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5 Apr 2018
"अव्यक्त बापदादा" वीडियो द्वारा रिवाइज महावाक्य"
5 April 2018 · हिंदी
05-04-2018 Avyakt BapDada 05-04-2018
प्राणप्यारे अव्यक्त बापदादा के अति लाडले, सदा अपनी श्रेष्ठ मन्सा द्वारा शुभ भावनाओं की सकाश देने वाले, निमित्त और निर्मान की विधि से सर्व खाते जमा कर, सर्व खजानों से सम्पन्न बनने वाले निमित्त टीचर्स बहिनें तथा देश विदेश के सर्व ब्राह्मण कुल भूषण भाई बहिनें, ईश्वरीय स्नेह सम्पन्न मधुर याद स्वीकार करना जी।
प्यारे बापदादा की इस सीज़न का आज यह लास्ट टर्न है। आप सबकी सूक्ष्म सकाश से हमारी मीठी दादी गुल्जार जी के स्वास्थ्य में थोड़ा सुधार हुआ है लेकिन अभी डाक्टर्स ने मधुबन आने की छुट्टी नहीं दी है। फिर भी बापदादा और मधुबन बेहद घर की आकर्षण पूरे ब्राह्मण परिवार को अपनी ओर स्वत: खींच रही है। आज के इस लास्ट टर्न में लगभग 30 हजार भाई बहिनें अव्यक्त मिलन के लिए शान्तिवन में पहुंचे हुए हैं। जैसे भक्तों ने भावना में आकर कहा है कि कण-कण में भगवान है, वैसे ही अनुभव हो रहा है कि मधुबन के हर कण में बापदादा और महारथी भाई बहिनों के रूहानी स्नेह के शक्तिशाली प्रकम्पन्न चारों ओर वायुमण्डल में फैले हुए हैं, जो आने वाले हर बाबा के बच्चे को स्वत: रिफ्रेश कर रहे हैं। हर ग्रुप में 60-70 प्रतिशत भाई बहिनें पहली बार मधुबन घर में आ रहे हैं। उन्हें महारथी बड़े भाई बहिनों की क्लासेज़, योग के कार्यक्रम और अव्यक्त मिलन की परिवर्तित विधि द्वारा भी बहुत अच्छी रिफ्रेशमेंट मिल रही है, सभी सन्तुष्ट होकर, वरदानों से भरपूर होकर जाते हैं। यह भी कमाल है मीठे बाबा की, जो अव्यक्त-वतन वासी होते भी साकार वतन में गुप्त रीति अपने बच्चों को सूक्ष्म सकाश और सर्व शक्तियों की पालना दे रहे हैं। हर एक के दिल में साकार द्वारा अव्यक्त मिलन की तमन्ना तो सदा ही रहती है लेकिन ड्रामा की भावी। अभी तक इस 2018 वर्ष में प्यारे अव्यक्त बापदादा का साकार मिलन नहीं हो सका है। हम सब बच्चों की यही शुभ उम्मीदें हैं कि हम सबकी मीठी प्यारी दादी जल्दी से जल्दी ठीक होकर मधुबन में आयें और उनकी रूहानी दृष्टि द्वारा हम सब बापदादा की झलक का अनुभव करें।
बाकी अभी के इस ग्रुप में सेवा का टर्न दिल्ली और आगरा ज़ोन का है। देश और विदेश के अन्य स्थानों से भी अनेकानेक भाई बहिनें पहुंचे हुए हैं। सभी अमृतवेले से ही अव्यक्त स्थिति में रह अव्यक्त वतन की सैर कर रहे हैं। इतने सब भाई बहिनें होते हुए भी चारों ओर बहुत अच्छा साइलेन्स का वायुमण्डल है। सब बाबा के प्यार में खोये हुए हैं, सबके दिलों में बाबा की याद समाई हुई है। हर बार की तरह अव्यक्त मिलन की अलौकिक विधियों का क्लास सुनने के पश्चात विशेष बड़ी बहनों ने संगठित योग अभ्यास कराया। फिर प्यारे बापदादा को भोग लगाया गया। भोग के बाद 7 से 8 बजे तक, 18 मार्च 2008 के अव्यक्त महावाक्य सभी ने वीडियो द्वारा सुनें फिर दादियों और वरिष्ठ भाई बहिनों ने अपनी शुभ भावनायें व्यक्त की। आज जो महावाक्य यहाँ सुनाये गये हैं, वह आपके पास भेज रहे हैं। अपने-अपने क्लास को रिफ्रेश करना जी। अच्छा! सबको याद..... ओम् शान्ति।
