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24 Oct 2010
“समय की रफ्तार प्रमाण अभी विशेष स्वभाव-संस्कार परिवर्तन करने में तीव्रता लाओ, मन्सा द्वारा आत्माओं को भिन्न-भिन्न किरणें दो”
24 October 2010 · हिंदी
आज चारों ओर के परमात्म तख्तनशीन, भृकुटी तख्तनशीन और विश्व के तख्तनशीन बच्चों को देख हर्षित हो रहे हैं। यह परमात्म दिलतख्त सिर्फ आप ब्राह्मणों के लिए ही है। भृकुटी का तख्त तो सबके पास है लेकिन परमात्म तख्त सिर्फ ब्राह्मण आत्माओं के ही भाग्य में है। यह परमात्म तख्त विश्व का तख्त दिलाता है। तो तीनों तख्त के अधिकारी आत्मायें आप ब्राह्मण ही हो। यह परमात्म तख्त कितना श्रेष्ठ है और कोई युग में परमात्म तख्त प्राप्त नहीं होता। यह परमात्म तख्त गाया भी जाता है, परमात्म तख्त के अधिकारी भक्ति मार्ग में भी माला के मणकों के रूप में गाये और पूजे जाते हैं। कोटों में कोई के रूप में गाये जाते हैं। बड़ी भावना से एक-एक मणके को कितनी ऊंची दृष्टि से देखते रहते हैं। तो आप सबको फखुर है ना! है फखुर कि हमारे सिवाए कोई भी इस तख्त का अनुभव नहीं कर सकते हैं? लेकिन आप सब ब्राह्मणों का तो जन्म सिद्ध अधिकार है। आपके लिए यह तख्त गले का हार है। तो इतना नशा रहता है कि भगवान के दिलतख्त के अधिकारी हैं! यह नशा और खुशी सबको सदा स्मृति में रहती है? हम कौन हैं! इसका निश्चय और नशा रहता है?
बापदादा तो ऐसे तीन तख्त के अधिकारी बच्चों को देख खुश होते हैं वाह मेरे श्रेष्ठ अधिकारी बच्चे वाह! बच्चे कहते वाह बाबा वाह! और बाप कहते वाह बच्चे वाह! स्वयं बाप भी ऐसे बच्चों की महिमा गाते हैं। तो नशा है हम कौन हैं? जितना निश्चय होगा उतना ही नशा होगा। और निश्चय का नशा आपके चेहरे और चलन से दिखाई देगा। जिसको निश्चय है उसको नशा जरूर होता है। बापदादा भी अभी हर बच्चे के चेहरे और चलन द्वारा आत्माओं को अनुभव कराने चाहते हैं। वाणी द्वारा तो अनुभव करने लगे हैं, अभी अनुभव करने का कार्य शुरू हो गया है। पहले सुनते थे, सोचते थे अभी आप ब्राह्मण आत्माओं की स्थिति का प्रभाव, अनुभव करने लगे हैं। तो अपने आपको चेक करो कि मैं सारे दिन में कितना समय परमात्म दिलतख्त पर रहता हूँ? क्योंकि यह दिलतख्त विश्व का राज्य प्राप्त कराने का आधार है। तो इस दिलतख्त के आधार से जितना समय आप दिलतख्त के अधिकारी रहते हो उतना ज्यादा समय भविष्य में राज्य घराने में अधिकारी बनते हो। तो चेक करना कि जबसे मैं ब्राह्मण बना हूँ कितना समय दिलतख्तनशीन बना? तख्त पर तो नम्बरवार बैठेंगे लेकिन इसके आधार से सदा राज्य फैमिली में, घराने में अधिकारी बनेंगे। चेक किया है कभी? दिलतख्त से उतर तो नहीं जाते हो? अपना हिसाब निकालना क्योंकि इसके आधार से आप सदा राज्य घराने में आयेंगे। चेक करना कि तख्त को छोड़ कभी मिट्टी में पांव तो नहीं रखते! 