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12 Mar 2018
"यह महावाक्य 12-3-18 को अव्यक्त बापदादा के अवतरण दिवस पर सुनाये गये"
12 March 2018 · हिंदी
12-03-2018 Avyakt BapDada 12-03-2018
प्राणप्यारे अव्यक्त बापदादा के अति स्नेही, सदा अपने दिव्य बुद्धि के विमान द्वारा तीनों लोकों की सैर करने वाले, साकार सो अव्यक्त, सो निराकार की अनुभूतियों में मग्न रहने वाले, सभी प्युरिटी की रॉयल्टी और पर्सनैलिटी वाली सर्वश्रेष्ठ आत्मायें, निमित्त टीचर्स बहिनें तथा सर्व ब्राहमण कुल भूषण भाई बहिनें, ईश्वरीय स्नेह सम्पन्न मधुर याद स्वीकार करना जी।
बाद समाचार - आज प्यारे अव्यक्त बापदादा के अवतरण का दिन है। पूरे ईस्टर्न ज़ोन की सभी नदियां, बंगाल, बिहार, उड़ीसा, आसाम और नेपाल, साथ में तामिलनाडु ज़ोन के हजारों भाई बहिनें प्यारे बापदादा के घर में अव्यक्त अनुभूतियां करने, स्वयं को सर्व शक्तियों, वरदानों से भरपूर करने के लिए पहुंचे हुए हैं। करीब 25 हजार भाई बहिनों की यह अलौकिक सभा है। सभी अमृतवेले से ही अन्तर्मुखी बन अव्यक्त स्थिति का सुन्दर अनुभव कर रहे हैं, बहुत शक्तिशाली वायुमण्डल है। सवेरे दादी जानकी जी ने प्यारे बापदादा की साकार मुरली क्लास में पढ़कर सुनाई तथा सभी को खूब रिफ्रेश किया।
अभी तक हम सबकी अति स्नेही, प्यारे अव्यक्त बापदादा के संग साकार मिलन कराने वाली मीठी दादी गुल्जार जी मुम्बई में स्वास्थ्य लाभ ले रही हैं, फिर भी अव्यक्तवतन वासी मीठा बाबा अपने बच्चों को अपने बेहद घर में अनेकानेक सुन्दर अनुभवों से भरपूर कर रहा है। विधिवत दिनचर्या अनुसार सायंकाल अव्यक्त मिलन की विभिन्न विधियों की क्लास सुनने के पश्चात, बापदादा को भोग स्वीकार कराते हुए सभी ने उसी लगन और एकाग्रता के साथ वीडियो द्वारा अव्यक्त महावाक्य सुने तथा स्वयं को दिव्य वरदानों से भरपूर किया। दादियों तथा वरिष्ठ भाईयों ने भी अपने महावाक्यों से सबको रिफ्रेश किया।
इस बार काठमाण्डू की राज़ दीदी, किरण बहन ने नेपाल सेवाओं की और स्वयं के समर्पण की गोल्डन जुबिली डायमण्ड हाल में 10 मार्च को धूमधाम से मनाई। बहुत सुन्दर सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुतियां दी गई। कल 13 तारीख को कानन बहन जी कलकत्ता म्युजियम की गोल्डन जुबली मनायेंगी। यह भी बाबा के घर में ज्ञान योग की दिव्य पालना के साथ-साथ, अनेक प्रकार के सुहेज मनाते, बेहद परिवार से मिलते-जुलते संगमयुग की अलौकिक मौजों का अनुभव करते सभी उमंग-उत्साह से भरपूर हो जाते हैं। इस ग्रुप में अनेक देशों से करीब 1100 डबल विदेशी भाई बहिनें भी पहुंचे हुए हैं। ज्ञान सरोवर, पाण्डव भवन में उनके लिए भिन्न-भिन्न क्लासेज़, योग की अनुभूतियों के सुन्दर कार्यक्रम चल रहे हैं। यह बाबा का बेहद घर सदा ब्राह्मण बच्चों के उमंग-उत्साह को बढ़ाते, पुरुषार्थ में नवीनता और तीव्रता लाते हुए अनेक सुखद अनुभूतियां करा देता है। आज जो हम सभी ने प्यारे अव्यक्त बापदादा के महावाक्य सुने हैं, वह आप सबके पास भेज रहे हैं। सबको रिफ्रेश करना जी। अच्छा - सभी को याद.... ओम् शान्ति।
