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24 Mar 2009
“बापदादा द्वारा मिले हुए खजानों को स्वयं में समाकर कार्य में लगाओ, अनुभव की अथॉरिटी बनो”
24 March 2009 · हिंदी
आज चारों ओर के सर्व खजाने जमा करने वाले सम्पन्न बच्चों को देख रहे हैं। साथ-साथ हर एक बच्चे ने कहाँ तक सर्व खजाने जमा किये हैं, उसकी रिजल्ट देख रहे थे। खजाने तो बापदादा द्वारा बहुत अविनाशी प्राप्त हुए हैं। सबसे पहले बड़े ते बड़ा खजाना है ज्ञान धन, जिससे मुक्ति और जीवनमुक्ति की प्राप्ति हुई है। पुरानी देह और पुरानी दुनिया से मुक्त जीवनमुक्त स्थिति और मुक्तिधाम में जाने की, सभी बच्चों को प्राप्त है। साथ में एक ज्ञान का खजाना नहीं लेकिन योग का भी खजाना है जिससे सर्व शक्तियों की प्राप्ति होती है। साथ-साथ धारणा करने का खजाना, जिससे सर्व गुणों की प्राप्ति होती है। साथ साथ सेवा का खजाना जिससे दुआओं का खजाना, खुशी का खजाना प्राप्त होता है। साथ-साथ सबसे बड़े ते बड़ा खजाना वर्तमान संगमयुग का है, समय का है क्योंकि सारे कल्प में यह संगम का समय अमूल्य खजाना है। इस संगम के समय का एक एक संकल्प वा एक एक घड़ी बहुत अमूल्य है क्योंकि संगम समय पर ही बापदादा और बच्चों का मधुर मिलन होता है और कोई भी युग में परमात्म बाप और परमात्म बच्चों का मिलन नहीं होता। साथ-साथ संगम समय ही है जिसमें बापदादा द्वारा सर्व खजाने प्राप्त होते हैं। खजाना जमा होने का समय संगमयुग ही है और कोई भी युग में जमा का खाता, जमा करने की बैंक ही नहीं है। सिर्फ एक संगमयुग है जिसमें जितना खजाने जमा करने चाहो उतना कर सकते हो और इस संगम समय का जो महत्व है वह यही है कि एक जन्म में अनेक जन्मों के लिए खजाना जमा कर सकते हैं। इसलिए यह छोटे से युग का बहुत महत्व है और खजाने भी बापदादा द्वारा सभी बच्चों को प्राप्त होते हैं। बाप सभी को देते हैं लेकिन खजाने को जमा करने में हर एक बच्चा अपने पुरुषार्थ अनुसार करता है। बाप देने वाला भी एक है और एक जैसा सबको देता है, एक ही समय पर देता है लेकिन धारण करने में क्या देखा कि बाप ने एक जैसा दिया लेकिन धारण करने में हर एक का अपना-अपना पुरुषार्थ रहा क्योंकि खजाने को धारण करने के लिए एक तो अपने पुरुषार्थ से प्रालब्ध बना सकते हैं, दूसरा सदा स्वयं सन्तुष्ट रहना और सर्व को सन्तुष्ट करना, सन्तुष्टता की विशेषता से खजाना जमा कर सकते हो और तीसरा सेवा से क्योंकि सेवा से सर्व आत्माओं को खुशी की प्राप्ति होती है तो खुशी का खजाना प्राप्त कर सकते हो। अपना पुरुषार्थ और सर्व को सन्तुष्ट करने का पुरुषार्थ और तीसरा सेवा का पुरुषार्थ। इन तीनों प्रकार से खजाने जमा कर सकते हो। खजाने जमा करने में विशेष सम्बन्ध-सम्पर्क में आने में एक तो निमित्त भाव, निर्माण भाव, नि:स्वार्थ भाव, हर आत्मा प्रति शुभ भावना और शुभ कामना रखने की आवश्यकता है। अगर सेवा में वा सम्बन्ध-सम्पर्क में यह सब है तो पुण्य का खाता और दुआओं का खाता बहुत सहज जमा कर सकते हैं।
बापदादा सबके पोतामेल देख रहे थे तो क्या देखा? चारों ओर के बच्चों में नम्बरवार देखा। बाप एक है, एक ही समय पर देते हैं लेकिन जमा करने में दो प्रकार के बच्चे देखे - एक बच्चे तो जमा हुआ खजाना खाया, जमा भी किया और खाके खत्म कर देते हैं। दूसरे खाया, जमा किया और जमा करने में अटेन्शन देके बढ़ाया भी। खजाने बढ़ाने का साधन क्या है? बढ़ाने का साधन है जो खजाने मिले वह समय पर जो परिस्थिति आती है उस परिस्थिति अनुसार कार्य में लगाना। जो कार्य में लगाते हैं स्थिति द्वारा परिस्थिति को बदल सकते हैं उसका जमा