63 जन्म के संस्कार अनुसार देहभान रूपी मिट्टी में पांव रखा। एक है देहभान और दूसरा है देह-अभिमान। देह-अभिमान की मिट्टी गहरी है लेकिन देहभान यह भी मिट्टी है। लोग भी कहते हैं जब मनुष्य चला जाता है और जलाते हैं तो यही कहते हैं मिट्टी मिट्टी में मिल गई। तो चेक करो मिट्टी में पांव तो नहीं जाता! देहभान में आना अर्थात् मिट्टी में पांव रखना।
बापदादा ने आप श्रेष्ठ आत्माओं के लिए तीन तख्त दिये हैं क्योंकि लाडले हो ना। सिकीलधे भी हो, लाडले भी हो। तो जो लाडला बच्चा होता है उसको झूले में या गोदी में रखते हैं। मिट्टी में पांव रखने नहीं देते। तो जो तीन तख्त के अधिकारी हैं उन्हों के लिए बापदादा ने कितने भिन्न-भिन्न झूले दिये हैं। कभी शान्ति के झूले में झूलो, कभी सुख के झूले में झूलो, कभी प्रेम के झूले में झूलो। तख्त और झूले इसी में ही पांव रखना है। कई बच्चे पूछते हैं हम भविष्य में कहाँ आयेंगे? क्या बनेंगे? तो बाप कहते हैं जितना समय से आये हो उतने समय में चेक करो कि मेरा पांव जितना समय हुआ है उतना ही समय झूलों में या तख्त पर रहा है? उतना ही भविष्य में रॉयल घराने में रहेंगे। रॉयल प्रजा में भी नहीं आयेंगे, रॉयल घराने में ही आयेंगे। तो यह हिसाब हर एक अपने आप अपना निकालो। दूसरे को नहीं देखना, अपना हिसाब निकालना। हर एक चाहता क्या है? रॉयल घराने, राज्य घराने में ही रहें। तो अब भी जितना समय मिलता है क्योंकि समाप्ति तो अचानक होनी है। तो जब तक समाप्ति हो तब तक अब भी चेक करेंगे तो जितना समय ज्यादा बाप की गोदी में, तख्त पर, झूले में रहेंगे उतना समय रॉयल फैमिली में रॉयल घराने में भाग्य प्राप्त करेंगे।
बापदादा तो हर बच्चे को सारा समय 21 जन्म ही रॉयल घराने में, चाहे सूर्यवंशी चाहे चन्द्रवंशी दोनों युग में रॉयल फैमिली में रहने का अधिकार दे रहा है। लेकिन अधिकार लेना यह हर बच्चे के ऊपर है। ब्रह्मा बाप से प्यार है तो ब्रह्मा बाप का भी आप बच्चों से प्यार है। ब्रह्मा बाप आप बच्चों को साथ-साथ रॉयल घराने में देखने चाहता है। आप क्या समझते हो - ब्रह्मा बाप के आसपास रॉयल घरानों में रहने वाले हो या थोड़ा समय रहेंगे? फिर दूर तो नहीं जाने चाहते ना! सुनाया - आधार है संगमयुग का। बापदादा का बच्चों से इतना प्यार है जो आप सभी कहते हो कि साथ रहेंगे, साथ चलेंगे... अभी ब्रह्मा बाप और ब्राह्मण साथ हैं, चाहे अव्यक्त रूप में हैं लेकिन साथ हैं।