यह महावाक्य 12-3-18 को अव्यक्त बापदादा के अवतरण दिवस पर सुनाये गये
रिवाइज: 02-02-08
आज बापदादा चारों ओर के अपने रॉयल्टी और पर्सनालिटी के परिवार को देख रहे हैं। यह रॉयल्टी वा रूहानी पर्सनालिटी का फाउण्डेशन है सम्पूर्ण प्युरिटी। प्युरिटी की निशानी सभी के मस्तक में, सभी के सिर पर लाइट का ताज चमक रहा है। ऐसे चमकते हुए ताजधारी रूहानी रॉयल्टी, रूहानी पर्सनालिटी वाले सिर्फ आप ब्राह्मण परिवार ही हैं क्योंकि प्युरिटी को अपनाया है। आप ब्राह्मण आत्माओं की प्युरिटी का प्रभाव आदिकाल से प्रसिद्ध है। याद आता है अपना अनादि और आदिकाल! याद करो अनादिकाल में भी आप प्युअर आत्मायें आत्मा रूप में भी विशेष चमकते हुए सितारे, चमकते रहते हैं और भी आत्मायें हैं लेकिन आप सितारों की चमक सबके साथ होते भी विशेष चमकती है। जैसे आकाश में सितारे अनेक होते हैं लेकिन कोई कोई सितारे स्पेशल चमकने वाले होते हैं। देख रहे हो सभी अपने को? फिर आदिकाल में आपके प्युरिटी की रॉयल्टी और पर्सनालिटी कितनी महान रही है! सभी पहुंच गये आदिकाल में? पहुंच जाओ। चेक करो मेरी चमकने की रेखा कितनी परसेन्ट में है? आदिकाल से अन्तिम काल तक आपके प्युरिटी की रॉयल्टी, पर्सनालिटी सदा रहती है। अनादि काल का चमकता हुआ सितारा, चमकते हुए बाप के साथ-साथ निवास करने वाले। अभी-अभी अपनी विशेषता अनुभव करो। पहुंच गये सब अनादिकाल में? फिर सारे कल्प में आप पवित्र आत्माओं की रॉयल्टी भिन्न-भिन्न रूप में रहती है क्योंकि आप आत्माओं जैसा कोई सम्पूर्ण पवित्र बने ही नहीं हैं। पवित्रता का जन्म सिद्ध अधिकार आप विशेष आत्माओं को बाप द्वारा प्राप्त है। अभी आदिकाल में आ जाओ। अनादिकाल भी देखा, अब आदिकाल में आपके पवित्रता की रॉयल्टी का स्वरूप कितना महान है! सभी पहुंच गये सतयुग में। पहुंच गये! आ गये? कितना प्यारा स्वरूप देवता रूप है। देवताओं जैसी रॉयल्टी और पर्सनालिटी सारे कल्प में किसी भी आत्मा की नहीं है। देवता रूप की चमक अनुभव कर रहे हो ना! इतनी रूहानी पर्सनालिटी, यह सब पवित्रता की प्राप्ति है। अभी देवता रूप का अनुभव करते मध्यकाल में आ जाओ। आ गये? आना अनुभव करना सहज है ना। तो मध्यकाल में भी देखो, आपके भक्त आप पूज्य आत्माओं की पूजा करते हैं, चित्र बनाते हैं। कितने रॉयल्टी के चित्र बनाते और कितनी रॉयल्टी से पूजा करते। अपना पूज्य चित्र सामने आ गया है ना! चित्र तो धर्मात्माओं के भी बनते हैं। धर्म पिताओं के भी बनते हैं, अभिनेताओं