की स्टेज पार कर सिद्धि-स्वरूप बनना है (जन्माष्टमी पर)”02/09/1975“दिल रूपी तख्त-नशीन ही सतयुगी विश्व के राज्य का अधिकारी”13/09/1975“विश्व-परिवर्तन ही ब्राह्मण जीवन का विशेष कर्तव्य है”03/10/1975“विशाल रूप से सेवा करने के लिए विशाल बुद्धि बनो”23/10/1975“इन्तज़ार को छोड़कर इन्तज़ाम करो!”18/01/1976“समर्थी दिवस के रूप में स्मृति दिवस”12/01/1977“संगमयुग पर ‘बालक सो मालिक’ बनने वालों के तीनों कालों का साक्षात्कार”18/01/1977“18 जनवरी का विशेष महत्व”23/04/1977“बाप द्वारा प्राप्त सर्व खज़ानों को बढ़ाने का आधार है - महादानी बनना”03/05/1977“कर्मों की अति गुह्य गति”05/05/1977“वरदानी, महादानी और दानी आत्माओं के लक्षण”09/05/1977“सम्पूर्ण पवित्रता ही विशेष पार्ट बजाने वालों का श्रृंगार है”11/05/1977“सम्पन्न स्वरूप की निशानी - शुभ चिन्तन और शुभ चिन्तक”19/05/1977“आत्म ज्ञान और परमात्म ज्ञान में अन्तर”28/05/1977“बापदादा के सदा दिल तख्तनशीन, समान बच्चों के लक्षण”31/05/1977“विश्व कल्याण करने का सहज साधन है श्रेष्ठ संकल्पों की एकाग्रता”10/06/1977“मन्त्र और यन्त्र के निरन्तर प्रयोग से अन्तर समाप्त”12/06/1977“कमल पुष्प समान स्थिति ही ब्राह्मण जीवन का श्रेष्ठ आसन है”14/06/1977“देश और विदेश का सैर-समाचार”16/06/1977“एक ही पढ़ाई द्वारा नम्बरवार पूज्य पद पाने का गुह्य रहस्य”18/06/1977“योग की पॉवरफुल स्टेज कैसे बने?”20/06/1977“सदा सहजयोगी बनने का साधन है - महादानी बनना”25/06/1977“पवित्रता की सम्पूर्ण स्टेज”30/06/1977“बापदादा की हर ब्राह्मण आत्मा प्रति श्रेष्ठ कामनाएं”02/01/1978“ज्ञान चन्द्रमा और ज्ञान सितारों की रिमझिम”18/01/1978“बापदादा की सेवा का रिटर्न”24/01/1978“निरन्तर सेवाधारी”16/02/1978“माया और प्रकृति द्वारा सत्कार प्राप्त आत्मा ही सर्वश्रेष्ठ आत्मा है”03/12/1978“पाप और पुण्य की गुह्य गति”10/12/1978“विस्तार को न देख सार अर्थात् बिन्दु को देखो”21/12/1978“हर कल्प की अति समीप आत्माओं का रुप, रेखा और वेला”01/01/1979“नए वर्ष के लिए बाप द्वारा कराया गया दृढ़ संकल्प”02/01/1979“सम्पूर्णता की समीपता ही विश्व-परिवर्तन की घड़ी की समीपता है”14/01/1979“ब्राह्मण जीवन का विशेष आधार - पवित्रता”18/01/1979“18 जनवरी ‘स्मृति दिवस' को सदाकाल का समर्थी दिवस मनाने के लिए शिक्षाएं”30/01/1979“सर्व बन्धनों से मुक्ति की युक्ति”12/11/1979“अमृतवेले के वरदानी समय में पुकार सुनो और उपकार करो”14/11/1979“ब्राह्मण जीवन की निशानी है - सदा खुशी की झलक”21/11/1979“विश्व परिवर्तन के लिए सर्व की एक ही वृत्ति का होना आवश्यक”03/12/1979“विश्व-कल्याणकारी ही विश्व का मालिक बन सकता है”04/01/1980“वर्तमान राज्य-अधिकारी ही भविष्य राज्य-अधिकारी”14/01/1980“रूहानी सेनानियों से रूहानी कमाण्डर