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9 Mar 2009
“होली की विशेष सौगात फरिश्ता ड्रेस बीच-बीच में रोज धारण करना और पुराने संस्कारों की होली जलाना”
9 March 2009 · हिंदी
आज होलीएस्ट बाप अपने होली बच्चों से होली मनाने आये हैं। सभी बच्चे होली बच्चे हैं। आप सब भी होली मनाने आये हैं। सोचो, आप होली आत्माओं के ऊपर कौन सा रंग लगा जो होली बन गये! रंग तो अनेक हैं लेकिन आपके ऊपर कौन सा रंग लगा? सबसे श्रेष्ठ रंग कौन सा है, जिससे आप होली बन गये? सबसे बड़े ते बड़ा रंग है परमात्म संग का रंग। तो परमात्म संग का रंग लगने से सहज होली बन गये क्योंकि परमात्म संग अविनाशी संग का रंग है और रंग तो थोड़े समय के लिए होता लेकिन परमात्म संग का रंग लगने से सहज ही होली अर्थात् पवित्र बन गये। आत्मा का रंग अपवित्रता से पवित्र बन गया क्योंकि आप सबने परमात्मा को अपना कम्पैनियन बना लिया, कम्पनी बना लिया इसलिए कम्बाइन्ड हो गये। यह कम्बाइन्ड स्वरूप प्यारा लगता है ना! यह कम्बाइन्ड रूप कभी भी अलग नहीं हो सकता। अनुभव है ना! सदा कम्बाइन्ड रहते हो ना! अकेले नहीं। माया अकेले करने की कोशिश करती है लेकिन जो सदा कम्बाइन्ड रहने वाले हैं वह कभी भी अलग हो नहीं सकते क्योंकि माया अलग करके फिर पुराने संस्कारों को इमर्ज करती है और पुराने संस्कार इमर्ज हो जाते हैं तो शुद्ध संस्कार मर्ज हो जाते हैं। पुराने संस्कार हैं - अलबेलापन और आलस्य, यह भिन्न-भिन्न रूप में इमर्ज होने से कम्बाइन्ड रूप अलग हो जाता है। तो हर एक अपने को चेक करो कि सदा कम्बाइन्ड रहते हैं वा कभी अकेले भी हो जाते हैं? माया के अनेक स्वरूपों को तो जान गये हो ना! वह चतुराई से अपना रंग लगा देती है। अलग होना अर्थात् माया के रंग में रंगना। यह अलबेलापन, आलस्य बहुत भिन्न-भिन्न रूप से आता है और बच्चे भी उसको पहचान नहीं पाते हैं क्योंकि माया अपने तरफ आकर्षित कर देती है। यह अलबेलापन और आलस्य जो रावण का खजाना है, यह बाप का खजाना नहीं है, रावण के खजाने को बच्चे भी बड़े नशे से कहते हैं कि मैं चाहता नहीं हूँ, चाहती नहीं हूँ लेकिन मेरा संस्कार है। संस्कार मेरा कहने लगते हैं। क्या यह परमात्म खजाना है या रावण का खजाना है? उसको मेरा संस्कार कहना सोचो, राइट है? मेरा बना देना, यह माया की चतुराई है। बाप का खजाना प्यारा है या यह रावण का खजाना प्यारा है? कॉमन रीति से बच्चे अपने को छुड़ाने के लिए कह देते हैं मेरा संस्कार है, चाहती नहीं हूँ। तो सोचो क्या यह मेरा है! बाप कहते हैं कि रावण के खजाने को अपना बनाने से धीरे-धीरे जो शुभ संस्कार हैं वह समाप्त होते जाते हैं। परमात्म संग का रंग ढीला होता जाता है और माया का रंग इमर्ज हो जाता है। तो चलते-चलते अपने को ही चेक करना है, कौन सा रंग चढ़ा हुआ है? लोग भी होली में क्या करते हैं? पहले बुराई को जलाते हैं फिर रंग लगाते हैं, मनाते हैं। तो आपके ऊपर बापदादा ने संग का रंग तो लगाया लेकिन साथ में ज्ञान का रंग, शक्तियों का रंग, गुणों का रंग, वह लगाता रहता है।
तो सभी के ऊपर यह रूहानी रंग चढ़ा हुआ है ना! चढ़ा है? हाथ उठाओ। रूहानी रंग चढ़ गया, उतरने वाला तो नहीं है ना! जिसके ऊपर रूहानी रंग चढ़ गया, अविनाशी रंग चढ़ गया, उसके ऊपर और कोई रंग लग नहीं सकता। इस रंग से कितने होली बन गये हो? जो सारे कल्प में आप जैसा होली, पवित्र और कोई बन नहीं सकता। आपकी पवित्रता प्रभु के संग का रंग, परमात्म कम्बाइन्ड रहने का अनुभव सबसे न्यारा और प्यारा है। और जो भी होली, पवित्र बनते हैं तो उन्हों का शरीर पवित्र नहीं बनता, आत्मा पवित्र बनती है लेकिन आप ऐसे होली, पवित्र बनते हो जो आपका शरीर और आत्मा दोनों पवित्र रहते हैं और पवित्रता को सुख, शान्ति, प्रेम, आनंद की जननी कहा जाता है। जहाँ पवित्रता है वहाँ सुख शान्ति साथ में है ही है क्योंकि जहाँ जननी होती वहाँ बच्चे होते हैं क्योंकि बाप आ करके आपको ऐसा होली बनाता है जो आपके जड़ चित्र कितने विधि पूर्वक पूजे जाते हैं। कलियुग के लास्ट जन्म में भी आप अपने चित्र देखते हो कि कैसे विधि पूर्वक उन्हों की पूजा होती है, यह पवित्रता की विशेषता है और कितने भी महान आत्मायें, धर्म आत्मायें पवित्र बने हैं लेकिन मन्दिर किसी का भी नहीं बनता है। ऐसे विधि पूर्वक