5-4-18 ओम् शान्ति "अव्यक्त बापदादा" वीडियो द्वारा रिवाइज महावाक्य 18-03-08 मधुबन
आज सर्व खजानों के मालिक बापदादा अपने चारों ओर के खजाने सम्पन्न बच्चों को देख रहे हैं। हर एक बच्चे के खजाने में कितने खजाने जमा हुए हैं, यह देख हर्षित हो रहे हैं। खजाने तो सभी को एक ही समय एक ही जैसे मिले हैं फिर भी जमा का खाता सभी बच्चों का अलग-अलग है क्योंकि समय प्रमाण अभी बापदादा सभी बच्चों को सर्व खजानों से सम्पन्न देखने चाहते हैं, क्योंकि यह खजाने सिर्फ अभी एक जन्म के लिए नहीं हैं, यह अविनाशी खजाने अनेक जन्म साथ चलने वाले हैं। इस समय के खजानों को तो सभी बच्चे जानते ही हो। बापदादा ने क्या-क्या खजाने दिये हैं वह कहने से ही सबके सामने आ गये हैं। सबके सामने खजानों की लिस्ट इमर्ज हो गई है ना! क्योंकि बापदादा ने पहले भी बताया है कि खजाने तो मिले लेकिन जमा करने की विधि क्या है? जो जितना निमित्त और निर्मान बनता है उतना ही खजाने जमा होते हैं। तो चेक करो - निमित्त और निर्मान बनने की विधि से हमारे खाते में कितने खजाने जमा हुए हैं। जितने खजाने जमा होंगे, उतना वह भरपूर होगा। उनके चलन और चेहरे से भरपूर आत्मा का रूहानी नशा स्वत: ही दिखाई देता है। उसके चेहरे पर सदा रूहानी नशा वा फ़खुर चमकता है और जितना ही रूहानी फ़खुर होगा उतना ही बेफिक्र बादशाह होगा। रूहानी फ़खुर अर्थात् रूहानी नशा बेफिक्र बादशाह की निशानी है। तो अपने को चेक करो कि मेरी चलन और चेहरे पर बेफिक्र बादशाह का निश्चय और नशा है? दर्पण तो सबको मिली हुई है ना! तो दिल के दर्पण में अपना चेहरा चेक करो। किसी भी प्रकार का फिक्र तो नहीं है? क्या होगा! कैसे होगा! यह तो नहीं होगा! कोई भी संकल्प रह तो नहीं गया है? बेफिक्र बादशाह का संकल्प यही होगा जो हो रहा है वह बहुत अच्छा और जो होने वाला है वह और ही अच्छे ते अच्छा होगा। इसको कहा जाता है फ़खुर, रूहानी फ़खुर अर्थात् स्वमानधारी आत्मा। विनाशी धन वाले जितना कमाते उतना समय प्रमाण फिकर में रहते। आपको अपने ईश्वरीय खजानों के लिए फिकर है? बेफिक्र हो ना! क्योंकि जो खजानों के मालिक और परमात्म बालक हैं वह सदा ही स्वप्न में भी बेफिक्र बादशाह हैं, क्योंकि उसको निश्चय है कि यह ईश्वरीय खजाने इस जन्म में तो क्या लेकिन अनेक जन्म साथ हैं, साथ रहेंगे। इसीलिए वह निश्चयबुद्धि निश्चिंत हैं।
तो आज बापदादा चारों ओर के बच्चों का जमा का खाता देख रहे थे। पहले भी सुनाया है कि विशेष तीन प्रकार के खाते जमा किये हैं और कर सकते हैं। एक है - अपने पुरुषार्थ प्रमाण खजाने जमा करना। यह एक खाता है। दूसरा खाता है - दुआओं का खाता। दुआओं का खाता जमा होने का साधन है सदा सम्बन्ध-सम्पर्क और सेवा में रहते हुए संकल्प, बोल और कर्म में, तीनों में स्वयं भी स्वयं से सन्तुष्ट और दूसरे भी सर्व और सदा सन्तुष्ट हों। सन्तुष्टता दुआओं का खाता बढ़ाती है। और तीसरा खाता है - पुण्य का खाता। पुण्य के खाते का साधन है - जो भी सेवा करते हैं, चाहे मन से, चाहे वाणी से, चाहे कर्म से, चाहे सम्बन्ध में, सम्पर्क में आते सदा नि:स्वार्थ और बेहद की वृत्ति, स्वभाव, भाव और भावना से सेवा