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30 Nov 2013
“मुम्बई में गुल्जार दादी जी ने बापदादा को भोग स्वीकार कराया वीडियो कॉन्फ्रेसिंग द्वारा सभी ने पूरा दृश्य देखा फिर सभी के प्रति गुल्जार दादी जी ने बापदादा का सन्देश सुनाया”
30 November 2013 · हिंदी
ओमशान्ति। आप सबकी यादप्यार लेते हुए मैं बाबा के पास वतन में पहुंची। बाबा अपने कमरे में गद्दी पर बैठे थे और मैं जब बाबा के सामने गई तो बापदादा ने बहुत मीठा मुस्कराते मिलन मनाया और कहा आओ मेरे दिल का हार, आज किसकी याद लाई हो? मैंने कहा बाबा आज तो आपके सिकीलधे यू.पी. वाले बच्चे आपसे मिलन मनाने आये हैं। तो ऐसे लगा जैसे बापदादा अपने कमरे में बैठे हुए भी वहाँ नहीं हैं। जैसे बाबा सभी बच्चों को बहुत-बहुत मीठी-मीठी दृष्टि देते मिलन मना रहे थे और बैठे हुए सब बच्चे बहुत-बहुत प्यार से मिलन मना रहे थे। फिर बाबा बोले, सभी बच्चे बापदादा के दिल के हार हो। बाबा जब हर एक बच्चे को दृष्टि दे रहे थे, तो दृष्टि देते हुए ऐसा लगा जैसे बाबा एक-एक को जिसको भी देख रहे हैं ना, उनसे कुछ बोल रहे हैं। हम तो वह नहीं सुन सकी लेकिन बाबा की जो सूरत और मूरत है, वह एक-एक को जैसे गले भी लगा रहे हैं लेकिन गले लगाते हुए जैसे अपने में समा रहे हैं। यह सीन पहले देखी। फिर बाबा बोले, बच्चों का बाप से प्यार और बाप का बच्चों से प्यार यह भी संगमयुग का विशेष भाग्य है। बाप हर बच्चे को देख चाहे लास्ट है, चाहे फर्स्ट है लेकिन बापदादा हर बच्चे को ऐसे देख रहे थे जैसे कोई अपनी चीज़ होती है तो उसको कितने प्यार से देखते हैं, हाथ से ऐसे प्यार करते हैं। ऐसे बाबा भी जैसे एक-एक को दृष्टि द्वारा ही ऐसे प्यार कर रहा था, जैसे रूबरू प्यार कर रहा है और सभी को फीलिंग भी जो आ रही थी, वह यही आ रही थी जैसे बाबा हमसे सम्मुख मिल रहे हैं। सबके नयनों में पानी भरा हुआ था। गिरता नहीं था लेकिन समाया हुआ था। हम भी देख रहे थे, बाबा कैसे एक-एक बच्चे से मिलन मना रहे हैं। उसके बाद बाबा ने बोला, देखो बच्चे संगमयुग पर बाप का पार्ट चल रहा है लेकिन जानने वाले आप सिकीलधे बच्चे हैं और एक-एक को बाबा नम्बरवार ऐसी मीठी दृष्टि दे रहे थे जैसे एक-एक से कुछ बात कर रहे हैं। तो हमने बाबा को कहा बाबा आप तो बातें कर रहे हैं लेकिन हम तो सुनते नहीं। तो बाबा ने कहा, यह जो आये हुए बच्चे हैं ना, उन्हों के दिल का आवाज, दिल की आश बाबा ही जाने। एक-एक बच्चा देखो, बाबा को कैसे देख रहा है। जैसे कोई प्यासी होता है। बाबा बोले, देखो ड्रामा में यह भी नूंधा हुआ था लेकिन हर एक बच्चे के दिल का समाचार बाबा जाने, और कोई नहीं जान सकते। बाबा जाने एक-एक बच्चे के दिल में अभी क्या चल रहा है! बाप खुश भी होता है कि हर एक बच्चे का बाप से कितना जिगरी प्यार है और बाप का तो है ही। बाबा ने कहा देखो, बाबा का प्यार नहीं होता तो आप लोगों को कहाँ से ढूंढ़ा, कोई फारेन से आया है, कोई इन्डिया के भिन्न-भिन्न स्थानों से। सबको बाबा ने ढूंढा ना। तो इतना बाबा का प्यार है जो मेरे बच्चे गुम हो गये थे, उनको ढूंढ करके अपने पास बुला लिया। ऐसे कहते बाबा दृष्टि देते गये, सभी सुनते हुए जैसे प्यार में समाये हुए थे। उसके बाद बाबा ने कहा बच्ची मैंने आये हुए ग्रुप में एक-एक को दृष्टि भी दी है और होवनहार बच्चे कहकरके यादप्यार भी दिया है। बाबा छोड़ता नहीं है, जैसे बच्चे बाबा को छोड़ते नहीं हैं, वैसे बाबा भी बच्चों के प्यार को छोड़ते नहीं हैं और बाबा देख रहा है कि आये हुए जो बच्चे हैं, उन्हों के दिल में डबल बातें चल रही हैं। एक तो प्यार आ रहा है बस बाबा मिला, बाबा मिला, क्योंकि सीन देख रहे हैं। और दूसरी बात यह है कि समझ भी रहे हैं कि हम आये हैं, बाबा कहाँ है, मैं कहाँ हूँ। लेकिन एक-एक का प्यार बाप के दिल में समा गया है। ऐसे बाबा ने बोला फिर मेरे को कहा बच्ची अभी समय हो गया है इसलिए जाना तो होगा ही।
देखो, बाबा ने अपने एक-एक सिकीलधे बच्चे को कहा यह भटठी में आये हैं ना। तो बाबा एक-एक को भट्ठी का तिलक लगाता है। तो बाबा ने तिलक लेके खड़े होकर जैसे एक-एक के मस्तक में वह तिलक लगाया। बाबा ने कहा आपकी भट्ठी का उद्घाटन हो गया। फिर जो नये आये हैं उन्हों को भी बाबा ने विशेष प्यार दिया। आज कौन आये हैं नये! (नये भाई बहिनों को खड़ा किया) नये बच्चे तो बाबा के बहुत सिकीलधे हैं। बाबा उन्हें सिकीलधा, सिकीलधा कहते हैं। तो बाबा ने आप एक-एक बच्चे को बहुत मीठी दृष्टि दी और यादप्यार भी दिया और कहा एक-एक बच्चे को मेरी तरफ से ऐसे (भाकी) करके यादप्यार देना। सभी को बाप की तरफ से भाकी पहन रहे हैं क्योंकि हमने वहाँ देखा, तो मैं यहाँ ही कर सकती हूँ। तो सभी को बाप की तरफ से मीठी मीठी भाकी।
सभी प्यार दे रहे हैं, वह बाबा देख रहे हैं। बाबा के साथ आप भी साथ-साथ याद रहती हैं। मोहिनी बहन आप बहुत अच्छी तरह से अपने को ठीकठाक करके बैठी हैं। हम आपकी तबियत में आगे बढ़ते बढ़ते देख बहुत खुश होते हैं। जिंदा रहो, आबाद रहो।