के भी बनते हैं लेकिन आपके चित्र की रूहानियत और विधि पूर्वक पूजा में फ़र्क होता है। तो अपना पूज्य स्वरूप सामने आ गया! अच्छा फिर आओ अन्तकाल संगम पर, यह रूहानी ड्रिल कर रहे हो ना! चक्कर लगाओ और अपने प्युरिटी का, अपनी विशेष प्राप्ति का अनुभव करो। अन्तिम काल संगम पर आप ब्राह्मण आत्माओं का परमात्म पालना का, परमात्म प्यार का, परमात्म पढ़ाई का भाग्य आप कोटों में कोई आत्माओं को ही मिलता है। परमात्मा की डायरेक्ट रचना, पहली रचना आप पवित्र आत्माओं को ही प्राप्त होती है। जिससे आप ब्राह्मण ही विश्व की आत्माओं को भी मुक्ति का वर्सा बाप से दिलाते हो। तो यह सारे चक्कर में अनादिकाल, आदिकाल, मध्यकाल और अन्तिमकाल सारे चक्र में इतनी श्रेष्ठ प्राप्ति का आधार पवित्रता है। सारा चक्कर लगाया अभी अपने को चेक करो, अपने को देखो, देखने का आइना है ना! अपने को देखने का आइना है? जिसको है वह हाथ उठाओ। आइना है, क्लीयर है आइना? तो आइने में देखो मेरी पवित्रता का कितना परसेन्ट है? पवित्रता सिर्फ ब्रह्मचर्य नहीं लेकिन ब्रह्माचारी। मन-वचन-कर्म, सम्बन्ध-सम्पर्क सबमें पवित्रता है? कितनी परसेन्ट में है? परसेन्टेज़ निकालने आती है ना! टीचर्स को आती है? पाण्डवों को आती है? अच्छा होशियार हो। माताओं को आती है? आती है माताओं को? अच्छा।
पवित्रता की परख - वृत्ति, दृष्टि और कृति तीनों में चेक करो, सम्पूर्ण पवित्रता की जो वृत्ति होगी, वह बुद्धि में आ गई ना। सोचो, सम्पूर्ण पवित्रता की वृत्ति अर्थात् हर आत्मा के प्रति शुभ भावना, शुभ कामना। अनुभवी हो ना! और दृष्टि क्या होगी? हर आत्मा को आत्मा रूप में देखना। आत्मिक स्मृति से बोलना, चलना। शार्ट में सुना रहे हैं। डिटेल तो आप भाषण कर सकते हैं और कृति अर्थात् कर्म में सुख लेना सुख देना। यह चेक करो - मेरी वृत्ति, दृष्टि, कृति इसी प्रमाण है? सुख लेना, दु:ख नहीं लेना। तो चेक करो कभी दु:ख तो नहीं ले लेते हो! कभी-कभी, थोड़ा-थोड़ा? दु:ख देने वाले भी तो होते हैं ना। मानों वह दु:ख देता है तो क्या आपको उसको फॉलो करना है! फॉलो करना है कि नहीं? फॉलो किसको करना है? दु:ख देने वाले को या बाप को? बाप ने, ब्रह्मा बाप ने निराकार की तो बात है ही, लेकिन ब्रह्मा बाप ने किसी बच्चे का दु:ख लिया? सुख दिया और सुख लिया। फॉलो फादर है या कभी-कभी लेना ही पड़ता है? नाम ही है दु:ख, जब दु:ख देते हैं, इनसल्ट करते हैं, तो जानते हो कि यह खराब चीज़ है, कोई आपकी इनसल्ट करता है तो उसको आप अच्छा समझते हो? खराब समझते हो ना! तो वह आपको दु:ख देता है या इनसल्ट करता है, तो खराब चीज़ अगर आपको कोई देता है, तो आप ले लेते हो? ले लेते हो? थोड़े समय के लिए, ज्यादा समय नहीं थोड़ा समय? खराब चीज़ लेनी होती है? तो दु:ख या इनसल्ट लेते क्यों