अभी बापदादा ने देखा कि बच्चों को माया भी अब तक छोड़ती नहीं है, उनका भी प्यार है। और आजकल दो रूपों में विशेष माया भी चांस लेती है। दो रूप में आती है - एक व्यर्थ संकल्प और दूसरा कहीं-कहीं कभी-कभी यह भी लहर है जो मैंने किया वा सोचा मैं ही राइट हूँ, मैं कम नहीं हूँ। यह लहर फैली हुई है - मैं ही राइट हूँ, लेकिन जो कनेक्शन में आते हैं या निमित्त बने हुए हैं वह भी आपके विचार को साथ देते हैं? दूसरों की भी वेरीफिकेशन मिलनी चाहिए। यह व्यर्थ संकल्प टाइम वेस्ट करते हैं इसलिए बापदादा रोज़ की मुरली मनन करने के लिए, सेवा करने के लिए होमवर्क में रोज़ देते हैं। अगर मनन करो या मनन करते-करते मगन हो जाओ तो यह रोज़ का होमवर्क मन को बिजी करने का साधन है। सुनना और मनन करना या मगन हो जाना, यह बापदादा रोज़ का होमवर्क इसीलिए देता है। जैसे बच्चों को होमवर्क इतना ज्यादा दे देते हैं जो उनकी बुद्धि करने में बिजी रहे। ऐसे रोज़ की मुरली उसमें चार ही सब्जेक्ट का होमवर्क है। मन्सा का भी है, वाणी का भी है, कर्म का भी अटेन्शन और दिव्यता का इशारा होमवर्क है। तो होमवर्क में बिजी रहेंगे तो व्यर्थ संकल्प के आने की मार्जिन नहीं रहेगी। इस विधि को अपनाते रहेंगे तो व्यर्थ संकल्प स्वत: ही आपसे विदाई ले जायेंगे क्योंकि बापदादा ने देखा, याद की यात्रा पर सभी का नम्बरवार अटेन्शन है, वाचा सेवा में भी अटेन्शन है। लेकिन अभी अपने संस्कार या दूसरों के संस्कार को परिवर्तन करना, यह स्वभाव संस्कार जिसको रॉयल रूप में आप कहते हो नेचर, मेरी नेचर है, भाव नहीं है नेचर है, यह धारणा की सब्जेक्ट अभी भी रॉयल रूप में आती रहती है। तो बापदादा आजकल यही इशारा देते हैं कि जो भी धारणाओं में कमी होती है उसको अभी विशेष अटेन्शन दो।
बापदादा ने पहले भी कहा है कि अभी धारणा में यह मुख्य धारणा का अटेन्शन दो, कोई भी बात हो गई तो चेक करो सेकण्ड में फुलस्टॉप दे सकते हो! कि चाहते फुलस्टॉप हैं लेकिन हो जाता है क्वेश्चनमार्क? फुलस्टॉप नहीं, आधा फुलस्टॉप लगता है और मात्रा बन जाता है। आगे चलकर ऐसे सरकमस्टांश आयेंगे जो आपको सेकण्ड में फुलस्टॉप लगाना पड़ेगा। उस समय क्वेश्चन मार्क, आश्चर्य मार्क को ठीक करने लगो, इतना समय नहीं मिलेगा। सेकण्ड में फुलस्टॉप की आवश्यकता होगी, इसका अभ्यास काफी समय पहले का चाहिए तब समय पर विजयी बन सकेंगे। तो हलचल के समय जब संस्कार, स्वभाव का पेपर हो, उसके लिए अभी से ऐसे समय में अभ्यास करो तो बहुत समय का अभ्यास आगे चल आपका बहुत सहयोगी बनेगा।
तो बापदादा अमृतवेले चक्कर लगाते हैं तो हर एक के पुरुषार्थ को चेक करते हैं। क्या चार ही सब्जेक्ट में पुरुषार्थ तीव्र है वा साधारण है? तो क्या देखा? समय की रफ्तार प्रमाण अभी पुरुषार्थ में सदा तीव्र पुरुषार्थ की आवश्यकता है। तो बापदादा इशारा दे रहा है समय तीव्रगति से समीपता के नजदीक आ रहा है। उस हिसाब से अभी विशेष स्वभाव और संस्कार के परिवर्तन में तीव्रगति चाहिए।