करना। इससे पुण्य का खाता स्वत: ही जमा हो जाता है। तो चेक करो - चेक करना आता है ना! आता है? जिसको नहीं आता हो वह हाथ उठाओ। जिसको नहीं आता है, कोई नहीं है माना सभी को आता है। तो चेक किया है? कि स्व पुरुषार्थ का खाता, दुआओं का खाता, पुण्य का खाता तीनों कितनी परसेन्ट में जमा हुआ है? चेक किया है? जो चेक करता है वह हाथ उठाओ। चेक करते हो? पहली लाइन नहीं करती है? चेक नहीं करते? क्या कहते हैं? करते हैं ना! क्योंकि बापदादा ने सुना दिया है, इशारा दे दिया है कि अभी समय की समीपता तीव्रगति से आगे बढ़ रही है इसलिए अपनी चेकिंग बार-बार करनी है। क्योंकि बापदादा हर बच्चे को राजयोगी सो राजा बच्चा देखने चाहते हैं। यही परमात्म बाप को रूहानी नशा है कि एक-एक बच्चा राजा बच्चा है। स्वराज्य अधिकारी सो विश्व राज्य अधिकारी परमात्म बच्चा है।
तो खजाने तो बापदादा द्वारा मिलते ही रहते हैं। इस खजानों के जमा करने की बहुत सहज विधि है - विधि कहो या चाबी कहो, वह जानते हो ना! जमा करने की चाबी क्या है? जानते हो? तीन बिन्दियां। है ना सभी के पास चाबी? तीन बिन्दियां लगाओ और खजाने जमा होते जायेंगे। माताओं को चाबी लगाने आती हैं ना, मातायें चाबी सम्भालने में होशियार होती हैं ना! तो सभी माताओं ने यह तीन बिन्दियों की चाबी सम्भालकर रखी है? लगाई है? बोलो, मातायें चाबी है? जिसके पास है वह हाथ उठाओ। चाबी चोरी तो नहीं हो जाती है? वैसे घर के हर चीज़ की चाबी माताओं को सम्भालने बहुत अच्छी आती है। तो यह चाबी भी सदा साथ में रहती है ना!
तो वर्तमान समय बापदादा यही चाहते हैं - अभी समय समीप होने के नाते से बापदादा एक शब्द सभी बच्चों के अन्दर से, संकल्प से, बोल से और प्रैक्टिकल कर्म से चेन्ज करना देखने चाहते हैं। हिम्मत है? एक शब्द यही बापदादा हर बच्चे का परिवर्तन कराना चाहते हैं, जो एक ही शब्द बार-बार तीव्र पुरुषार्थ से अलबेला पुरुषार्थी बना देता है और अभी समय अनुसार कौन सा पुरुषार्थ चाहिए? तीव्र पुरुषार्थ और सब चाहते भी हैं कि तीव्र पुरुषार्थियों की लाइन में आयें लेकिन एक शब्द अलबेला कर देता है। पता है वह शब्द कौन सा है? परिवर्तन करने के लिए तैयार हो? हैं तैयार? हाथ उठाओ, तैयार हैं? देखो, आपका फोटो टी.वी. में आ रहा है। तैयार हैं, अच्छा मुबारक हो। अच्छा - तीव्र पुरुषार्थ से परिवर्तन करना है या कर लेंगे, देख लेंगे... ऐसे तो नहीं? एक शब्द जान तो गये होंगे, क्योंकि सब होशियार हैं, एक शब्द वह है कि ‘कारण' शब्द को परिवर्तन कर ‘निवारण' शब्द को सामने लाओ। कारण सामने आने से वा कारण सोचने से निवारण नहीं होता है। तो बापदादा सिर्फ बोलने तक नहीं लेकिन संकल्प तक यह 'कारण' शब्द को 'निवारण' में परिवर्तन करने चाहते हैं क्योंकि कारण भिन्न-भिन्न प्रकार के होते हैं और वह कारण शब्द सोचने में, बोलने में, कर्म में आने में तीव्र पुरुषार्थ के आगे बन्धन बन जाता है क्योंकि आप सभी का बापदादा से वायदा है, स्नेह से वायदा है कि हम सभी भी बाप के, विश्व परिवर्तन के कार्य में साथी हैं। बाप के साथी हैं, बाप अकेला नहीं करता है, बच्चों को साथ लाते हैं। तो विश्व परिवर्तन के कार्य में आपका क्या कार्य है? सर्व