पूजा किसी की भी नहीं होती है और लास्ट जन्म तक आपके चित्र भी दुआयें देते रहते हैं। थोड़े समय का सुख शान्ति अनुभव कराते हैं। तो आपकी होली और दुनिया वालों की होली कितना फर्क है! भले मनोरंजन के लिए आप भी थोड़ा बहुत मनाते हो लेकिन सच्ची होली परमात्म संग के रंग की और कम्बाइन्ड स्वरूप की यथार्थ होली आप मनाते हो। होली को लोग भी भिन्न-भिन्न रूप से मनाते हैं, वैसे आप जानते हो कि होली शब्द का भी रहस्य है, जो आप ही जानते हो, आप ही मनाते हो। होली का अर्थ है, हो ली, बीत चुका सो बीत चुका। तो आप सबने पुरानी जीवन, पुरानी बातें, पुराने संस्कार, पुराने व्यर्थ संकल्प को हो ली कर दी ना। बीती सो बीती करना अर्थात् हो ली। तो ऐसे किया है? कि अभी भी कभी गलती से पुराने संस्कार आ जाते हैं? जब हमारा जन्म ही नया है, आप सभी मरजीवा बने हो ना! बने हो? मरजीवा बने हो? हाथ उठाओ। अच्छा। नया जन्म हो गया तो पुराना जन्म कैसे याद आता? पुराना, पुराना हो गया। अगर बीती बातें या संकल्प, संस्कार इमर्ज होता है तो क्या कहेंगे? होली मनाई? हो ली किया नहीं। परमात्म संग का रंग अच्छी तरह से लगा नहीं। परमात्म संग का रंग लगना अर्थात् पुराना जन्म भूल जाना। पुरानी बातें भूल जाना क्योंकि मरजीवा हो गये ना। जैसे शरीर से एक जन्म छोड़कर दूसरा लेते हो तो क्या पुराना जन्म याद रहता है? तो आप सभी अभी ब्राह्मण जन्म धारण करने वाले हो। तो पिछले जन्म के संस्कार जिसको गलती से कहते हो मेरे संस्कार हैं, क्या आपके हैं? ब्राह्मण जीवन के यह संस्कार हैं? कभी अलबेलापन, कभी रॉयल आलस्य, आलस्य के बहुत भिन्न-भिन्न रूप हैं। कभी इस पर क्लास करना। आलस्य कितने प्रकार के हैं और कितने रॉयल रूप से आते हैं!
तो ब्राह्मण जीवन अर्थात् नया जीवन, इसमें पुराना कुछ हो नहीं सकता। तो आज होली मनाने आये हो ना! तो होली अर्थात् हो ली, तो आज होली मनाना अर्थात् पुराने संस्कार की होली जलाना। जलाने के बाद ही मनाना होता है। तो अभी आपके मनाने का स्वरूप है। जला दिया, अभी मनाना है। प्रभु के संग के रंग का मजा लेने वाले हो। कम्बाइन्ड रहने का अनुभव करने वाले हो, क्यों? होलीएस्ट बाप ने आपके ऊपर होली बनने का, पवित्र बनने का रंग लगाया है।
तो आज कौन सी होली मना रहे हो? आज से विशेष कोई भी पुराने संस्कार को आने नहीं देना, यह होली मनानी है। मना सकते हो या कभी-कभी आ जायेंगे? यह रॉयल शब्द कि मैं करने नहीं चाहती थी, चाहता था लेकिन मेरे संस्कार हैं। यह शब्द आज दृढ़ संकल्प की विधि से समाप्त कर लो। ऐसी होली आज सदा के लिए मनाने की हिम्मत रखते हो? कि कभी-कभी मनायेंगे? जो समझते हैं कि आज से पुराने संस्कार की होली, हो ली, बीती सो बीती, जन्म नया है, वह पुराना जन्म खत्म। ऐसी हिम्मत रखने वाले आप बाप के मीठे-मीठे लाडले सिकीलधे बच्चे हो ना! तो यह संकल्प नहीं, दृढ़ संकल्प करने की हिम्मत है? हाथ उठाओ। देखो, सभी ने हिम्मत रखी है। चलो थोड़े रह भी गये, लेकिन आप सब तो साथी हो ना। पक्के साथी, दो हाथ उठाओ। यह फोटो निकालो सबका। अच्छा। डबल विदेशी भी उठा रहे हैं।
तो बापदादा आपको पदम पदमगुणा मुबारक दे रहे हैं, होली की, हो ली मनाने की। अभी गलती से भी अपने मुख से यह शब्द नहीं निकालना। मेरा संस्कार, रावण के संस्कार को मेरा कहते हो, कमाल है! रावण को दुश्मन कहा जाता है, दुश्मन का खजाना अपना बनाना यह तो आश्चर्य की बात है! आपको भी आश्चर्य लग रहा है ना कि क्या कहते हैं! गलती से कह देते हो। कह देते हैं फिर अन्दर में दिल खाती भी है, महसूस भी करते हैं, बाप से बातें भी करते, माफी भी लेते हैं। बाबा कल से नहीं करूंगी, करूंगा। फिर भी कर देते हैं। अभी बापदादा क्या करे? देखता रहे? अभी इस शब्द की होली जला लो। देखो जलाने में भी एक बहुत अच्छी बात बताते हैं, कोकी को धागा बांधकर पकाते हैं, तो जब कोकी पक जाती है और निकालते हैं तो कोकी पक जाती लेकिन धागा नहीं जलता है। यह निशानी भी आपने जो पहला पाठ पढ़ा है कि आत्मा अविनाशी है और शरीर विनाशी है, उसकी बना दी है। तो बापदादा देखते हैं कि यह त्योहार या शास्त्र बनाने वाले बच्चों की भी कमाल कम नहीं है। हैं तो वह भी बाप के बच्चे ही लेकिन आप हो सिकीलधे। तो भल उसमें आटे में नमक है लेकिन बनाया बड़ा रमणीक है। आप देखो हर त्योहार का यादगार बनाया है, लेकिन कई बातें जो सूक्ष्म हैं उसको स्थूल रूप दे दिया है। लेकिन यादगार तो बनाया है ना! भक्ति में भी कम तो नहीं किया, भक्ति ने द्वापर कलियुग में फिर भी कुछ न कुछ स्मृति की बातें रखी, अति विकारी बनने से बचाया। तो बापदादा यह सामग्री, त्योहार या शास्त्र बनाने वालों को भी उनका फल देता है। फिर भी भक्ति में कुछ तो याद करते हैं, विकारों से थोड़े टाइम के लिए बच जाते हैं।