होता है। जो कार्य में नहीं लगाते तो जमा नहीं होता है। तो हर एक अपने आपसे पूछो कि समय पर अपने प्रति वा दूसरों के प्रति कार्य में लगाते हो! जितना कार्य में लगायेंगे उतना बढ़ता जायेगा क्योंकि कार्य में लगाने से अनुभव होता जाता है। तो अनुभव की अथॉरिटी एड होती जाती है। तो चेक करो अपने आपसे पूछो कि यह सारे खजाने जमा हैं? और बढ़ाने का साधन समय पर कार्य में लगाते हैं? अनुभव की अथॉरिटी बढ़ती जाती है? क्योंकि अथॉरिटीज़ में सबसे ज्यादा अनुभव की अथॉरिटी सबसे ज्यादा गाई जाती है। तो हर एक को अपना खाता बढ़ाना है। चेक करना है क्योंकि अभी समय है चेक करके अभी भी खजाने बढ़ा सकते हो। अभी चांस है फिर चांस भी खत्म हो जायेगा। चाहेंगे खजाना बढ़ायें लेकिन बढ़ा नहीं सकेंगे।
बापदादा ने देखा खजाना मिलता है, खुशी-खुशी से अपने में समाने का प्रयत्न भी करते हैं लेकिन खजाना जब मिलता है, मुरली द्वारा ही खजाने मिलते हैं तो दो प्रकार के बच्चे हैं - एक सुनने वाले और दूसरे हैं समाने वाले। कई बच्चे सुनके बहुत खुश होते हैं लेकिन सुनना और समाना, दोनों में बहुत फर्क है। समाने वाले अनुभवी बनते जाते हैं क्योंकि समाया हुआ समय पर कार्य में लगाते, खजाने को बढ़ाते रहते हैं। सुनने वाले वर्णन करते हैं, बहुत अच्छा सुनाया, बाबा ने बहुत अच्छी बात बोली, लेकिन समाने के बिना समय पर काम में नहीं ला सकते हैं। तो आप सभी चेक करो समाने वाले हैं! थोड़ा भी अगर कम होगा, भरपूर नहीं होगा तो हलचल होगी। लेकिन समाया हुआ फुल होगा तो हलचल नहीं होगी। इसलिए आज बापदादा ने सबके खजाने चेक किया। सुनाया ना - कि दो प्रकार के बच्चे हैं, अभी अपने आपको चेक करो मैं कौन? खजाने को बढ़ाना अर्थात् समय पर कार्य में लगाना। जितना कार्य में लगाते जाते उतना खजाना बढ़ता जाता है क्योंकि जो भी खजाना है, खजाने का मालिक खजाने को कार्य में लाता है, खजाना अपने को कार्य में नहीं लाता। तो आप सभी को सर्व खजाने बाप ने वर्से में दिया है। तो बाप के खजाने को अपना खजाना बनाना यह हर एक को अपना अटेन्शन देना है क्योंकि जितना खजाना भरपूर होगा उतना ही भरपूर अवस्था में अचल अडोल होंगे।
बापदादा यही चाहता है कि एक एक बच्चा सम्पन्न हो, कम नहीं हो क्योंकि यह चांस बाप द्वारा अविनाशी खाता जमा होना, यह सिर्फ अभी हो सकता है। इसीलिए कहा हुआ भी है अभी नहीं तो कभी नहीं। यह संगम समय के लिए ही गायन है। भविष्य में तो जो जमा किया है उसका फल प्राप्त करेंगे लेकिन प्राप्ति का समय सिर्फ अब है। तो हर एक को अपना खाता देखना है। जिसका जितना भण्डारा भरपूर है उसके नयनों से, चलन से, चेहरे से मालूम होता है, उसकी चलन और चेहरा ऐसे लगेगा जैसे खिला हुआ गुलाब का पुष्प। बापदादा हर एक के चलन और चेहरे से देखता रहता कि कितना हर्षित, कितना खुशमिजाज़ रहता है! नयनों से रुहानियत, चेहरे से मुस्कराहट और कर्म से हर एक गुण सभी को अनुभव होता है! तो हर एक अपने आपको चेक करे।
बापदादा की हर एक बच्चे में यही शुभ भावना है कि हर एक बच्चा अनेक आत्माओं को ऐसा खजानों से सम्पन्न बनावे। आज विश्व की आत्मायें सभी यही चाहती हैं कि कुछ न कुछ आध्यात्मिक शक्ति मिल जाए। और आध्यात्मिक शक्ति के दाता आप ब्राह्मण आत्मायें ही हैं क्योंकि होलीएस्ट, हाइएस्ट और रिचेस्ट आप आत्मायें ही हैं। होलीएस्ट भी सब आत्माओं से ज्यादा आप हो। आप आत्माओं की पूजा जैसे विधिपूर्वक होती है, वैसे और किसकी भी नहीं होती। अभी लास्ट जन्म में भी आप आत्माओं की पूजा और कोई भी धर्मपिता वा महान आत्मायें जो निमित्त बनी हैं उन्हों की नहीं है। विधिपूर्वक पूजा भले यादगार बनाते हैं लेकिन विधिपूर्वक पूजा नहीं होती। और आप जैसा खजाना रिचेस्ट इन दी वर्ल्ड, आप ब्राह्मण आत्माओं का एक जन्म का खजाना गैरन्टी है 21 जन्म चलना ही है क्योंकि बाप द्वारा, बाप का वर्सा मिला है। तो जैसे बाप अविनाशी है, वैसे ही बाप द्वारा मिला हुआ खजाना भी अविनाशी हो जाता है। इसलिए रिचेस्ट इन दी वर्ल्ड, होलीएस्ट इन दी वर्ल्ड।