की मुलाकात”23/01/1980“पवित्रता का महत्व”04/02/1980“भाग्य विधाता बाप और भाग्यशाली बच्चे”09/03/1981“मेहनत समाप्त कर निरन्तर योगी बनो”13/03/1981“डबल रूप से सेवा द्वारा ही आध्यात्मिक जागृति”19/03/1981“विश्व के राज्य-अधिकारी कैसे बने?”21/03/1981“सच्ची होली कैसे मनायें?”29/03/1981“ज्ञान का सार ‘मैं और मेरा बाबा’”11/04/1981“सत्यता की शक्ति से विश्व परिवर्तन”15/04/1981“नम्बरवन तकदीरवान की विशेषताएं”04/10/1981“संकल्प शक्ति का महत्व”24/10/1981“सच्चे आशिक की निशानी”27/10/1981“दीपावली के शुभ अवसर पर अव्यक्त बापदादा के उच्चारे हुए महावाक्य”29/12/1981“दूरदेशी बच्चों से दूर देशी बापदादा का मिलन”16/01/1982“‘मेरा बाबा आ गया’ - यह आवाज बुलन्द करने के लिए चारों ओर फरिश्ते रूप में छा जाओ”18/01/1982“18 जनवरी जिम्मेवारी के ताजपोशी का दिवस”14/03/1982“बापदादा द्वारा देश-विदेश का समाचार”22/03/1982“राज्य-सत्ता और धर्म-सत्ता के अधिकारी बच्चों से बापदादा की मुलाकात”11/04/1982“व्यर्थ का त्याग कर समर्थ बनो”30/04/1982“विस्तार को बिन्दी में समाओ”31/12/1982“बापदादा की सर्व अलौकिक फ्रैण्ड्स को बधाई”05/04/1983“सर्व वरदान आपका जन्म-सिद्ध अधिकार”10/11/1983“सहज शब्द की लहर को समाप्त कर साक्षात्कार मूर्त बनो”18/02/1984“ब्राह्मण जीवन - अमूल्य जीवन”28/02/1984“बिन्दु और बूंद का रहस्य”07/03/1984“कर्मातीत, वानप्रस्थी आत्मायें ही तीव्रगति की सेवा के निमित्त”03/05/1984“परमात्मा की सबसे पहली श्रेष्ठ रचना - ब्राह्मण”19/11/1984“बेहद की वैराग्य वृत्ति से सिद्धियों की प्राप्ति”26/11/1984“सच्चे सहयोगी ही सच्चे योगी”03/12/1984“सर्व समर्थ शिक्षक के श्रेष्ठ शिक्षाधारी बनो”10/12/1984“पुराने खाते की समाप्ति की निशानी”12/12/1984“विशेष आत्माओं का फर्ज”26/12/1984“सत्यता की शक्ति”07/01/1985“नये वर्ष का विशेष संकल्प - ‘मास्टर विधाता बनो’”18/02/1985“संगमयुग - तन, मन, धन और समय सफल करने का युग”21/02/1985“शीतलता की शक्ति”06/03/1985“होली का रूहानी रहस्य”15/03/1985“मेहनत से छूटने का सहज साधन - निराकारी स्वरूप की स्थिति”06/01/1986“संगमयुग - जमा करने का युग”08/01/1986“धरती के ‘होली’ सितारे”18/01/1986“मन्सा शक्ति तथा निर्भयता की शक्ति”18/02/1986“निरन्तर सेवाधारी तथा निरन्तर योगी बनो”20/02/1986“उड़ती कला से सर्व का भला”01/03/1986“होली हंस बुद्धि, वृत्ति दृष्टि और मुख”07/04/1986“तपस्वी-मूर्त, त्याग मूर्त, विधाता ही विश्व-राज्य अधिकारी”09/04/1986“सच्चे सेवाधारी की निशानी”31/12/1986“पास्ट, प्रेजन्ट और फ्यूचर को श्रेष्ठ बनाने की विधि”18/01/1987“कर्मातीत स्थिति की निशानियां”21/01/1987“स्व-राज्य अधिकारी ही विश्व-राज्य अधिकारी”02/11/1987“स्व-परिवर्तन का आधार - ‘सच्चे दिल की महसूसता’”10/11/1987“शुभचिन्तक-मणि