तो आपने आज कौन सी होली मनाई? कौन सी होली मनाई? हो ली, सब कहो हो ली। ऐसे करो (हाथ का इशारा) हो ली। पक्का है ना! मनाया? मनाया? अच्छा। फिर कल माया आयेगी, क्योंकि माया भी सुन रही है लेकिन आप ऐसे नहीं करना। (अपनी ओर नहीं बुलाना) मजा है ना, इसमें मजा है ना। तो मजे में रहना।
बाप को याद रखना तो बाप हमें कितना रूहानी रंग डाल रहा है, जिससे आप होलीहंस बन गये। होलीहंस अर्थात् निर्णय शक्ति वाले होली हंस। कोई भी काम करो ना, तो एक सीट फिक्स कर लो, पहले उस सीट पर सेट हो फिर निर्णय करो, वह सीट जानते हो, वह सीट है त्रिकालदर्शी की सीट। पहले त्रिकालदर्शी की सीट पर सेट हो तीनों कालों को देखो, सिर्फ वर्तमान नहीं, आदि मध्य अन्त, तीनों कालों को देखो, तीनों काल में फायदा है या नुकसान? कई बच्चे बड़े चतुर हैं। चतुराई सुनाऊं? क्या कहते हैं, इस काम को चलाना था ना, इसीलिए काम चला लिया। बाकी मैं समझती हूँ, समझता हूँ करना नहीं चाहिए लेकिन कर लिया। लेकिन कर लिया तो कर्म का फल तो मिलेगा ना! तो चतुराई नहीं करना, बाप को भी बहुत रिझाते हैं। गलती करते हैं ना फिर बापदादा को ऐसी ऐसी बातें सुनाते हैं - बाबा आप तो रहमदिल हो ना! आप तो क्षमा के सागर हो ना! बाप को भी याद कराते हैं तो आप कौन हो! आपने कहा है ना, मेरे को सुनाके खत्म कर दो। लेकिन महसूसता से सुनाके खत्म कर लो। एक अक्षर पक्का करते हो, सुना तो देते हो लेकिन पहले दृढ़ संकल्प से स्व को परिवर्तन करके फिर सुनाओ। रिझाते बहुत हैं, आपने कहा है ना! बाप को भी याद दिलाते हैं - आपने यह कहा है ना, आपने यह कहा है ना। बड़ी चतुराई करते हैं। अभी चतुराई नहीं करना, हिम्मत रखना। करना ही है, गे गे नहीं करना।
बापदादा सारे दिन में गे गे के गीत बहुत सुनते हैं। करेंगे, दिखायेंगे, बनेंगे, लेकिन स्पीड क्या? गे गे वाले बाप के साथ चलेंगे? बाप तो एवररेडी है और गे गे वाले एवररेडी तो नहीं हुए। तो बाप के साथ कैसे चलेंगे? देखते रहेंगे, बाप के साथ जा रहे हैं। बाप को एक-एक बच्चे से पदमगुणा प्यार है। बाप नहीं चाहते कि मेरे बच्चे और साथ नहीं चलें। जब घर लौटने का समय आ गया है तो क्या घर नहीं चलेंगे? क्योंकि घर जाके फिर राज्य में आना है। घर नहीं चलेंगे साथ में तो ब्रह्मा बाप के साथ राज्य में भी नहीं आयेंगे, पीछे आयेंगे। तो आपका वायदा क्या है? साथ चलेंगे या आ जायेंगे.. इसमें भी गे गे लगायेंगे। पहुंच जायेंगे, देखना बाबा जरूर पहुंच जायेंगे। तो यह भाषा अभी समाप्त करो।
आज बापदादा ने वतन में भी होली मनाई, किसके साथ? आप तो अभी मनायेंगे। एडवांस पार्टी वालों के साथ होली मनाई। एडवांस पार्टी है ना, नाम ही एडवांस पार्टी है। तो बापदादा ने एडवांस होली मनाई। जानते हो क्या होली मनाई? सभी एडवांस पार्टी वाले नये वा पुराने, आजकल के गये हुए महारथियों को भी आप याद करते हो ना, उन्हों को भी इमर्ज किया क्योंकि अभी जाने वाले जो भी हैं उन्होंने बचपन से लेके यानी काफी समय से अपना सेवा का पार्ट बजाया। आप भी उन साथियों को याद तो करते हो ना! जगह तो भरनी पड़ती है ना। तो आज वतन में मम्मा, दीदी और दादी, त्रिमूर्ति को विशेष सभी के संगठन के बीच खड़ा किया और साथी तो थे लेकिन इन तीनों को विशेष पार्ट से खड़ा किया और इन्हों को याद दिलाया, याद है भी। लेकिन इन्हों को गुप्त रूप में सेवा करनी पड़ती है। अमृतवेले यह भी वतन में इमर्ज होते हैं और सेवा पर जाते हैं। जो विशेष आत्मायें हैं, उन्होंने सेवा छोड़ी नहीं है। वतन में अमृतवेले इन्हों का फिक्स है आना, अपने असली ब्राह्मण जीवन में इमर्ज होना और चारों ओर कोई न कोई सेवा अर्थ मन्सा सेवा, मन्सा से मन और बुद्धि द्वारा आत्माओं के मन और बुद्धि को आकर्षण करने की विशेष सेवा करते हैं। तो बापदादा ने आज इन त्रिमूर्ति से पूछा कि आप क्या कर रहे हो?