अभी बापदादा सभी बच्चों को समान बनाने चाहते हैं। आपका लक्ष्य भी है बाप समान बनना ही है। इसके लिए सबसे सहज साधन है ब्रह्मा बाप को फॉलो करो। टैली करो, जो भी कर्म करो पहले टैली करो, मिलान करो। ब्रह्मा बाप का यह कर्म या बोल या संकल्प है? कहा भी जाता है पहले सोचो फिर करो। बोलने के पहले तोलो फिर बोलो। तो सुना बापदादा अभी क्या चाहते हैं? आप भी चाहते तो हो, जब रूहरिहान करते हो ना तो बापदादा बहुत मीठी-मीठी बातें सुनते हैं। उमंग की बातें भी बहुत अच्छी करते हो, यह करके दिखायेंगे, यह करना ही है, यह होना ही है! संकल्प बहुत उमंग के होते हैं, लेकिन कर्म तक आने में कुछ बदल जाते हैं, कुछ होते हैं। बाकी बापदादा भिन्न-भिन्न प्रकार की सेवा के प्लैन जो बनाते हो वह सब पसन्द करते हैं। प्रोग्राम्स भी जहाँ तहाँ अच्छे चल रहे हैं लेकिन अभी जितना वाचा द्वारा या भिन्न-भिन्न विधियों द्वारा कर रहे हो, सफलता भी है, बापदादा खुश भी है, सिर्फ अभी मन्सा द्वारा अनेक आत्माओं को सुख की किरण, शान्ति की किरण, खुशी की किरण, प्रेम की किरण पहुंचाना, यह सेवा भी साथ-साथ करो। अपने ही संस्कार परिवर्तन या दूसरों के संस्कार को सहयोग देना, इसमें टाइम कईयों का ज्यादा जाता है। तो मन्सा सेवा द्वारा भिन्न-भिन्न किरणें आत्माओं को देना, इसका अटेन्शन, आगे चलके बहुत आवश्यकता पड़ेगी, उसके ऊपर भी ध्यान देते रहो। जो बच्चे समझते हैं कि यह सेवा मैं करता रहता हूँ, वह हाथ उठाओ। अच्छा, कर रहे हैं, उन्हों को मुबारक है और जो नहीं कर रहे हैं, उनको करना चाहिए क्योंकि आगे चलके सरकमस्टांश ऐसे बनेंगे जो सुनने वाले और सुनाने वाले, दोनों का मेल मुश्किल हो जायेगा इसलिए दोनों सेवा अभी से जितना हो सके उतनी आदत डालो। मन बिजी भी रहेगा तो मनमनाभव होना सहज हो जायेगा। मन बिजी होने से संस्कार स्वभाव को सहज परिवर्तन करने में मदद मिलेगी।
आज खास डबल फारेनर्स के मिलन का दिन है, बापदादा को खुशी है वाह डबल फारेनर्स वाह! बापदादा को खुशी है कि विश्व के कोने-कोने में जो बाप के कल्प पहले वाले बच्चे छिपे हुए हैं तो विश्व की सेवा में डबल फारेनर्स निमित्त बने हैं और बापदादा ने सुना कि हर एक अपनी-अपनी एरिया में, गांव-गांव या शहरों में जो रहे हुए हैं वहाँ तक पहुंचने का प्लैन बनाते रहते हैं, इसकी मुबारक हो, मुबारक हो। नहीं तो जब समाप्ति होनी होगी, हालतें बदलेंगी तो आप सबको चाहे भारत, चाहे विदेश बहुत-बहुत-बहुत उल्हनें मिलेंगे कि हमारा बाप आया और आपने हमें बताया भी नहीं। सन्देश तो देते, बहुत उल्हनें मिलेंगे इसलिए अभी कर रहे हैं और ज्यादा कोई कोना रह नहीं जाये इसका प्रयत्न करना। बाकी बापदादा डबल फारेनर्स या देश वाले दोनों बच्चे जो चारों ओर अपना पुरुषार्थ कर रहे हैं उन्हों को देख खुश है, बहुत बहुत खुश है। क्यों? क्यों खुश है? अभी देश में