तो सभी अपने को ऐसे विशेष सेवाधारी समझते हो ना! आज के समय अनुसार विश्व की आत्माओं को आवश्यकता किस चीज़ की है, जानते हो ना! आज विश्व को खुशी, शक्ति और स्नेह की आवश्यकता है। आत्मिक स्नेह चाहते हैं लेकिन आप ब्राह्मण आत्मायें अभी समय अनुसार दाता बनो। मन्सा से शक्तियां दो, वाचा से ज्ञान दो और कर्मणा से गुणदान दो। ब्रह्मा बाप ने अन्त में तीन शब्द सभी बच्चों को सौगात में दिये, याद है ना - इन तीन शब्दों को अगर सेवा में लगाओ तो बहुत आत्माओं को सन्तुष्ट कर सकते हो। वह तीन शब्द हैं - निराकारी, निरहंकारी और निर्विकारी। तो मन्सा द्वारा निराकारी, वाचा द्वारा निरहंकारी और कर्मणा द्वारा निर्विकारी। यह तीनों शब्द सेवा में लगाओ। अभी विश्व को आपके शक्ति द्वारा थोड़ा सा दिल का आनंद, सुख की प्राप्ति हो, सब निराश हैं और आप विश्व के लिए आशाओं के सितारे हो और बापदादा सभी बच्चों को बाप के आशाओं के सितारे देखते हैं। सिर्फ उम्मीदों के सितारे नहीं लेकिन आशायें पूर्ण करने वाले आशाओं के सितारे हो।
बापदादा के पास बच्चों का स्नेह सदा पहुंचता है और सबसे सहज पुरुषार्थ कौन सा है? भिन्न भिन्न पुरुषार्थ है लेकिन सबसे सहज पुरुषार्थ स्नेह है। स्नेह में मेहनत भी मुहब्बत के रूप में बदल जाती है। तो बाप के स्नेही बनना अर्थात् सहज पुरुषार्थ करना। स्नेह में आप सभी अपने को स्नेही समझते हैं, कभी कभी नहीं, सदा स्नेही। जो अपने को सदा स्नेह के सागर में समाये हुए समझते हैं, सदा स्नेह के सागर में समाया हुआ। डुबकी लगाने वाले नहीं, समाये हुए। जो अपने को ऐसा स्नेह के सागर में समाया हुआ समझते हैं वह हाथ उठाओ। सदा? सदा शब्द को अण्डरलाइन करो। हाथ उठाओ, सदा, सदा? हाथ तो अच्छा उठाया है। बापदादा हाथ को देखके खुश होते हैं क्योंकि हिम्मत रखते हैं। अगर कुछ कम भी होगा तो याद तो आयेगा कि हाथ उठाया है क्योंकि बापदादा का एक एक बच्चे से अति स्नेह है। क्यों? क्योंकि बापदादा जानते हैं कि यह एक एक आत्मा अनेक बार स्नेही बनी है, अभी भी बनी है और हर कल्प यही आत्मायें स्नेही बनेंगी। नशा है, खुशी है कि हम ही हर कल्प के अधिकारी आत्मायें हैं?
बापदादा ऐसे अधिकारी आत्माओं को देख दिल की दुआयें दे रहे हैं। सदा अथक बन उड़ते चलो। कभी भी अगर कोई परिस्थिति आती है तो स्व-स्थिति को नीचे ऊपर नहीं करो। स्व-स्थिति के आगे परिस्थिति कुछ नहीं कर सकती।
अच्छा, पहली बारी कौन आये हैं, वह हाथ उठाओ। बहुत आते हैं। बापदादा को एक एक बच्चे को देख नाज़ है - वाह मेरे बच्चे वाह! जैसे आप दिल में गीत गाते हो ना आटोमेटिक वाह बाबा वाह! मेरा बाबा वाह! ऐसे ही बाप भी बच्चों के प्रति यही गीत गाते कि वाह हर एक बच्चा वाह! क्योंकि बाप को भी कल्प के बाद आप बच्चे मिलते हो और एक एक विश्व के आगे महान है। तो बाप भी गीत गाते हैं वाह बच्चे वाह! वाह वाह हो ना! वाह! वाह! बच्चे हो ना! वाह! वाह! बच्चे, हाथ उठाओ।
तो सदा यही याद रखो हम वाह वाह! बच्चे हैं। चाहे पुरुषार्थी हैं लेकिन हैं वाह! वाह! बच्चे, बाप के वाह! वाह! बच्चे, बाप के साथ ही चलेंगे। रह तो नहीं जायेंगे ना! बाप तो कहते हैं हर एक बच्चे को स्नेह की गोदी में साथ ले जायें। तो तैयार हो! तैयार हैं? रास्ते में रुक तो नहीं जायेंगे? साथ चलेंगे क्योंकि वायदा है, वायदा तो निभाने वाले हो।