बाप जानता तो है फिर भी पूछता है ना। तो इन्होंने कहा कि हम दो प्रकार से प्रेरणा देते हैं, एक हलचल मचाने वालों को भी और दूसरा नये सृष्टि के निमित्त बनने वालों को भी क्योंकि हम इन्तजार कर रहे हैं। तो मम्मा ने कहा कि हमें तो बहुत टाइम हो गया है इन्तजार करते। तो हमारी सखियों से पूछना कि क्या अभी तक इन्तजार कराना है या कुछ इंतजाम करना है! तो मम्मा की या दादी दीदी की सखियां तो बहुत बैठी हैं, सखे भी बैठे हैं। साथ रहने वाले भाई भी हैं, बहिनें भी हैं तो उन्हों का प्रश्न है तो इन्तजार करना हमारा काम है, आपका एडवांस स्टेज वालों का क्या पार्ट है? हम तो इन्तजार कर रहे हैं आपका काम है इन्तजाम करना, हमारा काम है इन्तजार करना। तो कब डेट फिक्स करेंगे? आप सब बाबा के बच्चे जब समान सम्पूर्ण बनेंगे तब इन्तजाम होगा। तो दीदी ने कहा कि मेरी तरफ से एक प्रश्न सभी से पूछना। दीदी ने क्या कहा? आप सभी जानते भी हो, कहते भी हो एवररेडी। तो सम्पन्न और सम्पूर्ण बनने में एवररेडी हो? और दादी ने क्या कहा? आज रूहरिहान चल रही थी। दादी ने कहा तो मेरे से जब भी कोई मिलता था तो देखा, सब मेरे को कहते भी थे कि दादी आपको तो कर्मातीत, कर्मातीत बनना है यही तात लगी हुई है। हम भी तो साथ में चलेंगे ना। तो अभी भी मैं अपने साथियों को यही कहती हूँ कि कर्मातीत बनना ही है कब? कब को अब में कब बदली करेंगे? तो बाप तो मुस्कराते रहते हैं। तो आज पहले इन्हों की रूहरिहान चल रही थी और भी सभी उन्हों को साथ देते थे, मम्मा यह बहुत अच्छा कहा, दीदी आप थोड़ा फोर्स भरो ना और दादी को कहते थे तो दादी आपने तो सभी को साथ दिया। बाबा के अव्यक्त होते जो आपने पार्ट बजाया, हम सभी के दिलों में दादी की यह बात याद है, तो और साथी जो उन्हों के थे, तो कहा दादी अभी आपकी बात को याद करके, चलो बाप अव्यक्त है, शिव बाबा निराकार है, वह अव्यक्त फरिश्ता है। लेकिन दादी तो साकार में थी, तो अभी आपने जो सोचा था वह करके तो दिखावें। दादी जैसी जिम्मेवारी तो लेके दिखावें। मतलब तो आज दिल खोल के रूहरिहान कर रहे थे। सुना। अभी क्या करना है?
होली तो मनाई ना! कल की बातें भी गई, तो अगले जन्म की बातें क्या सोचना। तो सभी चिटचैट कर रहे थे ना तो बापदादा ने होली मनाना शुरू कर दी। सभी सफेद ड्रेस में थे और वतन में तो फरिश्ते रूप में थे। तो बापदादा ने अचानक ही बताया नहीं कि होली मना रहे हैं लेकिन सभी अर्ध चन्द्रमा के रूप में बैठे हुए थे, खड़े नहीं थे, बैठे हुए थे। 4-5 लाइने थी और कायदेसिर बैठे थे छोटे फिर बड़े, फिर और बड़े। तो बापदादा ने क्या किया? अचानक ही 7 रंगों के हीरे, जानते हो ना, उसको पाउडर किया। पाउडर के रूप में सभी के ऊपर डाला तो एक तो फरिश्ता ड्रेस चमक रही थी और उसके ऊपर 7 रंगों का पाउडर गिराया, फैल गया। तो आप इमर्ज करो कि चमकती हुई ड्रेस में जब 7 रंगों का पाउडर फैल गया होगा तो कैसी ड्रेस लगती होगी? सतयुग में भी ऐसी ड्रेस नहीं मिलेगी। तो सभी चमक गये। और यह ड्रेस चमक गई ना तो दीदी नशे में चली गई। जैसे यहाँ नशे में जाती थी ना, तो नशे में जाकर सभी एक दो पकड़ करके डांस करने लगे। फिर बाबा ने जो मधुबन में आप गेवर (मिठाई) बनाते हो ना, तो वतन में गेवर इमर्ज कराये। मधुबन से तो आये नहीं थे, तो गेवर सभी को खिलाया। तो सभी ने बहुत मौज से मनाया। तो आप भी जैसे भिन्न-भिन्न ड्रेस बदली करते हो ना, वैसे बीच-बीच में सारे दिन में ऐसे फरिश्ता ड्रेस बदली करके यह भी टेस्ट लो। बस 5 मिनट के लिए, 10 मिनट के लिए इमर्ज करो - मैं फरिश्ते रूप में हूँ, वस्त्र बदली किया, साधारण से फरिश्ते रूप की ड्रेस पहनी और बापदादा कभी ज्ञान का, कभी शक्तियों का, कभी गुणों का रंग डाल रहे हैं। फरिश्ता ड्रेस में फरिश्ता बनके 5-10 मिनट अनुभव करो फिर वस्त्र बदली कर दो। कर्मयोगी हैं ना। तो यह दिन में जब भी टाइम मिले, फरिश्ते की ड्रेस पहन लो और बाप द्वारा यह रंग लग रहे हैं, यह अनुभव करो। तो जब अभी से फरिश्ता ड्रेस की प्रैक्टिस करेंगे ना, तो ड्रेस पहनने से नशा चढ़ेगा और मदद मिलेगी फरिश्ता बनने में। तो होली की यह सौगात बापदादा चारों ओर के बच्चों को दे रहे हैं। ड्रेस पहनते ट्रायल करते रहना, भूलना नहीं। फरिश्ता ड्रेस होली की सौगात दे रहे हैं। तो बीच-बीच में यह अभ्यास करना। सहज है ना! ड्रेस बदलना तो आता है ना। आता है? आता है ना! जैसे यह ड्रेस बदलते हो ना, रोज़ बदलते हो ना। तो फरिश्ता ड्रेस भी बदलके देखो। कितनी सुन्दर, कितनी चमकती हुई है। सुना।