विदेश में यह प्लैन बना रहे हैं, बापदादा को पसन्द है, किसी भी साधन से सन्देश पहुंचना चाहिए। यह साइंस वास्तव में आप लोगों के लिए समय पर बहुत मददगार है। साधन दिनप्रतिदिन नये नये निकलते रहते हैं, उसको कार्य में निर्विघ्न बन लगाते जाओ। आप जहाँ भी मीटिंग करते हो, सर्विस बढ़ाने की, बापदादा वह सुनते हैं और खुश होते हैं कि बच्चों की बुद्धि अभी आलराउण्ड जा रही है, साधनों को सेवा में लगाने के लिए। इसीलिए जो भी आप प्लैन बनाते हो वह बापदादा सुनते हैं, चक्कर लगाते हैं ना! आप कहाँ भी मीटिंग करो चाहे दिल्ली में करो, देश में, किसी भी शहर में करो, चाहे विदेश में कहाँ भी करो, बापदादा सब सुनते रहते हैं। बापदादा के पास भी साधन है। इसके लिए बापदादा फारेन के एक-एक देश से जो भी आये हैं, हर एक को क्या देते हैं? बहुत-बहुत प्यार दे रहे हैं। सिर्फ अभी थोड़ी तीव्रता लाओ। प्लैन को प्रैक्टिकल में नई नई बातें लाते रहो। देखो आपका यह यज्ञ आरम्भ होने के थोड़े वर्ष पहले यह सब इन्वेन्शन शुरू हुई हैं। साइन्स भी आपकी सेवा की मददगार है। खूब लाभ उठाओ, आपके लिए ही निकली है। दिनप्रतिदिन देखो कितनी नई-नई बातें अभी अभी निकल रही हैं। यह ड्रामा आपको सहयोग दे रहा है। साधन आपको सहयोग दे रहा है। अच्छा।
सभी सदा खुश तो हो ना! सदा खुश हैं? जो सदा खुश रहता है वह हाथ उठाओ, सदा खुश। कोई बात हो जाए तो भी खुश? बातें आती हैं ना, तो भी खुश रहते हो? रहते हो? बड़ा हाथ उठाओ। वेलकम करते हो ना! घबराते नहीं हो, वेलकम करते हो। अनुभवी बनाते हैं। यह विघ्न अनुभव की अथॉरिटी को बढ़ाते हैं। माया आ गई, माया आ गई, यह नहीं कहो, यह पेपर है, माया-माया कहते माया को आगे बढ़ाते हो। पेपर है। माया को तो आप जान गये हो, कितने वर्षों से जान गये हो। माया क्या है? इसलिए माया से घबराओ नहीं, पेपर समझके खुशी-खुशी से पेपर दो और अनुभव की क्लास में आगे बढ़ो। यह क्लास बढ़ाना है, मूंझना नहीं है क्या करूं, कैसे करूं, क्या क्यों, यह ब्राह्मणों का सोचने का काम नहीं है। त्रिकालदर्शी हो, क्या, क्यों, कैसे, यह उठ ही नहीं सकता। पेपर आया अनुभव की क्लास में आगे बढ़े। खुश हो। अभी तो अनुभवी बन गये हो और बनते रहेंगे। अच्छा।
फॉरेन की टीचर्स हाथ उठाओ। टीचर्स माना बाप समान क्योंकि बाप जैसे रोज़ मुरली चलाते हैं, ऐसे आप भी मुरली चलाने के तख्तनशीन हो। तो बाप के साथी हो। तो साथी के स्वरूप में बापदादा आप सभी टीचर्स को, जो भी निमित्त बने हैं चाहे इण्डिया की हो, चाहे फारेन की हो लेकिन सभी टीचर्स को बापदादा खास क्या दे रहे हैं? शाबास बच्चे शाबास! अच्छा।