अभी बापदादा यही चाहते हैं कि फरिश्ता रूप अपना इमर्ज करो। चलते फिरते फरिश्ता ड्रेस वाले अनुभव कराओ। बापदादा ने ड्रिल सुनाई ना। वस्त्र बदली करने की आदत तो है ना! तो जैसे शरीर की ड्रेस बदली करते हो, ऐसे ही आत्मा का स्वरूप फरिश्ता, बार-बार अनुभव करो। फरिश्ता की ड्रेस पसन्द है ना! जैसे ब्रह्मा बाप अव्यक्त फरिश्ता रूप में वतन में बैठे हैं ऐसे बाप समान आप सब भी चलते फिरते फरिश्ते रूप में अनुभव करो क्योंकि फरिश्ता रूप होगा तभी देवता बनेंगे। जैसे बाप के तीन रूप याद रहते हैं ना। बाप, शिक्षक और सतगुरू, ऐसे अपने भी तीन रूप याद करो - ब्राह्मण सो फरिश्ता और फरिश्ता सो देवता। यह तीन रूप पक्के हैं ना! कभी ब्राह्मण की ड्रेस पहनो, कभी फरिश्ते की, कभी देवता की। इस तीनों रूप में स्वत: ही त्रिकालदर्शी की सीट में बैठ साक्षी होके हर कार्य करते रहेंगे। तो सभी से बापदादा यही चाहते हैं कि सदा बाप के साथ रहो, अकेले नहीं बनो। साथ रहेंगे तब साथ चलेंगे। अगर अभी कभी कभी रहेंगे तो साथ कैसे चलेंगे! स्नेही, स्नेही को कभी भूल नहीं सकता। सारे दिन में यह अभ्यास करते रहो। अभी अभी ब्राह्मण, अभी अभी फरिश्ता, अभी अभी देवता। अच्छा।
चारों ओर के सर्व बच्चों को जो सदा खजाने से सम्पन्न हैं, सदा अपनी चलन और चेहरे से सेवाधारी हैं क्योंकि आप सबका वायदा है कि हम विश्व परिवर्तक बन विश्व का परिवर्तन करेंगे, तो चलते फिरते भी सेवाधारी सेवा में तत्पर रहते हैं। ऐसे विश्व सेवाधारी विश्व परिवर्तक हर एक को बाप के खजानों से भरपूर करने वाले बापदादा के चारों ओर के बच्चों को बापदादा का यादप्यार और दिल से दुआयें और नमस्ते। अच्छा।
सेवा का टर्न महाराष्ट्र, ज़ोन का है:- (सभी ने नो प्रॉब्लम का ताज पहना हुआ है) अच्छा किया है सभी ने अपने ऊपर ताज लगा दिया है। जैसे नो प्रॉब्लम का ताज लगाया है तो सभी के तरफ से बापदादा यही दुआ दे रहे हैं कि “सदा नो प्रॉब्लम भव''। ऐसे ही हर एक मन-वाणी-कर्म संगठन में सदा नो प्रॉब्लम रहने वाले। प्रॉब्लम सेकण्ड में परिवर्तन हो जाए। प्रॉब्लम के रूप में आये और सम्पन्न स्वरूप में बदल जाये। अच्छा है, सीन देख रहे हो कितनी अच्छी है। संकल्प और श्वांस में नो प्रॉब्लम। तो सभी के तरफ से जो ताजधारी बने हैं उन्हों को बधाई दो, ताली बजाओ। सभी बड़ी स्क्रीन में देखो, देखो कितना अच्छा लगता है। बापदादा एक एक बच्चे को जिन्होंने संकल्प किया है नो प्रॉब्लम अर्थात् बाप समान सदा रहेंगे, इसीलिए बापदादा पदमगुणा बधाईयां दे रहे हैं। अच्छा। नाम ही महाराष्ट्र है। तो महाराष्ट्र अर्थात् महान स्वरूप द्वारा महान सेवा करने वाले। अभी महाराष्ट्र ने कोई बड़ा प्रोग्राम नहीं किया है, बहुत समय हो गया है, कोई विशेष इन्वेन्शन कर महान सेवा का पार्ट बजाने में, बापदादा को याद है कि महाराष्ट्र ने प्रदर्शनी निकालने का अच्छा पार्ट बजाया जो अभी तक भी प्रदर्शनी द्वारा सेवा हो रही है। तो जैसे यह विशेष भाई रमेश बच्चा निमित्त बना, निमित्त बना अभी तक वह यादगार है। ऐसी कोई इन्वेन्शन अभी महाराष्ट्र को करना है। करना है? कोई नई बात करो। जैसे दिल्ली वालों ने हिम्मत रखी है ना, तो सभी को सन्देश दे दें। बड़े मैदान में सन्देश तो दे दें। चाहे अखबार द्वारा, चाहे टी.वी. द्वारा मीडिया द्वारा सन्देश देना ही है, उल्हना नहीं रह जाए। ऐसे कुछ न कुछ करते रहो क्योंकि बिचारी आत्मायें अभी समझती हैं कि आध्यात्मिकता आवश्यक है, शान्ति चाहिए लेकिन विचारों को साधन नहीं मिलता। कोई उमंग-उल्हास दिलाने वाला नहीं मिला है, इसलिए हर एक ज़ोन को कुछ न कुछ करते रहना चाहिए। मधुबन में जैसे कोई न कोई प्रोग्राम चलता रहता है ऐसे कोई न कोई प्रोग्राम चलते रहना चाहिए। चाहे ब्राह्मणों का प्रोग्राम, चाहे सन्देश देने का प्रोग्राम, चाहे अपने उन्नति का नया नया प्रोग्राम करते रहो क्योंकि कोई भी नया प्रोग्राम निकलता है तो बापदादा ने देखा है देश विदेश रूचि से करते हैं।