आज वतन का समाचार सुनाया। आप सब भी याद करते हो ना! एडवांस पार्टी के अपने सभी साथियों को, क्योंकि कोई न कोई स्थान से भिन्न-भिन्न गये हुए हैं। तो गये हुए को याद तो करते हो ना! बापदादा भी अमृतवेले विशेष एडवांस पार्टी से सेवा कराते हैं क्योंकि सारी दुनिया तो सोई हुई होती है और यह ड्रेस बदलके वतन में आ जाते हैं। सुना। अभी क्या करेंगे? यह ड्रिल भूलना नहीं। वस्त्र बदली करना, दिन में जितना बार फरिश्ता ड्रेस में बैठ सको, चाहे 3 मिनट बैठो लेकिन बैठो जरूर, बदली करो जरूर, अभी से संस्कार डालो, फरिश्ता बनने के बिना देवता बन नहीं सकते। अच्छा।
सभी चारों ओर के बच्चों को भी बापदादा देख रहे हैं कि दूर बैठे भी साइंस के साधन द्वारा मैजारिटी स्थानों में सेन्टर्स पर वह भी बापदादा को देखते रहते हैं, आप टोली खाते हो ना तो वह भी टोली बांटते हैं। तो सभी को बापदादा भी देख रहे हैं कि कैसे दूर बैठे नजदीक का अनुभव कर रहे हैं। तो चारों ओर के बच्चों को जो सदा बाप समान सम्पन्न और सम्पूर्ण बनना है, इस संकल्प को धारण किये हुए हैं और दृढ़ता का बल समय प्रति समय इस संकल्प को देते रहते हैं, ऐसे चारों ओर के शुभ संकल्प धारण करने वाले, साथ-साथ बाप की आशाओं को पूर्ण करने वाले आशाओं के सितारे, साथ-साथ दादी के बोल, कर्मातीत होना ही है, होना ही है, होना ही है... और मम्मा के यह बोल कि सदा जो करना है सो आज करो, कल पर नहीं छोड़ो, और दीदी के यह बोल अब घर चलना है, यह कानों में गूंजना चाहिए। बार-बार अब घर चलना है। तो धुन लगा दो - कर्मातीत होना है, अब घर चलना है। यह बोल बार-बार स्मृति में लाने वाले समर्थ आत्माओं को बापदादा का होली बच्चों को होली की मुबारक हो, और साथ में सभी को बापदादा पहले ही मधुबन के गेवर के पहले सभी मुख खोलो और गेवर खाओ, खाया, तो सभी को बहुत-बहुत पदमगुणा बापदादा और एडवांस पार्टी के सर्व बच्चों का यादप्यार और बाप की नमस्ते।
यू.पी.बनारस और पश्चिम नेपाल की सेवा का टर्न है:- यू.पी. के साथ, मोहिनी बहन उठो। अच्छा है, यू.पी. में विशेषता क्या है? जब आदि में सेन्टर खुले तो यू.पी. का सेन्टर विशेष था। बापदादा मम्मा पहले-पहले यू.पी. के सेन्टर पर रहे हैं। और यू.पी. में ज्ञान नदियों का भी सम्मेलन है। बड़े में बड़ी गंगा नदी, जमुना दिल्ली में है और यू.पी. में गंगा नदी है, गंगा नदी का गायन क्या है? पतित पावनी। तो यू.पी. वालों को सदा यही लगन होगी पतित पावनी बन, पतित आत्माओं को कुछ न कुछ अंचली देने की। अभी यू.पी. में सेन्टर बढ़ रहे हैं ना। बढ़े हैं? आदि में तो रौनक रही है। समर्पण युगल यू.पी. से आरम्भ हुए। तो अभी भी यू.पी. कोई नया कार्य करके दिखाओ। यह फंक्शन, यह सम्मेलन यह तो होंगे, होते रहेंगे लेकिन कोई नया कुछ करके दिखाओ। सभी ज़ोन सोचते हैं कुछ करके दिखायें। दिल्ली वाले भी सोच रहे हैं ना! अच्छा है। कुछ न कुछ करते रहो, जो ब्राह्मण संसार में कोई न कोई खबर छपती रहे, आपकी भी तो अखबारे हैं ना। तो कोई नया समाचार अखबारों में आना चाहिए। बाकी यज्ञ सेवा में यू.