अभी जो भी आज यहाँ हॉल में बैठे हैं, कहाँ के भी हो लेकिन दुबारा जब मधुबन में आयेंगे, बाप से मिलेंगे तो बापदादा क्या देखने चाहता है? कहें? कोई न कोई जो कुछ पुरुषार्थ में खुद समझो कि यह नहीं होना चाहिए, समझते तो सभी हैं कि यह नहीं होना चाहिए, वह परिवर्तन करके आयेंगे! करेंगे? यह अपने आपको देखना क्योंकि दूसरा कोई देख नहीं सकता। तो यह करने के लिए कौन तैयार हैं? दो-दो हाथ उठाओ। बिन्दी लगा दिया ना। फिर बापदादा उन्हों को चाहे छोटी चाहे मोटी गिफ्ट देंगे। परिवर्तन सेरीमनी मनायेंगे। पसन्द है ना! पसन्द है? अपने-अपने क्लासेज वालों को भी कहना, जितने भी परिवर्तन करें उतना अच्छा है। समय को समीप लायेंगे। अच्छा।
80 देशों से 2200 डबल विदेशी आये हैं:- तो बापदादा हर एक बच्चे को दिल के प्यार की गिफ्ट दे रहे हैं। जो फर्स्ट टाइम आये हैं वह उठो। आप सबको अपने आध्यात्मिक जन्म दिन की मुबारक हो, मुबारक हो क्योंकि आप हर एक परिवार की शोभा हो, श्रृंगार हो। इसीलिए बापदादा यही चाहते कि भले लेट आये हो लेकिन टूलेट के पहले आये हो, इसकी विशेष परिवार को आपके आने की खुशी है। आ गये, हमारे बिछुड़े हुए परिवार के साथी आ गये। अभी समय अनुसार आपको तीव्र पुरुषार्थ करना पड़ेगा। स्लो पुरुषार्थ, ढीला पुरुषार्थ नहीं करना, तीव्र पुरुषार्थ करेंगे तो लास्ट सो फास्ट और फास्ट सो फर्स्ट आ सकते हैं। करेंगे ना! करेंगे? अच्छा है। बहुत-बहुत परिवार की तरफ से, बापदादा की तरफ से बहुत-बहुत-बहुत यादप्यार लेते रहना और बढ़ते रहना। अच्छा।
मीडिया से कनेक्टेड:- अच्छा है मीडिया एक साधन है, साधनों को सेवा में लगाना, यह आपका काम है। बाकी बापदादा ने सुना अच्छी मीटिंग्स की हैं और बापदादा भी चाहता है कि मीडिया द्वारा कोने-कोने में सन्देश पहुंचे। उल्हना नहीं मिले। अच्छा किया, अच्छा करते रहेंगे और चारों ओर आत्माओं को अपने पिता का पैगाम मिलता रहेगा। बापदादा ने देखा जो भी प्रोग्राम चला रहे हो, यह भी चला रहे हैं ना प्रोग्राम। (निज़ार भाई से) यह भी अच्छा है और जो आजकल जगह-जगह पर भविष्य का सन्देश देने के प्रोग्राम बना रहे हो वह भी अच्छे चल रहे हैं, रिजल्ट कुछ न कुछ निकल रही है। मुबारक हो। अच्छा।
जो भी पत्र, फोन, जिन्हों के भी याद प्यार या सन्देश बापदादा के प्रति आये हैं, उन सभी बच्चों को बापदादा अपने नयनों में समाते हुए यादप्यार या सर्विस समाचार या मन का पुरुषार्थ का समाचार दिया है, उन सबको बापदादा मन्सा द्वारा इमर्ज कर सुख की, शान्ति की, खुशी की किरणें दे रहे हैं। चाहे कोई ने यहाँ नहीं भेजा है लेकिन दिल में भी संकल्प किया, वह संकल्प भी बाप के पास पहुंच गया है।
चारों ओर के हिम्मते बच्चे मददे बाप, मीठे-मीठे बच्चों को बापदादा यादप्यार दे रहे हैं। और इस वर्ष कोई न कोई अपने प्रति या सेवाकेन्द्र प्रति या विश्व की आत्माओं प्रति कोई न कोई ऐसा प्लैन बनाना जो सेवा का बल और फल सर्व आत्माओं को प्राप्त हो जाए। चारों ओर के बच्चों को बापदादा का विशेष दिल का याद और प्यार स्वीकार हो। ओम् शान्ति।