अच्छा है। करते रहते हो और करते चलो। अच्छा, अभी कोई नया प्लैन बनायेंगे ना? कितने टाइम में बनायेंगे? कितना मास चाहिए तैयारी में? आपस में मीटिंग करना, तारीख फिक्स करना क्योंकि देहली और बाम्बे दोनों स्थानों में महारथी, सर्विसएबुल अच्छे अच्छे हैं और अभी हर एक ज़ोन में भी देखा है कि सर्विसएबुल बच्चे बढ़ते जाते हैं। सर्विस के प्लैन करने वाले अथॉरिटीज़ बहुत हैं। चाहे छोटा ज़ोन है, चाहे बड़ा लेकिन सर्विसएबुल बन गये हैं इसीलिए अभी धूम मचाओ। एक ऐसा प्रोग्राम बनाओ जो सभी ज़ोन में एक साथ हो और मीडिया द्वारा एनाउन्स हो, फलाने फलाने स्थान पर एक ही प्रोग्राम चल रहा है, हर एक ज़ोन में और अखबार में डाला जाए तो इस इस स्थान में प्रोग्राम हो रहा है। सारे स्थानों की एड्रेस और टॉपिक, टॉपिक एक ही हो। एक ही समय हो, एक ही टॉपिक हो, जहाँ भी जायें यही टॉपिक देखें। यह हो सकता है ना! हो सकता है? विदेश में भी इसी तारीख पर यही प्रोग्राम। तो चारों ओर एक जैसा हो। (इस वर्ष की थीम रखी है - परमात्मा के वरदानों को प्राप्त करना) यह टॉपिक तो अच्छी है, कुछ भी आपस में फाइनल करो। आपस में मिलके डेट, टापिक और एडवरटाइज कैसे हो, यह बनाके दो। जो भी टापिक रखेंगे, पहले से ही बापदादा को पसन्द है। अच्छा है क्योंकि अभी इच्छुक हैं, पहले सुनते थे तो दूर भागते थे, अभी चाहते हैं कि कुछ सुनें। वी.आई.पी भी इन्ट्रेस्ट लेते हैं। अभी एक ही आवाज फैले। चारों ओर जहाँ भी जायें तो यही सुनें। अच्छा है, चारों ओर देखा जाता है कि वृद्धि भी अच्छी हो रही है, ब्राह्मण बढ़ रहे हैं। अभी नम्बरवार हैं लेकिन बापदादा यही चाहते कि नम्बरवन बनें। नम्बरवार नहीं नम्बरवन। अच्छा है। महाराष्ट्र कोई नई इन्वेन्शन निकालके सेवा में एक नवीनता का आवाज फैलायेगा। अच्छा है। बापदादा को बहुत-बहुत महारथी सर्विसएबुल बच्चे दिखाई दे रहे हैं। टीचर्स भी अच्छे अन्दाज में अपना-अपना सेवाकेन्द्र सम्भाल रही हैं इसकी मुबारक हो और पदमगुणा बापदादा दुआयें दे रहे हैं।
धार्मिक विंग, स्पोर्ट विंग:- अच्छा। यह झण्डी हिला रहे हैं। अच्छा है। अभी खेल वाले ऐसा कोई खेल निकालो जो खेल खेल में सन्देश मिल जाए। जैसे आजकल इन्डिया खेल में नम्बर ले रहा है, ऐसे आध्यात्मिक खेल ऐसे निकालो जैसे समाचार में आया था कि अमेरिका में पंतग उड़ाने के बहाने से सर्विस अच्छी हो गई और अभी भी गवर्मेन्ट चाहती है कि इस विधि से लोगों को सन्देश मिल जाए। ऐसे ही ऐसा कोई खेल तैयार करो जो चारों ओर खेल में सन्देश मिल जाए। समझा। ऐसा खेल तैयार करो।
ट्रांसपोर्ट के अधिकारी बापदादा को सामने बैठे हैं - आजकल इन्डिया में ट्रांसपोर्ट की हालत बहुत खराब है, रोज़ एक्सीडेंट होते रहते हैं तो एक्सीडेंट से बचे कैसे, उसके लिए कोई ऐसा प्लैन तैयार करो जो चलाने वाले सावधान रहें। ऐसी कोई विधि निकालो जो चलाने वाले को सिखाने से, सुनाने से उन्हों का मन शीतल हो जाए, एकाग्र हो जाए। थोड़ा विस्तार से चारों ओर यह सेवा करनी पड़ेगी क्योंकि आजकल इसकी आवश्यकता है। और बढ़ता ही जाता है। तो ऐसे बढ़ने वाले कार्य को परिवर्तन का प्रैक्टिकल स्वरूप दिखाओ गवर्मेन्ट