हो? अर्थात् मन में फीलिंग के रूप में रखते क्यों हो? तो अपने से पूछो हम दु:ख लेते हैं? या दु:ख को परिवर्तन के रूप में देखते हैं? क्या समझते हो - दु:ख लेना राइट है? है राइट? मधुबन वाले राइट है? थोड़ा-थोड़ा ले लेना चाहिए? दु:ख ले लेना चाहिए ना! नहीं लेना चाहिए लेकिन ले लेते हो। गलती से ले लेते हो। यदि दु:ख की फीलिंग आई तो परेशान कौन होगा? मन में किचड़ा रखा तो परेशान कौन होगा? जहाँ किचड़ा होगा वहाँ ही परेशान होंगे ना! तो उस समय अपने रॉयल्टी और पर्सनालिटी को सामने लाओ और अपने को किस स्वरूप में देखो? जानते हो आपका क्या टाइटल है? आपका टाइटल है सहनशीलता की देवी, सहनशीलता का देव। तो आप कौन हो? सहनशीलता की देवियां हो, सहनशीलता के देव हो या नहीं? कभी-कभी हो जाते हैं। अपना पोज़ीशन याद करो, स्वमान याद करो। मैं कौन! यह स्मृति में लाओ। सारे कल्प के विशेष स्वरूप की स्मृति को लाओ। स्मृति तो आती है ना!
बापदादा ने देखा कि जैसे मेरा शब्द को सहज याद में परिवर्तन किया है। तो मेरा के विस्तार को समेटने के लिए क्या कहते हो? मेरा बाबा। जब भी मेरा मेरा आता तो मेरा बाबा में समेट लेते हो। और बार-बार मेरा बाबा कहने से याद भी सहज हो जाती है और प्राप्ति भी ज्यादा होती है। ऐसे ही सारे दिन में अगर किसी भी प्रकार की समस्या या कारण आता है, तो उसके यह दो शब्द विशेष हैं - मैं और मेरा। तो जैसे बाबा शब्द कहते ही मेरा शब्द पक्का याद हो गया है। हो गया है ना? सभी अभी बाबा बाबा नहीं कहते, मेरा बाबा कहते हैं। ऐसे ही यह जो मैं शब्द है, इसको भी परिवर्तन करने के लिए जब भी मैं शब्द बोलो तो अपने स्वमान की लिस्ट सामने लाओ। मैं कौन? क्योंकि मैं शब्द गिराने के निमित्त भी बनता और मैं शब्द स्वमान की स्मृति से ऊंचा भी उठाता है। तो जैसे मेरा बाबा का अभ्यास हो गया है, ऐसे ही मैं शब्द को बॉडीकान्सेसनेस की स्मृति के बजाए अपने श्रेष्ठ स्वमान को सामने लाओ। मैं श्रेष्ठ आत्मा हूँ, तख्तनशीन आत्मा हूँ, विश्व कल्याणी आत्मा हूँ, ऐसे कोई न कोई स्वमान मैं से जोड़ लो। तो मैं शब्द उन्नति का साधन हो जाए। जैसे मेरा शब्द अभी मैजारिटी बाबा शब्द याद दिलाता है ऐसे मैं शब्द स्वमान की याद दिलाये क्योंकि अभी समय प्रकृति द्वारा अपनी चैलेन्ज कर रहा है।
समय की समीपता को कामन बात नहीं समझो। अचानक और एवररेडी शब्द को अपने कर्मयोगी जीवन में हर समय स्मृति में रखो। अपने शान्ति की शक्ति का स्वयं प्रति भी भिन्न-भिन्न रूप से प्रयोग करो। जैसे साइन्स अपना नया-नया प्रयोग करती रहती है। जितना स्व के प्रति प्रयोग करने की प्रैक्टिस करते रहेंगे उतना ही औरों प्रति भी शान्ति की शक्ति का प्रयोग होता रहेगा।