पी. भी कम नहीं है। अच्छी संख्या आई है। बापदादा खुश है। टीचर्स भी काफी हैं लेकिन कौन सी टीचर्स? बापदादा का जानती हो कि ऐसी टीचर्स जो अपने फीचर्स चलन और चेहरे से सभी को फ्यूचर दिखाये। अभी का फ्यूचर क्या है? फरिश्ता। भविष्य का फ्यूचर देवता। तो हर एक टीचर अभी का फ्यूचर जो फरिश्ता है, चलो देवता तो भविष्य में बनेंगे लेकिन जो लास्ट घड़ी का स्वरूप है फरिश्ता, वह फीचर्स अर्थात् चलन और चेहरे से स्पष्ट दिखाई दे। जैसे शुरू-शुरू में जब आप सेवा में गये, 14 वर्ष तपस्या और बापदादा माँ की पालना का साथ लिया, तो पहले शुरू में जब सेवा में गये तो आप कोई कोई सेवाधारी आत्माओं से जिज्ञासु को कभी लाइट का ताज और कभी मस्तक में चमकता हुआ बिन्दू, यह दिखाई देता था और परखने की शक्ति आप में बहुत तीव्र थी, कोई भी आसुरी स्वभाव वाला आता था, क्योंकि कुमारियां नाम था ना, लेकिन उसकी चाल नहीं चलती थी, इतनी ताकत थी जो वह स्वयं पांव पर गिरकर कहते थे कि हमने क्या सोचा और आप कौन हो! यह पवित्रता का जो चमत्कार था वह प्रत्यक्ष चलन में, स्वप्न तक था। अपवित्रता का स्वप्न मात्र भी नहीं था, था, है नहीं कहते हैं था। अब फिर से अपने साथियों में यह लाइट माइट की दृढ़ता लाते रहो। इज़ी नहीं। समझते तो हो सभी, टीचर्स निमित्त हो ना बाबा की तरफ से और बापदादा को टीचर्स छोटी चाहे बड़ी उनके लिए दिल में बहुत प्यार है क्योंकि बाप के कार्य में सहयोगी हो। निमित्त हो, सहयोगी हो। चारों ओर सभी स्टूडेन्ट के सामने साकार रूप में आप टीचर्स हो। अव्यक्त रूप में बापदादा है और एडवांस पार्टी भी आपको सकाश देती रहती है, जब अमृतवेले वतन में आती हैं तो सखियों को भी याद करती हैं, सेन्टर्स को भी याद करती हैं। तो यू.पी. सबसे नम्बरवन बनना है, बन रहे हैं। कमाल करेंगे। करनी ही है।
स्पार्क और साइंस इंजीनियर विंग की मीटिंग है:- अच्छा मीटिंग्स तो आप लोग करते रहते हो और अच्छा उमंग-उत्साह से करते हो यह बापदादा देखता और सुनता भी रहता है। धारणा के प्लैन भी बनाते रहते हो। बापदादा ने समाचार सुना। सभी अपनी स्व उन्नति और सेवा के प्लैन नये-नये भी बनाते रहते हो। अभी यही लक्ष्य रखना है कि दुनिया वालों को अभी दिलासा देने की आवश्यकता है। वह बिचारे सरकमस्टांश को देख भयभीत हो रहे हैं। डर फैल रहा है। तो ऐसे समय पर आपको विशेष तो सारी आत्मायें आपकी हैं, लेकिन विशेष आप अपने वर्ग को दिलासा दिलाओ कि आप अगर मेडीटेशन का कोर्स करेंगे तो आपका यह डर वा टेन्शन समाप्त हो जायेगा और ज्ञान पहले नहीं दो, लेकिन मेडीटेशन करो और कराओ, उसका निमंत्रण दो, टेन्शन फ्री लाइफ का अनुभव करने का प्रोग्राम ज्यादा करो। करते हो लेकिन अभी ज्यादा करो उन्हों को आध्यात्मिक शक्ति का अनुभव कराओ। सिर्फ भाषण नहीं लेकिन अनुभव कराओ भले छोटे-छोटे ग्रुप को कराओ, बड़े ग्रुप को कराओ लेकिन अनुभव कराओ। अनुभव वाला व्यक्ति कभी रह नहीं सकता। और अनुभव की अथॉरिटी नम्बरवन है। अनुभव वाला किसी के बहकावे में नहीं आ सकता। समस्या में घबरा नहीं सकता क्योंकि मेडीटेशन से शक्ति अनुभव होती है। तो मेडीटेशन की टैम्पटेशन ज्यादा अनुभव कराओ। बाकी प्रोग्राम तो करते रहते हो। वह तो चलते रहेंगे और चलाओ लेकिन यह विशेष ध्यान दो। कोई भी आता है, कोर्स करता है, लेकिन कोर्स के बीच में अनुभव किया या सिर्फ नॉलेज ली। अनुभव जरूर कराओ। किसी भी बात का, चाहे ज्ञान के हिसाब से परमात्म ज्ञान है, यह अनुभव हो, योग द्वारा अपने में शक्तियों की अनुभूति हो, हिम्मत आवे, कोई भी बात की समस्याओं को हल करने की हिम्मत आवे और धारणा की हिम्मत आवे, नहीं तो धारणा सुन करके घबरा जाता है। पहले प्राप्ति सुनाओ, प्राप्ति क्या होती है, प्राप्तियों की आकर्षण से सभी शुरू कर देते हैं। परमात्मा का परिचय भी देते हो तो पहले प्राप्तियां क्या होती हैं वह सुनाओ तो प्राप्तियों के आधार से आकर्षित होते हैं। क्या मिलेगा, क्या बनेगा, कैसे समस्यायें आपके लिए सहज हो जायेंगी, ऐसी-ऐसी अनुभव की बातें सुनाओ। बाकी आपस में मिलते हो, बापदादा के पास रिपोर्ट आती है, बापदादा खुश है कि यह भी संगठन में मेल होता है, ब्राह्मणों को भी रिफ्रेशमेंट मिलती है। मिलते हैं ना आपस में, कुछ न कुछ राय तो देते ही हैं। तो दोनों वर्ग अच्छा कर रहे हो और आगे भी करते रहेंगे। यह बापदादा को खुशी है। अच्छा।