को। तो इस कार्य करने से कैसे फर्क हुआ है। आजकल प्रैक्टिकल देखने चाहते हैं। तो ऐसा ग्रुप तैयार करो जो चलाने वाले ड्राइवर ऐसा कोई कर्तव्य करके दिखावे, गवर्मेन्ट के आगे एक्जैम्पुल तैयार करके दिखाओ, तभी सभी का अटेन्शन जायेगा। कोर्स कराते हो, प्रोग्राम भी करते हो लेकिन ऐसा ग्रुप तैयार करके दिखाओ जो एक्सीडेंट करने वाले परिवर्तन हो गये। जैसे शराब पीने वालों को बदलके दिखाते हो ना, ऐसे एक्सीडेंट करने वाले परिवर्तन हो करके दिखायें ऐसा ग्रुप गवर्मेन्ट के आगे लाओ। अभी बापदादा ने देखा गांव वाले जो सब्जियां वगैरा पैदा करते हैं वह बिना खराब चीजें (हानिकारक दवाईयाँ व खाद आदि) डालने के योगबल द्वारा सब्जियां तैयार करते हैं और गवर्मेन्ट को प्रैक्टिकल मिसाल दिखाते हैं। बापदादा ने सुना यहाँ आबू में भी प्रैक्टिस की है तो यह ऐसा ऐसा प्रूफ गवर्मेन्ट को दिखाना चाहिए। जो गवर्मेन्ट की प्रॉब्लम है ना उसमें उन्हों को सहयोग मिले, फायदा मिले। ऐसे हर एक विंग प्रैक्टिकल प्रूफ तैयार करो। सुनते हैं कि ऐसा हो रहा है लेकिन प्रैक्टिकल प्रूफ वाला ग्रुप जो है वह गवर्मेन्ट के आगे लाओ। हर एक वर्ग ने सेवा अच्छी की है, सेवा की वृद्धि हुई है और सब बिजी भी हो गये हैं लेकिन अभी बापदादा हर एक गवर्मेन्ट के डिपार्टमेंन्ट में प्रूफ दिखाने चाहते हैं। एक एक मिनिस्ट्री में कोई न कोई सबूत होना चाहिए। जैसे हार्ट का प्रूफ है ना। कईयों की हार्ट बिना आपरेशन के, बिना दवाईयों के ठीक हुआ है, ऐसे हर एक वर्ग अपना प्रूफ दिखाये। अच्छा। ऐसा खेल तैयार करना। बापदादा भी देखेगा।
बापदादा देखेगा कौन सा वर्ग ऐसा ग्रुप तैयार करके बाप के आगे रिपोर्ट देंगे। हर एक मिनिस्ट्री में होना चाहिए। अगर एक एक मिनिस्ट्री में प्रूफ होगा तो आटोमेटिकली यह खबर एक दो से पहुंचती है। और गवर्मेन्ट के पास हर एक डिपार्टमेंट में सेवा के लिए पैसे भी बहुत हैं लेकिन प्रैक्टिकल में यूज़ नहीं होता है। सहयोग दे सकते हैं। लेकिन प्रूफ चाहिए। जैसे गांव वालों को गवर्मेन्ट ने मदद देकरके सैलवेशन दी है। हर एक वर्ग वाले ऐसे दिखायें। दो चार गांव तो तैयार किये हैं ना। अच्छा।
डबल विदेशी:- यूथ ग्रुप भी हैं, हाथ उठाओ। अच्छा। डबल विदेशियों ने मधुबन में अपनी और अपने साथियों की उन्नति के प्रोग्राम अच्छे बनाये हैं और रिजल्ट भी बापदादा ने सुने। तो सभी अच्छा मधुबन के वायुमण्डल में रिफ्रेश होके जाते हैं और टीचर्स भी अच्छी प्यार से मेहनत कर रही हैं। तो डबल विदेशी स्वयं भी लाभ ले रहे हैं और औरों को भी लाभ दिला रहे हैं। यह समाचार बापदादा ने सुना है और रिजल्ट भी सुनी है। अच्छा है। अभी बापदादा डबल विदेशियों द्वारा चाहे यूथ, चाहे टीचर्स, चाहे बच्चों का भी जो करते रहते हैं, वह सुना। लेकिन अभी विदेशियों द्वारा एक प्रोग्राम ऐसा भारत में हो जो वी.आई.पी हर शहर के विशेष-विशेष सम्बन्ध सम्पर्क वाले वी.आई.पी का इन्डिया में प्रोग्राम हो। वी.आई.पी का। हर एक देश में कोई न कोई वी.आई.पी तो होते हैं, तो विशेष जो मुख्य देश है, उनमें जो भी सम्पर्क वाले वी.आई.पी हैं, ब्राह्मण नहीं वी.आई.पी, ब्राह्मणों का तो बनाया है, वह भी अच्छा है। एक तरफ ब्राह्मणों का चले, एक तरफ वी.आई.पी का चले। जो मीडिया में आवे कि देश विदेश के सम्पर्क वाले भी लाभ ले रहे हैं। बाकी तो सेवा अच्छी बढ़ा रहे हैं, हर टर्न में अनेक देशों के ब्राह्मण इकट्ठे होते हैं यह भी एक ब्राह्मण परिवार के लिए शोभा है। इससे सिद्ध होता है तो विश्व की आत्माओं का इन्ट्रेस्ट है। जैसे अभी मिडिल इस्ट वालों में आवाज अच्छा फैल रहा है। चाहे दूसरे धर्म वाले हैं लेकिन इन्ट्रेस्ट अच्छा है, ऐसे वी.आई.पीज का भी ग्रुप इकट्ठा लाओ तो बहुत अच्छा है। ठीक है ना। अच्छा है। इसने पान का बीड़ा उठाया है, आओ। (डा.निर्मला दीदी को बापदादा ने स्टेज पर बुलाया) बहुत अच्छा। देश विदेश इन्डिया में भी और विदेश में भी दोनों तरफ अटेन्शन दे अपनी जिम्मेवारी सम्भाली है, इसलिए बापदादा को विदेश के ब्राह्मणों के ऊपर नाज़ है, विदेश और देश दोनों की जिम्मेवारी सम्भाली है। बापदादा खुश है।