आत्माओं के कारणों को भी निवारण करना क्योंकि आजकल मैजारिटी दु:खी और अशान्त होने के कारण अभी मुक्ति चाहते हैं। दु:ख अशान्ति से, सर्व बन्धनों से मुक्ति चाहते हैं और मुक्तिदाता कौन? बाप के साथ आप बच्चे भी मुक्तिदाता हैं। आपके जड़ चित्रों से आज तक क्या मांगते हैं? अभी दु:ख अशान्ति बढ़ते देख सभी मैजारिटी आत्मायें आप मुक्तिदाता आत्माओं को याद करती हैं। मन में दु:खी होके चिल्लाते हैं - हे मुक्तिदाता मुक्ति दो। क्या आपको आत्माओं के दु:ख अशान्ति की पुकार सुनने नहीं आती? लेकिन मुक्तिदाता बन पहले इस ‘कारण' शब्द को मुक्त करो। तो स्वत: ही मुक्ति का आवाज आपके कानों में गूंजेगा। पहले अपने अन्दर से इस शब्द से मुक्त होंगे तो दूसरों को भी मुक्त कर सकेंगे। अभी तो दिन-प्रतिदिन आपके आगे मुक्तिदाता मुक्ति दो की क्यू लगने वाली है। लेकिन अभी तक अपने पुरुषार्थ में भिन्न-भिन्न कारण शब्द के कारण मुक्ति का दरवाजा बन्द है। इसीलिए आज बापदादा इस शब्द के, इसके साथ और भी कमजोर शब्द आते हैं। विशेष है कारण फिर उसमें और भी कमजोरियाँ होती हैं, ऐसे वैसे, कैसे, यह भी इनके साथी शब्द हैं, जो दरवाजे बन्द के कारण हैं।
तो आज बापदादा को आप बच्चों के जमा खाता देखने का संकल्प है। देखा भी है और आगे भी देखेंगे। क्योंकि बापदादा ने पहले ही बच्चों को सूचना दे दी है कि जमा का खाता जमा करने का समय अब संगमयुग है। इस संगमयुग पर अब जितना जमा करने चाहो सारे कल्प का खाता अब जमा कर सकते हो। फिर जमा के खाते की बैंक ही बंद हो जायेगी, फिर क्या करेंगे! इसलिए बापदादा को बच्चों से प्यार है ना। तो बापदादा जानते हैं कि बच्चे अलबेलेपन के कारण भूल जाते हैं, हो जायेगा, देख लेंगे, कर तो रहे हैं, चल तो रहे हैं ना। बड़े मजे से कहते हैं, आप देख नहीं रहे हो, हम कर रहे हैं, चल तो रहे हैं और क्या करें.... लेकिन चलना और उड़ना कितना फर्क है। चल रहे हो, मुबारक है लेकिन अभी चलने का समय समाप्त हो रहा है, अभी उड़ने का समय है, तभी मंजिल पर पहुंच सकेंगे। साधारण प्रजा में आना भगवान का बच्चा और साधारण प्रजा, शोभता है?
जो पहले बारी मिलने आये हैं वह हाथ उठाओ। तो पहले बारी जो बच्चे हिम्मत रखके आये हैं उन्हों को विशेष बापदादा इस संगठन के मौज़ मनाने की मुबारक दे रहे हैं और साथ में विशेष वरदान दे रहे हैं - वह वरदान है अमर भव। यह वरदान सदा अमृतवेले मिलन मनाने के बाद सारे दिन के लिए बार-बार याद रखना। अमर हूँ, अमर बाप का बच्चा हूँ, अमर पद प्राप्त करने वाली आत्मा हूँ। जन्म भले लेंगे लेकिन सुख शान्ति अमर रहेगी। अच्छा।
सेवा का टर्न दिल्ली-आगरा का है:- बापदादा ने देखा है जिस भी ज़ोन को टर्न मिलता है ना वह बड़ी दिल से, खुली दिल से सभी को चांस दिला देते हैं। अच्छा है यह, डबल फायदा हो जाता है। एक है यज्ञ सेवा का और यज्ञ सेवा का पुण्य तो बहुत बड़ा है। एक का लाख गुणा फल मिलता है। यज्ञ की महिमा कम नहीं है। तो जो भी आते हैं उनको बहुत फायदे हैं। तो एक यज्ञ सेवा का पुण्य जमा होता है और दूसरा इतनी श्रेष्ठ आत्मायें मधुबन में ही इकट्ठी मिलती हैं। चाहे पाण्डव हैं, चाहे दादियां हैं, चाहे महारथी बहन-भाई हैं और साथ में इतना बेहद का परिवार कहाँ मिलेगा आपको। सतयुग में भी छोटा परिवार होगा। इतने हजारों का परिवार न सतयुग में मिलेगा, न त्रेता में मिलेगा, न द्वापर, कलियुग में मिलेगा। ऐसा एक परिवार अभी मिल रहा है, यह कभी सुना है! सम्भालना ही मुश्किल हो जाए। लेकिन यहाँ देखो सभी मजे मजे से रह रहे हैं। तो कितना फायदा है! परिवार से मिलना कभी नहीं होता है और यह तो विशेष भगवान का परिवार है।