डबल विदेशी भाई बहिनें 80 देशों से आये हैं:- इस बारी जो डबल फारेनर्स ने भिन्न-भिन्न प्रोग्राम बनाये हैं युगलों का, टीचर्स का... युगल हाथ उठाओ जो युगल आये हैं। बापदादा ने देखा युगल तैयार तो अच्छे हो गये हैं। लेकिन बाबा की जो आशा है उसको पूर्ण नहीं किया है। कौन सी आशा है? कोई महामण्डलेश्वर को चरणों में झुकाओ क्योंकि आप लोग सहज उनको फेल कर सकते हो। आप कहते हो हो नहीं सकता और हमने सहज किया है। अपने अनुभव की अथॉरिटी से उन्हों को झुका सकते हो तभी गीता का भगवान भी सिद्ध होगा। युगलों में यह ताकत है वह जब ढीले हो जायेंगे ना फिर सब बातें मानने लगेंगे। तो बापदादा को अच्छा लगता है, युगल बहुत कमाल कर सकते हैं, क्यों? अभी भी किया है, जब से युगल-युगल चलते रहते हो, पुराने भी हो गये हो तो यह देख करके सुन करके कितनी संख्या बढ़ गई है। एक काम तो किया है, उमंग उत्साह लोगों में बढ़ाया है कि हम भी कर सकते हैं, घरबार छोड़ना नहीं पड़ेगा, डरते हैं ना छोड़ने से। लेकिन आपने छोड़ा नहीं, बनाया है। कुछ छोड़ा है? सफेद ड्रेस पहनी, रंगीन पहनने की मना नहीं है लेकिन स्कूल की भी तो ड्रेस होती है ना। बाकी तो कोई मना नहीं है। तो युगल बहुत कमाल, चैलेन्ज कर सकते हैं। ऐसा प्रोग्राम बनाओ। देखें कौन से युगल तैयार होते हैं। पहले तो ट्रायल करो, कोई ऐसा कनेक्शन वाला हो, उससे ट्रॉयल करके देखो। फिर एक ढीला हुआ तो और भी बन जायेंगे। तो बापदादा को अच्छा लगता है, युगलों का सम्मेलन अच्छा लगता है।
अभी फारेन की ट्रेनिंग वाली टीचर्स उठो:- अच्छा टीचर्स समझती हो कि ट्रेनिंग मिलना अच्छा है? जो समझते हैं कि यह जरूरी है, अच्छा है वह ऐसे हाथ उठाओ। तो मुबारक है, निमित्त टीचर्स को। क्योंकि मेहनत अच्छी की है और डायरेक्ट सेवा यह करेंगी और पुण्य आप निमित्त वालों को मिल जायेगा। यह अच्छा है, नई-नई टीचर्स बनती जाती हैं, यह भी ड्रामा में पार्ट है। फारेन में देखो कितने नये-नये सेन्टर्स खुलते रहते हैं तो बहुत खुशी की बात है, कि ट्रेनिंग लेके आप जो आने वाले हैं उन्हों को भी जल्दी से जल्दी उड़ाने के निमित्त बनेंगे। बापदादा सभी फारेनर्स को एक तो मुबारक देते ही हैं कि जॉब भी करते और सेन्टर भी सम्भालते, सब ताली बजाओ। वैसे टीचर बनके सेन्टर चलाना यह भी बहुत बड़ा भाग्य है, कॉमन चीज़ नहीं है क्योंकि टीचर बनना अर्थात् वर्तमान बाप की गद्दी के मालिक बनना, वह है मुरली सुनाना। मुरली द्वारा आत्माओं को रिफ्रेश करना। बापदादा टीचर्स को गुरूभाई कहते हैं क्योंकि मुरली सुनाने के तख्त के अधिकारी बनते हो। निमित्त बनते हो। फायदा भी है और कायदा भी है। दोनों है। लेकिन बापदादा खुश है कि आप अपने रूचि से टाइम निकालके आये हो। ट्रेनिंग करना यह बापदादा को बहुत पसन्द आता है। तो बहुत अच्छा किया जो इतने सबने ट्रेनिंग किया। निमित्त हो और निमित्त का फल बहुत बड़ा पुण्य का खाता जमा होता है। निमित्त भाव नहीं छोड़ना, ‘मैं' नहीं लाना। ‘मैं' यह सांप है, काला सांप। हप कर लेता है। निमित्त हूँ, करावनहार करा रहा है, चलाने वाला चला रहा है। और कम्बाइन्ड रहना। अकेले नहीं बनना। अकेले बने, माया को दरवाजा खोला। बापदादा खुश है, मुबारक दे रहे हैं। अच्छा। सभी फारेनर्स कुछ न कुछ हर साल करते रहो। अच्छा है। सर्विस के प्लैन भी बनाते रहते हैं। एक दो को उमंग उत्साह बढ़ाते रहना, यह सबसे बड़ी सेवा है। बापदादा ने देखा कि निमित्त टीचर्स जिन्होंने ट्रेनिंग कराया, वह उठो। यह भी अच्छा। (चारले भाई से) भाई सबमें चांस लेते हैं यह बहुत अच्छा। बापदादा आपके सेवा की रिजल्ट देख करके खुश है। सभी की सूरत से उमंग उत्साह लग रहा है, यह बहुत अच्छा है।
अभी सभी को होली की सौगात क्या देनी है, वह याद है? याद है ना! बापदादा का एक-एक बच्चे से स्पेशल प्यार है, ऐसे नहीं कि सिर्फ निमित्त बनने वालों से लेकिन एक-एक बच्चा कोटों में कोई तो है ही, लास्ट नम्बर भी कोटों में कोई है। तो जो कोटों में कोई है वह तो महान हो गया ना। लेकिन कैसा भी कोई हो लास्ट हो, उसके प्रति भी सदा उसको आगे बढ़ाने के लिए एक तो एक दो को स्वमान की दृष्टि से देखो, हर एक का स्वमान है, लास्ट नम्बर का भी स्वमान है, कोटों में कोई है। प्रेजीडेंट से तो अच्छा है। पहचाना तो है, मेरा बाबा तो कहता है। तो स्वमान में रहो और सम्मान दो। एकता, लास्ट नम्बर भी एक बाबा का बच्चा है। बाबा को सामने लाओ, उसकी गलती को सामने नहीं लाओ। परिवार