अभी विदेश वाले हर एक देश में एक ही समय पर एक टॉपिक, सारे विदेश के मुख्य शहरों में फैल जाए कि ब्रह्माकुमारियों का प्रोग्राम हर देश में एक ही समय पर हो रहा है। यह भी आपस में मिल करके प्रोग्राम बनाना। देश में भी विदेश में भी। पसन्द है ना! अच्छा। विदेश वाले बापदादा को एक बात में अच्छे लगते हैं, कौन सी बात में मैजारिटी, मिक्स तो होते ही हैं लेकिन मैजारिटी अपने दिल में कोई भी बात अगर नियम के विरूध होती है तो स्पष्ट बोलने में स्पष्ट कह देते हैं। ज्यादा टाइम दिल में नहीं रखते हैं, दिल से निकल ही जाता है। इसलिए जो भी बात है वह ज्यादा समय दिल में नहीं रखना। कोई भी कमजोरी को अगर ज्यादा समय दिल में रखते हैं तो फिर संस्कार बन जाते हैं, नेचर बन जाती है, इसलिए यह संस्कार अच्छा है, जो भी कमजोरी आवे वह जल्दी सुनाके परिवर्तन कर लो। और करने में कोई कोई बहुत अच्छे बच्चे हैं जो अपना हाल स्पष्ट सुना देते हैं। तो यह बहुत अच्छी बात है। मिक्स तो होता है लेकिन मैजारिटी। बाकी तो उन्नति हो रही है और उन्नति होती रहेगी। बापदादा खुश है। अच्छा।
दादियों से:- अच्छा चल रहा है और आगे भी अच्छा चलता रहेगा। आपस में मिलते रहो और एक दो के संस्कार को जान, उससे मदद ले आगे उड़ते रहो क्योंकि हर एक में विशेषता अपनी अपनी है, उस विशेषता से काम लेते रहो। ऐसा कोई भी नहीं है निमित्त बने हुए, जिसमें कोई विशेषता नहीं हो लेकिन उसकी विशेषता अनुसार उस एक दो को सहयोग दे आगे स्वयं भी बढ़ते चलो, संगठन को भी बढ़ाते चलो। ठीक है ना। अच्छा है। हर एक की विशेषता को तो जानते हो और हर एक को अपनी अपनी विशेषता को सेवा में लगाना चाहिए। ऐसा कोई भी नहीं है जिसमें कोई विशेषता नहीं हो लेकिन उसकी विशेषता को आगे रखके उससे ही काम लो। बाकी चलना ही है, सफलता तो सदा के लिए बनी हुई है। और हर एक का अपना-अपना पार्ट भी नूंधा हुआ है, सफलता है ही है। आप निमित्त बने, अभी यह इतने सब हैं, एक एक को सफलता का वरदान मिला हुआ है। अपनी विशेषता को संगठित रूप में कार्य में लगाओ। सफलता में एक दो को सहयोग देकरके वायुमण्डल में सफलता फैलाओ। अच्छा है, बापदादा खुश है। खुश है लेकिन अभी संगठन को पक्का करो। आप लोग तो ठीक हैं लेकिन संगठन को और थोड़ा मजबूत करो, उसके लिए कोई प्लैन बनाओ। अभी टाइम बनाओ, यह जरूरी है। जैसे सभी को रिफ्रेश करना जरूरी है तो यह संगठन भी जरूरी है। वह तारीख ऐसी मुकरर करो जो सभी निमित्त जाने आने वालों को उस डेट का पता हो, और कोई भी उस दिन में प्रोग्राम और नहीं बनावे तभी चलेगा। चलो मास में दो बार तो करो। लक्ष्य रखेंगे ना, चाहे बहिनें आपस में करो, चाहे बड़ी मीटिंग करो लेकिन फिक्स करो। प्रोग्राम ही इसी विधि से बनाओ। सुनाया ना कि अपना अपना प्रोग्राम बना देते हैं आने जाने का तो फिर मिस हो जाता है। आने जाने का प्रोग्राम उसी विधि से बनाओ। फिर ठीक हो जायेगा।