अभी विशेष अपने शक्तियों की सकाश चारों ओर फैलाओ। जब आपकी प्रकृति सूर्य की शक्ति, सूर्य की किरणें अपना कार्य कितने रूप से कर रही हैं। पानी बरसाता भी है, पानी सुखाता भी है। दिन से रात, रात से दिन करके दिखाता है। तो क्या आप अपने शक्तियों की सकाश वायुमण्डल में नहीं फैला सकते? आत्माओं को अपनी शक्तियों की सकाश से दु:ख अशान्ति से नहीं छुड़ा सकते! ज्ञान सूर्य स्वरूप को इमर्ज करो। किरणें फैलाओ, सकाश फैलाओ। जैसे स्थापना के आदिकाल में बापदादा के तरफ से अनेक आत्माओं को सुख-शान्ति की सकाश मिलने का घर बैठे अनुभव हुआ। संकल्प मिला जाओ। ऐसे अब आप मास्टर ज्ञान सूर्य बच्चों द्वारा सुख-शान्ति की लहर फैलाने की अनुभूति होनी चाहिए। लेकिन वह तब होगी, इसका साधन है मन की एकाग्रता। याद की एकाग्रता। एकाग्रता की शक्ति को स्वयं में बढ़ाओ। जब चाहो जैसे चाहो जब तक चाहो तब तक मन को एकाग्र कर सको। अभी मास्टर ज्ञान सूर्य के स्वरूप को इमर्ज करो और शक्तियों की किरणें, सकाश फैलाओ। अच्छा - अभी किसका टर्न है?
तामिलनाडु, ईस्टर्न और नेपाल:- ईस्टर्न में बहुत नदियां इकट्ठी है। बंगाल, बिहार, उड़ीसा, आसाम, नेपाल, तामिलनाडु, आधी सभा है। इतने योग्य बनाया है, इसकी बहुत-बहुत बधाई हो। देखो, टी.वी. में देखो कितने हैं। बहुत अच्छे अच्छे हैं। हाथ हिलाओ। बहुत अच्छा। बापदादा को खुशी है कि यज्ञ सेवा से कितना प्यार है और कितने पहुंच गये हैं। अभी 5 ही नदियां मिलके कोई नया प्लैन बनाओ। आवाज फैलाने का तो किया, अभी और कुछ करो। बाकी बापदादा को खुशी है, कि 5 ही तरफ की संख्या बहुत अच्छी आई है। इतने यहाँ हैं, वहाँ कितने होंगे, इतनी वृद्धि की है, इसकी सब परिवार को भी खुशी है, बापदादा को भी खुशी है। तो अभी स्व परिवर्तन और सेवा में नवीनता इसकी प्राइज़ लेना। नम्बर लेंगे ना। 5 हैं, और बड़े बड़े हैं छोटे नहीं हैं। कमाल करके दिखाना।
डबल विदेशी भी आये हैं:- डबल विदेशी अर्थात् डबल पुरुषार्थी। बापदादा ने अभी नाम रखा है डबल पुरुषार्थी। डबल पुरुषार्थी हैं? जो समझते हैं वर्तमान समय डबल पुरुषार्थ का लक्ष्य है और कर भी रहे हैं, वह हाथ उठाओ। डबल पुरुषार्थ। डबल? बहुत अच्छा। डबल पर तो ताली बजाओ। अच्छा है। आपको देख करके सब खुशी से आगे बढ़ने का लक्ष्य रखेंगे। और आज देख रहे हैं कि विदेश की जो मेन क्वालिटी है, सर्विसएबुल, नॉलेजफुल, सक्सेसफुल वह पहुंच गई है और मीटिंग भी अच्छी कर रहे हैं। पहली मीटिंग का समाचार तो बापदादा ने सुना कि सभी इन्टरनेशनल हर देश के विशेष आत्मायें मिलकर जो बनाया है वह बहुत अच्छा और सहज एकमत से सहज पास हो गया। तो आप विशेष आत्मायें जो निमित्त बनी उनको बापदादा पदम पदमगुणा मुबारक दे रहे हैं। पुराने पुराने फाउण्डेशन आये हैं। बापदादा को खुशी होती है। पाण्डव भी कम नहीं हैं। पाण्डव भी एक दो से आगे हैं और शक्तियां भी एक दो से आगे हैं। अच्छा।