अच्छा, दिल्ली वालों को दिल्ली में भविष्य राजधानी बनाना है ना। पक्का है ना! तैयार हो ना! तो सभी के लिए बहुत बड़ा परिवार है, सभी आपकी दिल्ली में आयेंगे। आपके साथी बनेंगे। तो तैयारी भी तो करनी है ना। तो तैयारी की है दिल्ली में? आवाह्न किया है सभी को? अभी तो दिल्ली खिटपिट में है। रोज़ खबरें सुनो तो क्या खबरें आती हैं? गड़बड़ सड़बड़। और अब क्या बनेंगी? कौन सी दिल्ली बनेंगी? सोने की दिल्ली बनेगी। सभी को स्थान देंगे ना! सभी को राजधानी में मंगायेंगे ना! तो दिल्ली वालों को पहले दिल्ली को तैयार करना पड़ेगा। तब तो आयेंगे ना सभी। दिल्ली वालों में विशेषतायें हैं। बापदादा ने देखा है कि दिल्ली वालों ने कई सेवाओं की विशेषतायें इमर्ज की हैं। निमित्त बनें हैं। अभी दिल्ली को सोने की दिल्ली बनाने के लिए ऐसा कोई प्लैन बनाओ जो सबके दिल से निकले वाह! निमित्त दिल्ली वाले आपने हमको स्वर्ग का राज्य भाग्य दिला दिया! क्योंकि दिल्ली में ही स्वर्ग बनना है। स्थापना तो वहाँ होनी है। अच्छा है, संगठन भी अच्छा है और सेवा के प्लैन बनाने में भी विशेष आत्मायें हैं।
डबल विदेशी भी आये हैं:- डबल फारेनर्स को बापदादा ने टाइटल क्या दिया? डबल तीव्र पुरुषार्थी। वह तो सदा बापदादा कहते हैं कि डबल फारेनर्स ने बापदादा का, विश्व परिवर्तक का टाइटल सिद्ध किया। नहीं तो सब कहते थे भारत कल्याणी हैं, विदेश के कारण विश्व कल्याणकारी बनें प्रैक्टिकल में। और बापदादा ने देखा है कि हर सीज़न में डबल फॉरेनर्स की संख्या बढ़ती जाती है और विशेष परिवर्तन यह है कि पहले जो यह आवाज निकलता था कि हमारा कल्चर, भारत का कल्चर, अभी यह आवाज नहीं है। परिवर्तन हो गया। अभी सभी का एक ही कल्चर हो गया, ब्राह्मण कल्चर। पसन्द है ना। ब्राह्मण कल्चर पसन्द है? पसन्द है, इसलिए बापदादा को भी आप डबल फॉरेनर्स बहुत-बहुत-बहुत पसन्द हो क्योंकि विशेषता यह है कि अगर कोई भी कार्य करेंगे तो पूरा करेंगे। हिम्मत रख करके हाँ तो हाँ, ना तो ना। इसमें होशियार हैं। अच्छा।
चारों ओर के श्रेष्ठ विशेष होली और हाइएस्ट बच्चों को, सदा स्वयं को बाप समान सर्व शक्तियों से सम्पन्न मास्टर सर्वशक्तिवान अनुभव करने वाले, सदा हर कमजोरियों से मुक्त बन अन्य आत्माओं को भी मुक्ति दिलाने वाले मुक्तिदाता बच्चों को, सदा स्वमान की सीट पर सेट रहने वाले, सदा अमर भव के वरदान के अनुभव स्वरूप रहने वाले, ऐसे चारों ओर के, चाहे सामने बैठने वाले, चाहे दूर बैठे स्नेह में समाये हुए बच्चों को यादप्यार वा अपने उमंग-उत्साह, पुरुषार्थ के समाचार देने वालों को बापदादा का बहुत-बहुत दिल का यादप्यार और दिल की पदम पदमगुणा यादप्यार स्वीकार हो और सभी राजयोगी सो राज्य अधिकारी बच्चों को नमस्ते।