तीनों बड़े भाईयों से:- आप लोग जो निमित्त हो चाहे भाई, चाहे बहनें, जो भी निमित्त हैं, वह परिवार निर्विघ्न रहे उसके लिए कुछ टाइम फिक्स करो। अमृतवेले बाप को तो अपना टाइम देते हो और सेवा के प्रति भी टाइम देते हो और खास परिवार की उन्नति के लिए और यज्ञ की कारोबार आगे आगे बढ़ती जाए, गवर्मेन्ट द्वारा चाहे आपस में निर्विघ्न होता जाए उसके लिए अमृतवेले 10 मिनट हर एक को देना है। कोई भी सरकमस्टांश सभी के योग से, सभी के समय देने से ठीक हो सकता है। सभी का एक ही संकल्प हो तभी होगा। अच्छा है बड़ी दिल रखो, आता जायेगा, सोचेंगे ना - यह करूं, नहीं करूं, करूं करूं में टाइम नही गंवाओ। आजकल समय है, अगर आप सभी शुभ भावना का एक संकल्प रखो कि होना ही है तो हो सकता है। यह वरदान है। कायदेसिर भी और दिल बड़ी भी, सिर्फ कायदा नहीं दिल बड़ी रख करके फिर कायदा। सभी का एक ही संकल्प हो, होना है, क्यों-क्या नहीं, होना ही है। तो इस विधि से सब सहज हो जायेगा। बस 10 मिनट, आप सब निमित्त बनी हुई आत्माओं को खास टाइम निर्विघ्न, परिवार निर्विघ्न के प्रति 10 मिनट योग करना है तो सहज हो जायेगा। अभी समय है सहज हो सकता है। सिर्फ हो जायेगा, हो जायेगा...।
दिल्ली में होने वाले प्रोग्राम का समाचार आशा बहन बापदादा को सुना रही हैं: हिम्मत अच्छी रखी है बापदादा खुश है। प्रोग्राम के टाइम हर एक दिल्ली वाला ऐसे समझे हमको मन्सा सहयोग देना है और वायब्रेशन फैलाने हैं चाहे सेन्टर पर रहे लेकिन समझे हम सेवा पर हैं, वह घण्टे अपने को कहाँ भी हो लेकिन समझे हमारी सेवा है तो अच्छा हो जायेगा। (सब कह रहे हैं आपकी कृपा दृष्टि रहे) आप सभी कृपा दृष्टि रखो।
गायत्री बहन से:- आपको बापदादा और सभी का यादप्यार पहुंचता रहा। इसका दिल तो यहाँ था और शरीर वहाँ था।
जर्मनी में रिट्रीट का स्थान बनाना है:- अच्छा है, दिखाओ किसी को, बन जाये तो अच्छा है।
मेहमानों से:- आप मेहमान हैं या महान बन गये? मेहमान तो नहीं समझते ना। महान बनने वाले हैं। महान बनना ही है। यहाँ आना सम्बन्ध में आना अर्थात् आगे बढ़ते ही जायेंगे। आशीर्वाद है ही।
देखो आप यहाँ तक पहुंच गये हो तो किसने भेजा यहाँ, ड्रामा ने आपको यहाँ तक पहुंचाया। अभी यहाँ का देखा, तो दिल में क्या उठता है! हमें सेवा करनी है। आप भी सारे परिवार के साथी हो ना कि साक्षी हो। साक्षी नहीं साथी। तो साथी क्या करते हैं? सहयोग देते हैं। तो सभी कौन हो? स्नेही हो, सहयोगी हो, लकी हो। बापदादा को भी आप सभी को देख खुशी है, क्या खुशी है? कि बिछुड़े हुए बच्चे मिल गये। अभी भूलना नहीं। अपना घर है ना। आपको महसूस हुआ कि अपने घर में आये हैं! तो अपना घर कभी भूलता है? तो भूलेंगे नहीं, आते रहेंगे। जो मिला है वह बांटने के बिना रह नहीं सकते। ठीक है। यह सेवा करते रहते अच्छा है।
जो ऐसे ऐसे हो ना, अपने ही शहर में ऐसा ग्रुप तैयार कर सकते हैं। होना ही है सिर्फ निमित्त बनना। सभी एक दो से लकी हो। यहाँ आना अर्थात् आशीर्वाद मिलना। जो भी सेवा कर सकते हैं, करते चलो।
बीच बीच में सेवा करते रहते हो, यह अच्छा है। आखिर सभी को सन्देश पहुंच जायेगा। निमित्त तो कोई बनेगा, बहुत अच्छा किया। आ गये बहुत अच्छा।
मिडिल इस्ट के भाई बहिनों से:- (अरेबिक भाषा में यह कोर्स कराती है) बहुत अच्छा, बापदादा की दिल से दुआयें मिलती रहती हैं। और इसने भी अच्छा सर्विस का सबूत दिया। जो विशेषता है उस विशेषता को कार्य में लगाया, लगाती रहो। यह वरदान है। ऐसी ऐसी आत्मायें तैयार हो जाएं तो आवाज फैलता जायेगा। बहुत अच्छा। (छोटे बच्चे से) यह भी याद करता है! बाप को याद करता है! यह साथी है। हैण्ड अच्छा है, बाप का सन्देश देने के योग्य आत्मा हो। बहुत कर सकती हो और भी ज्यादा कर सकती हो। यह भी साथी बहुत अच्छा है। एक दो को साथ देते चलो। अच्छा - ओम् शान्ति।