बन विश्व को चिन्ताओं से मुक्त करो”14/11/1987“पूज्य देव आत्मा बनने का साधन - पवित्रता की शक्ति”18/11/1987“साइलेन्स पॉवर जमा करने का साधन - अन्तर्मुखी और एकान्तवासी स्थिति”27/11/1987“बेहद के वैरागी ही सच्चे राजऋषि”14/12/1987“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन की तीन विशेषताएं”31/12/1987“नया वर्ष - बाप समान बनने का वर्ष”18/01/1988“‘स्नेह’ और ‘शक्ति’ की समानता”07/03/1988“भाग्यवान बच्चों के श्रेष्ठ भाग्य की लिस्ट”15/03/1988“नई दुनिया की तस्वीर का आधार वर्तमान श्रेष्ठ ब्राह्मण जीवन”11/11/1989“दिव्यता - संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रृंगार है”15/11/1989“सच्चे दिल पर साहेब राज़ी”19/11/1989“तन, मन, धन और जन का भाग्य”21/12/1989“त्रिदेव रचयिता द्वारा वरदानों की प्राप्ति”13/12/1990“तपस्या का फाउण्डेशन बेहद का वैराग्य”13/02/1991“विश्व परिवर्तन में तीव्रता लाने का साधन एकाग्रता की शक्ति एवं एकरस स्थिति”25/02/1991“सोच और कर्म में समानता लाना ही परमात्म प्यार निभाना है”18/12/1991“हर कर्म में ऑनेस्टी (इमानदारी) का प्रयोग करना ही तपस्या है”18/01/1992“बाप से स्नेह की निशानी - बाप समान बनना”08/04/1992“ब्रह्मा बाप से प्यार की निशानी है - अव्यक्त फरिश्ता बनना”15/04/1992“ब्राह्मणों की दो निशानियाँ - निश्चय और विजय”31/12/1992“सफलता प्राप्त करने का साधन - सब कुछ सफल करो”18/02/1993“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”07/03/1993“होली मनाना अर्थात् हाइएस्ट और होलीएस्ट बनना”18/11/1993“संगमयुग के राजदुलारे सो भविष्य के राज्य अधिकारी”09/12/1993“एकाग्रता की शक्ति से दृढ़ता द्वारा सहज सफलता की प्राप्ति”14/12/1994“समय, संकल्प, बोल द्वारा कमाई जमा करने का आधार - तीन बिन्दी लगाना”26/01/1995“ब्रह्मा बाप के और दो कदम - फ़रमानबरदार-व़फादार”16/03/1995“सर्व प्राप्ति सम्पन्न आत्मा की निशानी - सन्तुष्टता और प्रसन्नता”13/12/1995“व्यर्थ बोल, डिस्टर्ब करने वाले बोल से स्वयं को मुक्त कर बोल की एकॉनॉमी करो”22/03/1996“ब्राह्मण जीवन की पर्सनैलिटी - सब प्रश्नों से पार सदा प्रसन्नचित्त रहना”23/02/1997“साथी को साथ रख साक्षी और खुशनुमा के तख्तनशीन बनो”13/11/1997“संगमयुग के प्राप्तियों की प्रालब्ध का अनुभव करो, मास्टर दाता, महा सहयोगी बनो”31/12/1997“इस नये वर्ष को मुक्ति वर्ष मनाओ, सफल करो सफलता लो”18/01/1998“सकाश देने की सेवा करने के लिए लगावमुक्त बन बेहद के वैरागी बनो”31/01/1998“पास विद ऑनर बनने के लिए हर खजाने का एकाउण्ट चेक करके जमा करो”30/03/1998“सर्व प्राप्तियों की स्मृति इमर्ज कर अचल स्थिति का अनुभव करो और जीवन मुक्त बनो”21/11/1998“सेवा के साथ देह में रहते विदेही अवस्था का अनुभव बढ़ाओ”