मुन्नी बहन से:- अच्छा है यह जन्म दिन सेवा के लिए मनाया। तो सेवा के लिए मनाया है, सेवा का रिटर्न सभी तरफ से आपको सेवा का बल और सेवा का फल मिलता रहेगा। अभी फिनिस करो। बस हो गया। अच्छा मनाया।
दादी जानकी से:- बाप नचा रहे हैं आप नाच रही हो। टाइम पर तो उठाता है ना।
मोहिनी बहन से:- हर एक अच्छे से अच्छा है। (बाबा शरीर का हिसाब कब तक?) जल्दी जल्दी चुक्तू हो रहा है, चुक्तू हो जायेगा। थोड़ा टाइम लगता है, पिछला हिसाब है ना। अभी का तो है नहीं, पिछला है। पिछले को पीछे करते जायेंगे।
दादियों से:- सभी महारथी हैं। अच्छे हैं और अच्छे रहेंगे। रुकमणि दादी से:- (दादी है) हाँ शुरू की है, निमित्त है। परदादी से:- अच्छा है, सबके आगे एक हिसाब किताब हंसी, खुशी से चुक्तू करने का सैम्पुल हो। बीमार नहीं हो, सैम्पुल हो। सब आपको देखकर हिम्मत में आ जाते हैं, आप सैम्पुल हो।
रमेश भाई से:- अपनी तबियत की अभी सम्भाल करना। ऐसे नहीं चलाओ, थोड़ा ध्यान देके टाइम निकालके भी तबियत को थोड़ा ठीक कर दो। जो भागदौड़ की है ना, थोड़ा आराम से तबियत को ठीक कर दो। काम में आगे चलना है। आगे जिम्मेवारी उठानी है, यज्ञ को चलाना है। तो शरीर को ठीक करो, विशेष ध्यान रखो। शरीर तो पुराने हैं। (निर्वैर भाई) यह भी ध्यान तो रखता है। रखना चाहिए, लेकिन सेवा में कोई कमी नहीं रखनी चाहिए। प्रोग्राम ऐसे बनाने चाहिए। ठीक है। (बृजमोहन भाई) तीनों निमित्त हो। तीनों ही निमित्त हैं। अपने को जिम्मेवार समझते हो ना। (रमेश भाई) पेपर को फेस किया इसकी मुबारक हो। बहुत अच्छा पार किया।
डबल विदेशी भाई बहिनों ने बापदादा को गुलदस्ता और माला भेंट की:- यहाँ के थे यहाँ पहुंच गये। बहुत अच्छा। अच्छा पार्ट बजा रहे हो। सभी अपना-अपना पार्ट बजा रहे हैं। अच्छा।
विदेश की बड़ी मुख्य बहिनों से:- यह भी ग्रुप अच्छा है। निमित्त बनके एक दो को सहयोग देते आगे बढ़ रहे हैं। भारत के पक्के हैं ना, अनुभवी हैं इसीलिए निमित्त बने। निर्विघ्न चल रहा है ना। कोई मुश्किल तो नहीं? सेट हो गये हैं। कायदे कानून में भी सेट हो गये हैं। (चक्रधारी बहन से) इसका चल रहा है। बहुत अच्छा। चाहे भारत के हैं, लेकिन जहाँ भी गये हो वहाँ मिक्स हो गये हो। भारत और विदेश का फर्क नहीं है, यह अच्छा है और भारत के अनुभवी होने के कारण हैन्डलिंग भी अच्छी मिलती है। बापदादा खुश है। (भारत में भी सेवा के चांस मिलते हैं) चांस मिलते हैं, एक ही बात है, कहाँ भी सेवा करो। बापदादा खुश है, आगे बढ़ रहे हैं, गांव-गांव में जो बढ़ रहे हो, बहुत अच्छा है। जहाँ सेन्टर नहीं है वहाँ सेन्टर या किसी भी रीति से सन्देश पहुंचाओ। अच्छा - ओम् शान्ति।