का है, उसमें उमंग लाओ, उत्साह लाओ, चलो गलतियां भी करते हैं, बापदादा को मालूम है क्या क्या गलतियां करते हैं, वह छिपती नहीं हैं, लेकिन हर एक अपने आपसे पूछे मैं ब्रह्माकुमारी, ब्रह्माकुमार बना क्यों, लक्ष्य क्या? जो लक्ष्य रखके आये, सिर्फ अपने को बचाने का नहीं, दालरोटी मिल रही है, संगठन अच्छा है, ब्राह्मण जीवन में खिटराग से सेफ हो गये..., इस लक्ष्य से नहीं आये। लक्ष्य बहुत अच्छा ले आये लेकिन अभी कहाँ-कहाँ लक्ष्य और लक्षण में अन्तर आ गया है। बापदादा को सब पता है सिर्फ नाम नहीं लेते, कभी वह भी समय आयेगा। जो करता है, बापदादा ने देखा कि मैजारिटी संगदोष में बहुत आते हैं। दिल भी खाती है, करना नहीं चाहिए लेकिन संग का रंग, बाप के संग का रंग कम लगा है इसीलिए वह रंग लग जाता है। बापदादा फिर भी सभी बच्चों को प्यार देकर कहते हैं कि अपना वर्तमान और भविष्य निर्विघ्न बनाओ। संगदोष में नहीं आओ। संगदोष में आ जाते हैं, टैम्पटेशन है, संगदोष में नहीं आओ। हद की प्राप्तियों के आकर्षण में नहीं आओ क्योंकि बापदादा को तरस पड़ता है कि कहता है मेरा बाबा, कहता है मेरा बाबा और करता क्या है? इसलिए आज होली का दिन है ऐसी-ऐसी बातें समझदार बनके जला दो। फिर भी टूलेट के बोर्ड से आगे बदल जाओ, बापदादा मदद करेगा लेकिन सच्ची दिल को। साफ दिल मुराद हांसिल, करके देखो दिल से। सच्ची दिल और मुराद हांसिल नहीं हो, हो नहीं सकता। होली में रंग लगाते हैं ना उल्टा सुल्टा भी लगा देते हैं। तो आज होली मनाओ, उल्टे रंग को बाप के रंग में रंग लो। अच्छा। आज होली है ना तो बापदादा ने भी कह दिया है, तरस पड़ता है।
दादियों से:- आज एडवांस पार्टी ने गेवर इमर्ज किया। आपको भी खिलाया। दीदी तो बहुत उमंग में थी, दादी भी। जिम्मेवार रही है ना। तो अभी भी जिम्मेवारी तो याद आती है। अच्छा है।
निर्मलशान्ता दादी से:- अपनी सूरत से बाप की मूर्त दिखाती रहती हो। आपको देख के सभी को ब्रह्मा बाप याद आता है। अच्छा है। अपनी तबियत को सम्भालके चला रही हो बहुत अच्छा। (परदादी का होली पर अलौकिक बर्थ डे है) अच्छा बर्थ डे है, सारे पुण्य जमा किया है। अच्छा परदादी का बर्थ डे है। (बापदादा ने फूलों की माला पहनाई, खुश बहुत रहती है) यही पुरानों की विशेषता है, आदि रत्न हैं ना तो घबराते नहीं हैं, खुश रहते हैं।
शान्तामणि दादी से:- कोई न कोई सेवा करते रहते। चाहे मुरली सुनाने की, चाहे सभी से मिलने की करती रहती हो और करती भी रहेंगी। मूर्तियां हैं यह भी।
बृजमोहन भाई से:- दिल्ली का प्रोग्राम जो बनाया है वह अच्छा बना है और अच्छा रहेगा।
रमेश भाई से:- आपस में जो मिलते हो वह बहुत अच्छा है, क्योंकि अटेन्शन रहता है अपने पुरुषार्थ का भी और सेवा का भी। जो प्वाइंट्स निकालते हो वह अच्छा है। बापदादा खुश है।
वी.आई.पी ग्रुप के साथ:- आप सभी स्नेही तो हैं ही, सहयोगी भी हैं। स्नेह है ना बाप से और स्नेही समय प्रति समय सहयोगी भी हैं। अब क्या बनना है? स्नेही हो, सहयोगी हो, अभी क्या बनना है? (बच्चा बनना है) अच्छा बच्चा बनना है कि हैं! बच्चा हैं या बनना है? क्या कहेंगे? बच्चा हैं? तो समान बाप बनना है। तो अच्छा है दिल से निकलता है ना मेरा बाबा। अभी धीरे-धीरे अपने को इस सेवा में और थोड़ा पार्ट बढ़ाओ। अपना-अपना काम तो करना है, वह ठीक है, बाबा को पहचाना, यह भी ठीक है, अभी सेवा में, चाहे यज्ञ सेवा, चाहे बाहर वालों की सेवा, इस सेवा के पार्ट को ज्यादा बढ़ाओ। थोड़ा समय ज्यादा देना पड़ेगा क्योंकि आप लोगों को देखके औरों में आपका अनुभव सुनके उमंग आता है। डर उतर जाता है। तो आप सेवा करो।
(कनुप्रिया बहन, जो आस्था चैनल पर प्रोग्राम देती हैं) इसको तो भाग्य मिल गया है, घर बैठे भाग्य मिला है। कितनी आत्माओं को रास्ता बताती हो, वाणी द्वारा सेवा तो करती हो, अच्छा है।
अच्छा। कुछ भी हो लेकिन बाबा के हो। इस स्मृति में आगे बढ़ते जाओ और चेक करो तो दिनप्रतिदिन आगे बढ़ रहे हैं कि वहाँ के वहाँ हैं क्योंकि उन्नति चाहिए ना। तो दिनप्रतिदिन आगे क्या बढ़े, एडीशन क्या हुआ, यह चेक करो। अच्छा। ओम् शान्ति।